अध्याय: पौधे को जानिए (Getting to Know Plants) - त्वरित पुनرीक्षण नोट्स
---
1. पौधों का वर्गीकरण (Classification of Plants)
पौधों को उनके आकार, ऊँचाई और तने के आधार पर मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
- शाक (Herbs):
- ये बहुत छोटे पौधे होते हैं।
- इनका तना हरा, कोमल और कमजोर होता है।
- उदाहरण: घास, टमाटर, धनिया, मेथी।
- झाड़ी (Shrubs):
- ये मध्यम आकार के पौधे होते हैं।
- इनका तना कठोर होता है लेकिन बहुत मोटा नहीं होता। इनकी शाखाएँ आधार (जमीन के पास) से ही निकलती हैं।
- उदाहरण: गुलाब, नींबू, गुड़हल।
- वृक्ष (Trees):
- ये बहुत बड़े और लंबे पौधे होते हैं।
- इनका तना बहुत मोटा, कठोर और भूरा होता है। इसमें मुख्य तना (तना-प्रकंद) होता है जिससे ऊपर, शाखाएँ निकलती हैं।
- उदाहरण: आम, नीम, बरगद, पीपल।
---
2. विशेष प्रकार के पौधे (Special Types of Plants)
- विसर्पी लताएँ (Creepers):
- वे पौधे जिनका तना कमज़ोर होता है और वे सीधे खड़े नहीं हो सकते, बल्कि जमीन पर फैल जाते हैं।
- उदाहरण: तरबूज, कद्दू, शकरकंद।
- ारोही लताएँ (Climbers):
- वे पौधे जिनका तना कमज़ोर होता है, लेकिन वे ऊपर चढ़ने के लिए किसी सहारे (दीवार या डंडे) की मदद लेते हैं।
- उदाहरण: मनी प्लांट, मटर, अंगूर, सेम की बेल।
---
3. पौधे के मुख्य भाग (Parts of a Plant)
एक सामान्य पौधे के दो प्रमुख भाग होते हैं:
1. मूल तंत्र (Root System): जमीन के नीचे का भाग (जड़ें)।
2. प्ररोह तंत्र (Shoot System): जमीन के ऊपर का भाग (तना, शाखाएँ, पत्तियाँ, फूल और फल)।
---
4. तना (Stem)
- यह पौधे का वह भाग है जो पत्तियों, फूलों और फलों को सहारा देता है।
- यह जड़ों द्वारा अवशोषित पानी और खनिजों को पत्तियों और अन्य भागों तक पहुँचाता है।
- भोजन का परिवहन भी तने के माध्यम से होता है।
---
5. पत्ती (Leaf)
पत्ती पौधे का वह हरा भाग है जो भोजन बनाने का कार्य करता है।
- पत्ती के मुख्य भाग:
- पर्णवृंत (Petiole): वह डंठल जिससे पत्ती तने से जुड़ी होती है।
- फलक (Lamina): पत्ती का चौड़ा, हरा और चपटा भाग।
- शिराएँ (Veins): पत्ती पर बनी हुई रेखाएँ या धारियाँ।
- पत्ती का शिराव्यास (Venation):
- जालिका रूपी (Reticulate): जब शिराएँ एक जाल जैसा डिज़ाइन बनाती हैं (जैसे - पीपल, गुड़हल, आम)।
- समांतर (Parallel): जब शिराएँ एक-दूसरे के समांतर होती हैं (जैसे - घास, मक्का, गेहूँ, धान)।
1. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis): पत्तियाँ सूर्य के प्रकाश, जल, कार्बन डाइऑक्साइड और क्लोरोफिल (हरे रंग का वर्णक) का उपयोग करके अपना भोजन (स्टार्च) बनाती हैं।
2. वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पत्तियों की सतह पर मौजूद सूक्ष्म छिद्रों (रंध्रों) द्वारा अतिरिक्त जल वाष्प के रूप में बाहर निकलता है।
---
6. जड़ (Root)
जड़ें पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाए रखती हैं और जल तथा खनिजों का अवशोषण करती हैं।
1. मूसला जड़ (Taproot):
- इसमें एक मुख्य लंबी जड़ होती है (प्राथमिक जड़) जिससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें (द्वितीयक जड़ें) निकलती हैं।
- उदाहरण: चना, मूली, गाजर, चुकंदर, आम।
- (नोट: मूसला जड़ वाले पौधों की पत्तियों में जालिका रूपी शिराव्यास होता है)।
2. झकड़ा जड़ या रेशेदार जड़ (Fibrous Root):
- इसमें कोई मुख्य जड़ नहीं होती। सभी जड़ें एक ही जगह से निकलती हैं और एक गुच्छे जैसी दिखती हैं।
- उदाहरण: घास, गेहूँ, मक्का, धान, प्याज।
- (नोट: रेशेदार जड़ वाले पौधों की पत्तियों में समांतर शिराव्यास होता है)।
---
7. फूल (Flower)
फूल पौधे का सबसे सुंदर और जनन अंग होता है।
- फूल के मुख्य भाग (बाहर से अंदर की ओर):
1. बाहुदल (Sepals): कली की अवस्था में फूल की रक्षा करने वाले हरे पत्ते जैसे भाग।
2. पंखुड़ी या दल (Petals): रंग-बिरंगे और आकर्षित करने वाले भाग जो कीटों को आकर्षित करते हैं।
3. पुंकेसर (Stamen): नर जनन अंग (इसमें परागकोश और तंतु होते हैं)।
4. स्त्रीकेसर (Pistil): मादा जनन अंग (इसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं)।