मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Revision Notes)
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मुख्य परिभाषाएँ (Key Definitions)
- राष्ट्रवाद (Nationalism): एक भावना जो किसी देश के लोगों में साझा पहचान, इतिहास, संस्कृति और भाषा के आधार पर एकता और देशभक्ति की भावना जागृत करती है।
- राष्ट्र-राज्य (Nation-State): एक ऐसा राज्य जहाँ के शासक और अधिकांश नागरिक, न केवल अपने शासकों के प्रति बल्कि एक साझा पहचान और साझा इतिहास या वंश की भावना के प्रति भी एक संगठित भावना रखते हैं।
- जनमत संग्रह (Plebiscite): एक प्रत्यक्ष मतदान जिसके जरिए क्षेत्र के सभी लोगों से किसी प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए पूछा जाता है।
- उदारवाद (Liberalism): लैटिन शब्द 'लाबर' (Liber) से बना है, जिसका अर्थ है 'आज़ादी'। इसके राजनीतिक अर्थ में व्यक्ति के लिए आज़ादी और कानून के समक्ष समानता तथा आर्थिक क्षेत्र में बाज़ार की आज़ादी और चीज़ों तथा पूँजी के आवागमन पर राज्य द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की समाप्ति शामिल है।
- रूढ़िवाद (Conservatism): एक ऐसा राजनीतिक दर्शन जो परंपरा, स्थापित संस्थाओं और रिवाज़ों (जैसे राजतंत्र, चर्च, सामाजिक पदानुक्रम, संपत्ति) की तेज़ सुरक्षा पर जोर देता है और तेज़ बदलाव की बजाय क्रमिक विकास को प्राथमिकता देता है।
- नारीवाद (Feminism): महिलाओं के अधिकारों और हितों के आधार पर महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता की सोच।
- जेलें (Junker): प्रशिया के बड़े भू-स्वामी (जमींदार) वर्ग के लोग।
- रक्तांत और लौह की नीति (Blood and Iron Policy): जर्मनी के एकीकरण के लिए ओटो वान बिस्मार्क द्वारा अपनाई गई शक्ति और युद्ध की नीति।
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मुख्य घटनाएँ और तिथियाँ (Important Dates & Events)
- 1789: फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) - राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति।
- 1804: नेपोलियन की नागरिक संहिता (Civil Code of 1804) जिसे नेपोलियन का कोड भी कहा जाता है।
- 1815: वियना की संधि (Treaty of Vienna) - नेपोलियन की हार (वाटरलू का युद्ध) के बाद यूरोपीय शक्तियों द्वारा रूढ़िवादी व्यवस्था की स्थापना।
- 1830: यूरोप में प्रथम उथल-पुथल / जुलाई क्रांति (July Revolution).
- 1831: ग्यूसेपे मैजिनी द्वारा 'यंग इटली' (Young Italy) की स्थापना।
- 1848: यूरोप के विभिन्न देशों में क्रांतिकारियों का विद्रोह और 'उदारवादियों की क्रांति'।
- 1861: इग्मैर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।
- 1871: जर्मन साम्राज्य की घोषणा (वर्साय में प्रशियाई राजा विलियम प्रथम को जर्मन सम्राट घोषित किया गया)।
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महत्वपूर्ण अवधारणाएँ और प्रणालियाँ
#### 1. फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्र का विचार (The French Revolution and the Idea of the Nation)
- सामूहिक पहचान की भावना: 'ला पात्री' (पितृभूमि) और 'ले सिटोयेन' (नागरिक) जैसे विचारों ने एक संयुक्त समुदाय के अधिकार दिए।
- नया झंडा: फ्रांसीसी तिरंगा झंडा चुना गया।
- केन्द्रीय प्रशासनिक व्यवस्था: आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त किए गए और भार तथा नाप की एक समान प्रणाली लागू की गई।
#### 2. नेपोलियन की नागरिक संहिता (1804) / नेपोलियन कोड
- जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए।
- कानून के समक्ष समानता और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया गया।
- सामंती व्यवस्था को समाप्त किया गया और किसानों को भू-दासता और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई गई।
- यातायात और संचार प्रणालियों में सुधार किया गया।
#### 3. यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण (The Making of Nationalism in Europe)
- कुलीन वर्ग और नया मध्य वर्ग: सामाजिक और राजनीतिक रूप से कुलीन वर्ग प्रभावशाली था, लेकिन औद्योगीकरण के कारण 'नया मध्य वर्ग' (व्यापारी, उद्योगपति, पेशेवर लोग) उभरा, जिसने राष्ट्रीय एकता के विचारों को बढ़ावा दिया।
- जालवेरिन (Zollverein): 1834 में प्रशिया की पहल पर एक शुल्क संघ (Customs Union) स्थापित किया गया, जिसने शुल्क अवरोधों को समाप्त किया और मुद्राओं की संख्या 30 से घटाकर दो कर दी।
#### 4. क्रांतिकारियों का युग (1830-1848)
- गुप्त समाज (Secret Societies) जैसे 'यंग इटली' और 'यंग यूरोप' की स्थापना ग्यूसेपे मैजिनी द्वारा की गई।
- 1848 में भूखे, बेरोजगार और भुखमरी से पीड़ित किसानों/मजदूरों ने विद्रोह किया और मध्यम वर्ग ने 'राष्ट्र-राज्य' के निर्माण की मांग की।
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राष्ट्रों का एकीकरण (Unification of Nations)
#### क. जर्मनी का एकीकरण (Unification of Germany)
- नेतृत्व: प्रशिया (Prussia) के मुख्यमंत्री ओटो वान बिस्मार्क ने जर्मन एकीकरण का नेतृत्व किया।
- रणनीति: 'रक्तांत और लौह की नीति' (Blood and Iron).
