Chapter Chai • Board Revision Guide
HI • CBSE

छाया मत छूना

Subject: हिंदी | Class: Class 10 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

त्वरित रिवीजन नोट्स (Quick Revision Notes)

कक्षा: 10वीं

विषय: हिंदी (क्षितिज - भाग 2: काव्य खंड)

अध्याय: छाया मत छूना

कवि: गिरिजाकुमार माथुर


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परिचय एवं मुख्य संदेश (Introduction & Core Message)

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महत्वपूर्ण अवधारणाएँ एवं व्याख्या (Important Concepts & Explanations)

#### 1. छाया मत छूना (अतीत की स्मृतियाँ)


#### 2. मृगतृष्णा (भ्रम / असत्य चाहत)


#### 3. प्रभुता का शरण बिंब (यश और बड़प्पन का भ्रम)


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कविता के मुख्य बिंदु (Key Points to Remember)

1. वर्तमान की वास्तविकता: जीवन में जो कुछ बीत गया, उसे बदला नहीं जा सकता। इसलिए वर्तमान के संघर्ष को स्वीकार करना ही बुद्धिमत्ता है।

2. सुख और दुःख का चक्र: जीवन में सुख और दुःख दोनों आते-जाते रहते हैं। यदि रात (दुःख) लंबी है, तो सवेरा (सुख) भी अवश्य आएगा।

3. भावनाओं का द्वंद्व: मनुष्य का मन हमेशा सुंदर भविष्य की कल्पना करता है या बीते हुए सुनहरे दिनों को याद करके रोता है, जिससे उसका वर्तमान भी खराब हो जाता है।


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परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न (Quick Board Exam Tips)

उत्तर: कवि संदेश देना चाहता है कि अतीत की सुखद स्मृतियों को बार-बार याद करने से दुःख बढ़ता है, इसलिए मनुष्य को वर्तमान की सच्चाई का सामना करना चाहिए।

उत्तर: मृगतृष्णा का अर्थ छलावा या भ्रम है। जीवन में सुख और बप्पन की चाहत भी एक मृगतृष्णा के समान है।

उत्तर: दुखों से घबराने के बजाय वर्तमान की परिस्थितियों का डटकर सामना करना चाहिए।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 छाया मत छूना - गिरिजाकुमार माथुर
Overview
कवि परिचय जन्म: सन १९१८ (उत्तर प्रदेश) शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी) प्रमुख रचनाएं: नाश और निर्माण, धूप के धान, शिला पंख चमकीले निधन: सन १९९४ कविता का केंद्रीय भाव अतीत की स्मृतियों (यादों) से दूर रहना वर्तमान के यथार्थ (सच्चाई) को स्वीकार करना सुखद भ्रमों से बचने की प्रेरणा मुख्य विषय और संकेत 'छाया मत छूना' का अर्थ: पुरानी यादों या भ्रमों के पीछे मत भागो मानवीकरण: दुख और सुख दोनों का जीवन में आना जीवन की दोहरी सच्चाई: अतीत का सुख और वर्तमान का दुख काव्यांश-वार मुख्य बिंदु प्रथम अंश: पुरानी यादें और वर्तमान का दर्द सुहाने अतीत की यादें वर्तमान के दुखों का बढ़ना मृगतृष्णा (छलने वाली चीजें) का भ्रम द्वितीय अंश: यश, वैभव और बड़प्पन का मोह धन-दौलत और प्रसिद्धि की चाह चंद्रकांत भ्रम (झूठी चमक) केवल परछाई से जुड़ना, असलियत से दूर रहना तृतीय अंश: वर्तमान का यथार्थ और कठिन परिस्थितियाँ जीवन की खट्टी-मीठी यादें हर तरफ़ छाया हुआ दुःख का बादल जो है (वर्तमान), वही सत्य है महत्वपूर्ण संदेश और शिक्षा अतीत की सुखद स्मृतियों में उलझने से समय की बर्बादी वर्तमान की कठिनाइयों का डटकर सामना करना भविष्य की आशा के साथ आगे बढ़ना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. कविता 'छाया मत छूना' हमें जीवन के संघर्षों का सामना करने की प्रेरणा किस प्रकार देती है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाया मत छूना' मानव जीवन के अपरिहार्य संघर्षों और कठिनाइयों का सामना करने के लिए एक अत्यंत प्रेरणादायक रचना है। यह कविता हमें यह सिखाती है कि जीवन की परेशानियों से घबराकर अतीत की यादों या अवास्तविक इच्छाओं की शरण में जाना कमजोरी की निशानी है। असली बहादुरी इस बात में है कि वर्तमान परिस्थितियों चाहे जितनी भी प्रतिकूल हों, उनका डटकर सामना किया जाए और उनसे पार पाने के लिए निरंतर प्रयास किया जाए। कवि हमें भ्रमों की परछाइयों को छूने से मना करके आत्मनिर्भरता, मानसिक दृढ़ता और व्यावहारिक कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। यह कविता हमें इस बात के लिए प्रेरित करती है कि हम जो खो चुके हैं उसके लिए शोक करने के बजाय अपने वर्तमान कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहें और अपनी मेहनत से एक बेहतर भविष्य का निर्माण करें।
Q2. कवि गिरिजाकुमार माथुर के अनुसार मनुष्य के जीवन में स्मृतियों (यादों) की क्या भूमिका होती है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कवि गिरिजाकुमार माथुर के दृष्टिकोण से मनुष्य के जीवन में यादों या स्मृतियों की भूमिका बहुत ही दोहरी और जटिल होती है। यद्यपि अच्छे समय और प्रियजनों की यादें मनुष्य के मन को आकर्षित करती हैं, लेकिन उनमें अत्यधिक डूबे रहना वर्तमान जीवन को शांतिपूर्वक जीने में एक बड़ी बाधा बन जाता है। कवि यह स्वीकार करते हैं कि अतीत को याद करना मानव स्वभाव का हिस्सा है, लेकिन जब इन यादों का उपयोग वर्तमान के संकटों और कठिनाइयों से भागने के लिए किया जाता है, तो वे हानिकारक सिद्ध होती हैं। अतीत की सुखद स्मृतियां संकट के समय में सांत्वना देने के बजाय व्यक्ति के भीतर खालीपन और दुख को और अधिक तीव्र कर देती हैं। इसलिए कवि सलाह देते हैं कि हमें अतीत का सम्मान करना चाहिए, लेकिन उसकी परछाइयों में बंधकर नहीं रहना चाहिए ताकि मन स्वतंत्र रहकर वर्तमान के कर्तव्यों और वास्तविकताओं पर ध्यान केंद्रित कर सके।
