मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 भौतिकी - अध्याय: परमाणु (Atoms) - त्वरित संशोधन नोट्स
इस अध्याय में हम परमाणुओं की संरचना, थॉमसन और रदरफोर्ड के मॉडल, बोहर का परमाणु मॉडल और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम का अध्ययन करेंगे।
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1. थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson's Atomic Model)
- इसे 'तरबूज मॉडल' (Plum Pudding Model) भी कहते हैं।
- इसके अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन इस प्रकार धंसे रहते हैं जैसे तरबूज में बीज होते हैं।
- यह मॉडल परमाणु के स्थायित्व को समझाने में असफल रहा।
2. रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford's Alpha Scattering Experiment)
- निष्कर्ष:
- अधिकांश अल्फा-कण स्वर्ण पत्र (Gold foil) से बिना विक्षेपित हुए सीधे निकल गए, जिससे पता चलता है कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है।
- बहुत कम कण बड़े कोणों से विक्षेपित हुए।
- 180° पर वापस लौटने वाले कणों की संख्या अत्यंत कम थी, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का समस्त धनावेश और लगभग संपूर्ण द्रव्यमान उसके केंद्र में अत्यंत कम आयतन में केंद्रित है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
- निकटतम उपगम की दूरी (Distance of Closest Approach, $r_0$):
जब कोई अल्फा-कण नाभिक के अत्यंत निकट आता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा पूरी तरह से स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है।
r0 = (1 / 4πε0) (2e Ze) / K
जहाँ:
- $K$ = अल्फा-कण की गतिज ऊर्जा
- $Z$ = परमाणु क्रमांक
- $e$ = इलेक्ट्रॉन का आवेश
- प्रकीर्णन कोण ($\theta$) और प्रभाव दूरी ($b$) के बीच संबंध:
b = (Z e^2 cot(θ/2)) / (4πε_0 K)
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3. बोहर का परमाणु मॉडल (Bohr's Atomic Model)
बोहर ने रदरफोर्ड मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए क्वांटम सिद्धांतों का उपयोग किया। इसके तीन मुख्य अभिगृहीत हैं:
1. स्थैतिक कक्षाएं (Stationary Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनके लिए कोणीय संवेग ($L$) का मान h / 2π का पूर्ण गुणज होता है।
L = mvr = n (h / 2π)
जहाँ $n = 1, 2, 3...$ (मुख्य क्वांटम संख्या) और $h$ = प्लांक नियतांक।
2. ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition): जब कोई इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर ($E2$) से निम्न ऊर्जा स्तर ($E1$) में संक्रमण करता है, तो ऊर्जा फोटॉन के रूप में उत्सर्जित होती है।
hν = E2 - E1
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4. हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोहर मॉडल के महत्वपूर्ण सूत्र
मान लीजिए कक्षा की त्रिज्या $r$, वेग $v$ और ऊर्जा $E$ है, तथा मुख्य क्वांटम संख्या $n$ है।
- कक्षा की त्रिज्या ($r_n$):
rn = (n^2 h^2 ε0) / (π m e^2 Z)
हाइड्रोजन के लिए ($Z = 1$):
r_n = 0.529 × n^2 Å (जहाँ $1 Å = 10^{-10}$ मीटर)
- इलेक्ट्रॉन का वेग ($v_n$):
vn = (e^2) / (2 ε0 h n)
हाइड्रोजन के लिए ($Z = 1$):
v_n = (2.18 × 10^6 / n) m/s
कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग होती है।
En = - (me^4 Z^2) / (8 ε0^2 h^2 n^2)
हाइड्रोजन के लिए ($Z = 1$):
E_n = - (13.6 / n^2) eV
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5. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की श्रेणियाँ (Hydrogen Spectrum Series)
जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर ($n2$) से निम्न ऊर्जा स्तर ($n1$) में आता है, तो स्पेक्ट्रम रेखाएँ प्राप्त होती हैं। तरंग संख्या ($\bar{\nu}$) का सूत्र निम्न है:
1 / λ = R (1 / n1^2 - 1 / n2^2)
जहाँ $R$ = रिडबर्ग नियतांक ($R \approx 1.097 \times 10^7 m^{-1}$)।
विभिन्न श्रेणियाँ इस प्रकार हैं:
1. लाइमन श्रेणी (Lyman Series):
- $n1 = 1$, $n2 = 2, 3, 4...$
- क्षेत्र: पराबैंगनी क्षेत्र (Ultraviolet)
2. बा Balmer श्रेणी (Balmer Series):
- $n1 = 2$, $n2 = 3, 4, 5...$
- क्षेत्र: दृश्य क्षेत्र (Visible)
3. पाश्चन श्रेणी (Paschen Series):
- $n1 = 3$, $n2 = 4, 5, 6...$
- क्षेत्र: अवरक्त क्षेत्र (Infrared)
4. ब्रैकेट श्रेणी (Brackett Series):
- $n1 = 4$, $n2 = 5, 6, 7...$
- क्षेत्र: अवरक्त क्षेत्र (Infrared)
5. फुण्ड श्रेणी (Pfund Series):
- $n1 = 5$, $n2 = 6, 7, 8...$
- क्षेत्र: दूर अवरक्त क्षेत्र (Far Infrared)
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6. डी-ब्रॉग्ली की परिकल्पना की बोहर के अभिगृहीत द्वारा व्याख्या
बोहर की क्वांटमीकरण शर्त को डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda = h / mv$) के रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है:
2πr = nλ
अर्थात, कक्षा की परिधि इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणज होती है।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 परमाणु (Atoms)
परमाणु के शुरुआती मॉडल
थॉमसन का मॉडल (प्लम पुडिंग मॉडल)
धन आवेशित गोला
इलेक्ट्रॉन धंसे हुए
रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग
सोने की पतली पन्नी
निष्कर्ष
अधिकांश भाग खोखला है
समस्त धन आवेश केंद्र में (नाभिक) केंद्रित है
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
सौर मंडल जैसा मॉडल
कमियाँ
स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर पाया
रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर पाया
परमाणु स्पेक्ट्रम
उत्सर्जन स्पेक्ट्रम
अवशोषण स्पेक्ट्रम
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की श्रेणियाँ