- युद्ध: 7 वर्षों के दौरान ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस के साथ तीन युद्धों में प्रशिया की जीत हुई।
- परिणाम: जनवरी 1871 में वर्साय के महल में प्रशिया के राजा काइजर विलियम प्रथम को नए जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया।
#### ख. इटली का एकीकरण (Unification of Italy)
- विभाजन: इटली कई राज्यों में बंटा हुआ था (केवल सार्डिनिया-पीडमॉन्ट पर इतालवी राजघराने का शासन था)।
- मुख्य हस्तियाँ:
1. ग्यूसेपे मैजिनी: शुरुआती क्रांतिकारी जिन्होंने 'यंग इटली' के माध्यम से जागरूकता फैलाई।
2. काउंत कैमिलो दि कावूर (Cavour): सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री, जिन्होंने कूटनीति के माध्यम से फ्रांस से गठबंधन किया और ऑस्ट्रिया को हराया।
3. ग्यूसेपे गैरीबाल्डी: वीर योद्धा जिन्होंने सशस्त्र स्वयंसेवकों (रेड शर्ट्स) के साथ दक्षिण इटली और सिसिली को जीता।
- परिणाम: 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।
#### ग. ब्रिटेन का अजीब किस्सा (The Strange Case of Britain)
- ब्रिटेन में राष्ट्रवाद का निर्माण अचानक नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम था।
- 1688: अंग्रेजी संसद ने राजतंत्र से ताकत छीनी।
- 1707: 'एक्ट ऑफ़ यूनियन' (Act of Union) द्वारा इंग्लैंड और स्कॉटलैंड को मिलाकर 'ग्रेट ब्रिटेन' का गठन किया गया।
- 1801: आयरलैंड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में मिला लिया गया। एक नया 'ब्रिटिश राष्ट्र' बना, जिस पर अंग्रेजी संस्कृति का प्रभुत्व था (नया झंडा 'यूनियन जैक' और राष्ट्रगान 'गॉड सेव द किंग' अपनाया गया)।
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दृश्य रूपक (Visualising the Nation)
- राष्ट्र को एक नारी के रूप में चित्रित किया गया (रूपक/Allegory)।
- मैरियन (Marianne): फ्रांस में लोकप्रिय ईसाई नाम, जो जन राष्ट्र का प्रतीक बना (लाल टोपी, तिरंगा, कलगी)।
- जर्मेनिया (Germania): जर्मनी के राष्ट्र की रूपक (बलूत के पत्तों का मुकुट, जो वीरता का प्रतीक है)।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
फ्रेडरिक सॉर्यू के चित्र
लोकतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्र
राष्ट्रों का उदय
फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्र का विचार
मुख्य बदलाव
राजशाही से नागरिकों के हाथ में सत्ता
सामूहिक पहचान की भावना
उठाए गए कदम
त्रिरंग झंडा
नया राष्ट्रगान और शपथ
आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त
केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था
नेपोलियन का प्रभाव
नागरिक संहिता (1804) / नेपोलियन की संहिता
जन्म आधारित विशेषाधिकार समाप्त
कानून के समक्ष समानता
संपत्ति का अधिकार सुरक्षित
प्रशासनिक सुधार
सामंती व्यवस्था खत्म
किसानों को भू-दासता से मुक्ति
माप-तोल की एक समान प्रणाली
प्रतिक्रिया
शुरुआत में स्वागत, बाद में विरोध (कर वृद्धि, सेंसरशिप, जबरन भर्ती)
यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण
समाज की बनावट
कुलीन वर्ग (भू-स्वामी, शक्तिशाली, अल्पसंख्यक)
नया मध्यम वर्ग (औद्योगीकरण के बाद उभरा)
उदारवादी राष्ट्रवाद का अर्थ
स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समानता
तानाशाही और पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों का अंत
आर्थिक क्षेत्र में बाजार की स्वतंत्रता और शुल्क अवरोधों की समाप्ति (ज़ॉलवेराइन शुल्क संघ)
1815 के बाद का रूढ़िवाद और क्रांतियाँ
वियना की संधि (1815)
ड्यूक मेटरनिक द्वारा आयोजित
बोरबॉन राजवंश की पुनर्स्थापसी
फ्रांस की सीमा पर नए राज्य स्थापित
क्रांतिकारी (1830-1848)
गुप्त समाज (जैसे- यंग इटली)
ग्यूसेप मेत्जिनी की भूमिका
'जूलाई क्रांति' (फ्रांस)
1848 की उदारवादी क्रांति (बेरोजगारों और भूख से पीड़ित लोगों का विद्रोह)
जर्मनी और इटली का निर्माण
जर्मनी का एकीकरण
ओटो वॉन बिस्मार्क की मुख्य भूमिका
'रक्त और लौह' की नीति
1871 में कैसर विलियम प्रथम का राज्याभिषेक
इटली का एकीकरण
बिखरा हुआ क्षेत्र (सात राज्य)
प्रमुख नेता
ग्यूसेप मेत्जिनी (विचारक)
काउंट कैवूर (रणनीतिकार)
ग्यूसेप गैरिबाल्डी (सशस्त्र सेनानी)
1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय बने राजा
ब्रिटेन का अजीब किस्सा
अंग्रेजी संसद द्वारा सत्ता हथियाना
1707 का एक्ट ऑफ़ यूनियन (इंग्लैंड और स्कॉटलैंड)
आयरलैंड का जबरन बलपूर्वक अधिग्रहण (1801)
ब्रिटिश राष्ट्र का प्रतीक (ब्रिटिश झंडा, राष्ट्रगान)
राष्ट्र की दृश्य कल्पना
रूपकों (Allegory) का प्रयोग
फ्रांस में 'मरियान' (लोकतांत्रिक जनवादी प्रतीक)
जर्मनी में 'जर्मेनिया' (बलूत वृक्ष का मुकुट - वीरता का प्रतीक)
राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद
19वीं सदी के अंतिम चौथाई भाग में बदलाव
बाल्कन क्षेत्र में तनाव
भौगोलिक और जातीय विविधता
ओटोमन साम्राज्य का पतन
रूस, जर्मनी, इंग्लैंड जैसी ताकतों की महत्वाकांक्षाएँ
परिणाम