Q3. कविता 'छाया मत छूना' में निहित वास्तविकता और भ्रम (यथार्थ और कल्पना) के केंद्रीय भाव को स्पष्ट कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाया मत छूना' का मुख्य केंद्रीय भाव यथार्थ (वास्तविकता) और भ्रम (कल्पना) के बीच के निरंतर संघर्ष पर आधारित है। कवि गिरिजाकुमार माथुर ने वर्तमान जीवन की कठिन सच्चाइयों और अतीत की मीठी, भ्रामक स्मृतियों के बीच के अंतर को बहुत ही गहराई से उभारा है। परछाइयों, सुनहरी यादों और झूठी आशाओं के रूप में चित्रित भ्रम व्यक्ति को कुछ समय के लिए सुख का आभास करा सकते हैं, लेकिन जब वास्तविकता सामने आती है तो वे केवल गहरा दुख देते हैं। इसके विपरीत, जीवन की कठोर सच्चाई को स्वीकार करना व्यक्ति को अंदर से मजबूत बनाता है। यह कविता पाठकों की आंखें खोलने का कार्य करती है और यह संदेश देती है कि हमें अतीत और भविष्य के काल्पनिक भ्रमों को छोड़कर वर्तमान जीवन की चुनौतियों का सामना पूरी समझदारी, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ करना चाहिए।
Q4. कवि गिरिजाकुमार माथुर ने 'छाया मत छूना' कविता में मानवीय इच्छाओं और भ्रमों के स्वरूप का वर्णन किस प्रकार किया है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाया मत छूना' में कवि गिरिजाकुमार माथुर ने मानवीय इच्छाओं और भ्रमों का बहुत ही यथार्थवादी चित्रण किया है। कवि के अनुसार मनुष्य की इच्छाएं और महत्वाकांक्षाएं असीम होती हैं और वह जीवनभर मृगतृष्णा की तरह भ्रमों के पीछे भागता रहता है। व्यक्ति धन, यश, भौतिक सुख-सुविधाओं और प्रेम के आदर्श रूपों को पाने के लिए निरंतर प्रयास करता है, लेकिन ये सभी सांसारिक उपलब्धियां अंततः एक परछाई की भांति नाशवान और भ्रामक होती हैं। मनुष्य इन झूठी परछाइयों और महत्वाकांक्षाओं के मोह में इस कदर उलझा रहता है कि वह जीवन की वास्तविक सुंदरता और वर्तमान के सुखों को महसूस नहीं कर पाता। कवि यह समझाना चाहते हैं कि इन भ्रमों और अवास्तविक इच्छाओं के पीछे भागना केवल असंतोष, दुख और निराशा को जन्म देता है, जिससे जीवन के वास्तविक मूल्य और शांति नष्ट हो जाते हैं।
Q5. कविता के संदर्भ में 'मन का दुख दूना होता है' इस कथन का क्या आशय और महत्व है? 3 Marks
उत्तर (Answer): 'मन का दुख दूना होता है' यह कथन कविता 'छाया मत छूना' में बहुत ही महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सत्य को उजागर करता है। इसका आशय यह है कि जब कोई व्यक्ति वर्तमान समय में कष्ट झेल रहा होता है और उस स्थिति में अपने अतीत के सुखों, प्रेम और वैभव को याद करता है, तो उसकी वर्तमान पीड़ा कम होने के बजाय और अधिक बढ़ जाती है। अतीत की सुखद स्मृतियों और वर्तमान की दुखद वास्तविकता के बीच का अंतर मन को बहुत अधिक व्यथित करता है। इस तुलना से व्यक्ति को कोई राहत नहीं मिलती, बल्कि उसका अभाव बोध और अधिक गहरा हो जाता है। वर्तमान का दुख और अतीत के सुख के छिन जाने का गम मिलकर व्यक्ति के मानसिक संताप को दोगुना कर देते हैं। इसलिए कवि ने इस मनोवैज्ञानिक सच्चाई को स्पष्ट करते हुए अतीत की यादों से दूर रहने की सलाह दी है।
Q6. कविता 'छाया मत छूना' में कवि अतीत की छाया को छूने के लिए क्यों मना करता है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कवि गिरिजाकुमार माथुर अतीत की छाया को छूने के लिए इसलिए मना करते हैं क्योंकि बीते हुए दिनों की सुखद स्मृतियां एक ऐसा भ्रम पैदा करती हैं जो अब वास्तविकता में मौजूद नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपनी वर्तमान कठिन परिस्थितियों की तुलना अतीत के सुनहरे पलों से करता है, तो उसके भीतर का खालीपन और अभाव बोध बढ़ जाता है, जिससे उसका मानसिक और भावनात्मक कष्ट कई गुना अधिक हो जाता है। कवि ने 'छाया' शब्द का प्रयोग इसलिए किया है क्योंकि अतीत का सुख केवल एक परछाई की तरह वास्तविक नहीं होता। इन परछाइयों से चिपके रहने के कारण व्यक्ति वर्तमान के यथार्थ को स्वीकार नहीं कर पाता। इसलिए, बीते समय में सांत्वना खोजने के बजाय, जो केवल मानसिक पीड़ा को बढ़ाता है, मनुष्य को वर्तमान समय के संघर्षों और कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