लाइमन श्रेणी (पराबैंगनी क्षेत्र)
बामर श्रेणी (दृश्य क्षेत्र)
पाश्चन श्रेणी (अवरक्त क्षेत्र)
ब्रैकेट श्रेणी (अवरक्त क्षेत्र)
फंड श्रेणी (अवरक्त क्षेत्र)
बोहर का परमाणु मॉडल
बोहर की परिकल्पनाएँ
स्थिर कक्षाएँ
कोणीय संवेग का क्वांटीकरण ($L = nh/2\pi$)
ऊर्जा संक्रमण ($\Delta E = h\nu$)
हाइड्रोजन परमाणु के लिए व्यंजक
कक्षा की त्रिज्या ($r_n \propto n^2$)
इलेक्ट्रॉन का वेग ($v_n \propto 1/n$)
कुल ऊर्जा ($E_n = -13.6 / n^2$ eV)
बोहर मॉडल की सीमाएँ
केवल एकल-इलेक्ट्रॉन स्पीशीज़ के लिए मान्य
स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तीव्रता नहीं समझा पाया
डी ब्रोग्ली की व्याख्या
बोहर की क्वांटम शर्त की डी ब्रोग्ली द्वारा व्याख्या
इलेक्ट्रॉन तरंग रूप में
कक्षा की परिधि तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणज ($2\pi r = n\lambda$)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### हाइड्रोजन परमाणु के बोर मॉडल की अभिधारणाएँ
\nहाइड्रोजन परमाणु का बोर मॉडल निम्नलिखित तीन मूलभूत अभिधारणाओं पर आधारित है:
1. **नाभिकीय अवधारणा:** परमाणु में एक केंद्रीय धनात्मक भाग होता है जिसे नाभिक कहा जाता है, जहाँ परमाणु का समस्त धनात्मक आवेश और लगभग संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित होता है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार पथों में चक्कर लगाते हैं जिन्हें कक्षाएँ कहा जाता है, और आवश्यक अभिकेंद्र बल धनात्मक नाभिक तथा ऋणात्मक इलेक्ट्रॉनों के बीच स्थितिक विद्युत आकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है।
2. **कोणीय संवेग का क्वांटीकरण:** इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित स्थायी, ऊर्जा न उत्सर्जित करने वाली कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिन्हें स्थायी कक्षाएँ कहा जाता है। इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का कक्षीय कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, जहाँ $h$ प्लांक स्थिरांक है। गणितीय रूप से, $L = mvr = \frac{nh}{2\pi}$, जहाँ $n = 1, 2, 3, \dots$ (मुख्य क्वांटम संख्या), $m$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, $v$ उसका वेग और $r$ कक्षा की त्रिज्या है।
3. **आवृत्ति प्रतिबंध:** स्थायी कक्षा में चक्कर लगाते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करता है। ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण तभी होता है जब कोई इलेक्ट्रॉन एक अनुमति प्राप्त कक्षा से दूसरी कक्षा में कूदता है। यदि इन कक्षाओं से जुड़ी ऊर्जाएँ $E_1$ और $E_2$ हैं, तो उत्सर्जित या अवशोषित विकिरण की आवृत्ति $\nu$ इस प्रकार दी जाती है: $h\nu = E_2 - E_1$।
### $n$-वीं कक्षा की त्रिज्या के लिए व्युत्पत्ति
\nमान लीजिए $m$ द्रव्यमान और $e$ आवेश का एक इलेक्ट्रॉन परमाणु क्रमांक $Z$ (हाइड्रोजन के लिए $Z = 1$) के नाभिक के चारों ओर वेग $v$ से $r$ त्रिज्या की कक्षा में चक्कर लगा रहा है।
- **चरण 1: बलों का संतुलन**
नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच का स्थितिक विद्युत आकर्षण बल आवश्यक अभिकेंद्र बल प्रदान करता है:
$$\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{(Ze)(e)}{r^2} = \frac{mv^2}{r}$$
$$\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{Ze^2}{r^2} = \frac{mv^2}{r}$$
$$\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{Ze^2}{r} = mv^2 \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
- **चरण 2: बोर के क्वांटीकरण प्रतिबंध का अनुप्रयोग**
बोर की दूसरी अभिधारणा के अनुसार:
$$mvr = \frac{nh}{2\pi}$$
वेग $v$ के लिए हल करने पर:
$$v = \frac{nh}{2\pi mr} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
- **चरण 3: समीकरण 1 में वेग का मान रखना**
समीकरण 2 से $v$ का मान समीकरण 1 में रखने पर:
$$\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{Ze^2}{r} = m \left( \frac{nh}{2\pi mr} \right)^2$$
$$\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{Ze^2}{r} = m \cdot \frac{n^2 h^2}{4\pi^2 m^2 r^2}$$
$$\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{Ze^2}{r} = n^2 h^2 / (4\pi^2 m r^2)$$
- **चरण 4: त्रिज्या ($r$) के लिए हल करना**
$r$ को अलग करने के लिए पदों को व्यवस्थित करने पर:
$$r = \frac{n^2 h^2 \cdot 4\pi\varepsilon_0}{4\pi^2 m Z e^2}$$
$$r_n = \frac{n^2 h^2 \varepsilon_0}{\pi m Z e^2}$$
### निष्कर्ष
\nहाइड्रोजन परमाणु के लिए $Z = 1$ है। नियत पदों ($h$, $\varepsilon_0$, $\pi$, $m$, $e$) के मान रखने पर हमें पहली कक्षा की त्रिज्या प्राप्त होती है ($r_1 \approx 0.53 \text{ \AA}$)। चूंकि $h$, $\varepsilon_0$, $\pi$, $m$, और $e$ सभी मूलभूत स्थिरांक हैं, हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि:
$$r_n \propto n^2$$\nअतः, $n$-वीं कक्षा की त्रिज्या मुख्य क्वांटम संख्या $n$ के वर्ग के सीधे समानुपाती होती है।
उत्तर (Answer): ### हाइड्रोजन वर्णक्रमीय श्रेणियों का परिचय\nजब एक उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणु उच्च ऊर्जा स्तरों ($n_2$) से निम्न ऊर्जा स्तरों ($n_1$) में संक्रमण करता है, तो यह विशिष्ट आवृत्तियों के विकिरण का उत्सर्जन करता है। जब इन उत्सर्जित आवृत्तियों को तरंग दैर्ध्य या आवृत्ति के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो वे एक रेखीय स्पेक्ट्रम बनाते हैं जिसे हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के रूप में जाना जाता है। वर्णक्रमीय रेखाओं को अलग-अलग परिवारों या श्रेणियों में समूहीकृत किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक का नाम उसके खोजकर्ता के नाम पर रखा गया है।
