मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 रसायन विज्ञान - त्वरित रिवीजन एवं सूत्र शीट
अध्याय: रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics)
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1. अभिक्रिया की दर (Rate of Reaction)
- औसत वेग ($r_{avg}$): निश्चित समय अंतराल ($\Delta t$) में अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन।
$$r_{avg} = -\frac{\Delta [R]}{\Delta t} = +\frac{\Delta [P]}{\Delta t}$$
- ताक्षणिक वेग ($r_{inst}$): किसी विशेष क्षण ($dt$) पर अभिक्रिया का वेग।
$$r_{inst} = -\frac{d[R]}{dt} = +\frac{d[P]}{dt}$$
- सामान्य अभिक्रिया के लिए: $aA + bB \rightarrow cC + dD$
$$\text{वेग} = -\frac{1}{a}\frac{d[A]}{dt} = -\frac{1}{b}\frac{d[B]}{dt} = +\frac{1}{c}\frac{d[C]}{dt} = +\frac{1}{d}\frac{d[D]}{dt}$$
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2. दर नियम एवं दर स्थिरांक (Rate Law & Rate Constant)
- दर नियम: $\text{वेग} = k [A]^x [B]^y$
- जहाँ $k$ = दर स्थिरांक (विशिष्ट अभिक्रिया वेग)
- $x+y$ = अभिक्रिया की कुल कोटि (Order of Reaction)
- दर स्थिरांक ($k$) की इकाई का सामान्य सूत्र:
$$\text{इकाई} = (\text{mol L}^{-1})^{1-n} \cdot \text{s}^{-1}$$
(जहाँ $n$ = अभिक्रिया की कोटि है)
| अभिक्रिया की कोटि ($n$) | दर स्थिरांक ($k$) का मात्रक |
| :--- | :--- |
| शून्य कोटि ($n = 0$) | $\text{mol L}^{-1} \text{s}^{-1}$ |
| प्रथम कोटि ($n = 1$) | $\text{s}^{-1}$ या $\text{min}^{-1}$ |
| द्वितीय कोटि ($n = 2$) | $\text{mol}^{-1} \text{L s}^{-1}$ |
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3. अभिक्रिया की कोटि एवं आण्विकता में अंतर
| गुण | अभिक्रिया की कोटि (Order) | अभिक्रिया की आण्विकता (Molecularity) |
| :--- | :--- | :--- |
| परिभाषा | दर नियम में सांद्रता पदों की घातों का योग। | प्राथमिक पद में भाग लेने वाले अणुओं की संख्या। |
| प्रकृति | यह एक प्रयोग द्वारा निर्धारित मान है। | यह एक सैद्धांतिक मान है। |
| मान | शून्य, पूर्णांक या भिन्नात्मक हो सकता है। | केवल धनात्मक पूर्णांक ($1, 2, 3$) हो सकता है। |
| जटिल अभिक्रियाएँ | पूरी अभिक्रिया के लिए मान्य होती है। | केवल प्राथमिक (एक-पदीय) अभिक्रिया के लिए। |
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4. समाकलित वेग समीकरण (Integrated Rate Equations)
#### (A) शून्य कोटि अभिक्रिया (Zero Order Reaction)
- दर समीकरण: $\text{वेग} = k [A]^0 = k$
- समाकलित समीकरण: $k = \frac{[A]0 - [A]t}{t}$
- अर्ध-आयुकाल ($t_{1/2}$):
$$t{1/2} = \frac{[A]0}{2k}$$
(अर्ध-आयु प्रारंभिक सांद्रता $[A]_0$ के सीधे समानुपाती होती है)
#### (B) प्रथम कोटि अभिक्रिया (First Order Reaction)
- दर समीकरण: $\text{वेग} = k [A]^1$
- समाकलित समीकरण:
$$k = \frac{2.303}{t} \log{10} \frac{[A]0}{[A]_t}$$
(जहाँ $[A]0$ = प्रारंभिक सांद्रता, $[A]t$ = $t$ समय पर सांद्रता)
$$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$$
(प्रथम कोटि की अर्ध-आयु प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करती)
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5. आभासी प्रथम कोटि की अभिक्रिया (Pseudo First Order Reaction)
- परिभाषा: ऐसी अभिक्रियाएँ जिनकी आण्विकता दो या अधिक होती है, परंतु वे प्रथम कोटि के बलगतिकी का पालन करती हैं (क्योंकि एक अभिकारक अत्यधिक मात्रा में उपस्थित होता है)।
- उदाहरण:
1. एस्टर का अम्लीय जल-अपघटन:
$$\text{CH}3\text{COOCH}3 + \text{H}2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} \text{CH}3\text{COOH} + \text{CH}_3\text{OH}$$
$$\text{वेग} = k [\text{CH}3\text{COOCH}3]$$
2. इक्षु-शर्करा (केन शुगर) का प्रतिलोमन (Inversion of cane sugar)।
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6. आरहेनियस समीकरण एवं ताप प्रभाव (Arrhenius Equation)
- ताप गुणांक: अधिकतर अभिक्रियाओं के लिए ताप में $10^\circ \text{C}$ की वृद्धि करने पर वेग स्थिरांक लगभग दोगुना हो जाता है।
$$\text{ताप गुणांक} = \frac{k{T+10}}{kT} \approx 2 \text{ या } 3$$
$$k = A \cdot e^{-E_a / RT}$$
- $A$ = आरहेनियस कारक / आवृत्ति कारक
- $E_a$ = सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)
