मुख्य सूत्र (Key Formulas)
त्वरित revision नोट्स: जैव विकास (Evolution)
कक्षा: 12वीं जीवविज्ञान (MP Board)
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अध्याय परिचय (Chapter Overview)
जैव विकास (Evolution) जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और समय के साथ सरल जीवों से जटिल जीवों के क्रमिक विकास का अध्ययन किया जाता है।
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1. ब्रह्मांड और जीवन की उत्पत्ति (Origin of Life and Universe)
- बिग बैंग सिद्धांत (Big Bang Theory): ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक विशाल विस्फोट के परिणामस्वरुप लगभग 20 अरब वर्ष पूर्व हुई थी।
- पृथ्वी का निर्माण: पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.5 अरब वर्ष पूर्व हुआ था। प्रारंभिक पृथ्वी पर वायुमंडल अपचायक (reducing) था जिसमें मुक्त ऑक्सीजन नहीं थी, बल्कि $\text{CH}4$, $\text{NH}3$, $\text{H}2\text{O}$ और $\text{H}2$ गैसें थीं।
- रासायनिक विकास (Chemical Evolution): ओपेरिन (Oparin) और हाल्डेन (Haldane) के अनुसार, जीवन की उत्पत्ति निर्जीव कार्बनिक अणुओं से रासायनिक प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप हुई।
- मिलर का प्रयोग (Miller's Experiment): 1953 में एस. मिलर ने प्रयोगशाला में यह सिद्ध किया कि $\text{CH}4$, $\text{NH}3$, $\text{H}_2$ और जलवाष्प के मिश्रण में विद्युत चिंगारी (electric spark) उत्पन्न करने पर अमीनो अम्ल का निर्माण होता है।
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2. जैव विकास के प्रमाण (Evidences of Evolution)
- समजात अंग (Homologous Organs):
- परिभाषा: वे अंग जिनकी उत्पत्ति और आंतरिक संरचना समान होती है, लेकिन कार्य भिन्न होते हैं।
- उदाहरण: ह्वेल के फ्लिपर्स, चमगादड़ के पंख, चीता का अग्रपाद और मनुष्य का हाथ।
- विकास का प्रकार: यह अपसारी विकास (Divergent Evolution) को दर्शाता है।
- समवृत्ति अंग (Analogous Organs):
- परिभाषा: वे अंग जिनके कार्य समान होते हैं, लेकिन उत्पत्ति और संरचना भिन्न होती है।
- उदाहरण: कीट के पंख और पक्षी के पंख।
- विकास का प्रकार: यह अभिसारी विकास (Convergent Evolution) को दर्शाता है।
- अवशेषी अंग (Vestigial Organs): शरीर के वे अंग जो हमारे पूर्वजों में क्रियाशील थे, लेकिन अब उपयोग न होने के कारण मात्र अवशेष रूप में बचे हैं। जैसे - कृमिरूप परिशेषिका (Appendix), निक्टिहाइडिंग झिल्ली।
- संयोजकता कड़ियां (Connecting Links): वे जीव जिनमें दो अलग-अलग समूहों के लक्षण पाए जाते हैं। जैसे - आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx), जो सरीसृप (Reptiles) और पक्षी (Birds) के बीच की कड़ी है।
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3. विकास के प्रमुख सिद्धांत (Major Theories of Evolution)
- लैमार्कवाद (Lamarckism):
- इसे उपार्जित लक्षणों की वंशागति का सिद्धांत (Theory of Inheritance of Acquired Characters) भी कहते हैं।
- इसके अनुसार, जीवनकाल में जीवों द्वारा अर्जित किए गए लक्षण अगली पीढ़ी में वंशागत होते हैं (जैसे - जिराफ की गर्दन का लंबा होना)।
- डार्विनवाद (Darwinism):
- इसे प्राकृतिक चयन का सिद्धांत (Theory of Natural Selection) या डार्विन का प्राकृतिक वर्णवाद कहते हैं।
- इसे चार्ल्स डार्विन और अल्फ्रेड वैलस ने प्रतिपादित किया था।
- इसके मुख्य बिंदु: अत्यधिक संतानोत्पत्ति, जीवन संघर्ष (Struggle for existence), विभिन्नताएँ और योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the fittest)।
- उत्परिवर्तन सिद्धांत (Mutation Theory):
- इसे ह्यूगो डी व्रीस (Hugo de Vries) ने दिया था।
- इनके अनुसार, जातियों में अचानक होने वाले बड़े परिवर्तन (उत्परिवर्तन) विकास का कारण बनते हैं, न कि सूक्ष्म विभिन्नताएँ।
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4. हार्डी-वेनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Principle)
- नियम: किसी समष्टि (population) में जीन आवृत्तियाँ (gene frequencies) पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रहती हैं बशर्ते उसमें कोई उत्परिवर्तन, चयन या जीन प्रवास न हो।
- गणितीय समीकरण:
$$p^2 + 2pq + q^2 = 1$$
- जहाँ:
- $p$ = प्रभावी युग्मविकल्पी (Dominant allele 'A') की आवृत्ति
- $q$ = अप्रभावी युग्मविकल्पी (Recessive allele 'a') की आवृत्ति
- $p^2$ = समग्मयुग्मजी प्रभावी जीनोटाइप (AA) की आवृत्ति
- $q^2$ = समग्मयुग्मजी अप्रभावी जीनोटाइप (aa) की आवृत्ति
- $2pq$ = विषमयुग्मजी जीनोटाइप (Aa) की आवृत्ति
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5. मानव विकास (Human Evolution)
मानव का विकास क्रम निम्नलिखित चरणों में हुआ (कालक्रम के अनुसार):
1. ड्रायोपिथेकस (Dryopithecus): यह अधिक वानर जैसे थे और वनमानुष के निकट थे।
2. रामापिथेकस (Ramapithecus): यह अधिक मानव जैसे थे।
