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वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

Subject: जीव विज्ञान | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 जीव विज्ञान

#### अध्याय: वंशागति और विविधता के सिद्धांत (Principles of Inheritance and Variation) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स


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### 1. मुख्य शब्दावली (Key Terminology)


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### 2. मेंडल के वंशागति के नियम (Mendel's Laws of Inheritance)

ग्रेगर जोहान मेंडल (Gregor Johann Mendel) को आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर प्रयोग किए।


#### क) प्रभाविता का नियम (Law of Dominance):


#### ख) पृथक्करण का नियम या युग्मकों की शुद्धता का नियम (Law of Segregation):


#### ग) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment):


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### 3. महत्वपूर्ण अनुपात और क्रासेस (Important Ratios and Crosses)


(9 गोल-पीले, 3 झुर्रीदार-पीले, 3 गोल-हरे, 1 झुर्रीदार-हरे)


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### 4. मेंडेलियन विचलन / अपूर्ण प्रभाविता और सहप्रभाविता (Incomplete Dominance & Codominance)



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### 5. बहुविकल्पिता और बहुजीनी वंशागति (Multiple Allelism & Polygenic Inheritance)



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### 6. लिंग निर्धारण (Sex Determination)


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### 7. वंशागति के गुणसूत्र सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance)

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### 8. लिंकेज और पुनर्संयोजन (Linkage and Recombination)

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### 9. आनुवंशिक विकार / रोग (Genetic Disorders)

#### क) मेंडेलियन विकार (Mendelian Disorders - एकल जीन उत्परिवर्तन):

1. हीमोफीलिया (Hemophilia): लिंग-सहसंलग्न अप्रभावी रोग (रक्त का थक्का नहीं जमता)।

2. दात्र कोशिका एनीमिया (Sickle-cell Anemia): ऑटोसोमल अप्रभावी रोग (आरबीसी का हँसिए के आकार का होना)।

3. फिनाइलकीटोन्यूरिया (Phenylketonuria): उपापचय संबंधी ऑटोसोमल विकार (मानसिक मंदता)।


#### ख) गुणसूत्रीय विकार (Chromosomal Disorders - गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन):

1. डाउन सिंड्रोम (Down's Syndrome): 21वें गुणसूत्र की ट्राइसॉमी (Trisomy)। लक्षण: मंदबुद्धि, चौड़ा माथा, मुँह खुला रहना।

2. क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome): पुरुषों में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र (44 + XXY)। लक्षण: स्त्रैण लक्षण विकसित होना (जैसे- स्तनों का विकास / गाइनेकोमास्टिया)।

3. टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome): महिलाओं में एक X गुणसूत्र की कमी (44 + XO)। लक्षण: बंध्य (Sterile) मादा, अल्प विकसित अंडाशय।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 वंशागति और विविधता के सिद्धांत
Overview
आनुवंशिकी का परिचय वंशागति (Inheritance) विविधता (Variation) मेंडल के वंशागति के नियम ग्रेगर जॉन मेंडल का कार्य मटर के पौधे का चयन (पिसम सेटिवम) प्रभाविता का नियम पृथक्करण का नियम (युग्मकों की शुद्धता) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम मेंडेलियन वंशागति के अपवाद अपूर्ण प्रभाविता (मिराबिलिस जलापा) सह-प्रभाविता (ABO रक्त समूह) बहुविकल्पिता (Multiple Alleles) पॉलीजेनिक वंशागति (त्वचा का रंग) क्रोमोसोमल सिद्धांत (गुणसूत्रीय सिद्धांत) सटन और बोवेरी का सिद्धांत लिंकेज (सहसंलग्नता) और पुनर्संयोजन मॉर्गन का ड्रोसोफिला पर प्रयोग लिंग निर्धारण (Sex Determination) मनुष्यों में (XY प्रकार) पक्षियों में (ZZ-ZW प्रकार) कीटों में (XX-XO प्रकार) मधुमक्खियों में (हेप्लो-डिप्लोइड प्रणाली) उत्परिवर्तन (Mutation) बिंदु उत्परिवर्तन क्रोमोसोमल असामान्यताएं आनुवंशिक विकार (Genetic Disorders) वंशागत विकार (Pedigree Analysis) हीमोफीलिया सिकल सेल एनीमिया फेनिलकीटोन्यूरिया गुणसूत्रीय विकार डाउन सिंड्रोम टर्नर सिंड्रोम क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. उपयुक्त द्वisaसंकर क्रॉस (dihybrid cross) की सहायता से मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) को समझाइए। साथ ही $F_2$ पीढ़ी के दृश्यप्ररूप (phenotypic) और जीनीप्ररूप (genotypic) अनुपातों की गणना कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम \nमेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) आनुवंशिकी का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसके अनुसार, 'जब दो या दो से अधिक लक्षणों के जोड़ों को किसी संकर (hybrid) में एक साथ लाया जाता है, तो युग्मक निर्माण के समय एक लक्षण का युग्मविकल्पी (allele) दूसरे लक्षण के युग्मविकल्पी से पूरी तरह स्वतंत्र रूप से अलग होता है।' इसका अर्थ यह है कि एक जीन की वंशागति दूसरे जीन की वंशागति को प्रभावित नहीं करती है। ### द्विसंकर क्रॉस द्वारा स्पष्टीकरण\nइस नियम को समझने के लिए, मेंडल ने पीले और गोल बीज वाले पौधे (YYRR) का संकरण हरे और झुर्रीदार बीज वाले पौधे (yyrr) के साथ कराया। - **जनक (Parents):** पीला गोल (YYRR) $\times$ हरा झुर्रीदार (yyrr) - **$F_1$ पीढ़ी:** सभी पौधे विषमयुग्मजी (YyRr) थे और पीले व गोल बीज वाले थे। \nजब $F_1$ पीढ़ी का स्वपरागण कराया जाता है (YyRr $\times$ YyRr), तो $F_2$ पीढ़ी प्राप्त होती है। $F_1$ में युग्मक निर्माण के दौरान, बीज के रंग (Y/y) और आकार (R/r) के कारक स्वतंत्र रूप से विसियोजित होते हैं। परिणामस्वरूप, प्रत्येक जनक से चार प्रकार के युग्मक बनते हैं: **YR, Yr, yR, और yr**। ### पुनेट स्क्वायर ($F_2$ पीढ़ी का विश्लेषण) - **दृश्यप्ररूप अनुपात (Phenotypic Ratio):** - पीला और गोल = 9 - पीला और झुर्रीदार = 3 - हरा और गोल = 3 - हरा और झुर्रीदार = 1 अतः **दृश्यप्ररूप अनुपात 9:3:3:1** होता है। - **जीनीप्ररूप अनुपात (Genotypic Ratio):** - 1:2:2:4:1:2:1:2:1 के अनुपात में 9 अलग-अलग जीनोटाइप प्राप्त होते हैं। ### नियम का महत्व 1. यह पादप प्रजनन में नए लक्षणों के संयोजन को उत्पन्न करने में सहायक है। 2. यह लैंगिक जनन करने वाले जीवों में आनुवंशिक विविधता को स्पष्ट करता है।
Q2. एक निश्चित पौधे की प्रजाति में, लाल फूल का रंग (R) सफेद फूल के रंग (r) पर पूरी तरह प्रभावी होता है। यदि एक विषमयुग्मजी लाल फूल वाले पौधे का संकरण एक समयुग्मजी सफेद फूल वाले पौधे से कराया जाता है, तो संतति की अपेक्षित लक्षणीय और जीनीय आवृत्तियों की गणना कीजिए। पुनेट स्क्वायर का उपयोग करके क्रॉस के सभी चरणों को दर्शाइए। 4 Marks
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण समस्या समाधान और गणना **1. माता-पिता के जीनोटाइप की पहचान करना:** * विषमयुग्मजी लाल फूल वाला पौधा: चूंकि यह विषमयुग्मजी है और लाल प्रभावी है, इसलिए इसका जीनोटाइप **Rr** होना चाहिए। * समयुग्मजी सफेद फूल वाला पौधा: चूंकि यह समयुग्मजी अप्रभावी है (सफेद, लाल पर अप्रभावी है), इसलिए इसका जीनोटाइप **rr** होना चाहिए। **2. संभावित युग्मकों का निर्धारण:** * जनक 1 (Rr) दो प्रकार के युग्मक उत्पन्न करता है: **R** और **r** (प्रत्येक 50% के समान अनुपात में)। * जनक 2 (rr) केवल एक प्रकार का युग्मक उत्पन्न करता है: **r** (100%)। **3. पुनेट स्क्वायर का निर्माण:** | युग्मक | R (50%) | r (50%) | |---|---|---| | **r (100%)** | Rr (लाल) | rr (सफेद) | **4. जीनीय और लक्षणीय आवृत्तियों की गणना:** * **संतति के जीनोटाइप:** - 50% या 1/2 **Rr** (विषमयुग्मजी लाल) - 50% या 1/2 **rr** (समयुग्मजी सफेद) - **जीनीय अनुपात:** 1 Rr : 1 rr (या 1:1) * **संतति के फीनोटाइप:** - 50% या 1/2 लाल फूल - 50% या 1/2 सफेद फूल - **लक्षणीय अनुपात:** 1 लाल : 1 सफेद (या 1:1) **निष्कर्ष:** अपेक्षित संतति जीनोटाइप और फीनोटाइप दोनों के लिए 1:1 का अनुपात प्रदर्शित करेगी।
Q3. लाल फूलों वाले समयूग्मजी लंबे मटर के पौधे (TTRR) का संकरण सफेद फूलों वाले समयूग्मजी बौने पौधे (ttrr) से कराया जाता है। F1 पीढ़ी के जीनोटाइप और फिनोटाइप को निर्धारित कीजिए। यदि F1 पीढ़ी का स्व-परागण कराया जाता है, तो F2 पीढ़ी के फिनोटाइपिक अनुपात की गणना कीजिए और वंशागति पैटर्न को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### समस्या और दिए गए आंकड़े * **जनक 1 (समयूग्मजी लंबा और लाल):** जीनोटाइप = $\text{TTRR}$ * **जनक 2 (समयूग्मजी बौना और सफेद):** जीनोटाइप = $\text{ttrr}$ ### चरण 1: युग्मक निर्माण * **जनक 1 (TTRR):** युग्मक = **TR** * **जनक 2 (ttrr):** युग्मक = **tr** ### चरण 2: F1 पीढ़ी का निर्धारण * **संकरण:** $\text{TR} \times \text{tr}$ * **F1 जीनोटाइप:** $\text{TtRr}$ * **F1 फिनोटाइप:** चूँकि 'T' (लंबापन) और 'R' (लाल रंग) प्रभावी लक्षण हैं, F1 पीढ़ी के सभी पौधे **लंबे और लाल फूलों वाले** होंगे। ### चरण 3: F2 पीढ़ी की गणना (स्व-परागण) * **F1 संकरण:** $\text{TtRr} \times \text{TtRr}$ * **युग्मक:** **TR, Tr, tR, tr** (प्रत्येक 25% अनुपात में) ### चरण 4: फिनोटाइपिक अनुपात की गणना * **लंबे और लाल (T_R_):** 9 * **लंबे और सफेद (T_rr):** 3 * **बौने और लाल (ttR_):** 3 * **बौने और सफेद (ttrr):** 1 ### चरण 5: अंतिम फिनोटाइपिक अनुपात $$\text{फिनोटाइपिक अनुपात} = 9 : 3 : 3 : 1$$ ### वंशागति पैटर्न की व्याख्या\nयह मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का पालन करता है। ऊंचाई और फूल के रंग के युग्मक स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं।
Q4. मनुष्य में गुणसूत्र विकारों (Chromosomal Disorders) को विशिष्ट उदाहरणों के साथ समझाइए। डाउन सिंड्रोम, टर्नर सिंड्रोम और क्लाइंटफेल्टर सिंड्रोम का विस्तार से वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मनुष्य में गुणसूत्र विकार \nगुणसूत्र विकार एक या एक से अधिक गुणसूत्रों की अनुपस्थिति, अधिकता या असामान्य व्यवस्था के कारण होते हैं। यह मुख्य रूप से कोशिका विभाजन के दौरान क्रोमैटिड्स के अलग न हो पाने (non-disjunction) के कारण होता है। ### 1. डाउन सिंड्रोम (Down's Syndrome) * **कारण:** यह 21वें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति (Trisomy of 21) के कारण होता है। कुल गुणसूत्रों की संख्या 47 हो जाती है। * **लक्षण व विशेषताएं:** * प्रभावित व्यक्ति का कद छोटा और सिर गोल होता है। * जीभ खांचेदार और मुंह अक्सर खुला रहता है। * हथेली चौड़ी होती है जिस पर विशिष्ट रेखा (simian crease) होती है। * मानसिक और शारीरिक विकास अवरुद्ध होता है। ### 2. टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome) * **कारण:** यह विकार एक X गुणसूत्र की अनुपस्थिति ($X0$, कुल 45 गुणसूत्र) के कारण होता है और यह महिलाओं में पाया जाता है। * **लक्षण व विशेषताएं:** * ऐसी स्त्रियां बांझ (sterile) होती हैं क्योंकि उनके अंडाशय अविकसित होते हैं। * द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का अभाव होता है। * छोटा कद, चौड़ी छाती और गर्दन पर त्वचा की तह (webbed neck) होती है। ### 3. क्लाइंटफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome) * **कारण:** यह विकार एक अतिरिक्त X गुणसूत्र के जुड़ने ($47, XXY$) के कारण होता है और पुरुषों में पाया जाता है। * **लक्षण व विशेषताएं:** * शरीर की सामान्य बनावट पुरुषों जैसी होती है, लेकिन स्तनों का विकास (Gynaecomastia) जैसे स्त्री लक्षण भी प्रकट होते हैं। * ऐसे पुरुष बांझ होते हैं।