- $R$ = गैस स्थिरांक ($8.314 \text{ J K}^{-1} \text{mol}^{-1}$)
- $T$ = परम ताप (Kelvin में)
$$\log{10} k = \log{10} A - \frac{E_a}{2.303 R T}$$
- दो भिन्न तापों ($T1$ तथा $T2$) पर वेग स्थिरांक की तुलना:
$$\log{10}\left(\frac{k2}{k1}\right) = \frac{Ea}{2.303 R} \left[ \frac{T2 - T1}{T1 T2} \right]$$
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7. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. सक्रियण ऊर्जा ($E_a$): अभिकारक अणुओं को उत्पाद में बदलने के लिए आवश्यक न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा।
$$Ea = E{\text{threshold}} - E_{\text{average}}$$
2. देहली ऊर्जा (Threshold Energy): अभिकारक अणुओं के पास प्रभावी संघट्ट (collision) करने के लिए आवश्यक न्यूनतम कुल ऊर्जा।
3. उत्प्रेरक का प्रभाव: उत्प्रेरक अभिक्रिया को एक वैकल्पिक पथ प्रदान करता है जिसकी सक्रियण ऊर्जा ($Ea$) कम होती है। यह अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है परंतु $\Delta H$ और साम्य स्थिरांक ($K{eq}$) को परिवर्तित नहीं करता।
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8. संघट्ट सिद्धांत (Collision Theory)
- अभिक्रिया वेग: $\text{वेग} = P \cdot Z{AB} \cdot e^{-Ea / RT}$
- $Z_{AB}$ = अभिकारक $A$ और $B$ की संघट्ट आवृत्ति (Collision Frequency)
- $P$ = त्रिविम कारक / प्रायिकता गुणांक (Steric Factor / Probability Factor)
- $e^{-Ea / RT}$ = $Ea$ या उससे अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश
- प्रभावी संघट्ट की शर्तें:
1. अणुओं के पास पर्याप्त न्यूनतम ऊर्जा (देहली ऊर्जा) होनी चाहिए।
2. संघट्ट के समय अणुओं का सही विन्यास (proper orientation) होना चाहिए।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics)
रासायनिक अभिक्रिया का वेग (Rate of Chemical Reaction)
औसत वेग (Average Rate)
तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Rate)
वेग को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Rate)
सांद्रता (Concentration)
तापमान (Temperature)
उत्प्रेरक (Catalyst)
पृष्ठ क्षेत्रफल (Surface Area)
वेग नियम और कोटि (Rate Law and Order)
वेग व्यंजक और वेग स्थिरांक (Rate Expression and Rate Constant)
अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction)
शून्य कोटि अभिक्रिया (Zero Order Reaction)
प्रथम कोटि अभिक्रिया (First Order Reaction)
द्वितीय कोटि अभिक्रिया (Second Order Reaction)
आणوकता (Molecularity)
समाकलित वेग समीकरण (Integrated Rate Equations)
शून्य कोटि अभिक्रिया का समाकलित वेग
समीकरण और ग्राफ (Equation and Graph)
अर्ध-आयु काल (Half-life Period)
प्रथम कोटि अभिक्रिया का समाकलित वेग
समीकरण और ग्राफ (Equation and Graph)
अर्ध-आयु काल (Half-life Period)
अभिक्रिया वेग पर तापमान का प्रभाव (Effect of Temperature on Reaction Rate)
ताप गुणांक (Temperature Coefficient)
आरेनियस समीकरण (Arrhenius Equation)
सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)
वेग स्थिरांक की ताप पर निर्भरता (Temperature Dependence of Rate Constant)
संघट्ट सिद्धांत (Collision Theory)
प्रभावी संघट्ट (Effective Collision)
देहली ऊर्जा (Threshold Energy)
सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)
अभिविन्यास प्रभाव (Orientation Factor)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### चरण 1: प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए दिए गए आंकड़े और सूत्र को लिखिए\nप्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण है:
$$k = \frac{2.303}{t} \log \left( \frac{[R]_0}{[R]_t} \right)$$
\nमान लीजिए अभिकारक 'A' की प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0 = 100$ है।
### चरण 2: पहली शर्त का उपयोग करके वेग स्थिरांक ($k$) की गणना करें\nदिया गया है कि $t = 45$ मिनट में यौगिक का $60\%$ भाग विघटित हो जाता है।\nअतः, 45 मिनट के बाद अभिकारक की शेष सांद्रता $[R]_t = 100 - 60 = 40$ होगी।
\nइन मानों को वेग स्थिरांक के सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर:
$$k = \frac{2.303}{45} \log \left( \frac{100}{40} \right)$$
$$k = \frac{2.303}{45} \log(2.5)$$
\nचूँकि $\log(2.5) = 0.3979$ है:
$$k = \frac{2.303 \times 0.3979}{45}$$
$$k = \frac{0.9164}{45} = 0.02036 \text{ min}^{-1}$$
### चरण 3: $90\%$ पूर्ण होने के लिए आवश्यक समय ($t_{90\%}$) की गणना करें\nअब, हमें उस समय ($t$) को ज्ञात करना है जब अभिक्रिया $90\%$ पूर्ण हो जाती है।\nप्रारंभिक सांद्रता, $[R]_0 = 100$\nशेष सांद्रता, $[R]_t = 100 - 90 = 10$\nवेग स्थिरांक, $k = 0.02036 \text{ min}^{-1}$
\nसमय के सूत्र का उपयोग करने पर:
$$t = \frac{2.303}{k} \log \left( \frac{[R]_0}{[R]_t} \right)$$
$$t = \frac{2.303}{0.02036} \log \left( \frac{100}{10} \right)$$
$$t = \frac{2.303}{0.02036} \log(10)$$
\nचूँकि $\log(10) = 1$ है:
$$t = \frac{2.303}{0.02036} = 113.11 \text{ मिनट}$$
### अंतिम उत्तर
* अभिक्रिया का वेग स्थिरांक $0.02036 \text{ min}^{-1}$ है।
* अभिक्रिया को $90\%$ पूर्ण होने में $113.11 \text{ मिनट}$ का समय लगता है।
उत्तर (Answer): ### परिभाषा और समाकलित वेग समीकरण\nप्रथम कोटि की अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें अभिक्रिया का वेग अभिकारक की सांद्रता की प्रथम घात के समानुपाती होता है। एक सामान्य प्रथम कोटि की अभिक्रिया पर विचार करें: $R \rightarrow P$|
\nअवकलनीय वेग नियम इस प्रकार दिया जाता है:
$$\text{वेग} = -\frac{d[R]}{dt} = k[R]$$
\nचरों को अलग करने के लिए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$$\frac{d[R]}{[R]} = -k \cdot dt$$
\nसीमाओं $t = 0$ (प्रारंभिक समय जहाँ सांद्रता $[R]_0$ है) और समय $t$ (जहाँ सांद्रता $[R]_t$ है) के बीच समीकरण के दोनों पक्षों का समाकलन करने पर:
$$\int_{[R]_0}^{[R]_t} \frac{d[R]}{[R]} = -k \int_{0}^{t} dt$$
$$\ln[R]_t - \ln[R]_0 = -kt$$
$$\ln\frac{[R]_t}{[R]_0} = -kt$$ या $$k = \frac{1}{t} \ln\frac{[R]_0}{[R]_t}$$
\nप्राकृतिक लघुगणक को आधार 10 में बदलने पर:
$$k = \frac{2.303}{t} \log\frac{[R]_0}{[R]_t}$$
### प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं की विशेषताएँ
* **वेग स्थिरांक की इकाइयाँ:** प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक ($k$) की इकाई $\text{समय}^{-1}$ (जैसे $\text{सेंकंड}^{-1}$, $\text{मिनट}^{-1}$) होती है।
* **सांद्रता निर्भरता:** अभिक्रिया का वेग सीधे अभिकारक की सांद्रता पर निर्भर करता है। यदि सांद्रता दोगुनी कर दी जाए, तो वेग भी दोगुना हो जाता है।
* **रैखिक ग्राफ:** समय $t$ के विरुद्ध $\log[R]_t$ का आलेख एक सीधी रेखा देता है जिसका ढलान $-\frac{k}{2.303}$ के बराबर और अंतःखंड $\log[R]_0$ के बराबर होता है।
### अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$)\nकिसी अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल वह समय है जिसमें अभिकारक की सांद्रता उसकी प्रारंभिक सांद्रता से आधी रह जाती है। $t = t_{1/2}$ पर, $[R]_t = \frac{[R]_0}{2}$ होता है। इन मानों को समाकलित वेग समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर:
$$k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log\frac{[R]_0}{[R]_0 / 2}$$
$$k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log 2$$
\nचूँकि $\log 2 = 0.3010$ है:
$$k = \frac{2.303 \times 0.3010}{t_{1/2}} = \frac{0.693}{t_{1/2}}$$
\nअतः, प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता से स्वतंत्र होता है।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण संख्यात्मक हल
**दिया गया डेटा:**
- तापमान $T_1 = 300 \text{ K}$, दर स्थिरांक $k_1 = 1.5 \times 10^4 \text{ s}^{-1}$
- तापमान $T_2 = 320 \text{ K}$, दर स्थिरांक $k_2 = 4.5 \times 10^4 \text{ s}^{-1}$
- गैस स्थिरांक $R = 8.314 \text{ J K}^{-1} \text{ mol}^{-1}$
#### भाग 1: सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) की गणना
\nदो अलग-अलग तापमानों पर दर स्थिरांक से संबंधित संशोधित आर्हेनियस समीकरण है:
$$\log \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left[ \frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2} \right]$$
\nसमीकरण में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$\log \left( \frac{4.5 \times 10^4}{1.5 \times 10^4} \right) = \frac{E_a}{2.303 \times 8.314} \left[ \frac{320 - 300}{300 \times 320} \right]$$
$$\log(3) = \frac{E_a}{19.147} \left[ \frac{20}{96000} \right]$$
\nचूँकि $\log(3) = 0.4771$:
$$0.4771 = \frac{E_a}{19.147} \times 0.0002083$$
$E_a$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करना:
$$E_a = \frac{0.4771 \times 19.147}{0.0002083}$$
$$E_a = \frac{9.135}{0.0002083} = 43855 \text{ J mol}^{-1} = 43.86 \text{ kJ mol}^{-1}$$
#### भाग 2: आर्हेनियस कारक ($A$) की गणना
$T_1 = 300 \text{ K}$ पर आर्हेनियस समीकरण का उपयोग करना:
$$k_1 = A e^{-E_a / RT_1}$$
$$\log k_1 = \log A - \frac{E_a}{2.303 R T_1}$$
\nज्ञात मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$\log(1.5 \times 10^4) = \log A - \frac{43855}{2.303 \times 8.314 \times 300}$$
$$\log(1.5) + 4 = \log A - \frac{43855}{5744.1}$$
$$0.1761 + 4 = \log A - 7.6348$$
$$4.1761 = \log A - 7.6348$$
$$\log A = 4.1761 + 7.6348 = 11.8109$$
\nएंटीलॉग लेने पर:
$$A = \text{antilog}(11.8109) = 6.47 \times 10^{11} \text{ s}^{-1}$$
**उत्तर:**
- सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) = **$43.86 \text{ kJ mol}^{-1}$**
- आर्हेनियस कारक ($A$) = **$6.47 \times 10^{11} \text{ s}^{-1}$**
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण संख्यात्मक हल
**दिया गया डेटा:**
- अभिक्रिया की कोटि = प्रथम कोटि
- दर स्थिरांक ($k$) = $1.15 \times 10^{-3} \text{ s}^{-1}$
- प्रारंभिक सांद्रता ($[A]_0$) = 5 g
- अंतिम सांद्रता ($[A]$) = 3 g
#### भाग 1: समय ($t$) की गणना
\nप्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित दर समीकरण है:
$$t = \frac{2.303}{k} \log \frac{[A]_0}{[A]}$$
\nसूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$t = \frac{2.303}{1.15 \times 10^{-3}} \log \frac{5}{3}$|
\nलघुगणक पद की गणना करें:
$$\log(5/3) = \log(1.6667) = 0.2218$$
\nअब इस मान को वापस रखें:
$$t = \frac{2.303 \times 0.2218}{1.15 \times 10^{-3}}$$
$$t = \frac{0.5108}{1.15 \times 10^{-3}}$$
$$t = 444.17 \text{ सेकंड}$$
#### भाग 2: अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$) की गणना
\nप्रथम कोटि की अभिक्रिया की अर्ध-आयु का सूत्र है:
$$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$|
$k$ का मान रखें:
$$t_{1/2} = \frac{0.693}{1.15 \times 10^{-3}}$$
$$t_{1/2} = 602.61 \text{ सेकंड}$$
**उत्तर:**
- 5 g से घटकर 3 g होने में लगा समय **444.17 सेकंड** है।
- अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल **602.61 सेकंड** है।
उत्तर (Answer): ### प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण की व्युत्पत्ति
\nएक सामान्य प्रथम कोटि की अभिक्रिया पर विचार करें:
$$\text{अभिकारक (R)} \rightarrow \text{उत्पाद (P)}$$
\nमान लीजिए समय $t = 0$ पर अभिकारक $\text{R}$ की प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0$ है, और समय $t$ पर सांद्रता $[R]_t$ है।
\nप्रथम कोटि की अभिक्रिया के वेग नियम के अनुसार, दर अभिकारक की सांद्रता की पहली घात के समानुपाती होती है:
$$\text{वेग} = -\frac{d[R]}{dt} = k[R]$$
\nजहाँ $k$ प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक है।
\nचरों ($[R]$ और $t$) को अलग करने के लिए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$$\frac{d[R]}{[R]} = -k \cdot dt$$
\nसीमाओं के भीतर समीकरण के दोनों पक्षों का समाकलन करने पर: $t = 0$ पर, $[R] = [R]_0$ और समय $t$ पर, $[R] = [R]_t$:
$$\int_{[R]_0}^{[R]_t} \frac{d[R]}{[R]} = -k \int_{0}^{t} dt$$
\nमानक समाकलन सूत्र $\int \frac{1}{x} dx = \ln(x)$ का उपयोग करने पर:
$$\ln[R]_t - \ln[R]_0 = -kt$$
\nलघुगणकीय गुण $\ln(a) - \ln(b) = \ln\left(\frac{a}{b}\right)$ का उपयोग करने पर:
$$\ln\left(\frac{[R]_t}{[R]_0}\right) = -kt$$
\nप्राकृतिक लघुगणक ($\ln$) को आधार-10 लघुगणक ($\log$) में बदलने पर: $\ln x = 2.303 \log x$:
$$2.303 \log\left(\frac{[R]_t}{[R]_0}\right) = -kt$$
\nवेग स्थिरांक $k$ या समय $t$ के लिए समीकरण को व्यवस्थित करने पर:
$$k = \frac{2.303}{t} \log\left(\frac{[R]_0}{[R]_t}\right)$$
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### प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$)
