Chapter Chai • Board Revision Guide
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प्रत्यावर्ती धारा

Subject: भौतिकी | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

कक्षा 12 भौतिक विज्ञान - अध्याय 7: प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current)

त्वरित रिवीजन नोट्स एवं सूत्र (Quick Revision Notes & Formulas)


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1. प्रत्यावर्ती धारा एवं वोल्टता (AC Current and Voltage)

वह धारा/वोल्टता जिसका परिमाण और दिशा समय के साथ आवर्ती रूप (Periodically) से परिवर्तित होते हैं, प्रत्यावर्ती धारा/वोल्टता कहलाती है।




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2. महत्वपूर्ण मान (Important Values)



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3. विभिन्न प्रकार के AC परिपथ (AC Circuits)

| परिपथ का प्रकार | प्रतिबाधा / प्रतिघात (Z / X) | कलांतर (Phase Difference, φ) | धारा और वोल्टता का संबंध |

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| केवल शुद्ध प्रतिरोध (R) | Z = R | φ = 0° | V और I समान कला में होते हैं। |

| केवल शुद्ध प्रेरकत्व (L) | प्रेरण प्रतिघात: X_L = ωL = 2πfL | φ = π/2 (90°) | धारा (I), वोल्टता (V) से 90° पश्चगामी होती है। |

| केवल शुद्ध धारिता (C) | धारितीय प्रतिघात: X_C = 1 / (ωC) = 1 / (2πfC) | φ = π/2 (90°) | धारा (I), वोल्टता (V) से 90° अग्रगामी होती है। |


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4. श्रेणी L-C-R परिपथ (Series L-C-R Circuit)

जब L, C, और R श्रेणीक्रम में जुड़े हों:





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5. विद्युत अनुनाद (Electrical Resonance)

L-C-R परिपथ में जब XL = XC हो जाता है, तो इस स्थिति को विद्युत अनुनाद कहते हैं।


1. XL = XCωL = 1 / (ωC)

2. प्रतिबाधा न्यूनतम होती है: Z_min = R

3. धारा अधिकतम होती है: I_max = V / R

4. कलांतर: φ = 0° (परिपथ शुद्ध प्रतिरोधी की भांति कार्य करता है)।




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6. प्रत्यावर्ती परिपथ में शक्ति (Power in AC Circuit)




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7. ट्रांसफॉर्मर (Transformer)

यह अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) के सिद्धांत पर कार्य करने वाली एक युक्ति है जो AC वोल्टता को परिवर्तित करती है।






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8. LC दोलन (LC Oscillations)

जब एक आवेशित संधारित्र (C) को किसी प्रेरक कुंडली (L) से जोड़ा जाता है, तो परिपथ में आवेश और धारा के वैद्युत दोलन होने लगते हैं।



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परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु (MP Board Special)

1. DC के लिए प्रतिघात:

2. तप्त तार एमीटर (Hot Wire Ammeter): यह प्रत्यावर्ती धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित होता है तथा धारा का RMS मान मापता है।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 अध्याय: प्रत्यावर्ती धारा
Overview
1. मूल अवधारणाएं प्रत्यावर्ती धारा (AC) दिशा और परिमाण आवर्ती रूप से बदलते हैं समीकरण: $I = I_0 \sin(\omega t)$ प्रत्यावर्ती वोल्टता समीकरण: $V = V_0 \sin(\omega t)$ शिखर मान ($I0, V0$) धारा या वोल्टता का अधिकतम मान वर्ग माध्य मूल मान ($I{rms}, V{rms}$) $I{rms} = \frac{I0}{\sqrt{2}} \approx 0.707 I_0$ $V{rms} = \frac{V0}{\sqrt{2}} \approx 0.707 V_0$ AC मापक यंत्र RMS मान दर्शाते हैं औसत मान ($I_{avg}$) पूर्ण चक्र के लिए = शून्य ($0$) धनात्मक अर्ध-चक्र के लिए = $\frac{2I0}{\pi} \approx 0.637 I0$ 2. AC परिपथ के घटक एवं विरोधी बल शुद्ध प्रतिरोधक ($R$) परिपथ वोल्टता और धारा समान कला में ($\phi = 0^\circ$) शुद्ध प्रेरकत्व ($L$) परिपथ वोल्टता, धारा से $90^\circ$ आगे प्रेरणिक प्रतिघात: $X_L = \omega L = 2\pi f L$ शुद्ध धारिता ($C$) परिपथ धारा, वोल्टता से $90^\circ$ आगे धारितीय प्रतिघात: $X_C = \frac{1}{\omega C} = \frac{1}{2\pi f C}$ L-C-R श्रेणी परिपथ कुल प्रतिबाधा: $Z = \sqrt{R^2 + (XL - XC)^2}$ कला कोण: $\tan\phi = \frac{XL - XC}{R}$ 3. विद्युत अनुनाद अनुनाद की स्थिति जब $XL = XC$ हो अनुनादी आवृत्ति ($f_r$) $f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{LC}}$ अनुनाद पर विशेषताएं प्रतिबाधा न्यूनतम ($Z = R$) धारा का मान अधिकतम ($I_{max} = \frac{V}{R}$) Q-कारक (गुणवत्ता गुणांक) $Q = \frac{\omega_r L}{R} = \frac{1}{R}\sqrt{\frac{L}{C}}$ परिपथ की तीक्ष्णता को दर्शाता है 4. AC परिपथ में शक्ति औसत शक्ति ($P_{avg}$) $P{avg} = V{rms} \cdot I_{rms} \cdot \cos\phi$ शक्ति गुणांक ($\cos\phi$) $\cos\phi = \frac{R}{Z}$ शुद्ध R के लिए = 1 (अधिकतम शक्ति क्षय) शुद्ध L या C के लिए = 0 (शून्य शक्ति क्षय) वाटहीन धारा जब परिपथ में शक्ति क्षय शून्य हो ($\phi = 90^\circ$) केवल शुद्ध L या C वाले परिपथ में संभव 5. मुख्य उपकरण ट्रांसफॉर्मर सिद्धांत: अन्योन्य प्रेरण कार्य: AC वोल्टता के स्तर को बदलना प्रकार: उच्चायी (Step-up): वोल्टता बढ़ाता है ($Ns > Np$) अपचयी (Step-down): वोल्टता घटाता है ($Ns < Np$) परिणमन अनुपात: $K = \frac{Ns}{Np} = \frac{Vs}{Vp} = \frac{Ip}{Is}$ ऊर्जा हानियां: ताम्र हानि, भंवर धाराएं (लौह हानि), शैथिल्य हानि, फ्लक्स क्षरण AC जनरेटर (डायनेमो) सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण कार्य: यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. **(a)** श्रेणी $LCR$ प्रत्यावर्ती धारा परिपथ की कार्यप्रणाली को समझाइए। फेज़र आरेख (Phasor diagram) विधि का उपयोग करके प्रतिबाधा ($Z$), कला कोण ($\phi$), तथा अनुनादी आवृत्ति ($f_r$) के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। **(b)** एक श्रेणी $LCR$ परिपथ में $R = 10\ \Omega$ का प्रतिरोधक, $L = 20\text{ mH}$ का प्रेरक तथा $C = 100\ \mu\text{F}$ का संधारित्र, $V = 200 \sin(100\pi t)\text{ V}$ समीकरण वाले AC वोल्टता स्रोत से जुड़े हैं। गणना कीजिए: 1. परिपथ की अनुनादी आवृत्ति। 2. अनुनाद की स्थिति में परिपथ की प्रतिबाधा। 3. अनुनाद की स्थिति में परिपथ से प्रवाहित होने वाली शिखर धारा ($I_0$)। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **भाग (a): श्रेणी $LCR$ परिपथ के लिए व्युत्पत्ति** #### **1. भूमिका एवं परिपथ विवरण**\nश्रेणी $LCR$ परिपथ में, एक प्रतिरोधक ($R$), एक प्रेरकत्व ($L$) और एक संधारित्र ($C$) को एक प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत $V = V_0 \sin(\omega t)$ के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।\nचूँकि सभी घटक श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इसलिए प्रत्येक घटक से प्रवाहित होने वाली तात्क्षणिक धारा $I$ समान होती है। --- #### **2. वोल्टता संबंध तथा फेज़र आरेख**\nधारा $I$ को X-अक्ष के अनुदिश संदर्भ फेज़र माना जाता है: * **प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर ($V_R$):** $V_R = I \cdot R$ (यह धारा $I$ की ही कला में होता है)। * **प्रेरक के सिरों पर विभवांतर ($V_L$):** $V_L = I \cdot X_L$ (जहाँ $X_L = \omega L$)। यह धारा $I$ से $\pi/2$ ($90^\circ$) कला में अग्रगामी (leading) होता है। * **संधारित्र के सिरों पर विभवांतर ($V_C$):** $V_C = I \cdot X_C$ (जहाँ $X_C = \frac{1}{\omega C}$)। यह धारा $I$ से $\pi/2$ ($90^\circ$) कला में पश्चगामी (lagging) होता है। \nचूँकि $V_L$ और $V_C$ विपरीत दिशाओं में हैं (कला अंतर $180^\circ$), इसलिए परिणामी प्रतिघाती वोल्टता $(V_L - V_C)$ होगी (यह मानते हुए कि $V_L > V_C$)। --- #### **3. प्रतिबाधा ($Z$) का व्यंजक**\nफेज़र समकोण त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय लागू करने पर: $$V^2 = V_R^2 + (V_L - V_C)^2$$ $V_R = I R$, $V_L = I X_L$, और $V_C = I X_C$ रखने पर: $$V^2 = (I R)^2 + (I X_L - I X_C)^2$$ $$V^2 = I^2 \left[ R^2 + (X_L - X_C)^2 \right]$$ $$V = I \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ $LCR$ परिपथ द्वारा धारा के मार्ग में डाले गए कुल प्रभावी अवरोध को **प्रतिबाधा ($Z$)** कहते हैं: $$Z = \frac{V}{I} = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ $$Z = \sqrt{R^2 + \left(\omega L - \frac{1}{\omega C}\right)^2}$$ --- #### **4. कला कोण ($\phi$)**\nप्रत्यावर्ती वोल्टता और धारा के बीच कला कोण $\phi$ निम्न प्रकार प्राप्त होता है: $$\tan \phi = \frac{V_L - V_C}{V_R} = \frac{X_L - X_C}{R}$$ $$\phi = \tan^{-1}\left( \frac{\omega L - \frac{1}{\omega C}}{R} \right)$$ --- #### **5. अनुनादी आवृत्ति ($f_r$)**\nअनुनाद की स्थिति में प्रेरण प्रतिघात, धारितीय प्रतिघात के बराबर हो जाता है ($X_L = X_C$), जिससे परिपथ की प्रतिबाधा न्यूनतम ($Z = R$) तथा धारा अधिकतम होती है। $$\omega_r L = \frac{1}{\omega_r C}$$ $$\omega_r^2 = \frac{1}{L C} \implies \omega_r = \frac{1}{\sqrt{L C}}$$ \nचूँकि $\omega_r = 2\pi f_r$: $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{L