Chapter Chai • Board Revision Guide
HI • CBSE

जनन स्वास्थ्य

Subject: जीव विज्ञान | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) - त्वरित रिवीजन नोट्स

#### 1. परिचय (Introduction)


#### 2. जनन स्वास्थ्य और समस्याएँ


#### 3. जनसंख्या विस्फोट और जन्म नियंत्रण (Population Explosion and Birth Control)


#### 4. गर्भनिरोधक के प्रमुख तरीके (Methods of Contraception)







#### 5. सगर्भता का चिकित्सीय समापन (MTP - Medical Termination of Pregnancy)


#### 6. यौन संचारित संक्रमण (STIs - Sexually Transmitted Infections)


#### 7. बन्ध्यिता (Infertility)


माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 जनन स्वास्थ्य
Overview
परिचय और आवश्यकता विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार परिभाषा जनन अंगों का सामान्य कार्य भावनात्मक और सामाजिक कल्याण जनन स्वास्थ्य: समस्याएँ और रणनीतियाँ भारत में कार्यक्रम (परिवार नियोजन - 1951) आरसीएच (RCH) कार्यक्रम जागरूकता और शिक्षा एमिनियोसेंटेसिस पर प्रतिबंध (कन्या भ्रूण हत्या रोकना) जनसंख्या विस्फोट और जन्म नियंत्रण जनसंख्या वृद्धि के कारण जन्म नियंत्रण के उपाय (गर्भनिरोधक) प्राकृतिक विधियाँ (आवधिक संयम, बाह्यस्खलन, स्तनपान अनार्तव) अवरोध विधियाँ (कंडोम, डायफ्राम, ग्रीवा टोपी) अंतःगर्भाशय युक्तियाँ (IUDs - कॉपर-T, ہارمون جاری کرنے والی) मौखिक गर्भनिरोधक (गोलियाँ, सहेली) शल्य क्रिया विधियाँ (नसबंदी - वासेक्टोमी, ट्यूबेक्टोमी) सगर्भता का चिकित्सीय समापन (MTP) परिभाषा और कानूनी स्थिति सुरक्षित समय सीमा (पहली तिमाही) दुरुपयोग और जोखिम यौन संचारित संक्रमण (STIs) अन्य नाम (VD, RTI) प्रमुख उदाहरण सूजाक (Gonorrhoea) उपदंश (Syphilis) जनन अंग मस्सा एड्स (AIDS) रोकथाम और उपचार के उपाय बंध्यता (Infertility) परिभाषा (गर्भाधान में असमर्थता) सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ (ART) आईवीएफ (IVF) - परखली शिशु जेडआयएफटी (ZIFT) आईसीएसआई (ICSI) जीआईएफटी (GIFT) कृत्रिम वीर्यसेचन (AI)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. गर्भनिरोधक की विभिन्न विधियाँ क्या हैं? किन्हीं तीन स्थायी विधियों और तीन अस्थायी विधियों का विस्तार से वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### गर्भनिरोधक का परिचय\nगर्भनिरोधक से तात्पर्य विभिन्न उपकरणों, दवाओं, विधियों या शल्य प्रक्रियाओं के उपयोग से गर्भधारण को जानबूझकर रोकने से है। एक आदर्श गर्भनिरोधक उपयोगकर्ता के अनुकूल, आसानी से उपलब्ध, प्रभावी और कम से कम या बिना किसी दुष्प्रभाव के प्रतिवर्ती होना चाहिए। ### गर्भनिरोधक की अस्थायी विधियाँ\nअस्थायी विधियाँ प्रतिवर्ती होती हैं और बच्चों में अंतर रखने या गर्भावस्था में देरी के लिए उपयोग की जाती हैं। तीन महत्वपूर्ण अस्थायी विधियाँ निम्नलिखित हैं: * **प्राकृतिक/व्यावहारिक विधियाँ:** ये विधियाँ अंडाणु और शुक्राणु के मिलने की संभावनाओं से बचने के सिद्धांत पर काम करती हैं। आवधिक संयम (मासिक धर्म चक्र के दिन 10 से 17 के बीच संभोग से बचना जब अंडोत्सर्ग की संभावना होती है), योनि से बाहर निकालना (स्कलन से पहले लिंग को बाहर निकालना), और लेक्टेशनल एमेनोरिया (प्रसव के बाद तीव्र स्तनपान के दौरान मासिक धर्म का न आना) इसके उदाहरण हैं। * **बैरियर विधियाँ:** इन विधियों में बाधाओं की मदद से अंडाणु और शुक्राणु को भौतिक रूप से मिलने से रोका जाता है। कंडोम पतले रबर/लैटेक्स म्यान से बने होते हैं जिनका उपयोग पुरुषों में लिंग को या महिलाओं में योनि और गर्भाशय ग्रीवा को ढकने के लिए किया जाता है। * **अंतरागर्भाशय युक्ति (IUD):** इन उपकरणों को विशेषज्ञ डॉक्टरों या नर्सों द्वारा गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है। इनमें गैर-औषधि युक्त IUD (जैसे, लिप्स लूप), कॉपर मुक्त करने वाली IUD (CuT, Cu7, Multiload 375) और हार्मोन मुक्त करने वाली IUD (Progestasert, LNG-20) शामिल हैं। ### गर्भनिरोधक की स्थायी विधियाँ (बंध्याकरण)\nस्थायी विधियों, जिन्हें शल्य चिकित्सा विधियों के रूप में भी जाना जाता है, को किसी भी अधिक गर्भावस्था को रोकने के लिए एक अंतिम विधि के रूप में पुरुष और महिला दोनों साथियों के लिए सलाह दी जाती है। ये अत्यधिक प्रभावी हैं लेकिन इनकी प्रतिवर्तीता बहुत कम है। दो मुख्य शल्य विधियाँ हैं: * **वेसेक्टॉमी (नसबंदी):** यह पुरुषों के लिए बंध्याकरण प्रक्रिया है। इस विधि में, अंडकोश पर एक छोटे से चीरे के माध्यम से वास डिफेरेंस के एक छोटे से हिस्से को हटा दिया जाता है या बांध दिया जाता है, जिससे शुक्राणु का परिवहन रुक जाता है। * **ट्यूबेक्टॉमी (नसबंदी):** यह महिलाओं के लिए बंध्याकरण प्रक्रिया है। इस विधि में, पेट में या योनि के माध्यम से एक छोटे से चीरे के माध्यम से फैलोपियन ट्यूब के एक छोटे से हिस्से को हटा दिया जाता है या बांध दिया जाता है, जिससे अंडाणु का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है।
Q2. एम्नियोसेंटेसिस क्या है? इसकी प्रक्रिया, नैदानिक महत्व और इसके दुरुपयोग से जुड़े नैतिक/सामाजिक मुद्दों की चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### एम्नियोसेंटेसिस का परिचय\nएम्नियोसेंटेसिस एक प्रसवपूर्व नैदानिक तकनीक है जिसका उपयोग विकासशील भ्रूण में गुणसूत्र संबंधी असामान्यताओं और विकासात्मक विकारों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। ### एम्नियोसेंटेसिस की प्रक्रिया * अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन में माँ के पेट के माध्यम से डाली गई एक खोखली सुई का उपयोग करके भ्रूण के आसपास के एम्नियोटिक द्रव का एक छोटा नमूना निकाला जाता है। * द्रव में भ्रूण की कोशिकाएं होती हैं जिन्हें अलग किया जाता है, प्रयोगशाला में संवर्धित किया जाता है, और गुणसूत्र संबंधी विसंगतियों, आनुवंशिक विकारों और लिंग निर्धारण के लिए विश्लेषण किया जाता है। ### नैदानिक महत्व * यह जन्म से पहले आनुवंशिक विकारों और जन्मजात दोषों का समय रहते पता लगाने में मदद करता है। * यदि किसी गंभीर आनुवंशिक विकार का निदान किया जाता है, तो माता-पिता गर्भावस्था को जारी रखने के संबंध में सूचित निर्णय ले सकते हैं। ### दुरुपयोग और नैतिक/सामाजिक मुद्दे * **कन्या भ्रूण हत्या:** प्रसवपूर्व लिंग निर्धारण के लिए इसके व्यापक दुरुपयोग के कारण भारत में एम्नियोसेंटेसिस पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है (PC-PNDT अधिनियम)। * **भेदभाव:** यह लैंगिक पक्षपात को बढ़ावा देता है और समाज में प्राकृतिक लिंग अनुपात को बिगाड़ता है। * **नैतिक दुविधा:** हालांकि यह आनुवंशिक रोगों का पता लगाने के लिए एक जीवन रक्षक नैदानिक उपकरण है, इसके अनैतिक व्यावसायिक उपयोग ने गंभीर नैतिक और कानूनी चिंताएं बढ़ाई हैं।
Q3. यौन संचारित संक्रमण (STIs) क्या हैं? किन्हीं चार सामान्य STIs के नाम लिखिए और उनके कारक जीवों, लक्षणों और निवारक उपायों की चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### यौन संचारित संक्रमण (STIs) का परिचय\nयौन संभोग के माध्यम से प्रसारित होने वाले संक्रमणों या रोगों को सामूहिक रूप से यौन संचारित संक्रमण (STIs) या वैनरियन रोग (VD) कहा जाता है। ### सामान्य STIs, कारक एजेंट और लक्षण * **1. सूजाक (Gonorrhoea):** * *कारक जीव:*निसेरिया गोनोरिया (जीवाणु) * *लक्षण:* पेशाब के दौरान जलन, मूत्रमार्ग से मवाद का स्राव, महिलाओं में श्रोणि दर्द। * **2. उपदंश (Syphilis):** * *कारक जीव:* ट्रेपोनेमा पैलिडम (जीवाणु) * *लक्षण:* जननांगों पर दर्द रहित छाले, हथेलियों और तलवों पर चकत्ते, बुखार और थकान। * **3. जननांग दाद (Genital Herpes):** * *कारक जीव:* हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (HSV) * *लक्षण:* जननांगों पर दर्दनाक फफोले और छाले, खुजली। * **4. क्लैमाइडियासिस (Chlamydiasis):** * *कारक जीव:* क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (जीवाणु) * *लक्षण:* असामान्य योनि स्राव, दर्दनाक पेशाब, और निचले पेट में दर्द। ### निवारक उपाय * अज्ञात भागीदारों या कई भागीदारों के साथ सेक्स से बचना। * संभोग के दौरान हमेशा कंडोम का उपयोग करना। * किसी भी लक्षण को देखने पर शुरुआती पहचान और पूर्ण उपचार के लिए डॉक्टर से परामर्श करना। * व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित यौन आदतों का अभ्यास करना।
Q4. बांझ दंपतियों को गर्भधारण करने में मदद करने के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न सहायक जनन प्रौद्योगिकियों (ART) के तरीकों की व्याख्या कीजिए। IVF-ET, ZIFT और ICSI की विस्तार से चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### सहायक जनन प्रौद्योगिकियों (ART) का परिचय\nबांझपन असुरक्षित यौन सहवास के बावजूद बच्चे पैदा करने में असमर्थता है। हाल के वर्षों में, बांझ दंपतियों की मदद के लिए सहायक जनन प्रौद्योगिकियों (ART) के रूप में विशेष तकनीकों विकसित की गई हैं। ### 1. इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर (IVF-ET) * **अवधारणा:** आमतौर पर इसे टेस्ट-ट्यूब बेबी प्रोग्राम के रूप में जाना जाता है। पत्नी/दाता से अंडाणु और पति/दाता से शुक्राणु एकत्र किए जाते हैं और प्रयोगशाला की स्थिति में युग्मज (zygote) बनाने के लिए प्रेरित किए जाते