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मानव जनन

Subject: जीव विज्ञान | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)

कक्षा: 12वीं जीव विज्ञान

अध्याय: मानव जनan (Human Reproduction)

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1. मुख्य परिचय (Introduction)

1. युग्मक जनन (Gametogenesis): नर में शुक्राणु (Sperm) और मादा में अंडाणु (Ovum) का निर्माण।

2. संसेचन/वीर्यसेचन (Insemination): शिश्न द्वारा योनि में वीर्य का स्थानांतरण।

3. युग्मजलन/संलयन (Fertilization): नर और मादा युग्मकों का संलयन जिससे युग्मज (Zygote) बनता है।

4. अंतर्रोपण (Implantation): ब्लास्टोसिस का गर्भाशय की दीवार से चिपकना।

5. गर्भकाल (Gestational period): भ्रूण का विकास।

6. प्रसव (Parturition): शिशु का जन्म।


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2. नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

नर जनन तंत्र श्रोणि क्षेत्र (Pelvic region) में स्थित होता है। इसमें निम्नलिखित भाग होते हैं:


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3. मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

इसमें निम्नलिखित मुख्य अंग शामिल हैं:

1. पेरीमेट्रियम (Perimetrium) - बाहरी परत

2. मायोमेट्रियम (Myometrium) - मध्य की चिकनी पेशीय परत (प्रसव के समय संकुचन करती है)

3. एंडोमेट्रियम (Endometrium) - सबसे अंदर की ग्रंथिप्रचुर परत (प्रत्येक माह चक्र के दौरान टूटती है)।


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4. युग्मक जनन (Gametogenesis)

युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया को युग्मक जनन कहते हैं।


#### क. शुक्राणु जनन (Spermatogenesis):


#### ख. अंडजनन (Oogenesis):


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5. आर्तव चक्र / माहवारी चक्र (Menstrual Cycle)

प्राइमेट्स (जैसे मनुष्य, कपी, बंदर) में होने वाला जनन चक्र है (औसत 28/29 दिन)।

1. आर्तव प्रावस्था (Menstrual Phase): रक्तस्राव होता है, जो एंडोमेट्रियम के टूटने के कारण होता है (यदि निषेचन न हो)।

2. पुटीय प्रावस्था (Follicular / Proliferative Phase): FSH और LH का स्तर बढ़ता है। प्राइमरी फॉलिकल ग्राफियन फॉलिकल में विकसित होता है। इस्ट्रोजन का स्राव बढ़ता है।

3. अंडोत्सर्ग प्रावस्था (Ovulatory Phase): चक्र के मध्य (14वें दिन) LH और FSH का तीव्र स्त्राव (LH Surge) होता है, जिससे ग्राफियन फॉलिकल फटता है और अंडाणु मुक्त होता है।

4. ल्यूटीयल प्रावस्था (Luteal / Secretory Phase): शेष फॉलिकल कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus Luteum) बनाते हैं, जो प्रोजेस्टेरोन का स्राव करता है (गर्भधारण बनाए रखने के लिए आवश्यक)।


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6. निषेचन और अंतरोपण (Fertilization & Implantation)

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7. गर्भावस्था एवं अपरा (Pregnancy & Placenta)

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8. प्रसव और दुग्ध स्रावण (Parturition & Lactation)
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 मानव जनन
Overview
नर जनन तंत्र वृषण (Testis) वृषण जालिका (Rete Testis) शुक्रवाहिकाएँ (Vasa Efferentia) अधिवृषण (Epididymis) शुक्रवाहिका (Vas Deferens) सहायक ग्रंथियाँ सेमिनल वेसिकल प्रोस्टेट ग्रंथि बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि बाह्य जननांग शिश्न (Penis) मादा जनन तंत्र अंडाशय (Ovary) सहायक नलिकाएँ अण्डवाहिनी (Fallopian Tube) गर्भाशय (Uterus) योनि (Vagina) बाह्य जननांग (Vulva) स्तन ग्रंथि (Mammary Glands) युग्मक जनन (Gametogenesis) शुक्राणु जनन (Spermatogenesis) शुक्राणु का निर्माण सरटोली कोशिकाओं द्वारा पोषण अंड जनन (Oogenesis) प्राथमिक कूट (Primary Follicle) ग्राफियन कूट (Graafian Follicle) अंडोत्सर्ग (Ovulation) आर्तव चक्र / मासिक धर्म (Menstrual Cycle) ऋतोस्राव प्रावस्था (Menstrual Phase) प्रचुरोद्भवन प्रावस्था (Proliferative Phase) स्रावी प्रावस्था (Secretory Phase) निषेचन एवं अन्तर्ग्रथन (Fertilization & Implantation) युग्मज निर्माण (Zygote Formation) विदलन (Cleavage) ब्लास्टोसिस्ट का निर्माण गर्भाशय में अंतर्ग्रथन (Implantation) सगर्भता एवं भ्रूण परिवर्धन (Pregnancy & Embryonic Development) अपर या प्लेसेंटा (Placenta) त्रिकोरकी स्तर (Ectoderm, Mesoderm, Endoderm) गर्भकाल (Gestation Period) प्रसव एवं दुग्ध स्राव (Parturition & Lactation) प्रसव संकेत एवं ऑक्सीटोसिन शिशु जन्म दुग्ध स्राव (Colostrum / खीस)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. मानव जनन में निषेचन और अंतःरोपण (Implantation) की घटनाओं का वर्णन कीजिए, जो शुक्राणु के स्त्री जनन मार्ग में प्रवेश से लेकर गर्भधारण की स्थापना तक होती हैं। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### निषेचन का परिचय\nनिषेचन (Fertilization) शुक्राणु और अंडाणु के संलयन की प्रक्रिया है। मैथुन के दौरान, वीर्य को योनि में स्खलित किया जाता है। गतिशील शुक्राणु तेजी से तैरते हुए गर्भाशय ग्रीवा से गुजरते हैं और फैलोपियन ट्यूब के एम्पुलरी-इस्थमिक जंक्शन पर पहुंचते हैं, जहां निषेचन होता है। ### निषेचन की क्रियाविधि 1. **कैपेसिटेशन्स (Capacitation):** निषेचन से पहले शुक्राणु स्त्री जनन मार्ग में कार्यात्मक परिपक्वता से गुजरते हैं। 2. **एक्रोसॉम प्रतिक्रिया:** शुक्राणु अंडाणु की जोना पेलुसिडाह परत के संपर्क में आता है और एक्रोसोम से एंजाइम (जैसे हायलुरोनिडेज) मुक्त होते हैं, जो अंडाणु की परतों को पचाते हैं। 3. **कॉर्टिकल प्रतिक्रिया:** जैसे ही शुक्राणु अंडाणु के कोशिका द्रव्य में प्रवेश करता है, जोना पेलुसिडा में परिवर्तन होता है जो अन्य शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकता है (पॉलिसपर्मी की रोकथाम)। 4. **अर्धसूत्रीविभाजन द्वितीय का पूरा होना:** शुक्राणु के प्रवेश से द्वितीयक ओसाइट का दूसरा अर्धसूत्री विभाजन पूरा होता है, जिससे एक परिपक्व अगुणित अंडाणु बनता है। 5. **संलयन (Syngamy):** शुक्राणु और अंडाणु के केंद्रक आपस में संलयित होकर द्विगुणित युग्मज (zygote) बनाते हैं। ### विदलन और अंतःरोपण (Implantation) 1. **विदलन (Cleavage):** युग्मज गर्भाशय की ओर बढ़ते हुए समसूत्री विभाजन से गुजरता है जिससे ब्लास्टोमियर बनते हैं। 2. **मोरुला:** 8 से 16 ब्लास्टोमियर वाले भ्रूण को मोरुला कहते हैं। 3. **ब्लास्टोसिस्ट:** मोरुला विभाजित होकर ब्लास्टोसिस्ट में बदल जाता है, जिसमें बाहरी ट्रोफोब्लास्ट और आंतरिक कोशिका समूह (inner cell mass) होता है। 4. **अंतःरोपण:** ट्रोफोब्लास्ट परत गर्भाशय की एंडोमेट्रियम से जुड़ जाती है। गर्भाशय की कोशिकाएं ब्लास्टोसिस्ट को घेर लेती हैं, जिससे यह अंतःस्थापित हो जाता है, जिसे अंतःरोपण (Implantation) कहते हैं जो गर्भधारण का कारण बनता है।
Q2. मानव स्त्रियों में आर्तव चक्र (मासिक धर्म चक्र) का विस्तार से वर्णन कीजिए। इस चक्र की विभिन्न अवस्थाओं, अंडाशय तथा गर्भाशय में होने वाले चक्रीय परिवर्तनों और इसमें शामिल हार्मोनल नियंत्रण की विवेचना कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मासिक धर्म चक्र का परिचय\nप्राइमेट्स (जैसे मनुष्य, कपी और बंदर) की मादाओं में प्रजनन चक्र को आर्तव चक्र या मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) कहते हैं। यौवनारंभ पर शुरू होने वाले पहले रक्तस्राव को रजोदर्शन (Menarche) कहते हैं। मानव स्त्रियों में यह चक्र औसतन 28/29 दिनों की अवधि का होता है। चक्र के मध्य में एक अंडाणु उत्सर्जित होता है। ### आर्तव चक्र की अवस्थाएं 1. **आर्तव प्रावस्था (Menstrual Phase, दिन 1-5):** - यदि अंडाणु निषेचित नहीं होता है, तो कॉर्प्स ल्यूटियम नष्ट हो जाता है। - प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का स्तर गिर जाता है। - गर्भाशय की एंडोमेट्रियल परत टूट जाती है, जिससे रक्तस्राव (मासिक धर्म) होता है। 2. **पुटकीय प्रावस्था (Follicular Phase, दिन 6-14):** - अंडाशय में प्राथमिक पुटक परिपक्व होकर ग्राफियन पुटक बनते हैं। - एस्ट्रोजन के बढ़ते स्राव के कारण गर्भाशय की एंडोमेट्रियम पुनः निर्मित होती है। 