#### अध्याय: व्यवसाय के वित्त के स्रोत (Sources of Business Finance) - त्वरित संशोधन नोट्स
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व्यवसाय को शुरू करने, उसे चलाने और उसका विस्तार करने के लिए धन (पूंजी) की आवश्यकता होती है, जिसे व्यवसाय वित्त कहते हैं। वित्त के बिना किसी भी व्यवसाय की कल्पना नहीं की जा सकती।
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व्यवसाय में वित्त के स्रोतों को मुख्य रूप से तीन आधारों पर बांटा गया है:
#### (क) समय अवधि के आधार पर (Based on Time Period):
1. दीर्घकालीन वित्त (Long-term Finance): 5 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए (जैसे- अंश, ऋणपत्र, बैंक ऋण)। इनका उपयोग स्थायी संपत्तियों को खरीदने के लिए किया जाता है।
2. मध्यकालीन वित्त (Medium-term Finance): 1 वर्ष से 5 वर्ष तक की अवधि के लिए (जैसे- वाणिज्यिक बैंकों से ऋण, विशेष वित्तीय संस्थाओं से ऋण)।
3. अल्पकालीन वित्त (Short-term Finance): 1 वर्ष से कम अवधि के लिए (जैसे- व्यापारिक साख, बैंक ओवरड्राफ्ट)। इनका उपयोग दैनिक कार्यों के लिए किया जाता है।
#### (ख) स्वामित्व के आधार पर (Based on Ownership):
1. स्वामित्व कोष (Owned Funds): यह स्वामी द्वारा लगाया गया धन होता है (जैसे- इक्विटी अंश, संचित आय)। यह व्यवसाय की रीढ़ होता है और वापस नहीं करना पड़ता (जब तक कंपनी बंद न हो)।
2. उधार के कोष (Borrowed Funds): यह बाहरी स्रोतों से लिया गया ऋण होता है (जैसे- ऋणपत्र, बैंक ऋण, सार्वजनिक जमा)। इसे एक निश्चित समय के बाद ब्याज सहित चुकाना होता है।
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#### (क) इक्विटी अंश (Equity Shares):
#### (ख) पूर्वाधिकार अंश (Preference Shares):
1. इक्विटी अंशधारियों से पहले लाभांश पाने का अधिकार।
2. कंपनी के समापन पर पूंजी की वापसी का अधिकार।
#### (ग) संचित आय या लाभ का पुनर्निवेशन (Retained Earnings):
#### (घ) ऋणपत्र (Debentures):
#### (ङ) व्यापारिक साख (Trade Credit):
#### (च) वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks):
1. नकद साख (Cash Credit)
2. ओवरड्राफ्ट (Bank Overdraft)
3. सावधि ऋण (Term Loans)
#### (छ) सार्वजनिक जमा (Public Deposits):
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जब व्यवसाय का विस्तार विदेशों तक होता है, तो निम्नलिखित स्रोतों से वित्त प्राप्त किया जाता है:
1. व्यापारी बैंक (Merchant Banks)
2. अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां और विकास बैंक (International Agencies and Development Banks)
3. वैश्विक निक्षेप रसीद (GDR - Global Depository Receipts)
4. अमेरिकन निक्षेप रसीद (ADR - American Depository Receipts)
5. विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (FCCBs - Foreign Currency Convertible Bonds)
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1. लागत (Cost): धन जुटाने की लागत (ब्याज या लाभांश) कम से कम होनी चाहिए।
2. जोखिम (Risk): उधार के कोषों में जोखिम अधिक होता है क्योंकि ब्याज का भुगतान अनिवार्य होता है।
3. अवधि (Time Period): आवश्यकता की अवधि के अनुसार स्रोत का चयन करना चाहिए (दीर्घकालिक आवश्यकता के लिए अंश/ऋणपत्र और अल्पकालिक के लिए बैंक ऋण/व्यापारिक साख)।
4. नियंत्रण (Control): यदि स्वामी व्यवसाय पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें नए इक्विटी अंश जारी करने से बचना चाहिए और ऋण का सहारा लेना चाहिए।
5. लचीलापन (Flexibility): वित्त का ऐसा स्रोत होना चाहिए जिसे आवश्यकतानुसार आसानी से वापस किया जा सके।