मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा १० - विज्ञान
#### अध्याय: विद्युत (Electricity) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स
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महत्वपूर्ण परिभाषाएँ और संकेत (Important Definitions and Symbols)
- विद्युत धारा (Electric Current - I): आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।
- मात्रक: एम्पियर (A)
- विभवांतर (Potential Difference - V): एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य।
- मात्रक: वोल्ट (V)
- प्रतिरोध (Resistance - R): किसी चालक का गुण जो उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का विरोध करता है।
- मात्रक: ओह्म ($\Omega$)
- विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता (Resistivity - $\rho$): किसी पदार्थ के एकांक लंबाई और एकांक अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले चालक का प्रतिरोध।
- मात्रक: ओह्म-मीटर ($\Omega \cdot m$)
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मुख्य सूत्र (Key Formulas)
१. विद्युत धारा:
$$I = \frac{Q}{t}$$
(जहाँ $Q$ = आवेश, $t$ = समय)
२. विभवांतर:
$$V = \frac{W}{Q}$$
(जहाँ $W$ = कार्य, $Q$ = आवेश)
३. ओह्म का नियम (Ohm's Law):
$$V = I \times R$$
या
$$R = \frac{V}{I}$$
४. प्रतिरोधकता (Resistivity):
$$R = \rho \frac{l}{A}$$
(जहाँ $l$ = चालक की लंबाई, $A$ = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, $\rho$ = प्रतिरोधकता)
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प्रतिरोधों का संयोजन (Combination of Resistors)
१. श्रेणी क्रम संयोजन (Series Combination):
जब प्रतिरोधों को एक के बाद एक जोड़ा जाता है, तो कुल प्रतिरोध बढ़ जाता है।
$$Rs = R1 + R2 + R3$$
(इस संयोजन में सभी प्रतिरोधों में विद्युत धारा $I$ का मान समान रहता है)
२. पार्श्वक्रम या समांतर क्रम संयोजन (Parallel Combination):
जब प्रतिरोधों के सिरों को एक ही दो बिंदुओं के बीच जोड़ा जाता है।
$$\frac{1}{Rp} = \frac{1}{R1} + \frac{1}{R2} + \frac{1}{R3}$$
(इस संयोजन में सभी प्रतिरोधों के सिरों पर विभवांतर $V$ का मान समान रहता है)
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विद्युत ऊर्जा एवं शक्ति (Electric Energy and Power)
१. विद्युत शक्ति (Electric Power - P):
$$P = V \times I$$
अन्य रूप:
$$P = I^2 \times R$$
$$P = \frac{V^2}{R}$$
(विद्युत शक्ति का मात्रक: वाट - W)
२. जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating):
किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा ($H$) धारा, प्रतिरोध और समय के गुणनफल के बराबर होती है।
$$H = I^2 \times R \times t$$
या
$$H = V \times I \times t$$
३. विद्युत ऊर्जा (Electric Energy):
$$E = P \times t$$
(व्यावसायिक मात्रक: किलोवाट-घंटा या यूनिट [kWh])
$$1 \text{ kWh} = 3.6 \times 10^6 \text{ जूल}$$
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महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points for Exams)
- एम्पियरमीटर (Ammeter) को हमेशा श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है और इसका प्रतिरोध बहुत कम होता है।
- वोल्टमीटर (Voltmeter) को हमेशा समांतर क्रम में जोड़ा जाता है और इसका आदर्श प्रतिरोध अनंत होता है।
- धातुएं विद्युत की अच्छी चालक होती हैं, जबकि मिश्रधातुओं (Alloys) की प्रतिरोधकता अधिक होती है, इसलिए इनका उपयोग तापन उपकरणों (जैसे हीटर, आयरन) में किया जाता है।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 विद्युत (Electricity)
विद्युत धारा (Electric Current)
परिभाषा: आवेश के प्रवाह की दर
सूत्र: $I = \frac{Q}{t}$
मात्रक: एम्पियर (A)
मापक यंत्र: एमीटर (Ammeter)
दिशा: धन आवेश से ऋण आवेश की ओर
विद्युत विभव और विभवांतर (Electric Potential & Potential Difference)
विद्युत विभव: एकांक आवेश को अनंत से लाने में किया गया कार्य
विभवांतर: दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर
सूत्र: $V = \frac{W}{Q}$
मात्रक: वोल्ट (Volt)
मापक यंत्र: वोल्टमीटर (Voltmeter)
ओम का नियम (Ohm's Law)
नियम: नियत ताप पर चालक में प्रवाहित धारा उसके सिरों के विभवांतर के समानुपाती होती है
सूत्र: $V = IR$
प्रतिरोध (Resistance):
परिभाषा: धारा के मार्ग में रुकावट
मात्रक: ओम ($\Omega$)
कारक जिन पर प्रतिरोध निर्भर करता है:
लंबाई ($l$) के समानुपाती
अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के व्युत्क्रमानुपाती
पदार्थ की प्रकृति
तापमान
प्रतिरोधकों का संयोजन (Combination of Resistors)
श्रेणी क्रम (Series Combination)
सूत्र: $Rs = R1 + R2 + R3$
विशेषता: प्रत्येक प्रतिरोधक में धारा समान होती है
समांतर क्रम (Parallel Combination)
सूत्र: $\frac{1}{Rp} = \frac{1}{R1} + \frac{1}{R2} + \frac{1}{R3}$
विशेषता: प्रत्येक प्रतिरोधक पर विभवांतर समान होता है
विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current)
जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating): $H = I^2Rt$
व्यावहारिक अनुप्रयोग:
विद्युत इस्त्री (Iron)
विद्युत हीटर
विद्युत बल्ब (फिलामेंट टंगस्टन का बना होता है)
विद्युत फ्यूज (सुरक्षा युक्ति)
विद्युत शक्ति (Electric Power)
परिभाषा: कार्य करने की दर या ऊर्जा खपत की दर
सूत्र: $P = VI = I^2R = \frac{V^2}{R}$
मात्रक: वाट (Watt / W)
व्यावसायिक मात्रक: किलोवाट-घंटा (kWh) या यूनिट
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### (a) ओम के नियम का कथन और प्रतिरोध का एसआई मात्रक
* **ओम का नियम:** ओम के नियम के अनुसार, यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं (जैसे ताप आदि) अपरिवर्तित रहें, तो चालक के सिरों के बीच उत्पन्न विभवांतर ($V$) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा ($I$) के अनुक्रमानुपाती होता है। गणितीय रूप में, $V \propto I$ या $V = IR$, जहाँ $R$ एक नियतांक है जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।
* **प्रतिरोध के एसआई मात्रक की परिभाषा:** विद्युत प्रतिरोध का एसआई मात्रक ओम ($?\Omega$) है। ओम के नियम से, $R = \frac{V}{I}$। यदि किसी चालक के सिरों के बीच $1\text{ वोल्ट}$ का विभवांतर लगाने पर उसमें $1\text{ एम्पियर}$ की विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उस चालक का प्रतिरोध $1\text{ ओम}$ कहलाता है। अतः $1\ \Omega = \frac{1\text{ V}}{1\text{ A}}$।
### (b) संख्यात्मक प्रश्न का चरण-दर-चरण हल
* **दिया गया है:**
* विद्युत लैंप का प्रतिरोध, $R_1 = 20\ \Omega$
* चालक का प्रतिरोध, $R_2 = 4\ \Omega$
* बैटरी का विभवांतर, $V = 6\text{ V}$
* **(i) परिपथ का कुल प्रतिरोध ($R_s$):**
चूँकि लैंप और चालक श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इसलिए कुल प्रतिरोध व्यक्तिगत प्रतिरोधों के योग के बराबर होगा।
$$R_s = R_1 + R_2$$
$$R_s = 20\ \Omega + 4\ \Omega = 24\ \Omega$$
* **(ii) परिपथ में प्रवाहित धारा ($I$):**
ओम के नियम का उपयोग करने पर, परिपथ की कुल धारा होगी:
$$I = \frac{V}{R_s}$$
$$I = \frac{6\text{ V}}{24\ \Omega} = 0.25\text{ A}$$
* **(iii) विद्युत लैंप ($V_1$) और चालक ($V_2$) के सिरों पर विभवांतर:**
* विद्युत लैंप के सिरों पर विभवांतर ($V_1$):
$$V_1 = I \times R_1$$
$$V_1 = 0.25\text{ A} \times 20\ \Omega = 5.0\text{ V}$$
* चालक के सिरों पर विभवांतर ($V_2$):
$$V_2 = I \times R_2$$
$$V_2 = 0.25\text{ A} \times 4\ \Omega = 1.0\text{ V}$$
उत्तर (Answer): ### ओम का नियम का कथन\nओम के नियम के अनुसार, किसी धातु के तार में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा ($I$) उसके सिरों के बीच लागू विभवांतर ($V$) के समानुपाती होती है, बशर्ते तापमान जैसी भौतिक परिस्थितियाँ स्थिर रहें।
$$\mathbf{V \propto I} \quad \text{या} \quad \mathbf{V = IR}$$\nजहाँ $R$ एक नियतांक है जिसे प्रतिरोध कहा जाता है।
### विद्युत प्रतिरोध\nप्रतिरोध किसी चालक का वह गुण है जो उसमें आवेशों के प्रवाह का विरोध करता है। इसका एसआई मात्रक ओम ($\Omega$) है। ओम के नियम के अनुसार, $R = \frac{V}{I}$ होता है।
### प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक\nएक समान धातु के चालक का प्रतिरोध $R$ निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
1. **लंबाई ($l$):** चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई के सीधे आनुपातिक होता है। लंबे तारों में प्रतिरोध अधिक होता है।
$$R \propto l$$
2. **अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ($A$):** प्रतिरोध चालक के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। मोटे तारों में प्रतिरोध कम होता है।
$$R \propto \frac{1}{A}$$
3. **पदार्थ की प्रकृति:** विभिन्न सामग्रियों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का घनत्व अलग-अलग होता है, जिससे प्रतिरोध का मान बदलता है।
4. **तापमान:** धात्विक चालकों के लिए, तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
### कारकों का संयोजन\nइन कारकों को मिलाने पर:
$$R \propto \frac{l}{A} \quad \text{या} \quad R = \rho \frac{l}{A}$$\nजहाँ $\rho$ आनुपातिकता का एक नियतांक है जिसे **विद्युत प्रतिरोधकता** या विशिष्ट प्रतिरोध कहा जाता है।
### प्रतिरोधकता\nप्रतिरोधकता को किसी पदार्थ के $1 \text{ मीटर}$ भुजा वाले घन द्वारा विपरीत फलकों पर लंबवत धारा प्रवाहित होने पर उत्पन्न प्रतिरोध के रूप में परिभाषित किया जाता है। प्रतिरोधकता का एसआई मात्रक ओम-मीटर ($\Omega \cdot \text{m}$) है। प्रतिरोधकता पदार्थ का एक आंतरिक गुण है और यह चालक की लंबाई या मोटाई पर निर्भर नहीं करती, हालांकि यह तापमान पर निर्भर करती है।
उत्तर (Answer): ### ओम का नियम कथन\nओम के नियम के अनुसार, किसी धात्विक चालक के सिरों के बीच उत्पन्न होने वाला विभवांतर $V$ उससे प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा $I$ के समानुपाती होता है, बशर्ते चालक का ताप स्थिर रहे।\nगणितीय रूप में: $V \propto I$ या $V = IR$, जहाँ $R$ चालक का प्रतिरोध है।
### प्रायोगिक सत्यापन
#### आवश्यक उपकरण:
- एक प्रतिरोध तार ($R$)
- धारा मापने के लिए एक अमीटर ($A$)
- विभवांतर मापने के लिए एक वोल्टमीटर ($V$)
- एक प्लग कुंजी ($K$)
- एक परिवर्ती प्रतिरोध या रियोस्टेट ($Rh$)
- एक बैटरी या सेल ($B$)
#### परिपथ आरेख सेटअप:
- घटकों को एक बंद परिपथ में जोड़ें। बैटरी, रियोस्टेट, अमीटर और प्रतिरोध तार को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है। वोल्टमीटर को प्रतिरोध तार के सिरों के समांतर क्रम में जोड़ा जाता है।
#### कार्यविधि:
1. कुंजी $K$ को बंद करें ताकि परिपथ में धारा प्रवाहित हो सके।
2. अमीटर का पाठ्यांक (धारा $I$) और वोल्टमीटर का पाठ्यांक (विभवांतर $V$) नोट करें।
3. परिपथ में धारा को बदलने के लिए रियोस्टेट को समायोजित करें और अमीटर तथा वोल्टमीटर दोनों के नए पाठ्यांक दर्ज करें।
4. पाठ्यांकों के कम से कम 4-5 सेट प्राप्त करने के लिए रियोस्टेट की विभिन्न स्थितियों के लिए इस प्रक्रिया को दोहराएं।
5. प्रेक्षणों के प्रत्येक सेट के लिए अनुपात $V/I$ की गणना करें। यह देखा जाएगा कि अनुपात $V/I$ लगभग स्थिर रहता है।
#### V-I ग्राफ:\nविभवांतर $V$ (x-अक्ष के अनुदिश) और धारा $I$ (y-अक्ष के अनुदिश) के बीच एक ग्राफ खींचिए। ग्राफ मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा के रूप में आता है। यह सीधी रेखा दर्शाती है कि विद्युत धारा विभवांतर के सीधे आनुपातिक है, इस प्रकार ओम के नियम का सत्यापन होता है।
उत्तर (Answer): ### विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव\nजब किसी उच्च प्रतिरोध वाले तार (जैसे नाइक्रोम का तार) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो तार बहुत गर्म हो जाता है और ऊष्मा उत्पन्न करता है। इसके माध्यम से विद्युत धारा के प्रवाह के कारण प्रतिरोधक में ऊष्मा उत्पन्न होने की इस परिघटना को विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहा जाता है।
### सूत्र की व्युत्पत्ति\nमान लीजिए कि एक विभवांतर $V$ के तहत, प्रतिरोध $R$ के प्रतिरोधक से समय $t$ के लिए धारा $I$ प्रवाहित होती है।
1. समय $t$ में प्रवाहित आवेश की मात्रा $Q$ है:
$$Q = I \times t$$
2. विभवांतर $V$ के पार इस आवेश $Q$ को स्थानांतरित करने में किया गया कार्य ($W$) है:
$$W = V \times Q$$
3. कार्य समीकरण में $Q = I \times t$ का मान रखने पर:
$$W = V \times (I \times t)$$
4. ओम के नियम के अनुसार, $V = IR$ होता है। $V$ का यह मान रखने पर:
$$W = (IR) \times (I \times t)$$
$$W = I^2Rt$$
\nयह मानते हुए कि किया गया समस्त विद्युत कार्य ऊष्मा ऊर्जा ($H$) में परिवर्तित हो जाता है, हमें प्राप्त होता है:
$$H = I^2Rt$$\nइस समीकरण को जूल का ऊष्मन नियम कहा जाता है।
### व्यावहारिक अनुप्रयोग
1. **विद्युत तापन उपकरण:** विद्युत प्रेस, इलेक्ट्रिक टोस्टर, इलेक्ट्रिक केतली और वॉटर हीटर जैसे उपकरण जूल के ऊष्मीय प्रभाव पर काम करते हैं। ये उपकरण नाइक्रोम जैसी उच्च प्रतिरोधकता वाली मिश्र धातु से बने हीटिंग तत्वों का उपयोग करते हैं, जो उच्च तापमान पर आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होते हैं।
2. **विद्युत फ्यूज:** विद्युत फ्यूज घरेलू परिपथों में उपयोग की जाने वाली एक सुरक्षा युक्ति है जो उपकरणों को ओवरलोडिंग या शॉर्ट-सर्किट के कारण होने वाली क्षति से बचाती है। इसमें कम गलनांक वाली सामग्री (जैसे कॉपर-लेड मिश्र धातु) से बना एक पतला तार होता है। जब अत्यधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज का तार गर्म हो जाता है, पिघल जाता है और परिपथ को तोड़ देता है, जिससे आगे की क्षति रुक जाती है।
उत्तर (Answer): ### ओम का नियम\nओम के नियम के अनुसार, किसी धात्विक चालक के सिरों के बीच उत्पन्न विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है, बशर्ते चालक का ताप समान रहे। गणितीय रूप में, $V \propto I$ या $V = IR$, जहाँ R चालक का प्रतिरोध है।
### प्रायोगिक सत्यापन\nओम के नियम का प्रायोगिक सत्यापन करने के लिए हम एक परिपथ बनाते हैं जिसमें एक प्रतिरोधक R, धारा मापने के लिए एक अमीटर A, प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर मापने के लिए एक वोल्टमीटर V, एक बैटरी और एक प्लग कुंजी K होती है।
* **कार्यविधि:**
1. सबसे पहले परिपथ आरेख के अनुसार घटकों को संयोजित करें जिसमें परिपथ में केवल एक सेल हो।
2. प्रतिरोधक से जुड़े अमीटर (धारा I) और वोल्टमीटर (विभवांतर V) के पाठ्यांक को नोट करें।
3. अब परिपथ में एक और सेल जोड़ें और अमीटर तथा वोल्टमीटर दोनों के पाठ्यांकों को फिर से रिकॉर्ड करें।
4. चरणों में सेलों की संख्या बढ़ाकर इस प्रक्रिया को दोहराएं (3 सेल और फिर 4 सेल का उपयोग करके)।
5. पाठ्यांकों के प्रत्येक सेट के लिए V और I के अनुपात की गणना करें।
* **प्रेक्षण:**
यह देखा जाएगा कि सभी पाठ्यांकों के लिए $V/I$ का अनुपात लगभग स्थिर रहता है, जो ओम के नियम को सिद्ध करता है।
### V-I ग्राफ\nजब x-अक्ष के अनुदिश विभवांतर (V) और y-अक्ष के अनुदिश विद्युत धारा (I) के बीच ग्राफ खींचा जाता है, तो मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा प्राप्त होती है। ग्राफ की यह सीधी रेखा प्रकृति पुष्टि करती है कि धारा विभवांतर के समानुपाती होती है।
### प्रतिरोध का निर्धारण\nV-I ग्राफ की ढलान (slope) ज्ञात करके प्रतिरोध (R) का निर्धारण किया जा सकता है। चूँकि ढलान = $\frac{\Delta V}{\Delta I}$, इसलिए V-I ग्राफ की ढलान सीधे प्रतिरोध का मान देती है।
उत्तर (Answer): ### जूल का ऊष्मन नियम\nजूल के ऊष्मन नियम के अनुसार किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा:
1. प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा के वर्ग ($I^2$) के समानुपाती होती है।
2. दिए गए धारा के लिए प्रतिरोध ($R$) के समानुपाती होती है।
3. उस समय ($t$) के समानुपाती होती है जितने समय तक धारा प्रवाहित होती है।
### सूत्र की व्युत्पत्ति\nमान लीजिए $V$ विभवांतर के अधीन किसी प्रतिरोधक ($R$) में समय $t$ के लिए धारा $I$ प्रवाहित होती है।
- विभवांतर $V$ के माध्यम से आवेश $Q$ को ले जाने में किया गया कार्य $W$ है:
$$W = V \times Q$$
- चूंकि $Q = I \times t$, हम लिख सकते हैं:
$$W = V \times I \times t$$
- ओम के नियम के अनुसार, $V = IR$। इसे उपरोक्त समीकरण में रखने पर:
$$W = (IR) \times I \times t = I^2Rt$$\nयह मानते हुए कि संपूर्ण विद्युत कार्य ऊष्मा ऊर्जा ($H$) में परिवर्तित हो जाता है:
$$H = I^2Rt$$\nयह जूल का ऊष्मन नियम है।
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### आंकिक प्रश्न
#### दिया गया डेटा:
- वोल्टेज ($V$) = $220\, \text{V}$
#### स्थिति 1: अधिकतम ऊष्मन दर ($P_1 = 840\, \text{W}$)
1. धारा ($I_1$):
$$P_1 = V \times I_1 \implies I_1 = \frac{P_1}{V}$$
$$I_1 = \frac{840\, \text{W}}{220\, \text{V}} = 3.82\, \text{A}$$
2. प्रतिरोध ($R_1$):
$$R_1 = \frac{V}{I_1} = \frac{220\, \text{V}}{3.82\, \text{A}} = 57.59\, \Omega$$
#### स्थिति 2: न्यूनतम ऊष्मन दर ($P_2 = 360\, \text{W}$)
1. धारा ($I_2$):
$$P_2 = V \times I_2 \implies I_2 = \frac{P_2}{V}$$
$$I_2 = \frac{360\, \text{W}}{220\, \text{V}} = 1.64\, \text{A}$$
2. प्रतिरोध ($R_2$):
$$R_2 = \frac{V}{I_2} = \frac{220\, \text{V}}{1.64\, \text{A}} = 134.15\, \Omega$$
उत्तर (Answer): ### ओम का नियम\nओम के नियम के अनुसार, किसी धात्विक तार में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा उसके सिरों के बीच उत्पन्न विभवांतर $V$ के समानुपाती होती है, बशर्ते उसका ताप स्थिर रहे।\nगणितीय रूप में: $V \propto I$ या $V = IR$, जहाँ $R$ प्रतिरोध है।
### प्रायोगिक सत्यापन\nओम के नियम को सत्यापित करने के लिए हम एक विद्युत परिपथ तैयार करते हैं।
#### आवश्यक उपकरण
- एक प्रतिरोध तार (या अवरोधक)
- एक अमीटर (धारा मापने के लिए)
- एक वोल्टमीटर (विभवांतर मापने के लिए)
- एक बैटरी या सेल
- एक प्लग कुंजी
- संयोजक तार
#### परिपथ आरेख और व्यवस्था
1. प्रतिरोध तार को अमीटर, बैटरी और प्लग कुंजी के साथ श्रेणी क्रम में जोड़ें।
2. वोल्टमीटर को प्रतिरोध तार के सिरों के समांतर क्रम में जोड़ें।
3. सुनिश्चित करें कि दोनों मीटरों के धनात्मक टर्मिनल बैटरी के धनात्मक टर्मिनल से जुड़े हों।
#### प्रक्रिया
1. कुंजी बंद करें ताकि परिपथ में धारा प्रवाहित होने लगे।
2. अमीटर ($I$) और वोल्टमीटर ($V$) का पाठ्यांक नोट करें।
3. विभवांतर बदलने के लिए परिपथ में एक और सेल जोड़ें। $V$ और $I$ के नए पाठ्यांक नोट करें।
4. एक-एक करके अलग-अलग संख्या में सेल का उपयोग करके इस प्रक्रिया को दोहराएं।
5. प्रत्येक पाठ्यांक के लिए $V/I$ अनुपात की गणना करें।
#### प्रेक्षण और गणना
- यह देखा गया है कि सभी पाठ्यांकों के लिए $V/I$ का अनुपात लगभग स्थिर रहता है।
- जब x-अक्ष पर विभवांतर ($V$) और y-अक्ष पर धारा ($I$) के बीच ग्राफ खींचा जाता है, तो मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा प्राप्त होती है।
#### निष्कर्ष\nयह सीधी रेखा ग्राफ पुष्टि करती है कि विद्युत धारा विभवांतर के समानुपाती होती है, इस प्रकार ओम के नियम का सत्यापन होता है।
उत्तर (Answer): ### समांतर संयोजन परिपथ के लिए हल
**दिया गया डेटा:**
- वोल्टेज \((V)\) = 12 V
- प्रतिरोध 1 \((R_1)\) = 4 \(\Omega\)
- प्रतिरोध 2 \((R_2)\) = 6 \(\Omega\)
- प्रतिरोध 3 \((R_3)\) = 12 \(\Omega\)
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#### (a) समांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध\nसमांतर क्रम में तुल्य प्रतिरोध \((R_p)\) का सूत्र है:
\[\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}\]\nमान रखने पर:
\[\frac{1}{R_p} = \frac{1}{4} + \frac{1}{6} + \frac{1}{12}\]\nसाझा भाजक (लघुत्तम समापवर्त्य 12 है) ज्ञात कीजिए:
\[\frac{1}{R_p} = \frac{3}{12} + \frac{2}{12} + \frac{1}{12} = \frac{3 + 2 + 1}{12} = \frac{6}{12} = \frac{1}{2}\]\nअतः, \(R_p = 2 \; \Omega\)।
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#### (b) प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा\nसमांतर परिपथ में, प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर समान होता है और आपूर्ति वोल्टेज के बराबर होता है \((V = 12\text{ V})\)।
- \(R_1\) से धारा \((I_1)\):
\[I_1 = \frac{V}{R_1} = \frac{12}{4} = 3 \text{ A}\]
- \(R_2\) से धारा \((I_2)\):
\[I_2 = \frac{V}{R_2} = \frac{12}{6} = 2 \text{ A}\]
- \(R_3\) से धारा \((I_3)\):
\[I_3 = \frac{V}{R_3} = \frac{12}{12} = 1 \text{ A}\]
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#### (c) परिपथ में कुल धारा\nकुल धारा \((I_{\text{total}})\) व्यक्तिगत प्रतिरोधकों से धाराओं का योग है:
\[I_{\text{total}} = I_1 + I_2 + I_3 = 3 + 2 + 1 = 6 \text{ A}\]
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#### (d) 12 \(\Omega\) प्रतिरोधक द्वारा उपभोग की जाने वाली शक्ति\nविद्युत शक्ति \((P)\) का सूत्र है:
\[P = I_3^2 \times R_3\]\nमान रखने पर:
\[P = (1)^2 \times 12 = 1 \times 12 = 12 \text{ वाट (W)}\]
उत्तर (Answer): ### ओम का नियम का कथन\nओम का नियम बताता है कि किसी परिपथ में धात्विक तार के सिरों के बीच का विद्युत विभवांतर \(V\) उससे प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा \(I\) के सीधे आनुपातिक होता है, बशर्ते उसका तापमान स्थिर रहे।\nगणितीय रूप में:
\[V \propto I \implies V = IR\]\nजहाँ \(R\) एक नियतांक है जिसे प्रतिरोध कहते हैं।
### ओम के नियम का प्रायोगिक सत्यापन
1. **आवश्यक उपकरण:** एक प्रतिरोध तार \((R)\), एक अमीटर \((A)\), एक वोल्टमीटर \((V)\), एक बैटरी \((B)\), एक प्लग कुंजी \((K)\), और एक रियोस्टेट (धारा नियंत्रक) \((Rh)\)।
2. **परिपथ आरेख सेटअप:** बैटरी, कुंजी, अमीटर और प्रतिरोध तार के साथ एक बंद लूप बनाते हुए घटकों को श्रेणी क्रम में जोड़ें। वोल्टमीटर को प्रतिरोध तार के सिरों के समांतर क्रम में जोड़ें।
3. **प्रक्रिया:**
- परिपथ में धारा प्रवाहित करने के लिए कुंजी \((K)\) को बंद करें।
- अमीटर से धारा \((I)\) का पाठ्यांक और वोल्टमीटर से विभवांतर \((V)\) का पाठ्यांक नोट करें।
- रियोस्टेट का उपयोग करके परिपथ में धारा बदलें और \(V\) तथा \(I\) के संगत पाठ्यांकों को रिकॉर्ड करें।
- पाठ्यांकों के प्रत्येक समूह के लिए अनुपात \(V/I\) की गणना करें।
4. **प्रेक्षण और निष्कर्ष:** यह देखा जाता है कि अनुपात \(V/I\) हर बार स्थिर रहता है। जब \(V\) और \(I\) के बीच एक ग्राफ खींचा जाता है, तो मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा प्राप्त होती है, जो ओम के नियम को सत्यापित करती है।
### चालक के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक\nएक समान धात्विक चालक का प्रतिरोध \(R\) निम्नलिखित पर निर्भर करता है:
- **लंबाई \((l)\):** प्रतिरोध चालक की लंबाई के सीधे आनुपातिक होता है \((R \propto l)\)।
- **अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \((A)\):** प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है \((R \propto 1/A)\)।
- **पदार्थ की प्रकृति:** विभिन्न सामग्रियों में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व अलग-अलग होता है, जिससे भिन्न प्रतिरोध होते हैं।
- **तापमान:** तापमान में वृद्धि के साथ धात्विक चालकों का प्रतिरोध बढ़ जाता है।
उत्तर (Answer): ### जूल का तापन नियम
\nजूल का तापन नियम यह बताता है कि किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न होने वाली ऊष्मा निम्नलिखित के सीधे आनुपातिक होती है:
1. प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा के वर्ग \((I^2)\) के।
2. प्रतिरोधक के प्रतिरोध \((R)\) के।
3. वह समय \((t)\) जिसके लिए धारा प्रवाहित होती है।
\nगणितीय रूप में, इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
\[H = I^2 R t\]
### सूत्र की व्युत्पत्ति\nजब कोई विद्युत आवेश \(Q\) किसी विभवांतर \(V\) से गुजरता है, तो किया गया कार्य \(W\) होता है:
\[W = V \times Q\]\nचूँकि \(Q = I \times t\), हम प्राप्त करते हैं:
\[W = V \times I \times t\]\nओम के नियम के अनुसार, \(V = IR\)। कार्य के समीकरण में \(V\) का मान रखने पर, हम प्राप्त करते हैं:
\[W = (IR) \times I \times t = I^2 R t\]\nयह मानते हुए कि किया गया समस्त विद्युत कार्य ऊष्मा ऊर्जा \(H\) में परिवर्तित हो जाता है, हमारे पास है:
\[H = I^2 R t\]
### आंकिक प्रश्न का हल
**दिया गया डेटा:**
- प्रतिरोध \((R)\) = 20 \(\Omega\)
- धारा \((I)\) = 5 A
- समय \((t)\) = 30 सेकंड
**सूत्र:**
\[H = I^2 R t\]
**चरण-दर-चरण गणना:**
1. धारा का वर्ग कीजिए: \(I^2 = 5^2 = 25 \text{ A}^2\)
2. प्रतिरोध से गुणा कीजिए: \(I^2 \times R = 25 \times 20 = 500 \text{ W}\)
3. समय से गुणा कीजिए: \(H = 500 \times 30 = 15000 \text{ जूल (J)}\)
**उत्तर:**\nविद्युत प्रेस में विकसित ऊष्मा 15,000 J या 15 kJ है।
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:\nविद्युत लैंप का प्रतिरोध ($R_1$) = $20\ \Omega$\nचालक का प्रतिरोध ($R_2$) = $4\ \Omega$\nबैटरी का विभवांतर ($V$) = $6\text{ V}$
(a) परिपथ का कुल प्रतिरोध ($R_s$):\nश्रेणी संयोजन में, कुल प्रतिरोध व्यक्तिगत प्रतिरोधों का योग होता है।
$R_s = R_1 + R_2$
$R_s = 20\ \Omega + 4\ \Omega = 24\ \Omega$\nअतः परिपथ का कुल प्रतिरोध $24\ \Omega$ है।
(b) परिपथ में धारा ($I$):\nओम के नियम के अनुसार, $I = \frac{V}{R_s}$
$I = \frac{6\text{ V}}{24\ \Omega} = \frac{1}{4}\text{ A} = 0.25\text{ A}$\nअतः परिपथ में प्रवाहित धारा $0.25\text{ A}$ है।
(c) विद्युत लैंप ($V_1$) और चालक ($V_2$) के सिरों पर विभवांतर:\nलैंप के सिरों पर विभवांतर ($V_1$) = $I \times R_1$
$V_1 = 0.25\text{ A} \times 20\ \Omega = 5\text{ V}$
\nचालक के सिरों पर विभवांतर ($V_2$) = $I \times R_2$
$V_2 = 0.25\text{ A} \times 4\ \Omega = 1\text{ V}$\nअतः विद्युत लैंप के सिरों पर विभवांतर $5\text{ V}$ और चालक के सिरों पर $1\text{ V}$ है।
उत्तर (Answer): विद्युत शक्ति को उस दर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिस पर किसी विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा की खपत या अपव्यय होता है। दूसरे शब्दों में, यह बिजली के स्रोत द्वारा प्रति इकाई समय में किया गया कार्य है या वह दर है जिस पर विद्युत कार्य किया जाता है। विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है। ओम के नियम से प्राप्त वोल्टेज ($V$), धारा ($I$) और प्रतिरोध ($R$) के संदर्भ में विद्युत शक्ति के तीन गणितीय सूत्र निम्नलिखित हैं: पहला, $P = V \times I$ (विभवांतर और धारा के गुणनफल से प्राप्त)। दूसरा, पहले सूत्र में $V = IR$ प्रतिस्थापित करके, हमें $P = I^2R$ मिलता है (धारा और प्रतिरोध के संदर्भ में)। तीसरा, पहले सूत्र में $I = \frac{V}{R}$ प्रतिस्थापित करके, हम $P = \frac{V^2}{R}$ प्राप्त करते हैं (वोल्टेज और प्रतिरोध के संदर्भ में)। इन सूत्रों का उपयोग विद्युत उपकरणों से जुड़े गणनाओं में व्यापक रूप से किया जाता है।
उत्तर (Answer): **दिया गया है:**
- लैंप का प्रतिरोध ($R_1$) = $20 \, \Omega$
- चालक का प्रतिरोध ($R_2$) = $4 \, \Omega$
- बैटरी का विभवांतर ($V$) = $6 \text{ V}$
**ज्ञात करना है:**
- कुल प्रतिरोध ($R_s$) = ?
- धारा ($I$) = ?
**सूत्र और गणना:**
1. श्रेणी संयोजन के लिए कुल प्रतिरोध:
$R_s = R_1 + R_2$
$R_s = 20 \, \Omega + 4 \, \Omega = 24 \, \Omega$
2. धारा ज्ञात करने के लिए ओम के नियम का उपयोग करना:
$I = \frac{V}{R_s}$
$I = \frac{6 \text{ V}}{24 \, \Omega}$
$I = 0.25 \text{ A}$
**उत्तर:**\nसर्किट का कुल प्रतिरोध $24 \, \Omega$ है और सर्किट से प्रवाहित होने वाली धारा $0.25 \text{ A}$ है।
उत्तर (Answer): जूल का तापीय नियम बताता है कि किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा उससे प्रवाहित होने वाली धारा के वर्ग के सीधे आनुपातिक होती है, सर्किट द्वारा प्रदान किए गए प्रतिरोध के सीधे आनुपातिक होती है, और उस समय के सीधे आनुपातिक होती है जिसके लिए धारा प्रवाहित होती है। गणितीय रूप से, इसे $H = I^2Rt$ के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ $H$ उत्पन्न ऊष्मा है, $I$ धारा है, $R$ प्रतिरोध है, और $t$ समय है। यह प्रभाव इसलिए होता है कि जब विद्युत धारा किसी चालक से गुजरती है, तो गतिमान इलेक्ट्रॉन निश्चित परमाणुओं या आयनों से टकराते हैं, और अपनी गतिज ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में स्थानांतरित करते हैं। इस प्रभाव के दो सामान्य व्यावहारिक अनुप्रयोग इलेक्ट्रिक आयरन और इलेक्ट्रिक हीटर हैं, दोनों ही घरेलू और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए विद्युत ऊर्जा को कुशलतापूर्वक ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए उच्च-प्रतिरोध ताप तत्वों का उपयोग करते हैं।
उत्तर (Answer): **दिया गया है:**
- $R_1 = 2 \, \Omega$
- $R_2 = 3 \, \Omega$
- $R_3 = 6 \, \Omega$
**ज्ञात करना है:**
- तुल्य प्रतिरोध ($R_p$) = ?
**सूत्र:**\nसमांतर क्रम में जुड़े प्रतिरोधकों के लिए:
$\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}$
**गणना:**
$\frac{1}{R_p} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} + \frac{1}{6}$
2, 3 और 6 का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) लेने पर जो कि 6 है:
$\frac{1}{R_p} = \frac{3 + 2 + 1}{6}$
$\frac{1}{R_p} = \frac{6}{6} = 1 \, \Omega^{-1}$
$R_p = 1 \, \Omega$
**उत्तर:**\nसमांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध $1 \, \Omega$ है।