अध्याय: स्थानीय शासन (Local Governments)
त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)
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परिचय (Introduction)
- स्थानीय शासन का अर्थ: शासन व्यवस्था का वह स्तर जो गाँव और जिला स्तर के आम आदमी के सबसे करीब होता है। यह स्थानीय स्तर की समस्याओं का समाधान और विकास कार्य करता है।
- महत्व: यह लोकतंत्र की नींव है। इसके माध्यम से आम नागरिक सीधे शासन प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
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महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन (Important Constitutional Amendments)
स्थानीय शासन को भारतीय संविधान में 73वें और 74वें संशोधन (1992) द्वारा संवैधानिक दर्जा और मजबूती प्रदान की गई।
#### 1. 73वाँ संवैधानिक संशोधन (ग्रामीण स्थानीय शासन / पंचायती राज)
- लागू हुआ: 1993 में।
- नया भाग: संविधान में भाग IX जोड़ा गया।
- नई अनुसूची: 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों के अंतर्गत 29 विषयों की सूची है।
- त्रि-स्तरीय ढाँचा: इस संशोधन ने देश भर में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था अपनाई:
1. ग्राम स्तर: ग्राम पंचायत
2. प्रखंड / मध्यवर्ती स्तर: मंडल या पंचायत समिति
3. जिला स्तर: जिला पंचायत / जिला परिषद
#### 2. 74वाँ संवैधानिक संशोधन (शहरी स्थानीय शासन / नगरपालिकाएँ)
- लागू हुआ: 1993 में।
- नया भाग: संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया।
- नई अनुसूची: 12वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें नगरपालिकाओं के अंतर्गत 18 विषयों की सूची है।
- शहरी निकायों के प्रकार:
1. नगर पंचायत (गाँव से शहर में परिवर्तित होने वाले क्षेत्रों के लिए)
2. नगर पालिका परिषद (छोटे शहरी क्षेत्र)
3. नगर निगम (बड़े शहर)
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प्रमुख विशेषताएँ और प्रावधान (Key Features & Provisions)
- कार्यकाल: सभी स्थानीय निकायों का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है।
- नियमित चुनाव: यदि कोई निकाय 5 वर्ष से पहले भंग होता है, तो 6 महीने के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है।
- आरक्षण (Reservation):
- महिलाओं के लिए सभी स्तरों पर कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित हैं।
- अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण।
- पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी राज्यों द्वारा कानून बनाकर आरक्षण का प्रावधान किया जा सकता है।
- राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission): स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रत्येक राज्य में एक राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाती है।
- राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission): पंचायतों और नगरपालिकाओं की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करने तथा उन्हें धन के आवंटन की सिफारिश करने के लिए हर 5 साल पर इसका गठन किया जाता है।
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स्थानीय शासन के लाभ (Benefits of Local Governments)
1. लोकतंत्र का विकेंद्रीकरण: सत्ता केवल केंद्र या राज्यों तक सीमित न रहकर आम जनता के हाथों तक पहुँचती है।
2. जनता की सीधी भागीदारी: स्थानीय लोग अपनी समस्याओं और विकास योजनाओं में सीधे भाग ले सकते हैं।
3. शीघ्र समाधान: स्थानीय स्तर की समस्याओं (जैसे- पानी, सड़क, सफाई) का त्वरित निस्तारण होता है।
4. नेतृत्व का विकास: यह जमीनी स्तर पर नए और सक्षम नेतृत्व को तैयार करता है।
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मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points for MP Board Exam)
- बलवंत राय मेहता समिति (1957): इस समिति ने भारत में सबसे पहले त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी।
- सर्वप्रथम पंचायती राज: 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में सबसे पहले पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई थी।
- मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय: मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1993 के तहत राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू है।