प्रथम विश्व युद्ध (1914) की पृष्ठभूमि तैयार होना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### नेपोलियन की आचार संहिता का परिचय\nफ्रांसीसी सैन्य और राजनीतिक नेता नेपोलियन बोनापार्ट ने कई कानूनों और प्रशासनिक सुधारों को पेश किया जिन्होंने यूरोप के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया। 1804 की नागरिक संहिता, जिसे आमतौर पर नेपोलियन की आचार संहिता के रूप में जाना जाता है, उनकी सबसे महत्वपूर्ण कानूनी उपलब्धि थी।
### संहिता की मुख्य विशेषताएँ
- **विशेषाधिकारों का उन्मूलन:** इस संहिता ने जन्म के आधार पर मिलने वाले सभी विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया और सभी नागरिकों के लिए कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को स्थापित किया।
- **संपत्ति का अधिकार:** इसने निजी संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया, जिससे उभरते हुए मध्यम वर्ग के हितों की रक्षा हुई।
- **सामंती व्यवस्था का अंत:** फ्रांसीसी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नेपोलियन ने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया, सामंती व्यवस्था को समाप्त किया और किसानों को भूदासत्व और मनौरियल शुल्कों से मुक्त कराया।
- **आर्थिक एकीकरण:** शहरों में गिल्ड प्रतिबंधों को हटा दिया गया, तथा परिवहन और संचार प्रणालियों में सुधार किया गया। मानकीकृत वजन, माप और एक सामान्य राष्ट्रीय मुद्रा ने वस्तुओं और पूंजी की आवाजाही और विनिमय को सुगम बनाया।
### यूरोपीय समाज पर प्रभाव
- **प्रारंभिक स्वागत:** प्रारंभ में हॉलैंड, स्विट्ज़रलैंड, ब्रुसेल्स, मिलान और वारसा जैसे कई क्षेत्रों में फ्रांसीसी सेनाओं का स्वतंत्रता के अग्रदूतों के रूप में स्वागत किया गया था।
- **मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ:** हालाँकि, शुरुआती उत्साह जल्द ही शत्रुता में बदल गया। बढ़े हुए कर, सेंसरशिप और बाकी यूरोप को जीतने के लिए फ्रांसीसी सेनाओं में जबरन भर्ती ने प्रशासनिक लाभों को पीछे छोड़ दिया, जिससे विजित राष्ट्रों में व्यापक असंतोष पैदा हुआ।
उत्तर (Answer): ### इतालवी एकीकरण का परिचय\nउन्नीसवीं सदी के मध्य में, इटली सात राज्यों में विभाजित था, जिनमें से केवल एक, सार्डिनिया-पीडमोंट पर एक इतालवी राजसी घर का शासन था। इटली का एकीकरण कई क्रांतिकारी नेताओं, राजनेताओं और सैन्य अभियानों द्वारा संचालित एक लंबी और कठिन प्रक्रिया थी।
### गुuseppe माजिनी की भूमिका
- **प्रारंभिक प्रयास:** 1830 के दशक के दौरान, गुuseppe माजिनी ने एक एकीकृत इतालवी गणराज्य के लिए एक सुसंगत कार्यक्रम तैयार करने की कोशिश की।
- **गुप्त समाज:** उन्होंने अपने लक्ष्यों के प्रचार-प्रसार के लिए 'यंग इटली' नामक गुप्त समाज का गठन किया था, लेकिन 1831 और 1848 में लगातार क्रांतिकारी विद्रोह इटली को एकजुट करने में विफल रहे।
### काउंट कावूर और सार्डिनिया-पीडमोंट की भूमिका
- **राजनयिक गठबंधन:** इटली को एकजुट करने की जिम्मेदारी अपने शासक राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय और मुख्यमंत्री काउंट कावूर के नेतृत्व में सार्डिनिया-पीडमोंट पर आ गई।
- **रणनीतिक कूटनीति:** कावूर ने फ्रांस के साथ एक सावधान राजनयिक गठबंधन तैयार किया, जिसने 1859 में ऑस्ट्रियाई सेना को हराने में मदद की, जिससे लोम्बार्डी और वेनेशिया (आंशिक रूप से) के उत्तरी क्षेत्रों को मुक्त कराया गया।
### गुuseppe गैरीबाल्डी और रेड शर्ट्स की भूमिका
- **दक्षिणी अभियान:** नियमित सैनिकों के अलावा, गुuseppe गैरीबाल्डी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में सशस्त्र स्वयंसेवक इस संघर्ष में शामिल हुए।
- **दक्षिण की ओर मार्च:** 1860 में, उन्होंने दक्षिण इटली और टू सिसिली के साम्राज्य में मार्च किया और स्पेनिश शासकों को बाहर निकालने के लिए स्थानीय किसानों का समर्थन प्राप्त करने में सफल रहे।
### एकीकरण का समापन
- **अंतिम चरण:** 1861 में, विक्टर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया। फ्रांसीसी सैनिकों के हटने पर 1870 में रोम पर अंततः कब्जा कर लिया गया, जिससे इतालवी एकीकरण का अंतिम चरण पूरा हुआ।
उत्तर (Answer): ### सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का परिचय\nयद्यपि यूरोप में राष्ट्र-राज्यों के निर्माण में युद्धों और क्षेत्रीय विस्तार ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन राष्ट्र के विचार को संस्कृति के माध्यम से भी गढ़ा गया था। कला, कविता, कहानियों, संगीत और भाषा ने राष्ट्रवादी भावनाओं को साझा करने और आकार देने तथा नागरिकों के बीच सामूहिक पहचान की साझा भावना पैदा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे उन्हें अन्य राष्ट्रों से अलग पहचाना जा सके।
### राष्ट्रीय प्रतिरोध में भाषा की भूमिका
* **पहचान का संरक्षण:** राष्ट्रवादी भावनाओं को विकसित करने में भाषा ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उदाहरण के लिए, रूसी कब्जे के बाद, पोलिश भाषा को स्कूलों से बाहर कर दिया गया और हर जगह रूसी भाषा को थोप दिया गया।
* **हथियार के रूप में उपयोग:** पोलैंड में पादरियों ने चर्च की सभाओं और धार्मिक शिक्षा के लिए पोलिश भाषा का उपयोग करना शुरू कर दिया। परिणाम स्वरूप, रूसी अधिकारियों द्वारा बड़ी संख्या में पादरियों और बिशपों को जेल में डाल दिया गया या सजा के रूप में साइबेरिया भेज दिया गया। पोलिश भाषा का उपयोग रूसी प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा।
