मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 भौतिकी - त्वरित संशोधन नोट्स
अध्याय: चुंबकत्व एवं द्रव्य (Magnetism and Matter)
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1. छड़ चुंबक (Bar Magnet) और उसके गुण
- चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (
M): यह चुंबक की शक्ति और लंबाई का गुणनफल है।
- सूत्र:
M = m × 2l
- जहाँ
m = ध्रुव प्रबलता (Pole strength), 2l = चुंबक की प्रभावी लंबाई।
- मात्रक: ऐम्पियर-मीटर² (A·m²) या जूल/टेसला (J/T)।
- दिशा: हमेशा दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती है।
2. कूलॉम का चुंबकत्व का नियम (Coulomb's Law in Magnetism)
दो चुंबकीय ध्रुवों के बीच लगने वाला बल:
- सूत्र:
F = (μ₀ / 4π) × (m₁ × m₂) / r^2
- जहाँ
μ₀ = निर्वात की पारगम्यता (Permeability of free space), r = दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी।
3. चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (Magnetic Field Intensity due to a Bar Magnet)
- अक्षीय स्थिति में (Axial Position):
- सूत्र:
B = (μ₀ / 4π) × (2Mr / (r^2 - l^2)^2)
- यदि चुंबक बहुत छोटा हो (
r >> l): B = (μ₀ / 4π) × (2M / r^3)
- निरक्षीय स्थिति में (Equatorial Position):
- सूत्र:
B = (μ₀ / 4π) × (M / (r^2 + l^2)^(3/2))
- यदि चुंबक बहुत छोटा हो (
r >> l): B = (μ₀ / 4π) × (M / r^3)
4. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय द्विध्रुव
- बल आघूर्ण (Torque,
τ):
- सूत्र:
τ = M B sin(θ)
- सदिश रूप में:
τ = M × B
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy,
U):
- सूत्र:
U = -M B cos(θ) = -M · B
- दोलन का आवर्त काल (Time Period of Oscillation):
- सूत्र:
T = 2π √(I / (MB))
- जहाँ
I = जड़त्वाघूर्ण (Moment of Inertia), M = चुंबकीय आघूर्ण, B = चुंबकीय क्षेत्र।
5. गॉस का चुंबकत्व का नियम (Gauss's Law for Magnetism)
किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है।
- सूत्र:
Φ_B = ∫ B · dA = 0
- महत्वपूर्ण बिंदु: यह नियम यह बताता है कि एकल चुंबकीय ध्रुव (Magnetic Monopole) का अस्तित्व नहीं होता है।
6. पृथ्वी का चुंबकत्व (Earth's Magnetism / Terrestrial Magnetism)
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के तीन मुख्य अवयव (Elements of Earth's Magnetic Field):
1. चुंबकीय declination (θ या δ): भौगोलिक याम्योत्तर और चुंबकीय याम्योत्तर के बीच का कोण।
2. नति कोण या डिप कोण (δ या I): परिणामी चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की क्षैतिज दिशा के साथ जो कोण बनाता है।
3. चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक (B_H):
- सूत्र:
B_H = B cos(δ)
- और ऊर्ध्वाधर घटक:
B_V = B sin(δ)
- नति कोण के लिए:
tan(δ) = BV / BH
- परिणामी क्षेत्र:
B = √(BH^2 + BV^2)
7. चुंबकीय पदार्थ (Magnetic Materials)
चुंबकीय गुणों के आधार पर पदार्थों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
| गुणधर्म | प्रतिचुंबकीय पदार्थ (Diamagnetic) | अनुचुंबकीय पदार्थ (Paramagnetic) | लौहचुंबकीय पदार्थ (Ferromagnetic) |
| :--- | :--- | :--- | :--- |
| चुंबकीय प्रवृत्ति (χ) | ऋणात्मक और कम (-1 से 0 के बीच) | धनात्मक और छोटी | धनात्मक और बहुत अधिक |
| आपक्षिक पारगम्यता (μr) | 1 से थोड़ा कम (μr < 1) | 1 से थोड़ा अधिक (μr > 1) | बहुत अधिक (μr >> 1) |
| चुंबकीय क्षेत्र की ओर | प्रतिकर्षित होते हैं | कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं | प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं |
| तापमान का प्रभाव | तापमान पर निर्भर नहीं करता | क्यूरी नियम का पालन करता है: χ ∝ 1/T | क्यूरी-वाइस नियम का पालन करता है: χ ∝ 1/(T - T_c) |
| उदाहरण | बिस्मथ, कॉपर, पानी, सोना | एल्युमिनियम, ऑक्सीजन, सोडियम | लोहा, निकेल, कोबाल्ट |
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- महत्वपूर्ण संबंध:
μr = 1 + χ (जहाँ μr आपक्षिक पारगम्यता है और χ चुंबकीय प्रवृत्ति है।)
B = μ₀ (H + I) (जहाँ H चुंबकन तीव्रता और I या M तीव्रता है।)
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 चुंबकत्व एवं द्रव्य
छड़ चुंबक (बार मैग्नेट)
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ और गुण
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल आघूर्ण