### वर्णक्रमीय श्रेणियों का विस्तृत वर्गीकरण\nहाइड्रोजन की वर्णक्रमीय श्रेणियों को व्यवस्थित रूप से निचले ऊर्जा स्तर ($n_1$) के आधार पर वर्गीकृत किया गया है जिस पर इलेक्ट्रॉन गिरते हैं:
* **1. लाइमैन श्रेणी:**
* **निम्न ऊर्जा स्तर:** $n_1 = 1$
* **उच्च ऊर्जा स्तर:** $n_2 = 2, 3, 4, \dots$
* **वर्णक्रमीय क्षेत्र:** पराबैंगनी (UV) क्षेत्र।
* **विवरण:** थियोडोर लाइमैन द्वारा खोजी गई, यह श्रेणी हाइड्रोजन परमाणु में उच्चतम ऊर्जा संक्रमणों का प्रतिनिधित्व करती है, जिसके परिणामस्वरूप कम तरंग दैर्ध्य सख्त रूप से पराबैंगनी स्पेक्ट्रम के भीतर आते हैं।
* **2. बामर श्रेणी:**
* **निम्न ऊर्जा स्तर:** $n_1 = 2$
* **उच्च ऊर्जा स्तर:** $n_2 = 3, 4, 5, \dots$
* **वर्णक्रमीय क्षेत्र:** दृश्य और निकट-पराबैंगनी क्षेत्र।
* **विवरण:** जोहान बामर द्वारा खोजी गई, यह ऐतिहासिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण श्रृंखला है क्योंकि इसकी पहली कुछ रेखाएँ पूरी तरह से विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य क्षेत्र के भीतर स्थित हैं, जिससे यह ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोमीटर के साथ आसानी से देखने योग्य हो जाती है।
* **3. पाश्चन श्रेणी:**
* **निम्न ऊर्जा स्तर:** $n_1 = 3$
* **उच्च ऊर्जा स्तर:** $n_2 = 4, 5, 6, \dots$
* **वर्णक्रमीय क्षेत्र:** अवरक्त (IR) क्षेत्र।
* **विवरण:** फ्रेडरिक पाश्चन द्वारा खोजी गई, तीसरी कक्षा में समाप्त होने वाले संक्रमण कम ऊर्जा वाले फोटॉनों का उत्सर्जन करते हैं, जिससे तरंग दैर्ध्य स्पेक्ट्रम के अवरक्त क्षेत्र में स्थानांतरित हो जाती है।
* **4. ब्रैकेट श्रेणी:**
* **निम्न ऊर्जा स्तर:** $n_1 = 4$
* **उच्च ऊर्जा स्तर:** $n_2 = 5, 6, 7, \dots$
* **वर्णक्रमीय क्षेत्र:** निकट-अवरक्त क्षेत्र।
* **विवरण:** फ्रेडरिक समर ब्रैकेट द्वारा खोजी गई, ये वर्णक्रमीय रेखाएँ चौथे ऊर्जा स्तर पर समाप्त होने वाले संक्रमणों से मेल खाती हैं और अवरक्त स्पेक्ट्रम में और गहराई तक पाई जाती हैं।
* **5. फुंड श्रेणी:**
* **निम्न ऊर्जा स्तर:** $n_1 = 5$
* **उच्च ऊर्जा स्तर:** $n_2 = 6, 7, 8, \dots$
* **वर्णक्रमीय क्षेत्र:** दूर-अवरक्त क्षेत्र।
* **विवरण:** अगस्त हरमन फुंड द्वारा खोजी गई, इस श्रृंखला में पाँचवें ऊर्जा स्तर पर समाप्त होने वाले संक्रमण शामिल हैं, जो दूर-अवरक्त क्षेत्र में स्थित लंबी तरंग दैर्ध्य उत्पन्न करते हैं।
### गणितीय सूत्र\nइन श्रेणियों में किसी भी वर्णक्रमीय रेखा की तरंग दैर्ध्य ($\lambda$) रिडबर्ग सूत्र द्वारा दी जाती है:
$$\frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right)$$\nजहाँ $R$ रिडबर्ग नियतांक है ($R \approx 1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}$)।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण संख्यात्मक हल
**1. $n$-वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन के वेग का सूत्र:**\nबोर के सिद्धांत से, हाइड्रोजन परमाणु की $n$-वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन का वेग $v_n$ इस प्रकार दिया जाता है:
$$v_n = \frac{e^2}{2 \varepsilon_0 h n}$|
**2. पहली कक्षा के लिए गणना ($n = 1$):**
$$v_1 = \frac{(1.6 \times 10^{-19})^2}{2 \times (8.85 \times 10^{-12}) \times (6.63 \times 10^{-34}) \times 1}$$
$$v_1 = \frac{2.56 \times 10^{-38}}{117.349 \times 10^{-46}}$$
$$v_1 \approx 2.18 \times 10^6 \text{ m/s}$$
**3. दूसरी कक्षा के लिए गणना ($n = 2$):**\nचूँकि $v_n \propto \frac{1}{n}$:
$$v_2 = \frac{v_1}{2} = \frac{2.18 \times 10^6}{2} = 1.09 \times 10^6 \text{ m/s}$$
**4. तीसरी कक्षा के लिए गणना ($n = 3$):**
$$v_3 = \frac{v_1}{3} = \frac{2.18 \times 10^6}{3} = 7.27 \times 10^5 \text{ m/s}$$
**5. सबसे अंदर की कक्षा ($n = 1$) में परिक्रमण काल की गणना:**\nसबसे पहले, पहली कक्षा की त्रिज्या ($r_1$) ज्ञात करें:
$$r_1 = \frac{(1)^2 \times (6.63 \times 10^{-34})^2 \times (8.85 \times 10^{-12})}{\pi \times (9.1 \times 10^{-31}) \times (1.6 \times 10^{-19})^2}$$
$$r_1 \approx 5.31 \times 10^{-11} \text{ m} = 0.531 \text{ Å}$$
\nअब, आवर्तकाल $T$ कक्षा की परिधि को वेग से विभाजित करने पर प्राप्त होता है:
$$T = \frac{2\pi r_1}{v_1}$$
$$T = \frac{2 \times 3.1416 \times 5.31 \times 10^{-11}}{2.18 \times 10^6}$$
$$T \approx 1.53 \times 10^{-16} \text{ s}$$
**अंतिम उत्तर:**
* पहली कक्षा में चाल = $2.18 \times 10^6 \text{ m/s}$
* दूसरी कक्षा में चाल = $1.09 \times 10^6 \text{ m/s}$
* तीसरी कक्षा में चाल = $7.27 \times 10^5 \text{ m/s}$
* सबसे अंदर की कक्षा में आवर्तकाल = $1.53 \times 10^{-16} \text{ s}$
उत्तर (Answer): ### रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सीमाएँ\nपरमाणु का रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल एक बड़ी सफलता थी क्योंकि इसने एक सघन, धनात्मक नाभिक के अस्तित्व को सिद्ध किया। हालाँकि, इसमें गंभीर सैद्धांतिक कमियाँ थीं:
* **परमाणुओं के स्थायित्व को समझाने में असमर्थता:** चिरसम्मत विद्युतगतिकी (मैक्सवेल के समीकरण) के अनुसार, किसी भी त्वरित आवेशित कण को लगातार विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का विकिरण करना चाहिए। चूंकि नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन लगातार त्वरित होते हैं (अभिकेंद्र त्वरण), उन्हें लगातार ऊर्जा खोकर अंदर की ओर कुंडलित होना चाहिए और अंततः एक सेकंड के अंश ($~10^{-8}$ सेकंड) के भीतर नाभिक में गिर जाना चाहिए। हालाँकि, परमाणु स्थिर होते हैं।