Q7. कविता 'छया मत छूना' के माध्यम से कवि गिरिजाकुमार माउस क्या संदेश देना चाहते हैं? 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छया मत छूना' में कवि गिरिजाकुमार माथुर ने मानव जीवन से जुड़ा एक अत्यंत दार्शनिक और व्यावहारिक संदेश दिया है। कवि का मानना है कि मनुष्य को अपने अतीत के सुखद पलों और सुंदर स्मृत्तियों के भ्रम में नहीं उलझना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से वर्तमान का दुख और अधिक बढ़ जाता है। अतीत की सुखद परछाइयों का पीछा करने से वर्तमान की कठोर वास्तविकताएं बदल नहीं जातीं। जो बीत चुका है, उसकी यादों में खोए रहने के बजाय व्यक्ति को वर्तमान समय की सच्चाइयों का डटकर सामना करना चाहिए। यह कविता हमें सिखाती है कि जीवन के यथार्थ को स्वीकार करना मानसिक शांति और प्रगति के लिए आवश्यक है, जबकि काल्पनिक सुखों में डूबे रहने से हमारे संघर्ष करने की क्षमता कमजोर हो जाती है और वर्तमान का दुख और अधिक गहरा हो जाता है।
Q8. कविता 'छाय मत छूना' शोक और स्मृतियों से जूझ रहे व्यक्ति की मानसिक स्थिति का चित्रण किस प्रकार करती है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाय मत छूना' शोक, अकेलेपन और एक अधिक सुखी अतीत की डरावनी स्मृतियों से जूझ रहे व्यक्ति की जटिल मानसिक स्थिति का गहरा चित्रण करती है। जब कोई व्यक्ति वर्तमान के दुखों से घिरा होता है, तो उसका मन स्वाभाविक रूप से बेहतर दिनों की पुरानी यादों में शरण लेने का प्रयास करता है। हालांकि, कवि इस प्रक्रिया में छिपे मनोवैज्ञानिक जाल को उजागर करते हैं: सांत्वना देने के बजाय, ये स्मृतियाँ एक दोधारी तलवार की तरह कार्य करती हैं जो नुकसान के अहसास को और तीव्र कर देती हैं। जो था और जो है, उसके बीच की तुलना तीव्र मानसिक संकट पैदा करती है, दर्द को बढ़ा देती है और व्यक्ति को और अधिक संवेदनशील बना देती है। इस प्रकार यह कविता मानव मनोविज्ञान का एक सूझबूझ भरा अन्वेषण है, जो इस खतरे के प्रति सचेत करती है कि अतीत के भ्रमों को अपनी वर्तमान भावनात्मक स्थिरता और सहनशक्ति पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
Q9. कवि ने 'छाय मत छूना' कविता में जीवन के दर्शन को समझाने के लिए किन दृश्यों या बिंबों का प्रयोग किया है, उनका क्या महत्व है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाय मत छूना' में कवि ने जीवन के गंभीर दर्शन को समझाने के लिए समृद्ध दृश्य बिंबों और प्राकृतिक प्रतीकों का प्रयोग किया है, जो यह दर्शाते हैं कि जीवन प्रकाश और छाया, सुख और दुख का एक मिश्रण है। 'छाया' का बिंब भ्रम, पुरानी स्मृतियों और उन अधूरे सपनों का प्रतिनिधित्व करता है जो दूर से आकर्षक लगते हैं लेकिन पास जाने पर उनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं होता। इन छायाओं को जीवन की कठोर वास्तविकताओं के साथ रखकर, कवि यह प्रदर्शित करते हैं कि कैसे मानवता अक्सर सतही चमक, धन और झूठे प्रेम प्रसंगों से भ्रमित हो जाती है। ये दृश्य विवरण पाठकों को पुरानी यादों में फंसे व्यक्ति और वर्तमान को स्वीकार करने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति की कल्पना करने में सहायता करते हैं। इन शक्तिशाली कलात्मक तत्वों के माध्यम से, कवि सफलतापूर्वक यह संदेश देते हैं कि वास्तविक शांति भ्रमों को छोड़ने और अस्तित्व के संतुलित द्वैत को स्वीकार करने से मिलती है।
Q10. कविता 'छाय मत छूना' में कवि अतीत के सुखद अनुभवों के प्रति अत्यधिक मोह रखने से क्यों मना करते हैं? 3 Marks