3. **अंडोत्सर्ग प्रावस्था (Ovulatory Phase, लगभग 14वां दिन):** - चक्र के मध्य में LH और FSH अपने चरम स्तर पर पहुँच जाते हैं। - LH का उच्च स्तर (LH surge) ग्राफियन पुटक को फाड़ देता है जिससे अंडाणु मुक्त होता है, इसे अंडोत्सर्ग (Ovulation) कहते हैं। 4. **ल्यूटीयल प्रावस्था (Luteal Phase, दिन 15-28):** - ग्राफियन पुटक का शेष भाग कॉर्प्स ल्यूटियम में बदल जाता है। - कॉर्प्स ल्यूटियम प्रोजेस्टेरोन का स्राव करता है जो एंडोमेट्रियम को बनाए रखता है। ### हार्मोनल नियंत्रण - **गोनाडोट्रोपिन (LH और FSH):** चक्र के दौरान बदलते हैं और 14वें दिन चरम पर होते हैं। - **एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन:** गर्भाशय और अंडाशय की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।
Q3. मानव पुरुषों में शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) की प्रक्रिया का वर्णन उपयुक्त प्रवाह चार्ट या विस्तृत विवरण के साथ कीजिए। इस प्रक्रिया में शामिल हार्मोनल नियंत्रण को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### शुक्राणुजनन का परिचय\nशुक्राणुजनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा नर वृषण में अपरिपक्व जनन कोशिकाएं परिपक्व शुक्राणुओं में विकसित होती हैं। यह महत्वपूर्ण प्रजनन प्रक्रिया यौवनारंभ (puberty) पर शुरू होती है और एक मानव पुरुष के पूरे जीवन भर चलती रहती है। पूरी प्रक्रिया वृषण के भीतर स्थित शुक्रजनक नलिकाओं (seminiferous tubules) के अंदर होती है। ### शुक्राणुजनन की चरणबद्ध प्रक्रिया spermatogonia से शुक्राणुओं का निर्माण चार प्रमुख चरणों में होता है: 1. **गुणन प्रावस्था (Multiplication Phase):** शुक्रजनक नलिकाओं की आंतरिक दीवार पर मौजूद आदिम जनन कोशिकाएं या स्पर्मेटोगोनिया (द्विगुणित, 2n = 46) सूत्री विभाजन (mitosis) द्वारा अपनी संख्या में वृद्धि करती हैं। इनमें से कुछ कोशिकाएं स्टेम सेल के रूप में कार्य करती हैं, जबकि अन्य प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट्स बन जाती हैं। 2. **वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase):** प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट्स आसपास की सर्टोली कोशिकाओं से पोषक तत्वों को प्राप्त करके आकार में वृद्धि करती हैं। 3. **परिपक्वता प्रावस्था (Maturation Phase):** - प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट पहला अर्धसूत्री विभाजन (meiosis I) पूरा करती है, जो एक न्यूनकारी विभाजन है, जिससे दो समान आकार की अगुणित (n = 23) कोशिकाएं बनती हैं जिन्हें द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट्स कहते हैं। - द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट्स दूसरा अर्धसूत्री विभाजन (meiosis II) करती हैं, जिससे चार समान आकार की अगुणित कोशिकाएं बनती हैं जिन्हें स्पर्मेटिड्स कहा जाता है। 4. **शुक्राणु कायांतरण (Spermiogenesis):** गतिहीन, गोल स्पर्मेटिड्स एक संरचनात्मक कायांतरण के माध्यम से परिपक्व, गतिशील शुक्राणुओं में बदल जाते हैं। इस चरण के दौरान, गॉल्जी उपकरण एक्रोसोम बनाता है, और माइटोकॉन्ड्रिया मध्य भाग में सर्पिल आवरण बनाते हैं। ### हार्मोनल नियंत्रण - **हाइपोथैलेमस:** यौवन पर गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन (GnRH) स्रावित करता है। - **अग्र पिट्यूटरी:** ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH) जारी करती है। - **LH:** लेडिग कोशिकाओं पर कार्य करता है और एंड्रोजन (टेस्टोस्टेरोन) के स्राव को उत्तेजित करता है। - **FSH:** सर्टोली कोशिकाओं पर कार्य करता है जो शुक्राणुजनन में सहायता करती हैं।
Q4. मानव में निषेचन से लेकर ब्लास्टोसिस्ट के निर्माण और रोपण (implantation) तक की भ्रूणीय विकास की घटनाओं को समझाइए। प्लेसेंटा (अपरा) की भूमिका का भी संक्षेप में वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### निषेचन और रोपण (Implantation)\nमानव में भ्रूणजनन संभोग के बाद की घटनाओं का एक क्रम है। चरण-दर-चरण प्रक्रिया नीचे दी गई है: 1. **निषेचन (Fertilization):** - मैथुन के दौरान वीर्य योनि में छोड़ा जाता है। - शुक्राणु तेजी से तैरते हुए गर्भाशय ग्रीवा से होते हुए फैलोपियन ट्यूब के एम्पुलरी-इस्थमिक जंक्शन पर पहुंचते हैं। - इसी समय अंडाशय द्वारा छोड़ा गया अंडाणु भी एम्पुलरी क्षेत्र में पहुंचता है जहाँ निषेचन होता है। - शुक्राणु अंडाणु की जोना पेलुसिडा परत के संपर्क में आता है और अतिरिक्त शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकता है। - एक्रोसोम के स्राव शुक्राणु को अंडाणु के साइटोप्लाज्म में प्रवेश करने में मदद करते हैं। - इससे द्वितीयक ऊसाइट का दूसरा अर्धसूत्री विभाजन पूरा होता है, जिससे एक द्विगुणित युग्मज (zygote, $2n = 46$) बनता है। 2. **विदलन और मोरूला का निर्माण (Cleavage and Morula):** - जैसे-जैसे युग्मज गर्भाशय की ओर बढ़ता है, इसमें बार-बार समसूत्री विभाजन होते हैं जिन्हें **विदलन** कहते हैं। - ये विभाजन 2, 4, 8, 16 पुत्री कोशिकाएं बनाते हैं जिन्हें **ब्लास्टोमियर्स** कहा जाता है। - 8 से 16 ब्लास्टोमियर्स वाले भ्रूण को **मोरूला** कहते हैं। 3. **ब्लास्टोसिस्ट का निर्माण और रोपण:** - ब्लास्टोसिस्ट में ब्लास्टोमियर्स एक बाहरी परत **ट्रोफोब्लास्ट** और आंतरिक कोशिकाओं के समूह **इनर सेल मास** में व्यवस्थित होते हैं। - ट्रोफोब्लास्ट परत गर्भाशय की एंडोमेट्रियम से जुड़ जाती है और इनर सेल मास भ्रूण के रूप में विभेदित हो जाता है। - अंततः ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय की दीवार में अंतःस्थापित हो जाता है, जिसे **रोपण (implantation)** कहते हैं। ### अपरा (प्लेसेंटा) की भूमिका:\nअपरा भ्रूण और मातृ शरीर के बीच एक ऊतकीय और कार्यात्मक संबंध है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं: - **पोषण:** यह माँ के रक्त से भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्रदान करता है। - **उत्सर्जन:** यह भ्रूण द्वारा उत्पादित कार्बन डाइऑक्साइड और अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में मदद करता है। - **अंतःस्रावी कार्य:** यह hCG, hPL, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन जैसे हॉर्मोन स्रावित करता है जो गर्भावस्था को बनाए रखते हैं।
Q5. मानव स्त्रियों में आर्तव चक्र (मासिक धर्म) का वर्णन कीजिए। चक्र के विभिन्न चरणों तथा प्रत्येक चरण के दौरान सक्रिय हॉर्मोनल नियंत्रण को समझाइये। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आर्तव चक्र (मास्क धर्म) का परिचय\nप्राइमेट मादाओं (जैसे बंदर, कपी और मानव) में होने वाले जनन चक्र को **आर्तव चक्र** या **मासिक धर्म चक्र** कहते हैं। यौवनावस्था में शुरू होने वाले पहले आर्तव को **ऋतुदर्शन (menarche)** कहते हैं। मानव स्त्रियों में यह चक्र लगभग 28/29 दिनों की अवधि में दोहराया जाता है। प्रत्येक आर्तव चक्र के मध्य में एक अंडाणु मुक्त होता है जिसे अंडोत्सर्ग कहते हैं। ### आर्तव चक्र के चरण\nआर्तव चक्र के निम्नलिखित चार मुख्य चरण होते हैं: 1. **आर्तव चरण (दिन 1-5):** - चक्र की शुरुआत आर्तव प्रवाह से होती है जो 3 से 5 दिनों तक रहता है। - यह प्रवाह गर्भाशय की एंडोमेट्रियल परत और उसकी रक्त वाहिकाओं के टूटने के कारण होता है, जो योनि के माध्यम से बाहर निकलता है। - ऐसा तब होता है जब अंडाणु निषेचित नहीं होता है। - *हॉर्मोनल नियंत्रण:* एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का स्तर कम हो जाता है। 2. **पुटकीय या प्राइमर चरण (दिन 6-14):** - इस चरण के दौरान, अंडाशय में प्राथमिक पुटक विकसित होकर परिपक्व ग्राफियन पुटक बन जाते हैं। - गर्भाशय की एंडोमेट्रियम का पुनरुद्भवन होता है। - *हॉर्मोनल नियंत्रण:* हाइपोथैलेमस से गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन (GnRH) अग्र पीयूष ग्रंथि को LH और FSH स्रावित करने के लिए प्रेरित करता है। FSH पुटकीय विकास और एस्ट्रोजन के स्राव को उत्तेजित करता है। 3. **अंडोत्सर्ग चरण (लगभग 14वां दिन):** - मध्य-चक्र (लगभग 14वें दिन) के दौरान LH का स्राव अपने चरम स्तर पर पहुँच जाता है जिसे **LH सर्ज** कहते हैं। - LH सर्ज ग्राफियन पुटक को फाड़ देता है जिससे अंडाणु (ओवम) मुक्त हो जाता है। 4. **ल्यूटियल या स्रावी चरण (दिन 15-28):** - ग्राफियन पुटक के शेष भाग **कॉर्पस ल्यूटियम** में बदल जाते हैं। - कॉर्पस ल्यूटियम भारी मात्रा में **प्रोजेस्ट्रोन** स्रावित करता है, जो गर्भाशय की एंडोमेट्रियम को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। - निषेचन न होने पर कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाता है जिससे एंडोमेट्रियम टूट जाती है और नया चक्र शुरू होता है।
Q6. मानव स्त्रियों में आर्तव चक्र (menstrual cycle) को विस्तार से समझाइए। हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव और अंडाशय तथा गर्भाशय में होने वाले परिवर्तनों के साथ चक्र के विभिन्न चरणों की चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आर्तव चक्र (Menstrual Cycle) का परिचय\nप्राइमेट्स (जैसे बंदर, कपी और मानव) में मादाओं के प्रजनन चक्र को आर्तव चक्र या मासिक धर्म चक्र कहा जाता है। यौवनारंभ पर शुरू होने वाला पहला मासिक धर्म **menarche** कहलाता है। मानव स्त्रियों में यह चक्र औसतन 28/29 दिनों की अवधि का होता है। लगभग 50 वर्ष की आयु में यह चक्र रुक जाता है, जिसे **menopause** कहते हैं। ### आर्तव चक्र के चरण\nअंडाशय और गर्भाशय में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर आर्तव चक्र चार प्रमुख चरणों में विभाजित होता है: 1. **आर्तव चरण (Menstrual Phase):** - **अवधि:** लगभग 1 से 5 दिन। - **घटनाएँ:** यदि निषेचन नहीं होता है, तो कॉर्पस ल्यूटियम अपहासित (degenerate) हो जाता है। इससे प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का स्तर गिर जाता है। - **परिणाम:** हॉर्मोन के कम होने से गर्भाशय का एंडोमेट्रियम टूट जाता है और रक्तस्राव (menstruation) होता है। 2. **पुटकीय चरण (Follicular Phase):** - **अवधि:** लगभग 6 से 14 दिन। - **घटनाएँ:** FSH और LH के प्रभाव से अंडाशय में प्राथमिक फॉलिकल्स परिपक्व होकर Graafian follicle बनाते हैं। - **हॉर्मोनल परिवर्तन:** एस्ट्रोजन का स्राव बढ़ता है। - **गर्भाशय परिवर्तन:** एस्ट्रोजन के कारण गर्भाशय की एंडोमेट्रियम परत दोबारा मोटी होने लगती है। 