* **रेखीय स्पेक्ट्रम को समझाने में असमर्थता:** यदि इलेक्ट्रॉन लगातार अंदर की ओर spiral करते हैं, तो उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति लगातार बदलेगी, जिससे प्रकाश का एक निरंतर स्पेक्ट्रम उत्पन्न होगा। हालाँकि, प्रयोगों से पता चलता है कि परमाणु स्पष्ट रूप से परिभाषित आवृत्तियों वाले असतत रेखीय स्पेक्ट्रम (जैसे बामर या लाइमन श्रृंखला) का उत्सर्जन करते हैं।
* **परमाणु आकारों की व्याख्या:** रदरफोर्ड मॉडल परमाणु के आकार के वास्तविक परिमाण को सटीक रूप से स्पष्ट नहीं कर सका।
### बोर के मॉडल ने रदरफोर्ड की सीमाओं को कैसे दूर किया\nनील्स बोर ने क्वांटम शर्तों को पेश करके इन विरोधाभासों को सफलतापूर्वक हल किया, जिसने नियंत्रित तरीके से चिरसम्मत भौतिकी का उल्लंघन किया:
* **स्थिर कक्षाओं का परिचय (स्थायित्व का समाधान):** बोर ने परिकल्पना की कि इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित गैर-विकिरण करने वाली 'स्थिर' कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं जहाँ वे विद्युत चुम्बकीय विकिरण का उत्सर्जन नहीं करते हैं, जो चिरसम्मत विद्युतगतिकी को चुनौती देता है। इसने परमाणु पतन के विरोधाभास को पूरी तरह से हल कर लिया और समझाया कि परमाणु स्थिर क्यों होते हैं।
* **कोणीय संवेग का क्वांटीकरण:** कोणीय संवेग को $\frac{h}{2\pi}$ के असतत पूर्ण गुणकों तक सीमित करके, बोर ने यह सुनिश्चित किया कि परमाणु के भीतर केवल विशिष्ट ऊर्जा स्तर ही अनुमति प्राप्त हैं।
* **रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या:** बोर ने प्रस्ताव दिया कि एक इलेक्ट्रॉन केवल तभी ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण करता है जब वह एक स्थिर कक्षा से दूसरी कक्षा में कूदता है। उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा $\Delta E = E_{final} - E_{initial} = h\nu$ द्वारा दी जाती है। चूंकि ऊर्जा स्तर असतत हैं, इसलिए केवल विशिष्ट आवृत्तियों का उत्सर्जन या अवशोषण होता है, जो प्रयोगात्मक रूप से देखे गए असतत रेखीय स्पेक्ट्रम को खूबसूरती से समझाता है।
### निष्कर्ष\nयद्यपि बोर के मॉडल की अपनी सीमाएँ थीं (जैसे बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं और स्टार्क/जीमान प्रभावों के लिए विफल होना), इसने चिरसम्मत भौतिकी और उभरते हुए क्वांटम सिद्धांत के बीच सफलतापूर्वक एक सेतु का काम किया, जिससे पूर्ण क्वांटम यांत्रिकी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
उत्तर (Answer): ### रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सीमाएँ\nयद्यपि रदरफोर्ड के $\alpha$-कण प्रकीर्णन प्रयोग ने परमाणु के नाभिकीय मॉडल को सफलतापूर्वक स्थापित किया (एक भारी, धनावेशित नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते इलेक्ट्रॉनों का प्रस्ताव रखा), लेकिन इसमें प्रमुख सैद्धांतिक कमियाँ थीं:
* **परमाणु के स्थायित्व को समझाने में असमर्थता:** चिरसम्मत विद्युतगतिकी (मैक्सवेल के सिद्धांत) के अनुसार, किसी भी त्वरित आवेशित कण को लगातार विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा विकीर्ण करनी चाहिए। चूंकि एक वृत्तीय कक्षा में घूमने वाले इलेक्ट्रॉन को अभिकेंद्र त्वरण का अनुभव होता है, इसलिए इसे लगातार ऊर्जा खोनी चाहिए और एक सेकंड के अंश ($~10^{-8}$ सेकंड) के भीतर नाभिक में गिर जाना चाहिए। हालाँकि, परमाणु स्थिर होते हैं।
* **रेखीय स्पेक्ट्रम को समझाने में असमर्थता:** रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन किसी भी मनमाने कक्ष में घूम सकते हैं। फलस्वरूप, उन्हें सभी आवृत्तियों का एक सतत स्पेक्ट्रम विकीर्ण करना चाहिए। हालाँकि, परमाणु गैसों के प्रयोग विशिष्ट रेखीय स्पेक्ट्रम (विविक्त आवृत्तियाँ) दिखाते हैं।
### बोर के मॉडल ने इन सीमाओं को कैसे दूर किया\nनील्स बोर ने 1913 में एक नया मॉडल प्रस्तावित किया जिसने क्वांटम परिकल्पनाओं को पेश करके रदरफोर्ड के मॉडल की कमियों को सफलतापूर्वक हल किया:
* **स्थायित्व का समाधान:** बोर ने प्रतिपादित किया कि इलेक्ट्रॉन कुछ विशिष्ट गैर-विकिरण कक्षाओं में घूमते समय ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं जिन्हें **स्थायी कक्षाएँ** कहा जाता है। ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण तभी होता है जब कोई इलेक्ट्रॉन इन निश्चित ऊर्जा अवस्थाओं के बीच कूदता है।
* **रेखीय स्पेक्ट्रम का समाधान:** चूँकि अनुमत कक्षाओं में निश्चित, विविक्त ऊर्जाएँ ($E_n$) होती हैं, इसलिए ऊर्जा अंतर $\Delta E = E_2 - E_1$ भी निश्चित होता है। जब कोई इलेक्ट्रॉन उच्च कक्षा से निचली कक्षा में संक्रमण करता है, तो एक विशिष्ट, एकल आवृत्ति ($\nu = \Delta E / h$) का फोटॉन उत्सर्जित होता है, जिसके परिणामस्वरूप सतत स्पेक्ट्रम के बजाय विविक्त रेखीय स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
\nइस प्रकार, बोर के मॉडल ने परमाणु स्थायित्व और स्पेक्ट्रमी श्रृंखलाओं को समझाने के लिए चिरसम्मत यांत्रिकी और प्रारंभिक क्वांटम सिद्धांत को सफलतापूर्वक जोड़ा।
उत्तर (Answer): ### अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग का परिचय
1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड के मार्गदर्शन में हंस गीगर और अर्नेस्ट मार्सडन द्वारा प्रसिद्ध रूप से किया गया अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग, आधुनिक भौतिकी में सबसे महत्वपूर्ण मील के पत्थरों में से एक है। इस प्रयोग से पहले, जे.जे. थॉमसन का "प्लम पुडिंग मॉडल" व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता था, जिसमें यह प्रस्ताव दिया गया था कि परमाणु धनावेश का एक एकसमान गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन अंदर धंसे हुए हैं। रदरफोर्ड के प्रयोग ने इस मॉडल को पूरी तरह से खारिज कर दिया और परमाणु के नाभिकीय मॉडल की नींव रखी।