3. ऑस्ट्रेलोपिथेकस (Australopithecus): ये अफ्रीका की घास के मैदानों में रहते थे। इन्होने संभवतः पत्थरों के हथियारों का उपयोग किया।
4. होमो हैबिलिस (Homo habilis): इन्हें 'कुशल मानव' (Handyman) कहा जाता है। ये औजार बनाते थे।
5. होमो इरेक्टस (Homo erectus): 'सीधे खड़े होकर चलने वाला मानव'। इन्होंने आग का उपयोग करना सीखा। (उदाहरण: जावा मानव, पेइचिंग मानव)।
6. निएंडरथल मानव (Homo neanderthalensis): ये यूरोप में रहते थे। ये अपने मृतकों को दफनाते थे।
7. होमो सेपियन्स (Homo sapiens): आधुनिक मानव। इनका विकास हिम युग (Ice age) के दौरान हुआ।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 जीव विकास (Evolution)
ब्रह्मांड और जीवन की उत्पत्ति
बिग बैंग सिद्धांत (महाविस्फोट सिद्धांत)
पृथ्वी की उत्पत्ति (लगभग 4.5 अरब वर्ष पूर्व)
जीवन की उत्पत्ति (प्रथम कोशिकीय रूप - लगभग 2 अरब वर्ष पूर्व)
रासायनिक विकास का सिद्धांत (ओपेरिन तथा हाल्डेन)
मिलर का प्रयोग (रासायनिक विकास का प्रायोगिक प्रमाण)
जीव विकास के प्रमाण
आकारिकी और शरीर रचना विज्ञान संबंधी प्रमाण
समझात अंग (समान संरचना, भिन्न कार्य - अपसारी विकास)
समरूप अंग (भिन्न संरचना, समान कार्य - अभिसारी विकास)
भ्रूणविज्ञान संबंधी प्रमाण (हिकल के बायोडाटा सिद्धांत)
जीवाश्म विज्ञान संबंधी प्रमाण (पेलियोन्टोलॉजी)
जैव रासायनिक प्रमाण (डीएनए और प्रोटीन में समानता)
विकास के प्रमुख सिद्धांत
लैमार्कवाद (उपार्जित लक्षणों की वंशागति)
डार्विनवाद (प्राकृतिक चयन द्वारा उत्पत्ति)
अधिक संतानोत्पत्ति
जीवन संघर्ष
विभिन्नताएँ और अनुकूलन
योग्यतम की उत्तरजीविता
ह्यूगो डी व्रीज़ का उत्परिवर्तन सिद्धांत (म्यूटेशन थ्योरी)
हार्डी-वेनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Principle)
जीन पूल और एलील आवृति
सिद्धांत के नियम और समीकरण ($p^2 + 2pq + q^2 = 1$)
जीन आवृति को प्रभावित करने वाले कारक
जीन प्रवाह (Gene Flow)
आनुवांशिक अपवाह (Genetic Drift)
उत्परिवर्तन (Mutation)
आनुवांशिक पुनरयोजन (Genetic Recombination)
प्राकृतिक चयन (Natural Selection)
प्राकृतिक चयन के प्रकार
स्थिरीकरण चयन (Stabilizing Selection)
दिशात्मक चयन (Directional Selection)
विखंडित चयन (Disruptive Selection)
मानव का विकास (Human Evolution)
ड्रायोपिथेकस और रामापिथेकस (वानर जैसे पूर्वज)
ऑस्ट्रेलोपिथेकस (प्रथम मानव सदृश)
होमो हैबिलिस (हैंडी मैन / औजार बनाने वाले)
होमो इरेक्टस (सीधे चलने वाले, अग्नि का उपयोग)
निएंडरथल मानव (गुफाओं में रहना, मृतकों को दफनाना)
होमो सेपियंस (आधुनिक मानव - अफ्रीका में उद्गम)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत (Hardy-Weinberg Principle)\nहार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत के अनुसार, विकासवादी प्रभावों की अनुपस्थिति में किसी समष्टि (population) में एलील आवृतियाँ (allele frequencies) पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर और अपरिवर्तित रहती हैं। कुल जीन पूल (एक समष्टि में कुल जीन और उनके एलील) अचर या स्थिर रहता है। इसे आनुवंशिक साम्यावस्था (genetic equilibrium) या हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था कहा जाता है।
\nसभी एलीलिक आवृत्तियों का योग 1 के बराबर होता है:
$$p^2 + 2pq + q^2 = 1$$\nजहाँ:
- $p$ = प्रभावी एलील 'A' की आवृत्ति
- $q$ = अप्रभावी एलील 'a' की आवृत्ति
- $p^2$ = समयुग्मजी प्रभावी व्यष्टियों (AA) की आवृत्ति
- $2pq$ = विषमयुग्मजी व्यष्टियों (Aa) की आवृत्ति
- $q^2$ = समयुग्मजी अप्रभावी व्यष्टियों (aa) की आवृत्ति
### हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था को प्रभावित करने वाले कारक\nपाँच प्रमुख कारक हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था को प्रभावित करते हैं और इससे विचलन उत्पन्न करते हैं:
1. **जीन प्रवाह (Gene Flow / Gene Migration)**: जब व्यष्टि नई समष्टि में प्रवास करते हैं या बाहर जाते हैं, तो पुरानी और नई दोनों समष्टियों में जीन आवृत्तियों में परिवर्तन होता है।
2. **आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift)**: संयोगवश (by chance) एलील आवृत्तियों में होने वाले यादृच्छिक परिवर्तन, जो विशेष रूप से छोटी समष्टियों में प्रभावी होते हैं।
3. **उत्परिवर्तन (Mutation)**: डीएनए अनुक्रमों में अचानक और वंशानुगत परिवर्तन, जो जीन पूल में नए एलील जोड़ते हैं।
4. **आनुवंशिक पुनर्योजन (Genetic Recombination)**: अर्धसूत्रीविभाजन और जीन विनिमय (crossing over) के दौरान जीनों का पुनर्योजन नए एलील संयोजन बनाता है।
5. **प्राकृतिक चयन (Natural Selection)**: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा वे वंशानुगत लक्षण जो अस्तित्व और जनन क्षमता को बढ़ाते हैं, अगली पीढ़ियों में अधिक सामान्य हो जाते हैं।
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### आंकिक हल (Numerical Solution):
**दिया गया है:**
- कुल समष्टि का आकार ($N$) = $1000$
- $AA$ व्यष्टियों की संख्या = $360$