3. **अंडोत्सर्ग चरण (Ovulatory Phase):** - **अवधि:** चक्र का लगभग 14वां दिन। - **घटनाएँ:** मध्य-चक्र में LH का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है (**LH surge**), जिससे परिपक्व Graafian follicle फट जाता है और अंडाणु (ovum) मुक्त हो जाता है। इसे **अंडोत्सर्ग (Ovulation)** कहते हैं। 4. **ल्यूटियल चरण (Secretory Phase):** - **अवधि:** लगभग 15 से 28 दिन। - **घटनाएँ:** फटा हुआ फॉलिकल एक अंतःस्रावी संरचना **कॉर्पस ल्यूटियम (corpus luteum)** में बदल जाता है। - **हॉर्मोनल परिवर्तन:** कॉर्पस ल्यूटियम भारी मात्रा में **प्रोजेस्टेरोन** स्रावित करता है, जो गर्भाशय की दीवार को भ्रूण के आरोपण (implantation) के लिए तैयार रखता है। - **परिणाम:** निषेचन न होने पर कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाता है और नया चक्र शुरू होता है।
Q7. एक अच्छी तरह से नामांकित विवरण के साथ मानव शुक्राणु (sperm) की शारीरिक संरचना का वर्णन कीजिए। निषेचन की प्रक्रिया में प्रत्येक घटक के कार्यों की व्याख्या कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव शुक्राणु का परिचय\nएक परिपक्व मानव शुक्राणु (spermatozoon) एक सूक्ष्म, गतिशील, लंबा नर युग्मक है जिसमें सिर (head), ग्रीवा (neck), मध्य खंड (middle piece) और पूंछ (tail) होते हैं। ### विस्तृत संरचना और घटक 1. **सिर (Head):** - शुक्राणु का सिर अंडाकार होता है और इसमें मुख्य रूप से दो संरचनाएं होती हैं: एक संकुचित अगुणित नाभिक (nucleus) और एक एक्रोसोम (acrosome)। - **अगुणित नाभिक:** इसमें पैतृक आनुवंशिक सामग्री (23 गुणसूत्र) होती है। - **एक्रोसोम:** यह नाभिक के अग्र भाग को ढंकने वाली टोपी जैसी संरचना है। इसमें हायलुरोनिडेز (hyaluronidase) और एक्रोसिन जैसे शक्तिशाली एंजाइम होते हैं, जो निषेचन के दौरान अंडाणु की परतों को भेदने में मदद करते हैं। 2. **ग्रीवा (Neck):** - यह सिर को मध्य खंड से जोड़ने वाला एक छोटा क्षेत्र है। - इसमें एक समीपस्थ (proximal) और एक दूरस्थ (distal) सेंट्रीओल होता है। समीपस्थ सेंट्रीओल निषेचन के बाद युग्मज में विदलन (cleavage) के लिए आवश्यक है। 3. **मध्य खंड (Middle Piece):** - यह शुक्राणु का ऊर्जा केंद्र है। - इसमें अक्षीय तंतु के चारों ओर सर्पिल रूप से व्यवस्थित कई माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं। - **कार्य:** ये माइटोकॉन्ड्रिया एटीपी (ATP) के रूप में ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जो पूंछ की गति के लिए आवश्यक है। 4. **पूंछ (Tail):** - यह शुक्राणु का सबसे लंबा, चाबुक जैसा हिस्सा है। - **कार्य:** पूंछ की लयबद्ध गति शुक्राणु को महिला जननांग मार्ग में आगे की ओर गति प्रदान करती है। ### निषेचन में महत्व\nमानव शुक्राणु की प्रत्येक संरचनात्मक विशेषता प्रजनन सफलता के लिए अनुकूलित होती है। सुव्यवस्थित शरीर प्रतिरोध को कम करता है, एक्रोसोम प्रवेश को सक्षम बनाता है, और माइटोकॉन्ड्रिया प्रणोदन ऊर्जा प्रदान करते हैं।
Q8. एक दंपत्ति फर्टिलिटी उपचार करवा रहा है। पुरुष साथी के वीर्य के विश्लेषण से पता चलता है कि 4.0 मिलीलीटर के मानक स्खलन आयतन में कुल शुक्राणुओं की संख्या $2.4 \times 10^8$ शुक्राणु है। इसके अलावा, सूक्ष्मदर्शी से जाँच करने पर पता चलता है कि इनमें से 60% शुक्राणुओं की आकृति और आकार सामान्य हैं (मॉर्फोलॉजी), और इनमें से 50% में जोरदार गतिशीलता (motility) है। WHO के मानक दिशानिर्देशों के आधार पर गणना करें: 1. वीर्य के प्रति मिलीलीटर में शुक्राणु सांद्रता। 2. सामान्य मॉर्फोलॉजी वाले शुक्राणुओं की कुल संख्या। 3. सामान्य मॉर्फोलॉजी और सक्रिय प्रगतिशील गतिशीलता दोनों प्रदर्शित करने वाले शुक्राणुओं की कुल संख्या। 4. यह निर्धारित करें कि क्या पुरुष साथी का नमूना सामान्य फर्टिलिटी मानदंडों के लिए WHO के मानदंडों को पूरा करता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): दिए गए मापदंडों के आधार पर वीर्य के नमूने का मूल्यांकन करने के लिए, हम चरण-दर-चरण गणना करते हैं: **दिया गया डेटा:** - स्खलन का कुल आयतन = $4.0\text{ mL}$ - कुल शुक्राणु संख्या = $2.4 \times 10^8\text{ शुक्राणु}$ - सामान्य आकृति (मॉर्फोलॉजी) वाले शुक्राणुओं का प्रतिशत = $60\%$ - प्रगतिशील गतिशीलता दिखाने वाले सामान्य शुक्राणुओं का प्रतिशत = $50\%$ **चरण 1: वीर्य के प्रति मिलीलीटर में शुक्राणु सांद्रता की गणना करें** $$\text{शुक्राणु सांद्रता} = \frac{\text{कुल शुक्राणु संख्या}}{\text{कुल आयतन}}$$ $$\text{शुक्राणु सांद्रता} = \frac{2.4 \times 10^8}{4.0\text{ mL}} = 6.0 \times 10^7\text{ spermatozoa/mL}$$ **चरण 2: सामान्य मॉर्फोलॉजी प्रदर्शित करने वाले शुक्राणुओं की कुल संख्या की गणना करें** $$\text{सामान्य मॉर्फोलॉजी संख्या} = 2.4 \times 10^8 \times \frac{60}{100} = 1.44 \times 10^8\text{ spermatozoa}$$ **चरण 3: सामान्य मॉर्फोलॉजी और सक्रिय प्रगतिशील गतिशीलता दोनों प्रदर्शित करने वाले शुक्राणुओं की कुल संख्या की गणना करें** $$\text{गतिशील सामान्य शुक्राणु संख्या} = 1.44 \times 10^8 \times \frac{50}{100} = 7.2 \times 10^7\text{ spermatozoa}$$ **चरण 4: WHO मानदंडों के साथ अनुपालन निर्धारित करें** - **मॉर्फोलॉजी मानदंड:** नमूने में $60\%$ सामान्य मॉर्फोलॉजी है, जो $40\%$ के न्यूनतम WHO थ्रेशोल्ड से अधिक है। - **गतिशीलता मानदंड:** कुल प्रगतिशील गतिशीलता $30\%$ है, जो WHO के न्यूनतम $32\%$ संदर्भ मूल्य से थोड़ी कम है।
