मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: राजनीतिक दल (Political Parties) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)
---
मुख्य परिभाषाएँ (Key Definitions)
- राजनीतिक दल (Political Party): राजनीतिक दल लोगों का एक ऐसा संगठित समूह होता है जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से काम करता है। इनके समाज के कुछ सामूहिक हितों और विचारों के बारे में एक जैसे विचार होते हैं।
- दल के घटक (Components of a Political Party): किसी भी राजनीतिक दल के तीन मुख्य हिस्से होते हैं:
1. नेता (Leaders)
2. सक्रिय सदस्य (Active Members)
3. अनुयायी या समर्थक (Followers)
- पक्षपात (Partisan): किसी दल, समूह या गुट के प्रति विशेष लगाव या वफादारी रखना 'पक्षपात' कहलाता है। इसमें निष्पक्ष सोच की कमी होती है।
- दलबदल (Defection): पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतने के बाद किसी विधायक या सांसद द्वारा उस दल को छोड़कर किसी अन्य दल में चले जाना 'दलबदल' कहलाता है।
---
राजनीतिक दल की विशेषताएँ और कार्य (Features and Functions)
राजनीतिक दल के मुख्य कार्य:
1. चुनाव लड़ना और अपने उम्मीदवार खड़ा करना।
2. नीતિ और कार्यक्रमों को मतदाताओं के सामने रखना।
3. सरकार बनाने और चलाने में मुख्य भूमिका निभाना।
4. कानून निर्माण (Law Making) में निर्णायक भूमिका निभाना।
5. विपक्ष की भूमिका निभाना (सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करना)।
6. जनमत का निर्माण करना (आम जनता की समस्याओं को उठाना)।
7. सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाना।
---
दलीय प्रणाली के प्रकार (Types of Party Systems)
1. एकदलीय व्यवस्था (One-Party System):
- जहाँ देश में केवल एक ही राजनीतिक दल को सरकार बनाने और चलाने की अनुमति होती है।
- उदाहरण: चीन में कम्युनिस्ट पार्टी।
- नुकसान: यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं देता है।
2. द्विदलीय व्यवस्था (Two-Party System):
- सत्ता मुख्य रूप से दो प्रमुख दलों के बीच बदलती रहती है।
- उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और यूनाइटेड किंगडम (UK)।
3. बहुदलीय व्यवस्था (Multi-Party System):
- जब सत्ता के लिए दो से अधिक दल आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं और कई दलों के जीतने की संभावना होती है। भारत में यही व्यवस्था है।
- उदाहरण: भारत।
- गठबंधन सरकार (Coalition Government): जब बहुदलीय व्यवस्था में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं।
---
राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल (National and Regional Parties)
- राष्ट्रीय दल (National Parties):
- इनके देश भर में व्यापक हित और इकाइयाँ होती हैं।
- शर्त: लोकसभा चुनाव में कुल वोटों का कम से कम 6% या विधानसभा चुनाव में 4 सीटें जीतना आवश्यक है।
- प्रमुख उदाहरण (भारत): भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), बहुजन समाज पार्टी (BSP), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI-M), आम आदमी पार्टी (AAP)।
- क्षेत्रीय दल या राज्यीय दल (State/Regional Parties):
- ये दल किसी विशेष राज्य या क्षेत्र तक सीमित होते हैं। इन्हें आमतौर पर 'क्षेत्रीय दल' कहा जाता है।
- शर्त: राज्य विधानसभा चुनाव में कुल पड़े वोटों का कम से कम 6% और कम से कम 2 सीटें जीतना आवश्यक है।
- प्रमुख उदाहरण: समाजवादी पार्टी (UP), राष्ट्रीय जनता दल (Bihar), द्रमुक (DMK - Tamil Nadu), शिवसेना (Maharashtra)।
---
राजनीतिक दलों के सामने चुनौतियाँ (Challenges to Political Parties)
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के सामने निम्नलिखित चार प्रमुख चुनौतियाँ हैं:
1. आंतरिक लोकतंत्र की कमी (Lack of Internal Democracy):
- दलों के भीतर सत्ता कुछ ही नेताओं के हाथ में केंद्रित रहती है। सदस्यों की रजिस्टर्ड बैठकें नहीं होतीं और आम कार्यकर्ताओं को अंदर की खबरों की जानकारी नहीं मिलती।
2. वंशवादी उत्तराधिकार (Dynastic Succession):
- परिवारवाद की समस्या; दल के शीर्ष पद हमेशा एक ही परिवार के लोगों के पास रहते हैं, जो अयोग्य लोगों को भी आगे बढ़ाते हैं।
3. धन और बाहुबल का प्रभाव (Money and Muscle Power):
- चुनावों में अधिक धन (कैश, प्रचार) और बाहुबल (अपराधियों का प्रयोग) का बढ़ता उपयोग, जिससे निष्पक्ष चुनाव प्रभावित होते हैं।
4. विकल्पहीनता की स्थिति (Meaningful Choice):
- वैचारिक रूप से लगभग सभी दल एक जैसे लगने लगते हैं, जिससे मतदाताओं के पास वास्तविक वैचारिक विकल्प का अभाव हो जाता है।
---
दलों में सुधार के उपाय (Reforms in Political Parties)
दलों को अधिक जवाबदेह और लोकतांत्रिक बनाने के लिए निम्नलिखित सुधार किए गए हैं और सुझाव दिए गए हैं:
1. दलबदल कानून (Anti-Defection Law):
- संविधान में संशोधन करके यह नियम बनाया गया कि यदि कोई विधायक या सांसद दल-बदल करता है, तो उसकी विधानसभा या संसद की सदस्यता समाप्त हो जाएगी। (यह कानून विधायकों/सांसदों के दल-बदल को रोकने के लिए बनाया गया था)।
2. शपथ पत्र (Affidavit):
- सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, अब चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपनी संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्योरा एक शपथ पत्र के माध्यम से देना अनिवार्य है।
3. संगठन का आंतरिक चुनाव:
- चुनाव आयोग द्वारा यह आदेश दिया गया है कि सभी दल अपने संगठनात्मक चुनाव कराएं और अपना आयकर रिटर्न दाखिल करें।
4. अन्य सुझाव:
- चुनावों का राज्य द्वारा खर्च उठाना (State funding of elections)।
- महिलाओं को टिकट देने में आरक्षण की व्यवस्था करना।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 राजनीतिक दल
राजनीतिक दल का अर्थ और परिचय
परिभाषा: लोगों का एक संगठित समूह जो चुनाव लड़ने और सत्ता हासिल करने की इच्छा रखता है।
मुख्य घटक:
नेता
सक्रिय सदस्य
अनुयायी / समर्थक
प्रमुख कार्य:
चुनाव लड़ना
नीतियां और कार्यक्रम मतदाता के सामने रखना
कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका
सरकार बनाना और चलाना
विपक्ष की भूमिका निभाना
जनमत का निर्माण करना
सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच बनाना
राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों?
