Chapter Chai • Board Revision Guide
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साना-साना हाथ जोड़ि

Subject: हिंदी | Class: Class 10 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)

कक्षा: १०वीं

विषय: हिंदी (कृतिका - भाग २)

अध्याय: साना-साना हाथ जोड़ि...

लेखिका: मधु कांकरिया


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अध्याय का परिचय और सारांश

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मुख्य बिंदु एवं घटनाएँ

#### १. गंगतोक का सौंदर्य और जादू


#### २. गंतोक से हिमालय की यात्रा


#### ३. आस्था और विश्वास (ध्वजाएँ और मंत्र)


#### ४. स्थानीय संस्कृति और जनजीवन


#### ५. सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल और पर्यावरण


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महत्वपूर्ण संदेश / शिक्षा

1. यात्रा का उद्देश्य: यात्रा केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान, आत्मिक शांति और प्रकृति के रहस्यों को जानने के लिए होनी चाहिए।

2. श्रम का सम्मान: पहाड़ी इलाकों में महिलाओं का जीवन अत्यधिक संघर्षपूर्ण होता है। हमें उनके श्रम का सम्मान करना चाहिए।

3. पर्यावरण चेतना: आधुनिकता के नाम पर पहाड़ों पर हो रहे अंधाधुंध निर्माण और प्रदूषण से हिमालय का सौंदर्य और जल चक्र खतरे में पड़ रहा है, जिसे रोकना आवश्यक है।


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यह त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स आपकी परीक्षा की तैयारी और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होंगे।

