अध्याय: तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय (Neural Control and Coordination)
कक्षा: 11वीं जीव विज्ञान (MP Board)
त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)
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1. परिचय (Introduction)
- समन्वय (Coordination): अंगों का इस प्रकार कार्य करना कि वे एक-दूसरे के पूरक बनें, समन्वय कहलाता है। जंतुओं में यह तंत्रिका तंत्र (Neural System) और अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) द्वारा होता है।
- तंत्रिका तंत्र: यह उच्च गति से सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए बिंदु-दर-बिंदु (Point-to-point) कनेक्शन प्रदान करता है।
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2. मानव तंत्रिका तंत्र (Human Neural System)
मानव तंत्रिका तंत्र को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System - CNS): इसके अंतर्गत मस्तिष्क (Brain) और मेरुरज्जु (Spinal Cord) आते हैं। यहाँ सूचनाओं का प्रसंस्करण (Processing) और नियंत्रण होता है।
2. परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System - PNS): शरीर के सभी तंत्रिकाएँ जो CNS से जुड़ी होती हैं। यह दो प्रकार की होती हैं:
- संवेदी/अभिवाहित तंत्रिकाएँ (Afferent Fibers): ऊतकों/अंगों से CNS तक आवेग लाती हैं।
- प्रेरक/अपवाहित तंत्रिकाएँ (Efferent Fibers): CNS से संबंधित ऊतकों/अंगों तक आवेग पहुँचाती हैं।
अपवाहित तंत्रिका तंत्र आगे दो भागों में विभाजित है:
- कायिक तंत्रिका तंत्र (Somatic Neural System): कंकाल पेशियों को नियंत्रित करता है (ऐच्छिक)।
- स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Neural System): अनैच्छिक अंगों और चिकनी पेशियों को नियंत्रित करता है। यह पुनः दो प्रकार का होता है:
- सहानुकूल तंत्रिका तंत्र (Sympathetic Neural System)
- परानुकूल तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic Neural System)
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3. तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन (Neuron: The Structural and Functional Unit of Neural System)
एक न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं:
1. द्रुमाक्ष (Dendrites): छोटी, शाखित प्रवर्त जो संकेतों को कोशिका काय की ओर लाती हैं।
2. कोशिका काय (Cell Body / Soma): इसमें cytoplasm, केंद्रक और निसल ग्रैन्यूल्स (Nissl's granules) होते हैं।
3. एक्साॅन (Axon): लंबा फाइबर जो आवेग को कोशिका काय से दूर ले जाता है। इसका अंतिम सिरा synaptic knob बनाता है जिसमें न्यूरोट्रांसमीटर होते हैं।
- न्यूरॉन के प्रकार:
- एकध्रुवीय (Unipolar): 1 axon + 0 dendrite (भ्रूण में)।
- द्विध्रुवीय (Bipolar): 1 axon + 1 dendrite (आंख के रेटिना में)।
- बहुध्रुवीय (Multipolar): 1 axon + 2 या अधिक dendrites (मस्तिष्क में - अधिकांश न्यूरॉन)।
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4. तंत्रिका आवेग का जनन और चालन (Generation and Conduction of Nerve Impulse)
- वि्राम कला विभव (Resting Membrane Potential):
- जब न्यूरॉन उत्तेजित नहीं होता, तो एक्सॉन झिल्ली ध्रुवीकृत (Polarized) होती है।
- बाहरी द्रव में
Na+ आयनों की सांद्रता अधिक होती है और अंदर K+ तथा ऋणावेशित प्रोटीन अधिक होते हैं।
- विश्राम अवस्था में प्लाज्मा झिल्ली
K+ के लिए अधिक पारगम्य और Na+ के लिए लगभग अपारगम्य होती है।
- सोडियम-पोटेशियम पंप (Na+-K+ Pump): सक्रिय परिवहन द्वारा 3
Na+ बाहर फेंके जाते हैं और 2 K+ अंदर लाए जाते हैं।
- क्रिया विभव (Action Potential):
- जब उद्दीपन (Stimulus) दिया जाता है, तो
Na+ के लिए झिल्ली की पारगम्यता बढ़ जाती है, जिससे Na+ तेजी से अंदर आते हैं।
- इसे डिपोलराइजेशन (Depolarization) कहते हैं। झिल्ली का बाहरी सिरा ऋणावेशित और आंतरिक सिरा धनावेशित हो जाता है।
- इसके तुरंत बाद
K+ बाहर की ओर विसृत होते हैं और झिल्ली पुनः अपनी विश्राम अवस्था में आ जाती है जिसे रिपोलराइजेशन (Repolarization) कहते हैं।