Q5. एक निश्चित पौधे की प्रजाति में, लंबापन (T) बौनेपन (t) पर प्रभावी है, और लाल फूल का रंग (R) सफेद फूल के रंग (r) पर प्रभावी है। एक द्विसंकर विषमयुग्मजी लंबे, लाल फूल वाले पौधे (TtRr) का सम युग्मजी बौने, सफेद फूल वाले पौधे (ttrr) के साथ परीक्षण क्रॉस (Test cross) कराया जाता है। स्वतंत्र अपव्यूहन मानते हुए, संतति की अपेक्षित लक्षणप्ररूप और जीनप्ररूप आवृत्तियों की गणना करें। सभी मध्यवर्ती चरण और गणनाएँ दिखाएं। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### समस्या का विश्लेषण - **क्रॉस का प्रकार:** द्विसंकर विषमयुग्मजी और द्विरूप अप्रभावी समयुग्मजी के बीच टेस्ट क्रॉस। - **जनक 1 का जीनप्ररूप:** $TtRr$ - **जनक 2 (टेस्टर्स) का जीनप्ररूप:** $ttrr$ ### चरण 1: जनक 1 ($TtRr$) द्वारा उत्पादित युग्मकों का निर्धारण\nस्वतंत्र अपव्यूहन मानते हुए, विषमयुग्मजी जनक $TtRr$ समान अनुपात (प्रत्येक 25% या 1/4) में चार प्रकार के युग्मक उत्पन्न करेगा: 1. $TR$ 2. $Tr$ 3. $tR$ 4. $tr$ ### चरण 2: जनक 2 ($ttrr$) द्वारा उत्पादित युग्मक\nअप्रभावी जनक समयुग्मजी है और केवल एक ही प्रकार का युग्मक बनाएगा: $tr$ (100%)। ### चरण 3: क्रॉस संयोजन $TtRr$ के 4 युग्मकों का $ttrr$ के एकल युग्मक ($tr$) के साथ संयोजन: 1. $TR \times tr \rightarrow TtRr$ 2. $Tr \times tr \rightarrow Ttrr$ 3. $tR \times tr \rightarrow ttRr$ 4. $tr \times tr \rightarrow ttrr$ ### चरण 4: जीनप्ररूप आवृत्तियों की गणना\nचूंकि प्रत्येक युग्मक $\frac{1}{4}$ प्रायिकता के साथ बनता है, संतति के जीनप्ररूप समान अनुपात में होंगे: - **$TtRr$ (लंबा, लाल):** $\frac{1}{4}$ या 25% - **$Ttrr$ (लंबा, सफेद):** $\frac{1}{4}$ या 25% - **$ttRr$ (बौना, लाल):** $\frac{1}{4}$ या 25% - **$ttrr$ (बौना, सफेद):** $\frac{1}{4}$ या 25% ### चरण 5: लक्षणप्ररूप आवृत्तियों की गणना\nप्रत्येक जीनप्ररूप एक अद्वितीय लक्षणप्ररूप से मेल खाता है: 1. **लंबा और लाल ($TtRr$):** 25% 2. **लंबा और सफेद ($Ttrr$):** 25% 3. **बौना और लाल ($ttRr$):** 25% 4. **बौना और सफेद ($ttrr$):** 25% **अंतिम अनुपात:** द्विसंकर टेस्ट क्रॉस का लक्षणप्ररूप और जीनप्ररूप अनुपात **1 : 1 : 1 : 1** है।
Q6. वंशागति का गुणसूत्र सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance) क्या है? इसकी मुख्य विशेषताओं की चर्चा कीजिए और समझाइए कि यह मेंडल के आनुवंशिकी के सिद्धांतों से कैसे मेल खाता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### वंशागति के गुणसूत्र सिद्धांत का परिचय 1902 में वाल्टर सटन और थियोडोर बोवेरी द्वारा स्वतंत्र रूप से प्रतिपादित, वंशागति के गुणसूत्र सिद्धांत ने गुणसूत्रों को आनुवंशिक सामग्री के वाहक के रूप में पहचाना। उन्होंने ध्यान दिया कि अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान गुणसूत्रों का व्यवहार मेंडल के कारकों (जीनों) के व्यवहार के समानांतर होता है। सटन और बोवेरी ने तर्क दिया कि गुणसूत्रों की एक जोड़ी का युग्मन और पृथक्करण उनके द्वारा ले जाने वाले कारकों की एक जोड़ी के पृथक्करण की ओर ले जाएगा, इस प्रकार मेंडेलियन आनुवंशिकी के लिए एक भौतिक आधार प्रदान करेगा। ### सिद्धांत की मुख्य विशेषताएं - **जीन और गुणसूत्रों के बीच समानता:** द्विगुणित कायिक कोशिकाओं में जीन और गुणसूत्र दोनों जोड़े में होते हैं। - **युग्मक निर्माण के दौरान व्यवहार:** समजात गुणसूत्र अर्धसूत्रीविभाजन की एनाफेज I के दौरान अलग हो जाते हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे युग्मक निर्माण के दौरान किसी जीन के एलील अलग होते हैं। - **स्वतंत्र अपव्यूहन:** युग्मकों में समजात गुणसूत्रों की एक जोड़ी का वितरण समजात गुणसूत्रों के किसी अन्य जोड़े से स्वतंत्र होता है, जो मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को दर्शाता है। - **द्विगुणित संख्या की बहाली:** निषेचन से युग्मज में गुणसूत्रों की द्विगुणित संख्या के साथ-साथ जीनों की युग्मित स्थिति भी बहाल हो जाती है। ### मेंडल के सिद्धांतों के साथ सहसंबंध 1. **पृथक्करण के नियम का सहसंबंध:** मेंडल ने कहा था कि युग्मक निर्माण के दौरान एलील जोड़े अलग हो जाते हैं। सटन और बोवेरी ने प्रदर्शित किया कि अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान समजात गुणसूत्र अलग हो जाते हैं, जिससे एलील अलग हो जाते हैं। 