उत्तर (Answer): कवि अतीत के सुखद अनुभवों के प्रति अत्यधिक मोह रखने से इसलिए मना करते हैं क्योंकि अत्यधिक पुरानी यादों में डूबे रहना व्यक्ति की वर्तमान में जीने और कार्य करने की क्षमता को पंगु बना देता है। जब लोग लगातार पीछे मुड़कर देखते हैं और अपने वर्तमान संघर्षों की तुलना कल के सुख से करते हैं, तो वे इस बात की सराहना करने में असफल रहते हैं कि जीवन अभी उन्हें क्या दे रहा है। यह मोह एक मनोवैज्ञानिक बाधा पैदा करता है, जो दुख, पछतावा और लाचारी की भावना को जन्म देती है। अतीत को पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता; इसलिए, जो बीत चुका है उस पर अपनी भावनात्मक ऊर्जा खर्च करना पूरी तरह से व्यर्थ है। सांत्वना पाने के बजाय, व्यक्ति दर्द के ऐसे चक्र में फंस जाता है जहाँ प्रत्येक सुखद स्मृति उसके वर्तमान कष्ट को और उजागर करती है। कवि चाहते हैं कि हम अच्छी यादों को संजोएं लेकिन उन्हें अपनी प्रगति को रोकने या अपने वर्तमान उत्तरदायित्वों तथा संभावनाओं पर हावी न होने दें।
Q11. कवि गिरिजाकुमार माथुर ने 'छाय मत छूना' कविता में मनुष्य की इच्छाओं और अपेक्षाओं की प्रकृति का वर्णन किस प्रकार किया है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कवि गिरिजाकुमार माथुर ने 'छाय मत छूना' कविता में मनुष्य की इच्छाओं और अपेक्षाओं को अतृप्त, भ्रमपूर्ण और भावनात्मक कष्टों का एक प्रमुख स्रोत बताया है। कविता में वे संकेत करते हैं कि मनुष्य लगातार ऐसी चीजों के पीछे भागता है जो उसके पास नहीं हैं और भ्रम को ही वास्तविकता समझ बैठता है। चाहे वह बीते हुए यौवन की लालसा हो, भौतिक संपत्ति की दौड़ हो, या प्रेम की प्राप्ति की चाह हो, ये आकांक्षाएं अक्सर एक जाल की तरह काम करती हैं। कवि समझाते हैं कि एक इच्छा की पूर्ति कई नई इच्छाओं को जन्म देती है, जिससे लालच और निराशा का एक अंतहीन चक्र बन जाता है। पाठकों को ऐसी इच्छाओं की छाया को न छूने की सलाह देकर, कवि लोगों से आग्रह करते हैं कि वे सतही अपेक्षाओं से ऊपर उठें, केवल छलावों का पीछा करने की व्यर्थता को पहचानें और एक यथार्थवादी जीवन जीने में मिलने वाले साधारण सत्यों तथा स्थिरता की सराहना करना सीखें।
Q12. कवि गिरिजाकुमार माथुर 'छाय मत छूना' कविता में भौतिक सुख-समृद्धि, यश और प्रेम के भ्रमों के माध्यम से क्या संदेश देना चाहते हैं? 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाय मत छूना' में कवि भौतिक सुख-समृद्धि, सामाजिक यश, शारीरिक सुंदरता और प्रेम के भ्रमों के माध्यम से सांसारिक इच्छाओं की नश्वर और छलावापूर्ण प्रकृति को उजागर करते हैं। लोग अक्सर पद-प्रतिष्ठा, प्रशंसा और क्षणिक संबंधों के पीछे इस प्रकार भागते हैं मानो वे सुख के स्थायी स्रोत हों। हालांकि, कवि यह स्पष्ट करते हैं कि ये सब छायाओं या मृगतृष्णा के समान हैं जो छूने पर या गहराई से देखने पर गायब हो जाती हैं। इन भ्रामक लक्ष्यों का पीछा करने से केवल निराशा हाथ लगती है क्योंकि मनुष्य का लोभ और भौतिकवादी महत्वाकांक्षाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। इसके माध्यम से कवि यह गंभीर दार्शनिक संदेश देते हैं कि वास्तविक संतोष धन संचित करने या सतही प्रशंसा पाने में नहीं है, बल्कि अपनी वास्तविकता को स्वीकार करने, भ्रमों को त्यागने और इमानदार जीवन तथा मानसिक परिपक्वता के माध्यम से अपने भीतर शांति प्राप्त करने में निहित है।