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 साना-साना हाथ जोड़ि - मधु कांकरी
Overview
लेखिका का परिचय व यात्रा का उद्देश्य लेखिका: मधु कांकरी विधा: यात्रा-वृत्तांत गंतव्य: सिक्किम की राजधानी गंगटोक और हिमालयी यात्रा उद्देश्य: प्राकृतिक सौंदर्य और पहाड़ी जीवन के संघर्षों को दिखाना गंगटोक: जादू भरा शहर रात का दृश्य: तारों भरा आसमान जैसे जादूई सोता हुआ शहर नाम का अर्थ: 'गंगटोक' यानी पहाड़ सुंदरता: मेहनतकश बादशाहों का शहर प्रदूषण मुक्त और सुंदर रात युमथांग की रोमांचक यात्रा जिप में सफर: तीस्ता नदी के साथ-साथ सेवन सिस्टर्स वॉटरफ़ॉल: प्राकृतिक झरना और सौंदर्य पहाड़ी रास्ते: घुमावदार और संकरे रास्ते, खतरनाक मोड़ ड्राइवर कम गाइड: जितेन नार्गे का सहयोग आस्था और विश्वास के प्रतीक श्वेत पताकाएँ (धार्मिक झंडे): 108 श्वेत बौद्ध पताकाएँ शांति और अहिंसा का प्रतीक शोक या मृत्यु पर लगाई जाती हैं रंगीन पताकाएँ: किसी नए व शुभ कार्य पर लगाई जाती हैं कवि लोंगस्टोक: बुद्ध की जयंती और पवित्र गुफा पहाड़ी जीवन और वहाँ के लोगों का संघर्ष स्थानीय महिलाओं का परिश्रम: पीठ पर बंधी टोकरी (डोको) में बच्चों को संभालना चाय की पत्तियाँ चुनना और पत्थर तोड़ना जीवन की कठिनाइयाँ: माइनस डिग्री तापमान में भी कठिन शारीरिक श्रम बच्चों का स्कूल दूर होना सैलानी बनाम स्थानीय लोग: पर्यटकों की सुख-सुविधा और स्थानीय लोगों का संघर्ष प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण बदलाव कटाओ (भारत का स्विट्जरलैंड): बर्फ से ढँका खूबसूरत पहाड़ कंचनजंगा चोटी का दर्शन पर्यावरण पर चिंता: ग्लोबल वार्मिंग के कारण बर्फ का कम होना वाटरफॉल (झरनों) का सूखना प्रदूषण का बढ़ता प्रभाव यात्रा से प्राप्त संदेश व निष्कर्ष प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का पाठ मानवीय संवेदना और करुणा का विकास विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन रोकने की सीख 'साना-साना हाथ जोड़ि' प्रार्थना: सभी पाप और नकारात्मकता दूर होने की कामना
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. सीमा पर भारतीय सैनिकों से हुई मुलाकात ने लेखिका के मन में किन भावनाओं को जगाया? 3 Marks
उत्तर (Answer): युमथांग और ज़ीरो पॉइंट की यात्रा के दौरान लेखिका का सामना उन भारतीय सैनिकों से होता है जो देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अत्यंत कठिन परिस्थितियों में तैनात हैं। शून्य से भी पंद्रह डिग्री नीचे के तापमान में, जहाँ साँस लेना भी दूभर होता है और पानी जम जाता है, ये सैनिक मुस्तैदी से खड़े रहते हैं। सैनिकों के इस अदम्य साहस और त्याग को देखकर लेखिका का हृदय श्रद्धा और कृतज्ञता से भर जाता है। उन्हें अहसास होता है कि हम अपने घरों में जो चैन की नींद सोते हैं, वह इन सैनिकों की शहादत और कठिन साधना का ही परिणाम है। वे अपने परिवार और सुख-सुविधाओं को छोड़कर देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। यह दृश्य पाठकों में देशभक्ति और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना जगाता है।
Q2. यह पाठ सिक्किम के लोगों की पर्यावरण चेतना और स्थानीय मान्यताओं को किस प्रकार दर्शाता है? 3 Marks
उत्तर (Answer): इस पाठ में सिक्किम के लोगों की गहरी पर्यावरण चेतना और उनकी धार्मिक मान्यताओं के सुंदर समन्वय को दर्शाया गया है। जितेंद्र नगे लेखिका को बताते हैं कि यहाँ के लोग नदियों, झरनों और पहाड़ों को पूजनीय मानते हैं। उनका विश्वास है कि यदि वे इन प्राकृतिक संसाधनों को गंदा करेंगे या नुकसान पहुँचाएंगे, तो देवी-देवता उनसे रुष्ट हो जाएंगे। इसी तरह, 'खेदुम' घाटी के बारे में मान्यता है कि वहाँ गुरु नानक देव जी के थाली से गिरे चावल के दाने बिखरे थे, जिससे वहाँ चावल की खेती होती है। ये पौराणिक कथाएँ और अंधविश्वास वास्तव में प्रकृति के संरक्षण के अनौपचारिक नियम हैं। प्रकृति को पूजनीय मानकर यहाँ के लोग पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखते हैं, जो आज के आधुनिक समाज के लिए एक महान सीख है।
