अध्याय: गमन एवं संचलन (Locomotion and Movement) - त्वरित संशोधन नोट्स
---
1. परिचय (Introduction)
- संचलन (Movement): जीवों द्वारा अपनी जगह को बदले बिना अपने अंगों को फेरना (जैसे- साँस लेना, हृदय की धड़कन)।
- गमन (Locomotion): एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना (जैसे- चलना, दौड़ना, तैरना)।
- विशेष बिंदु: सभी गमन संचलन होते हैं, परंतु सभी संचलन गमन नहीं होते।
---
2. गति के प्रकार (Types of Movement)
मानव शरीर की कोशिकाओं द्वारा मुख्य रूप से तीन प्रकार की गतियाँ होती हैं:
1. अमीबीय गति (Amoeboid Movement): मैक्रोफेज और ल्यूकोसाइट्स (WBC) द्वारा कूटपाद (Pseudopodia) की सहायता से।
2. पक्ष्माभी गति (Ciliary Movement): श्वासनली (Trachea) और डिम्बवाहिनी नली (Fallopian tube) में पक्ष्माभों (Cilia) की गति द्वारा।
3. पेशीय गति (Muscular Movement): हमारे अंगों, जैसे- हाथ, पैर, जबड़े आदि की गति पेशियों द्वारा होती है।
---
3. पेशियों के प्रकार (Types of Muscles)
पेशियाँ तीन प्रकार की होती हैं:
1. कंकाल पेशी (Skeletal Muscle):
- रेखित (Striated) और ऐच्छिक (Voluntary)।
- कंकाल तंत्र से जुड़ी होती हैं।
2. अंतरंग पेशी या चिकनी पेशी (Visceral / Smooth Muscle):
- अरेक्षित (Non-striated) और अनैच्छिक (Involuntary)।
- आंतरिक अंगों (जैसे- आहार नाल, रक्त वाहिकाएँ) की दीवारों में पाई जाती हैं।
3. हृदय पेशी (Cardiac Muscle):
- रेखित और अनैच्छिक।
- केवल हृदय की दीवारों में पाई जाती हैं (इंटरकेलेटेड डिस्क होती हैं)।
---
4. कंकाल पेशी की संरचना (Structure of Skeletal Muscle)
- प्रत्येक कंकाल पेशी कई पेशी बंडलों (Fascicles) से बनी होती है।
- प्रत्येक बंडल में कई पेशी तंतु (Muscle fibers / Muscle cells) होते हैं।
- पेशी तंतु की प्लाज्मा झिल्ली को सारकोलेमा (Sarcolemma) और उसके द्रव को सारकोप्लाज्म (Sarcoplasm) कहते हैं।
- सारकोप्लाज्म में सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Sarcoplasmic Reticulum - SR) कैल्सीयम आयनों ($Ca^{2+}$) का मुख्य भंडार होता है।
- प्रत्येक पेशी तंतु में समानांतर रूप से कई मायोफिलामेंट्स या मायोफाइब्रिल्स (Myofibrils) होते हैं।
---
5. सार्कोमियर (Sarcomere) - संकुचन की इकाई
- मायोफाइब्रिल्स में दो प्रकार के प्रोटीन तंतु होते हैं:
1. पतले तंतु (Actin / Thin Filaments): आइसोट्रोपिक या I-बैंड बनाते हैं।
2. मोटे तंतु (Myosin / Thick Filaments): एनिसोट्रोपिक या A-बैंड बनाते हैं।
- Z-रेखा (Z-line): पतले तंतुओं को बीच से बाँधने वाली इलास्टिक रेखा।
- सार्कोमियर: दो क्रमागत Z-रेखाओं के बीच की दूरी को पेशी संकुचन की कार्यात्मक इकाई (Functional Unit) कहते हैं।
- H-जोन: A-बैंड का केंद्रीय भाग जहाँ केवल मायोसिन तंतु होते हैं (एक्टिन नहीं होते)।
---
6. पेशी संकुचन की क्रियाविधि - सर्पी तंतु सिद्धांत (Sliding Filament Theory)
पेशियों का संकुचन एक्टिन तंतुओं के मायोसिन तंतुओं के ऊपर फिसलने (Slide) के कारण होता है।
मुख्य चरण:
1. तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse): मोटर न्यूरॉन से संकेत पेशी फाइबर के न्यूरोमस्कुलर जंक्शन पर पहुँचता है, जिससे एसिटाइलकोलीन मुक्त होता है।
2. कैल्शियम आयनों का मुक्त होना ($Ca^{2+}$): सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम से $Ca^{2+}$ आयन सारकोप्लाज्म में मुक्त होते हैं।
3. बाइंडिंग (Binding): $Ca^{2+}$ एक्टिन तंतु पर स्थित ट्रोपोनिन से जुड़ते हैं, जिससे मायोसिन बाइंडिंग साइट्स खुल जाती हैं।
4. क्रॉस-ब्रिज निर्माण (Cross-bridge Formation): मायोसिन हेड एक्टिन से जुड़कर क्रॉस-ब्रिज बनाता है।
5. पावर स्ट्रोक (Power Stroke): ATP के जल अपघटन (Hydrolysis) से ऊर्जा मिलती है और एक्टिन तंतु अंदर की ओर खींच जाते हैं।