2. **स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का सहसंबंध:** मेंडल का दूसरा नियम कहता है कि विभिन्न जीन स्वतंत्र रूप से अपव्यूहित होते हैं। साइटोलॉजिकल प्रेक्षणों से साबित हुआ कि गैर-समजात गुणसूत्र अर्धसूत्रीविभाजन I के दौरान मेटाफेज प्लेट पर स्वतंत्र रूप से संरेखित और पृथक् होते हैं, जो स्वतंत्र अपव्यूहन के पीछे के आणविक और सेलुलर तंत्र को समझाते हैं। ### प्रायोगिक सत्यापन\nबाद में, थॉमस हंट मॉर्गन और उनके सहयोगियों ने *ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर* (फल मक्खी) पर अपने काम के माध्यम से इस सिद्धांत के लिए प्रायोगिक प्रमाण प्रदान किया, जिसमें लिंकेज और पुनर्संयोजन जैसी घटनाओं की खोज की गई, जिसने आनुवंशिकी के गुणसूत्र आधार को और अधिक मजबूत किया।
Q7. गार्डन मटर के पौधे में, लंबा पौधा (T) बौने पौधे (t) पर प्रभावी है, और बैंगनी फूल का रंग (P) सफेद फूल के रंग (p) पर प्रभावी है। एक डाईहाइब्रिड विषमयुग्मजी लंबे और बैंगनी फूल वाले पौधे (TtPp) का दोहरे अप्रभावी बौने और सफेद फूल वाले पौधे (ttpp) के साथ टेस्ट क्रॉस कराया जाता है। संतति के अपेक्षित फेनोटाइपिक और जीनोटाइपिक अनुपातों की गणना कीजिए, और पूर्ण चरण-दर-चरण कार्यप्रणाली के साथ क्रॉस को दर्शाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): एक डाईहाइब्रिड विषमयुग्मजी व्यक्ति और एक दोहरे अप्रभावी जनक से जुड़े टेस्ट क्रॉस की संतति का निर्धारण करने के लिए, आइए चरण-दर-चरण जीनोटाइप का विश्लेषण करें। **चरण 1: जनकों के जीनोटाइप को परिभाषित करें** - **जनक 1 (डाईहाइब्रिड विषमयुग्मजी):** TtPp (लंबी और बैंगनी फूल) - **जनक 2 (दोहरा अप्रभावी टेस्ट क्रॉस जनक):** ttpp (बौने और सफेद फूल) **चरण 2: प्रत्येक जनक द्वारा उत्पादित युग्मकों का निर्धारण करें** - **जनक 1 (TtPp):** चूंकि अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान स्वतंत्र अपव्यूहन होता है, विषमयुग्मजी जनक समान अनुपात में चार प्रकार के युग्मक उत्पन्न करता है (प्रत्येक 25%): 1. TP 2. Tp 3. tP 4. tp - **जनक 2 (ttpp):** दोनों लक्षणों के लिए सम्यग्मजी अप्रभावी होने के कारण, यह जनक केवल एक प्रकार का युग्मक उत्पन्न करता है: 1. tp **चरण 3: टेस्ट क्रॉस पुनेट स्क्वायर का निर्माण करें**\nजनक 1 के युग्मकों को जनक 2 के युग्मक के साथ पार कराना: - TtPp × tp = TtPp (लंबा, बैंगनी) - Ttpp × tp = Ttpp (लंबा, सफेद) - ttPp × tp = ttPp (बौना, बैंगनी) - ttpp × tp = ttpp (बौना, सफेद) **चरण 4: संतति के जीनोटाइप और फेनोटाइप की गणना करें**\nपुनेट स्क्वायर से, हम समान अनुपात में चार अलग-अलग जीनोटाइप और फेनोटाइप प्राप्त करते हैं (1:1:1:1 अनुपात): 1. **TtPp:** लंबा और बैंगनी फूल (1/4 या 25%) 2. **Ttpp:** लंबा और सफेद फूल (1/4 या 25%) 3. **ttPp:** बौना और बैंगनी फूल (1/4 या 25%) 4. **ttpp:** बौना और सफेद फूल (1/4 या 25%) **अंतिम निष्कर्ष:** - **फेनोटाइपिक अनुपात:** 1 लंबा, बैंगनी : 1 लंबा, सफेद : 1 बौना, बैंगनी : 1 बौना, सफेद (अर्थात **1:1:1:1**) - **जीनोटाइपिक अनुपात:** 1 TtPp : 1 Ttpp : 1 ttPp : 1 ttpp (अर्थात **1:1:1:1**)
Q8. लाल फूलों वाले समयुग्मजी लंबे पौधे (TTRR) का सफेद फूलों वाले समयुग्मजी बौने पौधे (ttrr) से क्रॉस कराया जाता है। F1 जीनोटाइप, F2 फिनोटाइपिक अनुपात निर्धारित करें और समझाएं कि मेंडल के डाईहाइब्रिड क्रॉस के सिद्धांत एलील के स्वतंत्र अपव्यूहन पर कैसे लागू होते हैं। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### समस्या का विश्लेषण और चरण-दर-चरण समाधान **चरण 1: जनक जीनोटाइप और फिनोटाइप की पहचान करें** - जनक 1 (लंबा, लाल फूल): समयुग्मजी प्रभावी = `TTRR` - जनक 2 (बौना, सफेद फूल): समयुग्मजी अप्रभावी = `ttrr` **चरण 2: जनकों द्वारा उत्पादित युग्मकों का निर्धारण** - जनक `TTRR` प्रकार के युग्मक उत्पन्न करता है: `TR` - जनक `ttrr` प्रकार के युग्मक उत्पन्न करता है: `tr` **चरण 3: F1 पीढ़ी का जीनोटाइप और फिनोटाइप निर्धारित करें** - युग्मकों `TR` और `tr` के संलयन से F1 पीढ़ी बनती है। - F1 जीनोटाइप: `TtRr` (लाल फूलों के साथ विषमयुग्मजी लंबा)। - F1 फिनोटाइप: लाल फूलों वाले लंबे पौधे। **चरण 4: F1 पीढ़ी का स्व-परागण** - F1 क्रॉस: `TtRr` × `TtRr` - F1 पौधों द्वारा उत्पादित युग्मक: `TR`, `Tr`, `tR`, `tr` (प्रत्येक 25% या 1/4 आवृत्ति में)। **चरण 5: पुनेट स्क्वायर / F2 पीढ़ी की गणना** `TtRr` स्व-परागण के लिए 16-वर्ग पुनेट ग्रिड का उपयोग करना। **चरण 6: F2 फिनोटाइपिक श्रेणियां और अनुपात** - लंबा और लाल (`T_R_`): 9 पौधे - लंबा और सफेद (`T_rr`): 3 पौधे - बौना और लाल (`ttR_`): 3 पौधे - बौना और सफेद (`ttrr`): 1 पौधा **अंतिम F2 फिनोटाइपिक अनुपात:** `9 : 3 : 3 : 1` ### स्वतंत्र अपव्यूहन पर निष्कर्ष\nऊंचाई के एलील (`T/t`) का पृथक्करण फूल के रंग के एलील (`R/r`) के पृथक्करण से पूरी तरह स्वतंत्र होता है।
