त्वरित रिवीजन नोट्स
कक्षा: 11वीं जीव विज्ञान
अध्याय: शरीर के तरल पदार्थ तथा परिसंचरण (Body Fluids and Circulation)
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1. परिचय (Introduction)
- परिसंचरण तंत्र (Circulatory System): उच्च श्रेणी के जीवों को अपने सभी कोशिकाओं तक पोषक तत्व, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक पदार्थों को पहुँचाने तथा हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए एक विशेष परिवहन तंत्र की आवश्यकता होती है। इसे परिसंचरण तंत्र कहते हैं।
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2. रुधिर (Blood)
रुधिर एक विशेष संयोजी ऊतक है जो दो मुख्य भागों से मिलकर बना होता है:
1. प्लाज्मा (Plasma) - लगभग 55%:
- यह रुधिर का तरल भाग है जिसमें 90-92% जल तथा 6-8% प्रोटीन (जैसे- फाइब्रिनोजेन, एल्ब्यूमिन, ग्लोबुलिन) होते हैं।
2. फॉर्मड एलिमेंट्स (Formed Elements) - लगभग 45%:
- लाल रुधिर कणिकाएं (RBCs / एरिथ्रोसाइट्स): शरीर में इनकी संख्या सबसे अधिक होती है। इनमें हीमोग्लोबिन होता है जो ऑक्सीजन का परिवहन करता है। इनका जीवनकाल 120 दिन का होता है।
- श्वेत रुधिर कणिकाएं (WBCs / ल्यूकोसाइट्स): ये रंगहीन होती हैं और प्रतिरक्षा (Immunity) में मदद करती हैं। ये दो प्रकार की होती हैं: ग्रेनुलोसाइट्स (न्यूट्रोफिल्स, इयोइनोफिल्स, बेसोफिल्स) और एग्रेनुलोसाइट्स (लिम्फोसाइट्स, मोनोसाइट्स)।
- रुधिर प्लेटलेट्स (Thrombocytes): ये मेगाकैरियोसाइट्स से बनती हैं और रुधिर का थक्का (Blood clotting) जमाने में सहायता करती हैं।
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3. रुधिर समूह (Blood Groups)
- ABO समूहीकरण (ABO Grouping): RBC की सतह पर एंटीजन (A और B) की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर आधारित है।
- समूह A: एंटीजन A, एंटीबॉडी b
- समूह B: एंटीजन B, एंटीबॉडी a
- समूह AB: एंटीजन A और B, कोई एंटीबॉडी नहीं (सर्वग्राही / Universal Recipient)
- समूह O: कोई एंटीजन नहीं, एंटीबॉडी a और b दोनों (सर्वदाता / Universal Donor)
- Rh समूहीकरण (Rh Grouping): Rh एंटीजन की उपस्थिति (Rh+ve) या अनुपस्थिति (Rh-ve) पर आधारित। गर्भावस्था के दौरान Rh असंगति से एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस (Erythroblastosis fetalis) रोग हो सकता है।
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4. रुधिर का स्कंदन (Blood Coagulation / Clotting)
- जब चोट लगती है, तो रुधिर थक्का बनाता है:
प्रोथ्रोम्बिन (Prothrombin) -> थ्रोम्बिन (Thrombin) [थ्रॉम्बोकाइनेज एन्जाइम द्वारा]
फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen) -> फाइब्रिन (Fibrin) [थ्रोम्बिन की उपस्थिति में]
फाइब्रिन + क्षतिग्रस्त कोशिकाएं -> रुधिर का थक्का (Clot)
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5. लसिका तंत्र (Lymph / Tissue Fluid)
- जब रुधिर केशिकाओं से छनकर ऊतकों के बीच आता है, तो इसे ऊतक तरल (Interstitial fluid) कहते हैं।
- इस तरल का जो भाग लसिका वाहिनियों में प्रवेश करता है, उसे लसिका (Lymph) कहते हैं।
- इसमें RBCs और बड़े प्रोटीन नहीं होते। यह वसा के अवशोषण (आंतों के लैक्टियल्स द्वारा) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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6. मानव हृदय की संरचना (Human Heart Anatomy)
- मानव हृदय एक पेशीय अंग है जो मीसोडर्मल रूप से उत्पन्न होता है। यह वक्ष गुहा में दोनों फेफड़ों के बीच स्थित होता है।
- इसमें 4 कक्ष होते हैं:
- दो आलिंद (Atria): दायां और बायां आलिंद (पतली भित्ति वाले)