- $Aa$ व्यष्टियों की संख्या = $480$
- $aa$ व्यष्टियों की संख्या = $160$
**चरण 1: जीनप्ररूप आवृत्तियों की गणना (Genotype Frequencies)**
- जीनप्ररूप $AA$ की आवृत्ति ($p^2$) = $\frac{360}{1000} = 0.36$
- जीनप्ररूप $Aa$ की आवृत्ति ($2pq$) = $\frac{480}{1000} = 0.48$
- जीनप्ररूप $aa$ की आवृत्ति ($q^2$) = $\frac{160}{1000} = 0.16$
**चरण 2: एलील आवृत्तियों ($p$ तथा $q$) की गणना**
- एलील 'A' की आवृत्ति ($p$):
$$p = \sqrt{p^2} = \sqrt{0.36} = 0.6$$
*(वैकल्पिक विधि: $p = AA\text{ की आवृत्ति} + \frac{1}{2}(Aa\text{ की आवृत्ति}) = 0.36 + 0.24 = 0.60$)*
- एलील 'a' की आवृत्ति ($q$):
$$q = \sqrt{q^2} = \sqrt{0.16} = 0.4$$
*(वैकल्पिक विधि: $q = 1 - p = 1 - 0.6 = 0.4$)*
**चरण 3: साम्यावस्था का सत्यापन (Verification)**
- जाँचें कि क्या $p + q = 1$:
$$0.6 + 0.4 = 1.0$$
- जाँचें कि क्या $p^2 + 2pq + q^2 = 1$:
$$(0.6)^2 + 2(0.6)(0.4) + (0.4)^2 = 0.36 + 0.48 + 0.16 = 1.0$$
**निष्कर्ष (Conclusion):**\nएलील 'A' की जीन आवृत्ति **0.6** तथा एलील 'a' की जीन आवृत्ति **0.4** है। चूँकि प्रेक्षित जीनप्ररूप आवृतियाँ हार्डी-वेनबर्ग समीकरण ($p^2 + 2pq + q^2 = 1$) का पूर्णतः पालन करती हैं, अतः यह समष्टि **हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था में है**।
उत्तर (Answer): ### **1. ओपेरिन-हॉल्डेन की रासायनिक विकास परिकल्पना**
1920 के दशक में रूस के अलेक्जेंडर ओपेरिन और ब्रिटेन के जे.बी.एस. हॉल्डेन ने स्वतंत्र रूप से प्रस्ताव रखा कि जीवन का पहला रूप पूर्व-विद्यमान निर्जीव कार्बनिक अणुओं (जैसे आरएनए, प्रोटीन, शर्करा) से क्रमिक रासायनिक विकास की प्रक्रिया के माध्यम से उत्पन्न हुआ था।
* **आदिम पृथ्वी की स्थितियां:**
* अत्यधिक उच्च तापमान।
* वायुमंडल में ज्वालामुखी तूफान और बिजली का कड़कना।
* **अपचायक वायुमंडल (Reducing Atmosphere):** वायुमंडल में मुक्त ऑक्सीजन ($O_2$) का अभाव था और यह मीथेन ($CH_4$), अमोनिया ($NH_3$), हाइड्रोजन ($H_2$) तथा जलवाष्प ($H_2O$) से समृद्ध था।
* **प्रक्रिया:** पराबैंगनी किरणों और बिजली के कड़कने से प्राप्त ऊर्जा ने अकार्बनिक अणुओं को आपस में अभिक्रिया कराकर सरल कार्बनिक यौगिक (अमीनो अम्ल, शर्करा) बनाए। ये यौगिक धीरे-धीरे महासागरों में एकत्र हो गए, जिसे हॉल्डेन ने **'प्रारंभिक तप्त तनु सूप (Hot Dilute Soup)'** कहा, जिससे जटिल बृहदअणुओं (macromolecules) का निर्माण हुआ।
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### **2. मिलर और उरे का प्रयोग (Miller-Urey Experiment)**
1953 में, एस.एल. मिलर और एच.सी. उरे ने प्रयोगशाला में प्रारंभिक पृथ्वी पर मौजूद समान परिस्थितियों का निर्माण करके रासायनिक विकास परिकल्पना को प्रायोगिक रूप से सिद्ध किया।
#### **प्रायोगिक सेटअप (Experimental Setup):**
1. **स्पार्क डिस्चार्ज डिस्चार्ज फ्लास्क (Spark Chamber):** उन्होंने एक बंद कांच का फ्लास्क लिया जिसमें दो टंगस्टन इलेक्ट्रोड लगे थे। इसमें बिजली गिरने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न करने के लिए 75,000 वोल्ट का विद्युत डिस्चार्ज उत्पन्न किया गया।
2. **गैस मिश्रण:** फ्लास्क में मीथेन ($CH_4$), अमोनिया ($NH_3$), और हाइड्रोजन ($H_2$) गैसों का $2:1:2$ के अनुपात में मिश्रण भरा गया, साथ ही जलवाष्प भी मिलाई गई।
3. **तापमान और संघनक:** दूसरे फ्लास्क में पानी को उबाला गया ($800^\circ C$) ताकि जलवाष्प बनती रहे। निर्मित पदार्थों को ठंडा करने के लिए एक कंडेनसर (संघनक) लगाया गया।
4. **अवधि:** इस उपकरण को बिना रुके लगभग एक सप्ताह (7 दिनों) तक चलाया गया।
#### **परिणाम और निष्कर्ष (Observations and Conclusions):**
* **निष्कर्ष:** एक सप्ताह के अंत में, उबलते जल वाले भाग के द्रव का रासायनिक विश्लेषण किया गया।
* **प्राप्त यौगिक:** द्रव में कई सरल अमीनो अम्ल (जैसे ग्लाइसीन, एलेनिन, एस्पार्टिक अम्ल) तथा कार्बनिक अम्ल प्राप्त हुए।
* **महत्व:** इस प्रयोग ने स्पष्ट रूप से यह साबित किया कि अकार्बनिक घटकों से कार्बनिक यौगिकों का निर्माण हो सकता है, जो जीवन के उद्भव का प्रथम चरण था।
उत्तर (Answer): ### **1. समजात अंग (Homologous Organs) - अपसारी विकास**\nसमजात अंग वे अंग हैं जिनकी मूल शारीरिक संरचना और भ्रूणीय उत्पत्ति समान होती है, लेकिन वे विभिन्न वातावरणों में अनुकूलित होने के कारण अलग-अलग कार्य करते हैं।
* **मुख्य विशेषताएं:** समान आंतरिक संरचनात्मक ढांचा एवं पूर्वज उत्पत्ति; अलग-अलग बाह्य रूप और कार्य।
* **अंतर्निहित प्रक्रिया:** अपसारी विकास (Divergent Evolution) - एक ही पूर्वज से विभिन्न दिशाओं में अनुकूलन के लिए विकास।
* **उदाहरण:**
* **स्तनधारियों के अग्रपाद:** मनुष्य, चमगादड़, चीता और व्हेल के अग्रपादों की अस्थि संरचना (ह्यूमरस, रेडियस-अल्ना, कार्पल्स, मेटाकार्पल्स) समान होती है। परंतु मनुष्य इसका उपयोग पकड़ने के लिए, चमगादड़ उड़ने के लिए, चीता दौड़ने के लिए और व्हेल तैरने के लिए करती है।
* **कांटे और प्रतान:** बोगनवेलिया के कांटे तथा कुकरबिटा के प्रतान दोनों ही कक्षस्थ कलिकाओं (axillary buds) का रूपांतरण हैं, लेकिन कांटे सुरक्षा और प्रतान आरोहण का कार्य करते हैं।
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### **2. समवृत्ति अंग (Analogous Organs) - अभिसारी विकास**\nसमवृत्ति अंग वे अंग होते हैं जो समान कार्य करते हैं, परंतु उनकी मूल संरचनात्मक योजना और भ्रूणीय उत्पत्ति एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न होती है।
* **मुख्य विशेषताएं:** भिन्न आंतरिक संरचना और उत्पत्ति; समान कार्य और बाह्य रूप।
* **अंतर्निहित प्रक्रिया:** अभिसारी विकास (Convergent Evolution) - समान पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण अंसबंधित जीवों में समान लक्षणों का विकसित होना।
* **उदाहरण:**
* **कीटों और पक्षियों के पंख:** कीटों के पंख काइटिनयुक्त बाह्य कंकाल के मोड़ हैं, जबकि पक्षियों के पंख अस्थियों से बने अग्रपाद का रूपांतरण हैं। दोनों उड़ने का कार्य करते हैं।
* **अक्टोपस और स्तनधारी की आंखें:** दोनों आंखें देखने का कार्य करती हैं, परंतु इनकी दृष्टि पटल (retina) की संरचना और भ्रूणीय विकास भिन्न है।
* **शकरकंद और आलू:** शकरकंद रूपांतरित जड़ है तथा आलू रूपांतरित तना है, परंतु दोनों का कार्य भोजन संग्रह करना है।
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### **3. अनुकूलनी विकिरण (Adaptive Radiation)**\nअनुकूलनी विकिरण वह विकासवादी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत एक ही पूर्वज प्रजाति से शुरू होकर विभिन्न प्रजातियों का विकास एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र से अलग-अलग आवासों एवं पारिस्थितिकीय आला (niches) में होता है।
* **उदाहरण - डार्विन की फिंचें (Darwin's Finches):**
* गैलापागोस द्वीपों की अपनी यात्रा के दौरान, चार्ल्स डार्विन ने फिंच पक्षियों की विविध प्रजातियों को देखा।
* ये सभी फिंचें मूल रूप से एक ही बीज-भक्षी (seed-eating) पूर्वज पक्षी से विकसित हुई थीं।
* मूल प्रजाति से अलग-अलग द्वीपों पर भोजन की उपलब्धता के अनुसार विभिन्न प्रकार की चोंच वाले पक्षियों का विकास हुआ (जैसे कीटभक्षी, फलभक्षी, कैक्टसभक्षी आदि)।
* एक ही बिंदु से प्रारंभ होकर विविध आवासों में जीवों का यह प्रसार 'अनुकूलनी विकिरण' का सबसे उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है।
उत्तर (Answer): ### **1. हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत**\nहार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत के अनुसार, एक वृहत, यादृच्छिक संगम करने वाली समष्टि में जीन तथा उनके एलील की आवृत्तियां पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर और नियत रहती हैं, जब तक कि उस पर उत्परिवर्तन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन या चयन जैसे विकासवादी प्रभाव काम न करें। इसे गणितीय रूप से निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है:
$$p^2 + 2pq + q^2 = 1$$\nतथा
$$p + q = 1$$\nजहाँ:
* $p$ = प्रभावी एलील ($A$) की आवृत्ति
* $q$ = अप्रभावी एलील ($a$) की आवृत्ति
* $p^2$ = समयुग्मजी प्रभावी व्यष्टियों ($AA$) की आवृत्ति
* $2pq$ = विषमयुग्मजी व्यष्टियों ($Aa$) की आवृत्ति
* $q^2$ = समयुग्मजी अप्रभावी व्यष्टियों ($aa$) की आवृत्ति
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### **2. चरणबद्ध गणना**
**दिया गया है:**
* कुल समष्टि आकार ($N$) = $1000$
* समयुग्मजी अप्रभावी व्यष्टियों की संख्या ($aa$) = $360$
**चरण A: एलील आवृत्तियों ($q$ और $p$) की गणना**
1. समयुग्मजी अप्रभावी जीनोटाइप की आवृत्ति ($q^2$):
$$q^2 = \frac{aa \text{ व्यष्टियों की संख्या}}{\text{कुल समष्टि}} = \frac{360}{1000} = 0.36$$
2. अप्रभावी एलील ($a$ या $q$) की आवृत्ति:
$$q = \sqrt{0.36} = 0.6$$
3. प्रभावी एलील ($A$ या $p$) की आवृत्ति:
$$p = 1 - q = 1 - 0.6 = 0.4$$
**चरण B: प्रत्याशित जीनोटाइप आवृत्तियों और व्यष्टियों की संख्या की गणना**
1. **समयुग्मजी प्रभावी व्यष्टि ($AA$):**
* आवृत्ति ($p^2$) = $(0.4)^2 = 0.16$
* प्रत्याशित संख्या = $p^2 \times N = 0.16 \times 1000 = 160 \text{ व्यष्टि}$
2. **विषमयुग्मजी व्यष्टि ($Aa$):**
* आवृत्ति ($2pq$) = $2 \times 0.4 \times 0.6 = 0.48$
* प्रत्याशित संख्या = $2pq \times N = 0.48 \times 1000 = 480 \text{ व्यष्टि}$
**सत्यापन:**
* कुल व्यष्टि = $160 (AA) + 480 (Aa) + 360 (aa) = 1000$
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### **3. हार्डी-वीनबर्ग साम्यावस्था को प्रभावित करने वाले कारक**
1. **जीन प्रवाह (Gene Flow):** व्यष्टियों का एक समष्टि से दूसरी समष्टि में आवागमन एलील आवृत्तियों को बदल देता है।
2. **आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift):** छोटी समष्टियों में संयोगवश एलील आवृत्तियों में होने वाले अनिश्चित परिवर्तन।
3. **प्राकृतिक चयन (Natural Selection):** अनुकूल लक्षणों वाले जीवों का बेहतर उत्तरजीविता और जनन क्षमता का प्रदर्शन करना।
उत्तर (Answer): ### मानव विकास का परिचय\nमानव विकास एक आकर्षक यात्रा है जो लाखों वर्षों में प्राइमेट पूर्वजों से आधुनिक मानव (*Homo sapiens*) की वंशावली का पता लगाती है। जीवाश्म विज्ञान और आणविक साक्ष्य बताते हैं कि मानवों ने लगभग 6-8 मिलियन वर्ष पूर्व अफ्रीकी वानरों (चिंपैंजी और गोरिल्ला) के साथ एक सामान्य पूर्वज साझा किया था।
### मानव विकास के प्रमुख चरण
1. **ड्रायोपिथेकस और रामापिथेकस:**
- लगभग 1.5 करोड़ वर्ष पूर्व अस्तित्व में थे।
- *ड्रायोपिथेकस* अधिक वानर-तुल्य, बालयुक्त थे और उनके बड़े कैनाइन दांत थे।
- *रामापिथेकस* अधिक मानव-तुल्य थे।
2. **ऑस्ट्रेलोपिथेकस (दक्षिणी वानर):**
- पूर्वी अफ्रीकी घास के मैदानों में लगभग 3-4 मिलियन वर्ष पूर्व रहते थे।
- पूरी तरह से सीधे चलते थे, मस्तिष्क क्षमता लगभग 450-600 सीसी थी।
3. **होमो हैबिलिस (कुशल मानव):**
- लगभग 2 मिलियन वर्ष पूर्व अस्तित्व में थे।
- पहले मानव-तुल्य होमिनिड माने जाते हैं।
- मस्तिष्क की क्षमता 650-800 सीसी थी।
4. **होमो इरेक्टस (सीधे खड़े होने वाले मानव):**
- लगभग 1.5 मिलियन वर्ष पूर्व प्रकट हुए।
- मस्तिष्क क्षमता लगभग 900 सीसी थी।
- सीधे चलते थे, मांस खाते थे और आग का उपयोग करना जानते थे।
5. **निएंडरथल मानव (होमो निएंडरथेलेंसिस):**
- 34,000 से 1,00,000 वर्ष पूर्व यूरोप और एशिया में रहते थे।
- मस्तिष्क क्षमता काफी बड़ी (लगभग 1400 सीसी) थी।
6. **क्रो-मैग्नन मानव:**
- आधुनिक मानव का एक प्रागैतिहासिक जीवाश्म रूप जो लगभग 34,000 वर्ष पूर्व रहता था।
7. **होमो सेपियंस सेपियंस (आधुनिक मानव):**
- लगभग 75,000-10,000 वर्ष पूर्व अफ्रीका में उत्पन्न हुए।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण हल:
**दिया गया डेटा:**
- अप्रभावी रोग की आवृत्ति (समग्मजी अप्रभावी व्यक्ति, $aa$) = $q^2 = \frac{1}{10000} = 0.0001$
**1. अप्रभावी एलील ($q$) की आवृत्ति की गणना:**
$$q^2 = 0.0001$$\nदोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर:
$$q = \sqrt{0.0001}$$
$$q = 0.01$$
*उत्तर 1:* अप्रभावी एलील ($q$) की आवृत्ति $0.01$ (या $1\%$) है।
**2. प्रभावी एलील ($p$) की आवृत्ति की गणना:**\nहार्ardy-वेनबर्ग सिद्धांत के अनुसार:
$$p + q = 1$$
$q$ का मान रखने पर:
$$p + 0.01 = 1$$
$$p = 1 - 0.01$$
$$p = 0.99$$
*उत्तर 2:* प्रभावी एलील ($p$) की आवृत्ति $0.99$ (या $99\%$) है।
**3. वाहकों (विषमग्मजी व्यक्तियों) की आवृत्ति की गणना:**\nहार्ardy-वेनबर्ग संतुलन में, विषमग्मजी वाहक $2pq$ पद द्वारा दर्शाए जाते हैं।
$$2pq = 2 \times p \times q$$
$p$ और $q$ के मान रखने पर:
$$2pq = 2 \times 0.99 \times 0.01$$
$$2pq = 2 \times 0.0099$$
$$2pq = 0.0198$$
*उत्तर 3:* समष्टि में वाहकों की आवृत्ति $0.0198$ (लगभग $1.98\%$) है।
उत्तर (Answer): ### हार्ardy-वेनबर्ग सिद्धांत का परिचय\nहार्ardy-वेनबर्ग सिद्धांत, जिसे 1908 में जी.एच. हार्डी और विल्हेम वेनबर्ग द्वारा स्वतंत्र रूप से प्रतिपादित किया गया था, यह बताता है कि किसी समष्टि (population) में एलील (allele) आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक समान बनी रहती हैं। यह अवधारणा समष्टि आनुवंशिकी का मौलिक आधार है।
### गणितीय निरूपण\nएक द्विगुणित जीव में, मान लीजिए एलील 'A' की आवृत्ति '$p$' है और एलील 'a' की आवृत्ति '$q$' है। इसलिए, $p + q = 1$ होता है। अगली पीढ़ी में जीनोटाइप आवृत्तियाँ द्विपद विस्तार (binomial expansion) द्वारा दी जाती हैं:
$$(p + q)^2 = p^2 + 2pq + q^2 = 1$$\nजहाँ:
- $p^2$ समग्मजी प्रभावी ($AA$) व्यक्तियों की आवृत्ति को दर्शाता है।
- $2pq$ विषमग्मजी ($Aa$) व्यक्तियों की आवृत्ति को दर्शाता है।
- $q^2$ समग्मजी अप्रभावी ($aa$) व्यक्तियों की आवृत्ति को दर्शाता है।
### हार्ardy-वेनबर्ग संतुलन को प्रभावित करने वाले कारक\nविकासवादी ताकतें एलील आवृत्तियों को बदल सकती हैं, जिससे हार्ardy-वेनबर्ग संतुलन बाधित होता है। पाँच मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
1. **जीन प्रवाह (Gene Migration or Gene Flow):**
जब व्यक्ति किसी समष्टि में आते या बाहर जाते हैं (प्रवास या उत्प्रवास), तो वे नए एलील लाते हैं या मौजूदा एक्षकों को हटा देते हैं, जिससे जीन पूल में एलील आवृत्तियाँ बदल जाती हैं।
2. **आनुवंशिक बहाव (Genetic Drift):**
छोटी समष्टियों में केवल संयोग से होने वाले एलील आवृत्तियों में यादृच्छिक परिवर्तन आनुवंशिक बहाव कहलाते हैं।
3. **उत्परिवर्तन (Mutation):**
DNA अनुक्रमों में यादृच्छिक, स्वतःस्फूर्त परिवर्तन पूरी तरह से नए एलील बनाते हैं जो प्राकृतिक चयन के लिए कच्चे माल के रूप में कार्य करते हैं।
4. **आनुवंशिक पुनर्संयोजन (Genetic Recombination):**
युग्मक निर्माण के दौरान, क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यूहन जीन के नए संयोजन उत्पन्न करते हैं।
5. **प्राकृतिक चयन (Natural Selection):**
यह विकास का सबसे महत्वपूर्ण तंत्र है। विभिन्न फीनोटाइप वाले व्यक्तियों के बीच विभेदक प्रजनन सफलता से समष्टि के भीतर अनुकूल एलील बढ़ते हैं।
उत्तर (Answer): ### 1. उद्देश्य / सिद्धांत
- यह प्रयोग वर्ष 1953 में **स्टैनले मिलर** और **हेरोल्ड उरे** द्वारा किया गया था।
- **उद्देश्य**: **ओपेरिन-हाल्डेन की परिकल्पना** का प्रायोगिक परीक्षण करना, जिसके अनुसार जीवन की पहली उत्पत्ति प्रागैतिहासिक पृथ्वी की अपचायक स्थितियों में अकार्बनिक पदार्थों से बने कार्बनिक अणुओं से हुई थी (जीवन की रासायनिक उत्पत्ति / एबायोजेनेसिस)।
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### 2. प्रायोगिक व्यवस्था एवं परिस्थितियाँ\nमिलर ने एक बंद कांच के उपकरण के भीतर प्रागैतिहासिक पृथ्वी पर मौजूद मानी जाने वाली स्थितियों को पुनः निर्मित किया:
- **गैसीय मिश्रण**: एक सीलबंद कांच के फ्लॉस्क में प्रारंभिक वायुमंडल का प्रतिनिधित्व करने वाली गैसों का मिश्रण भरा गया: मीथेन ($CH_4$), अमोनिया ($NH_3$), हाइड्रोजन ($H_2$) तथा जलवाष्प ($H_2O$) $2:2:1$ के अनुपात में।
- **ऊर्जा का स्रोत**: प्राचीन पृथ्वी पर आकाशीय बिजली चमकने जैसी स्थिति पैदा करने के लिए इलेक्ट्रोड की मदद से **$800^\circ C$** पर स्पार्क डिस्चार्ज (विद्युत डिस्चार्ज) उत्पन्न किया गया।
- **जल भंडार एवं तापन**: प्रणाली में जलवाष्प की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए निचले फ्लॉस्क में पानी को उबाला गया।
- **संघनक (Condenser)**: गैसों को ठंडा करने तथा संघनित द्रव को एक ट्रैप में एकत्र करने के लिए कंडेन्सर लगाया गया।
- **समय अवधि**: इस उपकरण को लगभग एक सप्ताह तक लगातार चलाया गया।
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### 3. प्रेक्षण (Observations)
- एक सप्ताह के बाद, ट्रैप में एकत्र जल गहरा भूरा और मटमैला हो गया।
- एकत्र द्रव के रासायनिक विश्लेषण से कई कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण का पता चला:
- **अमीनो अम्ल**: ग्लाइसिन, एलानाइन तथा एस्पार्टिक अम्ल।
- **कार्बनिक अम्ल**: फॉर्मिक अम्ल, एसिटिक अम्ल, लैक्टिक अम्ल तथा सक्सिनिक अम्ल।
- बाद में अन्य वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों में प्यूरीन, पिरीमिडीन, शर्करा और वर्णक भी प्राप्त हुए।
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### 4. निष्कर्ष एवं महत्व
- **निष्कर्ष**: इस प्रयोग ने सफलतापूर्वक सिद्ध किया कि अमीनो अम्ल जैसे कार्बनिक एकलक (monomers), जो जीवन के आवश्यक निर्माण खंड हैं, प्रागैतिहासिक पृथ्वी की परिस्थितियों में अजैविक रूप से संश्लेषित हो सकते थे।
- **महत्व**:
- इसने जीवन के **रासायनिक विकास सिद्धांत** का ठोस प्रायोगिक प्रमाण प्रदान किया।
- यह पुष्टि हुई कि अकार्बनिक पदार्थों से क्रमिक रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा ही जीवन का प्रादुर्भाव हुआ।
उत्तर (Answer): ### भाग (a): अनुकूलनी विकिरण (Adaptive Radiation)
**परिभाषा**:\nअनुकूलनी विकिरण एक ऐसी विकासवादी प्रक्रिया है जिसमें एक ही पूर्वज जाति (ancestral species) विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों (ecological niches) के अनुकूल ढलने के लिए विविध रूपों में विकसित होकर फैल जाती है। यह तब होता है जब कोई प्रजाति अप्रयुक्त संसाधनों वाले नए वातावरण में प्रवेश करती है।
**उदाहरण**:
1. **गैलापागोस द्वीप समूह की डार्विन फिंचें**:
- चार्ल्स डार्विन ने देखा कि मूल रूप से बीज खाने वाली फिंच पक्षियों की प्रजाति गैलापागोस द्वीप समूह के विभिन्न द्वीपों पर पहुंची।
- समय के साथ, भोजन के विभिन्न स्रोतों (बीज, कीट, कैक्टस फल, मकरंद) की उपलब्धता के अनुसार उनकी चोंच की संरचना में परिवर्तन हुए।
- इसके परिणामस्वरूप एक ही पूर्वज से कई भिन्न फिंच प्रजातियों का विकास हुआ।
2. **ऑस्ट्रेलियाई मार्सुपियल्स (धानीप्राणी)**:
- अलग-थलग पड़े ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप में एक ही पूर्वज मार्सुपियल से कई प्रकार के मार्सुपियल्स (जैसे कंगारू, कोआला, तस्मानियाई भेड़िया, मार्सुपियल मोल) का विकास हुआ।
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### भाग (b): समजात तथा समवृत्ति अंगों में अंतर
| लक्षण | समजात अंग (Homologous Organs) | समवृत्ति अंग (Analogous Organs) |
| :--- | :--- | :--- |
| **मूल संरचना** | मौलिक शारीरिक संरचना और भ्रूणीय उत्पत्ति समान होती है। | मौलिक संरचना और भ्रूणीय उत्पत्ति भिन्न होती है। |
| **कार्य** | विभिन्न जीवों में अलग-अलग कार्य करते हैं। | विभिन्न जीवों में समान कार्य करते हैं। |
| **विकास का प्रकार** | **अपसारी विकास (Divergent Evolution)** को प्रदर्शित करते हैं। | **अभिसारी विकास (Convergent Evolution)** को प्रदर्शित करते हैं। |
| **जंतु उदाहरण** | मनुष्य, चीता, व्हेल और चमगादड़ के अग्रपाद (सबमें ह्यूमरस, रेडियस, अल्ना आदि अस्थियां होती हैं)। | पक्षियों के पंख तथा तितली/कीटों के पंख। |
| **पादप उदाहरण** | बोगनवेलिया के कांटे और कुकरबिटा के प्रतान (दोनों तने का रूपांतरण हैं)। | शकरकंद (जड़ का रूपांतरण) तथा आलू (तने का रूपांतरण)। |
| **विकास में महत्व** | दर्शाते हैं कि सामान्य पूर्वज वाले जीव अलग-अलग आवासों के अनुसार अनुकूलित हुए हैं। | दर्शाते हैं कि भिन्न पूर्वजों वाले जीव समान पर्यावरणीय दबावों के कारण समान लक्षण विकसित करते हैं। |
उत्तर (Answer): ### भाग (a): हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत
* **परिभाषा**: हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत के अनुसार, किसी समष्टि (population) में एलील आवृत्तियां पीढ़ी दर पीढ़ी स्थिर और एकसमान रहती हैं, जब तक कि उस पर कोई विकासवादी प्रभाव (जैसे उत्परिवर्तन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन, प्राकृतिक चयन तथा गैर-यादृच्छिक संगम) कार्य न करे। जीन पूल (समष्टि में कुल जीन और उनके एलील) अचर रहता है। इसे आनुवंशिक संतुलन (genetic equilibrium) कहा जाता है।
* **गणितीय समीकरण**:
यदि $p$ प्रभावी एलील ($A$) की आवृत्ति को और $q$ अप्रभावी एलील ($a$) की आवृत्ति को दर्शाता है:
$$p + q = 1$$
जीनप्ररूप आवृत्तियों का द्विपद प्रसार निम्न है:
$$(p + q)^2 = p^2 + 2pq + q^2 = 1$$
जहाँ:
- $p^2$ = समयुग्मजी प्रभावी जीनप्ररूप ($AA$) की आवृत्ति
- $2pq$ = विषमयुग्मजी जीनप्ररूप ($Aa$) की आवृत्ति
- $q^2$ = समयुग्मजी अप्रभावी जीनप्ररूप ($aa$) की आवृत्ति
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### भाग (b): चरणबद्ध आंकिक हल
#### दिए गए आंकड़े:
- कुल समष्टि का आकार ($N$) = $1000$
- $AA$ व्यष्टियों की संख्या = $360$
- $Aa$ व्यष्टियों की संख्या = $480$
- $aa$ व्यष्टियों की संख्या = $160$
#### चरण 1: प्रेक्षित जीनप्ररूप आवृत्तियों की गणना
- $AA$ की प्रेक्षित आवृत्ति ($p^2_{obs}$) = $\frac{360}{1000} = 0.36$
- $Aa$ की प्रेक्षित आवृत्ति ($2pq_{obs}$) = $\frac{480}{1000} = 0.48$
- $aa$ की प्रेक्षित आवृत्ति ($q^2_{obs}$) = $\frac{160}{1000} = 0.16$
#### चरण 2: एलीली आवृत्तियों ($p$ तथा $q$) की गणना
- एलील $A$ की आवृत्ति ($p$):
$$p = \text{Freq}(AA) + \frac{1}{2} \times \text{Freq}(Aa)$$
$$p = 0.36 + \frac{1}{2}(0.48) = 0.36 + 0.24 = 0.60$$
- एलील $a$ की आवृत्ति ($q$):
$$q = \text{Freq}(aa) + \frac{1}{2} \times \text{Freq}(Aa)$$
$$q = 0.16 + \frac{1}{2}(0.48) = 0.16 + 0.24 = 0.40$$
*(जांच: $p + q = 0.60 + 0.40 = 1.00$)*
#### चरण 3: प्रत्याशित जीनप्ररूप आवृत्तियों की गणना\nहार्डी-वेनबर्ग समीकरण $(p+q)^2 = p^2 + 2pq + q^2 = 1$ का प्रयोग करने पर:
- प्रत्याशित $AA$ आवृत्ति ($p^2$) = $(0.60)^2 = 0.36$
- प्रत्याशित $Aa$ आवृत्ति ($2pq$) = $2 \times 0.60 \times 0.40 = 0.48$
- प्रत्याशित $aa$ आवृत्ति ($q^2$) = $(0.40)^2 = 0.16$
#### निष्कर्ष:\nचूँकि प्रेक्षित जीनप्ररूप आवृत्तियाँ ($AA = 0.36$, $Aa = 0.48$, $aa = 0.16$) हार्डी-वेनबर्ग समीकरण द्वारा परिकलित प्रत्याशित आवृत्तियों के बिल्कुल समान हैं, इसलिए **यह समष्टि हार्डी-वेनबर्ग संतुलन में है**।
उत्तर (Answer): **दिया गया डेटा:**
- समयुग्मजी अप्रभावी व्यष्टियों ($aa$) का प्रतिशत = 16% = 0.16
**हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत के समीकरण:**
1. $p + q = 1$
2. $p^2 + 2pq + q^2 = 1$
\nजहाँ:
- $p$ = प्रभावी एलील ($A$) की आवृत्ति
- $q$ = अप्रभावी एलील ($a$) की आवृत्ति
- $p^2$ = समयुग्मजी प्रभावी व्यष्टियों ($AA$) की आवृत्ति
- $2pq$ = विषमयुग्मजी व्यष्टियों ($Aa$) की आवृत्ति
- $q^2$ = समयुग्मजी अप्रभावी व्यष्टियों ($aa$) की आवृत्ति
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### **चरणबद्ध समाधान:**
**1. एलील ($a$ तथा $A$) की आवृत्ति:**
- दिया है, $q^2 = 0.16$
- $q = \sqrt{0.16} = 0.4$
- अतः, अप्रभावी एलील ($a$) की आवृत्ति **0.4** है।
- $p + q = 1$ का उपयोग करने पर:
- $p = 1 - q = 1 - 0.4 = 0.6$
- अतः, प्रभावी एलील ($A$) की आवृत्ति **0.6** है।
**2. विषमयुग्मजी व्यष्टियों ($Aa$) का प्रतिशत:**
- $Aa$ की आवृत्ति = $2pq$
- $2pq = 2 \times 0.6 \times 0.4 = 0.48$
- प्रतिशत = $0.48 \times 100 =$ **48%**
**3. समयुग्मजी प्रभावी व्यष्टियों ($AA$) का प्रतिशत:**
- $AA$ की आवृत्ति = $p^2$
- $p^2 = (0.6)^2 = 0.36$
- प्रतिशत = $0.36 \times 100 =$ **36%**
उत्तर (Answer): ### प्राकृतिक चयन के प्रकार
\nप्राकृतिक चयन किसी समष्टि में लक्षणों (phenotypes) पर तीन मुख्य तरीकों से कार्य करता है:
1. **स्थायीकारी चयन (Stabilizing Selection):**
* **प्रक्रिया:** इस प्रकार के चयन में प्रकृति औसत (मध्यवर्ती) लक्षण वाले जीवों को प्राथमिकता देती है और दोनों चरम सीमाओं वाले लक्षणों को खारिज करती है।
* **प्रभाव:** समष्टि में विविधता घटती है और मध्यवर्ती लक्षण वाले जीव अधिक सफल होते हैं।