चुंबकीय द्विध्रुव ऊर्जा
गॉस का नियम (चुंबकत्व के लिए)
पृथ्वी का चुंबकत्व (भूपृष्ठ चुंबकत्व)
चुंबकीय घटक
चुंबकीय दिकपात (डिक्लिनेशन)
नमन कोण (इन्क्लिनेशन)
क्षैतिज घटक
भू-चुंबकीय ध्रुव
चुंबकीय पदार्थ और वर्गीकरण
प्रतिचुंबकीय (डायमैग्नेटिक) पदार्थ
अनुचुंबकीय (पैरामैग्नेटिक) पदार्थ
लौहचुंबकीय (फेरोमैग्नेटिक) पदार्थ
डोमेन सिद्धांत
क्यूरी ताप
हिस्टेरिसिस (शैथिल्य) वक्र
धारणशीलता (रिटेंटिविटी)
निग्राहिता (कोर्सिविटी)
स्थायी चुंबक एवं विद्युत चुंबक
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### भाग 1: सिद्धांत और व्युत्पत्ति
**अक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता की परिभाषा:**\nदंड चुंबक की अक्षीय रेखा पर स्थित किसी बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता उस बिंदु पर रखे एकांक उत्तर ध्रुव द्वारा अनुभव किए जाने वाले चुम्बकीय बल के रूप में परिभाषित की जाती है।
**अक्षीय चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्युत्पत्ति:**\nमान लीजिए $2l$ लंबाई और $m$ ध्रुव प्रबलता वाला एक दंड चुंबक है। दंड चुंबक का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण $M = m \times 2l$ है। मान लीजिए $P$ चुंबक की अक्षीय रेखा पर इसके केंद्र $O$ से $d$ दूरी पर स्थित एक बिंदु है।
* **उत्तर ध्रुव ($N$) के कारण बिंदु $P$ पर चुम्बकीय क्षेत्र:**\nउत्तर ध्रुव से बिंदु $P$ की दूरी $(d - l)$ है।
$$B_1 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m}{(d - l)^2} \quad (N \text{ से दूर की ओर})$$
* **दक्षिण ध्रुव ($S$) के कारण बिंदु $P$ पर चुम्बकीय क्षेत्र:**\nदक्षिण ध्रुव से बिंदु $P$ की दूरी $(d + l)$ है।
$$B_2 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m}{(d + l)^2} \quad (S \text{ की ओर})$$
* **परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र ($B$):**\nचूँकि $B_1$ और $B_2$ विपरीत दिशाओं में एक ही सीधी रेखा में कार्य करते हैं, परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण है:
$$B = B_1 - B_2$$\nहल करने पर व्यंजक प्राप्त होता है:
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2Md}{(d^2 - l^2)^2}$$
\nएक छोटे दंड चुंबक के लिए जहाँ $l \ll d$, $d^2$ की तुलना में $l^2$ को नगण्य माना जा सकता है:
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{d^3}$$
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### भाग 2: आंकिक प्रश्न
**दिया गया डेटा:**
* चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण ($M$) = $0.4 \, \text{A}\cdot\text{m}^2$
* दूरी ($d$) = $0.1 \, \text{m}$
* निर्वात की पारगम्यता ($\frac{\mu_0}{4\pi}$) = $10^{-7} \, \text{T}\cdot\text{m/A}$
**सूत्र:**
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{d^3}$$
**चरण-दर-चरण गणना:**
1. मान रखने पर:
$$B = 10^{-7} \times \frac{2 \times 0.4}{(0.1)^3}$$
2. अंश को सरल करने पर:
$$2 \times 0.4 = 0.8$$
3. हर को सरल करने पर:
$$(0.1)^3 = 10^{-3}$$
4. भाग देने पर:
$$B = 10^{-7} \times \frac{0.8}{10^{-3}} = 0.8 \times 10^{-4} \, \text{T} = 8 \times 10^{-5} \, \text{Tesla (T)}$$
**उत्तर:**\nदिए गए बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता $8 \times 10^{-5} \, \text{T}$ है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nबाह्य चुंबकीय क्षेत्र के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर पदार्थों को विभिन्न चुंबकीय श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। यह व्यवहार परमाणु चुंबकीय आघूर्णों के संरेखण द्वारा निर्धारित होता है।
### विस्तृत तुलना
1. **बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:**
- **प्रतिचुंबकीय पदार्थ (Diamagnetic):** ये पदार्थ चुंबक द्वारा हल्के से प्रतिकर्षित होते हैं। असमान चुंबकीय क्षेत्र में ये मजबूत से कमजोर क्षेत्र की ओर जाते हैं।
- **अनुचुंबकीय पदार्थ (Paramagnetic):** ये पदार्थ चुंबक द्वारा हल्के से आकर्षित होते हैं। असमान क्षेत्र में ये कमजोर से मजबूत क्षेत्र की ओर जाते हैं।
- **लौहचुंबकीय पदार्थ (Ferromagnetic):** ये पदार्थ चुंबक द्वारा बहुत मजबूती से आकर्षित होते हैं और क्षेत्र की दिशा में चुम्बकीय हो जाते हैं।
2. **चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi$):**