- दो निलय (Ventricles): दायां और बायां निलय (मोटी भित्ति वाले)
- कपाट (Valves):
- त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve): दाएं आलिंद और दाएं निलय के बीच।
- द्विवलनी / मिट्रल कपाट (Bicuspid / Mitral Valve): बाएं आलिंद और बाएं निलय के बीच।
- अर्धचंद्रাকার कपाट (Semilunar Valves): फुफ्फुसीय धमनी और महाधमनी के आधार पर।
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7. कार्डियक चक्र (Cardiac Cycle)
- हृदय की धड़कन के दौरान होने वाली क्रमिक घटनाओं को कार्डियक चक्र कहते हैं।
- इसकी कुल अवधि 0.8 सेकंड होती है।
- चरण:
1. आलिंद सिस्टोल (Atrial Systole): 0.1 सेकंड (निलयों में रक्त का प्रवाह)।
2. निलय सिस्टोल (Ventricular Systole): 0.3 सेकंड (रक्त का धमनियों में पंप होना)।
3. संयुक्त डायस्टोल (Joint Diastole): 0.4 सेकंड (हृदय के सभी कक्ष विश्राम अवस्था में)।
- स्ट्रोक आयतन (Stroke Volume): प्रत्येक निलय द्वारा एक धड़कन में पंप किया गया रक्त = लगभग 70 मिलीलीटर।
- हृदय निकास (Cardiac Output): एक मिनट में हृदय द्वारा पंप किए गए रक्त की मात्रा।
- सूत्र:
कार्डियक आउटपुट = स्ट्रोक आयतन × हृदय स्पंदन की दर
CO = 70 mL × 72 बार/मिनट = लगभग 5040 mL (या 5 लीटर)
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8. हृदय ध्वनि (Heart Sounds)
- हृदय चक्र के दौरान दो मुख्य ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं:
1. 'लब' (Lubb): त्रिवलनी और द्विवलनी कपाट के बंद होने से (कार्डियक चक्र की शुरुआत में)।
2. 'डब' (Dub): अर्धचंद्राकार कपाट के बंद होने से (निलय डायस्टोल की शुरुआत में)।
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9. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ (ECG)
- ECG हृदय की विद्युत गतिविधियों को ग्राफ के रूप में दर्शाने वाला यंत्र है।
- मुख्य तरंगें:
- P-तरंग: आलिंदों का depolarization (आलिंद संकुचन)।
- QRS-कॉम्प्लेक्स: निलयों का depolarization (निलय संकुचन)।
- T-तरंग: निलयों का repolarization (निलय विश्राम)।
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10. परिसंचरण तंत्र के नियमन (Regulation of Cardiac Activity)
- हृदय की क्रिया का नियमन मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र (ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम) और हार्मोन (एड्रेनालाईन) द्वारा होता है।
- पेसमेकर (Pacemaker): SA नोड (Sino-atrial node) हृदय की स्वाभाविक गति को नियंत्रित करता है, इसलिए इसे 'हार्ट का हृदय' या पेसमेकर कहते हैं।
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11. परिसंचरण तंत्र के विकार (Disorders of Circulatory System)
1. उच्च रक्तचाप (Hypertension / High BP): सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg होता है। यदि रक्तचाप लगातार 140/90 या इससे अधिक रहे, तो इसे हाइपरटेंशन कहते हैं। इससे धमनियां और महत्वपूर्ण अंग (जैसे मस्तिष्क, गुर्दे) प्रभावित होते हैं।
2. कोरोनरी धमनी बीमारी (CAD / Atherosclerosis): इसे 'एथेरोस्क्लेरोसिस' भी कहते हैं। इसमें कोरोनरी धमनियों में कैल्शियम, वसा और कोलेस्ट्रॉल के जमा होने से ल्यूमेन संकरा हो जाता है।
3. एंजाइना (Angina Pectoris): हृदय की पेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर सीने में तीव्र दर्द होना।
4. हार्ट फेलियर (Heart Failure): जब हृदय शरीर की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता (इसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर भी कहते हैं)। हृदयघात (Heart attack) इससे भिन्न है, जिसमें अचानक रक्त की कमी से हृदय की मांसपेशियां नष्ट हो जाती हैं।