### प्रायोगिक व्यवस्था
\nप्रायोगिक व्यवस्था में वायु के अणुओं द्वारा अल्फा कणों के प्रकीर्णन को रोकने के लिए एक निर्वातित कक्ष के भीतर निम्नलिखित प्रमुख घटक शामिल थे:
* **अल्फा स्रोत:** एक रेडियोधर्मी पदार्थ (जैसे बिस्मथ-214 या पोलोनियम) जिसे एक सीसे के ब्लॉक के कंटेनर में बंद किया गया था। यह स्रोत लगातार उच्च गति से चलने वाले उच्च-ऊर्जा अल्फा कण (${}_2^4\text{He}$ नाभिक) उत्सर्जित करता था।
* **कोलिवेटर (संकेन्द्रक):** उत्सर्जित कणों को एक संकीर्ण स्लिट वाले मोटे सीसे के प्लेटों से गुजार कर अल्फा कणों का एक बारीक, समानांतर बीम प्राप्त किया गया था।
* **सोने की पन्नी:** सोने की एक बहुत पतली शीट (लगभग $100 \text{ nm}$ मोटी, जिसमें लगभग $400$ परमाणु परतें थीं) को संकेंद्रित अल्फा बीम के रास्ते में रखा गया था। सोने को इसलिए चुना गया क्योंकि इसे अत्यंत पतली पन्नों में पीटा जा सकता है, जिससे लक्ष्य के भीतर कई प्रकीर्णन कम से कम हो जाते हैं।
* **डिटेक्टर प्रणाली:** एक सूक्ष्मदर्शी से जुड़ी हुई जिंक सल्फाइड ($\text{ZnS}$) फ्लोरोसेंट स्क्रीन। जब भी कोई उच्च-ऊर्जा अल्फा कण $\text{ZnS}$ स्क्रीन से टकराता था, तो प्रकाश की एक छोटी सी चमक (स्फुरदीप्ति) उत्पन्न होती थी। आपतित बीम के सापेक्ष विभिन्न कोणों पर इन स्फुरदीप्तियों को गिनने के लिए सूक्ष्मदर्शी का उपयोग किया गया था।
* **प्रेक्षण:** जब प्रयोग किया गया, तो गीगर और मार्सडन ने विभिन्न कोणों ($\theta$) पर प्रकीर्णित अल्फा कणों की संख्या दर्ज की। मुख्य प्रेक्षण थे:
* **अधिकांश कणों का न्यूनतम विक्षेपण:** भारी बहुमत वाले अल्फा कण ($>99\%$) सोने की पन्नी से बिना किसी विक्षेपण या बहुत कम विक्षेपण ($1^\circ$ से कम कोण) के सीधे निकल गए।
* **मध्यम विक्षेपण:** अल्फा कणों का एक छोटा सा अंश मध्यम कोणों पर विक्षेपित हुआ।
* **बड़े विक्षेपण:** केवल बहुत कम संख्या में अल्फा कण ($8000$ में से लगभग $1$) $90^\circ$ से अधिक के विक्षेपण से गुजरे।
* **अत्यंत विपरीत प्रकीर्णन:** अल्फा कणों का एक अत्यंत दुर्लभ अंश (लगभग $20,000$ से $100,000$ में से $1$) लगभग $180^\circ$ के विक्षेपण कोण के साथ अपने पथ को दोहराते हुए पीछे की ओर उछल गया।
### परमाणु संरचना के संबंध में निष्कर्ष
\nइन उल्लेखनीय प्रेक्षणों के आधार पर, रदरफोर्ड ने कई बुनियादी निष्कर्ष निकाले जिन्होंने परमाणु वास्तुकला की हमारी समझ को बदल दिया:
* **खाली जगह की उपस्थिति:** चूँकि अधिकांश अल्फा कण बिना किसी महत्वपूर्ण विचलन के पन्नी से गुजर गए, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि परमाणु के अंदर की अधिकांश जगह पूरी तरह से खाली है।
* **केंद्रित धनावेश (नाभिक):** बड़े कोण के विक्षेपण और पूर्ण वापसी की दुर्लभ घटनाओं से संकेत मिलता है कि परमाणु का धनावेश और लगभग संपूर्ण द्रव्यमान एकसमान रूप से वितरित नहीं है (जैसा कि थॉमसन ने सुझाव दिया था), बल्कि परमाणु के केंद्र में स्थित एक अत्यंत छोटे, सघन क्षेत्र में तीव्रता से केंद्रित है, जिसे **नाभिक** कहा जाता है।
* **नाभिक का आकार:** अल्फा कणों की गतिज ऊर्जा और निकटतम दृष्टिकोण की दूरी की गणना का उपयोग करते हुए, रदरफोर्ड ने नाभिक की त्रिज्या लगभग $10^{-14} \text{ m}$ से $10^{-15} \text{ m}$ होने का अनुमान लगाया, जो परमाणु की समग्र त्रिज्या ($10^{-10} \text{ m}$) से लगभग $10,000$ से $100,000$ गुना छोटा है। यह साबित करता है कि परमाणु एक सूक्ष्म, भारी कोर के साथ ज्यादातर खाली स्थान है।
* **नाभिकीय बल / कूलॉम्बी प्रतिकर्षक:** धनावेशित अल्फा कणों का विक्षेपण धनावेशित नाभिक द्वारा लगाए गए मजबूत स्थिरवैद्युत (कूलॉम्बी) प्रतिकर्षक के कारण होता है।
उत्तर (Answer): हाइड्रोजन परमाणु की लाइमैन श्रेणी में स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम और दीर्घतम तरंगदैर्ध्य की गणना करने के लिए, हम हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के लिए रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते हैं:
$$\frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right)$$
\nजहाँ:
* $\lambda$ उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा की तरंगदैर्ध्य है।
* $R$ रिडबर्ग नियतांक = $1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}$ है।
* $n_1$ निम्न ऊर्जा स्तर की मुख्य क्वांटम संख्या है।
* $n_2$ उच्च ऊर्जा स्तर की मुख्य क्वांटम संख्या है ($n_2 > n_1$)।
**लाइमैन श्रेणी** के लिए, इलेक्ट्रॉन भू-अवस्था (ground state) में संक्रमण करते हैं, जिसका अर्थ है कि निचली कक्षा स्थिर है:
$$n_1 = 1$$
---
### भाग 1: लघुत्तम तरंगदैर्ध्य ($\lambda_{\text{min}}$) की गणना
\nसबसे छोटी तरंगदैर्ध्य उत्सर्जित फोटॉन की अधिकतम ऊर्जा से मेल खाती है। प्लांक-आइंस्टीन संबंध ($E = \frac{hc}{\lambda}$) के अनुसार, अधिकतम ऊर्जा के लिए कक्षाओं के बीच अधिकतम संभव ऊर्जा अंतर की आवश्यकता होती है। यह तब होता है जब कोई इलेक्ट्रॉन सबसे बाहरी अनंत कक्षा से भू-अवस्था में गिरता है:
$$n_2 = \infty$$
\nरिडबर्ग सूत्र में $n_1 = 1$ और $n_2 = \infty$ रखने पर:
$$\frac{1}{\lambda_{\text{min}}} = R \left( \frac{1}{1^2} - \frac{1}{\infty^2} \right)$$
\nचूँकि $\frac{1}{\infty} = 0$ है:
$$\frac{1}{\lambda_{\text{min}}} = R (1 - 0) = R$$
$$\lambda_{\text{min}} = \frac{1}{R}$|
\nअब $R$ का मान रखते हैं:
$$\lambda_{\text{min}} = \frac{1}{1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}}$$
$$\lambda_{\text{min}} = 0.91157 \times 10^{-7} \text{ m}$$
$$\lambda_{\text{min}} = 9.12 \times 10^{-8} \text{ m} \quad \text{या} \quad 91.2 \text{ nm}$|
---