Q3. लेखिका ने सिक्किम के पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों के जीवन का किस प्रकार वर्णन किया है? 3 Marks
उत्तर (Answer): लेखिका ने सिक्किम के पहाड़ी बच्चों के जीवन का अत्यंत यथार्थवादी और मार्मिक चित्रण किया है। मैदानी इलाकों के बच्चों के विपरीत, यहाँ के बच्चों का जीवन सुख-सुविधाओं से कोसों दूर और अत्यंत कठिन है। यहाँ कोई स्कूल बस नहीं होती; बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रतिदिन तीन-चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाना पड़ता है। स्कूल से लौटने के बाद भी उनका संघर्ष समाप्त नहीं होता। वे अपनी माताओं के साथ घरेलू कामों में हाथ बंटाते हैं, जैसे दूर-दूर से पीने का पानी लाना, मवेशियों को चराने ले जाना और जंगलों से लकड़ियों के भारी गट्ठर अपनी पीठ पर ढोना। लेखिका यह स्पष्ट करती हैं कि यहाँ बचपन खेल-कूद और बेफिक्री में नहीं, बल्कि कम उम्र से ही कठोर परिश्रम और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में बीतता है।
Q4. लेखिका की यात्रा में जितेंद्र नगे ने एक गाइड और ड्राइवर के रूप में क्या भूमिका निभाई? 3 Marks
उत्तर (Answer): जितेंद्र नगे लेखिका की यात्रा में केवल एक ड्राइवर नहीं, बल्कि एक कुशल और संवेदनशील गाइड की भूमिका में थे। उन्हें सिक्किम की भौगोलिक स्थिति, इतिहास, संस्कृति और स्थानीय मान्यताओं की गहरी जानकारी थी। उन्होंने लेखिका को बौद्ध पताकाओं के महत्व, गुरु नानक के पदचिह्नों से जुड़ी कहानियों और पहाड़ी जीवन की कठिनाइयों से परिचित कराया। जितेंद्र केवल रास्ता नहीं दिखा रहे थे, बल्कि वे लेखिका को वहाँ के जनजीवन और संस्कृति से भावनात्मक रूप से जोड़ रहे थे। वे जानते थे कि कहाँ गाड़ी रोकनी है और कहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना है। उनकी आत्मीयता, धैर्य और अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान ने लेखिका की यात्रा को न केवल सुरक्षित और ज्ञानवर्धक बनाया, बल्कि उसे एक नया दृष्टिकोण भी दिया। वे एक आदर्श गाइड के सभी गुणों से परिपूर्ण थे।
Q5. लेखिका द्वारा देखी गई पत्थर तोड़ती पहाड़ी महिलाओं की स्थिति का वर्णन कीजिए। इसका लेखिका पर क्या प्रभाव पड़ा? 3 Marks
उत्तर (Answer): यात्रा के दौरान लेखिका ने देखा कि हिमालय की अलौकिक और शांत वादियों के बीच कुछ पहाड़ी महिलाएँ कुदाल और हथौड़े से भारी पत्थरों को तोड़कर सड़कें चौड़ी करने के कठिन कार्य में लगी हुई थीं। उनमें से कई महिलाओं की पीठ पर बंधी टोकरी (डोको) में उनके छोटे बच्चे भी थे। एक तरफ मातृत्व और दूसरी तरफ कठोर श्रम का यह दृश्य देखकर लेखिका का मन करुणा और दुख से भर गया। उन्हें लगा कि जहाँ सैलानी इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते हैं, वहीं इन स्थानीय लोगों के लिए यह जीवन और मौत की दैनिक जंग है। इस दृश्य ने लेखिका को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि ये आम लोग कितना कम लेकर समाज को कितना अधिक वापस लौटाते हैं। यह पहाड़ों की कठोर वास्तविकता और महिलाओं के मूक संघर्ष को दर्शाता है।
Q6. पाठ में वर्णित श्वेत और रंगीन बौद्ध पताकाओं (ध्वजों) का क्या महत्व है? 3 Marks
उत्तर (Answer): सिक्किम में बौद्ध धर्म के अनुयायियों द्वारा फहराई जाने वाली श्वेत और रंगीन पताकाओं (ध्वजों) का गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। लेखिका मधु कांकरिया ने अपनी यात्रा के दौरान देखा कि ये पताकाएँ दो अलग-अलग अवसरों पर लगाई जाती हैं। जब किसी बौद्ध धर्मावलम्बी की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर किसी शांत स्थान या पर्वतों पर 108 श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं। इन पर पवित्र मंत्र लिखे होते हैं। इन्हें कभी उतारा नहीं जाता, बल्कि ये समय के साथ अपने आप नष्ट हो जाती हैं। इसके विपरीत, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, नए साल या मांगलिक अवसरों पर रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं, जो शुभता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती हैं। ये पताकाएँ प्रकृति और धर्म के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती हैं।
Q7. 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में गंतोक (गैंगटॉक) को 'मेहनती बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है? 3 Marks
उत्तर (Answer): गंतोक (गैंगटॉक) को 'मेहनती बादशाहों का शहर' इसलिए कहा गया है क्योंकि यहाँ के निवासियों ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट संघर्ष से इस पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्र को एक अत्यंत सुंदर शहर में बदल दिया है। यहाँ का जीवन बेहद कठिन और संघर्षपूर्ण है, लेकिन यहाँ के लोगों के चेहरे पर हमेशा एक शांत मुस्कान रहती है। यहाँ की महिलाएँ अपने बच्चों को पीठ पर बाँधकर (डोको में) सड़कों को चौड़ा करने के लिए भारी पत्थरों को तोड़ती हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी पढ़ाई के साथ-साथ मीलों पैदल चलकर पानी भरने, मवेशी चराने और लकड़ियाँ ढोने का काम करते हैं। गंतोक का सौंदर्य और वहाँ की व्यवस्था किसी राजा के वैभव जैसी नहीं, बल्कि वहाँ के आम लोगों के अथक परिश्रम का परिणाम है, इसलिए इसे मेहनती बादशाहों का शहर कहना सर्वथा उचित है।
Q8. सिक्किम के स्थानीय लोग क्यों मानते थे कि 'चुंगथांग' की चट्टान पर बने पदचिह्नों में जादुई और दिव्य शक्तियाँ थीं? 3 Marks
उत्तर (Answer): यात्रा के दौरान, गाइड जितेन्द्र नार्गे ने चुंगथांग में एक अनूठी चट्टान की ओर इशारा किया जिस पर स्पष्ट पदचिह्न अंकित थे। सिक्किम के लोगों द्वारा साझा किए गए गहरी आस्था वाले स्थानीय विश्वासों और लोककथाओं के अनुसार, ये पदचिह्न सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव के थे। किंवदंती है कि उत्तरी क्षेत्रों की अपनी यात्रा के दौरान, गुरु नानक सिक्किम आए थे और पानी की कमी और कठोर परिस्थितियों से पीड़ित स्थानीय निवासियों की मदद करने के लिए चमत्कार किए थे। उनकी दिव्य उपस्थिति और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में, उनके पदचिह्न चमत्कारिक रूप से ठोस चट्टान पर अंकित हो गए थे। स्थानीय लोग इस पवित्र स्थल के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे, यह मानते हुए कि ये पवित्र पदचिह्न उनकी भूमि की रक्षा करते हैं, आध्यात्मिक कृपा लाते हैं, और उनके पहाड़ी जीवन में दिव्य हस्तक्षेप के एक शाश्वत प्रमाण के रूप में कार्य करते हैं।
Q9. लेखिका प्रकृति, मानवीय लालच और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच के संबंध के बारे में क्या संदेश देती हैं? 3 Marks
उत्तर (Answer): Through her travelogue 'Sana-Sana Hath Jodi', the author Madhu Kankaria delivers a powerful and urgent message about the alarming consequences of human greed on nature. She observes how commercialization, unbridled tourism, and reckless urban development are destroying the pristine beauty of the Himalayas. The scarcity of snow at places where it was supposed to be abundant, due to global warming and ecological disturbance, deeply worried her. She emphasizes that nature has its own delicate balance, and when humans interfere with it out of greed, it invites catastrophic environmental disasters like droughts, melting glaciers, and floods. The author makes a fervent plea for respecting nature, practicing sustainable tourism, and preserving the ecological integrity of vulnerable mountain regions for future generations.