C}}$$ --- ### **भाग (b): आंकिक प्रश्न का हल** **दिया गया है:** * प्रतिरोध, $R = 10\ \Omega$ * प्रेरकत्व, $L = 20\text{ mH} = 20 \times 10^{-3}\text{ H} = 0.02\text{ H}$ * धारिता, $C = 100\ \mu\text{F} = 100 \times 10^{-6}\text{ F} = 10^{-4}\text{ F}$ * शिखर वोल्टता, $V_0 = 200\text{ V}$ #### **1. अनुनादी आवृत्ति ($f_r$):** $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{L C}}$$ $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{0.02 \times 10^{-4}}} = \frac{1}{2\pi \sqrt{2 \times 10^{-6}}} = \frac{1}{2\pi \times 10^{-3} \times \sqrt{2}}$$ $$f_r = \frac{1000}{2 \times 3.1416 \times 1.414} = \frac{1000}{8.886} \approx 112.54\text{ Hz}$$ #### **2. अनुनाद पर प्रतिबाधा ($Z_{res}$):**\nअनुनाद पर $X_L = X_C$ होता है, अतः: $$Z_{res} = R = 10\ \Omega$$ #### **3. अनुनाद पर शिखर धारा ($I_0$):** $$I_0 = \frac{V_0}{Z_{res}} = \frac{200\text{ V}}{10\ \Omega} = 20\text{ A}$$
Q2. एक श्रेणी LCR परिपथ में $L = 0.1\text{ H}$ का प्रेरक, $C = 10\,\mu\text{F}$ का संधारित्र और $R = 20\,\Omega$ का प्रतिरोधक $V = 220\text{ V}$ और आवृत्ति $f = 50\text{ Hz}$ वाले प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत से जुड़े हैं। \nगणना कीजिए: 1. प्रेरण प्रतिघात ($X_L$) 2. धारितीय प्रतिघात ($X_C$) 3. परिपथ की कुल प्रतिबाधा ($Z$) 4. परिपथ में प्रवाहित वर्ग माध्य मूल धारा ($I_{rms}$) 5. परिपथ का शक्ति गुणांक ($\cos\phi$) 6. दिए गए परिपथ की अनुनादी आवृत्ति ($f_r$)। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### संपूर्ण चरणबद्ध आंकिक हल **दिए गए मान:** - प्रेरकत्व ($L$) = $0.1\text{ H}$ - धारिता ($C$) = $10\,\mu\text{F} = 10 \times 10^{-6}\text{ F} = 10^{-5}\text{ F}$ - प्रतिरोध ($R$) = $20\,\Omega$ - वर्ग माध्य मूल वोल्टता ($V_{rms}$) = $220\text{ V}$ - आवृत्ति ($f$) = $50\text{ Hz}$ - कोणीय आवृत्ति ($\omega$) = $2\pi f = 2 \times 3.1416 \times 50 = 314.16\text{ rad/s}$ --- #### 1. प्रेरण प्रतिघात ($X_L$): $$X_L = 2\pi f L = \omega L$$ $$X_L = 314.16 \times 0.1 = 31.42\,\Omega$$ --- #### 2. धारितीय प्रतिघात ($X_C$): $$X_C = \frac{1}{2\pi f C} = \frac{1}{\omega C}$$ $$X_C = \frac{1}{314.16 \times 10^{-5}} = \frac{10^5}{314.16} = \frac{100000}{314.16} \approx 318.31\,\Omega$$ --- #### 3. परिपथ की कुल प्रतिबाधा ($Z$): $$Z = \sqrt{R^2 + (X_C - X_L)^2}$$ $$X_C - X_L = 318.31 - 31.42 = 286.89\,\Omega$$ $$Z = \sqrt{20^2 + (286.89)^2}$$ $$Z = \sqrt{400 + 82305.87} = \sqrt{82705.87} \approx 287.59\,\Omega$$ --- #### 4. वर्ग माध्य मूल धारा ($I_{rms}$): $$I_{rms} = \frac{V_{rms}}{Z}$$ $$I_{rms} = \frac{220}{287.59} \approx 0.765\text{ A}$$ --- #### 5. शक्ति गुणांक ($\cos\phi$): $$\cos\phi = \frac{R}{Z}$$ $$\cos\phi = \frac{20}{287.59} \approx 0.0695 \text{ (अग्रगामी, क्योंकि } X_C > X_L)$$ --- #### 6. अनुनादी आवृत्ति ($f_r$): $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{LC}}$$ $$\sqrt{LC} = \sqrt{0.1 \times 10^{-5}} = \sqrt{10^{-6}} = 10^{-3}\text{ s}$$ $$f_r = \frac{1}{2 \times 3.1416 \times 10^{-3}} = \frac{1000}{6.2832} \approx 159.15\text{ Hz}$$ --- ### परिणामों का सार: 1. **$X_L$** = $31.42\,\Omega$ 2. **$X_C$** = $318.31\,\Omega$ 3. **प्रतिबाधा ($Z$)** = $287.59\,\Omega$ 4. **RMS धारा ($I_{rms}$)** = $0.765\text{ A}$ 5. **शक्ति गुणांक ($\cos\phi$)** = $0.0695$ 6. **अनुनादी आवृत्ति ($f_r$)** = $159.15\text{ Hz}$
Q3. ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत, बनावट और कार्यप्रणाली समझाइए। एक ऊंचाई (Step-up) और एक अपचायी (Step-down) ट्रांसफॉर्मर के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। **आंकिक प्रश्न:** एक अपचायी ट्रांसफॉर्मर $2200\text{ V}$ को $220\text{ V}$ में बदलता है। प्राथमिक कुंडली में $5000$ फेरे हैं। गणना कीजिए: 1. द्वितीयक कुंडली में फेरों की संख्या। 2. यदि ट्रांसफॉर्मर की दक्षता $90\%$ है और प्राथमिक धारा $2\text{ A}$ है, तो निर्गत शक्ति और द्वितीयक धारा ज्ञात कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### ट्रांसफॉर्मर: सिद्धांत, बनावट और कार्यप्रणाली #### 1. सिद्धांत:\nट्रांसफॉर्मर एक स्थिर विद्युत उपकरण है जो **अन्योन्न प्रेरण (Mutual Induction)** के सिद्धांत पर एक AC परिपथ से दूसरे AC परिपथ में समान आवृत्ति पर विद्युत ऊर्जा का स्थानांतरण करता है। #### 2. बनावट: - **नर्म लोहे का क्रोड:** पटलित (laminated) नर्म लोहे की पत्तियों से बना होता है ताकि भंवर धाराओं (Eddy Currents) के कारण होने वाली ऊर्जा हानि को कम किया जा सके। - **कुंडलियाँ:** एक ही क्रोड पर तांबे के विद्युतरोधी तारों की दो कुंडलियां लिपटी होती हैं: - **प्राथमिक कुंडली ($N_p$ फेरे):** निवेशी (Input) AC वोल्टता स्रोत से जुड़ी होती है। - **द्वितीयक कुंडली ($N_s$ फेरे):** निर्गत (Output) लोडिंग परिपथ से जुड़ी होती है। #### 3. कार्यप्रणाली:\nजब प्राथमिक कुंडली में प्रत्यावर्ती वोल्टता लगाई जाती है, तो प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है, जिससे क्रोड में निरंतर परिवर्तित होने वाला चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न होता है। यह परिवर्तित फ्लक्स द्वितीयक कुंडली से जुड़ता है, जिससे फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियमानुसार उसमें प्रत्यावर्ती विद्युत वाहक बल (emf) प्रेरित होता है: $$\frac{e_s}{e_p} = \frac{N_s}{N_p} = K \text{ (परिणमन अनुपात)}$$ --- ### ऊंचाई (Step-up) एवं अपचायी (Step-down) ट्रांसफॉर्मर में अंतर | पैरामीटर | ऊंचाई ट्रांसफॉर्मर (Step-up) | अपचायी ट्रांसफॉर्मर (Step-down) | | :--- | :--- | :--- | | **वोल्टता** | वोल्टता बढ़ाता है ($V_s > V_p$) | वोल्टता घटाता है ($V_s < V_p$) | | **फेरों का अनुपात** | $N_s > N_p$ ($K > 1$) | $N_s < N_p$ ($K < 1$) | | **धारा** | धारा घटाता है ($I_s < I_p$) | धारा बढ़ाता है ($I_s > I_p$) | --- ### आंकिक प्रश्न का हल **दिया गया डेटा:** - प्राथमिक वोल्टता ($V_p$) = $2200\text{ V}$ - द्वितीयक वोल्टता ($V_s$) = $220\text{ V}$ - प्राथमिक फेरे ($N_p$) = $5000$ - प्राथमिक धारा ($I_p$) = $2\text{ A}$ - दक्षता ($\eta$) = $90\% = 0.90$ #### चरण 1: द्वितीयक कुंडली में फेरों की संख्या ($N_s$)\nसूत्र: $$\frac{V_s}{V_p} = \frac{N_s}{N_p}$$ $$N_s = N_p \times \left(\frac{V_s}{V_p}\right) = 5000 \times \left(\frac{220}{2200}\right)$$ $$N_s = 5000 \times 0.1 = 500\text{ फेरे}$$ #### चरण 2: निर्गत शक्ति ($P_{out}$)\nपहले, निवेशी शक्ति ($P_{in}$) की गणना करें: $$P_{in} = V_p \times I_p = 2200\text{ V} \times 2\text{ A} = 4400\text{ W}$$ \nदक्षता सूत्र $\eta = \frac{P_{out}}{P_{in}}$ का प्रयोग करने पर: $$P_{out} = \eta \times P_{in} = 0.90 \times 4400\text{ W} = 3960\text{ W}$$ #### चरण 3: द्वितीयक धारा ($I_s$)\nचूंकि $P_{out} = V_s \times I_s$: $$I_s = \frac{P_{out}}{V_s} = \frac{3960\text{ W}}{220\text{ V}} = 18\text{ A}$$ **अंतिम उत्तर:** 1. द्वितीयक कुंडली में फेरे ($N_s$) = **$500$ फेरे** 2. निर्गत शक्ति ($P_{out}$) = **$3960\text{ W}$** 3. द्वितीयक धारा ($I_s$) = **$18\text{ A}$**
Q4. श्रेणी LCR प्रत्यावर्ती धारा परिपथ क्या है? फेजर आरेख का उपयोग करके परिपथ की कुल प्रतिबाधा ($Z$), वोल्टता और धारा के बीच कलांतर ($\phi$), तथा अनुनादी आवृत्ति ($f_r$) का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### श्रेणी LCR प्रत्यावर्ती धारा परिपथ \nश्रेणी LCR परिपथ में एक प्रेरक ($L$), एक संधारित्र ($C$) और एक प्रतिरोधक ($R$) श्रेणीक्रम में एक प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत से जुड़े होते हैं, जिसे निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है: $$v = V_m \sin(\omega t)$$ \nचूंकि सभी अवयव श्रेणीक्रम में हैं, इसलिए प्रत्येक अवयव से समान तात्कालिक धारा $i = I_m \sin(\omega t - \phi)$ प्रवाहित होती है। --- ### वोल्टता अवयव एवं फेजर आरेख \nमान लीजिए परिपथ में वर्ग माध्य मूल धारा $I$ है। विभिन्न अवयवों के सिरों पर वोल्टता निम्नलिखित है: 1. **प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टता ($V_R$):** $V_R = I \cdot R$ (धारा $I$ की कला में) 2. **प्रेरक के सिरों पर वोल्टता ($V_L$):** $V_L = I \cdot X_L$ (धारा $I$ से $\pi/2$ कोण या $90^\circ$ अग्रगामी) 3. **संधारित्र के सिरों पर वोल्टता ($V_C$):** $V_C = I \cdot X_C$ (धारा $I$ से $\pi/2$ कोण या $90^\circ$ पश्चगामी) \nजहाँ: - $X_L = \omega L$ (प्रेरण प्रतिघात) - $X_C = \frac{1}{\omega C}$ (धारितीय प्रतिघात) --- ### कुल प्रतिबाधा ($Z$) का व्यंजक \nयह मानते हुए कि $V_L > V_C$, $V_R$ के लंबवत परिणामी प्रतिक्रियात्मक वोल्टता $(V_L - V_C)$ होगी। \nपरिणामी वोल्टता $V$ के फेजर त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय लागू करने पर: $$V^2 = V_R^2 + (V_L - V_C)^2$$ $V_R = I \cdot R$, $V_L = I \cdot X_L$, तथा $V_C = I \cdot X_C$ का मान रखने पर: $$V^2 = (I \cdot R)^2 + (I \cdot X_L - I \cdot X_C)^2$$ $$V^2 = I^2 \left[ R^2 + (X_L - X_C)^2 \right]$$ $$V = I \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ \nप्रत्यावर्ती धारा परिपथ के कुल प्रभावी प्रतिरोध को **प्रतिबाधा ($Z$)** कहते हैं: $$Z = \frac{V}{I} = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ $$Z = \sqrt{R^2 + \left(\omega L - \frac{1}{\omega C}\right)^2}$$ --- ### कलांतर ($\phi$) का व्यंजक \nप्रतिबाधा फेजर त्रिभुज से, कला कोण $\phi$ का स्पर्शजया (tangent) निम्न प्रकार है: $$\tan\phi = \frac{V_L - V_C}{V_R} = \frac{X_L - X_C}{R}$$ $$\phi = \tan^{-1}\left( \frac{\omega L - \frac{1}{\omega C}}{R} \right)$$ --- ### अनुनादी आवृत्ति ($f_r$) \nविद्युत अनुनाद की स्थिति तब होती है जब प्रेरण प्रतिघात, धारितीय प्रतिघात के बराबर हो जाता है ($X_L = X_C$), जिससे परिपथ की प्रतिबाधा न्यूनतम ($Z = R$) तथा धारा का आयाम अधिकतम हो जाता है। $$X_L = X_C$$ $$\omega_r L = \frac{1}{\omega_r C}$$ $$\omega_r^2 = \frac{1}{LC} \implies \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ \nचूंकि $\omega_r = 2\pi f_r$: $$2\pi f_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{LC}}$$ \nजहाँ $f_r$ श्रेणी LCR परिपथ की **अनुनादी आवृत्ति** है।
Q5. एक प्रत्यावर्ती वोल्टता $V = 200\sqrt{2} \sin(1000t)\text{ V}$ को $R = 400\ \Omega$ के प्रतिरोधक, $L = 0.1\text{ H}$ के प्रेरकत्व तथा $C = 2.5\ \mu\text{F}$ के संधारित्र वाले श्रेणी LCR परिपथ पर लागू किया जाता है। \nचरण-दर-चरण निम्नलिखित की गणना कीजिए: (i) प्रेरण प्रतिघात ($X_L$) तथा धारितीय प्रतिघात ($X_C$) (ii) परिपथ की कुल प्रतिबाधा ($Z$) (iii) शिखर धारा ($I_0$) तथा वर्ग माध्य मूल धारा ($I_{\text{rms}}$) (iv) परिपथ का शक्ति गुणांक ($\cos\phi$) (v) दिए गए परिपथ की अनुनादी आवृत्ति ($f_r$) 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **चरण-दर-चरण आंकिक हल** #### **दिए गए मान:** - आपूर्ति वोल्टता समीकरण: $V(t) = 200\sqrt{2} \sin(1000t)\text{ V}$ - मानक AC वोल्टता समीकरण $V(t) = V_0 \sin(\omega t)$ से तुलना करने पर: - शिखर वोल्टता ($V_0$) = $200\sqrt{2}\text{ V}$ - कोणीय आवृत्ति ($\omega$) = $1000\text{ rad/s}$ - RMS वोल्टता ($V_{\text{rms}}$) = $\frac{V_0}{\sqrt{2}} = \frac{200\sqrt{2}}{\sqrt{2}} = 200\text{ V}$ - प्रतिरोध ($R$) = $400\ \Omega$ - प्रेरकत्व ($L$) = $0.1\text{ H}$ - धारिता ($C$) = $2.5\ \mu\text{F} = 2.5 \times 10^{-6}\text{ F}$ --- #### **चरण (i): प्रेरण प्रतिघात ($X_L$) तथा धारितीय प्रतिघात ($X_C$) की गणना** 1. **प्रेरण प्रतिघात ($X_L$):** $$X_L = \omega L$$ $$X_L = 1000 \times 0.1 = 100\ \Omega$$ 2. **धारितीय प्रतिघात ($X_C$):** $$X_C = \frac{1}{\omega C}$$ $$X_C = \frac{1}{1000 \times 2.5 \times 10^{-6}} = \frac{1}{2.5 \times 10^{-3}} = \frac{1000}{2.5} = 400\ \Omega$$ --- #### **चरण (ii): कुल प्रतिबाधा ($Z$) की गणना**\nश्रेणी LCR परिपथ के लिए कुल प्रतिबाधा का सूत्र है: $$Z = \sqrt{R^2 + (X_C - X_L)^2}$$ \nमान रखने पर: $$Z = \sqrt{(400)^2 + (400 - 100)^2}$$ $$Z = \sqrt{400^2 + 300^2}$$ $$Z = \sqrt{160000 + 90000} = \sqrt{250000}$$ $$Z = 500\ \Omega$$ --- #### **चरण (iii): शिखर धारा ($I_0$) तथा वर्ग माध्य मूल धारा ($I_{\text{rms}}$) की गणना** 1. **शिखर धारा ($I_0$):** $$I_0 = \frac{V_0}{Z} = \frac{200\sqrt{2}}{500} = 0.4\sqrt{2}\text{ A} \approx 0.566\text{ A}$$ 2. **वर्ग माध्य मूल (RMS) धारा ($I_{\text{rms}}$):** $$I_{\text{rms}} = \frac{V_{\text{rms}}}{Z} = \frac{200}{500} = 0.4\text{ A}$$ --- #### **चरण (iv): शक्ति गुणांक ($\cos\phi$) की गणना**\nशक्ति गुणांक का सूत्र है: $$\cos\phi = \frac{R}{Z}$$ $$\cos\phi = \frac{400}{500} = 0.8$$ *(चूँकि $X_C > X_L$ है, इसलिए परिपथ धारितीय है तथा धारा वोल्टता से आगे है)।