हैं। * **प्रक्रिया:** युग्मज या शुरुआती भ्रूण (8 कोरक या ब्लास्टोमियर तक) को फैलोपियन ट्यूब में स्थानांतरित किया जा सकता है (ZIFT), या 8 से अधिक ब्लास्टोमियर वाले भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है (IUT - इंट्रा यूट्रीन ट्रांसफर)। ### 2. जायगोट इंट्रा-फैलोपियन ट्रांसफर (ZIFT) * **अवधारणा:** ZIFT, IVF का एक विशेष रूप है जहाँ निषेचन शरीर के बाहर प्रयोगशाला में होता है। * **प्रक्रिया:** हालांकि, भ्रूण को सीधे गर्भाशय में रखने के बजाय, युग्मज या शुरुआती भ्रूण (8 ब्लास्टोमियर चरण तक) को लेप्रोस्कोपिक तकनीकों का उपयोग करके सीधे फैलोपियन ट्यूब में स्थानांतरित किया जाता है। ### 3. इंट्रा-साइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) * **अवधारणा:** ICSI एक उन्नत प्रयोगशाला प्रक्रिया है जिसे पुरुष बांझपन के गंभीर मामलों, जैसे बहुत कम शुक्राणु संख्या या खराब गतिशीलता के इलाज के लिए डिज़ाइन किया गया है। * **प्रक्रिया:** इस पद्धति में, एक उच्च-शक्ति माइक्रोस्कोप के तहत एक परिपक्व अंडाणु के साइटोप्लाज्म में सीधे एक जीवित शुक्राणु को इंजेक्ट किया जाता है। एक बार निषेचन की पुष्टि हो जाने के बाद, परिणामी भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
Q5. गर्भनिरोधक के लिए उपलब्ध गर्भनिरोधक विधियों की विभिन्न श्रेणियों पर चर्चा करें, प्रत्येक श्रेणी के लिए एक उपयुक्त उदाहरण को उजागर करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### गर्भनिरोधक विधियों का परिचय\nएक आदर्श गर्भनिरोधक उपयोगकर्ता के अनुकूल, आसानी से उपलब्ध, प्रभावी और कम से कम या बिना किसी दुष्प्रभाव के होना चाहिए। यह किसी भी तरह से उपयोगकर्ता की यौन इच्छा, वासना और/या यौन क्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। गर्भनिरोधक विधियों की एक विस्तृत श्रृंखला वर्तमान में उपलब्ध है जिसे मोटे तौर पर कई श्रेणियों में समूوبद्ध किया जा सकता है। ### गर्भनिरोध की श्रेणियाँ 1. **प्राकृतिक/पारंपरिक विधियाँ:** - ये विधियाँ डिंब और शुक्राणु के मिलने की संभावनाओं से बचने के सिद्धांत पर काम करती हैं। - *उदाहरण:* **आवधिक संयम (Periodic Abstinence)**, जहाँ दंपत्ति मासिक धर्म चक्र के दिन 10 से 17 तक संभोग से दूर रहते हैं जब ओवुलेशन की उम्मीद होती है। 2. **बैरियर विधियाँ:** - इस विधि में, बैरियर की मदद से डिंब और शुक्राणु को शारीरिक रूप से मिलने से रोका जाता है। - *उदाहरण:* **कंडोम**, जो पतले रबर/लैटेक्स म्यान से बने अवरोध हैं जिनका उपयोग पुरुष में लिंग या महिला में योनि और गर्भाशय ग्रीवा को ढंकने के लिए किया जाता है, जो STIs को रोकने में भी मदद करता है। 3. **इंट्रा यूटेराइन डिवाइस (IUDs):** - इन उपकरणों को विशेषज्ञ डॉक्टरों या नर्सों द्वारा योनि के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है। - *उदाहरण:* **कॉपर-टी (CuT)**, जो तांबे के आयन जारी करता है जो शुक्राणु की गतिशीलता और शुक्राणु की निषेचन क्षमता को दबा देते हैं। 4. **मौखिक गर्भनिरोधक (Oral Pills):** - महिलाओं द्वारा उपयोग की जाने वाली प्रोजेस्टोजेन या प्रोजेस्टोजेन-एस्ट्रोजन संयोजनों की छोटी खुराक वाली गोलियाँ। - *उदाहरण:* **सहेली**, सेंटक्रोमैन युक्त एक गैर-स्टेरायडल मौखिक गोली, जिसे बहुत कम दुष्प्रभावों के साथ सप्ताह में एक बार लिया जाता है। 5. **शल्य चिकित्सा विधियाँ (नसबंदी):** - ये तकनीकें युग्मक परिवहन को अवरुद्ध करके पुरुष या महिला साथी में किसी भी और गर्भावस्था को रोकने के लिए अंतिम विधियाँ हैं। - *उदाहरण:* **वासएक्टोमी (Vasectomy)**, जहाँ पुरुषों में अंडकोष पर एक छोटे चीरे के माध्यम से वास डिफेरेंस के एक छोटे से हिस्से को हटा दिया जाता है या बांध दिया जाता है।
Q6. गर्भनिरोधक के लिए उपलब्ध विभिन्न गर्भनिरोधक विधियों की श्रेणियों पर चर्चा करें, जिसमें प्राकृतिक, अवरोधक और शल्य चिकित्सा विधियों पर प्रकाश डाला गया हो। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### गर्भनिरोध का परिचय\nएक आदर्श गर्भनिरोधक उपयोग में आसान, आसानी से उपलब्ध, प्रभावी और प्रतिवर्ती होना चाहिए जिसमें कम से कम या कोई दुष्प्रभाव न हो। यह किसी भी तरह से उपयोगकर्ता की यौन इच्छा, कामेच्छा और/या यौन क्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। जन्म नियंत्रण के विभिन्न तरीकों को व्यापक रूप से प्राकृतिक, अवरोधक, IUD, मौखिक गोलियों, इंजेक्टेबल, इम्प्लांट और शल्य चिकित्सा विधियों में वर्गीकृत किया गया है। ### गर्भनिरोधक विधियों की विस्तृत श्रेणियां 1. **प्राकृतिक / पारंपरिक विधियाँ:** - ये विधियाँ डिंब और शुक्राणु के मिलने की संभावना से बचने के सिद्धांत पर काम करती हैं। - **आवधिक संयम:** जोड़े मासिक धर्म चक्र के 10वें से 17वें दिन के बीच सहवास से बचते हैं जब डिंबग्रंथि की उम्मीद होती है। - **निकासी या सहवास बाधा:** पुरुष साथी वीर्यसेचन से ठीक पहले अपने लिंग को योनि से बाहर निकाल लेता है ताकि वीर्यसेचन से बचा जा सके। - **स्तनपान संबंधी आर्तवरोध (मासिक धर्म की अनुपस्थिति):** इस तथ्य पर आधारित है कि प्रसव के बाद तीव्र स्तनपान की अवधि के दौरान डिंबग्रंथि नहीं होती है। यह विधि केवल छह महीने की अधिकतम अवधि तक प्रभावी है। 