Q9. गुणसूत्र संबंधी विकार (Chromosomal disorders) क्या हैं? डाउन सिंड्रोम, क्लेनफेल्टर सिंड्रोम और टर्नर सिंड्रोम को उनके कारणों और विशिष्ट लक्षणों के साथ समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### गुणसूत्र संबंधी विकारों का परिचय\nगुणसूत्र संबंधी विकार वे आनुवंशिक स्थितियां हैं जो एक या अधिक गुणसूत्रों की अनुपस्थिति, अधिकता या असामान्य व्यवस्था के कारण होती हैं। कोशिका विभाजन चक्र के दौरान क्रोमैटिड्स के पृथक्करण में विफलता के परिणामस्वरूप गुणसूत्रों का लाभ या हानि होती है, जिसे एयूप्लॉइड और पॉलीप्लॉइड कहा जाता है। ### 1. डाउन सिंड्रोम (Down's Syndrome) - **कारण:** यह गुणसूत्र 21 की एक अतिरिक्त प्रति की उपस्थिति के कारण होता है। इसे गुणसूत्र 21 की ट्राइसॉमी कहा जाता है। - **लक्षण:** मानसिक विकास मंदित होता है, कद छोटा होता है, जीभ खांचेदार होती है, मुंह खुला रहता है, चौड़ी हथेली होती है और जननांग अविकसित होते हैं। ### 2. क्लेनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome) - **कारण:** यह पुरुषों में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र की उपस्थिति के कारण होता है, जिससे 47, XXY कैरियोटाइप बनता है। - **लक्षण:** प्रभावित पुरुषों में कुल मिलाकर मर्दाना विकास होता है, लेकिन कुछ स्त्री लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे स्तनों का विकास (गाइनेकोमास्टिया), लंबा कद, शरीर पर कम बाल और वे बांझ होते हैं। ### 3. टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome) - **कारण:** यह महिलाओं में X गुणसूत्रों में से एक की अनुपस्थिति के कारण होता है, जिससे 45, XO कैरियोटाइप बनता है। - **लक्षण:** प्रभावित महिलाएं बांझ होती हैं क्योंकि अंडाशय अविकसित होते हैं। उनमें ढाल के आकार की छाती, कछुआ गर्दन (वेब्ड नेक), छोटा कद और द्वितीयक लैंगिक लक्षणों की कमी होती है।
Q10. डਾਈहाइब्रिड क्रॉस की सहायता से मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) को समझाइए। F2 पीढ़ी में प्राप्त फिनोटाइपिक और जीनोटाइपिक अनुपात भी लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का परिचय\nमेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम ग्रेगर जॉन मेंडल द्वारा प्रतिपादित वंशागति का तीसरा प्रमुख सिद्धांत है। यह नियम बताता है कि जब दो जोड़ी लक्षणों को एक संकर में मिलाया जाता है, तो युग्मकों के निर्माण के समय एक जोड़ी लक्षणों का पृथक्करण दूसरे जोड़ी लक्षणों से स्वतंत्र होता है। सरल शब्दों में, दो या दो से अधिक विभिन्न जीनों के एलील एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से युग्मकों में छांटे जाते हैं। ###डाईहाइब्रिड क्रॉस के माध्यम से स्पष्टीकरण\nइस नियम को प्रदर्शित करने के लिए, मेंडल ने पीले और गोल बीज (YYRR) वाले मटर के पौधे को हरे और झुर्रीदार बीज (yyrr) वाले पौधे के साथ क्रॉस कराया। - **जनक पीढ़ी (P):** पीला गोल (YYRR) × हरा झुर्रीदार (yyrr) - **F1 पीढ़ी:** सभी संतति विषमयुग्मकी (YyRr) थीं और उन्होंने पीला और गोल फिनोटाइप दिखाया। \nजब F1 पीढ़ी के पौधों का स्व-परागण कराया गया, तो उन्होंने समान अनुपात में चार प्रकार के युग्मक उत्पन्न किए: YR, Yr, yR और yr। \nपुनet स्क्वायर (चेकरबोर्ड) के माध्यम से F2 पीढ़ी में 16 संयोजन बनते हैं: - पीला गोल: 9 - पीला झुर्रीदार: 3 - हरा गोल: 3 - हरा झुर्रीदार: 1 ### F2 पीढ़ी के अनुपात - **फिनोटाइपिक अनुपात:** 9 : 3 : 3 : 1 - **जीनोटाइपिक अनुपात:** 1 : 2 : 1 : 2 : 4 : 2 : 1 : 2 : 1 ### निष्कर्ष\nF2 पीढ़ी में पीले झुर्रीदार और हरे गोल जैसे नए संयोजनों की उपस्थिति स्पष्ट रूप से साबित करती है कि बीज के रंग और आकार के कारक (जीन) युग्मक निर्माण के दौरान एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं।