* **उदाहरण:** मानव में शिशु का जन्म भार; मध्यम वजन वाले नवजात शिशुओं की उत्तरजीविता दर बहुत कम या बहुत अधिक वजन वाले शिशुओं से अधिक होती है।
2. **दिशात्मक चयन (Directional Selection):**
* **प्रक्रिया:** जब पर्यावरण बदलता है, तो चयन एक चरम सीमा (extreme) वाले लक्षण वाले जीवों के पक्ष में होता है।
* **प्रभाव:** समष्टि का मुख्य शिखर उस अनुकूल दिशा की ओर खिसक जाता है।
* **उदाहरण:** पेपर्ड मॉथ में औद्योगिक मेलैनिज्म (Industrial Melanism), जहाँ धुएँ से काले हुए पेड़ के तनों पर काली रंग की तितलियाँ अधिक बचीं।
3. **विदारक या विखंडात्मक चयन (Disruptive Selection):**
* **प्रक्रिया:** इसमें प्रकृति दोनों चरम सीमाओं वाले लक्षणों का चयन करती है तथा मध्यवर्ती लक्षणों वाले जीवों को अस्वीकृत करती है।
* **प्रभाव:** एक ही समष्टि में दो अलग-अलग शिखर (peaks) बन जाते हैं, जो नई प्रजातियों के निर्माण (Speciation) में सहायक होते हैं।
* **उदाहरण:** बीज तोड़ने वाली फिंच पक्षी, जहाँ केवल बहुत छोटी या बहुत बड़ी चोंच वाले पक्षी ही बीज खाकर जीवित रह पाते हैं।
उत्तर (Answer): ### मिलर-उरे का प्रयोग
\nवर्ष 1953 में स्टेन्ले मिलर और हेराल्ड उरे ने **ओपेरिन-हाल्डेन के रासायनिक विकास सिद्धांत** की प्रायोगिक पुष्टि की। इस सिद्धांत के अनुसार जीवन की उत्पत्ति आदिम पृथ्वी की अपचायक (reducing) परिस्थितियों में अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक अणुओं के निर्माण द्वारा हुई थी।
### प्रयोग की व्यवस्था:
1. **उपकरण:** उन्होंने प्रयोगशाला में काँच के फ्लैस्क में आदिम पृथ्वी के वायुमंडल का माहौल तैयार किया, जिसमें मीथेन ($CH_4$), अमोनिया ($NH_3$), हाइड्रोजन ($H_2$) तथा जलवाष्प ($H_2O$) का मिश्रण लिया।
2. **ऊर्जा का स्रोत:** बिजली की कड़कने (lightning) का अनुभव कराने के लिए टंगस्टन इलेक्ट्रोड की सहायता से $800^\circ\text{C}$ तापमान पर उच्च वोल्टेज ($7500-10000\text{ V}$) का विद्युत डिस्चार्ज किया।
3. **संघनक (Condenser):** गैसों को ठंडा करके द्रव रूप में एकत्रित करने के लिए संघनक लगाया गया था।
### प्रेक्षण एवं निष्कर्ष:\nएक सप्ताह तक प्रयोग चलाने के बाद, एकत्रित द्रव का रासायनिक विश्लेषण करने पर उसमें ग्लाइसिन, एलेनिन जैसे **अमीनो अम्ल**, शर्करा तथा कार्बनिक अम्ल पाए गए। इससे यह सिद्ध हुआ कि प्रारंभिक पृथ्वी की परिस्थितियों में अकार्बनिक गैसों से जीवन के लिए आवश्यक जैविक कार्बनिक अणुओं का स्वतः निर्माण संभव था।
उत्तर (Answer): ### चरणबद्ध हल:
**दिया गया है:**
* कुल समष्टि ($N$) = $1000$
* अप्रभावी लक्षणप्ररूप वाले व्यक्ति ($aa$) = $160$
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#### चरण 1: अप्रभावी जीनोटाइप की आवृत्ति ($q^2$) ज्ञात करना:
$$q^2 = \frac{160}{1000} = 0.16$$
#### चरण 2: अप्रभावी एलील ($q$) की आवृत्ति ज्ञात करना:
$$q = \sqrt{0.16} = 0.4$$
#### चरण 3: प्रभावी एलील ($p$) की आवृत्ति ज्ञात करना:\nसूत्र $p + q = 1$ का उपयोग करने पर:
$$p = 1 - 0.4 = 0.6$$
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#### चरण 4: विषमयुग्मजी जीवों की आवृत्ति ($2pq$) ज्ञात करना:
$$2pq = 2 \times 0.6 \times 0.4 = 0.48$$
#### चरण 5: विषमयुग्मजी व्यक्तियों ($Aa$) की कुल संख्या:
$$\text{संख्या} = 2pq \times N = 0.48 \times 1000 = 480$$
**अंतिम उत्तर:**
1. एलील $a$ की आवृत्ति = $0.4$; एलील $A$ की आवृत्ति = $0.6$
2. विषमयुग्मजी व्यक्तियों ($Aa$) की संख्या = $480$
उत्तर (Answer): ### हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत
**हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत** के अनुसार, किसी यादृच्छिक रूप से संगम करने वाली (random mating) बड़ी समष्टि (population) में एलील आवृत्तियाँ (allele frequencies) पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर और अपरिवर्तित रहती हैं, जब तक कि उस पर कोई विकासीय बल कार्य न करे।
\nइस आनुवंशिक साम्यावस्था को गणितीय रूप से व्यक्त किया जाता है:
$$p^2 + 2pq + q^2 = 1$$
*(जहाँ $p$ और $q$ एलीलों की आवृत्तियाँ हैं, $p^2$ समयुग्मजी प्रभावी, $2pq$ विषमयुग्मजी, और $q^2$ समयुग्मजी अप्रभावी है)।* एलील आवृत्तियों में कोई भी परिवर्तन जैव-विकास को प्रदर्शित करता है।
### हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था को प्रभावित करने वाले 5 कारक:
1. **जीन प्रवाह या जीन प्रवास (Gene Flow):** जीवों के प्रवास से एलीलों का आना या जाना।
2. **आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift):** छोटी समष्टि में संयोगवश एलील आवृत्तियों में अचानक परिवर्तन।
3. **उत्परिवर्तन (Mutation):** डीएनए में अचानक होने वाले वंशागत परिवर्तन।
4. **आनुवंशिक पुनर्योजन (Genetic Recombination):** अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान क्रॉसिंग ओवर से नए संयोजन बनना।
5. **प्राकृतिक चयन (Natural Selection):** अनुकूल लक्षणों वाले जीवों की उत्तरजीविता और जनन क्षमता में वृद्धि।