### भाग 2: दीर्घतम तरंगदैर्ध्य ($\lambda_{\text{max}}$) की गणना
\nसबसे लंबी तरंगदैर्ध्य उत्सर्जित फोटॉन की न्यूनतम ऊर्जा से मेल खाती है। यह तब होता है जब लगातार ऊर्जा स्तरों के बीच ऊर्जा अंतर सबसे कम होता है, जो तब होता है जब कोई इलेक्ट्रॉन तुरंत निकट की उच्च कक्षा से भू-अवस्था में संक्रमण करता है:
$$n_2 = 2$$
\nरिडबर्ग सूत्र में $n_1 = 1$ और $n_2 = 2$ रखने पर:
$$\frac{1}{\lambda_{\text{max}}} = R \left( \frac{1}{1^2} - \frac{1}{2^2} \right)$$
$$\frac{1}{\lambda_{\text{max}}} = R \left( 1 - \frac{1}{4} \right)$|
$$\frac{1}{\lambda_{\text{max}}} = R \left( \frac{3}{4} \right)$|
$$\lambda_{\text{max}} = \frac{4}{3R}$|
\nअब $R$ का मान रखते हैं:
$$\lambda_{\text{max}} = \frac{4}{3 \times 1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}}$$
$$\lambda_{\text{max}} = \frac{4}{3.291 \times 10^7 \text{ m}^{-1}}$$
$$\lambda_{\text{max}} = 1.21543 \times 10^{-7} \text{ m}$|
$$\lambda_{\text{max}} = 1.215 \times 10^{-7} \text{ m} \quad \text{या} \quad 121.5 \text{ nm}$|
### निष्कर्ष:
* लाइमैन श्रेणी में लघुत्तम तरंगदैर्ध्य **$91.2 \text{ nm}$** (या $912 \text{ Å}$) है।
* लाइमैन श्रेणी में दीर्घतम तरंगदैर्ध्य **$121.5 \text{ nm}$** (या $1215 \text{ Å}$) है।
उत्तर (Answer): ### हाइड्रोजन परमाणु के बोर मॉडल की अभिधारणाएं
\nनील्स बोर ने 1913 में क्लासिकल भौतिकी और प्रारंभिक क्वांटम अवधारणाओं को मिलाकर हाइड्रोजन परमाणु के लिए एक मॉडल प्रस्तावित किया। यह मॉडल निम्नलिखित तीन मौलिक अभिधारणाओं पर आधारित है:
* **नाभिकीय अवधारणा:** परमाणु में एक केंद्रीय, धनावेशित नाभिक होता है जहाँ परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित होता है। इलेक्ट्रॉन इस नाभिक के चारों ओर स्थिरवैद्युत आकर्षण बल के प्रभाव में वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं।
* **क्वांटमीकरण प्रतिबंध:** इलेक्ट्रॉन केवल उन स्थिर, ऊर्जा-उत्सर्जन न करने वाली वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनके लिए चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है। गणितीय रूप से इसे $L = mvr = \frac{nh}{2\pi}$ के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ $n = 1, 2, 3, \dots$ (मुख्य क्वांटम संख्या), $m$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, $v$ वेग, $r$ कक्षा की त्रिज्या और $h$ प्लांक स्थिरांक है।
* **आवृत्ति प्रतिबंध:** अपनी अनुमत स्थायी कक्षाओं में चक्कर लगाते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करता है। ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण तभी होता है जब कोई इलेक्ट्रॉन किसी अनुमत उच्च ऊर्जा कक्षा से किसी अन्य निम्न ऊर्जा कक्षा में संक्रमण करता है। उत्सर्जित या अवशोषित विकिरण की आवृत्ति ($\nu$) संबंध $h\nu = E_2 - E_1$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $E_2$ और $E_1$ क्रमशः उच्च और निम्न कक्षाओं की ऊर्जाएँ हैं।
### $n$-वीं कक्षा की त्रिज्या की व्युत्पत्ति
\nआइए $m$ द्रव्यमान और $-e$ आवेश के एक इलेक्ट्रॉन पर विचार करें जो परमाणु क्रमांक $Z$ (आवेश $+Ze$) वाले नाभिक के चारों ओर $r$ त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में $v$ वेग से चक्कर लगा रहा है।
1. **अभिकेंद्र बल की आवश्यकता:** इलेक्ट्रॉन की वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल कूलॉम के नियम के अनुसार धनावेशित नाभिक और ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन के बीच के स्थिरवैद्युत आकर्षण बल से प्राप्त होता है:
$$\frac{mv^2}{r} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{(Ze)(e)}{r^2}$$
$$\frac{mv^2}{r} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{Ze^2}{r^2} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
2. **बोर का क्वांटमीकरण प्रतिबंध:** बोर की दूसरी अभिधारणा के अनुसार, कोणीय संवेग क्वांटमित होता है:
$$mvr = \frac{nh}{2\pi}$$
वेग $v$ के लिए हल करने पर:
$$v = \frac{nh}{2\pi mr} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
3. **वेग का प्रतिस्थापन:** समीकरण 2 से $v$ का मान समीकरण 1 में प्रतिस्थापित करने पर:
$$\frac{m}{r} \left( \frac{nh}{2\pi mr} \right)^2 = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{Ze^2}{r^2}$$
$$\frac{m}{r} \cdot \frac{n^2 h^2}{4\pi^2 m^2 r^2} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{Ze^2}{r^2}$$
$$\frac{n^2 h^2}{4\pi^2 m r^3} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{Ze^2}{r^2}$$
4. **त्रिज्या ($r$) के लिए हल करना:** $r$ को अलग करने के लिए पदों को व्यवस्थित करने पर:
$$r = \frac{n^2 h^2 \cdot 4\pi \varepsilon_0}{4\pi^2 m Z e^2}$$
$$r_n = \frac{n^2 h^2 \varepsilon_0}{\pi m Z e^2} \quad \text{--- (त्रिज्या के लिए व्यापक व्यंजक)}$$
\nहाइड्रोजन परमाणु के लिए, $Z = 1$ है। मौलिक स्थिरांकों के मानक मान ($h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ J s}$, $\varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2}$, $m = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$, $e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$) रखने पर, पहली कक्षा ($n = 1$) की त्रिज्या लगभग $0.53 \text{ Å}$ या $5.3 \times 10^{-11} \text{ m}$ प्राप्त होती है। इस प्रकार, $n$-वीं कक्षा की त्रिज्या मुख्य क्वांटम संख्या के वर्ग के सीधे आनुपातिक होती है ($r_n \propto n^2$)。
उत्तर (Answer): ### $n$-वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा की व्युत्पत्ति\nमान लीजिए $m$ द्रव्यमान और $e$ आवेश का एक इलेक्ट्रॉन $r$ त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में $v$ चाल से $+Ze$ आवेश वाले परमाणु क्रमांक $Z$ (हाइड्रोजन के लिए, $Z=1$) के नाभिक के चारों ओर घूम रहा है।