Q9. मानव मादा जनन तंत्र की शारीरिक संरचना का वर्णन इसके प्राथमिक और सहायक अंगों के साथ कीजिए। प्रत्येक घटक के कार्यों की विस्तार से चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मादा जनन तंत्र का परिचय\nमानव मादा जनन तंत्र श्रोणि क्षेत्र (pelvic region) में स्थित अंगों का एक जटिल समूह है। इसे मादा युग्मक (अंडाणु) का उत्पादन करने, नर युग्मक (शुक्राणु) को प्राप्त करने, निषेचन के लिए एक स्थल प्रदान करने, भ्रूण के विकास का समर्थन करने और प्रसव (parturition) को सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ### 1. प्राथमिक सेक्स अंग (अंडाशय/Ovary) - **संरचना:** अंडाशयों की एक जोड़ी प्राथमिक मादा सेक्स अंग है जो मादा युग्मक (अंडाणु) और कई स्टेरोइड हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) का उत्पादन करती है। प्रत्येक अंडाशय बादाम के आकार का होता है। - **आंतरिक शरीर रचना:** प्रत्येक अंडाशय एक पतली उपकला से ढका होता है जो डिम्बग्रंथि स्ट्रोमा को घेरती है। स्ट्रोमा को बाहरी कॉर्टेक्स और भीतरी मेडुला में विभाजित किया जाता है। ### 2. सहायक वाहिकाएं\nसहायक वाहिकाओं में फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय और योनि शामिल हैं: - **फैलोपियन ट्यूब (डिम्बवाहिनी):** प्रत्येक ट्यूब 10-12 सेमी लंबी होती है। इसे तीन भागों में बांटा गया है: इन्फंडिबुलम (अंगुली जैसी अनुमानों के साथ जो अंडाणु को इकट्ठा करने में मदद करती है), एम्पुला (चौड़ा हिस्सा जहां आमतौर पर निषेचन होता है), और इस्थमस (गर्भाशय से जुड़ने वाला संकीर्ण हिस्सा)। - **गर्भाशय (Uterus):** एक एकल, खोखला, उल्टे नाशपाती के आकार का पेशीय अंग। गर्भाशय की दीवार में ऊतकों की तीन परतें होती हैं: पेरीमेट्रियम (बाहरी झिल्ली), मायोमेट्रियम (चिकनी मांसपेशियों की मोटी मध्य परत), और एंडोमेट्रियम (आंतरिक ग्रंथियों की परत जो मासिक धर्म चक्र के दौरान चक्रीय परिवर्तनों से गुजरती है)। - **योनि (Vagina):** गर्भाशय ग्रीवा से बाहर की ओर फैलने वाली एक बड़ी, पेशीय, लोचदार ट्यूब। यह जन्म नहर और मासिक धर्म प्रवाह के मार्ग के रूप में कार्य करती है। ### 3. बाहरी जननांग (वल्वा)\nमादा बाहरी जननांगों में मॉन्स प्यूबिस, लेबिया मेजोरा, लेबिया माइनोरा, भगशेफ (clitoris) और हाइमन शामिल हैं। ### 4. स्तन ग्रंथियां (Mammary Glands)\nग्रंथि ऊุตकों और वसा से युक्त युग्मित संरचनाएं। ये नवजात शिशु को पोषण देने के लिए स्तनपान के माध्यम से दूध का उत्पादन करती हैं।
Q10. मानव नरों में शुक्राणुजनन (spermatogenesis) की प्रक्रिया को एक रेखाचित्र की सहायता से समझाइए। स्पर्मेटोगोनिया से शुक्राणुओं के निर्माण में शामिल विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### शुक्राणुजनन का परिचय\nशुक्राणुजनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मानव नरों के वृषण में अपरिपक्व जनन कोशिकाएं परिपक्व शुक्राणुओं में विकसित होती हैं। यह प्रक्रिया यौवनारंभ (puberty) पर शुरू होती है और वयस्क जीवन भर जारी रहती है। यह पूरी प्रक्रिया वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं (seminiferous tubules) के भीतर होती है। ### शुक्राणुजनन के चरण\nस्पर्मेटोगोनिया से शुक्राणुओं के निर्माण को मुख्य रूप से चार चरणों में विभाजित किया जा सकता है: 1. **प्रवर्धन चरण (सूत्री विभाजन चरण):** - प्राथमिक स्पर्मेटोगोनिया (जो द्विगुणित होते हैं, जिनमें 46 गुणसूत्र या 2N होते हैं) बार-बार सूत्री विभाजन (mitosis) द्वारा अपनी संख्या बढ़ाते हैं। - ये कोशिकाएं शुक्रजनक नलिकाओं की आंतरिक दीवार पर स्थित होती हैं। - इनमें से कुछ कोशिकाएं प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट्स बन जाती हैं। 2. **वृद्धि चरण:** - प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट्स आसपास की सर्टोली कोशिकाओं से पोषक तत्वों को प्राप्त करके आकार में वृद्धि करते हैं। - हालांकि वे बड़े हो जाते हैं, लेकिन उनकी गुणसूत्र संख्या द्विगुणित (2N = 46) ही रहती है। - इस चरण में डीएनए का प्रतिकृतिरण (replication) होता है। 3. **परिपक्वता चरण (अर्धसूत्री विभाजन चरण):** - प्रत्येक प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट पहला अर्धसूत्री विभाजन (meiosis I) से गुजरता है, जिसके परिणामस्वरूप दो समान आकार की अगुणित (haploid) कोशिकाएं बनती हैं जिन्हें द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट (23 गुणसूत्र या N) कहा जाता है। - इसके बाद, द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट्स दूसरे अर्धसूत्री विभाजन (meiosis II) से गुजरकर चार समान आकार की अगुणित कोशिकाओं का निर्माण करते हैं जिन्हें स्पर्मेटिड्स (N) कहा जाता है। 4. **शुक्राणु कायांतरण (Spermiogenesis):** - गतिहीन, गोल स्पर्मेटिड्स संरचनात्मक परिवर्तन से गुजरकर परिपक्व, गतिशील शुक्राणुओं में बदल जाते हैं। - इस चरण के दौरान, गॉल्जी उपकरण एक्रोसोम बनाता है, सेंट्रील अक्षीय तंतु और पूंछ बनाते हैं, और माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा प्रदान करने के लिए मध्य भाग में व्यवस्थित हो जाते हैं। ### हार्मोनल नियंत्रण\nशुक्राणुजनन हाइपोथैलेमस और अग्र पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोनों द्वारा नियंत्रित होता है। गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन (GnRH) ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH) के स्राव को उत्तेजित करता है। LH लेडिग कोशिकाओं पर कार्य करता है, जबकि FSH सर्टोली कोशिकाओं पर कार्य करता है।