2. **अवरोधक विधियाँ:** - इन तरीकों में, अवरोधों की मदद से डिंब और शुक्राणु को भौतिक रूप से मिलने से रोका जाता है। - **कंडोम:** पुरुषों में लिंग या महिलाओं में योनि और गर्भाशय ग्रीवा को ढकने के लिए उपयोग किए जाने वाले पतले रबर/लैटेक्स म्यान से बने अवरोध, जो STI को रोकने में भी मदद करते हैं। - **डायफ्राम, सर्वाइकल कैप और वॉल्ट:** रबर से बने अवरोध जिन्हें सहवास के दौरान गर्भाशय ग्रीवा को ढकने के लिए महिला जनन मार्ग में डाला जाता है। 3. **शल्य चिकित्सा विधियाँ (नसबंदी):** - इन्हें अंतिम विधियाँ भी कहा जाता है, इन्हें आगे किसी भी गर्भावस्था को रोकने के लिए अंतिम विधि के रूप में पुरुष/महिला साथियों के लिए सलाह दी जाती है। - **वाससेक्टमी (पुरुष नसबंदी):** पुरुषों में अंडकोश पर एक छोटे से चीरे के माध्यम से वास डिफेरेंस (शुक्र वाहिका) के एक छोटे से हिस्से को हटा दिया जाता है या बांध दिया जाता है। - **ट्यूबेक्टमी (महिला नसबंदी):** महिलाओं में पेट में एक छोटे से चीरे के माध्यम से या योनि के माध्यम से फैलोपियन ट्यूब के एक छोटे से हिस्से को हटा दिया जाता है या बांध दिया जाता है।
Q7. यौन संचारित संक्रमण (STI) क्या हैं? किन्हीं चार प्रमुख STI के नाम लिखिए और उनके कारक जीवों तथा सामान्य लक्षणों की व्याख्या कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### यौन संचारित संक्रमण (STI) का परिचय\nयौन संपर्क के माध्यम से प्रसारित होने वाले संक्रमणों या रोगों को सामूहिक रूप से यौन संचारित संक्रमण (STI) या गुप्त रोग (VD) या जनन मार्ग संक्रमण (RTI) कहा जाता है। ### विशेषताएँ और संचरण - संचरण मुख्य रूप से संक्रमित साथी के साथ यौन संपर्क, संक्रमित सुइयों, शल्य चिकित्सा उपकरणों को साझा करने, रक्त के आधान से, या संक्रमित माँ से भ्रूण में होता है। - शुरुआती लक्षण मामूली होते हैं, जिसमें खुजली, द्रव स्राव, हल्का दर्द और जननांग क्षेत्र में सूजन शामिल है। संक्रमित महिलाओं में शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं और इसलिए इनका पता नहीं चल पाता है। - अनुपचारित STI से श्रोणि सूजन की बीमारी (PID), गर्भपात, मृत जन्म, एक्टोपिक गर्भधारण, बांझपन और यहां तक कि जनन मार्ग के कैंसर जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। ### प्रमुख STI, कारक जीव और लक्षण 1. **सूजाक (Gonorrhoea):** - **कारक जीव:** *निसेरिया गोनोरिया* (जीवाणु) - **लक्षण:** मूत्रमार्ग की श्लेष्म झिल्ली की सूजन, पेशाब करते समय दर्द, और पुरुषों में मूत्रमार्ग से मवाद का स्राव। 2. **सिफलिस (Syphilis):** - **कारक जीव:** *ट्रेपोनेमा पैलिडम* (जीवाणु) - **लक्षण:** जननांगों पर दर्द रहित छाले (चांक्र) का विकास, त्वचा पर चकत्ते, बुखार और बाद के चरणों में आंतरिक अंगों को नुकसान। 3. ** जननांग दाद (Genital Herpes):** - **कारक जीव:** *हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस* (विषाणु - HSV-2) - **लक्षण:** बाहरी जननांगों, नितंबों और जांघों पर दर्दनाक द्रव से भरे छाले और घाव, साथ ही जलन की भावना। 4. **क्लेमाइडियासिस (Chlamydiasis):** - **कारक जीव:** *क्लेमाइडिया ट्रैकोमैटिस* (जीवाणु) - **लक्षण:** लिंग या योनि से स्राव, पेशाब करते समय जलन, और महिलाओं में पेट के निचले हिस्से में दर्द।
Q8. गर्भनिरोधक के लिए उपयोग की जाने वाली गर्भनिरोधक की विभिन्न श्रेणियों पर चर्चा करें, प्रत्येक श्रेणी में उनकी कार्रवाई के तरीके के साथ तरीकों के उदाहरण दें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### गर्भनिरोधक का परिचय\nएक आदर्श गर्भनिरोधक उपयोग में आसान, आसानी से उपलब्ध, प्रभावी होना चाहिए, और इसका न्यूनतम या कोई दुष्प्रभाव नहीं होना चाहिए। यह किसी भी तरह से उपयोगकर्ता की यौन इच्छा, कामेच्छा और/या यौन क्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। गर्भनिरोधक विधियों को उनके तंत्र और अनुप्रयोग के आधार पर व्यापक रूप से कई श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। ### गर्भनिरोधक विधियों की श्रेणियां 1. **प्राकृतिक / पारंपरिक विधियां** - **सिद्धांत:** ये विधियां अंडाणु और शुक्राणु के मिलने की संभावनाओं से बचने के सिद्धांत पर काम करती हैं। - **आवधिक संयम (Periodic Abstinence):** जोड़े मासिक धर्म चक्र के दिन 10 से 17 के बीच संभोग से बचते हैं जब डिंबक्षरण (ovulation) की उम्मीद होती है। - **स्क,लन रोक या कोइटस इंटरप्टस:** पुरुष साथी बाहर वीर्यपात करने के लिए संभोग के ठीक पहले योनि से अपना लिंग बाहर निकाल लेता है। - **स्तनपान संबंधी एमेनोरिया (Lactational Amenorrhea):** इस तथ्य पर आधारित है कि प्रसव के बाद तीव्र स्तनपान की अवधि के दौरान डिंबक्षरण नहीं होता है (6 महीने तक प्रभावी)। 