\nअभ अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल वह समय है जिसमें अभिकारक की सांद्रता उसकी प्रारंभिक सांद्रता से आधी रह जाती है।
\nअतः, $t = t_{1/2}$ पर,
$$[R]_t = \frac{[R]_0}{2}$$
\nइस मान को समाकलित वेग समीकरण में रखने पर:
$$k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log\left(\frac{[R]_0}{\frac{[R]_0}{2}}\right)$$
$$k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log(2)$$
\nचूँकि $\log(2) = 0.3010$:
$$k = \frac{2.303 \times 0.3010}{t_{1/2}}$$
$$k = \frac{0.693}{t_{1/2}}$$
$t_{1/2}$ के लिए हल करने पर:
$$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$$
**निष्कर्ष:** अंतिम व्यंजक यह दर्शाता है कि प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल ($t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$) केवल वेग स्थिरांक $k$ पर निर्भर करता है और अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0$ से पूरी तरह स्वतंत्र होता है।
उत्तर (Answer): ### टक्कर सिद्धांत का परिचय
* मैक्स ट्राउट्ज़ और विलियम लुईस द्वारा प्रतिपादित, टक्कर सिद्धांत गैसों के गतिज आणविक सिद्धांत पर आधारित है।
* इस सिद्धांत के अनुसार, अभिकारक अणुओं को कठोर गोले माना जाता है, और एक रासायनिक अभिक्रिया तभी होती है जब अभिकारक अणु एक-दूसरे से टकराते हैं।
* हालांकि, सभी टक्करों से उत्पाद का निर्माण नहीं होता है; कुल टक्करों का केवल एक अंश ही प्रभावी होता है।
### प्रभावी टक्करों के लिए मानदंड
* **देहली ऊर्जा:** मौजूदा बंधों को तोड़ने और नए बंध बनाने के लिए टकराने वाले अणुओं के पास न्यूनतम मात्रा में ऊर्जा होनी चाहिए, जिसे देहली ऊर्जा कहा जाता है।
* **सक्रियण ऊर्जा ($E_a$):** सामान्य अभिकारक अणुओं को जितनी अतिरिक्त ऊर्जा अवशोषित करनी चाहिए ताकि उनकी ऊर्जा देहली ऊर्जा के बराबर हो जाए, उसे सक्रियण ऊर्जा कहा जाता है। गणितीय रूप से, $\text{सक्रियण ऊर्जा} = \text{देहली ऊर्जा} - \text{अभिकारकों की औसत ऊर्जा}$।
* **उचित अभिविन्यास:** अणुओं को उचित स्थानिक अभिविन्यास के साथ टकराना चाहिए ताकि पुराने बंध सही ढंग से टूट सकें और नए बंध सफलतापूर्वक बन सकें।
* इन दोनों शर्तों को आरेनियस समीकरण कारक में गणितीय रूप से शामिल किया गया है: $\text{Rate} = P \cdot Z \cdot e^{-E_a/RT}$, जहाँ $P$ स्ट एरिक कारक है और $Z$ टक्कर आवृत्ति है।
### आरेनियस समीकरण और ग्राफ द्वारा निर्धारण
* स्वांते आरेनियस ने किसी अभिक्रिया के दर स्थिरांक ($k$) को तापमान ($T$) और सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) के साथ मात्रात्मक रूप से संबंधित किया:
$$k = A e^{-E_a/RT}$$
जहाँ $A$ आरेनियस कारक (आवृत्ति कारक) है और $R$ सार्वत्रिक गैस स्थिरांक है।
* दोनों पक्षों पर प्राकृतिक लघुगणक ($\ln$) लेने पर:
$$\ln k = \ln A - \frac{E_a}{RT}$|
* सामान्य लघुगणक (आधार 10) में बदलने पर:
$$\log k = \log A - \frac{E_a}{2.303 R T}$$
* इस समीकरण की एक सीधी रेखा के समीकरण ($y = mx + c$) से तुलना करने पर:
* $y = \log k$
* $x = \frac{1}{T}$
* ढलान ($m$) = $-\frac{E_a}{2.303 R}$
* अंतःखंड ($c$) = $\log A$
* **ग्राफिकल विधि:** जब y-अक्ष पर $\log k$ और x-अक्ष पर $\frac{1}{T}$ के बीच ग्राफ खींचा जाता है, तो एक ऋणात्मक ढलान वाली सीधी रेखा प्राप्त होती है।
* इस रेखा की ढलान ($m$) को मापकर, संबंध का उपयोग करके सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) की आसानी से गणना की जा सकती है: $E_a = -2.303 \times R \times \text{slope}$।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण संख्यात्मक हल:
**दिया गया डेटा:**
* अभिक्रिया का प्रकार = प्रथम कोटि की अभिक्रिया
* अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$) = 120 मिनट
**भाग 1: दर स्थिरांक ($k$) की गणना**\nप्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, अर्ध-आयु काल दर स्थिरांक से निम्नलिखित सूत्र द्वारा संबंधित है:
$$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$|
$k$ के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$$k = \frac{0.693}{t_{1/2}}$$
$t_{1/2}$ (120 मिनट) का मान रखने पर:
$$k = \frac{0.693}{120 \text{ min}}$$
$$k = 0.005775 \text{ min}^{-1} \text{ या } 5.78 \times 10^{-3} \text{ min}^{-1}$$