Q10. 'कटाव' के आध्यात्मिक वातावरण ने लेखिका को कैसे प्रभावित किया और उन्हें किस प्रकार की गहरी आंतरिक शांति प्रदान की? 3 Marks
उत्तर (Answer): कटाव, जिसे अक्सर 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहा जाता है, एक ऐसी जगह थी जो अवास्तविक, अछूती सुंदरता से परिपूर्ण थी और पूरी तरह से घनी सफेद बर्फ से ढकी हुई थी। जब लेखिका मधु कांकरिया कटाव पहुँचीं, तो उन्होंने एक गहरे आध्यात्मिक जागरण और सन्नाटे का अनुभव किया जैसा उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। सफेद बर्फ की पूर्ण पवित्रता, ऊँचे पहाड़ों की राजसी खामोशी और मानवीय शोर की अनुपस्थिति ने एक दिव्य वातावरण का निर्माण किया। उस लुभावने परिदृश्य के बीच खड़े होकर, उनकी सभी सांसारिक चिंताएँ, तनाव और मानसिक थकान पल भर में गायब हो गईं। शांत वातावरण ने उनकी आत्मा के सबसे गहरे कोनों को छू लिया, जिससे उन्हें प्रकृति की अपार शक्ति का एहसास हुआ और उनके दिल में शुद्ध आनंद, विनम्रता और चिरस्थायी आंतरिक शांति की भावना भर गई जो यात्रा समाप्त होने के बहुत बाद तक उनके साथ रही।
Q11. सिक्किम में पहाड़ों की सड़कों के निर्माण कार्य में लगी महिला पत्थर काटने वालों की स्थिति और कठिनाइयों का वर्णन कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): लेखिका मधु कांकरिया बहुत अधिक प्रभावित और विचलित हो गईं जब उन्होंने सिक्किम में पहाड़ी सड़कों पर काम करने वाली महिला पत्थर काटने वालों की दर्दनाक वास्तविकता को देखा। यात्रा के दौरान, उन्होंने इन साहसी महिलाओं को खतरनाक चट्टानों के किनारे सड़कें बनाने के लिए हथौड़ों, छैनी और सब्बल से कठोर चट्टानों को तोड़ते हुए देखा। जिस बात ने इस दृश्य को और भी मर्मस्पर्शी बना दिया, वह यह था कि इनमें से कई महिलाओं ने चिलचिलाती धूप या ठिठुरती हवाओं के बीच इस कमर तोड़ मेहनत को करते समय अपने दुधमुँहे बच्चों को कपड़े के टुकड़े से अपनी पीठ पर कसकर बाँध रखा था। वे नंगे हाथों और अपर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के साथ बेहद खतरनाक परिस्थितियों में अथक परिश्रम करती थीं। आगंतुकों के आनंदमय पर्यटन और इन स्थानीय महिलाओं के दर्दनाक, अथक संघर्ष के बीच इस स्पष्ट अंतर ने लेखिका को मानव विकास और आधुनिक बुनियादी ढाँचे की वास्तविक कीमत पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
Q12. लेखिका की यात्रा को ज्ञानवर्धक और यादगार बनाने में ड्राइवर और गाइड जितेन्द्र नार्गे ने क्या भूमिका निभाई? 3 Marks
उत्तर (Answer): यात्रा वृत्तांत 'साना-साना हाथ जोड़ि' में, जितेन्द्र नार्गे ने लेखिका और उनके मित्रों के लिए केवल एक ड्राइवर के रूप में नहीं, बल्कि एक अत्यधिक ज्ञानी और उत्साही गाइड के रूप में भूमिका निभाई। हिमालय की कठिन यात्रा के दौरान, उन्होंने स्थानीय संस्कृति, भूगोल, परंपराओं और पहाड़ी लोगों की जीवनशैली के बारे में गहरी और दिलचस्प जानकारियाँ साझा कीं। उन्होंने प्रार्थना-पताकाओं के आध्यात्मिक महत्व, विभिन्न पर्वत चोटियों के पीछे की कहानियों और स्थानीय मजदूरों द्वारा झेले जाने वाले संघर्षों को समझाया। उनके हँसमुख स्वभाव, स्थानीय विशेषज्ञता और जानकारी साझा करने की इच्छा ने इस यात्रा को एक साधारण दर्शनीय स्थल की सैर से बदलकर एक शैक्षिक और बेहद भावनात्मक अनुभव में बदल दिया। उनके मार्गदर्शन के बिना, यात्री सिक्किम के राजसी पहाड़ों और वहाँ के गर्मजोशी से भरे लोगों की आत्मा, संघर्षों और सच्चे सार को कभी नहीं समझ पाते।
Q13. लेखिका को क्यों लगा कि युमथांग की सुंदरता स्विट्जरलैंड से कहीं बेहतर और अधिक आकर्षक थी? 3 Marks
उत्तर (Answer): जब लेखिका मधु कांकरिया युमथांग गईं, तो वह वहाँ की प्राचीन और अछूती प्राकृतिक सुंदरता से पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गईं। युमथांग जाने से पहले, उन्होंने कई यात्रियों और पर्यटकों को कश्मीर और सिक्किम के सुंदर दृश्यों की तुलना स्विट्जरलैंड से करते हुए सुना था। वास्तव में, जितेन नामक उनके एक साथी ने विशेष रूप से उनसे कहा था कि युमथांग स्विट्जरलैंड से कहीं अधिक सुंदर है। जब लेखिका ने फूलों से भरी घाटी, बहती नदियाँ, ऊँचे बर्फ से ढके पहाड़ और शांत वातावरण को अपनी आँखों से देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि जितेन की बात पूरी तरह सच थी। जहाँ स्विट्जरलैंड का व्यवसायीकरण हो चुका था और वहाँ पर्यटकों की बहुत भीड़ थी, वहीं युमथांग में अभी भी अपना कच्चा, कुंवारा और शुद्ध आकर्षण बरकरार था। अछूती सुंदरता, शांति और हिमालयी परिदृश्य के साथ जो भावनात्मक जुड़ाव उन्होंने महसूस किया, उसने युमथांग को स्विट्जरलैंड के अतिप्रचारित दृश्यों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर, जादुई और आकर्षक बना दिया।
Q14. हिमालयी क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने अत्यधिक ठंड से अपना बचाव कैसे किया और लेखिका ने उनकी शारीरिक सहनशक्ति के बारे में क्या देखा? 3 Marks
उत्तर (Answer): हिमालय की अपनी यात्रा के दौरान, लेखिका मधु कांकरिया ने वहाँ के स्थानीय निवासियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के जीवन का बहुत करीब से अवलोकन किया। इस क्षेत्र में कड़ाके की और अत्यधिक ठंड का मौसम रहता था। इस गंभीर ठंड से खुद को बचाने के लिए, स्थानीय लोग पारंपरिक भारी ऊनी कपड़े और गर्म कपड़ों की परतें पहनते थे। हालाँकि, जिस बात ने लेखिका को गहराई से चकित किया, वह स्थानीय महिलाओं की असाधारण शारीरिक सहनशक्ति और कठिन परिश्रम था। ऐसे ठिठुरते तापमान में भी, ये मेहनती महिलाएँ अपनी पीठ पर भारी बोझ लादे हुए, अपने छोटे बच्चों को कपड़े से बाँधकर, पत्थरों को काटते हुए या जंगलों से जलावन की लकड़ी इकट्ठा करते हुए दिखाई देती थीं। वे बिना किसी थकान के संकेत के खड़ी और खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर लंबी दूरियों तक पैदल चलती थीं, जो अथक संघर्ष, असीम समर्पण और कठोर प्राकृतिक चुनौतियों के बीच जीवित रहने की एक अटूट भावना से भरे जीवन को प्रदर्शित करता था।
Q15. हिमालय में रास्ते में बँधे सफेद रंग के प्रार्थना-पताकाओं (झंडों) का क्या महत्व था और वे रंगबिरंगे झंडों से किस प्रकार भिन्न थे? 3 Marks
उत्तर (Answer): अध्याय 'साना-साना हाथ जोड़ि' में लेखिका मधु कांकरिया ने हिमालय की अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं का वर्णन किया है। पहाड़ी रास्तों पर लेखिका ने कई प्रार्थना-पताकाएँ (झंडे) देखीं। विशेष रूप से, सफेद रंग के प्रार्थना-पताकाओं का बहुत ही गंभीर और पवित्र महत्व था। जब भी बौद्ध धर्म को मानने वाले किसी व्यक्ति की मृत्यु होती थी, तो उसकी आत्मा की शांति के लिए ये सफेद झंडे लगाए जाते थे। इस उद्देश्य के लिए लगभग एक सौ आठ सफेद झंडे लगाए जाते थे और उन पर कोई प्रार्थनाएँ मुद्रित नहीं होती थीं। दूसरी ओर, रंगबिरंगे प्रार्थना-पताकाओं को शुभ और आनंदमय अवसरों पर फहराया जाता था। इन रंगबिरंगे झंडों पर प्रार्थनाएँ छपी होती थीं ताकि जब भी हवा चले, तो ऐसा माना जाता था कि वे प्रार्थनाएँ चारों ओर फैल जाती हैं, जिससे आसपास के वातावरण में समृद्धि, खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस प्रकार, दोनों प्रकार के झंडों के अलग-अलग आध्यात्मिक अर्थ थे जो वहाँ के जनजीवन को दर्शाते थे।