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उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन

Subject: biology | Class: Class 11 | Syllabus Year: 2025-26
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन (Excretory Products and Their Elimination)

कक्षा: 11वीं जीव विज्ञान (MP Board)

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1. परिचय एवं मुख्य शब्दावली (Introduction & Key Terms)

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2. मानव उत्सर्जन तंत्र (Human Excretory System)

मानव उत्सर्जन तंत्र में निम्नलिखित अंग शामिल होते हैं:

1. एक जोड़ा वृक्क (A pair of Kidneys): गहरे लाल रंग के, सेम के बीज (bean-shaped) के आकार के होते हैं। ये अंतिम वक्षीय और तीसरी कटि कशेरुका (T12 - L3) के बीच स्थित होते हैं।

2. एक जोड़ा मूत्रवाहिनी (A pair of Ureters): वृक्क के हिलाम से निकलकर मूत्राशय में खुलती हैं।

3. मूत्राशय (Urinary Bladder): थैलीनुमा संरचना जहाँ मूत्र संग्रहित होता है।

4. मूत्रमार्ग (Urethra): जिसके माध्यम से मूत्र शरीर से बाहर निकलता है।


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3. वृक्क की आंतरिक संरचना (Internal Structure of Kidney)

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4. नेफ्रॉन: वृक्क की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई (Nephron)

प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख (1 million) नेफ्रॉन होते हैं। नेफ्रॉन के दो प्रमुख भाग होते हैं:

1. केशिकागुच्छ या ग्लोमेरुलस (Glomerulus): रक्त केशिकाओं का गुच्छा।

2. वृक्क नलिका (Renal Tubule):


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5. मूत्र निर्माण की प्रक्रिया (Urine Formation)

मूत्र निर्माण में तीन मुख्य चरण होते हैं:


1. ग्लोमेरुलर निसंदन (Glomerular Filtration):


2. पुनः अवशोषण (Reabsorption):


3. स्रवण (Secretion):


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6. हेनले लूप और वासारेक्टा की भूमिका (Counter-Current Mechanism)

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7. मत्रातिसर्ग का नियमन (Regulation of Kidney Function)

वृक्क की कार्यप्रणाली का नियमन हॉर्मोन्स द्वारा होता है:


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8. मत्राविसर्जन (Micturition)

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9. सहायक उत्सर्जी अंग (Accessory Excretory Organs)

