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जैव प्रक्रम

Subject: विज्ञान | Class: Class 10 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
जैव प्रक्रम (Life Processes) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

अध्याय के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं, परिभाषाओं और प्रक्रमों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:


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### 1. जैव प्रक्रम क्या हैं?

वे सभी प्रक्रम जो संयुक्त रूप से जीव के रख-रखाव का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम (Life Processes) कहलाते हैं।

मुख्य जैव प्रक्रम हैं: पोषण, श्वसन, वहन (परिवहन) और उत्सर्जन।


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### 2. पोषण (Nutrition)

भोजन ग्रहण करने और उसका उपयोग करने की विधि को पोषण कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है:


#### प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)

पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}2$) और जल ($\text{H}2\text{O}$) का उपयोग करके ग्लूकोज बनाने की प्रक्रिया।

6CO₂ + 6H₂O + (सूर्य का प्रकाश + क्लोरोफिल) -> C₆H₁₂O₆ + 6O₂


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### 3. मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)

भोजन का जटिल अणुओं से सरल अणुओं में टूटना ताकि शरीर द्वारा अवशोषित किया जा सके।

1. मुख (Mouth): लार ग्रดि (Salivary Amylase) स्टार्च को शर्करा में बदलती है।

2. ग्रासनली (Oesophagus): क्रमाकुंचन गति द्वारा भोजन को आमाशय तक पहुँचाना।

3. आमाशय (Stomach): यहाँ पेप्सिन (प्रोटीन पाचक एंजाइम), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) और श्लेष्म (Mucus) स्रावित होते हैं।

4. छोटी आंत (Small Intestine): कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पूर्ण पाचन। यहाँ अंगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दीर्घरोम (Villi) कहते हैं, जो अवशोषण का क्षेत्रफल बढ़ाते हैं।

5. बड़ी आंत (Large Intestine): जल का अवशोषण और अपशिष्ट का मल के रूप में संचयन।


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### 4. श्वसन (Respiration)

भोजन (ग्लूकोज) के ऑक्सीकरण से ऊर्जा मुक्त होने की प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं।



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### 5. वहन या परिवहन (Transportation)

#### मानव हृदय (Human Heart)

मानव हृदय एक पेशीय अंग है जो चार कक्षों में बंटा होता है:


#### पौधों में परिवहन


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### 6. उत्सर्जन (Excretion)

शरीर से हानिकारक नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।


#### वृक्क या गुर्दा (Kidney)

1. उच्च दाब पर निस्पंदन (Filtration)

2. चयनात्मक पुनravशोषण (Selective Reabsorption)

3. स्रावण (Secretion)


#### पौधों में उत्सर्जन

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 जैव प्रक्रम (Life Processes)
Overview
परिचय और सजीवों के लक्षण गति और वृद्धि आणوक गति सजीव होने के प्रमाण पोषण (Nutrition) स्वपोषी पोषण (Autotrophic) प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) क्लोरोफिल की भूमिका सूर्य का प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पाद: ग्लूकोज और ऑक्सीजन रंध्रों (Stomata) का कार्य विषमपोषी पोषण (Heterotrophic) प्राणीसम पोषण (Holozoic) - जैसे अमीबा और मनुष्य मृतजीवी पोषण (Saprophytic) - कवक और बैक्टीरिया परजीवी पोषण (Parasitic) - अमरबेल और जूँ मानव में पोषण (Nutrition in Humans) आहार नली (Alimentary Canal) मुँह (मुख गुहा) - लार और एमाइलेज ग्रसिका (Oesophagus) - क्रमाकुंचन गति आमाशय (Stomach) - HCl, पेप्सिन और श्लेष्म क्षुद्रंत्र (Small Intestine) यकृत से पित्त रस (Bile juice) अग्न्याशय से अग्न्याशयिक रस आँत रस और विल्लाई (Villi) द्वारा अवशोषण वृहद्ंत्र (Large Intestine) - जल का अवशोषण गुदा (Anus) - अपशिष्ट निष्कासन श्वसन (Respiration) वायवीय श्वसन (Aerobic) - ऑक्सीजन की उपस्थिति में (ऊर्जा उत्पादन अधिक) अवायवीय श्वसन (Anaerobic) - ऑक्सीजन के बिना (यीस्ट और पेशियों में) मानव श्वसन तंत्र नासिका और श्वास नली फेफड़े और कूपिकाएँ (Alveoli) गैसीय विनिमय (ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान) परिवहन (Transportation) मानव में परिवहन तंत्र हृदय (Heart) - चार कक्षीय पंपिंग अंग रक्त वाहिकाएँ धमनियाँ (Arteries) - शुद्ध रक्त (ऑक्सीजन युक्त) शिराएँ (Veins) - अशुद्ध रक्त (CO2 युक्त) केशिकाएँ (Capillaries) - पदार्थों का आदान-प्रदान रक्त (Blood) - प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स लसिका (Lymph) पादपों में परिवहन जाइलम (Xylem) - जल और खनिजों का परिवहन फ्लोएम (Phloem) - भोजन (शर्करा) का स्थानांतरण उत्सर्जन (Excretion) मानव में उत्सर्जन तंत्र वृक्क (Kidneys) - मुख्य अंग नेफ्रॉन (Nephron) - वृक्क की कार्यात्मक इकाई बोमन संपुट और ग्लोमेरुलस मूत्र निर्माण (छनन, पुनरावशोषण, स्रावण) मूत्रवाहिनी और मूत्राशय मूत्रमार्ग पादप में उत्सर्जन वाष्पसर्जन द्वारा जल निष्कासन पत्तियों का गिरना रेज़िन और गोंद के रूप में संचयन
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. मानव श्वसन की विस्तृत संरचना और क्रियाविधि को समझाइए, जिसमें मानव श्वसन तंत्र और गैसों के आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया गया हो। इसके अलावा, उपयुक्त समीकरणों के साथ विभिन्न मार्गों द्वारा ग्लूकोज के विघटन को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव श्वसन तंत्र की संरचना\nमानव श्वसन तंत्र ऑक्सीजन अंदर लेने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने के लिए उत्तरदायी है। इसके मुख्य अंग और संरचनाएँ निम्नलिखित हैं: - **नासाछिद्र और नासागुहा:** हवा नासाछिद्रों के माध्यम से प्रवेश करती है, जहाँ बारीक बालों और बलगम द्वारा धूल और अशुद्धियाँ छन जाती हैं। नासागुहा आने वाली हवा को गर्म और नम करती है। - **ग्रसनी और कंठ:** हवा नासागुहा से ग्रसनी में और फिर कंठ (वॉइस बॉक्स) से गुजरती है। - **श्वास नली (ट्रैकिया):** यह उपस्थि (कार्टिलेज) के छल्लों द्वारा समर्थित एक नली है जो इसे पिचकने से बचाती है। यह हवा के निरंतर मार्ग को सुनिश्चित करती है। - **श्वासनी और श्वासिकाएँ:** श्वास नली दो मुख्य श्वासनी में विभाजित होती है, जो फेफड़ों में जाकर छोटी श्वासिकाओं में शाखाओं में बँट जाती हैं। - **वायुकोशिकाएँ (एल्विओलाई):** श्वासिकाएँ अंत में छोटी, गुब्बारे जैसी संरचनाओं में समाप्त होती हैं जिन्हें वायुकोशिकाएँ कहते हैं। ये गैसों के आदान-प्रदान के लिए एक विशाल सतह क्षेत्र प्रदान करती हैं। - **डाइफ्राम (मध्यपट):** फेफड़ों के नीचे एक गुंबद के आकार की पेशीय दीवार जो सांस लेने की गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ### सांस लेने की क्रियाविधि (अंतःश्वसन और उच्च्वसन) - **अंतःश्वसन:** जब हम सांस अंदर लेते हैं, तो डाइफ्राम सिकुड़ता है और नीचे की ओर गति करता है, जबकि पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर गति करती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है, फेफड़ों के भीतर हवा का दबाव कम होता है, और हवा फेफड़ों में भर जाती है। - **उच्च्वसन:** जब हम सांस बाहर छोड़ते हैं, तो डाइफ्राम अपने मूल आकार में लौटता है और पसलियाँ नीचे की ओर गति करती हैं। इससे फेफड़ों का दबाव बढ़ता है और हवा बाहर निकल जाती है। ### ग्लूकोज के विभिन्न मार्गों द्वारा विघटन\nग्लूकोज (6-कार्बन अणु) पहले कोशिकाद्रव्य में पाइरुवेट (3-कार्बन अणु) में विखंडित होता है। इस प्रक्रिया को ग्लाइकोलाइसिस कहते हैं। 1. **ऑक्सीजन की उपस्थिति (वायवीय श्वसन):** यह माइटोकॉन्ड्रिया में होता है। पाइरुवेट कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में विखंडित होता है, जिससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। *समीकरण:* $\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{O}_2 \rightarrow 6\text{CO}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + \text{ऊर्जा}$ 2. **मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी:** अत्यधिक व्यायाम के दौरान, मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी होने पर पाइरुवेट लैक्टिक एसिड में बदल जाता है, जिससे ऐंठन होती है। *समीकरण:* $\text{पाइरुवेट} \rightarrow \text{लैंगिक अम्ल} + \text{ऊर्जा}$ 3. **यीस्ट में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति:** यीस्ट में किण्वन के दौरान, पाइरुवेट इथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। *समीकरण:* $\text{पाइरुवेट} \rightarrow \text{इथेनॉल} + \text{CO}_2 + \text{ऊर्जा}$