Q11. एक निश्चित पौधे की प्रजाति में, लाल फूलों का रंग (R) सफेद फूलों के रंग (r) पर प्रभावी होता है। यदि एक समयुग्मजी (homozygous) लाल फूल वाले पौधे का संकरण एक समयुग्मजी सफेद फूल वाले पौधे के साथ कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी का जीनप्ररूप (genotype) और लक्षणप्ररूप (phenotype) क्या होगा? इसके अलावा, यदि F1 पीढ़ी के पौधों का स्व-परागण कराया जाता है, तो पुनेट स्क्वायर (Punnett square) का उपयोग करके F2 पीढ़ी में अपेक्षित लक्षणप्ररूपी और जीनप्ररूपी अनुपातों की गणना कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): F1 और F2 पीढ़ियों के जीनप्ररूप और लक्षणप्ररूप को निर्धारित करने के लिए, हम मेंडल के पृथक्करण और प्रभाविता के नियम का उपयोग करते हैं। **चरण 1: जनक की पहचान** - समयुग्मजी लाल फूल वाले पौधे का जीनप्ररूप = $RR$ - समयुग्मजी सफेद फूल वाले पौधे का जीनप्ररूप = $rr$ **चरण 2: युग्मक (Gametes) निर्माण** - पौधा $RR$ एलील $R$ वाले युग्मक उत्पन्न करता है। - पौधा $rr$ एलील $r$ वाले युग्मक उत्पन्न करता है। **चरण 3: F1 पीढ़ी**\nजब निषेचन के दौरान ये युग्मक संलयित होते हैं, तो F1 पीढ़ी की सभी संतानों का जीनप्ररूप $Rr$ होगा। - **F1 पीढ़ी का लक्षणप्ररूप:** सभी पौधों में लाल फूल होंगे क्योंकि लाल रंग का एलील ($R$) सफेद रंग के एलील ($r$) पर पूरी तरह प्रभावी होता है। **चरण 4: F2 पीढ़ी (F1 का स्व-परागण)**\nसंकरण: $Rr \times Rr$ - F1 पौधों द्वारा उत्पन्न युग्मक: $R$ और $r$ (समान अनुपात में)। **F2 पीढ़ी के लिए पुनेट स्क्वायर:** | | **R** | **r** | |---|---|---| | **R** | RR (लाल) | Rr (लाल) | | **r** | Rr (लाल) | rr (सफेद) | **चरण 5: अनुपातों की गणना** - **जीनप्ररूपी अनुपात:** - $RR$ (समयुग्मजी प्रभावी) = 1 - $Rr$ (विषमयुग्मजी) = 2 - $rr$ (समयुग्मजी अप्रभावी) = 1 - अनुपात = **1 : 2 : 1** - **लक्षणप्ररूपी अनुपात:** - लाल फूल ($RR$ और $Rr$) = 3 - सफेद फूल ($rr$) = 1 - अनुपात = **3 : 1**
Q12. गुणसूत्र उत्परिवर्तन (विपथन) क्या है? उदाहरण सहित संरचनात्मक गुणसूत्र विपथन को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): गुणसूत्र उत्परिवर्तन या गुणसूत्र विपथन (chromosomal aberration) गुणसूत्रों में होने वाले अचानक, स्थायी संरचनात्मक या संख्यात्मक परिवर्तनों को संदर्भित करता है जो आनुवंशिक जानकारी को बदल देते हैं और लक्षणप्रारूप में भिन्नता या आनुवंशिक विकारों का कारण बन सकते हैं। \nसंरचनात्मक गुणसूत्र विपथन में एक ही गुणसूत्र पर या गैर-समजात गुणसूत्रों के बीच जीनों की व्यवस्था या संख्या में परिवर्तन शामिल होता है। इसके मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं: 1. **विलोपन (Deletion)**: गुणसूत्र के किसी खंड का नष्ट होना या अलग होना। उदाहरण के लिए, मनुष्यों में 'क्रि-डु-चैट' सिंड्रोम गुणसूत्र 5 की छोटी भुजा के एक हिस्से के विलोपन के कारण होता है। 2. **द्विगुणन (Duplication)**: गुणसूत्र खंड का एक से अधिक बार उपस्थित होना, जिसके परिणामस्वरूप अतिरिक्त आनुवंशिक सामग्री प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए, ड्रोसोफिला में बार-आई फेनोटाइप। 3. **प्रतिलोमन (Inversion)**: एक गुणसूत्र खंड टूट जाता है, अलग हो जाता है और विपरीत दिशा में ($180^{\circ}$ घुमाव के साथ) पुन: जुड़ जाता है, जिससे आनुवंशिक सामग्री की कुल मात्रा नहीं बदलती बल्कि जीन का क्रम बदल जाता है। 4. **स्थानांतरण (Translocation)**: किसी गुणसूत्र के खंड का गैर-समजात गुणसूत्र पर स्थानांतरण या आदान-प्रदान। उदाहरण के लिए, रॉबर्ट्सोनियन translocation पारिवारिक डाउन सिंड्रोम का कारण बन सकता है। \nये संरचनात्मक परिवर्तन अक्सर असामान्य युग्मक निर्माण, कम प्रजनन क्षमता, या संतति में महत्वपूर्ण आनुवंशिक सिंड्रोम का कारण बनते हैं।