* --- #### **चरण (v): अनुनादी आवृत्ति ($f_r$) की गणना**\nअनुनादी आवृत्ति का सूत्र है: $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{LC}}$$ $L$ तथा $C$ के मान रखने पर: $$\sqrt{LC} = \sqrt{0.1 \times 2.5 \times 10^{-6}} = \sqrt{0.25 \times 10^{-6}} = 0.5 \times 10^{-3}\text{ s}$$ $$f_r = \frac{1}{2\pi \times (0.5 \times 10^{-3})} = \frac{1000}{\pi}\text{ Hz} \approx \frac{1000}{3.1416} \approx 318.31\text{ Hz}$$
Q6. चित्र निरूपण के साथ ट्रांसफार्मर के सिद्धांत, संरचना और कार्यविधि की व्याख्या कीजिए। एक वास्तविक ट्रांसफार्मर में होने वाली चार प्रमुख ऊर्जा हानियों तथा उन्हें कम करने के लिए उपयोग की जाने वाली विधियों की भी चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **ट्रांसफार्मर: सिद्धांत, संरचना, कार्यविधि तथा हानियाँ** #### **1. ट्रांसफार्मर का सिद्धांत**\nट्रांसफार्मर एक ऐसी स्थिर विद्युत युक्ति है जिसका उपयोग आवृति को परिवर्तित किए बिना प्रत्यावर्ती वोल्टता को बढ़ाने (अपचायी/Step-up) या घटाने (उपचायी/Step-down) के लिए किया जाता है। यह **अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction)** के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब प्राथमिक कुंडली में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है, तो क्रोड में एक निरंतर बदलते चुंबकीय फ्लक्स का निर्माण होता है, जो द्वितीयक कुंडली से जुड़कर उसमें एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) उत्पन्न करता है। --- #### **2. संरचना**\nट्रांसफार्मर के मुख्य रूप से दो भाग होते हैं: * **पटलित नर्म लोहे का क्रोड (Laminated Soft Iron Core):** यह सिलिकॉन स्टील की पतली पत्तियों (पटलित) को वार्निश की परत द्वारा एक-दूसरे से पृथक्कृत करके बनाया जाता है ताकि भंवर धाराओं को कम किया जा सके। * **दो कुंडलियाँ (वाइंडिंग):** - **प्राथमिक कुंडली ($N_p$ फेरे):** यह इनपुट प्रत्यावर्ती स्रोत ($V_p$) से जुड़ी होती है। - **द्वितीयक कुंडली ($N_s$ फेरे):** यह आउटपुट लोड प्रतिरोध ($V_s$) से जुड़ी होती है। --- #### **3. कार्यविधि और गणितीय संबंध**\nमाना कि किसी क्षण क्रोड के प्रत्येक फेरे से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $\Phi$ है।\nफैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियमानुसार: - प्राथमिक कुंडली में प्रेरित EMF: $E_p = -N_p \frac{d\Phi}{dt}$ - द्वितीयक कुंडली में प्रेरित EMF: $E_s = -N_s \frac{d\Phi}{dt}$ \nद्वितीयक EMF समीकरण को प्राथमिक EMF समीकरण से विभाजित करने पर: $$\frac{E_s}{E_p} = \frac{N_s}{N_p} = K$$\nजहाँ $K$ को **परिणमन अनुपात (Transformation Ratio)** कहा जाता है।\nएक आदर्श ट्रांसफार्मर के लिए (ऊर्जा हानि रहित, इनपुट शक्ति = आउटपुट शक्ति): $$V_p I_p = V_s I_s \implies \frac{V_s}{V_p} = \frac{I_p}{I_s} = \frac{N_s}{N_p}$$ - **उंचाई (Step-up) ट्रांसफार्मर:** $N_s > N_p \implies V_s > V_p$ और $I_s < I_p$ - **अपचायी (Step-down) ट्रांसफार्मर:** $N_s < N_p \implies V_s < V_p$ और $I_s > I_p$ --- #### **4. ट्रांसफार्मर में प्रमुख ऊर्जा हानियाँ तथा उनके निवारण**\nयद्यपि ट्रांसफार्मर अत्यधिक दक्षता ($90\%-98\%$) वाले उपकरण हैं, फिर भी इसमें विभिन्न रूपों में ऊर्जा हानि होती है: 1. **ताम्र हानि (Copper Loss):** - *कारण:* तांबे के तारों के प्रतिरोध के कारण उनमें ऊष्मा ($I^2 R$) के रूप में ऊर्जा क्षय होती है। - *निवारण:* अधिक धारा वाली कुंडलियों के लिए कम प्रतिरोध वाले मोटे तांबे के तारों का उपयोग किया जाता है। 2. **भंवर धारा हानि (Eddy Current Loss):** - *कारण:* लोहे के क्रोड में प्रेरित चक्करदार धाराएँ (भंवर धाराएँ) उत्पन्न होकर व्यर्थ ऊष्मा पैदा करती हैं। - *निवारण:* वार्निश से लैपित **पटलित (Laminated) नर्म लोहे के क्रोड** का प्रयोग किया जाता है। 3. **शैथिल्य हानि (Hysteresis Loss):** - *कारण:* AC चक्र के दौरान क्रोड का बार-बार चुंबकन और विचुंबकन होने से ऊष्मा के रूप में ऊर्जा नष्ट होती है। - *निवारण:* उच्च पारगम्यता तथा कम शैथिल्य पाश वाले पदार्थ जैसे **सिलिकॉन स्टील** का क्रोड बनाया जाता है। 4. **फ्लक्स क्षरण हानि (Flux Leakage Loss):** - *कारण:* प्राथमिक कुंडली द्वारा उत्पन्न संपूर्ण चुंबकीय फ्लक्स द्वितीयक कुंडली से नहीं जुड़ पाता। - *निवारण:* प्राथमिक और द्वितीयक दोनों कुंडलियों को एक ही क्रोड भुजा पर एक के ऊपर दूसरी लपेटी जाती है।
Q7. फेजर आरेख विधि का उपयोग करके एक प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत $V = V_0 \sin(\omega t)$ से जुड़े श्रेणी LCR परिपथ की कुल प्रतिबाधा ($Z$) और कला कोण ($\phi$) के लिए एक व्यंजक व्युत्पादित कीजिए। विद्युत अनुनाद की शर्त भी व्युत्पादित कीजिए और अनुनादी आवृत्ति का व्यंजक लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **श्रेणी LCR परिपथ का विश्लेषण** #### **1. परिपथ का विवरण एवं फेजर आरेख विधि**\nमाना कि $R$ प्रतिरोध का एक प्रतिरोधक, $L$ प्रेरकत्व की एक प्रेरक कुंडली, तथा $C$ धारिता का एक संधारित्र, एक प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत $V = V_0 \sin(\omega t)$ के साथ श्रेणीक्रम में जुड़े हैं।\nमाना किसी क्षण $t$ पर परिपथ में प्रवाहित तात्कालिक धारा $I$ है। - प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर $V_R = I R$ (धारा $I$ की कला में है)। - प्रेरकत्व के सिरों पर विभवांतर $V_L = I X_L$ (धारा $I$ से $\pi/2$ कला कोण आगे/अग्रगामी है)। - संधारित्र के सिरों पर विभवांतर $V_C = I X_C$ (धारा $I$ से $\pi/2$ कला कोण पीछे/पश्चगामी है)। \nयहाँ $X_L = \omega L$ प्रेरण प्रतिघात है तथा $X_C = \frac{1}{\omega C}$ धारितीय प्रतिघात है। --- #### **2. प्रतिबाधा ($Z$) के व्यंजक की व्युत्पत्ति**\nचूँकि $V_L$ और $V_C$ की कलाएँ एक-दूसरे के विपरीत ($180^\circ$) हैं, इसलिए उनका परिणामी परिणाम $(V_L - V_C)$ होगा (यह मानते हुए कि $V_L > V_C$)।