बड़े लोकतंत्र के लिए अनिवार्य
प्रतिनिधि लोकतंत्र का आधार
समाज के विभिन्न विचारों को समेटना
सरकार की नीतियों पर जिम्मेदारी तय करना
दलों की संख्या की प्रणालियाँ (दलिया व्यवस्था)
एकदलीय व्यवस्था
केवल एक दल को सरकार बनाने की अनुमति
उदाहरण: चीन (कम्युनिस्ट पार्टी)
द्विदलीय व्यवस्था
सत्ता मुख्य रूप से दो दलों के बीच बदलती रहती है
उदाहरण: अमेरिका, ब्रिटेन
बहुदलीय व्यवस्था
कई दलों को चुनाव लड़ने और जीतने का अवसर
गठबंधन सरकार बनने की संभावना
उदाहरण: भारत
भारत में दलीय व्यवस्था
बहुदलीय प्रणाली को अपनाना
राष्ट्रीय दल
मान्यता के लिए शर्तें (लोकसभा या विधानसभा चुनाव में निश्चित प्रतिशत वोट)
प्रमुख उदाहरण:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस)
बहुजन समाज पार्टी (बसपा)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी - माकपा)
आम आदमी पार्टी (आप)
राज्यीय दल (क्षेत्रीय दल)
क्षेत्रीय प्रभाव और राज्य स्तर पर पहचान
उदाहरण: समाजवादी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), द्रमुक आदि
राजनीतिक दलों के समक्ष चुनौतियाँ
आंतरिक लोकतंत्र की कमी
शक्ति का कुछ ही नेताओं के हाथ में केंद्रित होना
वंशवाद की उत्तराधिकार की समस्या
परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता मिलना
धन और बाहुबल (अपराधियों) का बढ़ता प्रभाव
चुनाव में अधिक पैसे का इस्तेमाल
विकल्पहीनता की स्थिति
सभी दलों की नीतियों में वैचारिक समानता दिखना
राजनीतिक दलों में सुधार कैसे हो?
दलबदल कानून को अधिक सख्त बनाना
शपथ पत्र के जरिए संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्यौरा देना
राजनीतिक दलों के आंतरिक कामकाज का हिसाब रखना
चुनावों का राज्य द्वारा वित्तपोषण (फंडिंग) करना
जनता की सक्रिय भागीदारी और दबाव समूह बनाना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### परिचय\nराजनीतिक दल लोकतंत्र का सबसे प्रमुख चेहरा हैं, फिर भी दुनिया भर में राजनीतिक दलों के अपने कर्तव्यों का पालन करने के तरीके को लेकर व्यापक असंतोष व्यक्त किया जाता है। भारत इसका अपवाद नहीं है। यह समझने के लिए कि दलों में सुधार कैसे किया जाए, हमें पहले उनके सामने आने वाली चुनौतियों और किए गए या आवश्यक सुधारों को देखना होगा।
### राजनीतिक दलों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ
* **आंतरिक लोकतंत्र का अभाव:** दलों के भीतर शीर्ष पर एक या कुछ ही नेताओं के हाथों में सत्ता केंद्रित होती है। दल सदस्यता रजिस्टर नहीं रखते, संगठनात्मक बैठकें नहीं करते और नियमित रूप से आंतरिक चुनाव नहीं कराते हैं। दल के साधारण सदस्यों को अंदर क्या हो रहा है, इसकी पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती है।
* **वंशवादी उत्तराधिकार:** यह पहली चुनौती से जुड़ा हुआ है। चूंकि अधिकांश राजनीतिक दल आंतरिक चुनावों के लिए खुली और पारदर्शी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करते हैं, इसलिए एक साधारण कार्यकर्ता के शीर्ष पर पहुंचने के बहुत कम रास्ते होते हैं। नेता अपने करीबियों या परिवार के सदस्यों का पक्ष लेते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ मिलता है, जो लोकतंत्र के लिए बुरा है।
* **धन और बाहुबल का उपयोग:** चुनाव किसी भी कीमत पर जीतने के लिए होते हैं, और दल शॉर्ट-कट का उपयोग करते हैं। वे ऐसे उम्मीदवारों को नामांकित करते हैं जिनके पास बहुत सारा पैसा हो या जो जुटा सकें। जो अमीर लोग और कंपनियां दलों को चंदा देती हैं, वे नीतियों और निर्णयों को प्रभावित करने की प्रवृत्ति रखती हैं। कुछ मामलों में, दल ऐसे अपराधियों का समर्थन करते हैं जो चुनाव जीत सकते हैं।
* **सार्थक विकल्प:** अक्सर, दल मतदाताओं को कोई सार्थक विकल्प नहीं देते हैं। एक सार्थक विकल्प पाने के लिए, दलों को एक-दूसरे से काफी अलग होना चाहिए। हाल के वर्षों में भारत सहित दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दलों के बीच वैचारिक अंतर में गिरावट आई है, जिससे मतदाताओं के लिए उनके बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है।
### राजनीतिक दलों को मजबूत करने के लिए सुधार
1. **दल-बदल विरोधी कानून:** चुने हुए विधायकों और सांसदों को दल बदलने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया (दल-बदल विरोधी कानून)। इससे दल-बदल में कमी आई है, लेकिन इससे सांसद और विधायक पार्टी नेतृत्व के हर फैसले को मानने लगे हैं।
2. **संपत्ति और आपराधिक मामलों पर हलफनामा:** धन और अपराधियों के प्रभाव को कम करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश पारित किया। अब चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी संपत्ति और उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का विवरण देने वाला एक हलफनामा दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।
3. **अनिवार्य संगठनात्मक चुनाव:** चुनाव आयोग ने एक आदेश पारित किया जिसके तहत राजनीतिक दलों के लिए अपने संगठनात्मक चुनाव कराना और अपने आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक हो गया है।
4. **चुनावों का राज्य द्वारा वित्तपोषण:** अमीर दाताओं पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार को चुनाव खर्च का समर्थन करने के लिए दलों को नकद या वस्तु के रूप में धन देना चाहिए।
5. **सक्रिय जन सहभागिता:** अंततः, यदि आम नागरिक राजनीति में भाग नहीं लेंगे तो सुधार काम नहीं करेंगे। दलों में तभी सुधार हो सकता है जब इस परिवर्तन चाहने वाले लोग बाहर से आलोचना करने के बजाय राजनीतिक दलों में शामिल हों।
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, आंतरिक लोकतंत्र, वंशवादी राजनीति तथा धन और बाहुबल के प्रभाव जैसी चुनौतियों का समाधान करना भारतीय लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए कानूनी उपायों और सतर्क जन सहभागिता दोनों की आवश्यकता है।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nलोकतंत्र में राजनीतिक दलों को सबसे अधिक दिखाई देने वाली संस्थाओं में से एक माना जाता है। अधिकांश नागरिकों के लिए लोकतंत्र का मतलब राजनीतिक दल ही हैं। राजनीतिक दलों के बिना, बड़े और आधुनिक राष्ट्र-राज्यों में लोकतंत्र प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर सकता है।
### हमें राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों है? (आवश्यकता)
* **विविध विचारों का प्रतिनिधित्व:** एक बड़े लोकतंत्र में हर मुद्दे पर अलग-अलग विचार होते हैं। राजनीतिक दल इन विभिन्न प्रतिनिधियों को एक साथ लाते हैं ताकि एक जिम्मेदार सरकार का गठन किया जा सके।
* **नागरिकों और सरकार को जोड़ना:** दल विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचारों को इकट्ठा करने और उन्हें सरकार के सामने प्रस्तुत करने के लिए एक एजेंसी के रूप में कार्य करते हैं। वे लोगों और सरकार की नीति-निर्माण मशीनरी के बीच की कड़ी बनाते हैं।
* **उत्तरदायित्व:** चुने हुए प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रति उत्तरदायी होते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों का उदय यह सुनिश्चित करता है कि सरकार को उसकी समग्र शासन व्यवस्था और नीतिगत दिशा के लिए जवाबदेह ठहराया जा सके।
### राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले प्रमुख कार्य
1. **चुनाव लड़ना:** राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। अधिकांश लोकतंत्रों में चुनाव मुख्य रूप से राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़े जाते हैं।
2. **नीतियां और कार्यक्रम सामने रखना:** दल अलग-अलग नीतियां और कार्यक्रम सामने रखते हैं और मतदाता उनमें से चुनाव करते हैं। यह अपेक्षा की जाती है कि सरकार सत्तारूढ़ दल द्वारा अपनाए गए रुख के आधार पर अपनी नीतियां बनाएगी।
3. **कानून बनाना:** दल किसी देश के लिए कानून बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कानूनों पर विधायिका में बहस होती है और उन्हें पारित किया जाता है, और अधिकांश सदस्य किसी न किसी दल से संबंधित होते हैं।
4. **सरकार बनाना और चलाना:** बड़े नीतिगत निर्णय राजनीतिक कार्यकारी अधिकारियों द्वारा लिए जाते हैं जो राजनीतिक दलों से आते हैं। दल नेताओं की भर्ती करते हैं, उन्हें प्रशिक्षित करते हैं और फिर सरकार चलाने के लिए उन्हें मंत्री बनाते हैं।
5. **विपक्ष की भूमिका:** चुनाव हारने वाले दल सत्ताधारी दलों के विरोध की भूमिका निभाते हैं, विभिन्न विचारों को व्यक्त करते हैं और सरकार की विफलताओं या गलत नीतियों की आलोचना करते हैं।
6. **जनमत का निर्माण करना:** दल जनमत को आकार देते हैं। वे मुद्दों को उठाते और उजागर करते हैं, समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन शुरू करते हैं, और देश भर में उनके लाखों सदस्य और कार्यकर्ता फैले होते हैं।
7. **सरकारी मशीनरी तक पहुंच:** दल लोगों को सरकार द्वारा कार्यान्वित सरकारी मशीनरी और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच प्रदान करते हैं। एक आम नागरिक के लिए किसी सरकारी अधिकारी की तुलना में स्थानीय पार्टी नेता के पास जाना आसान होता है।
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, राजनीतिक दल लोकतांत्रिक प्रणाली की रीढ़ हैं, जो प्रतिनिधित्व, कानून निर्माण और सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के लिए आवश्यक तंत्र प्रदान करते हैं।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nचूंकि राजनीतिक दलों को आंतरिक लोकतंत्र की कमी, वंशवादी उत्तराधिकार, धन और बाहुबल, और सार्थक विकल्प की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उनमें सुधार करने की प्रबल आवश्यकता है। यदि दल अपने तौर-तरीकों में सुधार नहीं करते हैं, तो वास्तविक लोकतंत्र की बहुत कम उम्मीद है। इसलिए, राजनीतिक दलों और उनके नेताओं में सुधार के लिए भारत में विभिन्न प्रयास किए गए हैं।
### सुधार के लिए हाल ही में उठाए गए कदम
#### 1. दलबदल विरोधी कानून
* **दलबदल रोकना:** निर्वाचित विधायकों और सांसदों को दल बदलने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया था। यह इसलिए किया गया क्योंकि कई निर्वाचित प्रतिनिधि मंत्री बनने या नकद पुरस्कार के लिए दलबदल में लिप्त थे।
* **अयोग्यता का नियम:** अब कानून यह कहता है कि यदि कोई विधायक या सांसद दल बदलता है, तो वह विधायिका में अपनी सीट खो देगा। इसने दलबदल को कठिन बना दिया है, हालांकि इसने विधायकों पर पार्टी नेतृत्व के आदेश को भी पूर्ण बना दिया है।
#### 2. संपत्ति और आपराधिक मामलों का हलफनामा
* **सुप्रीम कोर्ट का आदेश:** सुप्रीम कोर्ट ने धन और अपराधियों के प्रभाव को कम करने के लिए एक आदेश पारित किया। अब, चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी संपत्ति और उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का विवरण देने वाला हलफनामा दाखिल करना अनिवार्य है।
* **सूचित मतदान:** नई प्रणाली ने जनता को बहुत सारी जानकारी उपलब्ध कराई है। हालाँकि, यह जाँचने की कोई व्यवस्था नहीं है कि उम्मीदवारों द्वारा दी गई जानकारी सच है या नहीं।
#### 3. चुनाव आयोग के निर्देश
* **संगठन चुनाव:** चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के लिए अपने संगठनात्मक चुनाव कराना और अपने आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक बनाने वाला एक आदेश पारित किया।
* **आंतरिक लोकतंत्र:** दलों ने ऐसा करना शुरू कर दिया है, कभी-कभी केवल औपचारिकता के रूप में, लेकिन इसने पार्टी संरचनाओं में कुछ हद तक पारदर्शिता लाई है।
### आगे के सुधारों के लिए सुझाव
* **आंतरिक मामलों पर कानून:** राजनीतिक दलों के आंतरिक मामलों को विनियमित करने के लिए एक कानून बनाया जाना चाहिए। दलों के लिए सदस्यों का रजिस्टर रखना और अपने स्वयं के संविधान का पालन करना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
* **चुनावों का राज्य वित्तपोषण:** चुनावों का राज्य वित्तपोषण होना चाहिए। सरकार को दलों को पैसा, पेट्रोल, कागज, टेलीफोन आदि देना चाहिए, या उनके चुनाव खर्च का समर्थन करने के लिए नकद देना चाहिए।
* **जन भागीदारी:** लोग याचिकाओं, प्रचार और आंदोलनों के माध्यम से राजनीतिक दलों पर दबाव बना सकते हैं। यदि राजनीतिक दलों को लगता है कि सुधारवादी न होने से वे जनसमर्थन खो देंगे, तो वे बदलाव के प्रति गंभीर हो जाएंगे।
### निष्कर्ष\nराजनीतिक दलों में सुधार करना एक जटिल कार्य है। हालांकि कानूनी समाधान कभी-कभी विपरीत परिणाम दे सकते हैं, लेकिन वास्तविक राजनीतिक सुधार तभी हो सकता है जब आम नागरिक सक्रिय रूप से भाग लें और राजनीतिक व्यवस्था पर नैतिक और राजनीतिक दबाव डालें।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nराजनीतिक दल लोकतंत्र में सबसे आसानी से दिखाई देने वाली संस्थाओं में से एक हैं। अधिकांश नागरिकों के लिए, लोकतंत्र का मतलब राजनीतिक दलों से है। यदि हम राजनीतिक दलों के बिना किसी परिदृश्य की कल्पना करें, तो हम उनकी पूर्ण आवश्यकता को समझ सकते हैं। दलों के बिना, चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार स्वतंत्र होगा, और कोई भी किसी भी प्रमुख नीतिगत बदलाव के बारे में लोगों से कोई वादा करने में सक्षम नहीं होगा। सरकार बन सकती है, लेकिन उसकी उपयोगिता हमेशा अनिश्चित बनी रहेगी। इसलिए, लोकतांत्रिक सरकार चलाने के लिए राजनीतिक दल आवश्यक हैं।
### राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य
#### 1. चुनाव लड़ना
* **मुख्य कार्य:** राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। अधिकांश लोकतंत्रों में, चुनाव मुख्य रूप से राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़े जाते हैं।
