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सांख्यिकी वह विज्ञान है जो मात्रात्मक (Quantitative) डेटा के संग्रहण, प्रस्तुਤੀकरण, विश्लेषण और निर्वचन से संबंधित है। यह छात्रों को वास्तविक दुनिया की आर्थिक समस्याओं को समझने में मदद करता है।
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1. अर्थशास्त्र (Economics): यह मानव व्यवहार का वह अध्ययन है जिसमें सीमित संसाधनों (Scarcity) का उपयोग असीमित आवश्यकताओं को संतुष्ट करने के लिए इस प्रकार किया जाता है कि अधिकतम लाभ या कल्याण प्राप्त हो सके।
2. दुर्लभता (Scarcity): संसाधनों की मांग की तुलना में उनकी आपूर्ति का कम होना दुर्लभता कहलाता है। यही अर्थशास्त्र की मूल समस्या है।
3. उपभोक्ता (Consumer): वह व्यक्ति जो अपनी आवश्यकताओं को संतुष्ट करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं को खरीदता है और उनका उपभोग करता है।
4. उत्पादक (Producer): वह व्यक्ति या संस्था जो वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती है ताकि उन्हें बाजार में बेचा जा सके।
5. सांख्यिकी (Statistics - बहुवचन रूप में): संख्यात्मक तथ्यों या आंकड़ों (Numerical Data) का समूह।
6. सांख्यिकी (Statistics - एकवचन रूप में): वह वैज्ञानिक विधि या पद्धति जिसके अंतर्गत आंकड़ों का संग्रहण, संगठन, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण और निर्वचन किया जाता है।
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सांख्यिकी के अंतर्गत अध्ययन करने के लिए निम्नलिखित पाँच चरणों का पालन किया जाता है:
1. आंकड़ों का संग्रहण (Collection of Data): सूचना या आंकड़ों को एकत्र करना।
2. संगठन (Organization): एकत्र किए गए आंकड़ों को व्यवस्थित करना (जैसे- मिलान चिह्नों का प्रयोग करके)।
3. प्रस्तुतीकरण (Presentation): आंकड़ों को सारणी (Tables), ग्राफ (Graphs) या चित्रों के माध्यम से स्पष्ट रूप से दिखाना।
4. विश्लेषण (Analysis): आंकड़ों के आधार पर उनके परिणाम निकालना (जैसे- औसत, सहसंबंध आदि ज्ञात करना)।
5. निर्वचन (Interpretation): विश्लेषण किए गए परिणामों से निष्कर्ष निकालना और नीति निर्धारण करना।
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सांख्यिकी में आंकड़ों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है:
1. प्राथमिक आंकड़े (Primary Data):
2. द्वितीयक आंकड़े (Secondary Data):
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1. जटिल और विशाल डेटा को सरल रूप में प्रस्तुत करना।
2. तथ्यों को संख्यात्मक रूप (Numerical form) में सटीक रूप से प्रस्तुत करना।
3. आर्थिक नीतियों के निर्धारण में सहायता करना।
4. पूर्वानुमान लगाने (Forecasting) में मदद करना।
5. विभिन्न आर्थिक चरों के बीच संबंध स्थापित करना।
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1. यह केवल संख्यात्मक तथ्यों का अध्ययन करती है, गुणात्मक पहलुओं (जैसे ईमानदारी, गरीबी का दुःख) का नहीं।
2. यह केवल व्यक्तिगत इकाइयों (Individual units) का अध्ययन नहीं करती, बल्कि केवल समूहो या समुच्चयों (Aggregates) का अध्ययन करती है।
3. इसके परिणाम औसत रूप से सत्य होते हैं, हर परिस्थिति में सार्वभौमिक रूप से नहीं।
4. यदि आंकड़ों के संग्रहण में सावधानी न बरती जाए, तो गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं।