यह नोट्स मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) कक्षा 11वीं के अर्थशास्त्र के छात्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए हैं।
---
सह-संबंध एक सांख्यिकीय तकनीक है जो दो या दो से अधिक चर (Variables) के बीच के आपसी संबंध की मात्रा और दिशा को मापاتي है।
सह-संबंध को मुख्य रूप से तीन आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:
1. धनात्मक सह-संबंध (Positive Correlation): जब दोनों चर एक ही दिशा में परिवर्तन करते हैं। (अर्थात, एक चर के बढ़ने पर दूसरा भी बढ़ता है, या घटने पर घटता है)। जैसे: मूल्य और पूर्ति।
2. ऋणात्मक सह-संबंध (Negative Correlation): जब दोनों चर विपरीत दिशा में परिवर्तन करते हैं। (अर्थात, एक चर के बढ़ने पर दूसरा घटता है)। जैसे: मूल्य और मांग।
1. सरल सह-संबंध (Simple Correlation): जब केवल दो चरों के बीच संबंध का अध्ययन किया जाए।
2. बहु और आंशिक सह-संबंध (Multiple and Partial Correlation): जब दो से अधिक चरों के आपसी संबंधों का अध्ययन किया जाए।
1. रेखीय सह-संबंध (Linear Correlation): जब चरों में परिवर्तन का अनुपात हमेशा स्थिर रहता है।
2. अरेखीय सह-संबंध (Non-linear Correlation): जब चरों में परिवर्तन का अनुपात स्थिर नहीं रहता है।
---
कार्ल पियर्सन के सह-संबंध गुणांक (r) के आधार पर:
r = +1 (धनात्मक) या r = -1 (ऋणात्मक)+0.75 से +1.0 (या -0.75 से -1.0)+0.25 से +0.75 (या -0.25 से -0.75)0 से +0.25 (या 0 से -0.25)r = 0 (चरों के बीच कोई संबंध नहीं है)---
#### विधि 1: प्रकीर्ण आरेख विधि (Scatter Diagram Method)
#### विधि 2: कार्ल पियर्सन का सह-संबंध गुणांक (Karl Pearson's Coefficient of Correlation)
यह सह-संबंध मापने की सबसे लोकप्रिय गणितीय विधि है। इसे r द्वारा दर्शाया जाता है। इसका मान हमेशा -1 और +1 के बीच होता है।
मुख्य सूत्र (Main Formula):
r = Sum(X - X̄)(Y - Ȳ) / [Sqrt(Sum(X - X̄)^2) * Sqrt(Sum(Y - Ȳ)^2)]
जहाँ:
X और Y = दिए गए चरX̄ और Ȳ = चरों के माध्य (Means)(संक्षिप्त सूत्र / Shortcut Formula):
r = [N Sum(XY) - (Sum X Sum(Y)] / [Sqrt(N Sum(X^2) - (Sum X)^2) Sqrt(N * Sum(Y^2) - (Sum Y)^2)]
#### विधि 3: स्पीयरमैन की कोटि अंतर विधि (Spearman's Rank Difference Method)
यह विधि तब प्रयोग की जाती है जब चरों के गुण (जैसे - बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सौंदर्य) को अंकों में नहीं मापा जा सकता, बल्कि उन्हें रैंक (Rank या कोटि) दी जाती है।
सूत्र (Formula):
R = 1 - [6 * Sum(d^2) / (N(N^2 - 1))]
जहाँ:
R = कोटि सह-संबंध गुणांक (Rank Correlation Coefficient)d = दोनों रैंकों के बीच का अंतर (Rx - Ry)N = प्रेक्षणों की कुल संख्या (Number of Observations)---
1. सह-संबंध गुणांक (r) की इकाई (Unit) नहीं होती है, यह एक शुद्ध संख्या है।
2. r का मान कभी भी -1 से कम और +1 से अधिक नहीं हो सकता।
3. यदि r = 0, तो इसका अर्थ है कि चरों के बीच कोई रैखिक सह-संबंध नहीं है।
4. कार्ल पियर्सन विधि में चरों के रैखिक (Linear) संबंध की मान्यता होती है।