* **उम्मीदवारों का चयन:** दल अलग-अलग तरीकों से अपने उम्मीदवारों का चयन करते हैं। भारत में, शीर्ष दल के नेता चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों का चयन करते हैं।
#### 2. नीतियां और कार्यक्रम सामने रखना
* **विभिन्न विचार:** दल अलग-अलग नीतियां और कार्यक्रम सामने रखते हैं और मतदाता उनमें से चुनाव करते हैं।
* **व्यापक श्रेणी:** सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी नीतियों को सत्तारूढ़ दल द्वारा अपनाए गए रुख पर आधारित करे। दल बड़ी संख्या में विचारों को कुछ बुनियादी स्थितियों में समेटते हैं जिनका वे समर्थन करते हैं।
#### 3. कानून बनाना
* **कानून निर्माण में भूमिका:** राजनीतिक दल देश के लिए कानून बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
* **पार्टी व्हिप:** औपचारिक रूप से, विधायिका में कानूनों पर बहस होती है और उन्हें पारित किया जाता है। लेकिन चूँकि अधिकांश सदस्य किसी पार्टी से संबंधित होते हैं, वे अपने व्यक्तिगत विचारों की परवाह किए बिना पार्टी नेतृत्व के निर्देशानुसार चलते हैं।
#### 4. सरकार बनाना और चलाना
* **कार्यकारी शक्ति:** बड़े नीतिगत निर्णय राजनीतिक कार्यकारी द्वारा लिए जाते हैं जो राजनीतिक दलों से आते हैं।
* **भर्ती और प्रशिक्षण:** दल नेताओं की भर्ती करते हैं, उन्हें प्रशिक्षित करते हैं और फिर उन्हें अपनी इच्छानुसार सरकार चलाने के लिए मंत्री बनाते हैं।
#### 5. विपक्ष की भूमिका
* **असंतोष व्यक्त करना:** चुनाव हारने वाले दल सत्ताधारी दलों के विपक्ष की भूमिका निभाते हैं, विभिन्न विचार व्यक्त करते हैं और सरकार की विफलताओं की आलोचना करते हैं।
* **जांच करना:** विपक्षी दल सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हैं और सत्तारूढ़ दल को सतर्क रखते हैं।
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, राजनीतिक दल एक प्रतिनिधि लोकतंत्र की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। वे इन महत्वपूर्ण कार्यों को कुशलतापूर्वक निष्पादित करके यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकार जवाबदेह, उत्तरदायी और वैध बनी रहे।
उत्तर (Answer): ### Introduction\nA political party is a group of people who come together to contest elections and hold power in the government. They agree on some policies and programmes for the society with a view to promoting the collective good. Since there can be different views on what is good for all, parties try to persuade people why their policies are better than others.
### Necessary Components of a Political Party\nEvery political party essentially consists of three components:
1. **The Leaders:** The top decision-makers and campaigners who formulate policies and manage the party machinery.
2. **The Active Members:** Those who are directly involved in party work, committees, and mobilization of supporters.
3. **The Followers/Supporters:** The ordinary citizens who believe in the party's ideology and vote for it during elections.
### Major Functions of Political Parties\nPolitical parties perform a series of vital functions in a democracy:
1. **Contesting Elections:**
- **Explanation:** Parties contest elections. In most democracies, elections are fought mainly among the candidates put up by political parties. Parties select their candidates in different ways. In countries like India, top party leaders choose candidates for contesting elections.
2. **Formulating Policies and Programmes:**
- **Explanation:** Parties put forward different policies and programmes and the voters choose from them. A government is expected to base its policies on the line taken by the ruling party. Political parties bundle a large number of diverse opinions into a few basic positions which the party supports.
3. **Making Laws:**
- **Explanation:** Parties play a decisive role in making laws for a country. Formally, laws are debated and passed in the legislature. But since most of the members belong to a party, they tend to go by the direction of the party leadership, irrespective of their personal opinions.
4. **Forming and Running Government:**
- **Explanation:** Parties recruit leaders, train them and then make them ministers to run the government. The big policy decisions are taken by political executives that come from the political parties.
5. **Playing the Role of Opposition:**
- **Explanation:** Those parties that lose in the elections play the role of opposition to the parties in power, voicing different views and criticising government failures or wrong policies. Opposition parties also mobilize opposition to the government.
6. **Shaping Public Opinion:**
- **Explanation:** Parties launch movements for the resolution of problems faced by people. Often party opinions are backed by the people-wide pressure groups and social movements. Parties raise and highlight issues and shape public opinion.
7. **Providing Access to Government Machinery:**
- **Explanation:** Parties provide people access to government machinery and welfare schemes implemented by governments. For an ordinary citizen, it is easy to approach a local party leader than a government officer.
### Conclusion\nThus, political parties act as the vehicle of federal and representative democracy. Without political parties, democracies cannot function, as they provide the essential link between the citizens and the government.
उत्तर (Answer): ### Introduction\nSince political parties are the most crucial instruments of democracy, there has been a persistent demand for reforming them. In India, both constitutional measures and voluntary suggestions have been proposed to overcome the various malpractices and structural weaknesses plaguing political parties.
### Key Reforms to Strengthen Political Parties
1. **Anti-Defection Law:**
- **Explanation:** The Constitution was amended to prevent elected MLAs and MPs from changing parties. This was done because many elected representatives were indulging in defection in order to become ministers or for cash rewards. Now, if any MLA or MP changes parties, they will lose their seat in the legislature. This law has helped bring down defection, but it has also made party leadership supreme and silenced internal dissent.
2. **Affidavit of Property and Criminal Cases:**
- **Explanation:** The Supreme Court passed an order to reduce the influence of money and criminals. Now, it is mandatory for every candidate who contests elections to file an affidavit giving details of his property and criminal cases pending against him. The system has made a lot of information available to the public, though there is no check on whether the information given is true or false.
3. **Mandatory Organizational Elections:**
- **Explanation:** The Election Commission passed an order making it necessary for political parties to hold their organizational elections and file their income tax returns. Parties have started doing so, sometimes formally, but it has helped in bringing some degree of regulation and transparency to the internal working of political parties.
4. **State Funding of Elections:**
- **Explanation:** There is a persistent demand that the government should give parties money to support their election expenses. This financial support could be given in kind (such as petrol, paper, telephone) or in cash based on the votes secured by the party in the previous election. This can reduce the dependence of political parties on wealthy donors and corporate houses, thereby curbing corruption.
5. **Internal Democratic Reforms within Parties:**
- **Explanation:** A law should be made to regulate the internal affairs of political parties. It should be made compulsory for parties to maintain a register of their members, follow their own constitution, hold independent authority to judge internal disputes, and give a minimum quota of tickets (at least one-third) to women candidates.
### Conclusion\nReforming political parties is a complex task. While laws can check certain wrong practices, excessive legal regulation can also be counterproductive. Ultimately, political parties will only change if citizens, pressure groups, and movements exert active pressure and participate in the democratic process.
उत्तर (Answer): ### Introduction\nPolitical parties are the most visible face of a democratic system. However, popular dissatisfaction and criticism have brought to the fore certain challenges that parties must face and overcome if democracy is to flourish. In India, political parties face several structural and functional challenges.
### Five Major Challenges Faced by Political Parties
1. **Lack of Internal Democracy:**
- **Explanation:** Within parties, power tends to concentrate in the hands of one or a few leaders at the top. Parties do not keep membership registers, do not hold organisational meetings regularly, and do not conduct internal elections. Ordinary members of the party do not get sufficient information on what happens inside the party. Leaders assume overriding power to make decisions in the name of the party.
2. **Dynastic Succession:**
- **Explanation:** Since most political parties do not practice open and transparent procedures for their functioning, there are very few ways for an ordinary worker to rise to the top. Those who happen to be the leaders are in a position of unfair advantage to favour people close to them or even their family members. In many parties, the top positions are invariably controlled by members of one particular family, which is bad for democracy since people who do not have adequate experience or popular support come to occupy positions of power.
3. **Money and Muscle Power:**
- **Explanation:** The third challenge is related to the growing role of money and muscle power in parties, especially during elections. Since parties are focussed only on winning elections, they tend to use shortcuts to win. They nominate those candidates who have or can raise lots of money. Rich people and companies who give funds to the parties tend to have influence on the policies and decisions of the party. In some cases, parties support criminals who can win elections.
4. **Meaningful Choice:**
- **Explanation:** Very often, political parties do not offer a meaningful choice to the voters. To offer meaningful choice, parties must be significantly different. In recent years, there has been a decline in the ideological differences among political parties in most parts of the world, including India. Those who want different policies have no option available to them. Sometimes people cannot even elect very different leaders either, because the same set of leaders keeps shifting from one party to another.
5. **Lack of Transparency and Accountability:**
- **Explanation:** Political parties often fail to maintain financial transparency regarding their income and expenditures. The sources of funding remain largely opaque, leading to corruption and undue influence of wealthy donors. Furthermore, party leadership is rarely held accountable by its rank-and-file members or the general public for policy failures or broken promises.
### Conclusion\nThus, these challenges weaken the foundations of Indian democracy. Reforms are urgently required to ensure that political parties become more democratic, transparent, and responsive to the needs of the common citizens.
उत्तर (Answer): ### राजनीतिक दलों और राष्ट्रीय दलों का परिचय\nभारत जैसे बड़े संघ वाले लोकतंत्रों में दो तरह के राजनीतिक दल होते हैं: वे दल जो संघ की केवल एक इकाई में मौजूद होते हैं (क्षेत्रीय दल) और वे दल जो संघ की कई या सभी इकाइयों में मौजूद होते हैं (राष्ट्रीय दल)।
### राष्ट्रीय राजनीतिक दल की परिभाषा\nराष्ट्रीय दल देशव्यापी दल होते हैं। विभिन्न राज्यों में उनकी अपनी इकाइयाँ होती हैं। कुल मिलाकर, ये सभी इकाइयाँ राष्ट्रीय स्तर पर तय की गई समान नीतियों, कार्यक्रमों और रणनीतियों का पालन करती हैं। एक राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए, एक राजनीतिक दल को भारत के चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित विशिष्ट मानदंडों को पूरा करना होगा।
### राष्ट्रीय मान्यता के लिए आवश्यक शर्तें\nएक पंजीकृत दल को तभी राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता दी जाती है जब वह भारत के चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित निम्नलिखित में से किसी एक मानदंड को पूरा करता है:
1. **लोकसभा या विधानसभा चुनाव प्रदर्शन (प्रतिशत मानदंड):**
* दल को **लोकसभा** के आम चुनावों या **चार राज्यों में विधानसभा चुनावों** में डाले गए कुल वोटों का कम से कम **6% वोट** प्राप्त होना चाहिए।