Q2. वृक्क की मूल निस्पंदन इकाई नेफ्रॉन की संरचना और कार्यप्रणाली को समझाइए। मानव में मूत्र का निर्माण और उत्सर्जन कैसे होता है, इसका वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### नेफ्रॉन की संरचना\nप्रत्येक वृक्क में लाखों बुनियादी निस्पंदन इकाइयाँ होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। नेफ्रॉन में निम्नलिखित मुख्य घटक होते हैं: * **ग्लोमेरुलस:** पतली दीवारों वाली रक्त केशिकाओं का एक गुच्छा जो बोमन कैप्सूल नामक नली के कप के आकार के छोर में बंद होता है। * **बोमन कैप्सूल (बोमन संपूट):** एक कप के आकार की संरचना जो ग्लोमेरुलस से फ़िल्टर किए गए तरल पदार्थ को एकत्र करती है। * **वृक्क नलिका (रिनल ट्यूबल):** बोमन कैप्सूल से निकलने वाली नली, जो तीन क्षेत्रों में विभाजित होती है: समीपस्थ संवलित नलिका (PCT), हेनले का लूप, और दूरस्थ संवलित नलिका (DCT)। * **संग्राहक नलिका:** दूरस्थ संवलित नलिका एक संग्राहक नलिका में खुलती है, जो कई नेफ्रॉन से मूत्र प्राप्त करती है और इसे मूत्रवाहिनी तक पहुँचाती है। ### मूत्र निर्माण की कार्यप्रणाली\nमूत्र निर्माण में तीन प्रमुख चरण शामिल हैं: 1. **ग्लोमेरुलस निस्पंदन (फिल्ट्रेशन):** वृक्क धमनी के माध्यम से उच्च दबाव में रक्त ग्लोमेरुलस में प्रवेश करता है। पानी, ग्लूकोज, लवण और यूरिया रक्त से बोमन कैप्सूल में छन जाते हैं। इस फ़िल्टर किए गए तरल को ग्लोमेरुलुर फिल्ट्रेट कहा जाता है। 2. **नलिकाकार पुनअवशोषण (Reabsorption):** जैसे-जैसे फिल्ट्रेट वृक्क नलिका के साथ बहता है, ग्लूकोज, अमीनो एसिड, लवण और पानी का एक बड़ा हिस्सा जैसे उपयोगी पदार्थ चुनिंदा रूप से आसपास की रक्त केशिकाओं में वापस अवशोषित हो जाते हैं। 3. **नलिकाकार स्राव (Secretion):** शरीर के तरल पदार्थों के आयनिक और एसिड-बेस संतुलन को बनाए रखने के लिए रक्त से कुछ हानिकारक पदार्थ जैसे अतिरिक्त आयन और अपशिष्ट उत्पाद सक्रिय रूप से वृक्क नलिका में स्रावित होते हैं। ### मूत्र का उत्सर्जन\nवृक्क नलिका में शेष तरल पदार्थ को अब मूत्र कहा जाता है। यह संग्राहक नलिकाओं से मूत्रवाहिनी में बहता है, जो इसे मूत्राशय तक पहुँचाते हैं। मूत्राशय एक पेशीय थैली है जो मूत्र को तब तक संग्रहीत करती है जब तक कि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से स्वैच्छिक संकेत पेशाब के दौरान मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्र को छोड़ने की अनुमति नहीं देते हैं।
Q3. मानव पाचन तंत्र का वर्णन कीजिए। आहार नाल के विभिन्न भागों द्वारा स्रावित विभिन्न पाचक रस और एंजाइमों की पाचन में भूमिका को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव पाचन तंत्र का परिचय\nमानव पाचन तंत्र में आहार नाल और संबंधित पाचक ग्रंथियाँ शामिल होती हैं। आहार नाल मुंह से गुदा तक फैली एक लंबी पेशीय नली है। पाचन जटिल खाद्य अणुओं को सरल, अवशोषित रूपों में तोड़ने की प्रक्रिया है। ### आहार नाल के भाग और उनकी भूमिका * **मुख और मुख गुहा:** पाचन मुख से शुरू होता है। दांत भोजन को चबाकर छोटे टुकड़ों में पीसते हैं। लार ग्रंथियां लार स्रावित करती हैं जिसमें लार एमाइलेज एंजाइम होता है, जो स्टार्च को सरल शर्करा में तोड़ता है। * **ग्रसिका (ग्रासनली):** चबाया हुआ भोजन क्रमानुकुंचन गतियों (पेरिस्टाल्टिक मूवमेंट) के माध्यम से ग्रसिका से नीचे जाता है। यहाँ कोई पाचन नहीं होता है। * **अमाशय:** अमाशय एक पेशीय थैली है जो भोजन के प्रवेश करने पर फैल जाती है। इसकी दीवारें जठर रस स्रावित करती हैं जिसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड, पेप्सिन और श्लेष्म होता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड एक अम्लीय माध्यम बनाता है और हानिकारक जीवाणु को मारता है। पेप्सिन प्रोटीन को सरल पेप्टाइड्स में पचाता है। श्लेष्म अम्ल की क्रिया से अमाशय की आंतरिक परत की रक्षा करता है। * **छोटी आंत:** यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पूर्ण पाचन का स्थल है। यह दो प्रमुख ग्रंथियों से स्राव प्राप्त करती है: * **यकृत (जिगर):** पित्त स्रावित करता है, जो भोजन को क्षारीय बनाता है और बड़े वसा ग्लोबुल को छोटे-छोटे टुकड़ों में emulsify करता है। * **अग्न्याशय:** अग्न्याशय रस स्रावित करता है जिसमें प्रोटीन पाचन के लिए ट्रिप्सिन और वसा को तोड़ने के लिए लाइपेज होता है। आंत की दीवार आंतों का रस भी स्रावित करती है जिसमें ऐसे एंजाइम होते हैं जो जटिल कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में, प्रोटीन को अमीनो एसिड में और वसा को फैटी एसिड और ग्लिसरोल में बदलते हैं। * **बड़ी आंत:** बिना पचे हुए भोजन बड़ी आंत में चला जाता है, जहाँ शेष सामग्री से पानी और आवश्यक लवण अवशोषित कर लिए जाते हैं। अंत में अपशिष्ट मल गुदा के माध्यम से बाहर निकाल दिया जाता है। ### पाचक एंजाइमों का महत्व\nएंजाइम जैविक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं जो बिना स्वयं कोई परिवर्तन किए जटिल जैव अणुओं के टूटने की गति को तेज करते हैं, जिससे कुशल पोषक तत्व अवशोषण सुनिश्चित होता है।
Q4. मानव श्वसन तंत्र की विस्तृत संरचना और कार्यप्रणाली को समझाइए। मानव में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है? 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव श्वसन तंत्र की संरचना\nमानव श्वसन तंत्र वायुमंडल और रक्त के बीच गैसों के आदान-प्रदान के लिए उत्तरदायी होता है। इसमें निम्नलिखित मुख्य अंग होते हैं: * **नासाछिद्र और नासिका गुहा:** वायु नासाछिद्रों के माध्यम से प्रवेश करती है, जहाँ धूल के कणों को रोकने के लिए सूक्ष्म बाल और श्लेष्म होते हैं। नासिका गुहा आने वाली हवा को गर्म और नम भी करती है। * **ग्रसनी और कंठ:** वायु नासिका गुहा से ग्रसनी में जाती है जो श्वास नली की ओर ले जाती है। कंठ श्वास नली के ऊपरी भाग पर स्थित होता है और ध्वनि उत्पन्न करने में सहायक होता है। * **श्वास नली (ट्रैकिया):** यह उपास्थि वलयों द्वारा समर्थित एक नली है जो हवा न होने पर इसे पिचकने से बचाती है। यह दो शाखाओं में विभाजित होती है जिन्हें ब्रॉन्काई कहते हैं। * **ब्रॉन्काई और ब्रॉन्किओल्स:** प्रत्येक ब्रोन्कस फेफड़ों में प्रवेश करता है और बार-बार विभाजित होकर ब्रॉन्किओल्स बनाता है, जो अंततः अल्वेओली (वायु कोष्ठिका) में समाप्त होते हैं। * **अल्वेओली (वायु कोष्ठिका):** ये गुब्बारे जैसी संरचनाएं होती हैं जो रक्त केशिकाओं के घने जाल से घिरी होती हैं। ये गैसों के आदान-प्रदान के लिए बहुत बड़ा सतही क्षेत्र प्रदान करती हैं। * **फेफड़े और डायाफ्राम (मध्यपट्ट):** वक्ष गुहा में स्पंजी फेफड़ों की एक जोड़ी होती है। फेफड़ों के नीचे डायाफ्राम नामक एक गुंबद के आकार की पेशीय परत होती है, जो सांस लेने की गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ### श्वसन की कार्यप्रणाली\nसांस लेने में दो मुख्य चरण होते हैं: * **अंतःश्वसन:** इसके दौरान पसलियां ऊपर और बाहर की ओर गति करती हैं, और डायाफ्राम सिकुड़कर चपटा हो जाता है। इससे वक्ष गुहा का आयतन बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों के अंदर का दबाव कम हो जाता है। परिणामस्वरूप, फेफड़ों को भरने के लिए वायुमंडल से हवा अंदर आ जाती है। * **उच्छवास:** इसके दौरान पसलियां नीचे और अंदर की ओर गति करती हैं, और डायाफ्राम अपने गुंबद के आकार को पुनः प्राप्त करने के लिए शिथिल हो जाता है। इससे वक्षीय आयतन कम हो जाता है और फेफड़ों के भीतर दबाव बढ़ जाता है, जिससे हवा नाक के माध्यम से बाहर निकल जाती है। ### गैसों का परिवहन * **ऑक्सीजन का परिवहन:** अल्वेओली से ऑक्सीजन रक्त केशिकाओं में विसरित होती है, जहाँ यह लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोड्लोबिन के साथ मिलकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है। फिर इसे शरीर के सभी ऊतकों में पहुँचाया जाता है जहाँ कोशिकीय श्वसन के लिए ऑक्सीजन मुक्त होती है। * **कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन:** कोशिकीय श्वसन के दौरान उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड ऑक्सीजन की तुलना में पानी में अधिक घुलनशील है। इसलिए, यह ज्यादातर ऊतकों से वापस अल्वेओली तक रक्त प्लाज्मा में घुली हुई अवस्था में पहुँचाई जाती है, जहाँ से इसे शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
Q5. मानव वृक्क (गुर्दे) की मूल फिल्टरिंग इकाइयों, नेफ्रॉन की संरचना और कार्यप्रणाली को समझाइए, तथा मूत्र निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### नेफ्रॉन का परिचय\nनेफ्रॉन मानव गुर्दे की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाइयाँ हैं। प्रत्येक गुर्दे में दस लाख से अधिक नेफ्रॉन होते हैं जो रक्त को छानते हैं, यूरिया और यूरिक एसिड जैसे नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्टों को हटाते हैं, और शरीर में पानी-इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखते हैं। ### नेफ्रॉन की संरचना\nएक नेफ्रॉन में निम्नलिखित मुख्य घटक होते हैं: 1. **बाउमैन कैप्सूल (संपुट):** नेफ्रॉन नली का एक कप के आकार का, दो दीवारों वाला सिरा जो छने हुए तरल पदार्थ को इकट्ठा करता है। 2. **ग्लोमेरुलस (केशिकागुच्छ):** बाउमैन कैप्सूल के भीतर संलग्न रक्त केशिकाओं का एक घना नेटवर्क। रक्त अभिवाही धमनीिका (अफेरेंट धमनीिका) के माध्यम سے प्रवेश करता है और अपवाही धमनीिका से बाहर निकलता है। 3. **वृक्क नलिका (रिनल ट्यूबल):** बाउमैन कैप्सूल से निकलने वाली नली, जो तीन अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित है: - **समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT):** पहली कुंडलित क्षेत्र। - **हेनले का लूप:** यू-आकार की हेयर-पिन संरचना। - **दूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT):** दूसरी कुंडलित क्षेत्र जो अंततः एक संग्रह नाहिका में जाती है। 4. **संग्राहक नलिका (कलेक्टिंग डक्ट):** कई नेफ्रॉन से मूत्र एकत्र करती है और इसे मूत्रवाहिनी (यूरेटर) में भेजती है। ### मूत्र निर्माण की प्रक्रिया\nमूत्र निर्माण में तीन प्रमुख चरण शामिल हैं: 1. **ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन (अतिसूक्ष्म निस्पंदन):** - आने वाली और जाने वाली धमनीिकाओं के व्यासों में अंतर से बने उच्च दबाव के तहत ग्लोमेरुलस के माध्यम से रक्त बहता है। - पानी, ग्लूकोज, लवण, अमीनो एसिड और यूरिया रक्त से बाउमैन कैप्सूल में छन जाते हैं। बड़े प्रोटीन और रक्त कोशिकाएं रक्त में ही रहती हैं। 2. **ट्यूबलर पुनरावशोषण (रीअब्जॉर्प्शन):** - जैसे ही निस्यंद (फिल्ट्रेट) वृक्क नलिका से नीचे बहता है (विशेष रूप से PCT और हेनले के लूप में), ग्लूकोज, अमीनो एसिड और पानी तथा लवण की बड़ी मात्रा जैसे उपयोगी पदार्थों को चुनिंदा रूप से वापस नलिका को घेरने वाली रक्त केशिकाओं में अवशोषित कर लिया जाता है। 3. **ट्यूबलर स्राव:** - कुछ हानिकारक पदार्थ जैसे अतिरिक्त पोटेशियम, हाइड्रोजन आयन और कुछ दवाएं नलिका कोशिकाओं द्वारा रक्त से ट्यूबलर तरल पदार्थ में सक्रिय रूप से स्रावित किए जाते हैं। यह शरीर के तरल पदार्थों के आयनिक संतुलन और पीएच को बनाए रखता है। ### निष्कासन - शेष तरल पदार्थ, जिसे अब **मूत्र** कहा जाता है, संग्रह नलिका में एकत्र किया जाता है, मूत्रवाहिनी के माध्यम से मूत्राशय में ले जाया जाता है, और तब तक संग्रहीत किया जाता है जब तक कि यह मूत्रमार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर नहीं निकल जाता।
Q6. मानव हृदय की आंतरिक संरचना और कार्य प्रणाली का वर्णन कीजिए। समझाइए कि हृदय के माध्यम से रक्त परिसंचरण (दोहरा परिसंचरण) कैसे होता है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव हृदय का परिचय 1. मानव हृदय मुट्ठी के आकार का एक पेशीय अंग है, जो वक्ष गुहा में थोड़ा बाईं ओर स्थित होता है। 2. इसका मुख्य कार्य पूरे शरीर में रक्त पंप करना है ताकि ऑक्सीजन और पोषक तत्व की आपूर्ति हो सके और कार्बन डाइऑक्साइड तथा चयापचय अपशिष्ट एकत्र हो सकें। ### हृदय की आंतरिक संरचना - **चार कक्ष:** ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त के मिलने को रोकने के लिए हृदय चार कक्षों में विभाजित है: - **अलिंद (ऊपरी कक्ष):** दायां अलिंद और बायां अलिंद। ये प्राप्त करने वाले कक्ष के रूप में कार्य करते हैं। - **निलय (निचले कक्ष):** दायां निलय और बायां निलय। ये मोटी पेशीय दीवारों वाले पंपिंग कक्ष के रूप में कार्य करते हैं। - **सेप्टम (पर्दा):** एक पेशीय दीवार जो हृदय के बाएं और दाएं हिस्सों को पूरी तरह से अलग करती है। - **कपाट (वाल्व):** त्रिवलनी कपाट (दाएं अलिंद और दाएं निलय के बीच) और द्विवलनी/मिट्रल कपाट (बाएं अलिंद और बाएं निलय के बीच) रक्त के पीछे बहने को रोकते हैं। अर्धचंद्र कपाट हृदय से निकलने वाली धमनियों के आधार पर मौजूद होते हैं। ### कार्य प्रणाली और दोहरा परिसंचरण\nप्रत्येक पूर्ण चक्र के दौरान रक्त हृदय से दो बार गुजरता है, जिसे **दोहरा परिसंचरण (डबल सर्कुलेशन)** कहा जाता है। इसमें दो मार्ग शामिल हैं: 1. **फुफ्फुसीय परिसंचरण (हृदय का दाहिना हिस्सा):** - शरीर के विभिन्न भागों से डीऑक्सीजनेटेड (अशुद्ध) रक्त दो बड़ी नसों जिन्हें महाशिरा (वेना कावा) कहा जाता है, द्वारा एकत्र किया जाता है और **दाएं अलिंद** में डाला जाता है। - जब दायां अलिंद सिकुड़ता है, तो रक्त त्रिवलनी कपाट के माध्यम से **दाएं निलय** में धकेल दिया जाता है। - दाएं निलय से, रक्त **फुफ्फुसीय धमनी** में पंप किया जाता है, जो इसे फेफड़ों तक ले जाती है। - फेफड़ों में, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ दी जाती है, और रक्त द्वारा ताजी ऑक्सीजन अवशोषित कर ली जाती है। 2. **दैहिक परिसंचरण (हृदय का बायां हिस्सा):** - फेफड़ों से ऑक्सीजनेटेड (शुद्ध) रक्त फुफ्फुसीय शिराओं के माध्यम से **बाएं अलिंद** में लौटता है। - बाएं अलिंद के संकुचन से रक्त द्विवलनी कपाट के माध्यम से **बाएं निलय** में जाता है। - बाएं निलय की पेशीय दीवार सबसे मोटी होती है, जो उच्च दबाव के साथ शरीर की सबसे बड़ी धमनी **महाधमनी (महाधमनी/आोर्टा)** में शुद्ध रक्त पंप करती है। - महाधमनी शरीर के सभी अंगों को ऑक्सीजन युक्त रक्त वितरित करती है। ### दोहरे परिसंचरण का महत्व - दोहरा परिसंचरण ऑक्सीजनेटेड और डीऑक्सीजनेटेड रक्त के पूर्ण पृथक्करण को सुनिश्चित करता है। - यह कुशल प्रणाली पक्षियों और स्तनधारियों जैसे गर्म खून वाले जानवरों के शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए उनकी उच्च ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऑक्सीजन की उच्च आपूर्ति की अनुमति देती है।
Q7. मानव में पोषण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए। भोजन के पाचन में आहार नली के विभिन्न भागों और पाचक ग्रन्थियों की भूमिका का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव पोषण का परिचय\nमानव विषमपोषी होते हैं और होलोजोइक (प्राणिसम) पोषण प्रदर्शित करते हैं, जिसमें पांच प्रमुख चरण शामिल हैं: अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण और मल त्याग। आहार नली मुंह से गुदा तक चलने वाली एक लंबी पेशीय नली है, जो विभिन्न पाचक ग्रंथियों से जुड़ी होती है जो एंजाइम स्रावित करती हैं। ### 1. मुख और मुख गुहा (अंतर्ग्रहण और प्रारंभिक पाचन) - **अंतर्ग्रहण:** भोजन मुंह के माध्यम से शरीर के अंदर लिया जाता है। - **दांत:** भोजन को चबाते हैं, इसे छोटे कणों में तोड़ते हैं ताकि एंजाइम की क्रिया के लिए सतह का क्षेत्रफल बढ़ सके। - **लात ग्रंथियां:** लार स्रावित करती हैं जिसमें लार एमाइलेज (पिट्यालिन) एंजाइम होता है। लार एमाइलेज जटिल स्टार्च को साधारण शर्करा (माल्टोज़) में तोड़ता है। लार आसानी से निगलने के लिए भोजन को नम भी करती है। ### 2. ग्रासनली (ओसोफेगस) - चबाया हुआ भोजन, जिसे बोलस कहा जाता है, भोजन नली या ग्रासनली से नीचे जाता है। - भोजन को पेट में आगे धकेलने के लिए ग्रासनली की दीवारें क्रमिक संकुचन और शिथिलन से गुजरती हैं जिन्हें **क्रमाकुंचन गति (पेरिस्टाल्टिक मूवमेंट)** कहा जाता है। ### 3. आमाशय (पेट) - आमाशय एक पेशीय थैलीनुमा अंग है जो भोजन के प्रवेश करने पर फैलता है। - **जठर ग्रंथियां:** आमाशय की दीवार में मौजूद होती हैं, जो जठर रस स्रावित करती हैं जिसमें शामिल हैं: - **हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl):** पेप्सिन के सक्रियण के लिए आवश्यक अम्लीय माध्यम बनाता है और भोजन के साथ प्रवेश करने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है। - **पेप्सिन:** एक प्रोटीन-पाचन एंजाइम जो प्रोटीन को सरल पेप्टाइड्स में तोड़ता है। - **श्लेष्म (म्यूकस):** HCl की संक्षारक क्रिया से आमाशय की आंतरिक परत की रक्षा करता है। ### 4. छोटी आंत - यह आहार नली का सबसे लंबा हिस्सा है और कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के पूर्ण पाचन का स्थल है। - **यकृत (लिवर):** पित्त रस स्रावित करता है, जो पित्ताशय में संग्रहित होता है। पित्त दो कार्य करता है: अग्नाशयी एंजाइमों के कार्य करने के लिए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है, और बड़े वसा ग्लोब्यूल्स को छोटे में पायसीकृत करता है। - **अग्न्याशय (पैंक्रियास):** अग्नाशयी रस स्रावित करता है जिसमें ट्रिप्सिन (प्रोटीन पाचन के लिए) और लाइपेज (पायसीकृत वसा के लिए) होता है। - **आंत की ग्रंथियां:** आंत का रस स्रावित करती हैं जो अंततः प्रोटीन को अमीनो एसिड में, जटिल कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में, और वसा को फैटी एसिड और ग्लिसरोल में बदल देती हैं। - **अवशोषण:** छोटी आंत की आंतरिक दीवार में **विली (रसान्कुर)** नामक उंगली जैसी संरचनाएं होती हैं, जो रक्त वाहिकाओं से प्रचुर मात्रा में आपूर्ति की जाती हैं। विली रक्त प्रवाह में पचने वाले भोजन के अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को काफी हद तक बढ़ा देती है। ### 5. बड़ी आंत - बिना पचे हुए भोजन को बड़ी आंत में भेजा जाता है, जहाँ इस सामग्री से अधिक पानी अवशोषित किया जाता है। - शेष अपशिष्ट पदार्थ को मलाशय के माध्यम से गुदा से बाहर निकाल दिया जाता है, इस प्रक्रिया को मल त्याग (इजेस्चन) कहा जाता है।
Q8. नेफ्रॉन की संरचना और कार्यप्रणाली को समझाइए, जो मानव उत्सर्जन तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है। मानव गुर्दे में मूत्र का निर्माण कैसे होता है, इसका वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### नेफ्रॉन और उत्सर्जन तंत्र का परिचय\nमानव उत्सर्जन तंत्र में गुर्दे की एक जोड़ी, मूत्रवाहिनी की एक जोड़ी, एक मूत्राशय और एक मूत्रमार्ग शामिल होता है। प्रत्येक गुर्दे की बुनियादी संरचनात्मक और कार्यात्मक निस्पंदन इकाई को **नेफ्रॉन** कहा जाता है। प्रत्येक गुर्दे में लाखों नेफ्रॉन होते हैं। ### नेफ्रॉन की संरचना\nएक नेफ्रॉन निम्नलिखित मुख्य भागों से मिलकर बना होता है: 1. **बोमेन कैप्सूल (Bowman's Capsule):** नेफ्रॉन का कप के आकार का, दो दीवारों वाला सिरा। 2. **ग्लोमेरुलस (Glomerulus):** बोमेन कैप्सूल के भीतर बंद रक्त केशिकाओं का एक घना जाल। यह वृक्क धमनी की शाखाओं द्वारा बनता है। 3. **वृक्क नलिका (Renal Tubule):** बोमेन कैप्सूल से जुड़ा एक लंबा नलिकाकार भाग, जिसे आगे विभाजित किया गया है: - **समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT)** - **हेनले का लूप** (U-आकार की संरचना) - **दूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT)** 4. **संग्राहक नली (Collecting Duct):** DCT एक संग्राहक नली में खुलता है जो कई नेफ्रॉन से मूत्र प्राप्त करता है और इसे मूत्रवाहिनी में पहुँचाता है। ### मूत्र निर्माण की क्रियाविधि\nमूत्र निर्माण में तीन प्रमुख चरण शामिल हैं: 1. **ग्लोमेरुलर निस्पंदन (Glomerular Filtration):** - उच्च दबाव में ग्लोमेरुलस के माध्यम से रक्त बहता है। - पानी, ग्लूकोज, अमीनो एसिड, लवण और नाइट्रोजनयुक्त कचरा (जैसे यूरिया) रक्त से बोमेन कैप्सूल में छन जाता है। - बड़े प्रोटीन और रक्त कोशिकाएं रक्त में ही पीछे छूट जाती हैं। - छने हुए तरल को **ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेट** कहा जाता है। 2. **नलिकार पुनअवशोषण (Tubular Reabsorption):** - जैसे ही फिल्ट्रेट नेफ्रॉन के नलिकाकार भाग (PCT, हेनले का लूप, DCT) से बहता है, उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो एसिड और पानी की बड़ी मात्रा को नलिका के चारों ओर रक्त केशिकाओं में चुनिंदा रूप से वापस अवशोषित कर लिया जाता है। 3. **नलिकार स्राव (Tubular Secretion):** - कुछ हानिकारक अपशिष्ट उत्पाद और आयन (जैसे पोटेशियम, हाइड्रोजन आयन) जो रक्त में रह जाते हैं, उन्हें आसपास की रक्त केशिकाओं द्वारा नलिका में सक्रिय रूप से स्रावित किया जाता है। ### संग्रह और उत्सर्जन - नलिका में बचा हुआ तरल पदार्थ, जिसे अब **मूत्र** कहा जाता है, में पानी, यूरिया, यूरिक एसिड और अतिरिक्त लवण होते हैं। - मूत्र संग्रह नली से मूत्रवाहिनी में यात्रा करता है, मूत्राशय में अस्थायी रूप से जमा होता है, और अंत में मूत्रमार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
Q9. मानव हृदय की आंतरिक संरचना और कार्यप्रणाली का वर्णन कीजिए। दोहरा परिसंचरण पथ की सहायता से इसके माध्यम से रक्त के परिसंचरण को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव हृदय का परिचय\nमानव हृदय हमारी मुट्ठी के आकार का एक पेशीय अंग है, जो छाती की गुहा में स्थित होता है। इसे शरीर के सभी भागों में ऑक्सीजन युक्त रक्त और फेफड़ों में ऑक्सीजन रहित रक्त पंप करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त के मिलने को रोकने के लिए हृदय को चार कक्षों में विभाजित किया गया है। ### मानव हृदय की संरचना - **कक्ष (Chambers):** - **ऊपरी दो कक्ष:** दाहिना आलिंद (Right atrium) और बायां आलिंद (Left atrium) जो पतली दीवार वाले प्राप्त करने वाले कक्ष हैं। - **निचले दो कक्ष:** दाहिना निलय (Right ventricle) और बायां निलय (Left ventricle) जो मोटी दीवार वाले पंपिंग कक्ष हैं। - **सेप्टम (Septum):** एक पेशीय दीवार जो हृदय के बाएं हिस्से को दाहिने हिस्से से पूरी तरह से अलग करती है, जिससे रक्त का मिश्रण रोकता है। - **कपाट (Valves):** - **ट्रिकसपिड वाल्व:** दाहिने आलिंद और दाहिने निलय के बीच स्थित होता है। - **बिकसपिड (मिट्रल) वाल्व:** बाएं आलिंद और बाएं निलय के बीच स्थित होता है। - **कपाट सुनिश्चित करते हैं** कि रक्त केवल एक ही दिशा में प्रवाहित हो और पीछे की ओर न बहे। - **हृदय से जुड़ी रक्त वाहिकाएं:** - **महाशिरा (Vena Cava):** शरीर से अशुद्ध रक्त को दाहिने आलिंद में लाती है। - **पल्मोनरी धमनी:** दाहिने निलय से अशुद्ध रक्त को फेफड़ों में ले जाती है। - **पल्मोनरी शिरा:** फेफड़ों से शुद्ध रक्त को बाएं आलिंद में लाती है। - **महाधमनी (Aorta):** बाएं निलय से शुद्ध रक्त को पूरे शरीर में वितरित करती है। ### मानव में दोहरा परिसंचरण (Double Circulation)\nमनुष्यों में रक्त परिसंचरण के मार्ग को **दोहरा परिसंचरण** कहा जाता है क्योंकि शरीर के एक पूर्ण चक्र में रक्त हृदय से दो बार गुजरता है। इसमें दो रास्ते होते हैं: 1. **फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation):** - दाहिने निलय से अशुद्ध रक्त पल्मोनरी धमनी के माध्यम से फेफड़ों में पंप किया जाता है। - फेफड़ों में, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी जाती है और ऑक्सीजन अवशोषित की जाती है। - शुद्ध रक्त पल्मोनरी शिरा द्वारा वापस बाएं आलिंद में लाया जाता है। 2. **दैहिक परिसंचरण (Systemic Circulation):** - बाएं निलय से शुद्ध रक्त महाधमनी में पंप किया जाता है, जो इसे शरीर के सभी ऊतकों तक पहुंचाता है। - कोशिकीय श्वसन के लिए ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है, और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है। - अशुद्ध रक्त नसों द्वारा एकत्र किया जाता है और महाशिरा के माध्यम से दाहिने आलिंद में लौटा दिया जाता है। ### दोहरे परिसंचरण का महत्व\nदोहरा परिसंचरण ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त के पूर्ण और कुशल अलगाव को सुनिश्चित करता है, जो स्तनधारियों और पक्षियों जैसे गर्म खून वाले जानवरों में लगातार शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए उच्च ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रदान करता है।
Q10. मनुष्यों में पोषण की प्रक्रिया को समझाइए। आहार नाल के संपूर्ण पथ और भोजन के पाचन में विभिन्न पाचक ग्रंथियों और उनके स्राव की भूमिका का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मानव पोषण का परिचय\nमनुष्यों में पोषण की प्रक्रिया पाचन तंत्र के माध्यम से होती है, जिसमें आहार नाल और संबंधित पाचक ग्रंथियां शामिल होती हैं। आहार नाल मुंह से गुदा तक फैली एक लंबी नली है। पोषण की प्रक्रिया में अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण,Assimilation और मलमार्ग उत्सर्जन शामिल हैं। ### 1. मुख और मुख गुहा - **अंतर्ग्रहण:** भोजन मुंह के माध्यम से शरीर के अंदर लिया जाता है। - **दांत:** भोजन को चबाने और छोटे कणों में पीसने के लिए उपयोग किए जाते हैं। - **लार ग्रंथियां:** लार का स्राव करती हैं जिसमें लार एमाइलेज (पायलिन) एंजाइम होता है। यह जटिल स्टार्च को सरल शर्करा (माल्टोज) में तोड़ता है। - **जीभ:** भोजन को लार के साथ मिलाने और निगलने में मदद करती है। ### 2. ग्रासनली (भोजन नली) - भोजन को इसकी दीवारों के लयबद्ध संकुचन और शिथिलन द्वारा नीचे धकेला जाता है, जिसे **क्रमानुकंचन गति (Peristaltic movements)** कहा जाता है। ### 3. पेट (आमाशय) - पेट एक पेशीय थैली है जो भोजन प्रवेश करने पर फैलती है। - **जठर ग्रंथियां:** हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl), पेप्सिन और बलगम (Mucus) युक्त जठर रस का स्राव करती हैं। - **HCl:** एक अम्लीय माध्यम बनाता है जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया को सुविधाजनक बनाता है और हानिकारक जीवाणुओं को मारता है। - **पेप्सिन:** एक प्रोटीन पचाने वाला एंजाइम जो प्रोटीन को सरल पेप्टाइड्स में तोड़ता है। - **बलगम:** पेट की आंतरिक अस्तर को HCl की संक्षारक क्रिया से बचाता है। ### 4. छोटी आंत - यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पूर्ण पाचन का स्थल है। यह दो प्रमुख ग्रंथियों से स्राव प्राप्त करता है: - **यकृत (Liver):** पित्त रस का स्राव करता है, जो भोजन को क्षारीय बनाता है और बड़े वसा ग्लोबूल को छोटे में पायसीकृत करता है। - **अग्न्याशय (Pancreas):** ट्रिप्सिन (प्रोटीन के लिए), लाइपेस (पायसीकृत वसा के लिए), और एमाइलेज (कार्बोहाइड्रेट के लिए) युक्त अग्नाशयी रस का स्राव करता है। - **आंत्र ग्रंथियां:** आंतों के रस का स्राव करती हैं जो अंततः प्रोटीन को अमीनो एसिड में, जटिल कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में, और वसा को फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में बदल देती हैं। - **विलाइ (Villi):** छोटी आंत की आंतरिक दीवार में उंगली जैसी अनुमानित रचनाएं होती हैं जो पचे हुए भोजन के रक्त में अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ाती हैं। ### 5. बड़ी आंत - न पचने वाला भोजन बड़ी आंत में भेजा जाता है जहां सामग्री से पानी अवशोषित किया जाता है। - शेष अपशिष्ट को गुदा द्वारा गुदा स्पिन्क्टर द्वारा नियंत्रित तरीके से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
Q11. मनुष्यों में दोहरा परिसंचरण (डबल सर्कुलेशन) की प्रक्रिया को समझाइए। यह क्यों आवश्यक है? 3 Marks
उत्तर (Answer): मनुष्यों में दोहरे परिसंचरण (डबल सर्कुलेशन) से तात्पर्य रक्त के उस मार्ग से है जिसमें शरीर के प्रत्येक पूर्ण चक्र के दौरान रक्त हृदय से दो बार गुजरता है। इस प्रणाली में दो अलग-अलग मार्ग शामिल होते हैं: फुफ्फुसीय परिसंचरण और दैहिक परिसंचरण। \nसबसे पहले, फुफ्फुसीय परिसंचरण तब शुरू होता है जब शरीर के विभिन्न हिस्सों से डीऑक्सीजनेटेड (अशुद्ध) रक्त दाएँ आलिंद द्वारा एकत्र किया जाता है और दाएँ निलय में पंप किया जाता है। दाएँ निलय से, यह रक्त फुफ्फुसीय धमनी के माध्यम से फेफड़ों में भेजा जाता है। फेफड़ों में, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ दी जाती है और रक्त द्वारा ताजी ऑक्सीजन अवशोषित कर ली जाती है। इसके बाद यह ऑक्सीजनेटेड रक्त फुफ्फुसीय शिराओं के माध्यम से हृदय के बाएँ आलिंद में वापस आता है। \nदूसरा, दैहिक परिसंचरण तब शुरू होता है जब बाएँ आलिंद से ऑक्सीजनेटेड रक्त बाएँ निलय में प्रवेश करता है। बाएाँ निलय इस ऑक्सीजन युक्त रक्त को महाधमनी (महाधमनी) में बलपूर्वक पंप करता है, जो इसे फेफड़ों को छोड़कर शरीर के सभी हिस्सों में वितरित करती है। शरीर के ऊतकों में, कोशिकीय श्वसन के लिए ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है और अपशिष्ट उत्पाद के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन होता है। इसके बाद डीऑक्सीजनेटेड रक्त शिराओं द्वारा एकत्र किया जाता है और वापस दाएँ आलिंद में लाया जाता है, जिससे चक्र पूरा हो जाता है। \nमनुष्यों और पक्षियों जैसे अन्य गर्म खून वाले जानवरों में दोहरा परिसंचरण पूरी तरह से आवश्यक है क्योंकि यह ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त के पूर्ण और कुशल अलगाव को सुनिश्चित करता है। यह अलगाव शुद्ध और अशुद्ध रक्त के मिलने को रोकता है, जो शरीर के सभी ऊतकों को ऑक्सीजन की उच्च स्तर की आपूर्ति बनाए रखता है। चूंकि स्तनधारियों और पक्षियों में शरीर के लगातार तापमान को बनाए रखने के लिए उच्च चयापचय दर होती है, इसलिए उन्हें ऊर्जा की निरंतर और प्रचुर मात्रा में आपूर्ति की आवश्यकता होती है, जिससे यह कुशल परिसंचरण तंत्र जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
Q12. एक प्रयोगशाला वाष्पसर्जन प्रयोग से पता चलता है कि एक गमले में लगा पौधा 5 घंटे की अवधि में अपनी पत्तियों के माध्यम से 250 मिलीलीटर पानी खो देता है। प्रति घंटे वाष्पसर्जन की औसत दर की गणना करें और इस घटना के पीछे मुख्य प्रेरक शक्ति पर चर्चा करें। 3 Marks
उत्तर (Answer): वाष्पसर्जन की औसत दर की गणना करने के लिए: 1. पानी की कुल हारी हुई मात्रा = 250 मिलीलीटर 2. कुल समय अवधि = 5 घंटे 3. वाष्पसर्जन की औसत दर = कुल पानी की हानि / कुल समय दर = 250 मिलीलीटर / 5 घंटे = 50 मिलीलीटर/घंटा \nप्रेरक शक्ति पर चर्चा: वाष्पसर्जन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे स्टोमेटा छिद्रों के माध्यम से जल वाष्प के रूप में पानी खो देते हैं। पानी की इस ऊपर की गति के पीछे मुख्य प्रेरक शक्ति 'वाष्पसर्जन खिंचाव' या चूषण दबाव है जो पत्तियों के अंदर मेसोफिल कोशिकाओं से अंतरकोशिकीय स्थानों में पानी के वाष्पीकरण द्वारा बनाया जाता है। जैसे-जैसे पानी के अणु पत्ती की सतह से वाष्प बनकर उड़ते हैं, जाइलम वाहिकाओं में एक नकारात्मक दबाव या तनाव उत्पन्न होता है। चूँकि पानी के अणुओं में मजबूत सामंजस्यपूर्ण बल (एक दूसरे के प्रति आकर्षण) और चिपकने वाले बल (जाइलम दीवारों के प्रति आकर्षण) होते हैं जो एक निरंतर जल स्तंभ बनाते हैं, यह चूषण गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ जड़ों से पानी को ऊपर खींचता है। वाष्पसर्जन न केवल पानी और घुले हुए खनिजों के अवशोषण और ऊपर की ओर परिवहन में सहायता करता है बल्कि पौधे को ठंडा करने में भी मदद करता है।
Q13. 1 सेमी त्रिज्या वाली एक गोलाकार कोशिका के लिए सतह क्षेत्र से आयतन अनुपात की गणना करें और जीवित जीवों में सामग्री के परिवहन के संबंध में इसके महत्व को समझाएं। 3 Marks
उत्तर (Answer): 1 सेमी की त्रिज्या (r) वाली गोलाकार कोशिका के लिए सतह क्षेत्र से आयतन अनुपात की गणना करने के लिए: 1. गोले के सतह क्षेत्र का सूत्र = 4 * pi * r^2 सतह क्षेत्र = 4 * (22/7) * (1 सेमी)^2 = 4 * 3.1416 * 1 = 12.57 सेमी^2 2. गोले के आयतन का सूत्र = (4/3) * pi * r^3 आयतन = (4/3) * (22/7) * (1 सेमी)^3 = (4/3) * 3.1416 * 1 = 4.19 सेमी^3 3. सतह क्षेत्र से आयतन का अनुपात = सतह क्षेत्र / आयतन अनुपात = 12.57 सेमी^2 / 4.19 सेमी^3 = 3 : 1 (या 3 सेमी^-1) \nमहत्व: यह अनुपात यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि कोशिकाएं सूक्ष्म क्यों होती हैं। जैसे-जैसे कोई कोशिका बड़ी होती है, उसका आयतन उसके सतह क्षेत्र की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है, जिससे सतह क्षेत्र-से-आयतन अनुपात कम हो जाता है। आयतन के सापेक्ष एक उच्च सतह क्षेत्र यह सुनिश्चित करता है कि कोशिका झिल्ली के पार सभी आवश्यक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति करने और चयापचय अपशिष्टों को कुशलता से हटाने के लिए केवल विसरण (diffusion) पर्याप्त है। यदि कोशिकाएं बहुत बड़ी हो जाती हैं, तो विसरण दूरी बहुत अधिक हो जाती है, यही कारण है कि बहुकोशिकी जीवों ने केवल एकल-कोशिका विसरण पर निर्भर रहने के बजाय विशेष परिवहन प्रणालियों का विकास किया।
Q14. मानव हृदय का एक स्पष्ट, नामांकित आरेख बनाइए और रक्त के दोहरे परिसंचरण को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): दोहरा परिसंचरण एक अत्यधिक कुशल परिसंचरण तंत्र है जो पक्षियों और स्तनधारियों (मनुष्यों सहित) की विशेषता है, जहाँ शरीर के प्रत्येक पूर्ण सर्किट के दौरान रक्त हृदय से दो बार गुजरता है। यह प्रणाली ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त के पूर्ण पृथक्करण को सुनिश्चित करती है, जो शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए आवश्यक उच्च ऊर्जा मांगों को पूरा करती है। दोहरे परिसंचरण में दो अलग-अलग मार्ग शामिल होते हैं: फुफ्फुसीय परिसंचरण और प्रणालीगत परिसंचरण। फुफ्फुसीय परिसंचरण में, शरीर के विभिन्न अंगों से एकत्र किए गए डीऑक्सीजनेटेड रक्त को दाहिने निलय द्वारा फुफ्फुसीय धमनी के माध्यम से फेफड़ों में पंप किया जाता है, जहाँ यह कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है और ताजा ऑक्सीजन लेता है। यह ऑक्सीजन युक्त रक्त तब फुफ्फुसीय नसों के माध्यम से बाएं आलिंद में वापस आता है। प्रणालीगत परिसंचरण में, बाएं आलिंद से ऑक्सीजन युक्त रक्त बाएं निलय में प्रवेश करता है, जो इसे शरीर के सभी प्रणालीगत ऊतकों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति करने के लिए महाधमनी के माध्यम से बाहर पंप करता है। सेलुलर उपयोग के बाद, डीऑक्सीजनेटेड रक्त को वेनाकावा द्वारा एकत्र किया जाता है और दाहिने आलिंद में वापस लाया जाता है। यह दोहरा मार्ग रक्त के मिश्रण को रोकता है और उच्च रक्तचाप को बनाए रखता है।
Q15. पाचन प्रक्रिया के दौरान मानव पेट में मौजूद हाइड्रोक्लोरिक एसिड, बलगम और पाचक एंजाइमों की भूमिका को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): मानव पेट एक पेशीय, जे-आकार का अंग है जो भोजन के यांत्रिक और रासायनिक दोनों प्रकार के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेट की दीवार की गैस्ट्रिक ग्रंथियों के भीतर, विशेष कोशिकाएं गैस्ट्रिक रस स्रावित करती हैं, जिसमें तीन मुख्य घटक होते हैं: हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl), बलगम (म्यूकस), और पेप्सिन जैसे पाचक एंजाइम। हाइड्रोक्लोरिक एसिड पेट के अंदर एक अम्लीय माध्यम बनाता है, जो निष्क्रिय एंजाइम पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलने के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, यह अम्लीय वातावरण भोजन के साथ खाए गए हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों को मारता है। बलगम एक सुरक्षात्मक ढाल के रूप में कार्य करता है, पेट की आंतरिक परत को ढकता है और संक्षारक हाइड्रोक्लोरिक एसिड और सक्रिय पेप्सिन को पेट की अपनी मांसपेशियों की दीवारों को पचाने से रोकता है, जिससे अल्सर से बचा जा सकता है। पेप्सिन एक प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम है जो विशेष रूप से जटिल प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड श्रृंखलाओं में तोड़ता है। एसिड, सुरक्षात्मक बलगम और एंजाइमों के इस समन्वित स्राव के माध्यम से, पेट भोजन को छोटी आंत में भेजने से पहले काइम नामक अर्ध-तरल पेस्ट में कुशलता से संसाधित करता है.