मुख्य सूत्र (Key Formulas)
अध्याय: नए राजा और उनके राज्य
#### त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)
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1. प्रमुख शब्द और परिभाषाएँ (Key Terms & Definitions)
- सामंत (Samantas): मध्यकाल में राजाओं द्वारा नियुक्त किए जाने वाले महासामंत या महामंडलेश्वर, जो राजा के अधीन होते थे और उनके लिए सैन्य सहायता व कर जुटाते थे।
- हिरण्य-गर्भ (Hiranya-garbha): 'सोने का गर्भ' नामक एक अनुष्ठान, जिसे ब्राह्मणों की सहायता से संपन्न किया जाता था। ऐसा माना जाता था कि इससे यजमान (राजा) का पुनर्जन्म क्षत्रिय के रूप में होता था, भले ही वह जन्म से क्षत्रिय न हो।
- उर (Ur): उत्तर-चोल काल में किसानों की बस्तियों को 'उर' कहा जाता था।
- नाडु (Nadu): गाँवों के बड़े समूहों को 'नाडु' कहा जाता था। न्याय करने और कर वसूलने जैसे कई कार्य 'नाडु' द्वारा किए जाते थे।
- ब्रह्मदेय (Brahmadeya): ब्राह्मणों को उपहार में दी जाने वाली भूमि को 'ब्रह्मदेय' कहा जाता था। इन जमीनों पर कर नहीं लगता था।
- नगरनार (Nagaram): व्यापारियों के संघ या संगठनों को 'नगरनार' कहा जाता था जो शहरों में व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित करते थे।
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2. सातवीं शताब्दी के बाद का उदय (Emergence of New Dynasties)
- सातवीं शताब्दी आते-आते उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में बड़े भूस्वामी और योद्धा सरदार सामने आए, जिन्हें राजाओं ने सामंत घोषित किया।
- जब ये सामंत शक्तिशाली और समृद्ध हो जाते थे, तब वे खुद को महामंडलेश्वर या महासामंत घोषित कर देते थे।
- उदाहरण के लिए, राष्ट्रकूट शुरू में कर्नाटक के चालुक्य राजाओं के अधीन थे। आठवीं शताब्दी के मध्य में, एक राष्ट्रकूट प्रधान दंतिदुर्ग ने अपने चालुक्य overlord (स्वामी) की अधीनता से इंकार कर दिया और 'हिरण्य-गर्भ' अनुष्ठान किया।
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3. प्रशासन और कर व्यवस्था (Administration and Taxation)
- संसाधन एकत्र करना: नए राजा अपने आप को शक्तिशाली साबित करने के लिए किसानों, पशुपालकों और व्यापारियों से संसाधन (कर के रूप में) इकट्ठा करते थे।
- विभिन्न प्रकार के कर: चोल साम्राज्य के अभिलेखों में 400 से अधिक प्रकार के करों का उल्लेख मिलता है। सबसे अधिक बार उल्लेखित कर 'वेटी' था, जो नगद के रूप में नहीं बल्कि जबरन श्रम (बेगार) के रूप में लिया जाता था। इसके अलावा फसल पर कर, घर पर कर, और ताड़ या नारियल के पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी के इस्तेमाल पर भी कर लगता था।
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4. प्रशस्तियाँ और भूमि अनुदान (Prashastis and Land Grants)
- प्रशस्तियाँ: इनमें ऐसे विवरण होते थे जो शायद पूरी तरह सत्य नहीं होते, लेकिन ये हमें यह बताते हैं कि शासक खुद को कैसा दिखाना चाहते थे (जैसे- महान योद्धा, विजेता आदि)।
- ब्रह्मदेय और दान: राजा अक्सर ब्राह्मणों को भूमि अनुदान में देते थे। इन अनुदानों का विवरण तांबे की प्लेटों पर लिखा जाता था जो भूमि पाने वाले को दी जाती थीं।
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5. युद्धों का मुख्य कारण: 'धन के लिए संघर्ष' (Warfare for Wealth)
- कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष (Tripartite Struggle):
- गंगा घाटी में स्थित कन्नौज शहर पर नियंत्रण के लिए सदियों से गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल राजवंशों के बीच संघर्ष चलता रहा। चूंकि इसमें तीन पक्ष शामिल थे, इसलिए इतिहासकारों ने इसे 'त्रिपक्षीय संघर्ष' कहा है।