* 6% वोट प्राप्त करने के अलावा, दल को किसी भी राज्य या राज्यों से **लोकसभा में कम से कम 4 सीटें** जीतनी होंगी।
2. **लोकसभा सीटें मानदंड:**
* दल को **लोकसभा में कुल सीटों का कम से कम 2%** जीतना चाहिए।
* ये सदस्य देश के कम से कम **तीन अलग-अलग राज्यों** से चुने जाने चाहिए।
3. **राज्यीय दल का दर्जा मानदंड:**
* दल को **कम से कम चार राज्यों में राज्यीय दल** के रूप में मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।
### भारत में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के उदाहरण\nभारत के चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, कई दलों को राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त है। दो प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं:
* **1. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा):**
* पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ को पुनर्जीवित करके 1980 में स्थापित।
* भारत की प्राचीन संस्कृति और मूल्यों से प्रेरणा लेकर एक मजबूत और आधुनिक भारत का निर्माण करना चाहती है।
* सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (हिन्दुत्व) भारतीय राष्ट्रवाद और राजनीति की इसकी अवधारणा का एक महत्वपूर्ण तत्व है।
* जम्मू और कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण प्रादेशिक और राजनीतिक एकीकरण, देश में रहने वाले सभी लोगों के लिए एक समान नागरिक संहिता, और धर्मांतरण पर प्रतिबंध चाहती है।
* **2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस पार्टी):**
* लोकप्रिय रूप से कांग्रेस पार्टी के रूप में जानी जाती है। 1885 में स्थापित दुनिया के सबसे पुराने दलों में से एक।
* स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भारतीय राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाई।
* जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में, पार्टी ने भारत में एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने की मांग की।
* धर्मनिरपेक्षता और कमजोर वर्गों तथा अल्पसंख्यकों के कल्याण का समर्थन करती है। मानवीय चेहरे के साथ नए आर्थिक सुधारों का समर्थन करती है।
### निष्कर्ष\nराष्ट्रीय दलों की अखिल भारतीय पहुंच होती है और वे राष्ट्रीय चिंताओं को संबोधित करते हैं। जहाँ क्षेत्रीय दल स्थानीय आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं राष्ट्रीय दल राष्ट्र के संघीय संतुलन को बनाए रखते हुए विभिन्न राज्य-स्तरीय हितों को एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण में एकीकृत करते हैं।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nराजनीतिक दल लोकतंत्र का सबसे दृश्य चेहरा हैं। फिर भी, भारत सहित दुनिया भर में, राजनीतिक दलों द्वारा अपने कार्यों को अच्छी तरह से निभाने में विफलता के प्रति व्यापक असंतोष है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राजनीतिक दलों को अपने आंतरिक कामकाज और बाहरी जुड़ाव में कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
### राजनीतिक दलों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ
* **आंतरिक लोकतंत्र का अभाव:**
* दलों के भीतर, सत्ता शीर्ष पर एक या कुछ नेताओं के हाथों में केंद्रित होती है।
* दल सदस्यता रजिस्टर नहीं रखते हैं, संगठनात्मक बैठकें नहीं करते हैं और नियमित रूप से आंतरिक चुनाव नहीं कराते हैं।
* दल के सामान्य सदस्यों को पार्टी के अंदर क्या होता है, इसकी पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती है और उनके पास निर्णयों को प्रभावित करने का कोई साधन नहीं होता है।
* परिणामस्वरूप, दल के सिद्धांतों और नीतियों के प्रति वफादारी की तुलना में नेता के प्रति व्यक्तिगत वफादारी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
* **वंशवाद की उत्तराधिकारिता:**
* यह आंतरिक लोकतंत्र की कमी से संबंधित है। चूंकि अधिकांश राजनीतिक दल अपने कामकाज के लिए खुली और पारदर्शी प्रक्रियाओं का अभ्यास नहीं करते हैं, इसलिए एक सामान्य कार्यकर्ता के शीर्ष तक पहुंचने के बहुत कम तरीके हैं।
* सत्ता में बैठे नेता अपने परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों का अनुचित पक्ष लेते हैं।
* कई दलों में, शीर्ष पदों पर हमेशा एक ही परिवार के सदस्यों का नियंत्रण होता है, जो लोकतंत्र के लिए बुरा है क्योंकि जिन लोगों के पास पर्याप्त अनुभव या लोकप्रिय समर्थन नहीं है, वे सत्ता के पदों पर कब्जा कर लेते हैं।
* **धन और बाहुबल की ताकत:**
* चुनाव तेजी से किसी भी कीमत पर जीतने पर केंद्रित हो रहे हैं। दल चुनाव जीतने के लिए शॉर्ट-कट का उपयोग करते हैं।
* वे उन उम्मीदवारों को नामांकित करते हैं जिनके पास बहुत सारा पैसा है या जो जुटा सकते हैं।
* अमीर लोग और कंपनियां जो दलों को धन देती हैं, वे पार्टी की नीतियों और निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
* कुछ मामलों में, दल उन अपराधियों का समर्थन करते हैं जो चुनाव जीत सकते हैं, जिससे राजनीति का अपराधीकरण होता है।
* **सार्थक विकल्प:**
* हाल के वर्षों में, भारत सहित दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दलों के बीच वैचारिक अंतर में गिरावट आई है।
* उदाहरण के लिए, ब्रिटेन में लेबर पार्टी और कंजर्वेटिव पार्टी के बीच का अंतर बहुत कम है; वे मौलिक पहलुओं पर सहमत हैं लेकिन नीतियों को कैसे लागू किया जाए, इस पर विवरण में ही भिन्न हैं।
* भारत में भी, प्रमुख दल आर्थिक नीतियों पर महत्वपूर्ण रूप से भिन्न हैं, लेकिन उन सभी की एक आम व्यापक सहमति है। कभी-कभी लोग काफी अलग नेताओं को भी नहीं चुन सकते क्योंकि नेताओं का वही समूह एक दल से दूसरे दल में बदलाव करता रहता है।
### राजनीतिक दलों को मजबूत करने के लिए सुधार\nइन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, भारत में कई कानूनी और संस्थागत सुधारों का प्रयास या प्रस्ताव किया गया है:
* **दल-बदल विरोधी कानून:** निर्वाचित विधायकों और सांसदों को दल बदलने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया (दल-बदल)। यह इसलिए किया गया क्योंकि कई निर्वाचित प्रतिनिधि नकदी या मंत्री पद के बदले दल-बदल में लिप्त थे। अब, यदि कोई विधायक या सांसद दल बदलता है, तो वह विधायिका में अपनी सीट खो देगा।
* **संपत्ति और आपराधिक मामलों का हलफनामा:** सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी संपत्ति और उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का विवरण देने वाला हलफनामा दाखिल करना अनिवार्य करके धन और अपराधियों के प्रभाव को कम करने का आदेश पारित किया।
* **अनिवार्य संगठनात्मक चुनाव:** चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के लिए अपने संगठनात्मक चुनाव कराना और अपने आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक बनाने वाला एक आदेश पारित किया।
### आगे के सुधारों के लिए सुझाव
* राजनीतिक दलों के आंतरिक मामलों को विनियमित करने के लिए एक कानून बनाया जाना चाहिए, जिससे सदस्यों का रजिस्टर रखना, उसके संविधान का पालन करना और विवाद समाधान के लिए स्वतंत्र न्यायाधीश रखना अनिवार्य हो जाए।
* राजनीतिक दलों के लिए महिला उम्मीदवारों को न्यूनतम टिकट शेयर (जैसे, एक तिहाई) देना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
* चुनाव का राज्य वित्तपोषण होना चाहिए, जहां सरकार अपने चुनाव खर्च का समर्थन करने के लिए दलों को धन या कागज देती है।
### निष्कर्ष\nयदि नागरिक सक्रिय रुचि लेते हैं, याचिकाओं, प्रचार और आंदोलनों के माध्यम से दलों पर दबाव डालते हैं, तो राजनीतिक दलों में सुधार किया जा सकता है। यदि बुरे राजनेताओं को बाहर रखा जाता है, तो सकारात्मक लोकतांत्रिक परिवर्तन लाने के लिए अच्छे नागरिक राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं।
उत्तर (Answer): ### राजनीतिक दलों का परिचय\nलोकतंत्र में राजनीतिक दलों की संस्थाएँ सबसे अधिक दिखाई देने वाली संस्थाएँ हैं। अधिकांश सामान्य नागरिकों के लिए लोकतंत्र का अर्थ राजनीतिक दल ही है। एक बड़े लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की आवश्यकता होती है क्योंकि उनके बिना शासन और नागरिकों के प्रतिनिधित्व में विभिन्न चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं.