1. **गतिज ऊर्जा (K.E.):**
कूलॉम के नियम से, अभिकेंद्र बल स्थिरवैद्युत बल द्वारा संतुलित होता है:
$$\frac{mv^2}{r} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2}{r^2}$$
दोनों पक्षों को $\frac{r}{2}$ से गुणा करने पर, हम गतिज ऊर्जा ($K$) प्राप्त करते हैं:
$$K = \frac{1}{2} mv^2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2}{2r} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
2. **स्थितिज ऊर्जा (P.E.):**
नाभिक के स्थिरवैद्युत क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा ($U$) निम्नलिखित है:
$$U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(+Ze)(-e)}{r} = -\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2}{r} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
3. **कुल ऊर्जा (E):**
कुल ऊर्जा $E$, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग है:
$$E = K + U$$
समीकरण (1) और समीकरण (2) के मान रखने पर:
$$E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2}{2r} - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2}{r}$$
$$E = -\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2}{2r} \quad \text{--- (समीकरण 3)}$$
4. **त्रिज्या ($r$) का मान रखने पर:**
हम जानते हैं कि $n$-वीं बोर कक्षा की त्रिज्या है:
$$r = \frac{n^2 h^2 \varepsilon_0}{\pi m Z e^2}$$
समीकरण (3) में $r$ का यह मान रखने पर:
$$E_n = -\frac{Ze^2}{4\pi\varepsilon_0 \cdot 2} \cdot \left(\frac{\pi m Z e^2}{n^2 h^2 \varepsilon_0}\right)$$
$$E_n = -\frac{m Z^2 e^4}{8 \varepsilon_0^2 n^2 h^2}$$
\nहाइड्रोजन परमाणु ($Z = 1$) के लिए:
$$E_n = -\frac{m e^4}{8 \varepsilon_0^2 n^2 h^2} = -\frac{13.6}{n^2} \text{ eV}$$
### कुल ऊर्जा ऋणात्मक क्यों होती है?\nइलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन आकर्षक स्थिरवैद्युत बलों द्वारा नाभिक से बंधा होता है। ऋणात्मक ऊर्जा एक बंधित अवस्था को दर्शाती है। इलेक्ट्रॉन को नाभिक से मुक्त करने और उसे अनंत दूरी ($r = \infty$) पर ले जाने के लिए, जहाँ इसकी स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा दोनों शून्य हो जाती हैं (कुल ऊर्जा = शून्य), हमें $+13.6 \text{ eV}$ के बराबर बाहरी ऊर्जा (जिसे आयनीकरण ऊर्जा कहा जाता है) की आपूर्ति करनी होगी। इसलिए, ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन को परमाणु से हटाने के लिए उस पर कार्य करना पड़ता है।
उत्तर (Answer): हाइड्रोजन परमाणु की बामर श्रेणी में स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्ध्य ज्ञात करने के लिए, हम तरंगदैर्ध्य $\lambda$ के लिए रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते हैं:
$$\frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right)$$
\nबामर श्रेणी के लिए, निचला ऊर्जा स्तर $n_1 = 2$ होता है।
\nलघुत्तम तरंगदैर्ध्य (जो अधिकतम ऊर्जा संक्रमण से मेल खाती है) प्राप्त करने के लिए, ऊपरी ऊर्जा स्तर $n_2$ अनंत पर होना चाहिए, यानी $n_2 = \infty$।
\nसूत्र में मान प्रतिस्थापित करने पर:
$$\frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{\infty^2} \right)$$
$$\frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{4} - 0 \right)$$
$$\frac{1}{\lambda} = \frac{R}{4}$$
$$\lambda = \frac{4}{R}$$
\nअब, रिडबर्ग नियतांक का दिया गया मान $R = 1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}$ रखिए:
$$\lambda = \frac{4}{1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}}$$
$$\lambda = \frac{4000}{1.097} \times 10^{-7} \text{ m}$$
$$\lambda \approx 3648 \times 10^{-10} \text{ m} = 364.8 \text{ nm}$$
\nअतः, बामर श्रेणी में लघुत्तम तरंगदैर्ध्य $3.648 \times 10^{-7} \text{ m}$ या $364.8 \text{ nm}$ है।
उत्तर (Answer): रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियों, विशेष रूप से परमाणु के स्थायित्व को दूर करने के लिए नील्स बोर ने 1913 में परमाणु का बोर मॉडल प्रस्तुत किया। यह मॉडल निम्नलिखित तीन मौलिक परिकल्पनाओं पर आधारित है:
1. **स्थायी कक्षाएं:** परमाणु में इलेक्ट्रॉन धनावेशित नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित स्थिर, वृत्ताकार कक्षाओं में ही चक्कर लगाते हैं जिन्हें स्थायी कक्षाएं कहा जाता है। इन कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन किसी भी प्रकार की विद्युतचुंबकीय ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते हैं। इन अनुमत कक्षाओं में रहने पर इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा स्थिर रहती है।
2. **कोणीय संवेग का क्वांटीकरण:** इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में चक्कर लगा सकता है जिनमें इसका कक्षीय कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, जहाँ $h$ प्लांक स्थिरांक है। गणितीय रूप में इसे $L = mvr = \frac{nh}{2\pi}$ द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ $n = 1, 2, 3, ...$ (जिसे मुख्य क्वांटम संख्या कहा जाता है) तथा $m, v$ और $r$ क्रमशः इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, वेग और कक्षा की त्रिज्या हैं।
3. **आवृति प्रतिबंध / इलेक्ट्रॉनों का संक्रमण:** परमाणु द्वारा ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण तभी होता है जब कोई इलेक्ट्रॉन अपनी एक अनुमत स्थायी कक्षा से दूसरी कक्षा में संक्रमण करता है। उत्सर्जित या अवशोषित विकिरण की आवृत्ति ($\nu$) संबंध $h\nu = E_2 - E_1$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $E_2$ और $E_1$ क्रमशः उच्च और निम्न ऊर्जा अवस्थाओं की ऊर्जाएँ हैं। इसने परमाणु स्पेक्ट्रम को सफलतापूर्वक समझाया।