\nफेजर समकोण त्रिभुज से, परिणामी वोल्टता $V_0$ पाइथागोरस प्रमेय द्वारा दी जाती है: $$V_0^2 = V_R^2 + (V_L - V_C)^2$$ $V_R$, $V_L$, और $V_C$ के मान रखने पर: $$V_0^2 = (I_0 R)^2 + (I_0 X_L - I_0 X_C)^2$$ $$V_0^2 = I_0^2 \left[ R^2 + (X_L - X_C)^2 \right]$$ $$\frac{V_0}{I_0} = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ \nअनुपात $\frac{V_0}{I_0}$ को परिपथ की कुल **प्रतिबाधा ($Z$)** कहते हैं: $$Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ $$Z = \sqrt{R^2 + \left(\omega L - \frac{1}{\omega C}\right)^2}$$ --- #### **3. कला कोण ($\phi$)**\nफेजर आरेख से, वोल्टता और धारा के बीच कलांतर $\phi$ निम्न प्रकार दिया जाता है: $$\tan\phi = \frac{V_L - V_C}{V_R} = \frac{I_0 X_L - I_0 X_C}{I_0 R}$$ $$\tan\phi = \frac{X_L - X_C}{R} = \frac{\omega L - \frac{1}{\omega C}}{R}$$ $$\phi = \tan^{-1}\left( \frac{\omega L - \frac{1}{\omega C}}{R} \right)$$ --- #### **4. विद्युत अनुनाद एवं अनुनादी आवृत्ति** * **परिभाषा:** श्रेणी LCR परिपथ में विद्युत अनुनाद वह स्थिति है जब परिपथ आरोपित AC वोल्टता की एक विशेष आवृत्ति पर अधिकतम धारा प्रवाहित होने देता है। * **अनुनाद की शर्त:** अनुनाद की स्थिति में प्रेरण प्रतिघात, धारितीय प्रतिघात के बराबर होता है: $$X_L = X_C$$ $$\omega_r L = \frac{1}{\omega_r C}$$ $$\omega_r^2 = \frac{1}{LC} \implies \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ \nचूँकि कोणीय आवृत्ति $\omega_r = 2\pi f_r$ होती है, इसलिए अनुनादी आवृत्ति $f_r$ होगी: $$2\pi f_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{LC}}$$ \nअनुनाद के समय प्रतिबाधा न्यूनतम ($Z_{min} = R$) तथा पूर्णतः शुद्ध प्रतिरोधक होती है, जिससे धारा का आयाम अधिकतम $I_0 = \frac{V_0}{R}$ हो जाता है।
Q8. एक श्रेणी LCR परिपथ में $L = 5.0\text{ H}$ प्रेरकत्व का एक प्रेरक, $C = 80\ \mu\text{F}$ धारिता का एक संधारित्र तथा $R = 40\ \Omega$ का एक प्रतिरोधक परिवर्तनीय आवृत्ति के $230\text{ V}$ AC स्रोत से जोड़ा गया है। \nगणना कीजिए: 1. परिपथ की अनुनादी कोणीय आवृत्ति ($\omega_r$)। 2. अनुनाद की स्थिति में परिपथ की प्रतिबाधा तथा धारा का आयाम (शिखर मान)। 3. अनुनाद पर प्रेरक, संधारित्र तथा प्रतिरोधक के सिरों पर RMS विभवांतर। 4. दर्शाइए कि अनुनाद पर $LC$ संयोजन के सिरों पर विभवांतर शून्य होता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **दिया गया है:** - प्रेरकत्व, $L = 5.0\text{ H}$ - धारिता, $C = 80\ \mu\text{F} = 80 \times 10^{-6}\text{ F}$ - प्रतिरोध, $R = 40\ \Omega$ - आपूर्ति RMS वोल्टता, $V_{\text{rms}} = 230\text{ V}$ --- ### **चरणबद्ध हल:** #### **1. अनुनादी कोणीय आवृत्ति ($\omega_r$):** $$\omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ $$\omega_r = \frac{1}{\sqrt{5.0 \times 80 \times 10^{-6}}} = \frac{1}{\sqrt{400 \times 10^{-6}}} = \frac{1}{20 \times 10^{-3}}$$ $$\omega_r = \frac{1000}{20} = 50\text{ rad/s}$$ --- #### **2. अनुनाद पर प्रतिबाधा ($Z$) तथा धारा का आयाम (शिखर मान $I_0$):**\nअनुनाद पर, प्रेरकीय प्रतिघात धारितीय प्रतिघात के बराबर होता है ($X_L = X_C$)। - **प्रतिबाधा ($Z$):** $$Z = R = 40\ \Omega$$ - **RMS धारा ($I_{\text{rms}}$):** $$I_{\text{rms}} = \frac{V_{\text{rms}}}{Z} = \frac{230}{40} = 5.75\text{ A}$$ - **शिखर धारा ($I_0$):** $$I_0 = \sqrt{2} \times I_{\text{rms}} = 1.414 \times 5.75 \approx 8.13\text{ A}$$ --- #### **3. अनुनाद पर घटकों के सिरों पर RMS विभवांतर:** - **अनुनाद पर प्रतिघात के मान:** $$X_L = \omega_r L = 50 \times 5.0 = 250\ \Omega$$ $$X_C = \frac{1}{\omega_r C} = \frac{1}{50 \times 80 \times 10^{-6}} = 250\ \Omega$$ - **प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर ($V_R$):** $$V_R = I_{\text{rms}} \times R = 5.75 \times 40 = 230\text{ V}$$ - **प्रेरक के सिरों पर विभवांतर ($V_L$):** $$V_L = I_{\text{rms}} \times X_L = 5.75 \times 250 = 1437.5\text{ V}$$ - **संधारित्र के सिरों पर विभवांतर ($V_C$):** $$V_C = I_{\text{rms}} \times X_C = 5.75 \times 250 = 1437.5\text{ V}$$ --- #### **4. $LC$ संयोजन के सिरों पर विभवांतर:**\nचूँकि $V_L$ धारा से $90^\circ$ आगे तथा $V_C$ धारा से $90^\circ$ पीछे होता है, इसलिए वे आपस में $180^\circ$ विपरीत कला में होते हैं। $$V_{LC} = |V_L - V_C|$$ $$V_{LC} = 1437.5\text{ V} - 1437.5\text{ V} = 0\text{ V}$$ **निष्कर्ष:** अतः अनुनाद की स्थिति में $LC$ संयोजन के सिरों पर विभवांतर **शून्य** होता है।
Q9. ट्रांसफार्मर क्या है? इसके सिद्धांत, संरचना और कार्यप्रणाली की व्याख्या कीजिए। एक वास्तविक ट्रांसफार्मर में होने वाली मुख्य ऊर्जा हानियों का वर्णन कीजिए और समझाइए कि प्रत्येक हानि को कैसे कम किया जा सकता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **ट्रांसफार्मर: परिभाषा एवं सिद्धांत** **परिभाषा:** ट्रांसफार्मर एक ऐसी स्थिर विद्युत युक्ति है जिसका उपयोग आवृत्ति में परिवर्तन किए बिना निम्न वोल्टता वाली प्रत्यावर्ती धारा को उच्च वोल्टता में (उच्चायी ट्रांसफार्मर) अथवा उच्च वोल्टता वाली प्रत्यावर्ती धारा को निम्न वोल्टता में (अपचायी ट्रांसफार्मर) बदलने के लिए किया जाता है। **सिद्धांत:** यह **अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction)** के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब प्राथमिक कुंडली में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है, तो यह क्रोड में एक निरंतर परिवर्तनशील चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है। यह परिवर्तनशील चुंबकीय फ्लक्स द्वितीयक कुंडली से जुड़कर उसमें एक प्रत्यावर्ती विद्युत वाहक बल (emf) प्रेरित करता है। --- ### **संरचना एवं कार्यप्रणाली** - **संरचना:** - **पटलित क्रोड (Laminated Core):** यह नर्म लोहे की पतली पत्तियों (E और I आकार) से बना होता है, जो