### हमें राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों है? (कार्य)\nराजनीतिक दल लोकतांत्रिक व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, जो उनकी अत्यधिक आवश्यकता को दर्शाते हैं:
* **चुनाव लड़ना:** अधिकांश लोकतंत्रों में चुनाव मुख्य रूप से राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़े जाते हैं। दल अपने उम्मीदवारों का चयन अलग-अलग तरीकों से करते हैं। अमेरिका जैसे देशों में दल के सदस्य और समर्थक अपने उम्मीदवार का चयन करते हैं, जबकि भारत में शीर्ष दल के नेता चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों का चयन करते हैं।
* **नीतियां और कार्यक्रम सामने रखना:** दल अलग-अलग नीतियां और कार्यक्रम सामने रखते हैं और मतदाता उनमें से चुनते हैं। प्रत्येक दल बड़ी संख्या में विचारों को कुछ बुनियादी स्थितियों तक सीमित करता है जिनका वह समर्थन करता है। सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी नीतियों को सत्ताधारी दल द्वारा अपनाए गए रुख पर आधारित करे।
* **कानून बनाना:** देश के लिए कानून बनाने में राजनीतिक दलों की निर्णायक भूमिका होती है। विधायिका में कानूनों पर बहस होती है और उन्हें पारित किया जाता है। लेकिन चूंकि अधिकांश सदस्य किसी न किसी दल से संबंधित होते हैं, इसलिए वे अपने व्यक्तिगत विचारों की परवाह किए बिना दल के नेतृत्व के निर्देशानुसार काम करते हैं।
* **सरकार बनाना और चलाना:** बड़े राजनीतिक नीतिगत निर्णय राजनीतिक कार्यकारी अधिकारियों द्वारा लिए जाते हैं जो राजनीतिक दलों से आते हैं। दल नेताओं की भर्ती करते हैं, उन्हें प्रशिक्षित करते हैं और फिर सरकार को अपनी इच्छानुसार चलाने के लिए मंत्री बनाते हैं।
* **विपक्ष की भूमिका:** चुनाव हारने वाले दल सत्ताधारी दलों के विपक्ष की भूमिका निभाते हैं, विभिन्न विचारों को व्यक्त करते हैं और सरकार की विफलता या गलत नीतियों की आलोचना करते हैं। विपक्षी दल सरकार के खिलाफ विरोध भी जुटाते हैं।
* **जनमत का निर्माण करना:** दल जनमत का निर्माण करते हैं। वे मुद्दों को उठाते हैं और उजागर करते हैं। दलों के देश भर में लाखों सदस्य और कार्यकर्ता फैले होते हैं। कई दबाव समूह लोगों के बीच राजनीतिक दलों के विस्तार हैं।
* **सरकारी मशीनरी तक पहुंच:** दल लोगों को सरकार द्वारा कार्यान्वित सरकारी मशीनरी और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच प्रदान करते हैं। एक आम नागरिक के लिए किसी सरकारी अधिकारी की तुलना में स्थानीय पार्टी नेता से संपर्क करना आसान होता है।
### यदि राजनीतिक दल न हों तो क्या होगा?\nयदि हम राजनीतिक दलों के बिना स्थिति की कल्पना करें, तो हम उनके महत्व को और अधिक समझ सकते हैं:
* **केवल निर्दलीय उम्मीदवार:** चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार निर्दलीय होगा। इसलिए, कोई भी सरकार की नीतियों में कोई बड़ा नीतिगत बदलाव करने में सक्षम नहीं होगा।
* **अस्थिर सरकार:** सरकार की उपयोगिता अनिश्चित बनी रहेगी। निर्वाचित प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रति जवाबदेह होंगे, लेकिन देश को समग्र रूप से कैसे चलाया जाए, इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं होगा।
* **एकल विजन की कमी:** कई स्थानों पर गैर-दलीय आधार पर हुए पंचायत चुनाव यह दिखाते हैं कि गाँव कई गुटों में बंट जाता है, जिनमें से प्रत्येक अपना पैनल खड़ा करता है, जिसे राजनीतिक दल राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर एक बड़ा छत्र विजन प्रदान करके सटीक रूप से टालते हैं।
### निष्कर्ष\nइस प्रकार, राजनीतिक दल लोकतंत्र के लिए एक आवश्यक शर्त हैं। राजनीतिक दलों का उदय प्रतिनिधि लोकतंत्र के उद्भव से सीधे जुड़ा हुआ है। जैसे-जैसे समाज बड़े और जटिल होते गए, उन्हें विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न विचारों को इकट्ठा करने और सरकार के सामने प्रस्तुत करने के लिए किसी एजेंसी की आवश्यकता पड़ी। राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक आवश्यकता को पूरी तरह से पूरा करते हैं।
उत्तर (Answer): राजनीतिक दल लोगों का एक ऐसा समूह होता है जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से एक साथ आता है। वे समाज के लिए कुछ नीतियों और कार्यक्रमों पर सहमत होते हैं ताकि सामूहिक हित को बढ़ावा दिया जा सके। चूंकि इस बात पर अलग-अलग विचार हो सकते हैं कि सभी के लिए क्या अच्छा है, इसलिए दल लोगों को यह समझाने का प्रयास करते हैं कि उनकी नीतियां दूसरों से बेहतर क्यों हैं। वे चुनावों के माध्यम से जनसमर्थन प्राप्त करके इन नीतियों को लागू करना चाहते हैं।
**राजनीतिक दलों के दो मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:**
1. **चुनाव लड़ना:** राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। अधिकांश लोकतंत्रों में, चुनाव मुख्य रूप से राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़े जाते हैं। दल अलग-अलग तरीकों से अपने उम्मीदवारों का चयन करते हैं। कुछ देशों में, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में, एक दल के सदस्य और समर्थक अपने उम्मीदवारों का चुनाव करते हैं। भारत जैसे अन्य देशों में, शीर्ष दल के नेता चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों का चयन करते हैं।
