अध्याय: घुमक्कड़ साम्राज्य (Nomadic Empires)
कक्षा: 11 (इतिहास) - मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board)
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परिचय एवं मुख्य परिभाषाएँ
- घुमक्कड़ (Nomads): वे लोग जो स्थायी रूप से एक स्थान पर नहीं बसते, बल्कि अपनी आजीविका (पशुपालन और व्यापार) के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं।
- बदूबू (Bedouin): अरब के वे घुमक्कड़ कबीले जो ऊँटों और भेड़ों के साथ रेगिस्तान में घूमते थे और मंगोलों की तरह ही इनकी जीवनशैली थी।
- यायावर (Nomadism): वह जीवन शैली जिसमें लोग मुख्य रूप से पशुपालन (घोड़े, भेड़, बकरी आदि) पर निर्भर होते हैं और चरागाहों की खोज में निरंतर घूमते रहते हैं।
- कुरिल्ताई (Kurultai): मंगोल सरदारों की एक सभा जिसमें मंगोल शासकों का चुनाव किया जाता था और युद्ध तथा विजय की रणनीतियाँ बनाई जाती थीं।
- यास (Yasa): चंगेज खान द्वारा स्थापित कानून और आचार संहिता, जिसका उद्देश्य मंगोलों को अनुशासित रखना था।
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प्रमुख शासक एवं महत्वपूर्ण तिथियाँ
- चंगेज खान (Genghis Khan): मंगोल साम्राज्य के संस्थापक। इनका जन्म लगभग 1162 ई. में हुआ था। इनका वास्तविक नाम 'तेमुचिन' (Temujin) था।
- 1206 ई.: तेमुचिन को 'चंगेज खान' (महानायक/सार्वभौमिक शासक) की उपाधि दी गई और उन्हें मंगोलों का महान खान घोषित किया गया।
- ओगीडेई (Ögedei): चंगेज खान के उत्तराधिकारी (पुत्र), जिनके समय में मंगोल साम्राज्य का और अधिक विस्तार हुआ।
- कुबलई खान (Kublai Khan): चीन में युआन वंश की स्थापना करने वाले चंगेज खान के पौत्र।
- हूलागु खान (Hulagu Khan): ईरान और इराक के क्षेत्रों को जीतने वाले तथा बगदाद को नष्ट करने वाले मंगोल शासक।
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मंगोल साम्राज्य की सैन्य व्यवस्था और रणनीतियाँ
- दशमलव प्रणाली (Decimal System): चंगेज खान ने अपनी सेना को 10, 100, 1000 और 10,000 सैनिकों की इकाइयों (तुमेन) में विभाजित किया था। इससे सेना में उच्च अनुशासन और नियंत्रण रहता था।
- घुड़सवारी और तीरंदाजी: मंगोल सैनिक अत्यधिक कुशल घुड़सवार और तीरंदाज थे। वे घोड़े पर बैठे-बैठे पीछे की ओर भी तीर चला सकते थे, जो उनकी सबसे बड़ी सैन्य विशेषता थी।
- याम् (Yam) संचार प्रणाली: मंगोलों द्वारा स्थापित एक तीव्र संदेशवाहक घोड़ों की डाक प्रणाली, जिसके माध्यम से साम्राज्य के दूर-दूर के हिस्सों तक खबरें कुछ ही दिनों में पहुँच जाती थीं।
- घेराबंदी की तकनीक (Siege Engines): चीन और फारस के अभियानों से मंगोलों ने कैटापल्ट (मंजनीक) और बटरिंग रैम जैसे हथियारों का उपयोग करना सीखा, जिससे किलाबंद शहरों को जीतना आसान हो गया।
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चंगेज खान और मंगोलों की सफलता के मुख्य कारण
1. उत्कृष्ट नेतृत्व: चंगेज खान की दूरदर्शिता, संगठन क्षमता और कठोर अनुशासन।
2. लचीलापन: मंगोलों ने समय के साथ नई तकनीकों और विभिन्न संस्कृतियों के लोगों को अपनी सेना और प्रशासन में शामिल किया।
3. कठोर न्याय व्यवस्था ('यास'): इससे साम्राज्य में शांति और सुरक्षा स्थापित हुई, जिससे व्यापारिक मार्गों (सिल्क रूट) की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
4. स्थानीय लोगों का समर्थन: कई बार शत्रु शासकों के अत्याचारों से तंग जनता ने मंगोलों का स्वागत किया।
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मंगोल साम्राज्य का प्रभाव एवं परिणाम
- व्यापार का विकास: मंगोल साम्राज्य के अंतर्गत 'सिल्क रूट' (रेशम मार्ग) पर व्यापार सुरक्षित हो गया, जिससे पूर्व और पश्चिम के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान बढ़ा।
- शहरीकरण और पतन: यद्यपि शुरुआत में मंगोलों ने बड़े पैमाने पर नरसंहार और विध्वंस किया, परंतु बाद में उन्होंने शहरों का निर्माण किया और इस्लाम तथा अन्य स्थानीय धर्मों को अपना लिया।
- इतिहास लेखन: मंगोलों का इतिहास मुख्य रूप से उनके शत्रुओं (फारसी, चीनी और यूरोपीय इतिहासकारों) द्वारा लिखा गया है, इसलिए इसमें उनके बर्बर पक्ष को अधिक उभारा गया है, जबकि उनका प्रशासनिक और संगठनात्मक कौशल भी बहुत महत्वपूर्ण था।
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नोट: यह त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes) मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। इसे अच्छी तरह से याद रखें।
उत्तर (Answer): unka mukhya jivan-nirvah pashupalan tha, jisme ghode, bhed, bakri aur unt pale jate the.