- **प्रतिचुंबकीय:** प्रवृत्ति छोटी और ऋणात्मक होती है। यह तापमान से स्वतंत्र होती है।
- **अनुचुंबकीय:** प्रवृत्ति छोटी और धनात्मक होती है। यह तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है (क्यूरी का नियम)।
- **लौहचुंबकीय:** प्रवृत्ति बहुत बड़ी और धनात्मक होती है। तापमान बढ़ने पर यह घटती है और क्यूरी तापमान के बाद अनुचुंबकीय हो जाती है।
3. **आपेक्षिक पारगम्यता ($\mu_r$):**
- **प्रतिचुंबकीय:** 1 से थोड़ा कम ($0 < \mu_r < 1$)।
- **अनुचुंबकीय:** 1 से थोड़ा अधिक ($\mu_r > 1$)।
- **लौहचुंबकीय:** 1 से बहुत अधिक ($\mu_r \gg 1$)।
4. **तापमान का प्रभाव:**
- **प्रतिचुंबकीय:** चुंबकीय प्रवृत्ति तापमान से अप्रभावित रहती है।
- **अनुचुंबकीय:** प्रवृत्ति क्यूरी के नियम $\chi = C / T$ का पालन करती है।
- **लौहचुंबकीय:** प्रवृत्ति क्यूरी-वीस नियम के अनुसार घटती है: $\chi = C / (T - T_c)$।
5. **उदाहरण:**
- **प्रतिचुंबकीय:** बिस्मथ, तांबा, पानी, सोना।
- **अनुचुंबकीय:** एल्यूमीनियम, प्लैटिनम, ऑक्सीजन, सोडियम।
- **लौहचुंबकीय:** लोहा, कोबाल्ट, निकेल, एलनिको।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- चुंबकीय क्षेत्र के साथ कोण, $\theta = 30^\circ$
- बाह्य चुंबकीय क्षेत्र, $B = 0.25 \text{ T}$
- बल आघूर्ण, $\tau = 4.5 \times 10^{-2} \text{ J}$
- चुंबक की लंबाई, $2l = 5 \text{ cm} = 5 \times 10^{-2} \text{ m}$
### चरण 1: चुंबकीय आघूर्ण ($M$) की गणना करना\nएकसमान चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय द्विध्रुव पर कार्य करने वाले बल आघूर्ण का सूत्र है:
$$\tau = M B \sin\theta$$
$M$ के लिए हल करने पर:
$$M = \frac{\tau}{B \sin\theta}$|
\nमान रखने पर:
$$M = \frac{4.5 \times 10^{-2}}{0.25 \times \sin(30^\circ)}$$
\nचूंकि $\sin(30^\circ) = 0.5$:
$$M = \frac{4.5 \times 10^{-2}}{0.25 \times 0.5} = 0.36 \text{ A}\cdot\text{m}^2$$
### चरण 2: ध्रुव प्रबलता ($m$) की गणना करना\nचुंबकीय आघूर्ण और ध्रुव प्रबलता के बीच संबंध:
$$M = m \times 2l$$
$m$ के लिए हल करने पर:
$$m = \frac{M}{2l} = \frac{0.36}{5 \times 10^{-2}} = 7.2 \text{ A}\cdot\text{m}$$
### अंतिम उत्तर:
- चुंबकीय आघूर्ण का परिमाण **$0.36 \text{ A}\cdot\text{m}^2$** है।
- ध्रुव प्रबलता **$7.2 \text{ A}\cdot\text{m}$** है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nएक छड़ चुंबक दो समान और विपरीत चुंबकीय ध्रुवों से मिलकर बने चुंबकीय द्विध्रुव की तरह व्यवहार करती है जो एक छोटी दूरी से अलग होते हैं। अक्षीय बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करने के लिए, हम उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव दोनों के योगदान पर विचार करते हैं।
### व्यपत्ति (Derivation)
1. मान लीजिए $2l$ लंबाई और $m$ ध्रुव सामर्थ्य वाली एक छड़ चुंबक का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $M = m \times 2l$ है।
2. मान लीजिए चुंबक के केंद्र ($O$) से $r$ दूरी पर अक्षीय रेखा पर एक बिंदु $P$ है।
3. उत्तरी ध्रुव ($N$) से बिंदु $P$ की दूरी $(r - l)$ है, और दक्षिणी ध्रुव ($S$) से दूरी $(r + l)$ है।
4. उत्तरी ध्रुव के कारण बिंदु $P$ पर चुंबकीय क्षेत्र ($B_N$), $N$ से दूर की ओर होता है और इसे इस प्रकार लिखा जाता है:
$$B_N = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m}{(r-l)^2}$$
5. दक्षिणी ध्रुव के कारण बिंदु $P$ पर चुंबकीय क्षेत्र ($B_S$), $S$ की ओर होता है और इसे इस प्रकार लिखा जाता है:
$$B_S = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m}{(r+l)^2}$$
6. बिंदु $P$ पर कुल चुंबकीय क्षेत्र $B$, $B_N$ की दिशा में कार्य करता है:
$$B = B_N - B_S$$
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} m \left[ \frac{1}{(r-l)^2} - \frac{1}{(r+l)^2} \right]$$
हल करने पर:
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2Mr}{(r^2 - l^2)^2}$$
### एक छोटे छड़ चुंबक के लिए\nयदि चुंबक दूरी $r$ की तुलना में बहुत छोटी है ($l \ll r$), तो $r^2$ की तुलना में $l^2$ को नगण्य माना जा सकता है:
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}$$
उत्तर (Answer): ### परिचय\nचुंबकीय पदार्थों को बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय। यह वर्गीकरण उनकी चुंबकीय संवेदनशीलता, पारगम्यता और तापमान पर निर्भर करता है।
