Chapter Chai • Board Revision Guide
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तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

Subject: विज्ञान | Class: Class 10 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 10 विज्ञान

#### अध्याय: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स


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1. परिचय (Introduction)

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2. डोबेराइनर के त्रिक (Dobereiner's Triads)

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3. न्यूलैंड्स का अष्टक नियम (Newlands' Law of Octaves)

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4. मेंडलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev's Periodic Table)

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5. आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table)

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6. आवर्त सारणी में प्रवृत्तियाँ (Trends in Modern Periodic Table)

#### (क) संयोजकता (Valency):


#### (ख) परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius):


#### (ग) धात्विक और अधात्विक गुण (Metallic and Non-Metallic Properties):


#### (घ) विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity):


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महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points to Remember)

1. सबसे हल्का तत्व: हाइड्रोजन (H)

2. सबसे प्रतिक्रियाशील धातु: सीज़ियम (Cs) या फ्रांसियम (Fr)

3. सबसे प्रतिक्रियाशील अधात्विक: फ्लोरीन (F)

4. किसी आवर्त में सबसे बाईं ओर धातुएँ और सबसे दाईं ओर अधातुएँ होती हैं।

5. धातुओं और अधातुओं के बीच सीमा रेखा पर उपधातुएँ (Metalloids) जैसे बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge) आदि होते हैं।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण
Overview
वर्गीकरण की आवश्यकता और प्रारंभिक प्रयास डॉबेराइनर के त्रिक (Dobereiner's Triads) नियम: तीन तत्वों का समूह, बीच वाले का परमाणु द्रव्यमान औसत सीमाएं: बहुत कम त्रिक ज्ञात होना न्यूलैंड्स का अष्टक सिद्धांत (Newlands' Law of Octaves) नियम: आठवें तत्व के गुण पहले तत्व जैसे सीमाएं: केवल कैल्शियम (कैल्शियम) तक लागू, भारी तत्वों के लिए असत्य मेंडेलीव की आवर्त सारणी (Mendeleev's Periodic Table) आधार: परमाणु द्रव्यमान और रासायनिक गुण गुण: नए तत्वों के लिए खाली स्थान छोड़ना सीमाएं: समस्थानिकों का स्थान, हाइड्रोजन की अनिश्चित स्थिति आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) मोजले का नियम (Moseley's Law) आधार: परमाणु संख्या (Atomic Number) कथन: तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन होते हैं संरचना (Structure) आवर्त (Periods) कुल 7 क्षैतिज पंक्तियाँ समूह या वर्ग (Groups) कुल 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ समान संयोजकता इलेक्ट्रॉन वाले तत्व आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्तीय प्रवृत्ति (Periodic Trends) संयोजकता (Valency) आवर्त में: पहले बढ़ती है फिर घटती है समूह में: एक समान रहती है परमाणु त्रिज्या (Atomic Size/Radius) आवर्त में: बाएं से दाएं जाने पर घटती है समूह में: ऊपर से नीचे आने पर बढ़ती है धात्विक और अधात्विक गुण (Metallic & Non-metallic Properties) धात्विक गुण: समूह में नीचे बढ़ने पर बढ़ता है अधात्विक गुण: आवर्त में बाएं से दाएं बढ़ने पर बढ़ता है विद्युत् ऋणात्मकता (Electronegativity) आवर्त में बढ़ती है, समूह में घटती है
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. किसी आवर्त में और किसी समूह में तत्वों की रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता के आवर्ती रुझानों की चर्चा कीजिए। समझाइए कि धात्विक और अधात्विक गुण, संयोजकता और ऑक्साइड की प्रकृति कैसे भिन्न होती है। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### संयोजकता में परिवर्तन - **आवर्त में बाएं से दाएं**: किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तत्वों की संयोजकता 1 से 4 तक बढ़ती है और फिर घटकर 0 हो जाती है। - **समूह में नीचे जाने पर**: किसी दिए गए समूह के सभी तत्वों के लिए संयोजकता समान रहती है क्योंकि उन सभी में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। ### धात्विक और अधात्विक गुण - **आवर्त में बाएं से दाएं**: किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण घटता है, जबकि अधात्विक गुण बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन खोना कठिन हो जाता है और इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना आसान हो जाता है। - **समूह में नीचे जाने पर**: समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है, और अधात्विक गुण घटता है। जैसे-जैसे हम समूह में नीचे जाते हैं, परमाणु का आकार बढ़ता है, जिससे घटे हुए नाभिकीय आकर्षण के कारण परमाणुओं के लिए संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को खोना आसान हो जाता है। ### ऑक्साइड की प्रकृति - **क्षारीय से अम्लीय (आवर्त में)**: आवर्त सारणी के बाएं तरफ के तत्वों के ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं (जैसे Na2O, MgO), जबकि दाईं ओर के तत्वों के ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं (जैसे SO2, Cl2O7)। मध्यवर्ती तत्व उभयधर्मी ऑक्साइड बनाते हैं (जैसे Al2O3, ZnO)। - **समूह में नीचे जाने पर**: समूह में नीचे जाने पर धात्विक ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति बढ़ती है, जबकि अधात्विक ऑक्साइडों की अम्लीय प्रकृति घटती है।
Q2. मैंडलीफ की आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी की तुलना कीजिए। वर्गीकरण के आधार, दूर की गई विसंगतियों और सुधारी गई सीमाओं पर प्रकाश डालिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### वर्गीकरण का आधार - **मैंडलीफ की आवर्त सारणी**: मैंडलीफ ने तत्वों को उनके मौलिक गुण, **परमाणु द्रव्यमान**, और रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता (विशेष रूप से उनके ऑक्साइड और हाइड्राइड) के आधार पर वर्गीकृत किया। - **आधुनिक आवर्त सारणी**: हेनरी मोजले ने वर्गीकरण के आधार के रूप में **परमाणु क्रमांक** का उपयोग करके इसमें सुधार किया, जो नाभिक में प्रोटॉन की संख्या को दर्शाने वाला अधिक मौलिक गुण है। ### विसंगतियां और सीमाएं जो दूर की गईं - **समस्थानिकों की स्थिति**: मैंडलीफ की सारणी में समस्थानिकों ने एक गंभीर समस्या पैदा की क्योंकि उनके परमाणु द्रव्यमान भिन्न थे लेकिन रासायनिक गुण समान थे। आधुनिक आवर्त सारणी ने इसे हल किया क्योंकि समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होता है और उन्हें एक ही स्थान पर रखा जाता है। - **तत्वों के असंगत युग्म**: मैंडलीफ को रासायनिक गुणों से मेल खाने के लिए कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों से पहले अधिक परमाणु द्रव्यमान वाले कुछ तत्वों को रखना पड़ा (जैसे कोबाल्ट और निकल)। आधुनिक आवर्त सारणी ने इस विसंगति को दूर किया क्योंकि तत्वों को सख्ती से बढ़ते परमाणु क्रमांकों द्वारा व्यवस्थित किया जाता है। - **हाइड्रोजन की स्थिति**: मैंडलीफ की सारणी में हाइड्रोजन की स्थिति अनिश्चित थी क्योंकि यह क्षार धातुओं और हैोजन दोनों से मिलता-जुलता है। आधुनिक आवर्त सारणी में, हाइड्रोजन को उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर समूह 1 में रखा गया है। - **भविष्यवाणी करने की शक्ति**: जबकि मैंडलीफ ने खोजे नहीं गए तत्वों (जैसे एका-बोरॉन, एका-एल्युमिनियम और एका-सिलिकॉन) के लिए अंतराल सफलतापूर्वक छोड़े और उनके गुणों की भविष्यवाणी की, आधुनिक आवर्त सारणी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर एक अधिक व्यवस्थित ढांचा प्रदान करती है जो आवर्तिता को पूरी तरह से समझाती है।
Q3. आधुनिक आवर्त नियम को समझाइए और आधुनिक आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताओं की चर्चा कीजिए, जिसमें आवर्त और समूह तथा किसी समूह में नीचे जाने पर और आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार में परिवर्तन के रुझान शामिल हैं। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आधुनिक आवर्त नियम - **कथन**: आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार "तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।" इसका अर्थ है कि जब तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु क्रमांक के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो समान गुणों वाले तत्व नियमित अंतराल पर दोहराए जाते हैं। ### आधुनिक आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएं - **आवर्त (Periods)**: आधुनिक आवर्त सारणी में 7 क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं जिन्हें आवर्त कहा जाता है। जब हम किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाते हैं, तो संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या एक से बढ़ जाती है और कोश की संख्या समान रहती है। - **समूह (Groups)**: आधुनिक आवर्त सारणी में 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ होते हैं जिन्हें समूह कहा जाता है। एक ही समूह के तत्वों में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है और इसलिए वे समान रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं। ### परमाणु आकार में रुझान - **आवर्त में बाएं से दाएं**: किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या सामान्यतः घटती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि क्रमिक तत्वों के साथ नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जो इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के करीब खींचता है जबकि कोशों की संख्या समान रहती है। - **समूह में नीचे जाने पर**: समूह में नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है। जैसे-जैसे हम समूह में नीचे जाते हैं, प्रत्येक चरण में एक नया कोश जुड़ जाता है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों और नाभिक के बीच की दूरी बढ़ जाती है, जिससे बढ़ते नाभिकीय आवेश के बावजूद कुल परमाणु आकार बढ़ जाता है।
Q4. आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तथा समूह में ऊपर से नीचे आने पर तत्वों के गुणों में होने वाले परिवर्तनों की चर्चा कीजिए। किन्हीं चार गुणों की व्याख्या कीजिए: संयोजकता, परमाणु त्रिज्या, धात्विक-अधात्विक गुण, और विद्युत ऋणात्मकता। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### 1. संयोजकता (Valency) - **आवर्त में:** किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर संयोजकता इलेक्ट्रॉन 1 से 8 तक बढ़ते हैं। संयोजकता पहले 1 से 4 तक बढ़ती है और फिर घटकर 0 (उत्कृष्ट गैसों के लिए) हो जाती है। - **समूह में:** समूह में ऊपर से नीचे जाने पर संयोजकता समान रहती है क्योंकि एक ही समूह के सभी तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। ### 2. परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) - **आवर्त में:** आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या सामान्यतः घटती है। इसका कारण यह है कि नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जो इलेक्ट्रונים को नाभिक की ओर खींचता है और परमाणु का आकार छोटा करता है। - **समूह में:** समूह में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है। जैसे-जैसे हम नीचे जाते हैं, एक नया कोश जुड़ता जाता है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों और नाभिक के बीच की दूरी बढ़ जाती है, और परमाणु का आकार बड़ा हो जाता है। ### 3. धात्विक और अधात्विक गुण (Metallic and Non-Metallic Character) - **आवर्त में:** आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण घटता है जबकि अधात्विक गुण बढ़ता है। ऐसा प्रभावी नाभिकीय आवेश के बढ़ने के कारण होता है, जिससे परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन त्यागना कठिन और ग्रहण करना आसान हो जाता है। - **समूह में:** समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है और अधात्विक गुण घटता है। बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं और आवरण प्रभाव तथा बढ़ी हुई दूरी के कारण आसानी से निकल जाते हैं। ### 4. विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) - **आवर्त में:** घटती परमाणु त्रिज्या और बढ़ते नाभिकीय आवेश के कारण आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है, जिससे साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की प्रवृत्ति बढ़ती है। - **समूह में:** समूह में नीचे आने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है क्योंकि परमाणु का आकार बढ़ता है, जिससे साझा इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बल कम हो जाता है।
Q5. आधुनिक आवर्त नियम को समझाइए तथा आधुनिक आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताओं की चर्चा कीजिए। यह मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विसंगतियों को कैसे दूर करता है? 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आधुनिक आवर्त नियम - **कथन:** आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, 'तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।' हेनरी मोजले ने 1913 में प्रदर्शित किया कि परमाणु क्रमांक किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान की तुलना में अधिक मौलिक गुण है। ### आधुनिक आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएं - **आवर्त (Periods):** इसमें 7 क्षैतिज पंक्तियाँ हैं जिन्हें आवर्त कहा जाता है। प्रत्येक आवर्त की शुरुआत एक नए कोश के भरने से होती है। आवर्त में तत्वों की संख्या उस कोश में आने वाले अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है। - **समूह (Groups):** इसमें 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ हैं जिन्हें समूह कहा जाता है। एक ही समूह के तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, जिससे उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। - **ब्लॉक (Blocks):** सारणी को चार ब्लॉकों (s, p, d, और f) में विभाजित किया गया है जो इस बात पर आधारित है कि अंतिम इलेक्ट्रॉन किस उपकोश में प्रवेश करता है। ### मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विसंगतियों का समाधान - **समस्थानिकों की स्थिति:** चूंकि समस्थानिकों के परमाणु क्रमांक समान होते हैं, इसलिए उन्हें आधुनिक आवर्त सारणी में एक ही स्थान पर रखा गया है, जिससे मेंडलीफ के समय की समस्या हल हो गई। - **असंगत युग्म:** मेंडलीफ की सारणी में अधिक परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों को कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों से पहले रखा गया था (जैसे कोबाल्ट को निकेल से पहले)। परमाणु क्रमांक (Co = 27, Ni = 28) के आधार पर व्यवस्थित करने से यह विसंगति स्वतः दूर हो गई। - **इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:** यह परमाणु द्रव्यमान के बजाय परमाणु संरचना और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर वर्गीकरण का स्पष्ट आधार प्रदान करता है।
Q6. एक तत्व 'X' आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 13 और आवर्त 3 से संबंधित है। (a) तत्व 'X' का परमाणु क्रमांक क्या है? (b) इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। (c) तत्व 'X' द्वारा बनाए गए ऑक्साइड का सूत्र क्या है? (d) क्या तत्व 'X' एक धातु, अधातु या उपधातु है? 5 Marks
उत्तर (Answer): तत्व 'X' के गुणों का पता लगाने के लिए, आइए आधुनिक आवर्त सारणी में इसकी स्थिति का उपयोग करें। **(a) परमाणु क्रमांक ज्ञात करना:** * यह तत्व आवर्त 3 से संबंधित है, जिसका अर्थ है कि इसमें 3 इलेक्ट्रॉन आवरण (K, L, और M आवरण) हैं। * यह तत्व समूह 13 से संबंधित है। समूह 13 से 18 के तत्वों के लिए, संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या (समूह संख्या - 10) के रूप में गणना की जाती है। * संयोजकता इलेक्ट्रॉन = 13 - 10 = 3। * चूंकि यह आवर्त 3 में है, इसलिए पहले दो आवरण (K और L) क्रमशः 2 और 8 इलेक्ट्रॉनों से पूरी तरह भरे हुए हैं। * तीसरे (सबसे बाहरी) आवरण में 3 इलेक्ट्रॉन हैं। * कुल इलेक्ट्रॉन = 2 (K आवरण) + 8 (L आवरण) + 3 (M आवरण) = 13। * इसलिए, तत्व 'X' का परमाणु क्रमांक **13** है (यह तत्व एल्युमिनियम, Al है)। **(b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:** * 13 के परमाणु क्रमांक के साथ, आवरणों (K, L, M) में इलेक्ट्रॉनों का वितरण इस प्रकार है: * K आवरण = 2 * L आवरण = 8 * M आवरण = 3 * इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = **2, 8, 3** **(c) निर्मित ऑक्साइड का सूत्र:** * तत्व 'X' की संयोजकता इसके परमाणु में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है, जो कि 3 है। * ऑक्सीजन समूह 16 से संबंधित है, और इसकी संयोजकता 2 है। * क्रॉस-संयोजकता विधि का उपयोग करके: - तत्व 'X' की संयोजकता: +3 - ऑक्सीजन की संयोजकता: -2 - सूत्र: $\text{X}_2\text{O}_3$ * इसलिए, ऑक्साइड का सूत्र **$\text{Al}_2\text{O}_3$** (एल्युमिनियम ऑक्साइड) है। **(d) तत्व की प्रकृति:** * तत्व 'X' (एल्युमिनियम) आवर्त सारणी के बाईं ओर 3 संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के साथ स्थित है, जिन्हें यह धनात्मक आयन बनाने के लिए आसानी से त्याग देता है। * इसलिए, तत्व 'X' एक **धातु** है।
Q7. निम्नलिखित गुणों के लिए आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त में बाएं से दाएं और समूह में ऊपर से नीचे जाने पर देखे जाने वाले विभिन्न प्रवृत्तियों की चर्चा कीजिए: (a) संयोजकता, (b) परमाणु आकार, (c) धात्विक और अधात्विक गुण। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आधुनिक आवर्त सारणी में प्रवृत्तियाँ\nआधुनिक आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं या किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के गुण एक पूर्वानुमानित तरीके से बदलते हैं। ये प्रवृत्तियाँ तत्वों की रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता और प्रकृति को समझने में मदद करती हैं। #### (a) संयोजकता * **आवर्त में:** किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 से बढ़कर 8 हो जाती है। संयोजकता पहले 1 से 4 तक बढ़ती है और फिर उत्कृष्ट गैसों के लिए घटकर 0 (या 8) हो जाती है। * **समूह में नीचे जाने पर:** समूह में नीचे जाने पर संयोजकता समान रहती है क्योंकि एक ही समूह के सभी तत्वों के सबसे बाहरी आवरण में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। #### (b) परमाणु आकार (परमाणु त्रिज्या) * **आवर्त में:** किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इलेक्ट्रॉन एक ही आवरण