अध्याय: शरीर में गति (Body Movements) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स
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मुख्य परिभाषाएँ (Key Definitions)
1. संधि (Joint): वह स्थान जहाँ हमारे शरीर के दो हिस्से आपस में मिलते हैं, संधि कहलाता है। यह गति करने में मदद करता है।
2. कंकाल (Skeleton): शरीर की सभी हड्डियाँ मिलकर पूरे शरीर को एक सुंदर ढाँचा प्रदान करती हैं, जिसे कंकाल कहते हैं।
3. उपास्थि (Cartilage): कंकाल का वह अतिरिक्त भाग जो हड्डियों जितना कठोर नहीं होता और जिसे मोड़ा जा सकता है, उसे उपास्थि कहते हैं (जैसे कान का ऊपरी भाग)।
4. पेशी (Muscle): शरीर के ऊतक जो सिकुड़कर और फैलकर हड्डियों को गति प्रदान करते हैं, पेशी कहलाते हैं।
5. कंदुक-खलिका संधि (Ball and Socket Joint): वह संधि जिसमें एक हड्डी का गोल सिरा दूसरी हड्डी के कटोरीनुमा गर्त में फिट होता है (जैसे कंधे और कूल्हे की संधि)। यह सभी दिशाओं में गति की अनुमति देती है।
6. धुराग्र संधि (Pivotal Joint): वह संधि जो सिर और गर्दन को जोड़ती है। इसके कारण हम सिर को आगे-पीछे और दाएं-बाएं घुमा पाते हैं।
7. हिंज संधि (Hinged Joint): दरवाजे के कब्जे की तरह एक ही दिशा में गति देने वाली संधि (जैसे कोहनी और घुटने की संधि)।
8. अचल संधियाँ (Fixed Joints): वे संधियाँ जहाँ हड्डियाँ हिल-डुल नहीं सकतीं (जैसे ऊपरी जबड़े और खोपड़ी के बीच की संधि)।
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विभिन्न जीवों में गति (Movement in Different Animals)
1. केंचुआ (Earthworm):
- केंचुए में हड्डियाँ नहीं होतीं।
- इसके शरीर में पेशियाँ होती हैं जो शरीर को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं।
- यह शरीर के नीचे मौजूद सूक्ष्म रोमों (सुइयों जैसी संरचनाओं) की मदद से मिट्टी पर पकड़ बनाता है।
2. घोंगा (Snail):
- घोंगे के ऊपर एक बाहरी कवच होता है जिसे शंख कहते हैं। यह इसका कंकाल है, लेकिन यह हड्डियों से नहीं बना होता।
- यह एक पेशीय पाद (मस्कुलर फुट) की सहायता से चलता है।
3. तिलचट्टा (Cockroach):
- तिलचट्टा चल सकता है, उड़ सकता है और दीवारों पर चढ़ सकता है।
- इसमें तीन जोड़ी पैर (चलने के लिए) और दो जोड़ी पंख (उड़ने के लिए) होते हैं।
- इसका वक्ष भाग पेशियों से जुड़ा होता है जो पैरों और पंखों को गति देता है।
4. पक्षी (Birds):
- पक्षी हवा में उड़ते हैं और जमीन पर चलते हैं।
- इनकी हड्डियाँ खोखली और हल्की होती हैं ताकि उड़ने में आसानी हो।
- आगे के दोनों पैर रूपांतरित होकर पंख बनाते हैं। उड़ने के लिए वक्ष की पेशियाँ विशेष रूप से मजबूत होती हैं।
5. मछली (Fish):
- मछली का शरीर धारायौगिक (Streamlined) होता है, जिससे पानी को चीरने में आसानी होती है।
- यह शरीर के दोनों ओर एकांतर क्रम में वलय (लूप) बनाकर तैरती है और पूँछ की सहायता से दिशा बदलती है।
6. सांप (Snakes):
- सांप का मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) लंबा और लचीला होता है।
- यह शरीर को अनेक वलयों (छल्लों) में मोड़कर आगे की ओर धक्का देता हुआ सर्पी गति करता है।
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मुख्य बिंदु (Important Points to Remember)
- मानव शरीर की अस्थियों का ढाँचा कंकाल तंत्र कहलाता है।
- हमारा कंकाल खोपड़ी, मेरुदंड, पसलियों और कंधे व श्रोणि अस्थियों से मिलकर बनता है।
- अस्थियों को गति प्रदान करने के लिए दो पेशियों का संयुक्त रूप से सिकुड़ना और फैलना आवश्यक होता है।
- योग करने से हमारे शरीर की मांसपेशियाँ और हड्डियाँ मजबूत होती हैं तथा शरीर लचीला बनता है।