### अंतर के बिंदु
1. **बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:**
- *प्रतिचुंबकीय:* मजबूत चुंबकीय क्षेत्र द्वारा कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं।
- *अनुचुंबकीय:* चुंबकीय क्षेत्र द्वारा कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं।
- *लौहचुंबकीय:* चुंबकीय क्षेत्र द्वारा बहुत तीव्रता से आकर्षित होते हैं।
2. **चुंबकीय संवेदनशीलता ($\chi$):**
- *प्रतिचुंबकीय:* छोटी और ऋणात्मक होती है।
- *अनुचुंबकीय:* छोटी और धनात्मक होती है।
- *लौहचुंबकीय:* बहुत बड़ी और धनात्मक होती है।
3. **चुंबकीय पारगम्यता ($\mu$):**
- *प्रतिचुंबकीय:* एक से थोड़ी कम होती है।
- *अनुचुंबकीय:* एक से थोड़ी अधिक होती है।
- *लौहचुंबकीय:* बहुत अधिक होती है।
4. **तापमान का प्रभाव:**
- *प्रतिचुंबकीय:* इनकी संवेदनशीलता तापमान पर निर्भर नहीं करती।
- *अनुचुंबकीय:* इनकी संवेदनशीलता निरपेक्ष तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है (क्यूरी का नियम)।
- *लौहचुंबकीय:* तापमान बढ़ने पर संवेदनशीलता घटती है और क्यूरी तापमान ($T_c$) के बाद यह अनुचुंबकीय बन जाते हैं।
5. **डोमेन सिद्धांत:**
- *प्रतिचुंबकीय:* परमाणु युग्मित इलेक्ट्रॉनों वाले होते हैं।
- *Paramagnetic:* परमाणुओं में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- *Ferromagnetic:* इनमें डोमेन होते हैं जहाँ चुंबकीय आघूर्ण एक ही दिशा में संरेखित होते हैं।
6. **उदाहरण:**
- *प्रतिचुंबकीय:* बिस्मथ, तांबा, पानी।
- *अनुचुंबकीय:* एल्युमिनियम, सोडियम, ऑक्सीजन।
- *लौहचुंबकीय:* लोहा, कोबाल्ट, निकेल।
उत्तर (Answer): ### चुंबकीय वर्गीकरण का परिचय\nबाहरी चुंबकीय क्षेत्र के प्रति उनकी प्रतिक्रिया और उनकी आंतरिक परमाणु संरचना के आधार पर, चुंबकीय पदार्थों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थ।
### 1. प्रतिचुंबकीय पदार्थ\nप्रतिचुंबकीय पदार्थ वे पदार्थ हैं जो चुंबक द्वारा हल्के से प्रतिकर्षित होते हैं और चुंबकीय क्षेत्र के मजबूत हिस्से से कमजोर हिस्से की ओर जाने की प्रवृत्ति रखते हैं।
* **गुण:**
- चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$) कम और ऋणात्मक होती है।
- आपेक्षिक पारगम्यता ($\mu_r$) 1 से थोड़ी कम होती है ($0 \le \mu_r < 1$)।
- वे क्यूरी के नियम का पालन नहीं करते हैं; उनकी चुंबकीय प्रवृत्ति तापमान से स्वतंत्र होती है।
* **उदाहरण:** बिस्मथ, तांबा, पानी, सोना।
### 2. अनुचुंबकीय पदार्थ\nअनुचुंबकीय पदार्थ वे पदार्थ हैं जो चुंबक द्वारा हल्के से आकर्षित होते हैं और चुंबकीय क्षेत्र के कमजोर हिस्से से मजबूत हिस्से की ओर जाने की प्रवृत्ति रखते हैं।
* **गुण:**
- चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$) छोटी और धनात्मक होती है।
- आपेक्षिक पारगम्यता ($\mu_r$) 1 से थोड़ी अधिक होती है ($\mu_r > 1$)।
- वे क्यूरी के नियम का पालन करते हैं: चुंबकीय प्रवृत्ति परम तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($\chi_m \propto 1/T$)।
* **Examples:** एल्यूमीनियम, प्लेटिनम, सोडियम, ऑक्सीजन।
### 3. लौहचुंबकीय पदार्थ\nलौहचुंबकीय पदार्थ वे पदार्थ हैं जो चुंबक द्वारा तीव्रता से आकर्षित होते हैं और अनुप्रयुक्त क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकीय हो जाते हैं।
* **गुण:**
- चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$) बहुत अधिक और धनात्मक होती है।
- आपेक्षिक पारगम्यता ($\mu_r$) बहुत अधिक होती है।
- वे क्यूरी तापमान ($T_c$) से ऊपर के तापमान पर क्यूरी-वीस नियम का पालन करते हैं, जहाँ $\chi_m \propto \frac{1}{T - T_c}$।
* **उदाहरण:** लोहा, कोबाल्ट, निकल, एल्निको।
### सारांश\nट्रांसफार्मर क्रोड से लेकर स्थायी चुंबक और चुंबकीय ढाल तक के अनुप्रयोगों के लिए इन भेदों को समझना महत्वपूर्ण है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nबाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखे जाने पर पदार्थ अपने घटकों के इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था और गति के कारण विभिन्न चुंबकीय व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर, चुंबकीय पदार्थों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थ।
### 1. प्रतिचुंबकीय पदार्थ
* **चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:** प्रतिचुंबकीय पदार्थों को चुंबक द्वारा हल्के से प्रतिकर्षित किया जाता है। जब इन्हें असमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो ये क्षेत्र के मजबूत भाग से कमजोर भाग की ओर जाने का प्रयास करते हैं।