### लोककथाओं, लोक गीतों और लोक नृत्यों की भूमिका
* **भावनाओं को पुनर्जीवित करना:** रूमानी कलाकारों और कवियों का तर्क था कि सच्ची जर्मन संस्कृति आम लोगों (*दास वोल्के*) के बीच पाई जानी चाहिए। लोक गीतों, लोक कविता और लोक नृत्यों के माध्यम से ही राष्ट्र की सच्ची भावना को लोकप्रिय बनाया गया था।
* **राष्ट्रीय जागरण:** लोक संस्कृति के इन रूपों को एकत्र करना और रिकॉर्ड करना राष्ट्र-निर्माण की परियोजना के लिए आवश्यक था। इसने आधुनिक राष्ट्रवादी संदेश को निरक्षर किसान आबादी तक पहुँचाने में मदद किया जो अभिजात वर्ग के साहित्य को नहीं पढ़ सकती थी।
### संगीत और ओपेरा की भूमिका
* **भावनात्मक जुड़ाव:** पोलैंड में करोल कुपिंस्की जैसे संगीतकारों ने अपने ओपेरा और संगीत के माध्यम से राष्ट्रीय संघर्ष का जश्न मनाया, और पोलोनेस तथा माजुर्का जैसे लोक नृत्यों को राष्ट्रवादी प्रतीकों में बदल दिया।
* **जनता को एकजुट करना:** संगीत रचनाएं भाषाई बाधाओं को पार कर सकती थीं और यूरोप की विविध आबादी के बीच तुरंत देशभक्ति के गर्व और भावनात्मक प्रतिध्वनि को जगा सकती थीं।
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय में संस्कृति ने एक गहन और स्थायी भूमिका निभाई। प्राचीन लोक परंपराओं को पुनर्जीवित करके, स्थानीय भाषाओं का समर्थन करके और कलात्मक अभिव्यक्ति का उपयोग करके, राष्ट्रवादी नेताओं ने विभिन्न समूहों को सचेत राष्ट्रीय समुदायों में सफलतापूर्वक एकजुट किया।
उत्तर (Answer): ### इटली के एकीकरण का परिचय\nउन्नीसवीं सदी के मध्य में इटली सात राज्यों में विभाजित था, जिनमें से केवल एक 'सार्डिनिया-पिडमॉन्ट' पर एक इतालवी राजघराने का शासन था। इटली का एकीकरण एक लंबी और कठिन प्रक्रिया थी जिसमें तीन प्रमुख क्रांतिकारियों और राजनेताओं - ग्यूसेप माजिनी, काउंट कावूर और ग्यूसेप गैरीबालडी के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
### एकीकरण के मार्ग में प्रमुख बाधाएं
* **राजनीतिक विखंडन:** इटली कई राज्यों में बंटा हुआ था, जिन पर अलग-अलग शासकों का शासन था। उत्तरी क्षेत्र ऑस्ट्रियाई हैब्सबर्ग साम्राज्य के अधीन था, मध्य भाग पर पोप का शासन था और दक्षिणी क्षेत्रों पर स्पेन के बर्बन राजाओं का नियंत्रण था।
* **विदेशी प्रभुत्व:** ऑस्ट्रिया एक शक्तिशाली शत्रु था जिसने राष्ट्रवादी आंदोलनों को दबाने और इतालवी क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया।
* **प्रारंभ में जनसमर्थन का अभाव:** एकीकरण के शुरुआती प्रयास, जैसे 1831 और 1848 के क्रांतिकारी विद्रोह, असफल रहे क्योंकि आम जनता में व्यापक राष्ट्रीय चेतना और एकता की कमी थी।
### प्रमुख व्यक्तित्वों की भूमिका और एकीकरण के चरण
* **ग्यूसेप माजिनी और यंग इटली:** माजिनी ने एक एकीकृत इतालवी गणराज्य के लिए एक स्पष्ट कार्यक्रम तैयार करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार करने और युवाओं को प्रेरित करने के लिए 'यंग इटली' नामक गुप्त समाज की स्थापना की।
* **काउंट कावूर की कूटनीतिक कौशल:** सार्डिनिया-पिडमॉन्ट के प्रधानमंत्री कावूर न तो एक क्रांतिकारी थे और न ही लोकतंत्रवादी। फ्रांस के साथ एक चतुर कूटनीतिक गठबंधन के माध्यम से, सार्डिनिया-पिडमॉन्ट ने 1859 में ऑस्ट्रियाई सेना को हराया और लोम्बार्डो का अधिग्रहण कर लिया।
* **ग्यूसेप गैरीबालडी का सैन्य अभियान:** 1860 में, गैरीबालडी ने 'रेड शर्ट्स' के रूप में जाने जाने वाले स्वयंसेवकों के एक सशस्त्र अभियान का नेतृत्व किया और दक्षिण इटली तथा दो सिचिलाइयों के राज्य पर विजय प्राप्त की। स्थानीय किसानों के समर्थन से उन्होंने स्पेनिश शासकों को बाहर खदेड़ दिया।
### निष्कर्ष
1861 में, विक्टर इमेनुअल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया। 1870 में जब फ्रांसीसी सैनिकों को वापस बुला लिया गया, तब रोम को भी इटली में मिला लिया गया, जिससे इतालवी प्रायद्वीप का एक ही संप्रभु सरकार के अधीन एकीकरण पूरा हुआ।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nइटली के विपरीत, जर्मनी का एकीकरण बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक आंदोलन के बजाय प्रशिया की राज्य मशीनरी द्वारा निर्देशित ऊपर से नीचे के दृष्टिकोण के माध्यम से प्राप्त किया गया था। जर्मनी जर्मन महासंघ के तहत कई रियासतों में विभाजित था।
### ओट्टो वॉन बिस्मार्क की भूमिका
* **एकीकरण के वास्तुकार:** प्रशिया के मुख्यमंत्री ओट्टो वॉन बिस्मार्क जर्मन एकीकरण के मुख्य योजनाकार थे। उनका मानना था कि एकीकरण भाषणों और बहुमत के वोटों से नहीं, बल्कि 'रक्त और लोहे' से प्राप्त किया जा सकता है।
* **प्रशिया का नेतृत्व:** बिस्मार्क ने उदार राष्ट्रवादियों और ऑस्ट्रियाई साम्राज्य को दरकिनार करते हुए एकीकरण प्रक्रिया का नेतृत्व करने के लिए प्रशिया की मजबूत सैन्य शक्ति और आर्थिक ताकत का उपयोग किया।
### एकीकरण के तीन युद्ध\nबिस्मार्क ने विदेशी प्रभाव को खत्म करने और जर्मन राज्यों को एकजुट करने के लिए सात साल की अवधि में तीन निर्णायक युद्धों की सफलतापूर्वक योजना बनाई:
* **डेनिश युद्ध (1864):** प्रशिया ने डेनमार्क को हराने के लिए ऑस्ट्रिया के साथ गठबंधन किया, श्लेस्विग और होलस्टीन को सुरक्षित किया और प्रशिया की सैन्य ताकत का परीक्षण किया।
* **ऑस्ट्रिया-प्रशिया युद्ध (सात सप्ताह का युद्ध, 1866):** बिस्मार्क ने कूटनीतिक रूप से ऑस्ट्रिया को अलग कर दिया और कोनिग्रेट्ज की लड़ाई में उसे निर्णायक रूप से हराया। इससे ऑस्ट्रिया के नेतृत्व वाला जर्मन महासंघ भंग हो गया और उत्तरी जर्मनी में प्रशिया का प्रभुत्व स्थापित हो गया।
* **फ्रैंको-प्रशिया युद्ध (1870-1871):** दक्षिणी जर्मन राज्यों को अपने पाले में लाने के लिए, बिस्मार्क ने फ्रांस को युद्ध के लिए उकसाया। फ्रांसीसी हार गए, जिससे अलसैस-लोरेन का अधिग्रहण हुआ और दक्षिणी जर्मन राज्य प्रशिया के इर्द-गिर्द एकजुट हो गए।
### निष्कर्ष\nजनवरी 1871 में, वर्साय के हॉल ऑफ मिरर्स में, नए एकीकृत जर्मन साम्राज्य की घोषणा की गई, जिसमें प्रशिया के कैसर विलियम प्रथम को जर्मन सम्राट बनाया गया, जिससे एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nउन्नीसवीं शताब्दी के दौरान यूरोप में राष्ट्रवाद एक शक्तिशाली शक्ति के रूप में उभरा, जिसने इस महाद्वीप की राजनीतिक और मानसिक दुनिया को मौलिक रूप से बदल दिया। इसने बहु-राष्ट्रीय राजवंशों के स्थान पर राष्ट्र-राज्यों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया।
### प्रमुख कारक
* **सामंतवाद और निरंकुश राजशाही का पतन:** सामंती व्यवस्था के टूटने और निरंकुश राजाओं के कमजोर होने से एक राजनीतिक शून्य पैदा हुआ जिसे लोकप्रिय संप्रभुता की अवधारणा द्वारा भरा गया।
* **फ्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन की आचार संहिता:** 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार पेश किए। नेपोलियन ने प्रशासनिक सुधारों और 1804 की नागरिक संहिता के माध्यम से इन्हें और मजबूत किया, जिससे पूरे यूरोप में राष्ट्रवादी विचार फैल गए।
* **मध्य वर्ग का उदय:** औद्योगिकीकरण के कारण शहरों का विकास हुआ और एक नए वाणिज्यिक मध्य वर्ग का उदय हुआ। इस वर्ग के शिक्षित और उदार सदस्यों ने राष्ट्रीय एकता और कुलीन विशेषाधिकारों को समाप्त करने का समर्थन किया।
* **संस्कृति, भाषा और कला की भूमिका:** एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में रोमांटिसिज्म ने राष्ट्रवादी भावना को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विदेशी प्रभुत्व के खिलाफ एक सामूहिक राष्ट्रीय विरासत और पहचान को जगाने के लिए भाषा, लोककथाओं और कविता का उपयोग किया गया था।
* **आर्थिक उदारवाद:** उभरते हुए मध्य वर्ग ने बाजारों की स्वतंत्रता और वस्तुओं तथा पूंजी की आवाजाही पर राज्य द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की, जैसे कि जर्मन भाषी क्षेत्रों में *जोलवेरिन* (सीमा शुल्क संघ) का निर्माण।
### Conclusion\nये आपस में जुड़े हुए राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास यूरोपीय आबादी के बीच सामूहिक अपनेपन की भावना को प्रज्वलित करते हैं, जिससे क्रांतिकारी आंदोलनों और आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के जन्म का मार्ग प्रशस्त होता है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nउन्नीसवीं शताब्दी के मध्य के दौरान, इटली सात राज्यों में विभाजित था, जिनमें से केवल एक, सार्डिनिया-पीडमोंट पर एक इतालवी राजघराने का शासन था। इटली का एकीकरण एक लंबी, जटिल प्रक्रिया थी जिसमें विभिन्न राजनीतिक नेता, क्रांतिकारी आंदोलन और विदेशी युद्ध शामिल थे।
### एकीकरण में बाधाएँ
* **राजनीतिक विखंडन:** इटली सार्डिनिया-पीडमोंट, लोम्बार्डी, वेनेटिया, पोप राज्यों, दोिसिसिली के साम्राज्य और अन्य राज्यों जैसे कई राज्यों में विभाजित था।
* **विदेशी प्रभुत्व:** उत्तरी इटली ऑस्ट्रियाई हैब्सबर्ग साम्राज्य के अधीन था, जबकि मध्य क्षेत्र पोप के अधीन थे और दक्षिणी क्षेत्र स्पेन के बर्बन राजाओं के प्रभुत्व में थे।
* **साझा पहचान की कमी:** विदेशी शासन और क्षेत्रीय अंतर के वर्षों ने इतालवी लोगों के बीच भाषाई और सांस्कृतिक बाधाएँ पैदा कीं।
### प्रमुख हस्तियों की भूमिका
* **ग्यूसेप माजिनी:** उन्होंने एक एकीकृत इतालवी गणराज्य के लक्ष्य को बढ़ावा देने के लिए 'यंग इटली' जैसे गुप्त समाज की स्थापना करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि उनके विद्रोह विफल रहे, उन्होंने राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित किया।
* **काउंट केमिलो डी कैवूर:** सार्डिनिया-पीडमोंट के मुख्यमंत्री, कैवूर एक चतुर रणनीतिकार थे। फ्रांस के साथ एक सामरिक राजनयिक गठबंधन के माध्यम से, उन्होंने 1859 में ऑस्ट्रियाई सेना को हराया और उत्तरी इटली को मुक्त कराया।
* **ग्यूसेप गैरीबाल्डी:** एक करिश्माई नेता जिन्होंने 1860 में दक्षिणी इटली और दोिसिसिली के साम्राज्य के लिए 'थिसेंड' (रेड शर्ट्स) के प्रसिद्ध अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने स्पेनिश शासकों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला और दक्षिणी क्षेत्रों को राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया।