2. **बाधा विधियां (Barrier Methods)** - **सिद्धांत:** इन तरीकों में, बाधाओं की मदद से अंडाणु और शुक्राणु को भौतिक रूप से मिलने से रोका जाता है। - **कंडोम:** पुरुषों में लिंग या महिलाओं में योनि और गर्भाशय ग्रीवा को ढंकने के लिए उपयोग किए जाने वाले पतले रबर/लैटेक्स म्यान से बने अवरोध (जैसे, निरोध)। ये STI से भी सुरक्षा करते हैं। - **डायफ्राम, सर्वाइकल कैप और वॉल्ट:** संभोग के दौरान गर्भाशय ग्रीवा को ढंकने के लिए महिला जनन मार्ग में डाली जाने वाली रबर से बनी बाधाएं। 3. **अंतर्गर्भाशयी उपकरण (IUDs)** - **सिद्धांत:** विशेषज्ञ डॉक्टरों/नर्सेस द्वारा योनि के माध्यम से गर्भाशय में डाले जाते हैं। वे गर्भाशय के भीतर शुक्राणु के फागोसाइटोसिस को बढ़ाते हैं, शुक्राणु की गतिशीलता को दबाते हैं, और निषेचन क्षमता को कम करते हैं। - **गैर-औषधि युक्त IUDs:** जैसे, लिप्स लूप। - **कॉपर-मोचन IUDs:** जैसे, CuT, Cu7, Multiload 375 (कॉपर आयन शुक्राणु की गतिशीलता को दबाते हैं)। - **हार्मोन-मोचन IUDs:** जैसे, Progestasert, LNG-20 (गर्भाशय को आरोपण के लिए अनुपयुक्त बनाते हैं और गर्भाशय ग्रीवा को शुक्राणुओं के प्रति प्रतिकूल बनाते हैं)। 4. **मुखीय गर्भनिरोधक गोलियां (OCPs)** - **सिद्धांत:** महिलाओं द्वारा गोलियों के रूप में उपयोग किए जाने वाले प्रोजेस्टोजेन या प्रोजेस्टोजेन-एस्ट्रोजन संयोजन की छोटी खुराक। - **क्रिया:** वे डिंबक्षरण और आरोपण को रोकती हैं और साथ ही शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकने के लिए गर्भाशय ग्रीवा के बलगम की गुणवत्ता को बदलती हैं (जैसे, सहेली)। 5. **सर्जिकल विधियां (नसबंदी)** - **सिद्धांत:** गर्भधारण को रोकने के लिए युग्मक परिवहन को अवरुद्ध करने वाली टर्मिनल विधियां। - **वेसेक्टोमी (Vasectomy):** पुरुषों में अंडकोश पर एक छोटे चीरे के माध्यम से वांस डिफेरेंस के एक छोटे से हिस्से को हटा दिया जाता है या बांध दिया जाता है। - **ट्यूबेक्टोमी (Tubectomy):** महिलाओं में पेट में एक छोटे चीरे या योनि के माध्यम से फैलोपियन ट्यूब के एक छोटे से हिस्से को हटा दिया जाता है या बांध दिया जाता है।
Q9. यौन संचारित संक्रमण (STIs) क्या हैं? चार प्रमुख STIs, उनके प्रेरक एजेंटों और निवारक उपायों का वर्णन करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### यौन संचारित संक्रमणों (STIs) का परिचय\nयौन संचारित संक्रमण (STIs), जिन्हें ऐतिहासिक रूप से गुप्त रोग (VD) या जनन मार्ग संक्रमण (RTIs) भी कहा जाता है, ऐसे संक्रमण हैं जो मुख्य रूप से संक्रमित साथी के साथ यौन संपर्क के माध्यम से फैलते हैं। ये बैक्टीरिया, वायरस, कवक और प्रोटोजोआ सहित विभिन्न प्रकार के रोगजनकों के कारण होते हैं। हालांकि यदि जल्दी पता चल जाए और ठीक से इलाज किया जाए तो कुछ STI पूरी तरह से इलाज योग्य हैं (जैसे जीवाणु संक्रमण), वायरल संक्रमण अक्सर आजीवन रहने वाली स्थितियां हैं जिन्हें एंटीवायरल उपचार के साथ प्रबंधित किया जाता है। ### प्रमुख यौन संचारित संक्रमण 1. **सूजाक (Gonorrhea)** - **प्रेरक एजेंट:** *नीसिरा गोनोरिया* (एक जीवाणु)। - **लक्षण:** मूत्रमार्ग की श्लेष्म झिल्ली की सूजन, दर्दनाक पेशाब, और पुरुषों में मूत्रमार्ग तथा महिलाओं में योनि से गाढ़ा, मवादयुक्त स्राव। - **जटिलताएं:** यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो यह महिलाओं में श्रोणि सूजन की बीमारी (PID) और बांझपन का कारण बन सकता है। 2. **सिफलिस (Syphilis)** - **प्रेरक एजेंट:** *ट्रेपोनेमा पैलिडम* (एक स्पिरोचेट जीवाणु)। - **लक्षण:** प्राथमिक चरण के दौरान संक्रमण की जगह पर 'चांकर' नामक दर्द रहित घाव की उपस्थिति, उसके बाद द्वितीयक चरण में चकत्ते, बुखार और सूजी हुई लसीका ग्रंथियां। - **जटिलताएं:** उन्नत चरण गंभीर तंत्रिका संबंधी क्षति, हृदय संबंधी जटिलताओं और यहां तक कि मौत का कारण बन सकते हैं। 