* **चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi$):** इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति छोटी और ऋणात्मक होती है (उदा. $\chi = -10^{-5}$)। यह तापमान पर निर्भर नहीं करती है।
* **आपेक्षिक पारगम्यता ($\mu_r$):** 1 से थोड़ी कम होती है ($0 < \mu_r < 1$)।
* **उत्पत्ति:** यह गुण इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति के कारण उत्पन्न होता है जो बाह्य क्षेत्र का विरोध करने वाले प्रेरित चुंबकीय आघूर्ण बनाते हैं।
* **उदाहरण:** बिस्मथ, तांबा, पानी, सोना और सीसा।
### 2. अनुचुंबकीय पदार्थ
* **चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:** अनुचुंबकीय पदार्थों को चुंबक द्वारा हल्के से आकर्षित किया जाता है। ये असमान चुंबकीय क्षेत्र के कमजोर भाग से मजबूत भाग की ओर गति करते हैं।
* **चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi$):** इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति छोटी और धनात्मक होती है (उदा. $\chi = +10^{-4}$)।
* **तापमान का प्रभाव:** क्यूरी के नियम के अनुसार, प्रवृत्ति निरपेक्ष तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($\chi \propto \frac{1}{T}$)। तापमान बढ़ने पर तापीय विक्षोभ संरेखण को बाधित करता है, जिससे प्रवृत्ति घट जाती है।
* **आपेक्षिक पारगम्यता ($\mu_r$):** 1 से थोड़ी अधिक होती है ($\mu_r > 1$)।
* **उत्पत्ति:** असंतुलित इलेक्ट्रॉन चक्रण के कारण परमाणुओं या अणुओं में एक शुद्ध स्थायी चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण होता है।
* **उदाहरण:** एल्यूमीनियम, सोडियम, कैल्शियम और ऑक्सीजन।
### 3. लौहचुंबकीय पदार्थ
* **चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:** लौहचुंबकीय पदार्थों को चुंबक द्वारा मजबूती से आकर्षित किया जाता है और ये बाह्य क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुंबकित हो जाते हैं।
* **चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi$):** इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति बहुत अधिक और धनात्मक होती है ($\chi \gg 1$)।
* **तापमान का प्रभाव:** क्यूरी तापमान ($T_C$) नामक विशिष्ट तापमान से ऊपर, लौहचुंबकीय पदार्थ अनुचुंबकीय हो जाते हैं (क्यूरी-वाइिस नियम: $\chi \propto \frac{1}{T - T_C}$)। $T_C$ से नीचे, ये डोमेन नामक सूक्ष्म क्षेत्रों में मौजूद होते हैं।
* **आपेक्षिक पारगम्यता ($\mu_r$):** बहुत अधिक, सैकड़ों से हजारों तक होती है ($\mu_r \gg 1$)।
* **उत्पत्ति:** आसन्न परमाणु चुंबकीय आघूर्णों के बीच मजबूत युग्मन उन्हें डोमेन में समानांतर संरेखित करने के लिए मजबूर करता है।
* **उदाहरण:** लोहा, कोबाल्ट, निकल और मिश्र धातुएं।
उत्तर (Answer): ### चुंबकीय पदार्थों का परिचय\nबाह्य चुंबकीय क्षेत्र के प्रति उनकी प्रतिक्रिया और उनकी परमाणु या आणविक चुंबकीय संरचनाओं के आधार पर पदार्थों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। मुख्य चुंबकीय वर्गीकरण प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थ हैं।
### 1. प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) पदार्थ
* **चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:** प्रतिचुंबकीय पदार्थ चुंबक द्वारा कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं। असमान चुंबकीय क्षेत्र में रखे जाने पर, वे क्षेत्र के मजबूत भागों से कमजोर भागों की ओर जाने की प्रवृत्ति रखते हैं।
* **चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi$):** इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति छोटी और ऋणात्मक होती है ($\chi < 0$);
* **सापेक्ष पारगम्यता ($\mu_r$):** इनकी सापेक्ष पारगम्यता इकाई से थोड़ी कम होती है ($\mu_r < 1$);
* **तापमान का प्रभाव:** प्रतिचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति तापमान से स्वतंत्र होती है।
* **उत्पत्ति:** यह गुण इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति के कारण उत्पन्न होता है जो बाहरी क्षेत्र का विरोध करने वाले प्रेरित चुंबकीय आघूर्ण बनाते हैं।