* **राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय:** वह एक एकीकृत इटली के संवैधानिक राजा बने।
### निष्कर्ष
1861 तक, विक्टर इमैनुएल द्वितीय को संयुक्त इटली का राजा घोषित कर दिया गया, और अंततः 1870 में रोम भी इसमें शामिल हो गया, जिससे दशकों के संघर्ष के बाद ऐतिहासिक एकीकरण प्रक्रिया पूरी हुई।
उत्तर (Answer): ### जर्मन एकीकरण का परिचय
1840 के दशक में, मध्यम वर्ग के जर्मनों के बीच राष्ट्रवादी भावनाएँ व्यापक थीं, जिन्होंने 1848 में एक निर्वाचित संसद द्वारा शासित राष्ट्र-राज्य में जर्मन परिसंघ के विभिन्न क्षेत्रों को एकजुट करने का प्रयास किया था। हालाँकि, इस उदार पहल को राजशाही और सेना की संयुक्त ताकतों द्वारा दबा दिया गया था, जिन्हें बड़े भूस्वामियों (*जंकर*) का समर्थन प्राप्त था।
### ओट्टो वॉन बिस्मार्क की भूमिका
* **मुख्य वास्तुकार:** प्रशा ने राष्ट्रीय एकीकरण के आंदोलन का नेतृत्व संभाला। इसके मुख्यमंत्री, ओट्टो वॉन बिस्मार्क, इस प्रक्रिया के वास्तुकार बने।
* **'रक्त और लौह' की नीति:** बिस्मार्क ने जर्मन एकीकरण को प्राप्त करने के लिए 'रक्त और लौह' के रूप में जानी जाने वाली एक निर्मल नीति का उपयोग करते हुए, प्रशिया सेना और नौकरशाही की मदद से इस प्रक्रिया को अंजाम दिया।
* **प्रशिया का नेतृत्व:** बिस्मार्क को एहसास हुआ कि एकीकरण संसदीय बहसों और बहुसंख्यक प्रस्तावों के माध्यम से नहीं प्राप्त किया जा सकता है, बल्कि व्यवस्थित सैन्य अभियानों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
### जर्मन एकीकरण के प्रमुख चरण
* **डेनमार्क के साथ युद्ध (1864):** ऑस्ट्रिया के साथ गठबंधन में प्रशा ने डेनमार्क के खिलाफ लड़ाई लड़ी और श्लेसविग पर नियंत्रण हासिल किया, जिससे प्रशिया की सैन्य प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई।
* **ऑस्ट्रो-प्रशियाई युद्ध / सात सप्ताह का युद्ध (1866):** प्रशा ने 1866 में ऑस्ट्रिया को हराया, जिससे जर्मन राज्यों पर ऑस्ट्रियाई प्रभाव प्रभावी रूप से समाप्त हो गया और उत्तरी जर्मन परिसंघ का गठन हुआ।
* **फ्रैंको-प्रशियाई युद्ध (1870-1871):** अंतिम चरण में, प्रशा ने फ्रांस के खिलाफ एक सफल युद्ध लड़ा। दक्षिणी जर्मन राज्यों को संघर्ष में खींचा गया और अंततः जर्मन तह में एकीकृत किया गया।
* **जर्मन साम्राज्य की घोषणा:** जनवरी 1871 में, जर्मन राज्यों के राजकुमारों, सेना के प्रतिनिधियों और बिस्मार्क से बनी एक सभा ने काइजर विलियम प्रथम के नेतृत्व में नए जर्मन साम्राज्य की घोषणा करने के लिए वर्सेल्स के महल में एकत्र हुए।
उत्तर (Answer): ### सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का परिचय\nयूरोप में राष्ट्र के विचार को गढ़ने में संस्कृति ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कला, कविता, कहानियाँ, संगीत और भाषा ने राष्ट्रवादी भावनाओं को व्यक्त करने और आकार देने में मदद की, और नागरिकों के बीच एक साझा सामूहिक पहचान बनाने के लिए युद्धों और क्षेत्रीय विस्तार से परे काम किया।
### रोमांटवाद की भूमिका
* **तर्क और विज्ञान की आलोचना:** रोमांटवाद एक सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने तर्क और विज्ञान के महिमामंडन की आलोचना करके राष्ट्रवादी भावना के एक विशेष रूप को विकसित करने की मांग की।
* **भावना और रहस्यवाद पर ध्यान:** जोहान गॉटफ्रीड हर्डर जैसे रोमांटवादियों का दावा था कि सच्ची जर्मन संस्कृति को आम लोगों (*दास वोल्कम*) के बीच लोकगीतों, लोककाव्य और लोकनृत्यों के माध्यम से खोजा जाना चाहिए।
* **लोककथाओं का संरक्षण:** इन प्राचीन सांस्कृतिक रूपों को एकत्र करना और उनका दस्तावेजीकरण करना राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय भावना को पुनर्जीवित करने की परियोजना के लिए आवश्यक था।
### राष्ट्रवाद में भाषा की भूमिका
* **राष्ट्रीय एकता का प्रतीक:** भाषा ने राष्ट्रवादी भावनाओं को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जोर केवल स्थानीय बोलियों पर नहीं था, बल्कि लोगों को एकजुट करने के लिए एक राष्ट्रीय भाषा का उपयोग करने पर था।
* **उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध (उदाहरण - पोलैंड):** रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया द्वारा पोलैंड का विभाजन किए जाने के बाद, भाषा को राष्ट्रीय प्रतिरोध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
* **पोलिश पादरियों का मामला:** रूसी कब्जे वाले पोलैंड में, स्कूलों में पोलिश भाषा पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उसकी जगह रूसी भाषा ले आई गई। हालाँकि, पोलैंड में पादरी वर्ग के सदस्यों ने विद्रोह के एक कार्य के रूप में चर्च की सभाओं और धार्मिक शिक्षा के लिए पोलिश का उपयोग करना शुरू कर दिया।
* **दंड और दृढ़ता:** पोलिश का उपयोग रूसी प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया, जिससे गंभीर दंड मिले, फिर भी भाषा ने विदेशी दमन के खिलाफ राष्ट्रीय पहचान को सफलतापूर्वक जीवित रखा।