2. **कानून बनाना:** दल किसी देश के लिए कानून बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। औपचारिक रूप से, कानूनों पर विधायिका में बहस होती है और उन्हें पारित किया जाता है। लेकिन चूँकि अधिकांश सदस्य किसी न किसी दल से संबंधित होते हैं, इसलिए वे अपनी व्यक्तिगत राय की परवाह किए बिना दल के नेतृत्व के निर्देशानुसार चलते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि कानून पूरे देश में व्यवस्थित तरीके से दल के एजेंडे और विचारधारा को प्रतिबिंबित करते हैं।
उत्तर (Answer): राजनीतिक दलों को लोकतंत्र का चेहरा माना जाता है, फिर भी उन्हें गंभीर आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नीचे तीन प्रमुख चुनौतियों को समझाया गया है:
1. आंतरिक लोकतंत्र की कमी: राजनीतिक दलों के भीतर, सत्ता शीर्ष पर एक या कुछ नेताओं के हाथों में केंद्रित होती है। पार्टियाँ सदस्यता रजिस्टर नहीं रखती हैं, संगठनात्मक बैठकें नहीं करती हैं और नियमित रूप से आंतरिक चुनाव नहीं करती हैं। पार्टी के साधारण सदस्यों को पार्टी के भीतर क्या होता है, इसकी पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती है और निर्णयों को प्रभावित करने का कोई साधन नहीं होता है।
2. वंशवादी उत्तराधिकार: यह पहली चुनौती से संबंधित है। चूकि अधिकांश राजनीतिक दल काम करने के लिए खुली और पारदर्शी प्रक्रियाओं का अभ्यास नहीं करते हैं, इसलिए एक साधारण कार्यकर्ता के शीर्ष पर पहुंचने के बहुत कम तरीके हैं। सत्ता में बैठे नेता योग्यता और क्षमता को नजरअंदाज करते हुए अपने परिवार के सदस्यों, करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों का अनुचित पक्ष लेते हैं।
3. धन और बाहुबल: चुनाव महंगे होते हैं और पार्टियाँ ऐसे उम्मीदवारों को नामांकित करती हैं जिनके पास बहुत सारा पैसा है या जो जुटा सकते हैं। अमीर लोग और कॉरपोरेट जो दलों को धन देते हैं, नीतियों और निर्णयों को प्रभावित करते हैं। कुछ मामलों में, पार्टियाँ ऐसे अपराधियों का समर्थन करती हैं जो चुनाव जीत सकते हैं, जिससे राजनीति का अपराधीकरण होता है।
उत्तर (Answer): भारत का चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें मान्यता देने के लिए विशिष्ट मानदंड निर्धारित करता है:
1. राज्य दल: वह दल जो किसी राज्य की विधानसभा के चुनाव में कुल मतों का कम से कम 6 प्रतिशत प्राप्त करता है और कम से कम 2 सीटें जीतता है, उसे राज्य दल के रूप में मान्यता दी जाती है।
2. राष्ट्रीय दल: वह दल जो लोकसभा के आम चुनावों में या चार राज्यों में विधानसभा चुनावों में कुल मतों का कम से कम 6 प्रतिशत सुरक्षित करता है और लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीतता है, उसे राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता दी जाती है। वैकल्पिक रूप से, कम से कम 3 अलग-अलग राज्यों से लोकसभा में कम से कम 2 प्रतिशत सीटें (यानी 11 सीटें) जीतने वाले दल को भी राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता दी जाती है।
उत्तर (Answer): बहुदलीय प्रणाली एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली है जिसमें राजनीतिक स्पेक्ट्रम के कई राजनीतिक दल राष्ट्रीय चुनाव के लिए दौड़ते हैं, और उन सभी में अलग-अलग या गठबंधन में सरकारी कार्यालयों पर सफलतापूर्वक नियंत्रण हासिल करने की क्षमता होती है।
\nभारत ने निम्नलिखित कारणों से बहुदलीय प्रणाली अपनाई है:
1. सामाजिक और भौगोलिक विविधता: भारत एक विशाल देश है जो अपार सामाजिक, सांस्कृतिक, क्षेत्रीय और भाषाई विविधता की विशेषता रखता है। एक एकल या द्विदलीय प्रणाली ऐसे विभिन्न हितों और पहचानों का पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है।
2. सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व: बहुदलीय प्रणाली विभिन्न सामाजिक समूहों, क्षेत्रीय गुटों और अल्पसंख्यकों को अपने स्वयं के राजनीतिक दल बनाने और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व पाने की अनुमति देती है।
3. ऐतिहासिक विकास: समय के साथ, भारत में कई राजनीतिक दल उभरे जो विभिन्न विचारधाराओं, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और सामाजिक आंदोलनों को दर्शाते हैं जिन्हें स्वतंत्रता के बाद एकल कांग्रेस पार्टी प्रणाली के भीतर समाहित नहीं किया जा सकता था।
उत्तर (Answer): ऐतिहासिक, सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर दलीय व्यवस्था देश-दर-देश अलग-अलग होती है। एक दलीय प्रणाली और द्विदलीय प्रणाली निम्नलिखित तरीकों से भिन्न होती हैं:
1. अर्थ: एक दलीय प्रणाली में, सरकार को नियंत्रित करने और चलाने के लिए केवल एक ही दल की अनुमति होती है। इसके विपरीत, द्विदलीय प्रणाली में, सत्ता आमतौर पर दो मुख्य दलों के बीच बदलती रहती है, हालांकि कई अन्य दल भी मौजूद हो सकते हैं और चुनाव लड़ सकते हैं।
2. लोकतांत्रिक मूल्य: एक दलीय प्रणाली को एक अच्छा लोकतांत्रिक विकल्प नहीं माना जाता है क्योंकि यह मतदाताओं को निष्पक्ष चुनावी प्रतिस्पर्धा प्रदान नहीं करती है। दूसरी ओर, द्विदलीय प्रणाली मतदाताओं को दो प्रमुख दलों के बीच विकल्प प्रदान करती है, जिससे शासन में स्थिरता और सत्ता का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित होता है।
3. उदाहरण: चीन एक दलीय प्रणाली का एक क्लासिक उदाहरण है जहाँ केवल कम्युनिस्ट पार्टी को शासन करने की अनुमति है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और यूनाइटेड किंगडम (UK) द्विदलीय प्रणाली के प्रमुख उदाहरण हैं (यद्यपि अन्य छोटे दल मौजूद हैं, अमेरिका में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन तथा ब्रिटेन में लेबर और कंजर्वेटिज़्म के बीच सत्ता बदलती रहती है)।