3. **जननांग दाद (Genital Herpes)** - **प्रेरक एजेंट:** हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस - प्रकार 2 (HSV-2)। - **लक्षण:** बाहरी जननांगों, पेरिनेम और गुदा क्षेत्र पर दर्दनाक, द्रव से भरे छाले और अल्सर की उपस्थिति, जिसके साथ खुजली, जलन और फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। - **जटिलताएं:** वायरस तंत्रिका गुच्छों में सुप्त रहता है और आवर्ती भड़क उठने का कारण बनता है। यह लाइलाज है, हालांकि लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है। 4. **अर्जित इम्यूनोडिफीसिency सिंड्रोम (AIDS)** - **प्रेरक एजेंट:** ह्यूमन इम्यूनोएड्स वायरस (HIV), एक रेट्रोवाइरस। - **लक्षण:** कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली का क्रमिक विनाश, जिससे अवसरवादी संक्रमण, गंभीर वजन घटाना, पुराना दस्त और लंबे समय तक बुखार होता है। - **जटिलताएं:** यदि इलाज न किया जाए तो अंततः घातक होता है, क्योंकि शरीर हल्के संक्रमण से लड़ने की क्षमता भी खो देता है। ### निवारक उपाय\nSTIs के संचरण को रोकने के लिए, निम्नलिखित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को सख्ती से अपनाया जाना चाहिए: - अज्ञात साथियों या कई साथियों के साथ सेक्स से बचना। - संभोग के दौरान हमेशा बाधा विधियों, जैसे कंडोम का उपयोग करना। - शुरुआती लक्षणों को देखने पर तुरंत चिकित्सा परामर्श और जांच कराना। - इलाज योग्य STI का निदान होने पर उपचार का पूरा कोर्स करना।
Q10. संतानहीन दंपत्तियों को बच्चे पैदा करने में मदद करने के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न सहायक जनन प्रौद्योगिकियों (ART) की व्याख्या कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### सहायक जनन प्रौद्योगिकियों (ART) का परिचय\nसहायक जनन प्रौद्योगिकियां (ART) चिकित्सा प्रक्रियाओं का एक विशेष समूह हैं जिनका उपयोग बांझपन को दूर करने के लिए किया जाता है, जिससे ऐसे व्यक्ति या जोड़े जो स्वाभाविक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ हैं, सफल गर्भावस्था प्राप्त कर पाते हैं। बांझपन एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है जो लाखों जोड़ों को प्रभावित करती है, और जनन जीव विज्ञान में तेजी से हुई प्रगति ने क्रांतिकारी समाधान प्रदान किए हैं। ### ART की प्रमुख विधियाँ 1. **इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और भ्रूण स्थानांतरण (ET)** - **अवधारणा:** आमतौर पर 'परखनली शिशु' कार्यक्रम के रूप में जाना जाने वाला यह तरीका, प्रयोगशाला की स्थिति में मानव शरीर के बाहर डिंब (अंडाणु) और शुक्राणु को निषेचित करने से संबंधित है। - **प्रक्रिया:** महिला को सुपरओव्यूलेशन के लिए हार्मोनल उत्तेजना दी जाती है। शल्य चिकित्सा द्वारा अंडाणु निकाले जाते हैं और संवर्धन माध्यम में धोए गए शुक्राणुओं के साथ रखा जाता है। परिणामी युग्मज या शुरुआती भ्रूण को बाद में महिला के जनन मार्ग में स्थानांतरित कर दिया जाता है। - **युग्मज अंतः फैलोपियन स्थानांतरण (ZIFT):** यदि भ्रूण 8-ब्लास्टोमियर चरण में है, तो इसे सीधे फैलोपियन ट्यूब में स्थानांतरित किया जाता है। - **अंतः गर्भाशय स्थानांतरण (IUT):** यदि भ्रूण में 8 से अधिक ब्लास्टोमियर हैं, तो सफल आरोपण के लिए इसे सीधे गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। 2. **गैमेट इंट्रा फैलोपियन ट्रांसफर (GIFT)** - **अवधारणा:** यह तकनीक विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जो स्वयं अंडे का उत्पादन नहीं कर सकती हैं लेकिन निषेचन और बाद के विकास के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान कर सकती हैं। - **प्रक्रिया:** एक स्वस्थ दाता से एकत्र किए गए डिंब को दूसरी महिला की फैलोपियन ट्यूब में स्थानांतरित किया जाता है जो अंडे का उत्पादन नहीं कर सकती है, जहाँ यह साथी के शुक्राणु के साथ प्राकृतिक निषेचन और विकास से गुजरती है। 3. **इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI)** - **अवधारणा:** एक उन्नत प्रयोगशाला प्रक्रिया जिसका उपयोग विशेष रूप से गंभीर पुरुष कारक बांझपन, जैसे कि बहुत कम शुक्राणु गिनती या खराब शुक्राणु गतिशीलता के इलाज के लिए किया जाता है। - **प्रक्रिया:** उच्च आवर्धन के तहत एक विशेष सूक्ष्म सुई का उपयोग करके एक एकल, आकारिकी रूप से सामान्य शुक्राणु को सीधे एक परिपक्व डिंब के साइटोप्लाज्म में सावधानीपूर्वक इंजेक्शन दिया जाता है। 