में जोड़े जाते हैं, जिससे नाभिकीय आवेश बढ़ता है जो इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के करीब खींचता है, जिससे परमाणु का आकार कम हो जाता है। * **समूह में नीचे जाने पर:** समूह में नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है। जैसे-जैसे हम नीचे जाते हैं, प्रत्येक चरण में एक नया आवरण जोड़ा जाता है, जिससे सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों और नाभिक के बीच की दूरी बढ़ जाती है, जिससे बढ़े हुए नाभिकीय आवेश के बावजूद समग्र आकार बढ़ जाता है। #### (c) धात्विक और अधात्विक गुण * **आवर्त में:** किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण घटता है, जबकि अधात्विक गुण बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है, जिससे परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन खोना (धात्विक गुण) कठिन हो जाता है और इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना या साझा करना (अधात्विक गुण) आसान हो जाता है। * **समूह में नीचे जाने पर:** समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है और अधात्विक गुण घटता है। जैसे-जैसे समूह में नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है, सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर कमजोर नाभिकीय आकर्षण के कारण संयोजकता इलेक्ट्रॉन अधिक आसानी से खोए जा सकते हैं।
Q8. आधुनिक आवर्त नियम को समझाइए और मेंडलीफ की आवर्त सारणी के प्रमुख दोषों की चर्चा कीजिए जिन्हें आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा सफलतापूर्वक दूर किया गया था। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आधुनिक आवर्त नियम\nआधुनिक आवर्त नियम 1913 में हेनरी मोजले द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इसके अनुसार: **"तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।"** इसका अर्थ यह है कि जब तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो समान गुणों वाले तत्व नियमित अंतराल के बाद फिर से आते हैं। ### मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोषों का निवारण\nहेनरी मोजले ने दर्शाया कि परमाणु द्रव्यमान की तुलना में परमाणु क्रमांक किसी तत्व का अधिक मौलिक गुण है। परमाणु क्रमांक पर आधारित व्यवस्था ने मेंडलीफ की आवर्त सारणी की कई विसंगतियों को दूर किया: * **समस्थानिकों का स्थान:** समस्थानिकों के परमाणु क्रमांक समान होते हैं लेकिन परमाणु द्रव्यमान भिन्न होते हैं। परमाणु द्रव्यमान पर आधारित मेंडलीफ की सारणी में समस्थानिकों को रखना एक समस्या थी। आधुनिक आवर्त सारणी में, चूंकि तत्वों को परमाणु क्रमांक के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है, इसलिए किसी तत्व के सभी समस्थानिक एक ही स्थान पर आते हैं। * **तत्वों के असंगत युग्म:** मेंडलीफ की सारणी में, अधिक परमाणु द्रव्यमान वाले कुछ तत्वों के युग्मों को कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों से पहले रखा गया था (उदाहरण के लिए, 58.9 परमाणु द्रव्यमान वाले कोबाल्ट को 58.7 परमाणु द्रव्यमान वाले निकेल से पहले रखा गया था) ताकि समान गुणों वाले तत्वों को एक साथ समूहीकृत किया जा सके। आधुनिक आवर्त सारणी इसे हल करती है क्योंकि कोबाल्ट का परमाणु क्रमांक 27 है और निकेल का 28 है, जिसका अर्थ है कि बढ़ते परमाणु क्रमांक के आधार पर कोबाल्ट सही ढंग से निकेल से पहले आता है। * **आवर्ती गुण और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:** आधुनिक आवर्त सारणी बताती है कि तत्व गुणों में आवर्तिकता क्यों प्रदर्शित करते हैं। एक ही समूह के तत्वों के सबसे बाहरी आवरण में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, जिससे समान रासायनिक व्यवहार होता है, जबकि मेंडलीफ आवर्तिकता का कोई मौलिक कारण प्रदान नहीं कर सके थे। * **धातुओं और अधातुओं का पृथक्करण:** आधुनिक आवर्त सारणी पुरानी सारणी की तुलना में अधिक व्यवस्थित वर्गीकरण प्रदान करते हुए, एक ज़िग-ज़ैग रेखा की मदद से धातुओं, अधातुओं और उपधातुओं को स्पष्ट रूप से अलग करती है।
Q9. आधुनिक आवर्त सारणी की विस्तार से चर्चा कीजिए। समझाइए कि आधुनिक आवर्त नियम मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी की सीमाओं को कैसे दूर करता है और आधुनिक आवर्त वर्गीकरण में प्रवृत्तियों (संयोजकता, परमाणु आकार, धात्विक और अधात्विक गुण) का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### आधुनिक आवर्त नियम का परिचय 1913 में, हेनरी मोसले ने दिखाया कि किसी तत्व का परमाणु क्रमांक उसके परमाणु द्रव्यमान की तुलना में अधिक मौलिक गुण है। फलस्वरूप, आधुनिक आवर्त नियम प्रतिपादित किया गया: 'तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।' आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों को 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभों (समूहों) और 7 क्षैतिज पंक्तियों (आवर्तों) में बढ़ते परमाणु क्रमांक के क्रम में व्यवस्थित करती है। ### मेन्डेलीफ की सीमाओं का समाधान * **समस्थानिकों की स्थिति:** चूँकि समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होता है, वे आधुनिक आवर्त सारणी में बिल्कुल एक ही स्थान पर आते हैं, जिससे समस्थानिक की दुविधा हल हो जाती है। * **असंगत जोड़े:** परमाणु क्रमांक के अनुसार व्यवस्थित करने से तत्व प्राकृतिक रूप से द्रव्यमान क्रम विसंगतियों का उल्लंघन किए बिना सही अनुक्रम में आ जाते हैं (उदाहरण के लिए, परमाणु क्रमांक 27 वाला कोबाल्ट 28 वाले निकल से पहले आता है)। * **आवर्तित्ता का कारण:** आवर्तित्ता नियमित अंतराल पर समान संयोजकता कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की पुनरावृत्ति के कारण होती है। ### आधुनिक आवर्त सारणी में प्रवृत्तियाँ * **संयोजकता:** एक समूह में नीचे जाने पर संयोजकता समान रहती है क्योंकि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या स्थिर होती है। आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर, संयोजकता पहले 1 से 4 तक बढ़ती है और फिर घटकर 0 हो जाती है। * **परमाणु आकार (त्रिज्या):** प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है, जो इलेक्ट्रॉनों को करीब खींचती है। नए इलेक्ट्रॉनिक कोशों के जुड़ने के कारण समूह में नीचे जाने पर यह बढ़ती है। * **धात्विक और अधात्विक गुण:** आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण घटता है और समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है, क्योंकि आवर्त में इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति घटती है और समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है। अधात्विक गुण ठीक इसके विपरीत प्रवृत्ति का पालन करता है।
Q10. मेन्डेलीफ के आवर्त नियम और तत्वों के वर्गीकरण में इसके योगदान को समझाइए। मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी की प्रमुख विसंगतियों या सीमाओं की भी चर्चा कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### मेन्डेलीफ के आवर्त नियम का परिचय\nरूसी रसायनज्ञ दिमित्री मेन्डेलीफ ने आवर्त नियम प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार 'त तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन होते हैं।' इस नियम के आधार पर, उन्होंने उस समय ज्ञात 63 तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में व्यवस्थित किया और समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को एक साथ समूहीकृत किया, जिसे मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी के रूप में जाना जाता है। ### प्रमुख योगदान और गुण * **त तत्वों का व्यवस्थित अध्ययन:** मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी ने बड़ी संख्या में तत्वों और उनके अनेकों यौगिकों के अध्ययन को प्रबंधनीय समूहों में सरल और व्यवस्थित किया। * **नए तत्वों की भविष्यवाणी:** उल्लेखनीय दूरदर्शिता के साथ, मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में उन तत्वों के लिए खाली जगह छोड़ दी जिनकी खोज उस समय नहीं हुई थी। उन्होंने इन खोजे गए तत्वों के अस्तित्व और गुणों की साहसी भविष्यवाणी की, जिनका नाम उन्होंने एका-बोरॉन, एका-एल्युमिनियम और एका-सिलिकॉन रखा (जिन्हें बाद में क्रमशः स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम के रूप में खोजा गया)। * **परमाणु द्रव्यमानों का सुधार:** मेन्डेलीफ ने आवर्त सारणी में उनके उचित स्थान के आधार पर कुछ तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों को सुधारा, जिससे उनके गुण सही समूह के साथ मेल खा सकें। * **नियमितता और पूर्वानुमान:** इस सारणी ने भविष्य के अनुसंधान के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया। ### विसंगतियाँ और सीमाएँ * **समस्थानिकों की स्थिति:** चूँकि किसी तत्व के समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान भिन्न होते हैं लेकिन रासायनिक गुण समान होते हैं, इसलिए उन्हें मेन्डेलीफ की सारणी में अलग स्थान नहीं दिया जा सकता था, जो मूल सिद्धांत का उल्लंघन करता था। * **तत्वों के असंगत जोड़े:** कुछ उदाहरणों में, समान गुणों वाले तत्वों को एक समूह में रखने के लिए अधिक परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों को कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों से पहले रखा गया (उदाहरण के लिए, 58.9 परमाणु द्रव्यमान वाले कोबाल्ट को 58.7 वाले निकल से पहले रखा गया था)। * **हाइड्रोजन की स्थिति:** हाइड्रोजन क्षार धातुओं (समूह 1) और हैलोजन (समूह 17) दोनों से समानता रखता है, जिससे आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को एक निश्चित और स्पष्ट स्थान देना कठिन हो गया। * **आवर्तित्ता का कारण:** आवर्त सारणी यह समझाने में विफल रही कि तत्व नियमित अंतराल पर आवर्तित्ता क्यों प्रदर्शित करते हैं।
Q11. एक तत्व 'X' आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 13 और आवर्त 3 से संबंधित है। (a) तत्व 'X' का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। (b) तत्व 'X' की संयोजकता क्या है? (c) तत्व 'X' द्वारा निर्मित ऑक्साइड का रासायनिक सूत्र लिखिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): (a) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: तत्व 'X' आवर्त 3 में है, जिसका अर्थ है कि इसमें 3 इलेक्ट्रॉन शेल (K, L, M) हैं। यह समूह 13 से संबंधित है, जिसका अर्थ है कि इसके सबसे बाहरी (M) शेल में 3 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं। आंतरिक शेलों को क्षमतानुसार भरने पर (K=2, L=8), इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 3 हो जाता है। तत्व की परमाणु संख्या 2 + 8 + 3 = 13 (एल्युमिनियम) है। अतः इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 3 है। (b) संयोजकता: चूंकि सबसे बाहरी शेल में 3 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए यह एक स्थिर अष्टक विन्यास प्राप्त करने के लिए इन 3 इलेक्ट्रॉनों को त्याग देता है। इसलिए, तत्व 'X' की संयोजन क्षमता या संयोजकता +3 है। (c) ऑक्साइड का रासायनिक सूत्र: तत्व 'X' की संयोजकता +3 है, और ऑक्सीजन आमतौर पर अपने ऑक्साइड में -2 संयोजकता प्रदर्शित करती है। रासायनिक सूत्रों के लिए क्राइस-क्रॉस विधि लागू करने पर, तत्व 'X' (संयोजकता 3) और ऑक्सीजन 'O' (संयोजकता 2) के प्रतीक मिलकर $X_2O_3$ बनाते हैं। एल्युमिनियम के लिए, ऑक्साइड का सूत्र $Al_2O_3$ (एल्युमिनियम ऑक्साइड) है।
Q12. आधुनिक आवर्त सारणी में परमाणु द्रव्यमान की तुलना में परमाणु संख्या के महत्व को समझाइए। तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास आधुनिक आवर्त सारणी में उनके स्थान को निर्धारित करने में कैसे मदद करता है? 3 Marks
उत्तर (Answer): आधुनिक आवर्त सारणी हेनरी मोजले द्वारा प्रतिपादित की गई थी, जिन्होंने वर्गीकरण के आधार को परमाणु द्रव्यमान से बदलकर परमाणु संख्या करके मेंडलीफ की आवर्त सारणी में संशोधन किया था। आधुनिक आवर्त नियम बताता है कि तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्ती फलन होते हैं। यह परिवर्तन अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि परमाणु संख्या किसी परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या का प्रतिनिधित्व करती है, जो किसी दिए गए तत्व के लिए एक मौलिक और निश्चित गुण है, परमाणु द्रव्यमान के विपरीत जो समस्थानिकों के कारण भिन्न हो सकता है। किसी तत्व के समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है और इस प्रकार वे समान रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं, जिससे मेंडलीफ की सारणी में आने वाली समस्थानिकों के स्थान की असंगति दूर हो जाती है। इसके अलावा, तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास आधुनिक आवर्त सारणी में उनके सटीक स्थान को निर्धारित करता है। तत्वों को 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभों (जिन्हें समूह कहा जाता है) और 7 क्षैतिज पंक्तियों (जिन्हें आवर्त कहा जाता है) में बढ़ती परमाणु संख्या के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। किसी परमाणु के सबसे बाहरी शेल में मौजूद संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या उसके समूह संख्या को निर्धारित करती है, जो उसकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता और संयोजकता को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, समान संख्या में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों वाले तत्वों को एक साथ समूहीकृत किया जाता है और वे समान रासायनिक गुण दिखाते हैं। दूसरी ओर, मुख्य क्वांटम संख्या या इलेक्ट्रॉनों द्वारा अधिकृत शेलों की कुल संख्या तत्व की आवर्त संख्या को निर्धारित करती है। इसलिए, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का विश्लेषण करके, कोई भी आवर्त सारणी के भीतर किसी भी तत्व का सटीक पता लगा सकता है, जिससे रसायन विज्ञान के अध्ययन के लिए वर्गीकरण व्यवस्थित, तार्किक और भविष्यवक्ता बन जाता है।
Q13. एक उदाहरण के साथ डोबेराइनर के त्रिक नियम को समझाइए। डोबेराइनर के त्रिक सभी ज्ञात तत्वों के लिए सफल क्यों नहीं थे? 3 Marks
उत्तर (Answer): जर्मन रसायनज्ञ जॉन वोल्फगैंग डोबेराइनर ने देखा कि समान रासायनिक गुणों के आधार पर तत्वों को तीन के समूहों में व्यवस्थित किया जा सकता है, जिन्हें त्रिक (Triads) कहा जाता है। डोबेराइनर के त्रिक नियम के अनुसार, जब किसी त्रिक में तीन तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो बीच के तत्व का परमाणु द्रव्यमान पहले और तीसरे तत्वों के परमाणु द्रव्यमान का लगभग अंकगणितीय माध्य होता है। **त्रिक का उदाहरण:** क्षार धातुओं के त्रिक पर विचार करें जिसमें लिथियम (Li), सोडियम (Na) और पोटेशियम (K) शामिल हैं। - लिथियम (Li) का परमाणु द्रव्यमान = 7 - पोटेशियम (K) का परमाणु द्रव्यमान = 39 - Li और K के परमाणु द्रव्यमान का औसत = (7 + 39) / 2 = 46 / 2 = 23 - सोडियम (Na) का परमाणु द्रव्यमान 23 है, जो इस परिकलित औसत के लगभग बराबर है। **सीमाएँ और असफलता का कारण:** डोबेराइनर की प्रणाली सभी ज्ञात तत्वों के लिए सफल नहीं थी क्योंकि वह उस समय ज्ञात तत्वों में से केवल तीन ऐसे त्रिकों की पहचान कर सके थे। जैसे-जैसे नए तत्वों की खोज हुई, उनमें से कई किसी भी त्रिक में फिट नहीं बैठे। इसके अलावा, अत्यधिक समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों के बीच भी, परमाणु द्रव्यमान का नियम सभी मामलों के लिए पूरी तरह से सटीक नहीं रहा। परिणामतः, प्रकृति में तत्वों की विस्तृत विविधता को कवर करने के लिए इस वर्गीकरण को अपर्याप्त और बहुत सीमित माना गया।
Q14. आवर्त 3 के तत्वों पर विचार कीजिए: Na, Mg, Al, Si, P, S, Cl, Ar. (a) इनमें से किसकी परमाणु त्रिज्या सबसे बड़ी है? (b) इनमें से कौन सबसे अधिक अधात्विक है? (c) इस आवर्त में संयोजकता कैसे बदलती है? 3 Marks
उत्तर (Answer): (a) **सबसे बड़ी परमाणु त्रिज्या:** आवर्त 3 में **सोडियम (Na)** की परमाणु त्रिज्या सबसे बड़ी होती है। जैसे-जैसे हम एक आवर्त में बाएं से दाएं जाते हैं, नाभिकीय आवेश बढ़ने के साथ इलेक्ट्रॉन एक ही ऊर्जा कोश में जोड़े जाते हैं। यह बढ़ा हुआ नाभिकीय खिंचाव इलेक्ट्रॉन बादल को नाभिक के करीब खींचता है, जिससे परमाणु का आकार लगातार सिकुड़ता जाता है। चूंकि सोडियम इस आवर्त के बाईं ओर का पहला तत्व है, इसलिए यह सबसे कम नाभिकीय खिंचाव का अनुभव करता है, जिससे इसका आकार सबसे बड़ा होता है। (b) **सबसे अधिक अधात्विक तत्व:** **क्लोरीन (Cl)** उनमें सबसे अधिक अधात्विक तत्व है (आर्गन को छोड़कर, जो एक अक्रिय गैस है)। अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने और स्वीकार करने की मजबूत क्षमता के कारण आवर्त में अधात्विक चरित्र बढ़ता है। (c) **संयोजकता में परिवर्तन:** आवर्त 3 में, तत्वों की संयोजकता पहले **1 से बढ़कर 4 होती है और फिर घटकर 0 हो जाती है**: - Na की संयोजकता 1 है - Mg की संयोजकता 2 है - Al की संयोजकता 3 है - Si की संयोजकता 4 है - P की संयोजकता 3 है - S की संयोजकता 2 है - Cl की संयोजकता 1 है - Ar की संयोजकता 0 है
Q15. आधुनिक आवर्त सारणी में किसी समूह में नीचे जाने पर और एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तत्वों का धात्विक चरित्र कैसे बदलता है? अपने उत्तर के लिए कारण दीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): धात्विक चरित्र किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन खोने और धनात्मक आयन (केशन) बनाने की प्रवृत्ति को संदर्भित करता है। 1. **समूह में नीचे जाने पर परिवर्तन:** आधुनिक आवर्त सारणी में किसी समूह में नीचे जाने पर तत्वों का धात्विक चरित्र **बढ़ता** है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर क्रमिक रूप से नए इलेक्ट्रॉन कोश जुड़ते हैं, जिससे नाभिक और सबसे बाहरी संयोजी इलेक्ट्रॉनों के बीच की दूरी बढ़ जाती है। इस बढ़ी हुई दूरी के कारण, संयोजी इलेक्ट्रॉनों द्वारा अनुभव किया जाने वाला नाभिकीय आकर्षण काफी कम हो जाता है। परिणामस्वरूप, सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों को बहुत आसानी से खोया जा सकता है, जिससे तत्वों की धात्विक प्रकृति बढ़ जाती है। 2. **एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परिवर्तन:** बाएं से दाएं एक आवर्त में आगे बढ़ने पर, तत्वों का धात्विक चरित्र **घट जाता है**, जबकि अधात्विक चरित्र बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाएं से दाएं जाने पर, प्रोटॉनों के जुड़ने के कारण नाभिकीय आवेश बढ़ता है जबकि इलेक्ट्रॉन एक ही कोश में जोड़े जाते हैं। यह बढ़ा हुआ नाभिकीय आवेश इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के करीब खींचता है, जिससे परमाणु त्रिज्या प्रभावी रूप से कम हो जाती है और परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन खोना बहुत कठिन हो जाता है। इसके बजाय, दाईं ओर के तत्व इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने या साझा करने की प्रवृत्ति रखते हैं, जिससे वे अधिक अधात्विक हो जाते हैं।