त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)
कक्षा: 11वीं
विषय: अर्थशास्त्र (Economics)
अध्याय: ग्रामीण विकास (Rural Development)
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1. ग्रामीण विकास का अर्थ (Meaning of Rural Development)
- परिभाषा: ग्रामीण विकास एक ऐसी सतत प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में सुधार करना है। इसमें कृषि का आधुनिकीकरण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास, गरीबी उन्मूलन और रोजगार के अवसरों का सृजन शामिल है।
2. ग्रामीण विकास के प्रमुख क्षेत्र (Key Issues in Rural Development)
ग्रामीण विकास के अंतर्गत निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है:
- मानव पूंजी निर्माण (शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता)।
- भूमि सुधार (Land Reforms)।
- कृषि का आधुनिकीकरण और विविधीकरण (Diversification of Agriculture)।
- उत्पादक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों का विकास।
- बुनियादी ढांचा (सड़कें, बिजली, सिंचाई, विपणन)।
- निर्धनता निवारण (Poverty Alleviation)।
3. ग्रामीण साख और वित्त (Rural Credit and Finance)
चूंकि किसानों को फसल की बुवाई और कटाई के बीच समय अंतराल के कारण धन की आवश्यकता होती है, इसलिए ग्रामीण साख अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- अल्पकालिक साख (Short-term Credit): 1 वर्ष तक के लिए (बीज, खाद आदि खरीदने हेतु)।
- मध्यकालिक साख (Medium-term Credit): 1 से 5 वर्ष के लिए (कृषि उपकरण खरीदने हेतु)।
- दीर्घकालिक साख (Long-term Credit): 5 वर्ष से अधिक के लिए (जमीन खरीदने या स्थायी सुधार हेतु)।
#### ग्रामीण साख के स्रोत (Sources of Rural Credit):
1. गैर-संस्थागत स्रोत (Non-institutional Sources): साहूकार, व्यापारी, रिश्तेदार आदि (इनकी ब्याज दरें बहुत अधिक होती हैं)।
2. संस्थागत स्रोत (Institutional Sources):
- सहकारी ऋण समितियां (Cooperative Credit Societies)
- वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks)
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks - RRBs)
- नाबार्ड (NABARD - National Bank for Agriculture and Rural Development)
- नाबार्ड (NABARD): इसकी स्थापना 1982 में देश में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए वित्त उपलब्ध कराने वाली शीर्ष (Apex) संस्था के रूप में की गई थी।
4. कृषि विपणन (Agricultural Marketing)
- अर्थ: वह प्रक्रिया जिसके अंतर्गत कृषि उपज को खेत से एकत्रित करके, उसकी ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और देश-विदेश के बाजारों में बिक्री की जाती है, कृषि विपणन कहलाती है।
- कृषि विपणन की मुख्य समस्याएं:
- भंडारण सुविधाओं का अभाव (Lack of storage facilities)।
- बिचौलियों का शोषण (Exploitation by middlemen)।
- परिवहन की अपर्याप्त सुविधा (Inadequate transport)।
- बाजार की जानकारी का अभाव (Lack of market information)।
- सरकार द्वारा किए गए उपाय:
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price - MSP) की व्यवस्था।
- विनियमित बाजार (Regulated Markets) की स्थापना।
- सहकारी विपणन समितियां (Cooperative Marketing Societies)।
- भंडारण गृहों का निर्माण (Warehousing)।
5. कृषि का विविधीकरण (Diversification of Agriculture)
कृषि पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए विविधीकरण आवश्यक है। इसके दो प्रमुख पहलू हैं:
1. फसल उत्पादन का विविधीकरण: एकल फसल पद्धति के स्थान पर विभिन्न प्रकार की फसलें उगाना (जैसे नकदी फसलें अपनाना)।
2. उत्पादक गतिविधियों का विविधीकरण (अन्य गतिविधियों को अपनाना):
- पशुपालन (Animal Husbandry): दूध, मांस, ऊन आदि का उत्पादन (श्वेत क्रांति / ऑपरेशन फ्लड)।
- मत्स्य पालन (Fisheries): मछली उत्पादन (नीली क्रांति)।
- बागवानी (Horticulture): फल, सब्जियां, फूल और मसाले उगाना (स्वर्ण क्रांति)।
- कुटीर और घरेलू उद्योग (Cottage and Household Industries): हस्तशिल्प, हथकरघा आदि।
6. जैविक खेती (Organic Farming)
- अर्थ: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग किए बिना प्राकृतिक तरीकों (गोबर की खाद, कंपोस्ट, नीम की खली आदि) से खेती करना जैविक खेती कहलाता है।
- महत्व:
- यह पर्यावरण के अनुकूल होती है।
- मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती है।
- स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक भोजन प्रदान करती है।
- निर्यात के लिए बेहतर अवसर प्रदान करती है।
उत्तर (Answer): सुनहरी क्रांति से तात्पर्य 1991 और 2003 के बीच बागवानी उत्पादन, जिसमें फल, सब्जियां और फूल शामिल हैं, में उल्लेखनीय वृद्धि की अवधि से है।