त्वरित पुनरावrevision नोट्स: जन्तुओं में पोषण (Nutrition in Animals)
कक्षा: 7
विषय: विज्ञान (MP Board)
---
अध्याय परिचय (Chapter Introduction)
इस अध्याय में हम यह अध्ययन करते हैं कि जन्तु अपना भोजन कैसे ग्रहण करते हैं, उनके शरीर में भोजन का उपयोग कैसे होता है, और अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन कैसे होता है।
---
मुख्य परिभाषाएँ (Key Definitions)
- पोषण (Nutrition): भोजन ग्रहण करने की विधि और शरीर द्वारा इसका उपयोग करने की प्रक्रिया को पोषण कहते हैं।
- प्राणि सम पोषण (Holozoic Nutrition): वह पोषण जिसमें जीव ठोस भोजन को सीधे अपने शरीर के अंदर ग्रहण करते हैं और उसका पाचन करते हैं।
- अंतर्ग्रहण (Ingestion): शरीर के अंदर भोजन को ग्रहण करने की प्रक्रिया को अंतर्ग्रहण कहते हैं।
- पाचन (Digestion): भोजन के जटिल घटकों का सरल पदार्थों में टूटना पाचन कहलाता है।
- अवशोषण (Absorption): पचे हुए भोजन का रुधिर (रक्त) में मिलने की प्रक्रिया अवशोषण कहलाती है।
- स्वांगीकरण (Assimilation): अवशोषण के बाद पचे हुए भोजन का शरीर की वृद्धि और ऊर्जा के लिए उपयोग होना स्वांगीकरण कहलाता है।
- क्षेपण / मलत्याग (Egestion): शरीर से अपच भोजन या अपशिष्ट पदार्थों का मल के रूप में बाहर निकलना क्षेपण कहलाता है।
- रोमंथन (Rumination): गाय, भैंस जैसे घास खाने वाले जंतुओं द्वारा पहले भोजन को जल्दी-जल्दी निगलना और फिर उसे वापस मुँह में लाकर धीरे-धीरे चबाने की प्रक्रिया को रोमंथन कहते हैं। ऐसे जंतु रोमंथी (Ruminants) कहलाते हैं।
---
मानव में पाचन तंत्र (Digestive System in Humans)
मानव का पाचन तंत्र आहार नाल (Alimentary Canal) और संबंधित ग्रंथियों से मिलकर बना होता है।
आहार नाल के मुख्य भाग:
1. मुँह एवं मुखगुहा (Mouth and Buccal Cavity): यहाँ से अंतर्ग्रहण होता है। लार ग्रंथि लार स्रावित करती है जो स्टार्च को शर्करा में बदलती है।
2. ग्रसिका / ग्रासनली (Oesophagus): निगला हुआ भोजन ग्रासनली से होता हुआ नीचे जाता है।
3. आमाशय (Stomach): यह एक मोटी भित्ति वाला थैला है। यहाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल $\text{(HCl)}$ और पाचक रस स्रावित होते हैं जो प्रोटीन का पाचन करते हैं।
4. क्षुद्रांत / छोटी आंत (Small Intestine): यह अत्यधिक कुंडलित होती है (लगभग 7.5 मीटर लंबी)। यहाँ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पूर्ण पाचन होता है।
5. बृहदांत / बड़ी आंत (Large Intestine): यह छोटी आंत की अपेक्षा चौड़ी और छोटी होती है (लगभग 1.5 मीटर)। यहाँ जल और कुछ लवणों का अवशोषण होता है।
6. गुदा (Anus): बचा हुआ अपशिष्ट यहाँ से मल के रूप में बाहर निकल जाता है।
---
मुख्य पाचक ग्रंथियाँ और उनके कार्य (Digestive Glands)
1. लार ग्रंथि (Salivary Gland): मुखगुहा में स्थित होती है। यह लार (Saliva) स्रावित करती है जो स्टार्च को सरल शर्करा में तोड़ती है।
2. यकृत (Liver): यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। यह पित्त रस (Bile Juice) स्रावित करती है जो पित्ताशय में संग्रहित होता है। यह वसा के पाचन में मदद करता है।
3. अग्न्याशय (Pancreas): यह एक बड़ी ग्रंथि है जो आमाशय के ठीक नीचे होती है। यह अग्न्यासिक रस स्रावित करती है जो कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन पर कार्य करता है और उन्हें सरल रूप में बदलता है।
---
घास खाने वाले जंतुओं में पाचन (Digestion in Grass-eating Animals)
- घास खाने वाले जंतु (जैसे गाय, भेड़) जल्दी-जल्दी घास निगल कर रुमेन (Rumen) नामक आमाशय के एक भाग में भंडारित कर लेते हैं।
- रुमेन में भोजन का आंशिक पाचन होता है जिसे जुगाड़ (Cud) कहते हैं।
- बाद में जुगाड़ छोटे पिंडों के रूप में पुनः मुँह में आता है और जंतु उसे धीरे-धीरे चबाते हैं। इस प्रक्रिया को रोमंथन कहते हैं।
- घास में सेल्युलोज (Cellulose) प्रचुर मात्रा में होता है, जो एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। इनके पास एक थैली जैसी संरचना होती है जिसे रूमांतिका (Rumen) और अंधनाल (Caecum) कहते हैं, जहाँ सेल्युलोज का पाचन करने वाले जीवाणु होते हैं (जो मनुष्यों में नहीं होते)।
---
अमीबा में पोषण और पाचन (Nutrition and Digestion in Amoeba)
- अमीबा एक सूक्ष्म एककोशिकीय जीव है जो तालाब के जल में पाया जाता है।
- इसकी कोशिका झिल्ली के आसपास अंगुली के समान प्रवर्ध बाहर निकलते रहते हैं जिन्हें पादप या कूटपाद (Pseudopodia) कहते हैं।
- अमीबा कूटपादों की सहायता से भोजन को पकड़ता है और खाद्य धानी (Food Vacuole) में फंसा लेता है।
- खाद्य धानी में ही पाचक रस स्रावित होते हैं जो भोजन को सरल पदार्थों में पचा देते हैं।
- पचा हुआ भोजन अवशोषित हो जाता है और अपच अपशिष्ट धानी द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
---
यह रिवीजन नोट्स छात्रों को परीक्षा की तैयारी में त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं।