मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 भौतिक विज्ञान - क्विक रिवीजन नोट्स
अध्याय: विद्युत चुंबकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)
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1. विस्थापन धारा (Displacement Current)
समय के साथ परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र (या विद्युत फ्लक्स) के कारण उत्पन्न होने वाली धारा को विस्थापन धारा कहते हैं। इसे $I_d$ से दर्शाते हैं।
Id = \varepsilon0 \cdot \frac{d\Phi_E}{dt}
(जहाँ $\PhiE$ = विद्युत फ्लक्स, $\varepsilon0$ = निर्वात की विद्युतशीलता)
- एम्पीयर-मैक्सवेल का परिपथीय नियम:
\oint B \cdot dl = \mu0 (Ic + I_d)
(जहाँ $Ic$ = चालन धारा, $Id$ = विस्थापन धारा)
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2. विद्युत चुंबकीय तरंगें और उनके गुण
वे तरंगें जो परस्पर लंबवत विद्युत क्षेत्र ($E$) तथा चुंबकीय क्षेत्र ($B$) के दोलनों से बनती हैं और तरंग संचरण की दिशा के भी लंबवत होती हैं, विद्युत चुंबकीय तरंगें कहलाती हैं।
1. यह अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं।
2. इनके संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
3. निर्वात में इनकी चाल प्रकाश की चाल के बराबर होती है।
4. ये त्वरित (Accelerated) आवेश द्वारा उत्पन्न होती हैं।
5. विद्युत क्षेत्र वेक्टर ($E$) और चुंबकीय क्षेत्र वेक्टर ($B$) समान कला (Phase) में होते हैं।
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3. महत्वपूर्ण सूत्र (Key Formulas)
1. निर्वात में तरंग की चाल ($c$):
c = \frac{1}{\sqrt{\mu0 \varepsilon0}} \approx 3 \times 10^8 \text{ m/s}
2. किसी माध्यम में तरंग की चाल ($v$):
v = \frac{1}{\sqrt{\mu \varepsilon}}
3. विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र के आयाम का संबंध:
c = \frac{E0}{B0} = \frac{E{rms}}{B{rms}}
4. औसत विद्युत ऊर्जा घनत्व ($u_E$):
uE = \frac{1}{4} \varepsilon0 E0^2 = \frac{1}{2} \varepsilon0 E_{rms}^2
5. औसत चुंबकीय ऊर्जा घनत्व ($u_B$):
uB = \frac{1}{4 \mu0} B0^2 = \frac{1}{2 \mu0} B_{rms}^2
6. कुल औसत ऊर्जा घनत्व ($u$):
u = uE + uB = \varepsilon0 E{rms}^2 = \frac{B{rms}^2}{\mu0}
(विद्युत तथा चुंबकीय क्षेत्रों में ऊर्जा समान रूप से विभाजित होती है: $uE = uB$)
7. विद्युत चुंबकीय तरंग का संवेग ($p$):
p = \frac{U}{c}
(जहाँ $U$ = सतह पर आपतित कुल ऊर्जा)
8. तीव्रता ($I$):
I = \frac{\text{ऊर्जा}}{\text{क्षेत्रफल} \times \text{समय}} = u \cdot c = \varepsilon0 E{rms}^2 \cdot c
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4. विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम (EM Spectrum)
(तरंगदैर्ध्य के घटते क्रम एवं आवृत्ति के बढ़ते क्रम में)
| तरंग का नाम | तरंगदैर्ध्य परास ($\lambda$) | मुख्य स्रोत | मुख्य उपयोग |
| :--- | :--- | :--- | :--- |
| 1. रेडियो तरंगें | $> 0.1 \text{ m}$ | त्वरित आवेश | रेडियो एवं टीवी संचार |
| 2. सूक्ष्म तरंगें (Microwaves) | $0.1 \text{ m} - 1 \text{ mm}$ | मैग्नेट्रॉन / क्लेस्ट्रॉन | रडार प्रणाली, माइक्रोवेव ओवन |
| 3. अवरक्त किरणें (Infrared) | $1 \text{ mm} - 700 \text{ nm}$ | गर्म वस्तुएं व सूर्य | नाइट विजन, रिमोट कंट्रोल, ग्रीनहाउस प्रभाव |
| 4. दृश्य प्रकाश (Visible Light) | $700 \text{ nm} - 400 \text{ nm}$ | सूर्य, बल्ब, लपटें | दृष्टि की संवेदना (वस्तुओं को देखने में) |
| 5. पराबैंगनी किरणें (UV Rays) | $400 \text{ nm} - 1 \text{ nm}$ | सूर्य, जलती हुई आर्क | जल शोधन (RO), फिंगरप्रिंट की जाँच |
| 6. X-किरणें (X-Rays) | $1 \text{ nm} - 10^{-3} \text{ nm}$ | उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन का भारी लक्ष्य से टकराना | चिकित्सा में (हड्डी के फ्रैक्चर की जाँच) |
| 7. गामा किरणें ($\gamma$-Rays) | $< 10^{-3} \text{ nm}$ | नाभिकीय विघटन (रेडियोऐक्टिवता) | कैंसर के इलाज (रेडियोथेरेपी) में |
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5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Board Tips)
- विस्थापन धारा का कारण: बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र या विद्युत फ्लक्स।
- ओजोन परत: सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करती है।
- उष्मा तरंगें (Heat Waves): अवरक्त किरणों (Infrared Waves) को उष्मा तरंगें भी कहते हैं क्योंकि ये जिस वस्तु पर पड़ती हैं, उसका ताप बढ़ा देती हैं।
- कोहरे में फोटोग्राफी: अवरक्त किरणों का उपयोग कोहरे या धुंध में स्पष्ट फोटो खींचने के लिए किया जाता है क्योंकि इनका प्रकीर्णन बहुत कम होता है।
- विद्युत चुंबकीय तरंगों की प्रकृति: अनुप्रस्थ होती है (ध्वनि तरंगों की तरह अनुदैर्ध्य नहीं)।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 विद्युत चुंबकीय तरंगें
विस्थापन धारा
परिभाषा और आवश्यकता
एम्पीयर-मैक्सवेल नियम
मैक्सवेल के समीकरणों का आधार
विद्युत चुंबकीय तरंगों की प्रकृति
उत्पन्न करने का स्रोत (त्वरित आवेश)
विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के दोलन (लंबवत)
तरंग संचरण की दिशा
गुण और विशेषताएँ (निर्वात में प्रकाश की चाल से गमन)
विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम
रेडियो तरंगें (उपयोग: संचार और प्रसारण)
सूक्ष्म तरंगें (उपयोग: रडार और ओवन)
अवरक्त तरंगें (उपयोग: रिमोट और ग्रीनहाउस प्रभाव)
दृश्य प्रकाश (मानव नेत्र की संवेदना)
पराबैंगनी किरणें (उपयोग: जल शोधन और सूर्य की किरणें)
एक्स-किरणें (उपयोग: चिकित्सा और अस्थि फ्रैक्चर जाँच)
गामा किरणें (उपयोग: कैंसर उपचार और नाभिकीय अनुसंधान)
ऊर्जा और संवेग
ऊर्जा घनत्व (विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र)
तीव्रता
विकिरण दाब और संवेग
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### विद्युत चुम्बकीय तरंगों की परिभाषा\nविद्युत चुम्बकीय तरंगें वे तरंगें हैं जिनमें विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के तथा तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत दोलन करते हैं। इनका उत्पादन त्वरित आवेशों द्वारा किया जाता है और इनके संचरण के लिए किसी भी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
### विद्युत चुम्बकीय तरंगों की विशेषताएं
* **अनुप्रस्थ प्रकृति:** विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रकृति में अनुप्रस्थ होती हैं क्योंकि विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र सदिश तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं।
* **चाल:** मुक्त आकाश या निर्वात में, सभी विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रकाश की चाल से चलती हैं, जो $c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}} \approx 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ द्वारा दी जाती है।
* **ऊर्जा वितरण:** विद्युत चुम्बकीय तरंग में ऊर्जा विद्युत क्षेत्र सदिश और चुंबकीय क्षेत्र सदिश के बीच समान रूप से विभाजित होती है।
* **आवेशहीन:** ये तरंगें आवेशहीन होती हैं, इसलिए ये विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा विक्षेपित नहीं होती हैं।
### विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम\nविद्युत चुम्बकीय तरंगों का उनकी तरंग दैर्ध्य या आवृत्ति के अनुसार अलग-अलग समूहों में व्यवस्थित वितरण विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम कहलाता है:
1. **रेडियो तरंगें:** रेडियो और टेलीविजन संचार में प्रयुक्त।
2. **सूक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेव):** रडार प्रणालियों और माइक्रोवेव ओवन में प्रयुक्त।
3. **अवरक्त तरंगें:** रिमोट कंट्रोल और फिजियोथेरेपी में प्रयुक्त।
4. **दृश्य प्रकाश:** हमें देखने की संवेदना देने के लिए प्रयुक्त।
5. **पराबैंगनी किरणें:** पानी को शुद्ध करने और जाली दस्तावेजों का पता लगाने में प्रयुक्त।
6. **एक्स-किरणें:** चिकित्सा निदान (अस्थि भंग) में प्रयुक्त।
7. **गामा किरणें:** कैंसर के उपचार और परमाणु अनुसंधान में प्रयुक्त।
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### संख्यात्मक समस्या का हल
**दिया गया है:**
* विद्युत क्षेत्र, $E_x = 3.1 \times 10^4 \text{ V/m}$
* प्रकाश की चाल, $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$
* निर्वात की पारगम्यता, $\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T}\cdot\text{m/A}$
* निर्वात की पारगम्यता, $\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2/(\text{N}\cdot\text{m}^2)$
**चरण 1: चुंबकीय क्षेत्र ($B_y$) के परिमाण की गणना करें**\nविद्युत चुम्बकीय तरंग में विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के बीच संबंध का उपयोग करते हुए:
$$c = \frac{E_x}{B_y}$$
$$B_y = \frac{E_x}{c}$$
$$B_y = \frac{3.1 \times 10^4 \text{ V/m}}{3 \times 10^8 \text{ m/s}} = 1.033 \times 10^{-4} \text{ T}$|
**चरण 2: कुल ऊर्जा घनत्व ($u$) की गणना करें**\nकुल ऊर्जा घनत्व विद्युत ऊर्जा घनत्व ($u_E$) और चुंबकीय ऊर्जा घनत्व ($u_B$) का योग है। चूंकि $u_E = u_B$, कुल ऊर्जा घनत्व है:
$$u = 2 u_E = 2 \times \left(\frac{1}{2} \epsilon_0 E^2\right) = \epsilon_0 E^2$$
$$u = (8.854 \times 10^{-12}) \times (3.1 \times 10^4)^2$$
$$u = 8.854 \times 10^{-12} \times 9.61 \times 10^8$$
$$u = 8.509 \times 10^{-3} \text{ J/m}^3$$
उत्तर (Answer): ### चरण 1: परावर्तित प्रकाश की तरंग दैर्ध्य और आवृत्ति\nदिया गया है: आपतित प्रकाश की तरंग दैर्ध्य, $\lambda = 500\text{ nm} = 500 \times 10^{-9}\text{ m} = 5 \times 10^{-7}\text{ m}$।\nजब प्रकाश किसी सतह से परावर्तित होता है, तो समान माध्यम में उसकी चाल और तरंग दैर्ध्य अपरिवर्तित रहती हैं। इसलिए, परावर्तित प्रकाश की तरंग दैर्ध्य होगी:
$$\lambda' = 500\text{ nm} = 5 \times 10^{-7}\text{ m}$$
\nप्रकाश तरंग की आवृत्ति $\nu$ संबंध द्वारा गणना की जाती है:
$$\nu = \frac{c}{\lambda}$$\nजहाँ $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$ प्रकाश की चाल है।
$$\nu = \frac{3 \times 10^8\text{ m/s}}{5 \times 10^{-7}\text{ m}}$$
$$\nu = 0.6 \times 10^{15}\text{ Hz} = 6 \times 10^{14}\text{ Hz}$$\nअतः, परावर्तित प्रकाश की आवृत्ति $6 \times 10^{14}\text{ Hz}$ है (परावर्तन के दौरान आवृत्ति भी अपरिवर्तित रहती है)।
### चरण 2: विद्युत क्षेत्र का अधिकतम मान ($E_0$)\nविद्युत चुम्बकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र के अधिकतम मान ($E_0$) और चुंबकीय क्षेत्र के अधिकतम मान ($B_0$) के बीच का संबंध है:
$$\frac{E_0}{B_0} = c$$
\nदिया गया है:
$B_0 = 2 \times 10^{-7}\text{ T}$
$c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$
\nमानों को सूत्र में रखने पर:
$$E_0 = c \times B_0$$
$$E_0 = (3 \times 10^8\text{ m/s}) \times (2 \times 10^{-7}\text{ T})$$
$$E_0 = 60\text{ V/m}$$
### अंतिम उत्तर:
* परावर्तित प्रकाश की तरंग दैर्ध्य = $500\text{ nm}$
* परावर्तित प्रकाश की आवृत्ति = $6 \times 10^{14}\text{ Hz}$
* विद्युत क्षेत्र का अधिकतम मान ($E_0$) = $60\text{ V/m}$
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- तरंग की आवृत्ति, $\nu = 2.0 \times 10^{10} \text{ Hz}$
- विद्युत क्षेत्र का आयाम, $E_0 = 48 \text{ V/m}$
- प्रकाश का वेग, $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$
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### (i) तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) की गणना:\nप्रकाश के वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य में संबंध होता है:
$$c = \nu \lambda$$
$$\lambda = \frac{c}{\nu}$|\nमान रखने पर:
$$\lambda = \frac{3 \times 10^8 \text{ m/s}}{2.0 \times 10^{10} \text{ Hz}}$$
$$\lambda = 1.5 \times 10^{-2} \text{ m} = 1.5 \text{ cm}$|
**उत्तर (i):** तरंग की तरंगदैर्ध्य $1.5 \times 10^{-2} \text{ m}$ है।
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### (ii) चुंबकीय क्षेत्र आयाम ($B_0$) की गणना:\nविद्युत क्षेत्र आयाम और चुंबकीय क्षेत्र आयाम में संबंध होता है:
$$B_0 = \frac{E_0}{c}$|\nमान रखने पर:
$$B_0 = \frac{48 \text{ V/m}}{3 \times 10^8 \text{ m/s}}$$
$$B_0 = 1.6 \times 10^{-7} \text{ Tesla}$|
**उत्तर (ii):** चुंबकीय क्षेत्र का आयाम $1.6 \times 10^{-7} \text{ T}$ है।
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### (iii) औसत ऊर्जा घनत्व बराबर होने की उपपत्ति:
1. **विद्युत ऊर्जा घनत्व ($u_E$):**
ताक्षणिक विद्युत ऊर्जा घनत्व होता है:
$$u_E = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2$$
पूर्ण चक्र पर औसत विद्युत ऊर्जा घनत्व:
$$\langle u_E \rangle = \frac{1}{2} \varepsilon_0 \langle E^2 \rangle = \frac{1}{4} \varepsilon_0 E_0^2$$
2. **चुंबकीय ऊर्जा घनत्व ($u_B$):**
ताक्षणिक चुंबकीय ऊर्जा घनत्व होता है:
$$u_B = \frac{1}{2 \mu_0} B^2$$
पूर्ण चक्र पर औसत चुंबकीय ऊर्जा घनत्व:
$$\langle u_B \rangle = \frac{1}{2 \mu_0} \langle B^2 \rangle = \frac{1}{4 \mu_0} B_0^2$$
3. **तुलना:**
हम जानते हैं कि $c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}}$ अर्थात $\mu_0 \varepsilon_0 = \frac{1}{c^2}$ और $B_0 = \frac{E_0}{c}$।
अतः चुंबकीय ऊर्जा घनत्व में $B_0^2$ का मान रखने पर:
$$\langle u_B \rangle = \frac{1}{4 \mu_0} \left(\frac{E_0^2}{c^2}\right) = \frac{1}{4} \varepsilon_0 E_0^2$$
अतः,
$$\langle u_E \rangle = \langle u_B \rangle$$
**इति सिद्धम्।**
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
* विद्युत चुम्बकीय तरंग की आवृत्ति ($\nu$) = $25 \text{ MHz} = 25 \times 10^6 \text{ Hz}$
* संचरण की दिशा = x-दिशा ($i$)
* विद्युत क्षेत्र सदिश ($\vec{E}$) = $6.3 \hat{j} \text{ V/m}$
* मुक्त आकाश की पारगम्यता ($\mu_0$) = $4\pi \times 10^{-7} \text{ T}\cdot\text{m/A}$
* मुक्त आकाश की विद्युतशीलता ($\varepsilon_0$) = $8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2/(\text{N}\cdot\text{m}^2)$
* प्रकाश की चाल ($c$) = $3 \times 10^8 \text{ m/s}$
### भाग (a): चुम्बकीय क्षेत्र सदिश ($\vec{B}$) का परिमाण और दिशा
1. **परिमाण की गणना:**
विद्युत क्षेत्र ($E_0$) और चुम्बकीय क्षेत्र ($B_0$) के आयाम के बीच का संबंध है:
$$B_0 = \frac{E_0}{c}$|
दिए गए मानों को रखने पर:
$$B_0 = \frac{6.3 \text{ V/m}}{3 \times 10^8 \text{ m/s}} = 2.1 \times 10^{-8} \text{ टेस्ला (T)}$$
2. **दिशा की गणना:**
विद्युत चुम्बकीय तरंग के संचरण की दिशा सदिश क्रस उत्पाद $\vec{E} \times \vec{B}$ की दिशा द्वारा दी जाती है।
चूँकि तरंग x-अक्ष ($+\hat{i}$) के अनुदिश चलती है और विद्युत क्षेत्र y-अक्ष ($+\hat{j}$) के अनुदिश है:
$$\hat{i} = \hat{j} \times \hat{k}$|
इसलिए, चुम्बकीय क्षेत्र $\vec{B}$ को z-अक्ष ($+\hat{k}$) के अनुदिश होना चाहिए। अतः $\vec{B} = 2.1 \times 10^{-8} \hat{k} \text{ T}$ है।
### भाग (b): विद्युत चुम्बकीय तरंग का ऊर्जा घनत्व\nविद्युत चुम्बकीय तरंग का कुल ऊर्जा घनत्व ($u$), विद्युत ऊर्जा घनत्व ($u_E$) और चुम्बकीय ऊर्जा घनत्व ($u_B$) का योग होता है, जो कि एक दूसरे के बराबर होते हैं ($u_E = u_B$)।
1. **ऊर्जा घनत्व का सूत्र:**
$$u = \varepsilon_0 E_0^2$$
2. **गणना:**
$$u = (8.854 \times 10^{-12}) \times (6.3)^2$$
$$u = 8.854 \times 10^{-12} \times 39.69$$
$$u \approx 3.51 \times 10^{-10} \text{ J/m}^3$$
### अंतिम उत्तर:
(a) चुम्बकीय क्षेत्र सदिश $\vec{B} = 2.1 \times 10^{-8} \hat{k} \text{ T}$ है।
(b) विद्युत चुम्बकीय तरंग का ऊर्जा घनत्व $3.51 \times 10^{-10} \text{ J/m}^3$ है।
उत्तर (Answer): ### विस्थापन धारा का परिचय\nविस्थापन धारा एक ऐसी राशि है जो मैक्सवेल के समीकरणों में प्रकट होती है और इसे विद्युत विस्थापन क्षेत्र या विद्युत फ्लक्स के परिवर्तन की दर के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है। एम्पीयर के परिपथीय नियम में एक मूलभूत असंगति को दूर करने के लिए महान भौतिक विज्ञानी जेम्स क्लर्क मैक्सवेल द्वारा इसकी कल्पना की चाल थी।
### विस्थापन धारा की आवश्यकता\nएम्पीयर का परिपथीय नियम कहता है कि किसी भी बंद लूप के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ का रेखीय समाकल लूप से घिरे पृष्ठ से गुजरने वाले कुल धारा $I$ के $\mu_0$ गुना के बराबर होता है:
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I$$
\nहालाँकि, एक दिष्ट धारा स्रोत द्वारा चार्ज किए जा रहे एक समानांतर प्लेट संधारित्र पर विचार करें। यदि हम एक ही बंद लूप से घिरे दो अलग-अलग पृष्ठों (S1 और S2) पर विचार करें — जहाँ S1 चालन धारा $I$ ले जाने वाले तार से गुजरने वाला एक सपाट पृष्ठ है, और S2 संधारित्र प्लेटों के बीच के स्थान से गुजरने वाला एक गुब्बारे के आकार का पृष्ठ है जहाँ कोई चालन धारा मौजूद नहीं है — तो एम्पीयर के नियम को लागू करने पर असंगत परिणाम मिलते हैं:
* पृष्ठ S1 के लिए: $\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I$
* पृष्ठ S2 के लिए: $\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = 0$
\nचूँकि रेखीय समाकल एक ही बंद लूप के लिए अलग-अलग मान नहीं दे सकते हैं, इसलिए मैक्सवेल ने निष्कर्ष निकाला कि गैर-स्थिर धाराओं के लिए एम्पीयर का नियम अधूरा था।
### मैक्सवेल का संशोधन और विस्थापन धारा\nमैक्सवेल को यह महसूस हुआ कि यद्यपि संधारित्र प्लेटों के बीच के क्षेत्र में कोई चालन धारा नहीं है, लेकिन प्लेटों पर आवेश के संचय के कारण एक बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र मौजूद है। प्लेटों के बीच जुड़ा विद्युत फ्लक्स $\Phi_E$ समय के साथ बदलता रहता है।
\nउन्होंने विस्थापन धारा $I_d$ को इस प्रकार परिभाषित किया:
$$I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$|\nजहाँ $\varepsilon_0$ मुक्त आकाश की विद्युतशीलता है और $\frac{d\Phi_E}{dt}$ विद्युत फ्लक्स के परिवर्तन की दर है।
### मैक्सवेल का संशोधित एम्पीयर का परिपथीय नियम\nएम्पीयर के नियम को सार्वभौमिक रूप से सुसंगत बनाने के लिए, मैक्सवेल ने चालन धारा में विस्थापन धारा को जोड़ दिया। कुल धारा $I_{total}$ चालन धारा ($I_c$) और विस्थापन धारा ($I_d$) का योग है:
$$I_{total} = I_c + I_d = I_c + \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$|
\nइस प्रकार, **संशोधित एम्पीयर-मैक्सवेल नियम** इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 \left( I_c + \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt} \right)$|
\nइस महत्वपूर्ण जुड़ाव ने न केवल विद्युत चुंबकत्व में गणितीय विरोधाभास को हल किया बल्कि विद्युत चुम्बकीय तरंगों की सैद्धांतिक भविष्यवाणी को भी जन्म दिया।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
* विद्युत क्षेत्र का आयाम, $E_0 = 48\text{ V/m}$
* आवृत्ति, $\nu = 5.0 \times 10^{14}\text{ Hz}$
* निर्वात में प्रकाश की चाल, $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$
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### भाग (a): चुंबकीय क्षेत्र का आयाम ($B_0$) ज्ञात कीजिए
\nविद्युत चुम्बकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र के आयाम के बीच संबंध है:
$$c = \frac{E_0}{B_0}$|
$B_0$ ज्ञात करने के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर:
$$B_0 = \frac{E_0}{c}$|
\nदिए गए मानों को रखने पर:
$$B_0 = \frac{48\text{ V/m}}{3 \times 10^8\text{ m/s}}$$
$$B_0 = 1.6 \times 10^{-7}\text{ T}$$
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### भाग (b): तरंग की तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) ज्ञात कीजिए
\nचाल, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य को जोड़ने वाला तरंग समीकरण है:
$$c = \nu \lambda$$
\nतरंगदैर्ध्य $\lambda$ के लिए सूत्र:
$$\lambda = \frac{c}{\nu}$$
\nदिए गए मानों को रखने पर:
$$\lambda = \frac{3 \times 10^8\text{ m/s}}{5.0 \times 10^{14}\text{ Hz}}$$
$$\lambda = 0.6 \times 10^{-6}\text{ m} = 600\text{ nm}$$
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### भाग (c): विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के लिए व्यंजक लिखिए
\nमान लेते हैं कि विद्युत क्षेत्र सदिश x-अक्ष के अनुदिश दोलन करता है, यानी $\vec{E} = E_x \hat{i}$।\nतब, चुंबकीय क्षेत्र को y-अक्ष के अनुदिश दोलन करना चाहिए, यानी $\vec{B} = B_y \hat{j}$, क्योंकि तरंग z-अक्ष के अनुदिश संचरित होती है ($\hat{k} = \hat{i} \times \hat{j}$)।
\nकोणीय आवृत्ति $\omega = 2\pi \nu$:
$$\omega = 2 \times \pi \times 5.0 \times 10^{14} = 3.14 \times 10^{15}\text{ rad/s}$|
\nप्रसार नियतांक $k = \frac{2\pi}{\lambda}$:
$$k = \frac{2 \times \pi}{600 \times 10^{-9}} = 1.05 \times 10^7\text{ rad/m}$|
1. **विद्युत क्षेत्र का व्यंजक:**
$$\vec{E}(z, t) = 48 \sin(1.05 \times 10^7 z - 3.14 \times 10^{15} t)\hat{i}\text{ V/m}$|
2. **चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक:**
$$\vec{B}(z, t) = 1.6 \times 10^{-7} \sin(1.05 \times 10^7 z - 3.14 \times 10^{15} t)\hat{j}\text{ T}$$
उत्तर (Answer): ### विद्युत चुम्बकीय तरंगों का परिचय\nविद्युत चुम्बकीय (EM) तरंगें वे तरंगें हैं जो विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र के बीच कंपनों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती हैं। यांत्रिक तरंगों के विपरीत, इन्हें अपने संचरण के लिए किसी भी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है और यह निर्वात से होकर गुजर सकती हैं। यह निर्वात में प्रकाश की गति से चलती हैं, जो लगभग $3 \times 10^8\text{ m/s}$ है। जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने अपने प्रसिद्ध मैक्सवेल समीकरणों के माध्यम से इनके अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी, और बाद में हेनरिक हर्ट्ज ने इन्हें प्रायोगिक रूप से उत्पन्न किया था।
### विद्युत चुम्बकीय तरंगों की मुख्य विशेषताएं
* **उत्पत्ति:** त्वरित आवेश सभी विद्युत चुम्बकीय तरंगों का स्रोत होते हैं। एक दोलनशील आवेश एक दोलनशील विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है, जो बदले में एक दोलनशील चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
* **प्रकृति:** ये अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं, जिसका अर्थ है कि विद्युत क्षेत्र सदिश और चुंबकीय क्षेत्र सदिश एक-दूसरे के तथा तरंग प्रसार की दिशा के लंबवत दोलन करते हैं।
* **चाल:** मुक्त आकाश में, EM तरंगों की चाल $c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}}$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $\mu_0$ मुक्त आकाश की पारगम्यता और $\varepsilon_0$ मुक्त आकाश की विद्युतशीलता है।
* **ऊर्जा और संवेग:** ये अंतरिक्ष में ऊर्जा और रैखिक संवेग दोनों का वहन करती हैं। ऊर्जा विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र सदिशों के बीच समान रूप से विभाजित होती है।
### विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम\nविद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में सभी प्रकार की EM तरंगें शामिल होती हैं जो उनकी आवृत्ति और तरंग दैर्ध्य के अनुसार व्यवस्थित होती हैं। आवृत्ति के बढ़ते (तरंग दैर्ध्य के घटते) क्रम में स्पेक्ट्रम इस प्रकार है:
1. **रेडियो तरंगें:**
* *आवृत्ति परिसर:* $< 10^9\text{ Hz}$
* *उपयोग:* रेडियो और टेलीविजन संचार प्रणालियों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
2. **सूक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेव):**
* *आवृत्ति परिसर:* $10^9\text{ Hz} - 3 \times 10^{11}\text{ Hz}$
* *उपयोग:* माइक्रोवेव ओवन और विमान नेविगेशन के लिए रडार प्रणालियों में उपयोग किया जाता है।
3. **अवरक्त तरंगें (इन्फ्रारेड):**
* *आवृत्ति परिसर:* $3 \times 10^{11}\text{ Hz} - 4 \times 10^{14}\text{ Hz}$
* *उपयोग:* मांसपेशियों के दर्द से राहत पाने के लिए फिजियोथेरेपी में और टीवी रिमोट कंट्रोल में।
4. **दृश्य प्रकाश:**
* *आवृत्ति परिसर:* $4 \times 10^{14}\text{ Hz} - 7.5 \times 10^{14}\text{ Hz}$
* *उपयोग:* यह दृष्टि की अनुभूति प्रदान करता है और हमें आसपास की दुनिया को देखने में मदद करता है।
5. **पराबैंगनी (UV) किरणें:**
* *आवृत्ति परिसर:* $7.5 \times 10^{14}\text{ Hz} - 3 \times 10^{16}\text{ Hz}$
* *उपयोग:* हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणुओं को मारने के लिए वॉटर प्यूरीफायर में उपयोग किया जाता है।
6. **एक्स-किरणें:**
* *आवृत्ति परिसर:* $3 \times 10^{16}\text{ Hz} - 3 \times 10^{19}\text{ Hz}$
* *उपयोग:* हड्डियों के फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए चिकित्सा निदान में उपयोग किया जाता है।
7. **गामा किरणें:**
* *आवृत्ति परिसर:* $> 3 \times 10^{19}\text{ Hz}$
* *उपयोग:* घातक ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कैंसर के उपचार में उपयोग किया जाता है।
उत्तर (Answer): ### विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का परिचय\nविद्युत चुम्बकीय (EM) स्पेक्ट्रम सभी प्रकार के विद्युत चुम्बकीय विकिरणों की कुल श्रेणी है। विकिरण वह ऊर्जा है जो यात्रा करती है और फैलती है—आपके घर में लैंप से आने वाला दृश्य प्रकाश और रेडियो स्टेशन से आने वाली रेडियो तरंगें विद्युत चुम्बकीय विकिरण के दो प्रकार हैं। EM विकिरण के अन्य उदाहरणों में माइक्रोवेव, इन्फ्रारेड प्रकाश, पराबैंगनी प्रकाश, एक्स-रे और गामा-रे शामिल हैं।
### विद्युत चुम्बकीय तरंगों का वर्गीकरण
1. **रेडियो तरंगें**
- **तरंग दैर्ध्य सीमा:** $> 0.1 \text{ m}$
- **आवृत्ति सीमा:** $< 3 \times 10^9 \text{ Hz}$
- **उत्पादन:** एरियल (एंटेना) में इलेक्ट्रॉनों का तेजी से त्वरण और मंदन।
- **उपयोग:** रेडियो और टेलीविजन संचार प्रणाली, सेलुलर फोन।
2. **माइक्रोवेव (सूक्ष्म तरंगें)**
- **तरंग दैर्ध्य सीमा:** $0.1 \text{ m}$ से $1 \text{ mm}$
- **आवृत्ति सीमा:** $3 \times 10^9 \text{ Hz}$ से $3 \times 10^{11} \text{ Hz}$
- **उत्पादन:** क्लाइस्ट्रॉन वाल्व, मैग्नेट्रॉन वाल्व और गन डायोड।
- **उपयोग:** नेविगेशन में रडार प्रणाली, खाना पकाने के लिए माइक्रोवेव ओवन, उपग्रहों के माध्यम से लंबी दूरी का संचार।
3. **इन्फ्रारेड (अवरक्त) तरंगें**
- **तरंग दैर्ध्य सीमा:** $1 \text{ mm}$ से $700 \text{ nm}$
- **आवृत्ति सीमा:** $3 \times 10^{11} \text{ Hz}$ से $4 \times 10^{14} \text{ Hz}$
- **उत्पादन:** गर्म पिंडों में परमाणुओं और अणुओं का कंपन।
- **उपयोग:** नाइट विजन डिवाइस, मांसपेशियों के दर्द के लिए भौतिक चिकित्सा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए रिमोट कंट्रोल, ग्रीनहाउस प्रभाव निगरानी।
4. **दृश्य प्रकाश**
- **तरंग दैर्ध्य सीमा:** $700 \text{ nm}$ से $400 \text{ nm}$
- **आवृत्ति सीमा:** $4 \times 10^{14} \text{ Hz}$ से $7 \times 10^{14} \text{ Hz}$
- **उत्पादन:** परमाणुओं में उत्तेजित इलेक्ट्रॉनों द्वारा निचले ऊर्जा स्तरों पर आने पर विकिरण।
- **उपयोग:** दृष्टि की अनुभूति प्रदान करना, पौधों में प्रकाश संश्लेषण, ऑप्टिकल फोटोग्राफी।
5. **पराबैंगनी (UV) किरणें**
- **तरंग दैर्ध्य सीमा:** $400 \text{ nm}$ से $1 \text{ nm}$
- **आवृत्ति सीमा:** $7 \times 10^{14} \text{ Hz}$ से $3 \times 10^{17} \text{ Hz}$
- **उत्पादन:** परमाणुओं में आंतरिक आवरण के इलेक्ट्रॉन उच्च से निम्न ऊर्जा स्तर की ओर बढ़ते हैं, और विशेष लैंप जैसे सूर्य।
- **उपयोग:** जल शोधन (बैक्टीरिया को मारना), जाली दस्तावेजों का पता लगाना, लेसिक नेत्र शल्य चिकित्सा।
6. **एक्स-किरणें (X-Rays)**
- **तरंग दैर्ध्य सीमा:** $1 \text{ nm}$ से $10^{-3} \text{ nm}$
- **आवृत्ति सीमा:** $3 \times 10^{17} \text{ Hz}$ से $3 \times 10^{19} \text{ Hz}$
- **उत्पादन:** भारी धातु के लक्ष्य से टकराने वाले उच्च गति वाले इलेक्ट्रॉनों का अचानक मंदन (कूलिज ट्यूब)।
- **उपयोग:** चिकित्सा निदान (हड्डी के फ्रैक्चर का पता लगाना), हवाई अड्डों पर सुरक्षा स्कैन, क्रिस्टलोग्राफी।
7. **गामा किरणें**
- **तरंग दैर्ध्य सीमा:** $< 10^{-3} \text{ nm}$
- **आवृत्ति सीमा:** $> 3 \times 10^{19} \text{ Hz}$
- **उत्पादन:** परमाणु नाभिक का रेडियोधर्मी क्षय और परमाणु प्रतिक्रियाएं।
- **उपयोग:** घातक कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कैंसर का इलाज (रेडियोथेरेपी), खाद्य नसबंदी।
उत्तर (Answer): ### परिचय एवं विस्थापन धारा की आवश्यकता
- **विस्थापन धारा की परिभाषा:** वह धारा जो उस क्षेत्र में उत्पन्न होती है जहाँ विद्युत क्षेत्र और इस प्रकार विद्युत फ्लक्स समय के साथ परिवर्तित हो रहा है, उसे विस्थापन धारा कहते हैं। इसे $I_d$ द्वारा दर्शाया जाता है।
- **मैक्सवेल का संशोधन:** एम्पीयर का परिपथीय नियम यह बताता है कि किसी बंद लूप के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ का रेखीय समाकलन, लूप से गुजरने वाली कुल धारा $I$ का $\mu_0$ गुना होता है ($\oint \vec{B} . d\vec{l} = \mu_0 I$)।
- मैक्सवेल ने आवेशित संधारित्र पर इस नियम को लागू करते समय इसमें एक तार्किक कमी पाई। संधारित्र के आवेशन के दौरान, संवहन धारा (conduction current) तारों से होकर बहती है, लेकिन संधारित्र की प्लेटों के बीच की खाली जगह से कोई वास्तविक आवेश वाहक गति नहीं करते हैं। फिर भी, उस क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र मौजूद रहता है। इस विरोधाभास को दूर करने और समीकरणों को सममित बनाने के लिए मैक्सवेल ने विस्थापन धारा की अवधारणा प्रस्तुत की।
### विस्थापन धारा के व्यंजक की व्युत्पत्ति\nमान लीजिए कि एक समांतर प्लेट संधारित्र बैटरी द्वारा आवेशित किया जा रहा है। किसी क्षण $t$ पर प्लेटों पर आवेश $q(t)$ है।\nक्षेत्रफल $A$ वाली प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र $E$ है:
$$E = \frac{q}{\varepsilon_0 A}$|\nसंधारित्र से जुड़ा विद्युत फ्लक्स $\Phi_E$ है:
$$\Phi_E = E \cdot A = \left(\frac{q}{\varepsilon_0 A}\right) A = \frac{q}{\varepsilon_0}$|\nआवेश $q$ के लिए इसे व्यवस्थित करने पर:
$$q = \varepsilon_0 \Phi_E$$
\nसमय $t$ के सापेक्ष दोनों पक्षों का अवकलन करने पर आवेश के परिवर्तन की दर प्राप्त होती है, जो कि धारा है:
$$I_d = \frac{dq}{dt} = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$|\nयह विस्थापन धारा का आवश्यक व्यंजक है।
### संशोधित एम्पीयर का परिपथीय नियम (मैक्सवेल-एम्पीयर नियम)\nसंवहन धारा ($I_c$) और विस्थापन धारा ($I_d$) दोनों को शामिल करने पर, कुल धारा $(I_c + I_d)$ होती है।\nसंशोधित एम्पीयर का परिपथीय नियम इस प्रकार है:
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 \left( I_c + I_d \right) = \mu_0 I_c + \mu_0 \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$$
उत्तर (Answer): ### विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम का परिचय\nविद्युतचुंबकीय तरंगों को उनकी आवृत्ति या तरंगदैर्ध्य के बढ़ते या घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर जो स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है, उसे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। यह अति कम आवृत्ति (रेडियो तरंगों) से लेकर अति उच्च आवृत्ति (गामा किरणों) तक फैला हुआ है।
### विशेषताएँ
- विद्युतचुंबकीय तरंगों के संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
- ये सभी निर्वात में समान चाल $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ से चलती हैं।
- ये प्रकृति में अनुप्रस्थ होती हैं।
### 1. रेडियो तरंगें
- **तरंगदैर्ध्य परास:** $>\, 0.1 \text{ m}$
- **आवृत्ति परास:** $<\, 3 \times 10^9 \text{ Hz}$
- **स्रोत:** चालकों में आवेशों की त्वरित गति (दोलन परिपथ)।
- **उपयोग:** रेडियो और टेलीविज़न संचार प्रणालियों में, सेलुलर फोन में।
### 2. सूक्ष्म तरंगें (Microwaves)
- **तरंगदैर्ध्य परास:** $0.1 \text{ m}$ से $1 \text{ mm}$
- **आवृत्ति परास:** $3 \times 10^9 \text{ Hz}$ से $3 \times 10^{11} \text{ Hz}$
- **स्रोत:** क्लाइस्ट्रॉन वाल्व, मैग्नेट्रॉन वाल्व और गन डायोड।
- **उपयोग:** रडार प्रणालियों में, माइक्रोवेव ओवन में, उपग्रहों द्वारा लंबी दूरी के संचार में।
### 3. अवरक्त तरंगें (Infrared Waves)
- **तरंगदैर्ध्य परास:** $1 \text{ mm}$ से $700 \text{ nm}$
- **आवृत्ति परास:** $3 \times 10^{11} \text{ Hz}$ to $4 \times 10^{14} \text{ Hz}$
- **स्रोत:** गर्म पिंड और अणु (ऊष्मीय विकिरण)।
- **उपयोग:** मांसपेशियों के दर्द के उपचार में, टीवी के रिमोट कंट्रोल में, नाइट विज़न उपकरणों में, ग्रीनहाउस प्रभाव में।
### 4. पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet Rays)
- **तरंगदैर्ध्य परास:** $400 \text{ nm}$ से $0.6 \text{ nm}$
- **आवृत्ति परास:** $7 \times 10^{14} \text{ Hz}$ से $5 \times 10^{16} \text{ Hz}$
- **स्रोत:** सूर्य, आर्क लैंप, आयनित गैसें।
- **उपयोग:** शल्य चिकित्सा उपकरणों को रोगाणुमुक्त करने में, जल को शुद्ध करने में, जाली दस्तावेजों का पता लगाने में।
उत्तर (Answer): **(a) चुंबकीय क्षेत्र घटक की दिशा:**\nविद्युतचुंबकीय तरंग में, विद्युत क्षेत्र सदिश $\vec{E}$, चुंबकीय क्षेत्र सदिश $\vec{B}$, और तरंग संचरण की दिशा (पॉइंटिंग सदिश या $\vec{E} \times \vec{B}$ द्वारा दी गई) परस्पर लंबवत होती हैं। यहाँ, तरंग z-दिशा ($\hat{k}$) के अनुदिश संचरण कर रही है, और विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$, x-दिशा ($\hat{i}$) के अनुदिश है। इसलिए, चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ को y-दिशा ($\hat{j}$) के अनुदिश होना चाहिए, क्योंकि $\hat{i} \times \hat{j} = \hat{k}$ होता है।
**(b) चुंबकीय क्षेत्र घटक के लिए व्यंजक:**\nचुंबकीय क्षेत्र के आयाम $B_0$ और विद्युत क्षेत्र के आयाम $E_0$ के बीच संबंध $B_0 = \frac{E_0}{c}$ होता है, जहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की चाल है। चूंकि तरंग धनात्मक z-दिशा में गति कर रही है और चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र के साथ कला (phase) में y-दिशा में दोलन करता है, अतः चुंबकीय क्षेत्र सदिश $\vec{B}$ का व्यंजक निम्नलिखित होगा:
$$\vec{B} = B_y \hat{j} = \frac{E_0}{c} \sin(kz - \omega t) \hat{j}$$
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:
- ऊर्जा फ्लक्स ($S$) = $18 \text{ W/m}^2$
- सतह का क्षेत्रफल ($A$) = $20 \text{ cm}^2 = 20 \times 10^{-4} \text{ m}^2 = 2 \times 10^{-3} \text{ m}^2$
- समय अवधि ($t$) = $30 \text{ मिनट} = 30 \times 60 \text{ सेकंड} = 1800 \text{ सेकंड}$
- प्रकाश की चाल ($c$) = $3 \times 10^8 \text{ m/s}$
\nचरण 1: दिए गए समय अंतराल में सतह द्वारा प्राप्त कुल ऊर्जा ($U$) की गणना करें।
$$U = \text{ऊर्जा फ्लक्स} \times \text{क्षेत्रफल} \times \text{समय}$$
$$U = 18 \text{ W/m}^2 \times 2 \times 10^{-3} \text{ m}^2 \times 1800 \text{ s}$$
$$U = 18 \times 3.6 = 64.8 \text{ जूल}$|
\nचरण 2: पूरी तरह से अवशोषित करने वाली (गैर-परावर्तक) सतह को दिए गए कुल संवेग ($p$) की गणना करें।\nविद्युत चुंबकीय विकिरण के पूर्ण अवशोषण के लिए, संवेग $p$ इस प्रकार दिया जाता है:
$$p = \frac{U}{c}$|
\nमान रखने पर:
$$p = \frac{64.8 \text{ J}}{3 \times 10^8 \text{ m/s}} = 21.6 \times 10^{-8} \text{ kg m/s} = 2.16 \times 10^{-7} \text{ kg m/s}$$
\nअतः सतह को दिया गया कुल संवेग $2.16 \times 10^{-7} \text{ kg m/s}$ है।
उत्तर (Answer): बढ़ती आवृत्ति (या घटती तरंगदैर्ध्य) के क्रम में विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम है:
1. रेडियो तरंगें
2. सूक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेव)
3. अवरक्त तरंगें
4. दृश्य प्रकाश
5. पराबैंगनी किरणें
6. एक्स-किरणें
7. गामा किरणें
\nअंतिम सिरों के उपयोग:
- **सबसे कम आवृत्ति क्षेत्र (रेडियो तरंगें):** रेडियो और टेलीविजन संचार प्रणालियों में लंबी दूरी पर ऑडियो और वीडियो सिग्नल प्रसारित करने के लिए रेडियो तरंगों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
- **सबसे उच्चतम आवृत्ति क्षेत्र (गामा किरणें):** गामा किरणों में बहुत उच्च ऊर्जा और भेदन शक्ति होती है; इनका उपयोग चिकित्सा में विकिरण चिकित्सा के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने और चिकित्सा उपकरणों को विसंक्रमित करने के लिए किया जाता है।
उत्तर (Answer): तरंग के सामान्य समीकरण को देखते हुए: $B_y = B_0 \sin(kx + \omega t)$\nदिए गए समीकरण $B_y = 2 \times 10^{-7} \sin(0.5 \times 10^3 x + 1.5 \times 10^{11} t)$ से तुलना करने पर:
- चुंबकीय क्षेत्र का आयाम ($B_0$) = $2 \times 10^{-7} \text{ T}$
- तरंग संख्या ($k$) = $0.5 \times 10^3 \text{ rad/m}$
- कोणीय आवृत्ति ($\omega$) = $1.5 \times 10^{11} \text{ rad/s}$
(a) **तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) और आवृत्ति ($f$):**
- तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{2\pi}{k} = \frac{2 \times 3.1416}{0.5 \times 10^3} = 1.26 \times 10^{-2} \text{ m} = 1.26 \text{ cm}$
- आवृत्ति $f = \frac{\omega}{2\pi} = \frac{1.5 \times 10^{11}}{2 \times 3.1416} = 2.39 \times 10^{10} \text{ Hz}$
(b) **विद्युत क्षेत्र ($E_z$) के लिए व्यंजक:**
- अधिकतम विद्युत क्षेत्र $E_0 = B_0 \times c = (2 \times 10^{-7} \text{ T}) \times (3 \times 10^8 \text{ m/s}) = 60 \text{ V/m}$
- चूंकि चुंबकीय क्षेत्र $y$ के अनुदिश है और तरंग ऋणात्मक $x$ के अनुदिश गमन करती है ($kx$ और $\omega t$ के बीच धनात्मक चिह्न द्वारा इंगित), विद्युत क्षेत्र $z$-अक्ष के अनुदिश होना चाहिए।
- अतः विद्युत क्षेत्र का व्यंजक है:
$$E_z = 60 \sin(0.5 \times 10^3 x + 1.5 \times 10^{11} t) \text{ V/m}$$
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:
- तरंग की आवृत्ति ($f$) = $25 \text{ MHz} = 25 \times 10^6 \text{ Hz}$
- विद्युत क्षेत्र सदिश ($\vec{E}$) = $6.3 \hat{j} \text{ V/m}$ (जिसका अर्थ है कि विद्युत क्षेत्र $y$-अक्ष के अनुदिश है)
\nहम जानते हैं कि चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण ($B_0$) और विद्युत क्षेत्र के परिमाण ($E_0$) के बीच संबंध होता है:
$$B_0 = \frac{E_0}{c}$|
\nजहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की चाल है, $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$।
\nमान रखने पर:
$$B_0 = \frac{6.3 \text{ V/m}}{3 \times 10^8 \text{ m/s}} = 2.1 \times 10^{-8} \text{ T}$$
\nचुंबकीय क्षेत्र की दिशा:\nतरंग $x$-दिशा ($\hat{i}$) के अनुदिश संचरित हो रही है, और विद्युत क्षेत्र $y$-दिशा ($\hat{j}$) के अनुदिश है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा संचरण सदिश और विद्युत क्षेत्र के सदिश गुणन की दिशा से दी जाती है, विशेष रूप से $\vec{E} \times \vec{B}$ तरंग संचरण की दिशा देता है। चूंकि तरंग $\hat{i}$ के अनुदिश चलती है और $\hat{j} \times \hat{k} = \hat{i}$, इसलिए चुंबकीय क्षेत्र $z$-अक्ष ($\hat{k}$) के अनुदिश होना चाहिए।
\nअतः चुंबकीय क्षेत्र सदिश है:
$$\vec{B} = 2.1 \times 10^{-8} \hat{k} \text{ T}$$