कक्षा 7 विज्ञान - अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स
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### अवधारणा 1: अम्ल (Acids)
- परिभाषा: वे पदार्थ जो स्वाद में खट्टे होते हैं, अम्ल कहलाते हैं। यह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।
- प्रकृति: ये स्वभाव में संक्षारक (corrosive) होते हैं।
- प्राकृतिक अम्ल (Natural Acids):
- सिरका: एसिटिक अम्ल
- संतरा, नींबू: साइट्रिक अम्ल
- दही: लैक्टिक अम्ल
- इमली, अंगूर: टार्टरिक अम्ल
- चींटी का डंक: फॉर्मिक अम्ल
### अवधारणा 2: क्षारक (Bases)
- परिभाषा: वे पदार्थ जो स्वाद में कड़वे होते हैं और जिन्हें छूने पर साबुन जैसे चिकने महसूस होते हैं, क्षारक कहलाते हैं। यह लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।
- क्षार (Alkalis): जो क्षारक जल में घुलनशील होते हैं, उन्हें क्षार कहते हैं।
- प्रमुख उदाहरण:
- चूने का पानी: कैल्शम हाइड्रॉक्साइड
- साबुन: सोडियम हाइड्रॉक्साइड या पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड
- धोने का सोडा: सोडियम कार्बोनेट
### अवधारणा 3: सूचक (Indicators)
- परिभाषा: किसी विलयन के अम्लीय या क्षारकीय होने का परीक्षण करने के लिए जिन पदार्थों का उपयोग किया जाता है, उन्हें सूचक कहते हैं। सूचक अपना रंग बदलकर अम्लीय या क्षारकीय प्रकृति की सूचना देते हैं।
- प्रमुख सूचक:
1. लिटमस (Litmus): यह एक प्राकृतिक रंजक है जो लाइकेन से निकाला जाता है।
- अम्ल में: नीला लिटमस लाल हो जाता है।
- क्षारक में: लाल लिटमस नीला हो जाता है।
2. हल्दी (Turmeric): यह एक अन्य प्राकृतिक सूचक है।
- अम्लीय विलयन में: पीला रंग रहता है।
- क्षारक विलयन में: रंग लाल हो जाता है।
3. गुड़हल के फूल का रस:
- अम्लीय विलयन में: गहरा गुलाबी (मजेंटा) रंग देता है।
- क्षारक विलयन में: हरा रंग देता है।
4. फिनॉलथलीन (Phenolphthalein): यह एक कृत्रिम (संश्लेषित) सूचक है।
- अम्ल में: रंगहीन रहता है।
- क्षारक में: गुलाबी रंग हो जाता है।
### अवधारणा 4: उदासीनीकरण (Neutralisation)
- परिभाषा: जब किसी अम्ल और किसी क्षारक के बीच अभिक्रिया होती है, तो इसे उदासीनीकरण कहते हैं। इस प्रक्रिया में लवण (Salt) और जल (Water) बनते हैं और साथ ही ऊष्मा निर्मुक्त (उत्पन्न) होती है।
- अभिक्रिया का सामान्य रूप:
अम्ल + क्षारक -> लवण + जल (+ ऊष्मा)
- दैनिक जीवन में उदासीनीकरण के उदाहरण:
1. अपाच्य (Indigestion): हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल होता है। अधिक अम्ल बनने से अपच होती है, जिससे राहत पाने के लिए प्रतिअमल (Antacid) जैसे मिल्क ऑफ मैग्नेशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) का उपयोग किया जाता है।
2. चींटी का डंक: चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल होता है। इससे राहत पाने के लिए कैलामाइन विलयन (जिंक कार्बोनेट) या बेकिंग सोडा (मलने से) का उपयोग किया जाता है।
3. मृदा उपचार: रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी अम्लीय हो जाती है, जिसे उदासीन करने के लिए बिना बुझा हुआ चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) या बुझा हुआ चूना मिलाया जाता है।
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शुभकामनाएँ! कक्षा 7 की परीक्षा के लिए यह सारांश आपकी बहुत सहायता करेगा।