**भाग 2: 90% पूर्ण होने के लिए आवश्यक समय की गणना ($t_{90\%}$)**\nप्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, समाकलित दर समीकरण है:
$$t = \frac{2.303}{k} \log \left( \frac{[R]_0}{[R]} \right)$$
\nमाना प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0 = 100$ है।\nचूँकि अभिक्रिया 90% पूर्ण हो चुकी है, समय $t$ पर शेष सांद्रता $[R]$ होगी:
$$[R] = 100 - 90 = 10$$
\nसमाकलित दर समीकरण में $[R]_0$, $[R]$ और $k$ के मान रखने पर:
$$t_{90\%} = \frac{2.303}{0.005775} \log \left( \frac{100}{10} \right)$$
$$t_{90\%} = \frac{2.303}{0.005775} \log(10)$$
\nचूँकि $\log(10) = 1$:
$$t_{90\%} = \frac{2.303}{0.005775} \times 1$$
$$t_{90\%} = 398.78 \text{ मिनट}$|
**उत्तर:**
* दर स्थिरांक ($k$) = $5.78 \times 10^{-3} \text{ min}^{-1}$
* 90% पूर्ण होने का समय = 398.78 मिनट
उत्तर (Answer): ### शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित दर समीकरण की व्युत्पत्ति
\nशून्य कोटि की अभिक्रिया वह होती है जिसकी दर अभिकारकों की सांद्रता से स्वतंत्र होती है।
\nआइए एक सामान्य शून्य कोटि की अभिक्रिया पर विचार करें:
$$R \rightarrow \text{उत्पाद}$$
**1. दर व्यंजक:**\nअभिक्रिया की दर को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
$$\text{दर} = -\frac{d[R]}{dt} = k[R]^0$$\nचूंकि किसी भी राशि की घात शून्य होने पर उसका मान 1 होता है ($[R]^0 = 1$), समीकरण सरल हो जाता है:
$$-\frac{d[R]}{dt} = k$$
**2. पुनर्व्यवस्था और समाकलन:**\nसांद्रता पदों को अलग करने के लिए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करना:
$$d[R] = -k \cdot dt$$
\nसमय $t = 0$ (जहाँ सांद्रता $[R]_0$ है) से समय $t = t$ (जहाँ सांद्रता $[R]_t$ है) की सीमाओं के भीतर दोनों पक्षों का समाकलन करने पर:
$$\int_{[R]_0}^{[R]_t} d[R] = -k \int_{0}^{t} dt$$
\nनिश्चित समाकलनों को हल करने पर:
$$[R]_t - [R]_0 = -k \cdot t$$
$[R]_t$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर समाकलित दर समीकरण प्राप्त होता है:
$$[R]_t = -kt + [R]_0$$
---
### शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$)
\nअभिक्रिया का अर्ध-आयु काल वह समय है जिसमें अभिकारक की सांद्रता उसकी प्रारंभिक सांद्रता की आधी रह जाती है।
* जब $t = t_{1/2}$, तब $[R]_t = \frac{[R]_0}{2}$
\nइन मानों को समाकलित दर समीकरण में रखिए:
$$\frac{[R]_0}{2} = -kt_{1/2} + [R]_0$$
$t_{1/2}$ को हल करने के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$$kt_{1/2} = [R]_0 - \frac{[R]_0}{2}$$
$$kt_{1/2} = \frac{[R]_0}{2}$$
$$t_{1/2} = \frac{[R]_0}{2k}$$
**निष्कर्ष:**\nअंतिम व्यंजक से स्पष्ट है कि शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$) अभिकारकों की प्रारंभिक सांद्रता ($[R]_0$) के सीधे आनुपातिक और दर स्थिरांक ($k$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण हल:
**दिया गया डेटा:**
- $N_2O_5$ की प्रारंभिक सांद्रता, $[R]_1 = 3.0 \times 10^{-2} \text{ mol L}^{-1}$
- $N_2O_5$ की अंतिम सांद्रता, $[R]_2 = 1.5 \times 10^{-2} \text{ mol L}^{-1}$
- समयांतराल, $\Delta t = 30 \text{ मिनट} = 30 \times 60 = 1800 \text{ सेकंड}$
**चरण 1: $N_2O_5$ की सांद्रता में परिवर्तन ($\Delta [N_2O_5]$) की गणना करें**
$$\Delta [N_2O_5] = [R]_2 - [R]_1 = 1.5 \times 10^{-2} - 3.0 \times 10^{-2} = -1.5 \times 10^{-2} \text{ mol L}^{-1}$$
**चरण 2: मिनट के पदों में अभिक्रिया की औसत दर की गणना करें**
$$\text{औसत दर} = - \frac{1}{2} \frac{\Delta [N_2O_5]}{\Delta t}$$
$$\text{औसत दर} = - \frac{1}{2} \left( \frac{-1.5 \times 10^{-2} \text{ mol L}^{-1}}{30 \text{ min}} \right)$$
$$\text{औसत दर} = \frac{1.5 \times 10^{-2}}{60} = 2.5 \times 10^{-4} \text{ mol L}^{-1} \text{ min}^{-1}$$
**चरण 3: सेकंड के पदों में अभिक्रिया की औसत दर की गणना करें**
$$\text{सेकंड में औसत दर} = \frac{- \frac{1}{2} \Delta [N_2O_5]}{\Delta t \text{ (सेकंड में)}}$$
$$\text{औसत दर} = - \frac{1}{2} \left( \frac{-1.5 \times 10^{-2}}{1800} \right) = \frac{1.5 \times 10^{-2}}{3600} = 4.17 \times 10^{-6} \text{ mol L}^{-1} \text{ s}^{-1}$$
**चरण 4: $NO_2$ के निर्माण की दर की गणना करें**\nअभिक्रिया के रससमीकरणमिति से, दर व्यंजक है:
$$\text{दर} = - \frac{1}{2} \frac{\Delta [N_2O_5]}{\Delta t} = + \frac{1}{4} \frac{\Delta [NO_2]}{\Delta t}$$\nअतः, $NO_2$ के उत्पादन की दर है:
$$\frac{\Delta [NO_2]}{\Delta t} = - 2 \times \frac{\Delta [N_2O_5]}{\Delta t}$$
$$\frac{\Delta [NO_2]}{\Delta t} = 2 \times (2.5 \times 10^{-4} \text{ mol L}^{-1} \text{ min}^{-1}) = 5.0 \times 10^{-4} \text{ mol L}^{-1} \text{ min}^{-1}$$\nया सेकंड के पदों में:
$$\frac{\Delta [NO_2]}{\Delta t} = 4 \times (4.17 \times 10^{-6}) = 1.67 \times 10^{-5} \text{ mol L}^{-1} \text{ s}^{-1}$$
उत्तर (Answer): ### रासायनिक अभिक्रिया की दर को प्रभावित करने वाले कारक
\nरासायनिक अभिक्रिया की दर को प्रति इकाई समय में अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है। कई प्रमुख कारक इस दर को प्रभावित करते हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
* **1. अभिकारकों की सांद्रता का प्रभाव:** संघट्ट सिद्धांत और दर नियम के अनुसार, किसी अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सांद्रता के सीधे समानुपाती होती है। जैसे-जैसे अभिकारकों की सांद्रता बढ़ती है, प्रति इकाई आयतन में अभिक्रिया करने वाली प्रजातियों की संख्या भी बढ़ जाती है। इससे अभिकारक अणुओं के बीच प्रभावी संघट्टों की आवृत्ति में वृद्धि होती है, जिससे अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
* **2. तापमान का प्रभाव:** अधिकांश रासायनिक अभिक्रियाओं की दर तापमान में वृद्धि के साथ काफी बढ़ जाती है। सामान्यतः, तापमान में 10 °C की वृद्धि के लिए, दर स्थिरांक लगभग दोगुना हो जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उच्च तापमान अणुओं को अधिक गतिज ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे उन अणुओं का अंश बढ़ जाता है जिनकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) के बराबर या उससे अधिक होती है। इस संबंध को अरहेनियस समीकरण द्वारा मात्रात्मक रूप से व्यक्त किया जाता है: $k = A e^{-E_a/RT}$।
* **3. उत्प्रेरक का प्रभाव:** उत्प्रेरक एक ऐसा पदार्थ है जो बिना स्वयं में कोई स्थायी रासायनिक परिवर्तन किए रासायनिक अभिक्रिया की दर को बदल देता है। यह एक वैकल्पिक अभिक्रिया पथ या तंत्र प्रदान करके काम करता है जिसकी सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) उत्प्रेरक रहित अभिक्रिया की तुलना में कम होती है। ऊर्जा अवरोध को कम करके, अधिक संख्या में अभिकारक अणु उसी समय सीमा के भीतर उत्पादों का निर्माण करने के लिए सफलतापूर्वक पार कर सकते हैं, जिससे अभिक्रिया तेज हो जाती है।
* **4. अभिकारकों के पृष्ठीय क्षेत्रफल का प्रभाव:** ठोस अभिकारकों से जुड़ी विषमांगी अभिक्रियाओं के लिए, पृष्ठीय क्षेत्रफल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसी पदार्थ के एक बड़े टुकड़े की तुलना में सूक्ष्म विभाजित ठोस या पाउडर बहुत बड़ा पृष्ठीय क्षेत्रफल प्रदान करते हैं। एक बड़ा पृष्ठीय क्षेत्रफल अन्य अभिकारकों के साथ संघट्ट के लिए अधिक अभिकारक कणों को उजागर करता है, जिससे अभिक्रिया की दर में काफी वृद्धि होती है।
उत्तर (Answer): मैक्स ट्राउट्ज़ और विलियम लुईस द्वारा प्रतिपादित रासायनिक अभिक्रियाओं का संघट्ट सिद्धांत, गैसों के गतिज सिद्धांत के आधार पर अभिक्रियाओं की दर को समझाता है। इस सिद्धांत के अनुसार, अभिकारक अणुओं को कठोर गोले माना जाता है, और एक रासायनिक अभिक्रिया तभी होती है जब अभिकारक अणु पर्याप्त ऊर्जा और उचित अभिविन्यास के साथ एक-दूसरे से टकराते हैं।
\nकिसी संघट्ट के सफल होने और उत्पाद निर्माण में परिणामित होने के लिए, दो प्राथमिक मानदंड हैं:
1. **सक्रियण ऊर्जा (ऊर्जा अवरोध):** टकराने वाले अणुओं के पास संघट्ट के दौरान न्यूनतम मात्रा में गति जिसे देहली ऊर्जा या सक्रियण ऊर्जा के रूप में जाना जाता है, होनी चाहिए। इस न्यूनतम आवश्यकता से कम ऊर्जा वाले संघट्ट प्रभावी नहीं होते हैं और बिना प्रतिक्रिया किए बस वापस उछल जाते हैं।
2. **उचित अभिविन्यास (त्रिविम कारक):** भले ही अणुओं के पास पर्याप्त ऊर्जा हो, लेकिन संघट्ट तब तक सफल नहीं होंगे जब तक कि अणु उचित ज्यामितीय अभिविन्यास के साथ न टकराएं। उचित अभिविन्यास यह सुनिश्चित करता है कि पुराने बंध टूटने और नए बंध बनने की प्रक्रिया अणुओं के सही प्रतिक्रियाशील स्थलों पर एक साथ हो।