* **उदाहरण:** बिस्मथ, तांबा, पानी, सोना और नाइट्रोजन।
### 2. अनुचुंबकीय (Paramagnetic) पदार्थ
* **चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:** अनुचुंबकीय पदार्थ चुंबक द्वारा कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं। असमान चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर वे धीरे-धीरे कमजोर भागों से मजबूत भागों की ओर बढ़ते हैं।
* **चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi$):** इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति छोटी और धनात्मक होती है ($\chi > 0$);
* **सापेक्ष पारगम्यता ($\mu_r$):** इनकी सापेक्ष पारगम्यता इकाई से थोड़ी अधिक होती है ($\mu_r > 1$);
* **तापमान का प्रभाव:** क्यूरी के नियम के अनुसार, अनुचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति निरपेक्ष तापमान ($T$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात $\chi \propto \frac{1}{T}$;
* **उत्पत्ति:** इन पदार्थों के परमाणुओं या अणुओं में असंतुलित इलेक्ट्रॉन चक्रण के कारण एक शुद्ध स्थायी चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण होता है।
* **उदाहरण:** एल्यूमीनियम, सोडियम, कैल्शियम, ऑक्सीजन और प्लेटिनम।
### 3. लौहचुंबकीय (Ferromagnetic) पदार्थ
* **चुंबकीय क्षेत्र में व्यवहार:** लौहचुंबकीय पदार्थ चुंबक द्वारा प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं। असमान चुंबकीय क्षेत्र में वे बहुत तेजी से कमजोर से मजबूत क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं।
* **चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi$):** इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति बहुत अधिक और धनात्मक होती है ($\chi \gg 0$);
* **सापेक्ष पारगम्यता ($\mu_r$):** इनकी सापेक्ष पारगम्यता बहुत बड़ी होती है (1 से बहुत अधिक);
* **तापमान का प्रभाव:** क्यूरी तापमान ($T_c$) नामक विशिष्ट तापमान से ऊपर, लौहचुंबकीय पदार्थ अनुचुंबकीय पदार्थों में परिवर्तित हो जाते हैं।
* **उत्पत्ति:** इनमें सूक्ष्म क्षेत्र होते हैं जिन्हें डोमेन कहा जाता है जहाँ चुंबकीय आघूर्ण एक-दूसरे के समानांतर संरेखित होते हैं।
* **उदाहरण:** लोहा, कोबाल्ट, निकल और विभिन्न मिश्र धातुएँ।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा
* चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण ($M$) = $0.48 \text{ J T}^{-1}$
* दूरी ($r$) = $10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m}$
* निर्वात की पारगम्यता ($\frac{\mu_0}{4\pi}$) = $10^{-7} \text{ T m A}^{-1}$
### (a) अक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र ($B_{\text{axial}}$)
1. **सूत्र:**
छोटे छड़ चुंबक के लिए अक्षीय बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र है:
$$B_{\text{axial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}$$
2. **मान रखना:**
$$B_{\text{axial}} = 10^{-7} \times \frac{2 \times 0.48}{(0.1)^3}$$
$$B_{\text{axial}} = 10^{-7} \times \frac{0.96}{0.001}$$
$$B_{\text{axial}} = 9.6 \times 10^{-5} \text{ T}$$
3. **दिशा:**
अक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण सदिश की दिशा (दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर) होती है।
### (b) निरक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र ($B_{\text{equatorial}}$)
1. **सूत्र:**
छोटे छड़ चुंबक के लिए निरक्षीय बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र है:
$$B_{\text{equatorial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3}$$
2. **मान रखना:**
$$B_{\text{equatorial}} = 10^{-7} \times \frac{0.48}{(0.1)^3}$$
$$B_{\text{equatorial}} = 10^{-7} \times \frac{0.48}{0.001}$$
$$B_{\text{equatorial}} = 4.8 \times 10^{-5} \text{ T}$$
3. **दिशा:**
निरक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण सदिश की विपरीत दिशा (उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर) होती है।
### अंतिम उत्तर
* (a) अक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र $9.6 \times 10^{-5} \text{ T}$ है, जिसकी दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर है।
* (b) निरक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र $4.8 \times 10^{-5} \text{ T}$ है, जिसकी दिशा उत्तर से दक्षिण की ओर है।