Q13. एक उपयुक्त मानव उदाहरण के साथ बहुजीनी वंशागति (Polygenic inheritance) को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): बहुजीनी वंशागति (Polygenic inheritance) वंशागति का एक ऐसा प्रकार है जिसमें कोई विशिष्ट लक्षण किसी एक जीन युग्म के बजाय दो या दो से अधिक जीनों द्वारा नियंत्रित होता है। ये लक्षण सामान्यतः स्पष्ट वर्गाकार श्रेणियों के बजाय पूरी आबादी में एक निरंतर (continuous) भिन्नता दर्शाते हैं और एक घंटी के आकार (bell-shaped) के सामान्य वितरण वक्र का पालन करते हैं। \nमुख्य विशेषताएं और उदाहरण: 1. **अभिव्यक्ति की प्रकृति**: लक्षण की तीव्रता या लक्षणप्रारूप प्रत्येक प्रभावी एलील के संचयी (cumulative) या योगात्मक प्रभाव द्वारा निर्धारित होता है। जितने अधिक प्रभावी एलील होंगे, लक्षण की अभिव्यक्ति उतनी ही अधिक स्पष्ट होगी। 2. **मानव उदाहरण (त्वचा का रंग)**: मानव त्वचा का रंग बहुजीनी वंशागति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका अध्ययन मूल रूप से डेवनपोर्ट द्वारा किया गया था। मान लीजिए कि मानव त्वचा का रंग तीन जीन युग्मों: $A$, $B$, और $C$ द्वारा नियंत्रित होता है। - जीनप्रारूप $AABBCC$ वाले व्यक्ति की त्वचा का रंग सबसे गहरा होगा (सभी प्रभावी एलील उपस्थित)। - जीनप्रारूप $aabbcc$ वाले व्यक्ति की त्वचा का रंग सबसे हल्का होगा (सभी अप्रभावी एलील)। - प्रभावी और अप्रभावी एलीलों के मिश्रण वाले मध्यवर्ती जीनप्रारूप (जैसे $AaBbCc$) मध्यम त्वचा के रंग (मूलाटो) को प्रदर्शित करेंगे। \nइस प्रकार, बहुजीनी वंशागति यह समझाती है कि आबादी में जटिल मात्रात्मक लक्षण कई जीनों द्वारा योगात्मक रूप से कैसे नियंत्रित होते हैं।
Q14. एक समयुग्मजी लंबे पौधे जिसके बीज पीले हैं ($TTYY$) का संकरण एक समयुग्मजी बौने पौधे जिसके बीज हरे हैं ($ttyy$) के साथ कराया जाता है। $F_1$ पीढ़ी का जीनप्रारूप और लक्षणप्रारूप लिखिए, और $F_2$ पीढ़ी में दोनों लक्षणों के लिए समयुग्मजी होने वाले पौधों का अनुपात ज्ञात कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): दिया गया है: - माता-पिता: $TTYY$ (समयुग्मजी लंबा और पीला) $\times$ $ttyy$ (समयुग्मजी बौना और हरा) - एलील: $T$ = लंबा, $t$ = बौना; $Y$ = पीला, $y$ = हरा 1. **$F_1$ पीढ़ी**: - युग्मक निर्माण के दौरान, $TTYY$ से $TY$ युग्मक और $ttyy$ से $ty$ युग्मक बनते हैं। - इनके संलयन से $F_1$ जीनप्रारूप प्राप्त होता है: $TtYy$. - **$F_1$ लक्षणप्रारूप**: सभी पौधे पीले बीजों वाले लंबे होंगे। 2. **$F_2$ पीढ़ी में दोनों लक्षणों के लिए समयुग्मजी पौधों का अनुपात**: - एक सामान्य द्विसंकर क्रॉस ($TtYy \times TtYy$) में, पुनेट स्क्वायर में 16 संभावित संयोजन होते हैं ($4 \times 4$)। - दोनों लक्षणों के लिए समयुग्मजी जीनप्रारूप वे होते हैं जिनमें दोनों जीन युग्म समयुग्मजी हों, जो कि निम्नलिखित हैं: $TTYY$ (1), $TTyy$ (1), $ttYY$ (1), और $ttyy$ (1)। - कुल दोहरे समयुग्मजी पौधे = $1 + 1 + 1 + 1 = 4$ - कुल संयोजन = 16 - **अनुपात** = $\frac{4}{16} = \frac{1}{4}$ या $25\%$।
Q15. लिंग-सहग्न वंशागति और ऑटोसोमल वंशागति में उदाहरण सहित अंतर बताइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): जीवों में वंशागति के पैटर्न इस बात पर निर्भर करते हैं कि लक्षणों के लिए उत्तरदायी जीन लिंग गुणसूत्रों पर स्थित हैं या ऑटोसोमल (कायिक) गुणसूत्रों पर। 1. **लिंग-सहग्न वंशागति (Sex-Linked Inheritance)**: - परिभाषा: यह उन लक्षणों की वंशागति को संदर्भित करता है जो लिंग गुणसूत्रों (आमतौर पर X या Y गुणसूत्र) पर स्थित जीनों द्वारा नियंत्रित होते हैं। - विशेषताएं: ये एक विशिष्ट 'क्रिस-क्रॉस' वंशागति पैटर्न दिखाते हैं, जहाँ कोई लक्षण पिता से अपनी पुत्री के माध्यम से उसके पुत्र (नाती) तक जाता है, या माता से उसके पुत्र तक जाता है। - उदाहरण: मनुष्यों में हीमोफीलिया, लाल-हरा वर्णांधता (color blindness) और ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी। 2. **ऑटोसोमल वंशागति (Autosomal Inheritance)**: - परिभाषा: यह उन लक्षणों की वंशागति को संदर्भित करता है जो गैर-लिंग गुणसूत्रों यानी ऑटोसोम (मनुष्यों में 1 से 22 गुणसूत्र) पर स्थित जीनों द्वारा नियंत्रित होते हैं। - विशेषताएं: ऑटोसोमल लक्षण पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करते हैं क्योंकि ऑटोसोम दोनों लिंगों में समान जोड़ों में मौजूद होते हैं। वे क्रिस-क्रॉस वंशागति नहीं दर्शाते हैं। - उदाहरण: मनुष्यों में सिकल-सेल एनीमिया, फेनिलकेटोन्यूरिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस और एल्बिनिज़म। \nसंक्षेप में, लिंग-सहग्न जीन व्यक्ति के जैविक लिंग पर निर्भर संचरण पैटर्न प्रदर्शित करते हैं, जबकि ऑटोसोमल जीन लिंग से स्वतंत्र रूप से विरासत में मिलते हैं।