Q13. कविता 'छाय मत छूना' के संदर्भ में 'मन का दुख दूना होता है' इस कथन के महत्व को स्पष्ट कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाय मत छूना' में 'मन का दुख दूना होता है' वाक्यांश का अत्यंत गहरा मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक महत्व है। कवि का आशय यह है कि जब कोई व्यक्ति पहले से ही वर्तमान जीवन के संघर्षों, असफलताओं और चुनौतियों से जूझ रहा होता है, तब बीते हुए सुखों की यादों में खोना उसे कोई राहत नहीं देता। इसके विपरीत, यह उस वस्तु या समय के लिए तीव्र लालसा पैदा करता है जो हमेशा के लिए खो चुका है। आनंदमय अतीत और दुखद वर्तमान के बीच का यह अंतर व्यक्ति पर मानसिक पीड़ा और भावनात्मक बोझ को दोगुना कर देता है। इस बात का अहसास कि वे सुनहरे पल अब कभी वापस नहीं आ सकते, लाचारी और शोक की भावना को और गहरा कर देता है। इस प्रकार, कवि हमें चेतावनी देते हैं कि पुरानी छायाओं का पीछा करना या उनमें डूबे रहना हमारे आंतरिक कष्ट को केवल कई गुना बढ़ा देता है, जिससे यह अनिवार्य हो जाता है कि हम पुराने भावनात्मक घावों को कुरेदने के बजाय वर्तमान वास्तविकताओं का सामना करने पर ध्यान केंद्रित करें।
Q14. कवि गिरिजाकुमार माथुर के अनुसार, अतीत के सुखों की स्मृतियाँ मनुष्य के वर्तमान जीवन पर एक गहरा और अक्सर हानिकारक प्रभाव डालती हैं। जब कोई व्यक्ति निरंतर अपने अतीत के आनंददायक पन्नों, सफलताओं और प्रेम को याद करता है, तो वह उसके वर्तमान संघर्षों और कठिनाइयों के साथ एक तीखा विरोधाभास पैदा करता है। यह विरोधाभास किसी प्रकार की सांत्वना नहीं देता, बल्कि वर्तमान के दर्द, अभाव और दुःख के अहसास को और अधिक तीव्र कर देता है। कवि इस मनोवैज्ञानिक स्थिति का वर्णन करते हुए कहते हैं कि पुरानी छायाओं की लालसा एक दोहरे बोझ की तरह कार्य करती है, जो हृदय को भारी बना देती है और वर्तमान में आवश्यक कर्मों से ध्यान भटका देती है। अतः घावों को भरने के बजाय, ये स्मृतियाँ उन्हें और अधिक हरा कर देती हैं, जिससे मानसिक उथल-पुथल मच जाती है और व्यक्ति वर्तमान क्षण की सच्चाई में शांति नहीं पा पाता है। 3 Marks
उत्तर (Answer): According to poet Girija Kumar Mathur, the memory of past happiness casts a profound and often detrimental shadow on a person's present life. When an individual continuously reminisces about the joyful moments, successes, and love of the past, it creates a stark contrast with their current struggles and difficulties. This contrast does not provide comfort; rather, it magnifies the current sense of pain, deprivation, and sorrow. The poet describes this psychological phenomenon by stating that longing for past shadows acts as a double burden, making the heart heavier and diverting attention from necessary actions in the present. Therefore, instead of healing wounds, these memories reopen them, causing emotional turmoil and preventing the individual from finding peace in the reality of the present moment.
Q15. कविता 'छाय मत छूना' में कवि गिरिजाकुमार माथुर का 'छाया मत छूना' कहने से क्या आशय है और इसका मूल संदेश क्या है? 3 Marks
उत्तर (Answer): कविता 'छाय मत छूना' में 'छाया मत छूना' वाक्यांश का प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि व्यक्ति को अपने अतीत के सुखद पन्नों, पुरानी स्मृतियों और बीते हुए सुनहरे दिनों के भ्रम में नहीं उलझना चाहिए। कवि यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि बीते हुए सुखों को बार-बार याद करने से वे सुख वापस लौटकर नहीं आते, बल्कि वर्तमान जीवन का दुख, पीड़ा और खालीपन और अधिक बढ़ जाता है। इस कविता का मूल संदेश यह है कि मनुष्य का जीवन सुख और दुख दोनों का सम्मिश्रण है, लेकिन अतीत की छायाओं या पुराने वैभव में ही डूबे रहना एक मृगतृष्णा के समान है, जो व्यक्ति को वर्तमान की कठोर वास्तविकताओं का सामना करने से विचलित कर देती है। कवि पाठकों को यह सलाह देते हैं कि वे वर्तमान की वास्तविकता को स्वीकार करें, वर्तमान क्षण में मेहनत करें और आगे बढ़ें, न कि ऐसी पुरानी यादों के जाल में फंसे रहें जो अंततः मानसिक संताप और अधूरी इच्छाओं के सिवाय कुछ नहीं देतीं।