उत्तर (Answer): ### छड़ चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र का परिचय\nएक छड़ चुंबक एक चुंबकीय द्विध्रुव की तरह व्यवहार करती है जिसमें दो समान और विपरीत चुंबकीय ध्रुव (उत्तरी और दक्षिणी) एक छोटी दूरी पर स्थित होते हैं। इस छड़ चुंबक के कारण अंतरिक्ष में किसी भी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता की गणना चुंबकत्व के कूलॉम के नियम का उपयोग करके की जा सकती है।
### अक्षीय स्थिति के लिए व्यंजक की व्युत्पत्ति\nमान लीजिए $2l$ लंबाई और $m$ ध्रुव प्रबलता की एक छड़ चुंबक है। मान लीजिए चुंबक के केंद्र $O$ से $r$ दूरी पर उसकी अक्षीय रेखा पर एक बिंदु $P$ है।
1. **उत्तरी ध्रुव ($N$) के कारण बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र:**
उत्तरी ध्रुव से बिंदु $P$ की दूरी $(r - l)$ है। चुंबकीय क्षेत्र $B_1$ उत्तरी ध्रुव से दूर की दिशा में होता है:
$$B_1 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m}{(r - l)^2}$$
2. **दक्षिणी ध्रुव ($S$) के कारण बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र:**
दक्षिणी ध्रुव से बिंदु $P$ की दूरी $(r + l)$ है। चुंबकीय क्षेत्र $B_2$ दक्षिणी ध्रुव की ओर होता है:
$$B_2 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m}{(r + l)^2}$$
3. **परिणामी चुंबकीय क्षेत्र ($B$):**
चूंकि $B_1$ और $B_2$ एक ही सीधी रेखा में विपरीत दिशाओं में कार्य करते हैं, बिंदु $P$ पर परिणामी चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण है:
$$B = B_1 - B_2 = \frac{\mu_0}{4\pi} m \left[ \frac{1}{(r - l)^2} - \frac{1}{(r + l)^2} \right]$$
हम जानते हैं कि चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $M = m \times 2l$ है। इसे प्रतिस्थापित करने पर:
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2Mr}{(r^2 - l^2)^2}$$
### छोटे छड़ चुंबक के लिए विशेष स्थिति\nयदि चुंबक दूरी $r$ की तुलना में बहुत छोटी है (अर्थात $l \ll r$), तो $r^2$ की तुलना में $l^2$ को नगण्य माना जा सकता है:
$$B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}$$
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, एक छोटे छड़ चुंबक के अक्षीय बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता उसके केंद्र से दूरी के घन के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:
- चुंबकीय आघूर्ण, $M = 0.5 \text{ A}\cdot\text{m}^2$
- दूरी, $r = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m}$
- पारगम्यता स्थिरांक, $\frac{\mu_0}{4\pi} = 10^{-7} \text{ T}\cdot\text{m/A}$
**(i) अक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र:**\nएक छोटे छड़ चुंबक की अक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र है:
$$B_{\text{axial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}$$
\nमानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$B_{\text{axial}} = 10^{-7} \times \frac{2 \times 0.5}{(0.1)^3}$$
$$B_{\text{axial}} = 10^{-7} \times \frac{1.0}{10^{-3}}$$
$$B_{\text{axial}} = 10^{-4} \text{ T} = 0.1 \text{ mT}$|
**(ii) निरक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र:**\nएक छोटे छड़ चुंबक की निरक्षीय रेखा पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र है:
$$B_{\text{equatorial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3}$$
\nमानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$B_{\text{equatorial}} = 10^{-7} \times \frac{0.5}{(0.1)^3}$$
$$B_{\text{equatorial}} = 10^{-7} \times \frac{0.5}{10^{-3}}$$
$$B_{\text{equatorial}} = 0.5 \times 10^{-4} \text{ T} = 0.05 \text{ mT}$|
\nअतः, अक्षीय और निरक्षीय रेखाओं पर चुंबकीय क्षेत्र क्रमशः $10^{-4} \text{ T}$ और $0.5 \times 10^{-4} \text{ T}$ हैं।
उत्तर (Answer): चुंबकीय शैथिल्य वह परिघटना है जिसमें किसी लौहचुंबकीय पदार्थ का चुंबकीय प्रेरण ($B$) चुंबकन क्षेत्र ($H$) से पीछे छूट जाता है जब पदार्थ को चुंबकन और विचुंबकन के चक्र से गुजारा जाता है।