भंवर धाराओं को कम करने के लिए वार्निश द्वारा एक-दूसरे से पृथक्कृत (insulated) होती हैं। - **प्राथमिक कुंडली ($N_p$ फेरे):** इसे इनपुट प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत से जोड़ा जाता है। - **द्वितीयक कुंडली ($N_s$ फेरे):** इसे आउटपुट लोड परिपथ से जोड़ा जाता है। - **कार्यप्रणाली एवं सूत्र:** माना कि किसी क्षण प्रत्येक फेरे से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स $\phi$ है। फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियमानुसार: - प्राथमिक कुंडली में प्रेरित emf: $e_p = -N_p \frac{d\phi}{dt}$ - द्वितीयक कुंडली में प्रेरित emf: $e_s = -N_s \frac{d\phi}{dt}$ समीकरणों को भाग देने पर: $$\frac{e_s}{e_p} = \frac{N_s}{N_p} = K$$ *(जहाँ $K$ परिणमन अनुपात - Transformation Ratio है)* - आदर्श ट्रांसफार्मर के लिए (इनपुट शक्ति = आउटपुट शक्ति): $$V_p I_p = V_s I_s \implies \frac{V_s}{V_p} = \frac{I_p}{I_s} = \frac{N_s}{N_p}$$ - **उच्चायी (Step-up) ट्रांसफार्मर:** $N_s > N_p \implies V_s > V_p$ तथा $I_s < I_p$ - **अपचायी (Step-down) ट्रांसफार्मर:** $N_s < N_p \implies V_s < V_p$ तथा $I_s > I_p$ --- ### **ट्रांसफार्मर में ऊर्जा हानियाँ एवं उन्हें कम करने के उपाय** 1. **ताम्र हानि (Copper Loss):** - *कारण:* तांबे के तारों के प्रतिरोध के कारण जूल ऊष्मा ($I^2 R$) के रूप में ऊर्जा क्षय होती है। - *निवारण:* अधिक धारा वाली कुंडलियों के लिए कम प्रतिरोध वाले मोटे तांबे के तारों का उपयोग किया जाता है। 2. **लौह हानि / भंवर धारा हानि (Iron / Eddy Current Loss):** - *कारण:* बदलते चुंबकीय फ्लक्स के कारण लोहे के क्रोड में भंवर धाराएं उत्पन्न होती हैं, जिससे क्रोड गर्म हो जाता है। - *निवारण:* वार्निश से लेपित **पटलित नर्म लोहे के क्रोड** का उपयोग किया जाता है। 3. **शैथिल्य हानि (Hysteresis Loss):** - *कारण:* प्रत्यावर्ती धारा के प्रत्येक चक्र में क्रोड के बार-बार चुंबकन और विचुंबकन के कारण ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है। - *निवारण:* संकीर्ण शैथिल्य लूप वाले पदार्थ जैसे **नर्म लोहे** या सिलिकॉन स्टील का उपयोग क्रोड बनाने के लिए किया जाता है। 4. **फ्लक्स क्षरण हानि (Flux Leakage Loss):** - *कारण:* प्राथमिक कुंडली द्वारा निर्मित पूरा चुंबकीय फ्लक्स द्वितीयक कुंडली से नहीं जुड़ पाता। - *निवारण:* प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियों को एक ही क्रोड भुजा पर एक-दूसरे के ऊपर लपेटा जाता है।
Q10. फ़ेज़र आरेख विधि का उपयोग करके एक श्रेणीबद्ध LCR प्रत्यावर्ती धारा परिपथ की प्रतिबाधा ($Z$) और कला कोण ($ \phi$) के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। विद्युत अनुनाद को भी परिभाषित कीजिए, अनुनादी आवृत्ति का व्यंजक प्राप्त कीजिए, और परिपथ के गुणवत्ता कारक ($Q$-गुणक) की व्याख्या कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **श्रेणी LCR परिपथ का विश्लेषण** \nजब एक प्रतिरोधक ($R$), एक प्रेरक ($L$), और एक संधारित्र ($C$) को श्रेणीक्रम में प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत $V = V_0 \sin(\omega t)$ से जोड़ा जाता है: - तीनों घटकों में प्रवाहित धारा $I$ समान होती है। - प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर: $V_R = I R$ (धारा $I$ की कला में)। - प्रेरक के सिरों पर विभवांतर: $V_L = I X_L$ (धारा $I$ से $\pi/2$ कला आगे), जहाँ $X_L = \omega L$ है। - संधारित्र के सिरों पर विभवांतर: $V_C = I X_C$ (धारा $I$ से $\pi/2$ कला पीछे), जहाँ $X_C = \frac{1}{\omega C}$ है। --- ### **1. प्रतिबाधा ($Z$) का व्यंजक**\nचूँकि $V_L$ और $V_C$ विपरीत कला ($180^\circ$) में होते हैं, इसलिए उनका परिणामी $(V_L - V_C)$ होगा (यह मानते हुए कि $V_L > V_C$)। \nफ़ेज़र आरेख और पाइथागोरस प्रमेय के उपयोग से कुल शिखर वोल्टता $V_0$ निम्नानुसार है: $$V_0^2 = V_R^2 + (V_L - V_C)^2$$ $V_R = I_0 R$, $V_L = I_0 X_L$, तथा $V_C = I_0 X_C$ रखने पर: $$V_0^2 = (I_0 R)^2 + (I_0 X_L - I_0 X_C)^2$$ $$V_0^2 = I_0^2 \left[ R^2 + (X_L - X_C)^2 \right]$$ $$V_0 = I_0 \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ \nपरिपथ का कुल प्रभावी प्रतिरोध **प्रतिबाधा ($Z$)** कहलाता है: $$Z = \frac{V_0}{I_0} = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2} = \sqrt{R^2 + \left(\omega L - \frac{1}{\omega C}\right)^2}$$ --- ### **2. कला कोण ($\phi$)**\nफ़ेज़र समकोण त्रिभुज से, वोल्टता और धारा के बीच कलांतर $\phi$ होगा: $$\tan \phi = \frac{V_L - V_C}{V_R} = \frac{I_0 X_L - I_0 X_C}{I_0 R} = \frac{X_L - X_C}{R}$$ $$\phi = \tan^{-1}\left( \frac{\omega L - \frac{1}{\omega C}}{R} \right)$$ --- ### **3. विद्युत अनुनाद एवं अनुनादी आवृत्ति**\nश्रेणी LCR परिपथ में विद्युत अनुनाद तब होता है जब प्रेरकीय प्रतिघात, धारितीय प्रतिघात के बराबर हो जाता है ($X_L = X_C$), जिससे परिपथ की प्रतिबाधा न्यूनतम ($Z = R$) हो जाती है और धारा का आयाम अधिकतम हो जाता है। \nअनुनाद की स्थिति में: $$X_L = X_C$$ $$\omega_r L = \frac{1}{\omega_r C}$$ $$\omega_r^2 = \frac{1}{LC} \implies \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ \nचूँकि $\omega_r = 2\pi f_r$, अतः अनुनादी आवृत्ति $f_r$ होगी: $$f_r = \frac{1}{2\pi \sqrt{LC}}$$ --- ### **4. गुणवत्ता कारक ($Q$-गुणक)**\nगुणवत्ता कारक ($Q$-गुणक) LCR परिपथ में अनुनाद की तीक्ष्णता को मापता है। इसे अनुनाद के समय प्रेरक या संधारित्र के सिरों पर विभवांतर और अनुप्रयुक्त वोल्टता (प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है: $$Q = \frac{V_L}{V_R} = \frac{I \omega_r L}{I R} = \frac{\omega_r L}{R}$$ $\omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$ रखने पर: $$Q = \frac{1}{R} \sqrt{\frac{L}{C}}$$ *$Q$-गुणक का उच्च मान अधिक तीक्ष्ण अनुनाद शिखर और परिपथ की बेहतर वर्णनात्मकता (selectivity) को दर्शाता है।*
Q11. $30\,\Omega$ प्रतिरोध तथा $0.1\text{ H}$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $200\text{ V}, 50\text{ Hz}$ के AC स्रोत से श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। गणना कीजिए: (i) परिपथ में प्रवाहित RMS धारा (ii) वोल्टता और धारा के बीच कलांतर (Phase angle)। 3 Marks