- महमूद गज़नी (Mahmud of Ghazni):
- अफगानिस्तान के गज़नी का सुल्तान था जिसने 997 ईस्वी से 1030 ईस्वी तक शासन किया।
- उसने भारतीय उपमहाद्वीप के धनी मंदिरों (विशेषकर सोमनाथ मंदिर, गुजरात) को निशाना बनाया और लूटे गए धन का उपयोग गज़नी में एक शानदार राजधानी के निर्माण में किया।
- चाहमान या चौहान (Chahamanas/Chauhans):
- इन्होंने दिल्ली और अजमेर के आस-पास के क्षेत्र पर शासन किया।
- इनका सबसे प्रसिद्ध शासक पृथ्वीराज तृतीय (1168–1192) था, जिसने 1191 में तराइन के प्रथम युद्ध में अफगान शासक सुल्तान मोहम्मद गोरी को हराया, लेकिन 1192 में तराइन के द्वितीय युद्ध में वह गोरी से हार गया।
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6. चोल साम्राज्य (The Cholas: 9वीं से 13वीं शताब्दी)
- उदय: तंजावुर के पास छोटे से मुखिया परिवार (मत्तैयार) की सत्ता थी। विजयालय ने नौवीं शताब्दी के मध्य में इस डेल्टा पर कब्जा कर लिया और तंजावुर शहर तथा निकुम्भासुरी देवी का मंदिर बनवाया।
- राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम: चोल साम्राज्य का विस्तार इन दोनों महान शासकों के समय सबसे अधिक हुआ। राजराज प्रथम ने नौसेना का विकास किया और श्रीलंका तथा मालदीव पर आक्रमण किया।
- भवन और वास्तुकला:
- तंजावुर का राजराजेश्वर मंदिर और गंगईकोंडचोलपुरम का बृहदेश्वर मंदिर अपनी वास्तुकला और मूर्तिकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इनका निर्माण चोल राजाओं ने करवाया था।
- कृषि और सिंचाई:
- कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिलने से पहले कई शाखाओं में बंट जाती है। इन शाखाओं से बड़े पैमाने पर सिंचाई होती थी।
- पाँचवीं या छठी शताब्दी में कावेरी के डेल्टा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खेती की शुरुआत हुई।
- चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली (Local Administration):
- गाँवों के नियंत्रण के बारे में उत्तर मेरूर (तमिलनाडु) से प्राप्त अभिलेखों से विस्तृत जानकारी मिलती है।
- सभा (ब्राह्मणों की सभा) की सदस्यता के लिए लॉटरी प्रणाली (कुरावै) का उपयोग किया जाता था, जिसमें योग्य उम्मीदवारों के नाम ताड़ के पत्तों की पर्चियों पर लिखकर एक डिब्बे में डाले जाते थे और एक छोटे बच्चे से पर्ची निकलवाई जाती थी।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 नए राजा और उनके राज्य
नए राजवंशों का उदय
सातवीं शताब्दी के बाद का काल
उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में बड़े भूस्वामी और योद्धाओं की सत्ता
सामंतों का उदय (महासामंत, महामंडलेश्वर)
राष्ट्रकूट राजवंश (दक्कन क्षेत्र)
साम्राज्य प्रशासन और कर प्रणाली
राजाओं द्वारा अपनी स्थिति मजबूत करना
'महाधिराज' और 'त्रिभुवन-चक्रवर्तिन्' जैसी उपाधियाँ
कृषि, व्यापार और शिल्प से संसाधन जुटाना
विभिन्न प्रकार के कर (चार सौ से अधिक कर, जैसे 'कदमाई')
प्रशस्ति और भूमि अनुदान
ब्राह्मणों द्वारा रचित प्रशस्तियाँ
राजाओं की वीरता और उपलब्धियों का वर्णन
ताम्रपत्रों पर लिखित भूमि अनुदान
कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष
गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल राजवंशों के बीच संघर्ष
नियंत्रण का मुख्य केंद्र: कन्नौज (गंगा घाटी का समृद्ध नगर)
तीनों पक्षों द्वारा आपस में लंबी लड़ाई
महमूद गज़नी और मुहम्मद गोरी के आक्रमण
महमूद गज़नी (ग़ज़नवी, अफ़ग़ानिस्तान)
भारतीय उपमहाद्वीप पर बार-बार आक्रमण
धन और मंदिरों को निशाना बनाना (सोमनाथ मंदिर, गुजरात)
विद्वान अल-बेरूनी द्वारा 'किताब-ए-हिंद' की रचना