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10. प्रमुख विकार (Disorders of Excretory System)
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन
Overview
उत्सर्जन के प्रकार (Types of Excretion) अमोनोटेलिज़्म (Ammonotelism) उदाहरण: मछली, उभयचर, कीट अधिक जल की आवश्यकता यूरियोटेलिज़्म (Ureotelism) उदाहरण: स्तनधारी, स्थलीय उभयचर, समुद्री मछली यूरिया का निर्माण यूरिकोटेलिज़्म (Uricotelism) उदाहरण: सरीसृप, पक्षी, लैंड स्नेक न्यूनतम जल हानि (पेस्ट/गोली रूप) मानव उत्सर्जन तंत्र (Human Excretory System) वृक्क (Kidneys) सेम के बीच के आकार के स्थिति: T12 से L3 कशेरुका (Vetebrra) हाइलम (Hilum): रक्त वाहिकाओं का प्रवेश द्वार वृक्क के भाग (Parts of Kidney) कॉर्टेक्स (Cortex - बाहरी भाग) मेडुला (Medulla - भीतरी भाग / पिरामिड) मूत्रवाहिनी (Ureters) मूत्राशय (Urinary Bladder) मूत्रमार्ग (Urethra) नेफ्रॉन: संरचना और कार्य (Nephron: Structure and Function) संरचना (Structure) ग्लोमेरुलस (Glomerulus): केशिकाओं का गुच्छा बोमेन कैप्सूल (Bowman's Capsule) समीपस्थ संवलित नलिका (PCT) हेनले का लूप (Loop of Henle): अवरोही और आरोही भुजा दूरस्थ संवलित नलिका (DCT) संग्रह नलिका (Collecting Duct) नेफ्रॉन के प्रकार (Types of Nephrons) कॉर्टिकल नेफ्रॉन (Cortical Nephrons) जक्स्टा मेडुलरी नेफ्रॉन (Juxta Medullary Nephrons) मूत्र निर्माण की प्रक्रिया (Urine Formation) ग्लोमेरुलर निस्पंदन (Glomerular Filtration) अल्ट्राफिल्ट्रेशन (Ultrafiltration) GFR (Glomerular Filtration Rate): 125 मिली/मिनट पुनरावशोषण (Reabsorption) आवश्यक पदार्थों का रक्त में वापस लौटना (जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल) सक्रिय और निष्क्रिय परिवहन स्रावण (Secretion) आयनों का नलिका में स्रावण (जैसे $H^+$, $K^+$) आयनिक संतुलन बनाए रखना नलिकाओं के कार्य (Function of Tubules) PCT: अधिकांश आयनों और जल का पुनरावशोषण हेनले का लूप: सांद्रित मूत्र का निर्माण (Counter-current mechanism) DCT: $Na^+$ और जल का पुनरावशोषण संग्रह नलिका: pH और आयनिक संतुलन बनाए रखना मूत्र का सांद्रण (Counter-Current Mechanism) हेनले लूप और वासा रेक्टा की भूमिका मज्जुकी प्रवणता (Medullary Gradient) बनाए रखना जल का संरक्षण मिक्त्रिशन / मूत्र त्याग (Micturition) मूत्राशय का भरना खिंचाव रिसेप्टर्स (Stretch receptors) का संकेत केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) की प्रतिक्रिया मूत्र त्याग की प्रक्रिया अन्य उत्सर्जी अंग (Other Excretory Organs) फेफड़े (Lungs): $CO_2$ और जल वाष्प यकृत (Liver): पित्त वर्णक, यूरिया का निर्माण त्वचा (Skin): पसीने और सीबम ग्रंथियां लार (Saliva): कुछ वर्ज्य पदार्थ उत्सर्जन तंत्र के विकार (Disorders of Excretory System) यूरेमिया (Uremia): रक्त में यूरिया का संचय रीनल फेल्योर (Renal Failure): वृक्क की विफलता पथरी (Renal Calculi): ऑक्सालेट या लवण के क्रिस्टल ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis): ग्लोमेरुलस में सूजन कृत्रिम वृक्क (Hemodialysis): अपोहन की प्रक्रिया
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. हीमोडायलिसिस के दौरान उपयोग किए जाने वाले कृत्रिम वृक्क में एक तरल होता है जो प्लाज्मा के समान होता है सिवाय इसके कि इसमें किसकी कमी होती है? 1 Marks
उत्तर (Answer): डायलिसिस द्रव की संरचना प्लाज्मा जैसी ही होती है सिवाय इसके कि इसमें यूरिया जैसे नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट नहीं होते हैं, जिससे वे रोगी के रक्त से बाहर विसरीत हो जाते हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा एक सहायक उत्सर्जी अंग है? 1 Marks