4. **कृत्रिम गर्भाधान (AI)** - **अवधारणा:** एक प्रजनन प्रक्रिया जहाँ वीर्य या तो स्वस्थ पति या एक नामित स्वस्थ दाता से एकत्र किया जाता है और कृत्रिम रूप से महिला जनन मार्ग में प्रवेश कराया जाता है। - **प्रकार:** - **कृत्रिम गर्भाधान - पति (AIH):** इसका उपयोग तब किया जाता है जब पति शारीरिक या चिकित्सीय स्थितियों के कारण सामान्य रूप से गर्भाधान नहीं कर सकता है। - **कृत्रिम गर्भाधान - दाता (AID):** इसका उपयोग तब किया जाता है जब पति का वीर्य पूरी तरह से बांझ हो या उसमें गंभीर आनुवंशिक दोष हों। - **इंट्रा-यूटरिन इनसेमिनेशन (IUI):** ग्रीवा अवरोध को दरकिनार करने और निषेचन की संभावना बढ़ाने के लिए वीर्य को सीधे गर्भाशय गुहा में प्रवेश कराया जाता है। ### निष्कर्ष\nइन विविध तकनीकों के लिए अत्यधिक सटीकता, अत्यधिक विशिष्ट नैदानिक प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों की आवश्यकता होती है। हालांकि वे बांझपन से पीड़ित जोड़ों को अत्यधिक मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक राहत प्रदान करते हैं, वे उच्च वित्तीय लागत, भावनात्मक तनाव और अतिरिक्त भ्रूण से संबंधित नैतिक बहसों जैसी चिंताओं के साथ भी आते हैं।
Q11. अंतःगर्भाशय उपकरणों (IUDs) और मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों के बीच कार्रवाई के उनके स्थल और तंत्र के संबंध में अंतर स्पष्ट कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): इंट्रा यूट्रीन डिवाइसेज़ (IUDs) और मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां दोनों जन्म नियंत्रण के अत्यधिक प्रभावी तरीके हैं, लेकिन वे क्रिया के अपने स्थल और शारीरिक तंत्र में काफी भिन्न हैं। IUDs को डॉक्टरों या विशेषज्ञ नर्सों द्वारा योनि के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है। उदाहरणों में गैर-औषधि युक्त IUDs (लिप्स लूप), कॉपर-मोचन IUDs (CuT, Cu7, मल्टीलोड 375), और हार्मोन-मोचन IUDs (प्रोजेस्टासरट, LNG-20) शामिल हैं। कार्रवाई का उनका प्राथमिक स्थल गर्भाशय है। कॉपर-मोचन IUDs गर्भाशय के भीतर शुक्राणुओं के फागोसाइटोसिस को बढ़ाते हैं, कॉपर आयन छोड़ते हैं जो शुक्राणु की गतिशीलता और उनकी निषेचन क्षमता को दबा देते हैं, जबकि हार्मोन-मोचन IUDs गर्भाशय को आरोपण के लिए अनुपयुक्त बनाते हैं और गर्भाशय ग्रीवा को शुक्राणुओं के प्रतिकूल बनाते हैं। दूसरी ओर, मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां (OCPs) महिलाओं द्वारा गोलियों के रूप में प्रतिदिन मौखिक रूप से ली जाती हैं। उनमें या तो अकेले प्रोजेस्टोजन या प्रोजेस्टोजन और एस्ट्रोजन का संयोजन होता है। कार्रवाई का उनका प्राथमिक स्थल हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-अंडाशय अक्ष है। OCPs डिंबक्षरण को रोकती हैं, पुटीय परिपक्वता को दबाती हैं, और शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकने के लिए गर्भाशय ग्रीवा के बलगम की गुणवत्ता को बदलती हैं, इस प्रकार स्थानीय रूप से के बजाय व्यवस्थित रूप से कार्य करती हैं।
Q12. सहायक जनन प्रौद्योगिकियों (ART) को समझाइए। भ्रूण स्थानांतरण के बाद इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) ZIFT से कैसे भिन्न है? 3 Marks
उत्तर (Answer): सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ (ART) विशेष तकनीकें हैं जिन्हें बांझ दंपतियों को बच्चे पैदा करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जब विभिन्न चिकित्सा कारणों से प्राकृतिक गर्भाधान विफल हो जाता है। इन तकनीकों में शरीर के बाहर युग्मकों और/या भ्रूणों को संभालना शामिल है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), जिसे लोकप्रिय रूप से 'टेस्ट-ट्यूब बेबी' कार्यक्रम के रूप में जाना जाता है, में पत्नी या दाता से अंडाणुओं और पति या दाता से शुक्राणुओं को निकालना शामिल है। इन युग्मकों को ज़ायगोट बनाने के लिए प्रयोगशाला की स्थिति में संलयन किया जाता है। भ्रूण स्थानांतरण (ET) के बाद IVF में, यदि शुरुआती भ्रूण में 8 ब्लास्टोमियर तक हैं, तो इसे ज़ायगोट इंट्राफैलोपियन ट्रांसफर (ZIFT) नामक प्रक्रिया के माध्यम से सीधे फैलोपियन ट्यूब में स्थानांतरित कर दिया जाता है। हालाँकि, यदि भ्रूण में 8 से अधिक ब्लास्टोमियर (जैसे कि मोरुला या ब्लास्टोसिस्ट) होते हैं, तो इसे इसके आगे के विकास को पूरा करने के लिए सीधे गर्भाशय (इंट्रा यूट्रीन ट्रांसफर या IUT) में स्थानांतरित किया जाता है। इस प्रकार, मूलभूत अंतर यह है कि ZIFT विशेष रूप से फैलोपियन ट्यूब में स्थानांतरित 8 ब्लास्टोमियर तक के भ्रूण को संभालता है, जबकि मानक IVF/IUT 8 से अधिक ब्लास्टोमियर वाले भ्रूण को सीधे गर्भाशय में स्थानांतरित कर सकता है।