उत्तर (Answer): मान लीजिए $E$, $K$ और $U$ क्रमशः बोर कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा को दर्शाते हैं।
\nबोर परमाणु मॉडल को नियंत्रित करने वाले स्थिरवैद्युत और यांत्रिक सिद्धांतों से:
1. गतिज ऊर्जा $K$, कुल ऊर्जा $E$ से इस संबंध द्वारा संबंधित है:
$$K = -E$$
2. स्थितिज ऊर्जा $U$, कुल ऊर्जा $E$ से इस संबंध द्वारा संबंधित है:
$$U = 2E$$
(या $U = -2K$)
\nदिया गया है कि प्रथम उत्तेजित अवस्था में कुल ऊर्जा है:
$$E = -3.4 \text{ eV}$|
\nअब, गतिज ऊर्जा ($K$) की गणना करना:
$$K = -(-3.4 \text{ eV}) = +3.4 \text{ eV}$$
\nअब, स्थितिज ऊर्जा ($U$) की गणना करना:
$$U = 2 \times (-3.4 \text{ eV}) = -6.8 \text{ eV}$$
\nअतः, प्रथम उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $+3.4 \text{ eV}$ है और इसकी स्थितिज ऊर्जा $-6.8 \text{ eV}$ है।
उत्तर (Answer): परमाणु स्पेक्ट्रम को मुख्य रूप से उत्सर्जन और अवशोषण स्पेक्ट्रम में वर्गीकृत किया गया है, जो दोनों परमाणुओं की आंतरिक ऊर्जा अवस्थाओं में मौलिक अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
1. परमाणु उत्सर्जन स्पेक्ट्रम: जब किसी परमाणु को बाहरी ऊर्जा की आपूर्ति की जाती है (जैसे कि तापीय उत्तेजना या विद्युत विसर्जन के माध्यम से), तो उसके इलेक्ट्रॉन निचले ऊर्जा आधार स्तरों से उच्च उत्तेजित अवस्थाओं में चले जाते हैं। चूँकि ये उत्तेजित अवस्थाएं अस्थिर होती हैं, इसलिए इलेक्ट्रॉन विशिष्ट, विशिष्ट आवृत्तियों के फोटॉनों का उत्सर्जन करके तुरंत निचले ऊर्जा स्तरों पर लौट आते हैं। जब इस उत्सर्जित प्रकाश को प्रिज्म या ग्रेटिंग से गुजारा जाता है, तो यह एक अंधेरी पृष्ठभूमि पर चमकीली, रंगीन लाइनों से युक्त परमाणु उत्सर्जन स्पेक्ट्रम बनाता है। प्रत्येक तत्व उत्सर्जन लाइनों का एक अनूठा सेट तैयार करता है जो इसके ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट के रूप में कार्य करता है।
2. परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रम: जब सफेद प्रकाश के एक सतत स्पेक्ट्रम को परमाणुओं की एक ठंडी, अनुत्तेजित गैस से गुजारा जाता है, तो परमाणु प्रकाश की उन विशिष्ट आवृत्तियों को चुनिंदा रूप से अवशोषित करते हैं जिनकी संबंधित फोटॉन ऊर्जा उनके निचले और उच्च क्वांटम राज्यों के बीच ऊर्जा अंतर से मेल खाती है। गायब आवृत्तियाँ अन्यथा निरंतर उज्ज्वल पृष्ठभूमि के भीतर अंधेरे वर्णक्रमीय रेखाओं के रूप में दिखाई देती हैं, जिससे परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रम बनता है। इस प्रकार, अवशोषण स्पेक्ट्रम सीधे ऊपर की ओर इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण से मेल खाता है, जबकि उत्सर्जन स्पेक्ट्रम नीचे की ओर संक्रमण से मेल खाता है।
उत्तर (Answer): लाइमैन श्रेणी में उत्सर्जित फोटॉनों की अधिकतम आवृत्ति ज्ञात करने के लिए, हम सबसे पहले आवृत्ति $\nu$, तरंगदैर्ध्य $\lambda$, और प्रकाश की चाल $c$ के बीच के संबंध को देखते हैं:
$$\nu = \frac{c}{\lambda}$$
\nलाइमैन श्रेणी ($n_1 = 1$, $n_2 = \infty$) के लिए न्यूनतम तरंगदैर्ध्य ($\lambda_{\text{min}}$) ज्ञात करने हेतु रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते हैं:
$$\frac{1}{\lambda_{\text{min}}} = R \left( \frac{1}{1^2} - \frac{1}{\infty^2} \right) = R (1 - 0) = R$$
$$\lambda_{\text{min}} = \frac{1}{R}$$
\nअब, अधिकतम आवृत्ति $\nu_{\text{max}}$ न्यूनतम तरंगदैर्ध्य $\lambda_{\text{min}}$ के संगत होती है:
$$\nu_{\text{max}} = \frac{c}{\lambda_{\text{min}}} = c \cdot R$$
\nदिए गए मानों ($c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ और $R = 1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}$) को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\nu_{\text{max}} = (3 \times 10^8) \times (1.097 \times 10^7) = 3.291 \times 10^{15} \text{ Hz}$$
\nअतः, लाइमैन श्रेणी में उत्सर्जित फोटॉनों की अधिकतम आवृत्ति $3.291 \times 10^{15} \text{ Hz}$ है।
उत्तर (Answer): रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल ने प्रस्ताव दिया कि परमाणु का धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान एक छोटे से नाभिक में केंद्रित होता है, जिसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन सूर्य के चारों ओर ग्रहों की तरह चक्कर लगाते हैं। हालाँकि, इस मॉडल में दो प्रमुख बुनियादी सीमाएं थीं जिनके कारण अंततः बोर मॉडल द्वारा इसका स्थान ले लिया गया:
1. परमाणु के स्थायित्व को समझाने में असमर्थता: चिरसम्मत विद्युतगतिकी (मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत) के अनुसार, किसी भी त्वरित आवेशित कण को लगातार विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का विकिरण करना चाहिए। चूँकि एक वृत्ताकार कक्षा में घूमने वाला इलेक्ट्रॉन लगातार अभिकेंद्र त्वरण से गुजर रहा है, इसलिए उसे लगातार ऊर्जा विकीर्ण करनी चाहिए और सर्पिलाकार रूप से नाभिक में गिर जाना चाहिए, जिससे एक सेकंड के अंश में परमाणु नष्ट हो जाना चाहिए। हालाँकि, परमाणु स्थिर होते हैं।
2. परमाणु रेखीय स्पेक्ट्रम को समझाने में असमर्थता: यदि इलेक्ट्रॉन लगातार नाभिक की ओर सर्पिल गति करता है, तो इसकी कक्षीय आवृत्ति लगातार बदलती रहेगी, जिससे प्रकाश आवृत्तियों का एक सतत स्पेक्ट्रम उत्सर्जित होगा। वास्तव में, प्रयोगों से पता चलता है कि परमाणु स्पष्ट रूप से परिभाषित आवृत्तियों वाले असतत (discrete) रेखीय स्पेक्ट्रम उत्सर्जित करते हैं। रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु स्पेक्ट्रम की इस असतत प्रकृति को समझाने में विफल रहा।