उत्तर (Answer): ### इटली के एकीकरण का परिचय\nउन्नीसवीं सदी के मध्य में, इटली सात राज्यों में विभाजित था, जिनमें से केवल एक, सार्डिनिया-पियाडमॉन्ट, पर एक इतालवी राजशाही परिवार का शासन था। इटली का एकीकरण एक लंबी और कठिन प्रक्रिया थी जिसमें युद्ध, कूटनीतिक चालें और क्रांतिकारी विद्रोह शामिल थे।
### एकीकरण में प्रमुख बाधाएँ
* **राजनीतिक विखंडन:** इटली कई अलग-अलग राजनीतिक इकाइयों में बंटा हुआ था, जिनमें प्रत्येक के अलग शासक, कानून और प्रशासनिक प्रणालियाँ थीं।
* **विदेशी आधिपत्य:** इटली के बड़े हिस्से विदेशी नियंत्रण के अधीन थे। उत्तरी क्षेत्रों पर ऑस्ट्रियाई हैब्सबर्ग का शासन था, जबकि दक्षिणी क्षेत्रों पर स्पेन के बौरबन राजाओं का प्रभुत्व था।
* **पोप की भूमिका:** पोप मध्य इटली के पोंटिफिकल राज्यों पर शासन करता था और शुरू में किसी भी ऐसे एकीकरण के खिलाफ था जो उसकी अस्थायी शक्ति को खतरे में डाले।
* **साझा पहचान की कमी:** सदियों के क्षेत्रवाद और अलग-अलग बोलियों के कारण आम लोगों में एक एकीकृत राष्ट्रीय चेतना की कमी थी, और यह आंदोलन मुख्य रूप से शिक्षित अभिजात वर्ग द्वारा संचालित था।
### प्रमुख व्यक्ति और एकीकरण के चरण
* **ग्यूसेप माजिनी:** उन्होंने एक एकीकृत इतालवी गणराज्य को बढ़ावा देने के लिए 'यंग इटली' नामक गुप्त समाज की स्थापना करके और युवाओं में राष्ट्रवादी भावनाओं को जगाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
* **काउंट कावूर:** सार्डिनिया-पियाडमॉन्ट के प्रधानमंत्री, कावूर एक कुशल रणनीतिकार थे। फ्रांस के साथ एक रणनीतिक गठबंधन के माध्यम से, उन्होंने 1859 में ऑस्ट्रियाई बलों को हराया और उत्तरी इटली का अधिग्रहण किया।
* **ग्यूसेप गैरीबालडि:** गैरीबालडि ने 1860 में दक्षिण इटली और टू सिसिली के साम्राज्य के लिए प्रसिद्ध 'हजारों का अभियान' का नेतृत्व किया, स्पेनिश शासकों को बाहर निकाला और इस क्षेत्र को विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया।
* **अंतिम एकीकरण:** 1861 तक, विक्टर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित कर दिया गया, और 1870 में रोम के विलय के साथ, एकीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पूरी हो गई।
उत्तर (Answer): 19वीं शताब्दी के अंतिम तिमाही तक, राष्ट्रवाद अपनी शताब्दी के पूर्वार्ھ के आदर्शवादी उदार-लोकतांत्रिक भावना को बनाए नहीं रख सका, बल्कि सीमित सिरों वाला एक संकीर्ण पंथ बन गया। इस अवधि के दौरान, राष्ट्रवादी समूह एक-दूसरे के प्रति तेजी से असहिष्णु हो गए और युद्ध में जाने के लिए हमेशा तैयार रहे। प्रमुख यूरोपीय शक्तियों ने, बदले में, अपने स्वयं के साम्राज्यवादी उद्देश्यों और प्रभुत्व को आगे बढ़ाने के लिए यूरोप में अधीन लोगों की राष्ट्रवादी आकांक्षाओं में हेरफेर किया। 1871 के बाद यूरोप में राष्ट्रवादी तनाव का सबसे गंभीर स्रोत बाल्कन नामक क्षेत्र था। बाल्कन भौगोलिक और जातीय विविधता का एक क्षेत्र था जिसमें आधुनिक रोमानिया, बुल्गारिया, अल्बानिया, ग्रीस, मैसेडोनिया, क्रोएशिया, स्लोवेनिया, सर्बिया और बोस्निया-हर्जेगोविना शामिल थे, जिनके निवासियों को व्यापक रूप से स्लाव के रूप में जाना जाता था। बाल्कन का एक बड़ा हिस्सा ओटोमन साम्राज्य के नियंत्रण में था। ओटोमन साम्राज्य के विघटन के साथ-साथ बाल्कन में रोमांटिक राष्ट्रवाद के विचारों के प्रसार ने इस क्षेत्र को बहुत विस्फोटक बना दिया। सभी प्रमुख शक्तियां — रूस, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया-हंगरी — बाल्कन पर अन्य शक्तियों की पकड़ का मुकाबला करने और इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बढ़ाने के लिए उत्सुक थीं। इससे इस क्षेत्र में कई युद्ध हुए और अंततः प्रथम विश्व युद्ध हुआ। साम्राज्यवाद के साथ संरेखित राष्ट्रवाद ने इस प्रकार यूरोप को आपदा की ओर अग्रसर किया।
उत्तर (Answer): फ्रांसीसी क्रांति और जैकोबिन के बाद के उदय, उसके बाद नेपोलियन के शासन ने फ्रांस और यूरोप के राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से बदल दिया। क्रांति ने पूर्ण राजतंत्र को उखाड़ फेंका और लोगों की संप्रभुता स्थापित की, यह दावा करते हुए कि राष्ट्र को स्वयं शासन करना चाहिए। स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श आधुनिक राजनीतिक विचारों के मार्गदर्शक सिद्धांत बन गए। जैकोबिन चरण के दौरान, समतावादीवाद स्थापित करने के लिए कट्टरपंथी उपाय किए गए, हालांकि गंभीर राजनीतिक शुद्धियों के साथ। इसके बाद, नेपोलियन बोनापार्ट ने 1804 की नेपोलियन संहिता के माध्यम से केंद्रीकृत प्रशासन और मानकीकृत कानूनों को पेश किया। इन प्रशासनिक परिवर्तनों ने सामंतवाद को समाप्त कर दिया, आंतरिक सीमा शुल्क बाधाओं को हटा दिया, और वजन, माप और मुद्रा की एक समान प्रणाली स्थापित की। हालांकि नेपोलियन ने एक सैन्य तानाशाही स्थापित की और उनकी विजय ने पूरे यूरोप में फ्रांस विरोधी राष्ट्रवादी आंदोलनों (जैसे जर्मनी, इटली और स्पेन में) को जन्म दिया, लेकिन उनके सुधारों ने सामंती विशेषाधिकार और तानाशाही की मध्ययुगीन संरचनाओं को स्थायी रूप से मिटा दिया। इस प्रकार, राजनीतिक परिदृश्य राजवंशों से बदलकर संवैधानिक ढांचे और राष्ट्रीय चेतना में बदल गया, जिससे आधुनिक यूरोपीय राष्ट्र-राज्यों की नींव पड़ी।
उत्तर (Answer): फ्रैंकफर्ट संसद 1848 की उदारवादी क्रांतियों के दौरान गठित एक सर्व-जर्मन नेशनल असेंबली थी। इसे 18 मई 1848 को आयोजित किया गया था, जब 831 चुने गए प्रतिनिधियों ने सेंट पॉल के चर्च में आयोजित फ्रैंकफर्ट संसद में अपना स्थान लेने के लिए एक उत्सव जुलूस में मार्च किया था। इन प्रतिनिधियों में विभिन्न जर्मन क्षेत्रों के मध्यम वर्ग के पेशेवर, व्यापारी और समृद्ध कारीगर शामिल थे। विधानसभा ने संसद के अधीन एक राजतंत्र के नेतृत्व में एक जर्मन राष्ट्र के लिए एक संविधान का मसौदा तैयार किया। जब प्रतिनिधियों ने इन शर्तों पर प्रशिया के राजा फ्रेडरिक विल्हेम चतुर्थ को मुकुट की पेशकश की, तो उसने इसे खारिज कर दिया और चुनी हुई विधानसभा का विरोध करने के लिए अन्य सम्राटों के साथ शामिल हो गया। जबकि अभिजात वर्ग और सेना का विरोध मजबूत हो गया, संसद का सामाजिक आधार क्षीण हो गया। संसद पर मध्यम वर्ग का वर्चस्व था जिन्होंने श्रमिकों और कारीगरों की मांगों का विरोध किया और परिणामस्वरूप अपना समर्थन खो दिया। अंत में, सैनिकों को बुलाया गया और विधानसभा को भंग होने के लिए मजबूर किया गया। इस विफलता ने उदार मध्यम वर्ग की कमजोरी को उजागर किया और साबित किया कि राष्ट्रीय एकीकरण केवल संसदीय बहस के माध्यम से हासिल नहीं किया जा सकता है, जिससे बिस्मार्क की 'रक्त और लोहे' की नीति के लिए मंच तैयार हुआ।
उत्तर (Answer): 1848 में कई यूरोपीय देशों में गरीबों, बेरोजगारों और भूखे किसानों और श्रमिकों के विद्रोह के समानांतर, शिक्षित मध्यम वर्ग के नेतृत्व में एक क्रांति चल रही थी। फ्रांस में फरवरी 1848 की घटनाओं ने सम्राट के त्याग को लाया था और सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार के आधार पर एक गणराज्य की घोषणा की गई थी। यूरोप के अन्य हिस्सों में जहाँ स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य अभी तक मौजूद नहीं थे — जैसे जर्मनी, इटली, पोलैंड और ऑस्ट्रियाई-हंगरी साम्राज्य — उदार मध्यम वर्ग के पुरुषों और महिलाओं ने राष्ट्रीय एकीकरण के साथ संवैधानिकवाद की अपनी मांगों को मिला दिया। उन्होंने संसदीय सिद्धांतों पर राष्ट्र-राज्य के निर्माण की अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए बढ़ते लोकप्रिय अशांति का लाभ उठाया — एक संविधान, प्रेस की स्वतंत्रता और संघ की स्वतंत्रता। उदाहरण के लिए, जर्मनी में, मध्यम वर्ग के पेशेवरों, व्यापारियों और समृद्ध कारीगरों से मिलकर बने राजनीतिक संगठन फ्रैंकफर्ट शहर में एक साथ आए और एक सर्व-जर्मन नेशनल असेंबली के लिए मतदान करने का फैसला किया। 18 May 1848 को, 831 चुने गए प्रतिनिधियों ने सेंट पॉल के चर्च में आयोजित फ्रैंकफर्ट संसद में अपना स्थान लेने के लिए एक उत्सव जुलूस में मार्च किया। उन्होंने संसद के अधीन एक राजतंत्र के नेतृत्व में एक जर्मन राष्ट्र के लिए एक संविधान का मसौदा तैयार किया। हालांकि प्रतिनिधियों को अंततः विघटित होने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि प्रशिया के राजा ने मुकुट को खारिज कर दिया था और कारीगरों और किसानों ने अपना समर्थन वापस ले लिया था, जिससे विधानसभा ने अपना सामाजिक आधार खो दिया, इस क्रांति ने उदारवाद को राष्ट्रवाद से जोड़ने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर चिह्नित किया।
उत्तर (Answer): नेपोलियन ने उन कई सुधारों को पेश करना शुरू किया जिन्हें वह पहले ही फ्रांस में पेश कर चुका था। 1804 की नागरिक संहिता के माध्यम से, जिसे आमतौर पर नेपोलियन की आचार संहिता के रूप में जाना जाता है, उसने जन्म के आधार पर सभी विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया, कानून के समक्ष समानता स्थापित की और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया। नेपोलियन ने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया, सामंती व्यवस्था को समाप्त कर दिया, और किसानों को दासता और जागीरदारी शुल्कों से मुक्त कर दिया। शहरों में, गिल्ड प्रतिबंधों को हटा दिया गया था। परिवहन और संचार प्रणालियों में सुधार किया गया था। किसानों, कारीगरों, व्यापारियों और छोटे पैमाने पर उत्पादकों को यह एहसास होने लगा कि समान कानूनों, मानकीकृत वजन और उपायों और एक आम राष्ट्रीय मुद्रा से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वस्तुओं और पूंजी की आवाज़ और आदान-प्रदान में सुविधा होगी। हालाँकि, जीते गए क्षेत्रों में, फ्रांसीसी शासन की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित थीं। शुरुआत में, हॉलैंड और स्विट्जरलैंड जैसे कई स्थानों के साथ-साथ ब्रुसेल्स, मिलान, वारसॉ और मेनज़ जैसे कुछ शहरों में, फ्रांसीसी सेनाओं का स्वतंत्रता के अग्रदूतों के रूप में स्वागत किया गया था। लेकिन शुरुआती उत्साह जल्द ही शत्रुता में बदल गया जब यह स्पष्ट हो गया कि नई प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ बढ़े हुए कराधान, सेंसरशिप और फ्रांसीसी सेनाओं में जबरन भर्ती हुई, जो बाकी यूरोप को जीतने के लिए आवश्यक थे, प्रशासनिक सुधारों के लाभों पर भारी पड़े।