Q11. मानव नर जनन तंत्र में शुक्रजनक नलिकाओं (Seminiferous tubules) की संरचनात्मक विशेषताओं और कार्यों का वर्णन कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): शुक्रजनक नलिकाएं (Seminiferous tubules) मानव वृषण के वृषण खंडों के भीतर पाई जाने वाली अत्यधिक कुंडलित, सूक्ष्म संरचनात्मक इकाइयाँ हैं। प्रत्येक वृषण खंड में इनमें से एक से तीन कुंडलित नलिकाएं होती हैं, जो नर युग्मकों (शुक्राणु) के उत्पादन के प्राथमिक स्थल के रूप में कार्य करती हैं। 1. संरचनात्मक विशेषताएं: प्रत्येक शुक्रजनक नलिका की दीवार आंतरिक रूप से दो अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं से पंक्तिबद्ध होती है: नर जर्म कोशिकाएं (स्पर्मेटोगोनिया) और सर्टोली कोशिकाएं। - नर जर्म कोशिकाएं: ये यौवनारंभ से शुरू होने वाले निरंतर समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजनों से गुजरती हैं ताकि अंततः परिपक्व शुक्राणु बन सकें। - सर्टोली कोशिकाएं (नर्स कोशिकाएं): ये जर्म कोशिकाओं के बीच स्थित लंबी, कायिक कोशिकाएं हैं। वे विकासशील जर्म कोशिकाओं को संरचनात्मक सहायता, पोषण और सुरक्षा प्रदान करती हैं। इसके अलावा, वे इनहिबिन और एंड्रोजन-बाइंडिंग प्रोटीन (ABP) का स्राव करती हैं। 2. अंतरालीय स्थान (Interstitial Spaces): शुक्रजनक नलिकाओं के बाहर के क्षेत्रों, जिन्हें अंतरालीय स्थान कहा जाता है, में रक्त वाहिकाएं, प्रतिरक्षात्मक रूप से सक्षम कोशिकाएं और लेडिग कोशिकाओं (अंतरालीय कोशिकाओं) के रूप में जानी जाने वाली विशेष अंतःस्रावी कोशिकाएं होती हैं। लेडिग कोशिकाएं एंड्रोजन (मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन) नामक वृषण हार्मोनों को संश्लेषित और स्रावित करती हैं, जो शुक्रजनन और द्वितीयक यौन विशेषताओं को नियंत्रित करती हैं। \nइस प्रकार, शुक्रजनक नलिकाएं, आसपास की लेडिग कोशिकाओं के साथ, मानव नर जनन तंत्र की मुख्य कार्यात्मक मशीनरी का गठन करती हैं।
Q12. प्रसव (पार्टुरिशन) और दुग्ध निष्कासन प्रतिवर्त (मिल्क इजेक्शन रिफ्लेक्स) में ऑक्सीटोसिन की भूमिका की व्याख्या कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): ऑक्सीटोसिन हाइपोथैलेमस द्वारा संश्लेषित और पश्च पिट्यूटरी ग्रंथि से स्रावित एक पेप्टाइड हार्मोन है। यह दो प्रमुख शारीरिक घटनाओं के दौरान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है: प्रसव (पार्टुरिशन) और स्तनपान (लेक्टेशन)। 1. प्रसव में भूमिका (चाइल्डबर्थ): प्रसव कोर्टिसोल, एस्ट्रोजन और ऑक्सीटोसिन से जुड़ी एक जटिल तंत्रिका अंतःस्रावी तंत्र द्वारा प्रेरित होता है। जब भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो जाता है, तो यह प्रसव की शुरुआत का संकेत देता है, जिससे हल्के गर्भाशय संकुचन पैदा होते हैं जिन्हें फीटल इजेक्शन रिफ्लेक्स कहा जाता है। यह प्रतिवर्त माँ के पश्च पिट्यूटरी से ऑक्सीटोसिन की महत्वपूर्ण मात्रा के रिलीज को ट्रिगर करता है। ऑक्सीटोसिन गर्भाशय की मायोमेट्रियम की चिकनी मांसपेशियों पर सीधे कार्य करता है, जिससे मजबूत, लयबद्ध संकुचन होते हैं। ये मजबूत संकुचन ऑक्सीटोसिन के आगे के स्राव को उत्तेजित करते हैं, जिससे एक सकारात्मक प्रतिक्रिया लूप स्थापित होता है। बेहतर गर्भाशय संकुचन और ऑक्सीटोसिन रिलीज का यह निरंतर चक्र जन्म नहर के माध्यम से बच्चे को गर्भाशय से बाहर निकालने का कारण बनता है। 2. दुग्ध निष्कासन प्रतिवर्त में भूमिका (स्तनपान): बच्चे के जन्म के बाद, दूध पिलाने वाले बच्चे द्वारा माँ के निप्पल को उत्तेजित करने से हाइपोथैलेमस को तंत्रिका संकेत मिलते हैं। हाइपोथैलेमस पश्च पिट्यूटरी को रक्त प्रवाह में ऑक्सीटोसिन जारी करने के लिए उत्तेजित करता है। जब ऑक्सीटोसिन स्तन ग्रंथियों तक पहुँचता है, तो यह कूपों के चारों ओर मायोएपिथेलियल कोशिकाओं के संकुचन का कारण बनता है जहाँ दूध संग्रहित होता है। यह संकुचन दूध को दूध नलिकाओं में और बाद में निप्पल में बाहर निकालता है, जिससे दूध का निष्कासन (लेट-डाउन रिफ्लेक्स) होता है।