- संकुचन के दौरान:
- I-बैंड छोटे हो जाते हैं।
- H-जोन गायब हो जाता है।
- A-बैंड अपनी लंबाई बनाए रखता है (कोई परिवर्तन नहीं होता)।
---
7. कंकाल तंत्र (Skeletal System)
मानव कंकाल तंत्र में कुल 206 हड्डियाँ होती हैं, जिन्हें दो भागों में बाँटा गया है:
#### क) अक्षीय कंकाल (Axial Skeleton) - 80 हड्डियाँ
1. कपाल (Skull) - 29 हड्डियाँ:
- कपाल की हड्डियाँ (Cranial): 8
- चेहरे की हड्डियाँ (Facial): 14
- कर्ण अस्थियाँ (Ear Ossicles): 6 (Malleus, Incus, Stapes)
- हाइड अस्थि (Hyoid): 1
2. मेरुदंड (Vertebral Column) - 26 हड्डियाँ:
- ग्रीवा (Cervical): 7
- वक्षीय (Thoracic): 12
- कटि (Lumbar): 5
- त्रिक (Sacral): 1 (संलयित)
- अनुत्रिक (Coccygeal): 1 (संलयित)
3. उरोस्थि (Sternum) - 1 हड्डी
4. पसलियाँ (Ribs) - 24 हड्डियाँ (12 जोड़े):
- सत्य पसलियाँ (True Ribs): 1 से 7 जोड़े (सीधे उरोस्थि से जुड़ती हैं)।
- असत्य पसलियाँ (False Ribs / Vertebrochondral): 8वें, 9वें और 10वें जोड़े (7वीं पसली से जुड़ती हैं)।
- प्लवी पसलियाँ (Floating Ribs): 11वें और 12वें जोड़े (आगे से जुड़ी नहीं होतीं)।
#### ख) अनुबंधी कंकाल (Appendicular Skeleton) - 126 हड्डियाँ
1. अग्रपाद (Limbs - Hands): 60 हड्डियाँ (प्रत्येक हाथ में 30: Humerus, Radius, Ulna, Carpals-8, Metacarpals-5, Phalanges-14)।
2. पश्चपाद (Limbs - Legs): 60 हड्डियाँ (प्रत्येक पैर में 30: Femur-सबसे लंबी, Patella-घुटना, Tibia, Fibula, Tarsals-7, Metatarsals-5, Phalanges-14)।
3. मेखलाएँ (Girdles) - 6 हड्डियाँ:
- अंस मेखला (Pectoral Girdle): क्लेविकल (Collar bone) और स्केपुला (Scapula)।
- श्रोणि मेखला (Pelvic Girdle): कॉक्सल अस्थियाँ (इलियन, इस्चियम, प्यूबिस)।
---
8. संधियाँ (Joints - जोड़)
हड्डियों के बीच का मिलन बिंदु संधि कहलाता है। यह तीन प्रकार की होती हैं:
1. तंतुमय संधियाँ (Fibrous Joints):
- कोई गति नहीं होती (अचल संधि)।
- उदाहरण: कपाल की सीवन (Sutures)।
2. उपास्थिमय संधियाँ (Cartilaginous Joints):
- सीमित गति होती है।
- उदाहरण: कशेरुकों के बीच की संधियाँ, प्यूबिक सिम्फिसिस।
3. साइनोवियल संधियाँ (Synovial Joints):
- पूर्ण गतिशीलता (Fluid-filled Synovial cavity होती है)।
- प्रमुख प्रकार:
- बॉल एंड सॉकेट संधि (Ball and Socket Joint): कंधा और कूल्हा (Humerus और Pectoral girdle)।
- हिंज संधि (Hinge Joint): घुटना और कोहनी।
- पिवट संधि (Pivot Joint): एटलस और एक्सिस के बीच (गर्दन की गति)।
- ग्लाइडिंग संधि (Gliding Joint): कार्पल्स के बीच।
- सैडल संधि (Saddle Joint): अंगूठे और मेटाकार्पल के बीच।
---
9. कंकाल तंत्र के विकार (Disorders of Skeletal System)
1. मायस्थेनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis): एक ऑटोइम्यून विकार, जो न्यूरोमस्कुलर जंक्शन को प्रभावित करता है, जिससे पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं और पक्षाघात (Paralysis) हो सकता है।
2. पेशीय दुर्विकास (Muscular Dystrophy): आनुवंशिक कारणों से कंकाल पेशियों का उत्तरोत्तर क्षय (Degeneration)।
3. टेटनी (Tetany): शरीर के तरल पदार्थों में $Ca^{2+}$ की कमी के कारण पेशियों में लगातार ऐंठन (Spasms)।
4. संधिवात (Arthritis): जोड़ों में सूजन।
5. ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis): उम्र बढ़ने के साथ (विशेषकर महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी से) हड्डियों में कैल्शियम की कमी होना, जिससे हड्डियाँ कमजोर और फ्रैक्चर के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
6. गाउट (Gout): यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा होने के कारण जोड़ों में सूजन और दर्द।