उत्तर (Answer): **दिए गए मान:** - $R = 30\,\Omega$ - $L = 0.1\text{ H}$ - $V_{rms} = 200\text{ V}$ - $f = 50\text{ Hz}$ **चरण 1: प्रेरण प्रतिघात ($X_L$)** $$X_L = 2\pi f L = 2 \times 3.1416 \times 50 \times 0.1 = 31.42\,\Omega$$ **चरण 2: RL परिपथ की कुल प्रतिबाधा ($Z$)** $$Z = \sqrt{R^2 + X_L^2}$$ $$Z = \sqrt{(30)^2 + (31.42)^2}$$ $$Z = \sqrt{900 + 987.22} = \sqrt{1887.22} \approx 43.44\,\Omega$$ **(i) RMS धारा ($I_{rms}$):** $$I_{rms} = \frac{V_{rms}}{Z} = \frac{200}{43.44} \approx 4.60\text{ A}$$ **(ii) कलांतर (Phase angle, $\phi$):** $$\tan\phi = \frac{X_L}{R} = \frac{31.42}{30} \approx 1.047$$ $$\phi = \tan^{-1}(1.047) \approx 46.31^\circ$$ \nअतः वोल्टता, धारा से लगभग $46.31^\circ$ कोण से आगे (lead) है।
Q12. ट्रांसफॉर्मर क्या है? इसका कार्य सिद्धांत लिखिए तथा किसी व्यावहारिक ट्रांसफॉर्मर में होने वाली किन्हीं तीन मुख्य ऊर्जा हानियों और उन्हें कम करने के उपायों को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): **ट्रांसफॉर्मर:**\nट्रांसफॉर्मर एक स्थिर विद्युत उपकरण है जिसका उपयोग आवृत्ति को परिवर्तित किए बिना प्रत्यावर्ती वोल्टता के मान को बढ़ाने (उच्चायी) या घटाने (अपचायी) के लिए किया जाता है। **कार्य सिद्धांत:**\nयह **अन्योन्य प्रेरण** (Mutual Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब प्राथमिक कुंडली में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है, तो यह क्रोड में एक परिवर्तित चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है, जो द्वितीयक कुंडली से जुड़कर उसमें एक प्रत्यावर्ती विद्युत वाहक बल (emf) प्रेरित करता है। **ऊर्जा हानियाँ और उन्हें कम करने के उपाय:** 1. **ताम्र हानि (Copper Loss):** प्राथमिक और द्वितीयक तांबे के फेरों के प्रतिरोध के कारण ऊष्मा के रूप में ऊर्जा का व्यय होता है ($I^2R$ हानि)। - *उपाय:* उच्च धारा वाली कुंडलियों के लिए कम प्रतिरोध वाले मोटे तांबे के तारों का उपयोग किया जाता है। 2. **भंवर धारा हानि (Eddy Current Loss):** परिवर्तनशील चुंबकीय फ्लक्स लोहे के क्रोड में भंवर धाराएं प्रेरित करता है, जिससे क्रोड गर्म हो जाता है। - *उपाय:* ठोस क्रोड के स्थान पर पतली, पृथक्कीकृत (लैमिलांकित) लोहे की पत्तियों का उपयोग किया जाता है। 3. **शैथिल्य हानि (Hysteresis Loss):** प्रत्येक AC चक्र के दौरान क्रोड के बार-बार चुम्बकित और विचुम्बकित होने से ऊष्मा उत्पन्न होती है। - *उपाय:* क्रोड को नरम लोहे या सिलिकॉन स्टील से बनाया जाता है, जिसका शैथिल्य लूप संकीर्ण होता है।
Q13. एक श्रेणी LCR परिपथ में प्रतिरोध $R = 40\,\Omega$, प्रेरकत्व $L = 0.4\text{ H}$, तथा धारिता $C = 100\,\mu\text{F}$ है, जो $200\text{ V}, 50\text{ Hz}$ की AC आपूर्ति से जुड़े हैं। गणना कीजिए: (i) प्रेरण प्रतिघात ($X_L$) (ii) धारितीय प्रतिघात ($X_C$) (iii) परिपथ की कुल प्रतिबाधा ($Z$)। 3 Marks
उत्तर (Answer): **दिए गए मान:** - $R = 40\,\Omega$ - $L = 0.4\text{ H}$ - $C = 100\,\mu\text{F} = 100 \times 10^{-6}\text{ F} = 10^{-4}\text{ F}$ - $f = 50\text{ Hz}$ - $V_{rms} = 200\text{ V}$ **(i) प्रेरण प्रतिघात ($X_L$):** $$X_L = 2\pi f L = 2 \times 3.1416 \times 50 \times 0.4 = 125.66\,\Omega$$ **(ii) धारितीय प्रतिघात ($X_C$):** $$X_C = \frac{1}{2\pi f C} = \frac{1}{2 \times 3.1416 \times 50 \times 10^{-4}} = \frac{1}{0.031416} \approx 31.83\,\Omega$$ **(iii) प्रतिबाधा ($Z$):** $$Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ $$Z = \sqrt{40^2 + (125.66 - 31.83)^2}$$ $$Z = \sqrt{1600 + (93.83)^2}$$ $$Z = \sqrt{1600 + 8804.07} = \sqrt{10404.07} \approx 102.0\,\Omega$$
Q14. श्रेणी LCR परिपथ में विद्युत अनुनाद (Electrical Resonance) क्या है? श्रेणी LCR परिपथ की अनुनादी आवृत्ति के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): **श्रेणी LCR परिपथ में विद्युत अनुनाद:**\nश्रेणी LCR परिपथ में विद्युत अनुनाद वह घटना है जिसमें आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता की एक विशेष आवृत्ति पर, प्रेरण प्रतिघात ($X_L$) धारितीय प्रतिघात ($X_C$) के बराबर हो जाता है। इस विशिष्ट आवृत्ति पर, परिपथ की कुल प्रतिबाधा न्यूनतम तथा केवल प्रतिरोध के बराबर ($Z = R$) हो जाती है, जिससे परिपथ में अधिकतम प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है। **अनुनादी आवृत्ति ($f_r$) का व्यंजक:**\nश्रेणी LCR परिपथ की प्रतिबाधा निम्नलिखित सूत्र द्वारा दी जाती है: $$Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$$ \nअनुनाद की स्थिति में, $X_L = X_C$ होता है। \nचूँकि $X_L = \omega_r L$ तथा $X_C = \frac{1}{\omega_r C}$: $$\omega_r L = \frac{1}{\omega_r C}$$ $$\omega_r^2 = \frac{1}{LC}$$ $$\omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ \nचूँकि कोणीय आवृत्ति $\omega_r = 2\pi f_r$, जहाँ $f_r$ अनुनादी आवृत्ति है: $$2\pi f_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$$ $$f_r = \frac{1}{2\pi\sqrt{LC}}$$ \nयह व्यंजक श्रेणी LCR परिपथ की अनुनादी आवृत्ति को दर्शाता है।
Q15. एक प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत की समीकरण $V = 200\sqrt{2} \sin(100\pi t)$ वोल्ट द्वारा दी गई है। निम्नलिखित की गणना कीजिए: (i) वर्ग-माध्य-मूल (RMS) वोल्टता (ii) प्रत्यावर्ती आपूर्ति की आवृत्ति (iii) यदि इस स्रोत से $50\,\Omega$ का प्रतिरोधक जोड़ा जाए, तो RMS धारा का मान। 3 Marks
उत्तर (Answer): **दिया गया समीकरण:** $$V = 200\sqrt{2} \sin(100\pi t)$$ \nमानक AC वोल्टता समीकरण $V = V_0 \sin(\omega t)$ से तुलना करने पर: - शिखर वोल्टता ($V_0$) = $200\sqrt{2}\text{ V}$ - कोणीय आवृत्ति ($\omega$) = $100\pi\text{ rad/s}$ **(i) वर्ग-माध्य-मूल (RMS) वोल्टता ($V_{rms}$):** $$V_{rms} = \frac{V_0}{\sqrt{2}} = \frac{200\sqrt{2}}{\sqrt{2}} = 200\text{ V}$$ **(ii) आवृत्ति ($f$):** $$\omega = 2\pi f$$ $$100\pi = 2\pi f$$ $$f = \frac{100\pi}{2\pi} = 50\text{ Hz}$$ **(iii) RMS धारा ($I_{rms}$):**\nदिया गया प्रतिरोध $R = 50\,\Omega$ $$I_{rms} = \frac{V_{rms}}{R} = \frac{200}{50} = 4\text{ A}$$