Q13. यौन संचारित संक्रमण (STIs) क्या हैं? दो बैक्टीरियल और दो वायरल एसटीआई के नाम लिखिए, और सामान्य निवारक उपाय बताइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): यौन संचारित संक्रमण (STIs) ऐसे संक्रमण या बीमारियां हैं जो किसी संक्रमित साथी के साथ यौन संबंध बनाने के माध्यम से फैलती हैं। इन्हें सामूहिक रूप से वीनियल डिजीज (VD) या रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इंफेक्शन (RTI) के रूप में भी जाना जाता है। एसटीआई के लिए जिम्मेदार रोगजनकों में बैक्टीरिया, वायरस, कवक और प्रोटोजोआ शामिल हैं। बैक्टीरियल एसटीआई के उदाहरण सिफलिस और गोनोरिया हैं, जबकि वायरल एसटीआई में हेपेटाइटिस-बी और जननांग दाद (एचआईवी भी एक वायरल एसटीआई है) शामिल हैं। हेपेटाइटिस-बी, जननांग दाद और एचआईवी को छोड़कर, यदि जल्दी पता चल जाए और ठीक से इलाज किया जाए तो अधिकांश अन्य एसटीआई पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो जटिलताओं में पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID), गर्भपात, मृत जन्म, एक्टोपिक गर्भधारण, बांझपन और यहां तक कि प्रजनन पथ का कैंसर भी शामिल हो सकता है। एसटीआई से बचने के लिए सामान्य निवारक उपायों में शामिल हैं: (1) अज्ञात भागीदारों या कई भागीदारों के साथ सेक्स से बचना; (2) संभोग के दौरान हमेशा कंडोम का उपयोग करना; (3) संदेह के मामले में, शुरुआती पहचान और पूर्ण उपचार के लिए एक योग्य डॉक्टर से परामर्श करना; और (4) सुरक्षित यौन व्यवहार का अभ्यास करना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना।
Q14. गर्भपात के चिकित्सीय समापन (MTP) को समझाइए। भारत में यह किन परिस्थितियों में कानूनी रूप से स्वीकृत है? 3 Marks
उत्तर (Answer): गर्भपात का चिकित्सीय समापन (MTP) चिकित्सा या व्यक्तिगत कारणों से पूर्ण अवधि से पहले गर्भावस्था के जानबूझकर या स्वैच्छिक समापन को संदर्भित करता है। विश्व स्तर पर, हर साल लगभग 45 से 50 मिलियन एमटीपी किए जाते हैं, जो दुनिया में कुल गर्भधारण का पांचवां हिस्सा है। भारत में, सरकार ने इसके दुरुपयोग से बचने और महिला भ्रूण हत्या को रोकने के लिए कुछ कड़े प्रतिबंधों के साथ 1971 में एमटीपी को वैध बनाया। पहली तिमाही के दौरान, यानी गर्भावस्था के 12 सप्ताह तक एमटीपी को सुरक्षित माना जाता है, जबकि दूसरी तिमाही के गर्भपात अधिक जोखिम भरे और अक्सर घातक होते हैं। कानूनी रूप से, भारत में एमटीपी विशिष्ट परिस्थितियों में अनुमति दी जाती है: (1) जब गर्भावस्था को जारी रखने से गर्भवती महिला के जीवन को खतरा होता है या उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चोट पहुंचती है; (2) जब इस बात का पर्याप्त जोखिम होता है कि यदि बच्चा पैदा होता है, तो वह ऐसी शारीरिक या मानसिक असामान्यताओं से पीड़ित होगा जिससे वह गंभीर रूप से विकलांग हो जाएगा; (3) जब गर्भावस्था बलात्कार के कारण होती है; और (4) जब किसी विवाहित जोड़े द्वारा उपयोग की जाने वाली किसी भी गर्भनिरोधक विधि की विफलता के कारण गर्भावस्था विफल हो जाती है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे प्रमाणित क्लीनिकों में पंजीकृत चिकित्सा चिकित्सकों द्वारा किया जाना चाहिए।
Q15. उम्निकेन्टिसिस (उम्नित्सुच्छेदन या एम्नियोसेंटेसिस) क्या है? इसके संवैधानिक दर्जे और चिकित्सा अनुप्रयोगों के साथ-साथ इसके दुरुपयोग की चर्चा कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): एम्नियोसेंटेसिस (उम्नित्सुच्छेदन) एक प्रसवपूर्व नैदानिक तकनीक है जो विकासशील भ्रूण के चारों ओर के एम्नियोटिक द्रव में गुणसूत्र पैटर्न पर आधारित होती है। इस प्रक्रिया में, माँ के पेट के माध्यम से एक सुई का उपयोग करके एम्नियोटिक द्रव का एक छोटा सा नमूना निकाला जाता है। द्रव में मौजूद भ्रूण की कोशिकाओं को संवर्धित किया जाता है और डाउन सिंड्रोम, टर्नर सिंड्रोम, सिकल-सेल एनीमिया, फेनिलकेटोनुरिया और अन्य आनुवंशिक विकारों जैसी गुणसूत्र संबंधी असामान्यताओं के लिए विश्लेषण किया जाता है। यह भ्रूण के लिंग का भी निर्धारण कर सकता है। प्राथमिक चिकित्सा अनुप्रयोग घातक आनुवंशिक रोगों या विकासात्मक असामान्यताओं का शीघ्र पता लगाना है, जिससे माता-पिता को गंभीर असामान्यताएं पाए जाने पर गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने का विकल्प मिलता है। हालाँकि, इस तकनीक का महिला भ्रूण हत्या के लिए गंभीर दुरुपयोग किया गया है, जहाँ भ्रूण के लिंग का निर्धारण किया जाता है, और यदि यह एक महिला है, तो गर्भावस्था को अवैध रूप से समाप्त कर दिया जाता है। इस गंभीर सामाजिक बुराई और विकृत लिंगानुपात का मुकाबला करने के लिए, भारत सरकार ने चिकित्सा समापन (एमटीपी) अधिनियम और गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम को अधिनियमित किया, जिससे एम्नियोसेंटेसिस के माध्यम से लिंग निर्धारण को एक कानूनी रूप से दंडनीय अपराध बना दिया गया।