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जब व्यापारिक गतिविधियाँ (वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान) एक देश की सीमाओं से बाहर, यानी दो या दो से अधिक देशों के बीच की जाती हैं, तो उसे अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय या विदेशी व्यापार कहते हैं। इसमें केवल वस्तुओं का क्रय-विक्रय ही शामिल नहीं है, बल्कि पूंजी, तकनीक, बौद्धिक संपदा और श्रम का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हस्तांतरण भी शामिल है।
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| आधार | आंतरिक व्यापार (Internal Business) | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (International Business) |
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| क्षेत्र | देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर। | दो या दो से अधिक देशों के बीच (सीमा पार)। |
| मुद्रा | केवल एक देश की राष्ट्रीय मुद्रा (जैसे - रुपया)। | विभिन्न देशों की अलग-अलग मुद्राएँ (विदेशी मुद्रा)। |
| गतिशीलता | श्रम और पूंजी अधिक गतिशील होते हैं। | श्रम और पूंजी की गतिशीलता देशों के बीच प्रतिबंधित होती है। |
| जोखिम | राजनीतिक और विनिमय जोखिम बहुत कम होते हैं। | विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और राजनीतिक जोखिम अधिक होते हैं। |
| कानून | एक ही देश के नियम और कानून लागू होते हैं। | कई देशों के अलग-अलग कानून और नीतियां लागू होती हैं। |
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1. निर्यात एवं आयात (Exporting and Importing):
2. अनुबंध विनिर्माण (Contract Manufacturing):
3. लाइसेंसिंग और फ़्रैंचाइजिंग (Licensing and Franchising):
4. संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures):
5. पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियाँ (Wholly Owned Subsidiaries):
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1. पूछताछ प्राप्त करना और कोटेशन भेजना (Enquiry and Quotation): संभावित आयातक से माल की कीमत और शर्तों के बारे में पूछताछ (Inquiry) आती है, जिसके जवाब में निर्यातक प्रोफॉर्मा चालान (Proforma Invoice) भेजता है।
2. आदेश या अनुबंध प्राप्त करना (Receipt of Order/Indent): आयातक द्वारा माल का पक्का ऑर्डर देना।
3. साख पत्र (Letter of Credit - L/C) प्राप्त करना: आयातक के बैंक द्वारा निर्यातक को भुगतान की गारंटी देने वाला पत्र।
4. ऋण और वित्त की व्यवस्था (Pre-shipment Finance): माल के उत्पादन या संग्रहण के लिए बैंक से ऋण लेना।
5. निर्यात लाइसेंस प्राप्त करना (Export License): सरकार से व्यापार करने की अनुमति प्राप्त करना।
6. उत्पादन या माल की प्राप्ति (Production/Procurement of Goods): माल तैयार करना या खरीदना।
7. पूर्व-शिपमेंट निरीक्षण (Pre-shipment Inspection): गुणवत्ता की जाँच के लिए निरीक्षण एजेंसी से प्रमाण पत्र लेना।
8. उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क औपचारिकताएँ (Excise and Customs Clearance): करों का भुगतान करना।
9. शिपिंग और बिल ऑफ़ लैडिंग (Shipping and Bill of Lading): जहाज कंपनी से माल भेजने की रसीद (Bill of Lading) प्राप्त करना।
10. भुगतान की प्राप्ति (Realisation of Payment): बैंक के माध्यम से निर्यात मूल्य प्राप्त करना।
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1. व्यापारिक पूछताछ (Trade Enquiry): आयातक द्वारा दुनिया भर के निर्यातकों से कीमतों की जानकारी मांगना।
2. आयात लाइसेंस प्राप्त करना (Procuring Import License): सरकार के नियमों के अनुसार लाइसेंस लेना।
3. विदेशी मुद्रा प्राप्त करना (Acquiring Foreign Exchange): केंद्रीय बैंक (RBI) के नियमों के तहत विदेशी मुद्रा की व्यवस्था करना।
4. साख पत्र भेजना (Sending Letter of Credit): निर्यातक को भुगतान की सुरक्षा के लिए L/C भेजना।
5. शिपमेंट की सूचना प्राप्त करना (Advice of Shipment): निर्यातक से माल जहाज पर लादे जाने की सूचना पाना।
6. दस्तावेजों का संग्रह (Retirement of Import Documents): बैंक के माध्यम से भुगतान करके स्वामित्व के दस्तावेज (जैसे बिल ऑफ लैडिंग) प्राप्त करना।
7. माल का छूटना और सीमा शुल्क का भुगतान (Arrival and Customs Clearance): बंदरगाह पर पहुँचने पर सीमा शुल्क (Customs Duty) चुकाकर माल को छुड़ाना।
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1. विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization - WTO):
2. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund - IMF):
3. विश्व बैंक (World Bank / IBRD):