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5. सिनेप्स या अंतर्ग्रथनी (Synapse)
- दो तंत्रिका कोशिकाओं के मिलन स्थल को सिनेप्स कहते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं:
1. विद्युत सिनेप्स (Electrical Synapse): यहाँ दोनों न्यूरॉन्स की झिल्लियां बहुत पास होती हैं, आवेगों का संचरण सीधे करंट के रूप में होता है (तेज़ गति)।
2. रासायनिक सिनेप्स (Chemical Synapse): यहाँ दोनों न्यूरॉन्स के बीच एक खाली स्थान होता है जिसे सिनेप्टिक क्फ्ट (Synaptic Cleft) कहते हैं। यहाँ संकेतों के संचरण के लिए न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे- एसिटाइलकोलीन) रासायनिक पदार्थों की आवश्यकता होती है।
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6. मानव मस्तिष्क (Human Brain)
मस्तिष्क को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है:
1. अग्र मस्तिष्क (Forebrain):
- सेरिब्रहम (Cerebrum): मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग। यह बुद्धिमत्ता, चेतना, और सोचने का केंद्र है। यह दो गोलार्द्धों (Cerebral hemispheres) में बंटा होता है जो कॉर्पस कैलोसम (Corpus callosum) से जुड़े होते हैं।
- थैलेमस (Thalamus): संवेदी और मोटर संकेतों का रिले सेंटर।
- हाइपोथैलेमस (Hypothalamus): शरीर के तापमान, भूख, प्यास, और हॉर्मोन स्राव को नियंत्रित करता है।
2. मध्य मस्तिष्क (Midbrain):
- अग्र और पश्च मस्तिष्क के बीच स्थित होता है। इसमें चार लोब होते हैं जिन्हें कॉर्पोरा क्वाड्रीजेमिना (Corpora quadrigemina) कहते हैं (दृष्टि और श्रवण reflexes के लिए)।
3. पश्च मस्तिष्क (Hindbrain):
- पॉन्स (Pons): श्वसन नियमन केंद्र।
- सेरीबेलम (Cerebellum): शरीर का संतुलन बनाए रखता है और अनैच्छिक पेशियों की गतिविधियों को समन्वित करता है (छोटा मस्तिष्क)।
- मेड्युला ऑब्लोंगाटा (Medulla Oblongata): हृदय की धड़कन, श्वसन और रक्तचाप का नियंत्रण करता है।
> मस्तिष्क का तना (Brain Stem): पॉन्स + मेड्युला + मध्य मस्तिष्क मिलकर ब्रेन स्टेम बनाते हैं।
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7. प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप (Reflex Action and Reflex Arc)
- किसी उद्दीपन के प्रति अनैच्छिक, तीव्र और स्वचालित प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) कहते हैं।
- प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) का मार्ग:
संवेदी अंग (Receptor) $\rightarrow$ संवेदी न्यूरॉन (Afferent Neuron) $\rightarrow$ CNS (मस्तिष्क/मेरुरज्जु) $\rightarrow$ प्रेरक न्यूरॉन (Efferent Neuron) $\rightarrow$ प्रभावक अंग (Effector/Muscle)।
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8. संवेदी अंग (Sensory Organs)
- आँख (Eye):
- दीवारें 3 परतों से बनी हैं:
1. दृढ पटल (Sclera): बाहरी परत (आगे चलकर कॉर्निया बनाती है)।
2. रक्तपटल (Choroid): मध्य परत, इसमें रक्त वाहिकाएं होती हैं।
3. दृष्टि पटल (Retina): आंतरिक परत। इसमें दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं:
- शलाकाएं (Rods): प्रकाश की तीव्रता (अंधेरे/रोशनी) के लिए (रोडोप्सिन वर्णक)।
- शंकु (Cones): रंगों की पहचान और तीव्र प्रकाश के लिए (आयोडोप्सिन वर्णक)।
- अंध बिंदु (Blind Spot): जहाँ ऑप्टिक तंत्रिका बाहर निकलती है, वहाँ कोई photoreceptor नहीं होता।
- पीत बिंदु (Fovea / Macula Lutea): रेटिना का वह भाग जहाँ सबसे स्पष्ट और तीक्ष्ण प्रतिबिंब बनता है (केवल शंकु होते हैं)।
- कान (Ear): कान के मुख्य रूप से दो कार्य हैं—श्रवण (Hearing) और संतुलन (Balancing)।
- इसे तीन भागों में बांटा जाता है: बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण और अंतः कर्ण (Labyrinth)।
- कॉक्लीया (Cochlea): अंतःकर्ण का श्रवण भाग। इसके अंदर ऑर्गन ऑफ़ कॉर्टी (Organ of Corti) होता है जो ध्वनि तरंगों को तंत्रिका आवेगों में बदलता है।
- वेस्टिबुलर उपकरण (Vestibular Apparatus): अर्धवृत्ताकार नलिकाएं (Semicircular canals) और ओटोलिथ अंग (Utricle & Saccule) जो शरीर का संतुलन बनाए रखते हैं।