उत्तर (Answer): फेफड़े, यकृत और त्वचा सहायक उत्सर्जी अंग हैं जो CO2, पित्त वर्णक और पसीने जैसे अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
Q3. मूत्राशय से मूत्र त्यागने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं? 1 Marks
उत्तर (Answer): वह तंत्रिका तंत्र जिसके कारण मूत्राशय से मूत्र बाहर निकलता है, मूत्र विसर्जन प्रतिवर्ती क्रिया (मिक्टुरिशन रिफ्लेक्स) कहलाता है।
Q4. वृक्क के खराब होने के कारण रक्त में यूरिया का संचय क्या कहलाता है? 1 Marks
उत्तर (Answer): वृक्कों के खराब होने से रक्त में यूरिया का संचय हो सकता है, इस स्थिति को यूरमिया कहते हैं, जो अत्यधिक हानिकारक है और वृक्क विफलता का कारण बन सकती है।
Q5. मूत्र में ग्लूकोज और कीटोन बॉडी की उपस्थिति किसका संकेत है: 1 Marks
उत्तर (Answer): मूत्र में ग्लूकोज (ग्लाइकोसुरिया) और कीटोन बॉडी (कीटोनुरिया) की उपस्थिति डायबिटीज मेलिटस (मधुमेह) का संकेत देती है।
Q6. नेफ्रॉन के किस भाग में आवश्यक पोषक तत्वों और जल का अधिकतम पुनरावशोषण होता है? 1 Marks
उत्तर (Answer): समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT) लगभग 70-80 प्रतिशत इलेक्ट्रोलाइट्स और जल तथा ग्लूकोज और अमीनो अम्ल जैसे सभी आवश्यक पोषक तत्वों को पुनरावशोषित करती है।
Q7. काउंटर-करंट (प्रतिधारा) तंत्र किसके बीच संचालित होता है? 1 Marks
उत्तर (Answer): काउंटर-करंट तंत्र हेनले लूप और वासा रेक्टा के बीच संचालित होता है, जो बढ़ते हुए मज्जा प्रवणता को बनाए रखता है।
Q8. एट्रियल नैट्रिउरेटिक फैक्टर (ANF) किस तंत्र पर नियंत्रण के रूप में कार्य करता है? 1 Marks
उत्तर (Answer): हृदय के आलिंद में रक्त प्रवाह में वृद्धि से ANF का स्राव हो सकता है, जो वासोडिलेशन (वाहिका विस्तार) का कारण बनता है और इस प्रकार रेनिन-एंजियोटेंसिन तंत्र को नियंत्रित करता है।
Q9. कौन सा हार्मोन वासोकॉन्स्ट्रिक्शन (वाहिका संकीर्णन) द्वारा रक्तचाप और GFR में वृद्धि करता है? 1 Marks
उत्तर (Answer): कम GFR द्वारा रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन प्रणाली (RAAS) सक्रिय होती है। एंजियोटेंसिन II एक शक्तिशाली वासोकॉन्स्ट्रिक्टर है जो रक्तचाप और GFR को बढ़ाता है।
Q10. सामान्य मनुष्य में प्रति मिनट बनने वाले ग्लोमेरुलर निस्यंद की मात्रा लगभग होती है: 1 Marks
उत्तर (Answer): प्रति मिनट वृक्कों द्वारा बनने वाले निस्यंद की मात्रा को ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर (GFR) कहा जाता है जो लगभग 125 मिली/मिनट होती है।
Q11. हेनले लूप के चारों ओर के केशिका नेटवर्क को क्या कहते हैं? 1 Marks
उत्तर (Answer): पेरिट्यूबुलर केशिका नेटवर्क की एक सूक्ष्म वाहिका हेनले लूप के समानांतर चलती है जो 'U' आकार की संरचना बनाती है जिसे वासा रेक्टा कहते हैं।
Q12. Juxta medullary nephrons are characterized by: 1 Marks
उत्तर (Answer): जक्स्टा मेड्यूलरी नेफ्रॉन में हेनले के बहुत लंबे लूप होते हैं जो मज्जा में गहराई तक जाते हैं, जो मूत्र के संकेंद्रण में मदद करता है।
Q13. वृक्कीय कॉर्पसकल समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT) के साथ कहाँ स्थित होते हैं? 1 Marks
उत्तर (Answer): नेफ्रॉन की मेलपीघीयन कॉर्पसकल, PCT और DCT जैसी संरचनाएं वृक्क के वल्कुट क्षेत्र में स्थित होती हैं।
Q14. हेनले लूप की आरोही भुजा किसके लिए पारगम्य होती है? 1 Marks
उत्तर (Answer): आरोही भुजा जल के लिए अपारगम्य होती है लेकिन इलेक्ट्रोलाइट्स के सक्रिय या निष्क्रिय परिवहन की अनुमति देती है, जिससे ऊपर जाने पर निस्यंद तनुकृत हो जाता है।
Q15. हेनले लूप की अवरोही भुजा किसके लिए पारगम्य होती है? 1 Marks
उत्तर (Answer): हेनले लूप की अवरोही भुजा जल के लिए पारगम्य होती है लेकिन इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए लगभग अपारगम्य होती है, जिससे नीचे जाने पर निस्यंद सांद्रित हो जाता है।