\nजब बाहरी चुंबकीय क्षेत्र $H$ बढ़ता है, तो $B$ गैर-रैखिक रूप से बढ़ता है और संतृप्ति तक पहुँच जाता है। जब $H$ को शून्य कर दिया जाता है, तो पदार्थ कुछ चुंबकत्व बनाए रखता है। इसे **धारणशीलता** (या रेमानेंस) के रूप में जाना जाता है, जो चुंबकन क्षेत्र को हटाए जाने पर पदार्थ में मौजूद अवशिष्ट चुंबकत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
\nअवशिष्ट चुंबकत्व को शून्य करने के लिए, एक विपरीत चुंबकीय क्षेत्र लागू किया जाना चाहिए। अवशिष्ट चुंबकत्व को शून्य पर लाने के लिए आवश्यक इस विपरीत चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण को **निग्राहिता** कहा जाता है।
\nचुंबकन के एक पूर्ण चक्र के दौरान प्राप्त बंद वक्र $B-H$ को शैथिल्य लूप कहा जाता है। इसका क्षेत्रफल प्रति चक्र प्रति इकाई आयतन नष्ट होने वाली थर्मल ऊर्जा के सीधे समानुपाती होता है।
उत्तर (Answer): चुंबकत्व के लिए गॉस का नियम यह बताता है कि किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है। गणितीय रूप से, इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
$$\oint \mathbf{B} \cdot d\mathbf{A} = 0$$
\nइसके विपरीत, इलेक्ट्रोस्टैटिक्स में गॉस का नियम बताता है कि एक बंद सतह से कुल विद्युत फ्लक्स $\frac{q}{\varepsilon_0}$ के बराबर होता है, जहाँ $q$ सतह द्वारा ঘेरा गया कुल आवेश है।
**मुख्य अंतर:**
1. **मोनोपोल बनाम डाइपोल:** इलेक्ट्रोस्टैटिक्स में, पृथक विद्युत आवेश (एकल धनात्मक या ऋणात्मक आवेश जैसे मोनोपोल) मौजूद होते हैं। चुंबकत्व में, पृथक चुंबकीय ध्रुव (मोनोपोल) मौजूद नहीं होते हैं; चुंबकीय ध्रुव हमेशा समान और विपरीत जोड़े (डाइपोल) में मौजूद होते हैं।
2. **क्षेत्र रेखाएं:** विद्युत क्षेत्र रेखाएं धनात्मक आवेशों से निकलती हैं और ऋणात्मक आवेशों पर समाप्त होती हैं। चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं निरंतर बंद लूप होती हैं जो चुंबक के आंतरिक भाग से गुजरती हैं।
**महत्व:** शून्य कुल चुंबकीय फ्लक्स का अर्थ है कि प्रकृति में चुंबकीय मोनोपोल मौजूद नहीं हैं, जो यह पुष्टि करता है कि चुंबकत्व का मूलभूत स्रोत व्यक्तिगत चुंबकीय आवेशों के बजाय एक करंट लूप या चुंबकीय द्विध्रुव है।
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:
- चुंबकीय आघूर्ण, $M = 6.7 \times 10^{-2} \text{ A}\cdot\text{m}^2$
- जड़त्वाघूर्ण, $I = 7.5 \times 10^{-6} \text{ kg}\cdot\text{m}^2$
- चुंबकीय क्षेत्र, $B = 0.01 \text{ T} = 10^{-2} \text{ T}$
\nचुंबकीय क्षेत्र में छड़ चुंबक के दोलन के आवर्तकाल का सूत्र है:
$$T = 2\pi \sqrt{\frac{I}{M B}}$$
\nसूत्र में दिए गए मानों को रखने पर:
$$T = 2 \times 3.1416 \times \sqrt{\frac{7.5 \times 10^{-6}}{(6.7 \times 10^{-2}) \times (10^{-2})}}$$
$$T = 6.2832 \times \sqrt{\frac{7.5 \times 10^{-6}}{6.7 \times 10^{-4}}}$$
$$T = 6.2832 \times \sqrt{1.1194 \times 10^{-2}}$$
$$T = 6.2832 \times 0.1058 \approx 0.665 \text{ सेकंड}$$
\nअतः, दोलन का आवर्तकाल लगभग 0.665 सेकंड है।
उत्तर (Answer): चुंबकीय गुणों के आधार पर पदार्थों को प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय में वर्गीकृत किया जाता है:
1. **प्रतिचुंबकीय पदार्थ:** ये पदार्थ चुंबक द्वारा कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं। इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति $(\chi_m)$ छोटी और ऋणात्मक होती है। बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर, ये क्षेत्र के मजबूत से कमजोर हिस्सों की ओर बढ़ते हैं। उदाहरणों में बिस्मथ, तांबा और पानी शामिल हैं।
2. **अनुचुंबकीय पदार्थ:** ये पदार्थ चुंबक द्वारा कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं। इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति $(\chi_m)$ छोटी और धनात्मक होती है। बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर, ये क्षेत्र की दिशा में कमजोर रूप से संरेखित होते हैं, और कमजोर से मजबूत हिस्सों की ओर बढ़ते हैं। उदाहरणों में एल्यूमीनियम, सोडियम और कैल्शियम शामिल हैं।
3. **लौहचुंबकीय पदार्थ:** ये पदार्थ चुंबक द्वारा दृढ़ता से आकर्षित होते हैं। इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति $(\chi_m)$ बहुत बड़ी और धनात्मक होती है। ये लागू क्षेत्र की दिशा में दृढ़ता से चुम्बکیत होते हैं और बाहरी क्षेत्र को हटाने के बाद भी अपने चुंबकत्व को बनाए रखते हैं (शैथिल्य)। उदाहरणों में लोहा, कोबाल्ट और निकल शामिल हैं।