Q13. मानव मादाओं में निषेचन और प्रत्यारोपण (इम्प्लांटेशन) की घटनाओं का वर्णन कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): निषेचन और प्रत्यारोपण मानव जनन में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हैं जो गर्भावस्था की स्थापना की ओर ले जाते हैं। 1. निषेचन: संभोग के दौरान, वीर्य को योनि में छोड़ा जाता है। शुक्राणु तेजी से तैरते हैं, गर्भाशय ग्रीवा से गुजरते हैं, और फैलोपियन ट्यूब के एम्पुलरी-इस्थमिक जंक्शन तक पहुंचते हैं। साथ ही, अंडाशय से निकला एक डिंब भी इस क्षेत्र में पहुंचाया जाता है। निषेचन तब होता है जब एक अकेला शुक्राणु डिंब की जोना पेलुसिडा परत के संपर्क में आता है, जिससे ऐसे परिवर्तन प्रेरित होते हैं जो अतिरिक्त शुक्राणुओं (पॉलीसपर्मी) के प्रवेश को रोकते हैं। एंजाइम से भरपूर एक्रोसोम शुक्राणु को ओसाइट प्लाज्मा झिल्ली के साथ फ्यूज करने के लिए अंडे की झिल्लियों को विघटित करने में मदद करता है। यह द्वितीयक ओसाइट के दूसरे अर्धसूत्री विभाजन को पूरा करने को ट्रिगर करता है, जिससे एक अगुणित डिंब और दूसरा ध्रुवीय पिंड बनता है। नर और मादा प्रोन्यूक्ली के संलयन के परिणामस्वरूप एक द्विगुणित युग्मज का निर्माण होता है। 2. विदलन और प्रत्यारोपण: जैसे-जैसे युग्मज गर्भाशय की ओर फैलोपियन ट्यूब से नीचे जाता है, यह 2, 4, 8, 16 पुत्री कोशिकाओं को बनाने के लिए माइटोटिक विभाजन (विदलन) से गुजरता है जिन्हें ब्लास्टोमियर कहा जाता है। 8 से 16 ब्लास्टोमियर वाले भ्रूण को मोरूला कहा जाता है। मोरूला विभाजित होता रहता है और जैसे-जैसे यह गर्भाशय में आगे बढ़ता है, यह ब्लास्टोसिस्ट में बदल जाता है। ब्लास्टोसिस्ट में एक बाहरी परत होती है जिसे ट्रोफोसिस कहा जाता है और एक आंतरिक कोशिका द्रव्यमान होता है। ट्रोफोसिस परत तब गर्भाशय के एंडोमेट्रियम से जुड़ जाती है, और यजमान कोशिकाएं ब्लास्टोसिस्ट को कवर करने के लिए तेजी से विभाजित होती हैं। गर्भाशय के एंडोमेट्रियम में ब्लास्टोसिस्ट को एम्बेड करने की इस प्रक्रिया को प्रत्यारोपण (इम्प्लांटेशन) के रूप में जाना जाता है, जो सफलतापूर्वक गर्भावस्था की ओर ले जाता है।
Q14. कोलोस्ट्रम (खीस) क्या है? इसे नवजात शिशुओं के लिए आवश्यक क्यों माना जाता है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कोलोस्ट्रम (खीस) बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती कुछ दिनों (आमतौर पर 2 से 3 दिन) के दौरान स्तन ग्रंथियों द्वारा उत्पादित पहला गाढ़ा, पीला दूध है, इससे पहले कि असली दूध का उत्पादन शुरू हो। \nकोलोस्ट्रम आवश्यक पोषक तत्वों, विकास कारकों और सबसे महत्वपूर्ण, मातृ एंटीबॉडी, विशेष रूप से स्रावी इम्युनोग्लोबुलिन ए (IgA) से असाधारण रूप से समृद्ध होता है। ये एंटीबॉडी नवजात शिशु को निष्क्रिय प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं, जीवन के शुरुआती और संवेदनशील हफ्तों के दौरान इसके नाजुक और विकासशील प्रतिरक्षा तंत्र को विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और श्वसन संक्रमणों से बचाते हैं। \nइसके अलावा, कोलोस्ट्रम एक हल्के रेचक के रूप में कार्य करता है, जिससे नवजात शिशु को अपना पहला मल (मेकोनियम) त्यागने और आंत से जमा कचरे को साफ करने में मदद मिलती है। यह फायदेमंद आंत माइक्रोबायोटा के उपनिवेशण को सुविधाजनक बनाता है और नवजात जठरांत्र संबंधी मार्ग की समग्र परिपक्वता में मदद करता है। इसलिए, बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा सभी नवजात शिशुओं के लिए विशेष स्तनपान, विशेष रूप से कोलोस्ट्रम सहित, की दृढ़ता से सिफारिश की जाती है।
Q15. गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा (अपरा) द्वारा स्रावित हार्मोनों की भूमिका की व्याख्या कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): अपरा (प्लेसेंटा) गर्भावस्था के दौरान बनने वाला एक अस्थायी अंतःस्रावी ऊतक है जो विकासशील भ्रूण और मातृ शरीर के बीच एक महत्वपूर्ण शारीरिक संबंध के रूप में कार्य करता है। यह कई आवश्यक हार्मोन स्रावित करता है जो गर्भावस्था को बनाए रखने, भ्रूण के विकास का समर्थन करने और प्रसव तथा स्तनपान के लिए माँ के शरीर को तैयार करने के लिए अपरिहार्य हैं। \nप्लेसेंटा द्वारा स्रावित प्राथमिक हार्मोनों में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG), ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजेन (hPL), एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन शामिल हैं। गर्भावस्था के बाद के चरणों के दौरान, रिलैक्सिन नामक एक अतिरिक्त हार्मोन भी अंडाशय और प्लेसेंटा द्वारा स्रावित होता है। 1. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG): यह हार्मोन शुरुआती गर्भावस्था के दौरान प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन जारी रखने के लिए कॉर्पस ल्यूटियम को उत्तेजित करता है, जिससे मासिक धर्म रुक जाता है और गर्भाशय की परत बनी रहती है। मातृ मूत्र में इसकी उपस्थिति गर्भावस्था परीक्षण का मुख्य आधार है। 2. ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजेन (hPL): hPL बढ़ते भ्रूण को ग्लूकोज और अमीनो एसिड की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चयापचय प्रक्रियाओं को संशोधित करके मातृ चयापचय में मुख्य भूमिका निभाता है। यह स्तन ग्रंथियों को स्तनपान के लिए तैयार करने में भी मदद करता है। 3. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन: ये हार्मोन पूरी गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय के मोटे एंडोमेट्रियम को बनाए रखते हैं, आगे के पुटीय विकास को दबाते हैं, और गर्भाशय की मांसपेशियों की संरचनात्मक वृद्धि को बढ़ावा देते हैं। 4. रिलैक्सिन: गर्भावस्था के बाद में स्रावित होने वाला, रिलैक्सिन प pubic symphysis के संयोजी ऊतक को नरम करने और प्रसव के दौरान प्रसव को सुविधाजनक बनाने के लिए गर्भाशय ग्रीवा को चौड़ा करने में मदद करता है।