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कार्बन एवं उसके यौगिक

Subject: विज्ञान | Class: Class 10 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

कक्षा 10 विज्ञान - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)

अध्याय: कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and its Compounds)


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1. कार्बन में आबंधन (Bonding in Carbon)

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2. कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon)

1. शृंखलन (Catenation): कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है, जिससे बड़ी संख्या में अणु बनते हैं। (साशा, सीधी और वलय शृंखलाएं)

2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): 4 संयोजकता होने के कारण यह हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन आदि के साथ आबंध बना सकता है।


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3. हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)

केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं।


| प्रकार | बंध का प्रकार | सामान्य सूत्र | उदाहरण |

| :--- | :--- | :--- | :--- |

| संतृप्त (Alkane / एल्केन) | एकल बंध (C - C) | Cn H{2n+2} | मेथेन (CH4), एथेन (C2H_6) |

| असंतृप्त (Alkene / एल्कीन) | द्वि-बंध (C = C) | Cn H{2n} | एथीन (C2H4), प्रोपीन (C3H6) |

| असंतृप्त (Alkyne / एल्काइन) | त्रि-बंध (C ≡ C) | Cn H{2n-2} | एथाइन (C2H2), प्रोपाइन (C3H4) |


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4. प्रकार्यात्मक समूह (Functional Groups)

हाइड्रोकार्बन शृंखला में हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करने वाले विशिष्ट परमाणु या समूह:



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5. समजातीय श्रेणी (Homologous Series)

यौगिकों की ऐसी शृंखला जिसमें समान प्रकार्यात्मक समूह होता है और जिसके रासायनिक गुण समान होते हैं।


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6. कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म

#### (i) दहन (Combustion)

कार्बन यौगिक वायु की उपस्थिति में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जल, ऊष्मा तथा प्रकाश देते हैं।


#### (ii) ऑक्सीकरण (Oxidation)

क्षारीय KMnO4 या अम्लीकृत K2Cr2O7 की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल, कार्बोक्सिलिक अम्ल में परिवर्तित हो जाते हैं।


#### (iii) संकलन (निकेल/पैलेडियम उत्प्रेरक द्वारा निकेल हाइड्रोजनीकरण)

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाते हैं। (वनस्पति तेल से वनस्पति घी बनाना)


#### (iv) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction)

सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन द्वारा संतृप्त हाइड्रोकार्बन से हाइड्रोजन परमाणुओं का प्रतिस्थापन होता है।


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7. दो महत्वपूर्ण कार्बन यौगिक

#### A. एथेनॉल (C2H5OH)

2Na + 2C2H5OH -> 2C2H5ONa (सोडियम एथॉक्साइड) + H_2 ↑

CH3-CH2OH (सांद्र H2SO4 / 443 K) -> CH2 = CH2 + H_2O


#### B. एथेनॉइक अम्ल / एसिटिक अम्ल (CH_3COOH)

CH3COOH + C2H5OH (अम्ल) -> CH3COOC2H5 (एथिल एथेनोएट) + H_2O

CH3COOC2H5 + NaOH -> CH3COONa + C2H5OH


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8. साबुन और अपमार्जक (Soaps and Detergents)


#### मिसेल निर्माण (Micelle Formation)

साबुन के अणु में दो सिरे होते हैं:

1. जलरागी सिरा (Hydrophilic head): आयनिक भाग, जो जल में घुलनशील होता है।

2. जलविरागी सिरा (Hydrophobic tail): हाइड्रोकार्बन भाग, जो तेल/मैलो में घुलनशील होता है।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 कार्बन एवं उसके यौगिक
Overview
कार्बन में आबंधन सहसंयोजक आबंधन इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी एकल, द्वि और त्रि आबंध कार्बन की चतुःसंयोजकता चार संयोजी इलेक्ट्रॉन अन्य परमाणुओं के साथ आबंध निर्माण कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति श्रृंखलापन (कैटिनेशन) चतुःसंयोजकता के कारण विविधता हाइड्रोकार्बन संतृप्त हाइड्रोकार्बन एल्केन एकल आबंध असंतृप्त हाइड्रोकार्बन एल्कीन (द्वि आबंध) एल्काइन (त्रि आबंध) संरचनात्मक समावयवता समान आणविक सूत्र, भिन्न संरचना प्रकार्यात्मक समूह परिभाषा और महत्व मुख्य प्रकार्यात्मक समूह हैलोजन (-Cl, -Br) ऐल्कोहॉल (-OH) ऐल्डिहाइड (-CHO) कीटोन (>C=O) कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH) समजातीय श्रेणी समान रासायनिक गुण CH2 इकाई का अंतर कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म दहन ऊष्मा और प्रकाश का उत्पन्न होना ऑक्सीकरण ऑक्सीकारकों का उपयोग (जैसे क्षारीय KMnO4) संकलन अभिक्रिया हाइड्रोजनीकरण (असंतृप्त से संतृप्त) प्रतिस्थापन अभिक्रिया सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण कार्बन यौगिक एथेनॉल (ऐल्कोहॉल) गुण और उपयोग शराब पीने के हानिकारक प्रभाव एथेनोइक अम्ल (ऐसिटिक अम्ल) गुण और उपयोग सिरका निर्माण साबुन और अपमार्जक साबुन की संरचना जलरागी सिरा (हाइड्रोफिलिक) जलविरागी पूंछ (हाइड्रोफोबिक) मिसेल निर्माण मैल का निष्कासन अपमार्जक (डिटर्जेंट) कठोर जल में भी प्रभावी
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. उपयुक्त उदाहरणों की सहायता से कार्बन में सहसंयोजक बंधों के निर्माण को समझाइए। कार्बन आयनिक बंधों के बजाय सहसंयोजक बंध क्यों बनाता है? इसके अलावा, कार्बन के उन दो मुख्य गुणों की चर्चा कीजिए जिनके कारण बड़ी संख्या में कार्बनिक यौगिकों का निर्माण होता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बन में सहसंयोजक बंधों का निर्माण\nकार्बन की परमाणु संख्या 6 होती है, जिसका अर्थ है कि इसके सबसे बाहरी कोश (संयोजी कोश) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। एक स्थिर उत्कृष्ट गैस विन्यास (अष्टक) प्राप्त करने के लिए, कार्बन को या तो 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने होते हैं या 4 इलेक्ट्रॉन खोने होते हैं। * **आयनिक बंध क्यों नहीं बनते हैं:** - **4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना:** यदि कार्बन $C^{4-}$ बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है, तो केवल 6 प्रोटॉन वाले नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को संभालना बेहद मुश्किल और ऊर्जावान रूप से प्रतिकूल होगा। - **4 इलेक्ट्रॉन खोना:** यदि कार्बन $C^{4+}$ बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन खो देता है, तो 4 कसकर बंधे हुए इलेक्ट्रॉनों को हटाने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। - **समाधान:** इस ऊर्जा समस्या को दूर करने के लिए, कार्बन अन्य कार्बन परमाणुओं या विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के साथ अपने चार संयोजी इलेक्ट्रॉनों को साझा करता है, जिससे **सहसंयोजक बंध** बनते हैं। * **उदाहरण (मीथेन - $CH_4$):** कार्बन अपने 4 संयोजी इलेक्ट्रॉनों को 4 हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है, जिनमें से प्रत्येक 1 इलेक्ट्रॉन का योगदान देता है, जिसके परिणामस्वरूप चार एकल सहसंयोजक बंध बनते हैं जहाँ प्रत्येक परमाणु एक स्थिर इलेक्ट्रॉन विन्यास प्राप्त करता है। ### कार्बन के अद्वितीय गुण\nकार्बन दो उल्लेखनीय गुणों के कारण लाखों यौگिक बनाता है: 1. **शृंखलन (Catenation):** कार्बन में लंबी श्रृंखलाओं, शाखित श्रृंखलाओं या बंद वलयों को बनाने के लिए मजबूत सहसंयोजक बंधों के माध्यम से अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ जुड़ने की अद्वितीय क्षमता होती है। इस गुण को शृंखलन कहा जाता है। 2. **चतुःसंयोजकता (Tetravalency):** चार की संयोजकता होने के कारण, कार्बन चार अन्य कार्बन परमाणुओं या हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर और हैलोजन जैसे एकसंयोजक तत्वों के परमाणुओं के साथ बंध बनाने में सक्षम है, जिसके परिणामस्वरूप स्थिर और विविध यौगिक बनते हैं।
Q2. (i) दहन (Combustion), (ii) ऑक्सीकरण (Oxidation), (iii) संकलन अभिक्रिया (Addition reaction), और (iv) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution reaction) के संदर्भ में कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणों को समझाइए। प्रत्येक के लिए रासायनिक समीकरण दीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण #### (i) दहन - **स्पष्टीकरण**: कार्बन यौगिक आमतौर पर हवा (ऑक्सीज) में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस, जल वाष्प और बड़ी मात्रा में ऊष्मा व प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। संतृप्त हाइड्रोकार्बन आमतौर पर पर्याप्त हवा में साफ, नीली लौ के साथ जलते हैं, जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन अधूरे दहन के कारण पीली, धुएँ वाली लौ के साथ जलते हैं। - **रासायनिक समीकरण**: $$\text{CH}_4 (g) + 2\text{O}_2 (g) \rightarrow \text{CO}_2 (g) + 2\text{H}_2\text{O} (g) + \text{ऊष्मा और प्रकाश}$$ #### (ii) ऑक्सीकरण - **स्पष्टीकरण**: क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट ($\text{KMnO}_4$) या अम्लीय पोटेशियम डाइक्रोमेट ($\text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7$) जैसे ऑक्सीकारकों के साथ गर्म करने पर कार्बन यौगिक आसानी से ऑक्सीकृत हो जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, अल्कोहल कार्बोक्सिलिक एसिड में परिवर्तित हो जाते हैं। - **रासायनिक समीकरण**: $$\text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} \xrightarrow[\text{या अम्लीय } \text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7]{\text{क्षारीय } \text{KMnO}_4 + \text{ऊष्मा}} \text{CH}_3\text{COOH} + \text{H}_2\text{O}$$ #### (iii) संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction) - **स्पष्टीकरण**: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन और एल्कााइन) निकल (Ni) या पैलेडियम (Pd) जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) बनाते हैं। इस प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण (संकलन अभिक्रिया) के रूप में जाना जाता है। - **रासायनिक समीकरण**: $$\text{CH}_2=\text{CH}_2 + \text{H}_2 \xrightarrow{\text{Ni उत्प्रेरक}, \text{ऊष्मा}} \text{CH}_3-\text{CH}_3$$ #### (iv) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction) - **स्पष्टीकरण**: संतृप्त हाइड्रोकार्बन अधिकांश अभिकर्मकों की उपस्थिति में आम तौर पर निष्क्रिय होते हैं। हालाँकि, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में, क्लोरीन एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन परमाणुओं को एक-एक करके प्रतिस्थापित कर सकता है, जिसे प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहा जाता है। - **रासायनिक समीकरण**: $$\text{CH}_4 + \text{Cl}_2 \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}} \text{CH}_3\text{Cl} + \text{HCl}$$
Q3. समजात श्रेणी (Homologous series) क्या है? समजात श्रेणी की कोई चार विशेषताएँ लिखिए। अल्कोहल समजात श्रेणी के दो क्रमिक सदस्यों की संरचनाएँ बनाइए और उनके आणविक सूत्र लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### समजात श्रेणी की परिभाषा - समजात श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का एक ऐसा परिवार है जिसके रासायनिक गुण और सामान्य सूत्र समान होते हैं, जिसमें प्रत्येक क्रमिक सदस्य पिछले सदस्य से $-\text{CH}_2$ समूह (या 14 u के आणविक द्रव्यमान अंतर) से भिन्न होता है। ### समजात श्रेणी की विशेषताएँ 1. **सामान्य सूत्र**: समजात श्रेणी के सभी सदस्यों को एक ही सामान्य सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एल्केन को $\text{C}_n\text{H}_{2n+2}$ द्वारा दर्शाया जाता है। 2. **$-\text{CH}_2$ और द्रव्यमान अंतर**: किन्हीं भी दो क्रमिक सदस्यों के आणविक सूत्र में $-\text{CH}_2$ इकाई का और आणविक द्रव्यमान में $14 \text{ u}$ (कार्बन के लिए 12 + हाइड्रोजन के लिए 2) का अंतर होता है। 3. **रासायनिक गुण**: एक श्रेणी के सभी सदस्यों के रासायनिक गुण बहुत समान होते हैं क्योंकि उनमें एक ही कार्यात्मक समूह होता है। उदाहरण के लिए, सभी अल्कोहल हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करने के लिए सोडियम के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। 4. **भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन**: जैसे-जैसे श्रृंखला में नीचे की ओर आणविक द्रव्यमान बढ़ता है, भौतिक गुण जैसे गलनांक, क्वथनांक और घुलनशीलता में क्रमिक परिवर्तन दिखाई देता है (आमतौर पर अंतराआणविक बलों में वृद्धि के कारण गलनांक और क्वथनांक में वृद्धि होती है)। ### अल्कोहल समजात श्रेणी के क्रमिक सदस्य - **पहला सदस्य (मेथेनॉल)**: - आणविक सूत्र: $\text{CH}_3\text{OH}$ - संरचना: ```text H |\nH - C - O - H | H ``` - **दूसरा सदस्य (एथेनॉल)**: - आणविक सूत्र: $\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$ - संरचना: ```text H H | |\nH - C - C - O - H | | H H ```
Q4. नाइट्रोजन ($N_2$) के अणु में सहसंयोजी आबंध के निर्माण को समझाइए। यह भी समझाइए कि कार्बन आयनिक आबंधों के बजाय सहसंयोजी आबंध क्यों बनाता है, कार्बन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की चर्चा करते हुए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### नाइट्रोजन ($N_2$) अणु में सहसंयोजी आबंध का निर्माण - **परमाणु क्रमांक और विन्यास**: नाइट्रोजन का परमाणु क्रमांक 7 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 5 है। इसे एक स्थिर उत्कृष्ट गैस विन्यास (अष्टक) प्राप्त करने के लिए 3 और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। - **इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी**: अष्टक नियम को संतुष्ट करने के लिए, दो नाइट्रोजन परमाणु अपने बीच इलेक्ट्रॉनों के तीन युग्मों की साझेदारी करते हैं। इसके परिणामस्वरूप दो नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच एक त्रिक सहसंयोजी आबंध बनता है, जिसे $N \equiv N$ के रूप में दर्शाया जाता है। - **स्थायित्व**: यह साझेदारी दोनों परमाणुओं को एक स्थिर अष्टक प्राप्त करने की अनुमति देती है, जिससे एक बहुत मजबूत और स्थिर द्विपरमाणुक अणु बनता है। ### कार्बन सहसंयोजी आबंध क्यों बनाता है - **कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास**: कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इसकी सबसे बाहरी कक्षा में 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं। - **आयनिक आबंध निर्माण की अव्यवहार्यता ($C^{4-}$ या $C^{4+}$)**: - **4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना ($C^{4-}$) $\rightarrow$** यदि कार्बन $C^{4-}$ बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है, तो 6 प्रोटॉनों वाले नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को पकड़े रखना कठिन होगा, जिससे अत्यधिक इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रतिकर्ष और अस्थिरता पैदा होगी। - **4 इलेक्ट्रॉन खोना ($C^{4+}$) $\rightarrow$** यदि कार्बन $C^{4+}$ बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन खोता है, तो चार कसकर बंधे हुए इलेक्ट्रॉनों को हटाने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जो ऊर्जा की दृष्टि से अनुकूल नहीं है। - **निष्कर्ष**: इन ऊर्जा बाधाओं को पार करने के लिए, कार्बन अन्य कार्बन परमाणुओं या अन्य तत्वों (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, क्लोरीन, नाइट्रोजन) के परमाणुओं के साथ अपने चार संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को साझा करके स्थिरता प्राप्त करता है, जिससे मजबूत सहसंयोजी आबंध बनते हैं।
Q5. (i) दहन (Combustion), (ii) ऑक्सीकरण (Oxidation), (iii) संकलन अभिक्रिया (Addition reaction), और (iv) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution reaction) के संदर्भ में कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणों को समझाइए। प्रत्येक को संतुलित रासायनिक समीकरण के साथ समर्थित कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण \nकार्बन यौगिक ईंधन होते हैं और कार्बनिक रसायन विज्ञान का आधार बनाते हैं। इनकी प्रमुख रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं: #### (i) दहन (Combustion)\nकार्बन और उसके यौगिक ऊष्मा और प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल छोड़ने के लिए ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलते हैं। अधिकांश कार्बन यौगिक जलने पर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश छोड़ते हैं। * **संतृप्त हाइड्रोकार्बन** पर्याप्त ऑक्सीजन आपूर्ति में सामान्यतः स्वच्छ नीली ज्वाला के साथ जलते हैं। सीमित आपूर्ति में, वे कज्जलिल (धुएँ वाली) ज्वाला उत्पन्न करते हैं। * **असंतृप्त हाइड्रोकार्बन** उच्च कार्बन-से-हाइड्रोजन अनुपात के कारण अपूर्ण दहन के कारण पीली, कज्जलिल ज्वाला के साथ जलते हैं। * **समीकरण:** $$CH_3CH_2OH + 3O_2 \xrightarrow{\text{Heat}} 2CO_2 + 3H_2O + \text{Heat and Light}$$ $$\text{या } C + O_2 \rightarrow CO_2 + \text{Heat and Light}$$ #### (ii) ऑक्सीकरण (Oxidation)\nदहन पर कार्बन यौगिकों का आसानी से ऑक्सीकरण किया जा सकता है। क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$) या अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट ($K_2Cr_2O_7$) का उपयोग करके ऐल्कोहॉल को कार्बोक्जिलिक अम्ल में परिवर्तित किया जा सकता है। ये ऑक्सीकारक अभिकर्मक प्रारंभिक पदार्थ में ऑक्सीजन जोड़ते हैं। * **समीकरण:** $$CH_3CH_2OH \xrightarrow{\text{Alkaline } KMnO_4 + \text{Heat}} CH_3COOH$$ $$( \text{एथेनॉल} \xrightarrow{\text{ऑक्सीकरण}} \text{एथेनोइक अम्ल} )$$ #### (iii) संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction)\nअसंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन और ऐल्काइन) निकेल ($Ni$) या पैलेडियम ($Pd$) जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाते हैं। इस प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण कहा जाता है और इसका व्यापक रूप से उद्योग में वनस्पति तेलों (असंतृप्त वसा) को वनस्पति घी (संतृप्त वसा) में बदलने के लिए उपयोग किया जाता है। * **समीकरण:** $$R_2C = CR_2 + H_2 \xrightarrow{Ni/Pd \text{ catalyst}} R_2CH - CHR_2$$ $$\text{उदाहरण: } CH_2 = CH_2 + H_2 \xrightarrow{Ni \text{ catalyst}, 573K} CH_3 - CH_3 \text{ (एथेन)}$$ #### (iv) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction)\nसंतृप्त हाइड्रोकार्बन अधिकांश मामलों में निष्क्रिय होते हैं क्योंकि कार्बन के सभी संयोजकता इलेक्ट्रॉन एकल सहसंयोजी आबंधों में कसकर बंधे होते हैं। हालांकि, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में, क्लोरीन एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन परमाणुओं को एक-एक करके विस्थापित कर सकती है। इसे प्रतिस्थापन अभिक्रिया के रूप में जाना जाता है। * **समीकरण:** $$CH_4 + Cl_2 \xrightarrow{\text{Sunlight}} CH_3Cl + HCl$$ $$( \text{मीथेन} + \text{क्लोरीन} \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}} \text{क्लोरोमीथेन} + \text{हाइड्रोजन क्लोराइड} $$
Q6. समजात श्रेणी (Homologous series) क्या है? समजात श्रेणी की कोई चार विशेषताएँ लिखिए। ऐल्कोहॉलों की समजात श्रेणी के तीसरे और पाँचवें सदस्यों के आणविक सूत्र और संरचनात्मक सूत्र लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### समजात श्रेणी की परिभाषा\nसमजात श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का एक ऐसा परिवार है जिसके रासायनिक गुण समान होते हैं, जिसके सभी सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह होता है और जिन्हें एक सामान्य सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है, जिसमें प्रत्येक क्रमिक सदस्य पिछले वाले से $-CH_2-$ समूह (या 14u के आणविक द्रव्यमान अंतर) द्वारा भिन्न होता है। ### समजात श्रेणी की विशेषताएँ 1. **सामान्य सूत्र:** समजात श्रेणी के सभी सदस्यों को एक ही सामान्य रासायनिक सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, ऐल्कोहॉल को $C_n{H}_{2n+1}OH$ द्वारा दर्शाया जाता है। 2. **आणविक सूत्र में अंतर:** श्रृंखला के किन्हीं भी दो आसन्न (क्रमिक) सदस्यों के आणविक सूत्रों में $-CH_2-$ समूह का अंतर होता है। 3. **आणविक द्रव्यमान में अंतर:** किन्हीं भी दो क्रमिक सदस्यों के बीच आणविक द्रव्यमान का अंतर 14 परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) होता है (चूँकि कार्बन का द्रव्यमान 12u और दो हाइड्रोजन का द्रव्यमान 2u है)। 4. **रासायनिक गुण:** समजात श्रेणी के सभी सदस्य समान रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं क्योंकि उनमें समान क्रियात्मक समूह होता है। उदाहरण के लिए, सभी ऐल्कोहॉल हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करने के लिए सोडियम के साथ अभिक्रिया करते हैं। 5. **भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन:** अंतर-आणविक बलों में वृद्धि के कारण आणविक द्रव्यमान में वृद्धि के साथ सदस्यों के भौतिक गुण, जैसे गलनांक, क्वथनांक और विलेयता, एक क्रमिक परिवर्तन (वृद्धि या कमी) प्रदर्शित करते हैं। ### ऐल्कोहॉलों की समजात श्रेणी के सदस्य\nऐल्कोहॉल का सामान्य सूत्र $C_n{H}_{2n+1}OH$ है। * **ऐल्कोहॉल श्रृंखला का तीसरा सदस्य ($n = 3$):** - $C_n{H}_{2n+1}OH$ में $n = 3$ रखने पर: $C_3{H}_{2(3)+1}OH \Rightarrow C_3H_7OH$ (प्रोपॅनॉल) - **आणविक सूत्र:** $C_3H_8O$ (या $C_3H_7OH$) - **संरचनात्मक सूत्र:** $CH_3 - CH_2 - CH_2 - OH$ * **ऐल्कोहॉल श्रृंखला का पाँचवाँ सदस्य ($n = 5$):** - $C_n{H}_{2n+1}OH$ में $n = 5$ रखने पर: $C_5{H}_{2(5)+1}OH \Rightarrow C_5H_{11}OH$ (पेंटेनॉल) - **आणविक सूत्र:** $C_5H_{12}O$ (या $C_5H_{11}OH$) - **संरचनात्मक सूत्र:** $CH_3 - CH_2 - CH_2 - CH_2 - CH_2 - OH$
Q7. कार्बन में सहसंयोजी आबंधों के निर्माण को उदाहरण सहित समझाइए। कार्बन इतने अधिक यौगिकों का निर्माण क्यों कर पाता है? इसके लिए उत्तरदायी दो मुख्य गुणों की चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बन में सहसंयोजी आबंध का परिचय\nकार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है, जिसका अर्थ है कि इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। एक स्थिर उत्कृष्ट गैस विन्यास (जैसे नियॉन, जिसके सबसे बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं) प्राप्त करने के लिए, कार्बन को या तो चार इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके $C^{4-}$ ऋणायन बनाना होगा या चार इलेक्ट्रॉन खोकर $C^{4+}$ धनायन बनाना होगा। * **आयनिक आबंध क्यों संभव नहीं है:** - चार इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने से 6 प्रोटॉनों वाले नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को संभालना बहुत कठिन हो जाएगा। - चार इलेक्ट्रॉन खोने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे 6 प्रोटॉनों वाले कार्बन धनायन के पास केवल 2 इलेक्ट्रॉन रह जाएंगे। * **सहसंयोजी आबंधों का निर्माण:** - इस ऊर्जा बाधा को पार करने के लिए, कार्बन अपने चार संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को कार्बन के अन्य परमाणुओं या हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, क्लोरीन, नाइट्रोजन आदि जैसे अन्य तत्वों के साथ साझा करता है। - इलेक्ट्रॉन युग्मों की आपसी साझेदारी से बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं। उदाहरण के लिए, मीथेन अणु ($CH_4$) में, एक कार्बन परमाणु अपने चार संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बन के लिए अष्टक और हाइड्रोजन के लिए द्विक पूरा होता है। ### कार्बन इतनी बड़ी संख्या में यौगिक क्यों बनाता है (बहुमुखी प्रकृति)\nकार्बन लाखों कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करता है, जो किसी भी अन्य तत्व से कहीं अधिक है। यह बहुमुखी प्रतिभा मुख्य रूप से दो विशिष्ट गुणों के कारण है: 1. **श्रृंखलन (Catenation):** - श्रृंखलन कार्बन परमाणुओं का वह अद्वितीय गुण है जिसके द्वारा वे सहसंयोजी आबंधों के माध्यम से लंबी श्रृंखलाओं, शाखित श्रृंखलाओं और विभिन्न आकारों के बंद वलयों का निर्माण करने के लिए एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। - कार्बन परमाणु के छोटे आकार के कारण कार्बन-कार्बन आबंध बहुत मजबूत और स्थिर होते हैं, जो नाभिक को साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को मजबूती से पकड़ने में सक्षम बनाते हैं। - सिलिकॉन भी सात या आठ परमाणुओं की श्रृंखला तक हाइड्रोजन (सिलेन) के साथ यौगिक बनाता है, लेकिन कार्बन यौगिकों की तुलना में ये यौगिक बहुत अधिक प्रतिक्रियाशील और अस्थिर होते हैं। 2. **चतुःसंयोजकता (Tetravalency):** - कार्बन की संयोजकता चार होती है, जिसका अर्थ है कि यह चार अन्य कार्बन परमाणुओं या हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, हैलोजन आदि जैसे एकसंयोगी तत्वों के परमाणुओं के साथ आबंध बनाने में सक्षम है। - अपने छोटे आकार के कारण, नाभिक साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्मों को प्रभावी ढंग से पकड़ सकता है, जिससे अन्य तत्वों के साथ बने यौगिक असाधारण रूप से स्थिर हो जाते हैं। - यह कार्बन को विशिष्ट क्रियात्मक समूहों के साथ विविध यौगिक बनाने की अनुमति देता है, जिससे अद्वितीय भौतिक और रासायनिक गुणों वाले कार्बन यौगिकों की एक विस्तृत विविधता उत्पन्न होती है।
Q8. जब एथनॉल को 443 K पर अतिरिक्त सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड के साथ गर्म किया जाता है तो क्या होता है? प्रतिक्रिया के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए, इस प्रतिक्रिया में सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड की भूमिका बताइए, और मानक तापमान और दबाव (STP) पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस के आयतन की गणना करें जब 4.6 ग्राम एथनॉल पूर्ण दहन से गुजरता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### भाग 1: एथनॉल का निर्जलीकरण\nजब एथनॉल को 443 K पर अतिरिक्त सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड ($H_2SO_4$) के साथ गर्म किया जाता है, तो यह एथीन गैस बनाने के लिए निर्जलीकरण (पानी के अणु की हानि) से गुजरता है। **रासायनिक समीकरण:** $$CH_3CH_2OH \xrightarrow[443\text{ K}]{\text{Conc. } H_2SO_4} CH_2=CH_2 + H_2O$$ **सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड की भूमिका:**\nसांद्र सल्फ्यूरिक एसिड इस प्रतिक्रिया में एक **निर्जलीकरण एजेंट** के रूप में कार्य करता है, जिसका अर्थ है कि पानी के लिए इसकी तीव्र आत्मीयता होती है और यह एथनॉल अणु से पानी के एक अणु को हटा देता है। --- ### भाग 2: दहन संख्यात्मक समस्या **दिया गया डेटा:** - जलाए गए एथनॉल ($C_2H_5OH$) का द्रव्यमान = $4.6\text{ g}$ - कार्बन ($C$) का मोलर द्रव्यमान = $12\text{ g/mol}$ - हाइड्रोजन ($H$) का मोलर द्रव्यमान = $1\text{ g/mol}$ - ऑक्सीजन ($O$) का मोलर द्रव्यमान = $16\text{ g/mol}$ **चरण 1: एथनॉल ($C_2H_5OH$) का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करें** $$\text{मोलर द्रव्यमान} = (2 \times 12) + (6 \times 1) + (1 \times 16) = 24 + 6 + 16 = 46\text{ g/mol}$$ **चरण 2: एथनॉल के मोलों की संख्या ज्ञात करें** $$\text{चूँकि, मोल} = \frac{\text{दिया गया द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}}$$ $$\text{एथनॉल के मोल} = \frac{4.6\text{ g}}{46\text{ g/mol}} = 0.1\text{ मोल}$$ **चरण 3: एथनॉल के दहन के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखें** $$C_2H_5OH + 3O_2 \rightarrow 2CO_2 + 3H_2O$$ **चरण 4: एथनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड के बीच मोल अनुपात निर्धारित करें**\nसंतुलित समीकरण से: - $C_2H_5OH$ का $1\text{ मोल}$, $CO_2$ के $2\text{ मोल}$ उत्पन्न करता है। - इसलिए, $C_2H_5OH$ के $0.1\text{ मोल}$ उत्पन्न करेंगे: $$CO_2 \text{ के मोल} = 0.1 \times 2 = 0.2\text{ मोल}$$ **चरण 5: STP पर $CO_2$ के आयतन की गणना करें**\nमानक तापमान और दबाव (STP) पर, किसी भी आदर्श गैस का $1\text{ मोल}$, $22.4\text{ लीटर}$ आयतन घेरता है। $$CO_2 \text{ का आयतन} = CO_2 \text{ के मोल} \times 22.4\text{ L/mol}$$ $$CO_2 \text{ का आयतन} = 0.2\text{ mol} \times 22.4\text{ L/mol} = 4.48\text{ लीटर}$$
Q9. कार्बनिक रसायन विज्ञान में समजात श्रेणी की अवधारणा को समझाइए। समजात श्रेणी की कोई चार विशेषताएं लिखिए और अल्कोहल समजात श्रेणी के क्रमागत उदाहरण दीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### समजात श्रेणी की परिभाषा\nएक **समजात श्रेणी** कार्बनिक यौगिकों का एक समूह या परिवार है जिनकी संरचनाएं समान होती हैं और रासायनिक गुण भी समान होते हैं, जिसमें लगातार आने वाले सदस्य $-CH_2-$ समूह (मेथलीन समूह) या $14\text{ u}$ (एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई) के आणविक द्रव्यमान की वृद्धि से भिन्न होते हैं। ### समजात श्रेणी की विशेषताएं 1. **सामान्य सूत्र:** एक समजात श्रेणी के सभी सदस्यों को एक ही सामान्य रासायनिक सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एल्केन को $C_n{H}_{2n+2}$ द्वारा, एल्कीन को $C_n{H}_{2n}$ द्वारा, और अल्कोहल को $C_n{H}_{2n+1}OH$ द्वारा दर्शाया जाता है। 2. **आणविक द्रव्यमान अंतर:** एक श्रृंखला में कोई भी दो आसन्न (क्रमागत) सदस्य अपने आणविक सूत्र में $-CH_2-$ समूह से भिन्न होते हैं। द्रव्यमान के संदर्भ में, दो लगातार सदस्यों के बीच का अंतर $14\text{ u}$ होता है (कार्बन के लिए 12 u और दो हाइड्रोजन परमाणुओं के लिए 2 u)। 3. **रासायनिक गुण:** एक समजात श्रेणी के सभी सदस्य समान रासायनिक गुण दिखाते हैं क्योंकि उनके पास समान कार्यात्मक समूह होता है। उदाहरण के लिए, सभी निचले अल्कोहल हाइड्रोजन गैस विकसित करने के लिए सोडियम के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। 4. **भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन:** आणविक द्रव्यमान में वृद्धि के साथ सदस्यों के भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन (ग्रेडेशन) दिखाई देता है। बढ़े हुए अंतर-आणविक बलों के कारण आणविक भार में वृद्धि के साथ गलनांक, क्वथनांक और घुलनशीलता जैसी विशेषताएं बढ़ती हैं। ### अल्कोहल समजात श्रेणी के उदाहरण\nअल्कोहल के लिए कार्यात्मक समूह $-OH$ (हाइड्रॉक्सिल समूह) है, और उनका सामान्य सूत्र $C_n{H}_{2n+1}OH$ या $C_n{H}_{2n+2}O$ है। पहले चार क्रमागत सदस्य निम्नलिखित हैं: 1. **मेथनॉल (मिथाइल अल्कोहल):** $CH_3OH$ (आणविक द्रव्यमान = $12 + (3\times1) + 16 + 1 = 32\text{ u}$) 2. **एथनॉल (इथाइल अल्कोहल):** $C_2H_5OH$ (आणविक द्रव्यमान = $(2\times12) + (5\times1) + 16 + 1 = 46\text{ u}$, मेथनॉल से अंतर = $46 - 32 = 14\text{ u}$) 3. **प्रोपॅनॉल (प्रोपाइल अल्कोहल):** $C_3H_7OH$ (आणविक द्रव्यमान = $(3\times12) + (7\times1) + 16 + 1 = 60\text{ u}$, एथनॉल से अंतर = $60 - 46 = 14\text{ u}$) 4. **ब्यूटेनॉल (ब्यूटाइल अल्कोहल):** $C_4H_9OH$ (आणविक द्रव्यमान = $(4\times12) + (9\times1) + 16 + 1 = 74\text{ u}$, प्रोपॅनॉल से अंतर = $74 - 60 = 14\text{ u}$)
Q10. उपयुक्त उदाहरणों की सहायता से कार्बन यौगिकों में सहसंयोजक बंधों के निर्माण को समझाइए। यह भी समझाइए कि कार्बन इलेक्ट्रॉनों को खोने या प्राप्त करने के बजाय सहसंयोजक बंध क्यों बनाता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बन आबंधन का परिचय\nकार्बन एक अद्वितीय तत्व है जो बड़ी संख्या में यौगिकों का निर्माण करता है। कार्बन की परमाणु संख्या 6 है, जिसका अर्थ है कि इसके पास 6 इलेक्ट्रॉन हैं जो K-कोश में 2 और L-कोश में 4 के रूप में वितरित हैं। इसलिए, कार्बन के सबसे बाहरी कोश में 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं और इसे एक स्थिर उत्कृष्ट गैस विन्यास (अष्टक) प्राप्त करने के लिए 4 और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। ### कार्बन सहसंयोजक बंध क्यों बनाता है\nकार्बन निम्नलिखित ऊर्जावान कारणों से आयनिक बंध नहीं बना सकता है: - **4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना:** यदि कार्बन $C^{4-}$ ऋणायन बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है, तो 6 प्रोटॉन वाले नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को संभालना बहुत कठिन होगा, जिससे सिस्टम अत्यधिक अस्थिर हो जाएगा। - **4 इलेक्ट्रॉन खोना:** यदि कार्बन $C^{4+}$ धनायन बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन खोता है, तो संयोजकता कोश से चार इलेक्ट्रॉनों को निकालने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जिससे केवल 2 इलेक्ट्रॉनों को संभालने वाले 6 प्रोटॉन बच जाएंगे। - **इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी:** इन ऊर्जा बाधाओं को दूर करने के लिए, कार्बन अन्य कार्बन परमाणुओं या हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और क्लोरीन जैसे अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ अपने चार संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को साझा करके स्थिरता प्राप्त करता है। इलेक्ट्रॉन युग्मों की साझेदारी के माध्यम से इस प्रकार के आबंधन को **सहसंयोजक बंध** कहा जाता है। ### सहसंयोजक आबंधन के उदाहरण 1. **मीथेन ($CH_4$) का निर्माण:** कार्बन अपने चार संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है, जिनमें से प्रत्येक एक इलेक्ट्रॉन का योगदान देता है। इसके परिणामस्वरूप चार एकल सहसंयोजक बंध बनते हैं। 2. **ऑक्सीजन अणु ($O_2$) का निर्माण:** प्रत्येक ऑक्सीजन अणु के पास 6 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं। वे अपने बीच इलेक्ट्रॉनों के दो जोड़े साझा करते हैं, जिससे एक द्वि सहसंयोजक बंध बनता है। 3. **नाइट्रोजन अणु ($N_2$) का निर्माण:** प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु के पास 5 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं और वे इलेक्ट्रॉनों के तीन जोड़े साझा करते हैं, जिससे एक त्रि सहसंयोजक बंध बनता है। ### सहसंयोजक यौगिकों की विशेषताएं - इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं क्योंकि इनके बीच आकर्षण बल कमजोर होते हैं। - ये आमतौर पर बिजली के बुरे चालक होते हैं क्योंकि इनमें आवेशित आयन नहीं होते हैं। - ये पानी में ज्यादातर अघुलनशील होते हैं लेकिन कार्बनिक विलायक में घुलनशील होते हैं।
Q11. इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना का उपयोग करके नाइट्रोजन अणु ($N_2$) में सहसंयोजक बंध के निर्माण को समझाइए। यह भी समझाइए कि सामान्य परिस्थितियों में नाइट्रोजन गैस रासायनिक रूप से बहुत कम अभिक्रियाशील क्यों होती है। 3 Marks
उत्तर (Answer): नाइट्रोजन की परमाणु संख्या 7 है, और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 5 है। इसका अर्थ है कि नाइट्रोजन परमाणु के सबसे बाहरी कोश में पाँच संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं और इसे निकटतम अक्रिय गैस, नियॉन जैसी स्थायी अष्टक संरचना प्राप्त करने के लिए तीन और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इस स्थायी विन्यास को प्राप्त करने के लिए, दो नाइट्रोजन परमाणु एक-दूसरे के निकट आते हैं और अपने बीच संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के तीन युग्मों को साझा करते हैं। तीन इलेक्ट्रॉन युग्मों को साझा करके, प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु अपना अष्टक पूरा करता है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच एक त्रिक सहसंयोजक बंध का निर्माण होता है। इसे इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में दर्शाया जा सकता है जहाँ दो N प्रतीकों के बीच के उभयनिष्ठ क्षेत्र में बिन्दुओं के तीन जोड़े दिखाए जाते हैं। \nइसकी रासायनिक निष्क्रियता के संबंध में, नाइट्रोजन गैस ($N_2$) सामान्य परिस्थितियों में अत्यधिक निष्क्रिय होती है क्योंकि दोनों नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच त्रिक सहसंयोजक बंध से जुड़ी बंध वियोजन ऊर्जा बहुत अधिक होती है। एक त्रिक बंध को तोड़ने के लिए भारी मात्रा में सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो सामान्यतः कमरे के तापमान पर उपलब्ध नहीं होती है। परिणामस्वरूप, नाइट्रोजन अणु अन्य तत्वों या यौगिकों के साथ प्रतिक्रिया करने के लिए आसानी से अलग नहीं होते हैं, जिससे यह गैस वायुमंडल में काफी हद तक अक्रिय और स्थिर बनी रहती है।
Q12. उदाहरण के रूप में उपयुक्त रासायनिक समीकरणों के साथ संकलन (Addition) अभिक्रिया और प्रतिस्थापन (Substitution) अभिक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): संकलन अभिक्रिया (Addition reaction) एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे द्विबंध या त्रिबंध वाले एल्कैन और एल्कन) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन, क्लोरीन या ब्रोमीन जैसे अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया करके एक एकल संतृप्त उत्पाद बनाते हैं। उदाहरण के लिए, निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एथीन का हाइड्रोजनीकरण: $CH_2=CH_2 + H_2 \xrightarrow{\text{Ni}} CH_3-CH_3$ (एथेन)। दूसरी ओर, प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution reaction) वह अभिक्रिया है जिसमें संतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे एल्कैन) के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को अन्य परमाणुओं या क्रियात्मक समूहों द्वारा विस्थापित कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में मीथेन का क्लोरीनीकरण: $CH_4 + Cl_2 \xrightarrow{\text{Sunlight}} CH_3Cl + HCl$। मुख्य अंतर यह है कि संकलन अभिक्रियाओं में असंतृप्त यौगिकों में बहुबंधों का खुलना शामिल होता है, जबकि प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं मौजूदा हाइड्रोजन परमाणुओं को प्रतिस्थापित करके संतृप्त यौगिकों में होती हैं।
Q13. मिसेल की उपयुक्त आरेखीय व्याख्या की सहायता से साबुन की सफाई प्रक्रिया को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): साबुन की सफाई प्रक्रिया साबुन के अणुओं की दोहरी प्रकृति के कारण होती है, जिसमें एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है जो जल-विरागी (जल से दूर रहने वाली) होती है और एक आयनिक सिरा (जैसे $-COO^- Na^+$) होता है जो जल-रागी (जल को आकर्षित करने वाला) होता है। जब साबुन को पानी में घोला जाता है, तो इसके अणु एक साथ मिलकर मिसेल नामक गोलाकार समुच्चय बनाते हैं। मिसेल में, जल-विरागी हाइड्रोकार्बन पूंछ तैलीय या चिकनी गंदगी के कण से चिपक जाती हैं, जबकि जल-रागी आयनिक सिर बाहर की ओर आसपास के पानी की तरफ होते हैं। यह एक इमल्शन बनाता है जिसमें तेल की बूंद केंद्र में फंसी होती है। जब कपड़ों को हिलाया जाता है या खंगाला जाता है, तो गंदगी को समेटे हुए ये मिसेल पानी की धारा के साथ आसानी से बह जाते हैं। परिणामस्वरूप, कपड़े साफ हो जाते हैं क्योंकि साबुन चिकनाई को तोड़कर उसे निलंबन में रखता है, जिससे वह कपड़े पर वापस नहीं जम पाती है।
Q14. समजात श्रेणी (Homologous Series) क्या होती है? समजात श्रेणी की दो महत्वपूर्ण विशेषताएं लिखिए और एक उदाहरण दीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): समजात श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का एक ऐसा परिवार है जिसकी संरचनात्मक विशेषताएं और रासायनिक गुण समान होते हैं, जिसमें लगातार आने वाले सदस्य एक $CH_2$ समूह ($14\text{ u}$ के आणविक द्रव्यमान का अंतर) से भिन्न होते हैं। समजात श्रेणी की दो महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं: पहली, श्रेणी के सभी सदस्यों को एक सामान्य रासायनिक सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है (उदाहरण के लिए, एल्कैन को $C_nH_{2n+2}$ द्वारा दर्शाया जाता है)। दूसरी, आणविक द्रव्यमान में वृद्धि के साथ गलनांक, क्वथनांक और घनत्व जैसे भौतिक गुणों में क्रमिक वृद्धि या नियमित क्रमिकता दिखाई देती है, जबकि रासायनिक गुण काफी हद तक समान रहते हैं क्योंकि उनमें समान क्रियात्मक समूह होता है। समजात श्रेणी का एक उदाहरण एल्कैन श्रेणी है: मीथेन ($CH_4$), एथेन ($C_2H_6$), प्रोपेन ($C_3H_8$), और ब्यूटेन ($C_4H_{10}$), जहाँ प्रत्येक क्रमिक सदस्य एक $-CH_2-$ इकाई से भिन्न होता है।
Q15. समझाइए कि कार्बन इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके या खोकर आयनिक बंधों के बजाय सहसंयोजक बंध बनाना क्यों पसंद करता है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है, जिसका अर्थ है कि इसके सबसे बाहरी कोष में 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। एक स्थिर अष्टक प्राप्त करने के लिए, इसे या तो 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने होंगे या 4 इलेक्ट्रॉन खोने होंगे। हालांकि, ये दोनों प्रक्रियाएं ऊर्जा की दृष्टि से प्रतिकूल हैं। यदि कार्बन $C^{4+}$ धनायन बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन खो देता है, तो नाभिक से चार मजबूती से बंधे इलेक्ट्रॉनों को हटाने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। इसके विपरीत, यदि यह $C^{4-}$ ऋणायन बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है, तो नाभिक में केवल 6 प्रोटॉन होने पर कुल 6 इलेक्ट्रॉनों को संभालना इसे अत्यधिक अस्थिर बना देगा और भारी स्थैतिक विद्युत प्रतिकर्ष उत्पन्न करेगा। इन ऊर्जा बाधाओं को दूर करने के लिए, कार्बन अन्य कार्बन परमाणुओं या अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ अपने चार संयोजी इलेक्ट्रॉनों को साझा करके बीच का रास्ता अपनाता है। इलेक्ट्रॉन युग्मों की इस साझेदारी के माध्यम से, यह मजबूत सहसंयोजक बंध बनाता है, जिससे बिना किसी इलेक्ट्रॉन को स्थानांतरित किए एक स्थिर अक्रिय गैस इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त होता है।