उत्तर (Answer): सक्रियण ऊर्जा के बराबर या उससे अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश बोल्ट्ज़मैन कारक द्वारा दिया जाता है: $f = e^{-E_a / RT}$।
\nदिया गया डेटा:
- सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) = $80.9 \, \text{kJ mol}^{-1} = 80,900 \, \text{J mol}^{-1}$
- तापमान ($T$) = $500 \, \text{K}$
- गैस स्थिरांक ($R$) = $8.314 \, \text{J K}^{-1} \text{mol}^{-1}$
\nसबसे पहले, घातांक $\frac{E_a}{RT}$ की गणना करें:
$$\frac{E_a}{RT} = \frac{80,900 \, \text{J mol}^{-1}}{8.314 \, \text{J K}^{-1} \text{mol}^{-1} \times 500 \, \text{K}}$$
$$\frac{E_a}{RT} = \frac{80,900}{4157} = 19.46$$
\nअब, $f = e^{-19.46}$ ज्ञात करें:\nदोनों पक्षों पर प्राकृतिक लघुगणक लेने पर:
$$\ln f = -19.46$$\nआधार 10 में बदलने पर:
$$\log f = \frac{-19.46}{2.303} = -8.4498$$
$$\log f = \bar{9}.5502$$
\nएंटीलॉग लेने पर:
$$f = \text{antilog}(\bar{9}.5502) = 3.55 \times 10^{-9}$$
\nअतः, सक्रियण ऊर्जा के बराबर या उससे अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश $3.55 \times 10^{-9}$ है।
उत्तर (Answer): अभिक्रिया की कोटि को किसी रासायनिक अभिक्रिया के दर नियम व्यंजक में अभिकारकों की सांद्रता की घातों के योग के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक प्रयोगात्मक रूप से निर्धारित मात्रा है और शून्य, भिन्नात्मक या पूर्णांक मान हो सकती है।
\nअभिक्रिया की कोटि और आणुकता के बीच अंतर:
1. **परिभाषा:** कोटि दर नियम समीकरण में सांद्रता पदों के घातांकों का योग है, जबकि आणुकता एक प्रारंभिक चरण में रासायनिक अभिक्रिया को लाने के लिए एक साथ टकराने वाली प्रतिक्रियाशील प्रजातियों (परमाणुओं, आयनों या अणुओं) की कुल संख्या है।
2. **निर्धारण:** कोटि दर नियम से निर्धारित एक प्रयोगात्मक मात्रा है, जबकि आणुकता एक सैद्धांतिक अवधारणा है जो एक प्राथमिक अभिक्रिया में प्रतिक्रियाशील कणों को गिनकर निर्धारित की जाती है।
3. **मान:** कोटि शून्य, भिन्न या पूर्ण संख्या हो सकती है, और कुछ जटिल अभिक्रियाओं में ऋणात्मक भी हो सकती है। आणुकता केवल एक पूर्णांक (1, 2, या 3) हो सकती है और शून्य, भिन्नात्मक या ऋणात्मक नहीं हो सकती है।
4. **प्रयोज्यता:** कोटि प्राथमिक और जटिल दोनों अभिक्रियाओं पर लागू होती है, जबकि आणुकता केवल प्राथमिक अभिक्रियाओं के लिए सार्थक होती है।
उत्तर (Answer): प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$) निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर स्थिरांक ($k$) से संबंधित है:
$$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$$
\nदिया गया डेटा:
- अर्ध-आयु ($t_{1/2}$) = $60 \, \text{सेकंड}$
\nदर स्थिरांक ($k$) ज्ञात करने के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$$k = \frac{0.693}{t_{1/2}}$$
\nदिए गए मान को समीकरण में रखने पर:
$$k = \frac{0.693}{60 \, \text{s}}$$
$$k = 0.01155 \, \text{s}^{-1}$$
$$k = 1.155 \times 10^{-2} \, \text{s}^{-1}$$
\nअतः, दी गई प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक $1.155 \times 10^{-2} \, \text{s}^{-1}$ है।
उत्तर (Answer): सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) को न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा के रूप में परिभाषित किया जाता है जो रासायनिक अभिक्रिया से गुजरने और उत्पादों में परिवर्तित होने के लिए अभिकारक अणुओं के पास होनी चाहिए। यह उस ऊर्जा अवरोध का प्रतिनिधित्व करता है जिसे टकराव के दौरान उत्पादों में बदलने के लिए अभिकारकों द्वारा पार किया जाना चाहिए।
\nआर्हीनियस के अनुसार, किसी अभिक्रिया का दर स्थिरांक आर्हीनियस समीकरण द्वारा तापमान से संबंधित होता है:
$$k = A e^{-E_a / RT}$$\nजहाँ $k$ दर स्थिरांक है, $A$ आर्हीनियस कारक (आवृत्ति कारक) है, $E_a$ सक्रियण ऊर्जा है, $R$ गैस स्थिरांक है, और $T$ परम तापमान है।
\nदोनों पक्षों पर प्राकृतिक लघुगणक लेने पर:
$$\ln k = \ln A - \frac{E_a}{RT}$$\nआधार 10 में बदलने पर:
$$\log k = \log A - \frac{E_a}{2.303 RT}$$
\nयह समीकरण दर्शाता है कि जैसे-जैसे तापमान ($T$) बढ़ता है, सक्रियण ऊर्जा से अधिक या उसके बराबर ऊर्जा वाले अणुओं का अंश बढ़ता जाता है, जिससे दर स्थिरांक ($k$) घातीय रूप से बढ़ता है, और परिणामस्वरूप, रासायनिक अभिक्रिया की दर काफी बढ़ जाती है।