मुहम्मद गोरी (शहाबुद्दीन मुहम्मद)
चौहान राजाओं के साथ संघर्ष
तराइन का युद्ध (1191 और 1192 ईस्वी)
चोल साम्राज्य (दक्षिण भारत)
उदय और विस्तार
उरैयर से तंजावुर तक का सफर
विजयालय द्वारा चोल वंश की पुनर्स्थापना
राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम का शक्तिशाली शासन
वास्तुकला और मंदिर निर्माण
तंजावुर का राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर
गंगायकोंडचोलपुरम का मंदिर
कांस्य मूर्तिकला (चोल कांस्य मूर्तियाँ उत्कृष्ट)
कृषि और सिंचाई
कावेरी नदी के डेल्टा क्षेत्र का विकास
नहरें, कुएँ और टैंकों का निर्माण
स्थानीय प्रशासन (सभा और उर)
गाँवों के स्वायत्त शासी संगठन
नाडु (गाँवों के समूह) की व्यवस्था
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): महमूद गज़नी ने अपने द्वारा लूटे गए धन का एक बड़ा हिस्सा गज़नी में एक भव्य राजधानी शहर बनाने, कलाकारों, कवियों को संरक्षण देने और पुस्तकालयों व मस्जिदों के निर्माण में उपयोग किया।
उत्तर (Answer): योग्य सदस्यों के नाम कागज की छोटी पर्चियों पर लिखे जाते थे, उन्हें एक मिट्टी के बर्तन में डाला जाता था, और एक छोटे लड़के से प्रत्येक समिति के लिए एक-एक करके पर्चियां बाहर निकालने के लिए कहा जाता था।
उत्तर (Answer): गांवों के समूहों ने 'नाडु' नामक बड़ी इकाइयां बनाईं। ग्राम परिषदों और नाडु ने न्याय देने और कर एकत्र करने सहित कई प्रशासनिक कार्य किए।
उत्तर (Answer): चोलों ने त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग नहीं लिया था। कन्नौज पर नियंत्रण के लिए संघर्ष में शामिल तीन राजवंश गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल राजवंश थे।
उत्तर (Answer): चोल मंदिर की दीवारों पर पाए जाने वाले शिलालेख अक्सर विस्तृत प्रशासनिक निर्देश प्रदान करते थे, जिसमें यह शामिल था कि सभाओं का आयोजन कैसे किया जाता था, समितियों के सदस्य बनने के लिए कौन पात्र था, और दिए गए अनुदानों का रिकॉर्ड।
उत्तर (Answer): उरैयूर वर्तमान तमिलनाडु में स्थित है। नौवीं शताब्दी में, मुत्तरैयार ने कावेरी डेल्टा में सत्ता संभाली थी, और उरैयूर के चोलों के प्राचीन राजपरिवार से संबंधित विजयालय ने उनसे डेल्टा पर अधिकार कर लिया था।
उत्तर (Answer): व्यापारियों के संघों को 'नगरम' के रूप में जाना जाता था। किसानों की बस्तियां, जिन्हें 'उर' और 'नाडु' कहा जाता था, कृषि सिंचाई के प्रसार के साथ समृद्ध हुईं, और नगरम अक्सर प्रशासनिक केंद्रों के रूप में कार्य करते थे।
उत्तर (Answer): महा-मंडलेश्वर का अर्थ 'एक मंडल या क्षेत्र का महान स्वामी' था। अधीनस्थ प्रमुख या सामंत अक्सर खुद को महा-मंडलेश्वर घोषित कर देते थे जब वे अपने स्वामियों से शक्ति और धन प्राप्त कर लेते थे।
उत्तर (Answer): Kanauj on the Ganga river was the prize in the 'tripartite struggle' between the Gurjara-Pratihara, Rashtrakuta, and Pala dynasties, as rulers who controlled Kanauj also controlled the upper Ganga valley.
उत्तर (Answer): कल्हण ने 'राजतरंगिणी' लिखी। अन्य लेखकों के विपरीत, वह अक्सर शासकों और उनकी नीतियों के प्रति आलोचनात्मक रहता था, तथा उसने शिलालेखों, दस्तावेजों, प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण और पहले के इतिहास सहित विभिन्न स्रोतों का उपयोग किया।
उत्तर (Answer): ब्रह्मदेय ब्राह्मणों को उपहार में दी गई भूमि थी। ये भूमि राजा द्वारा वसूले जाने वाले भू-राजस्व और अन्य करों से मुक्त होती थी, और प्रमुख ब्राह्मण भूस्वामियों की एक सभा द्वारा इनकी देखभाल की जाती थी।
उत्तर (Answer): 'वेत्ती' उस जबरन श्रम के लिए प्रयुक्त शब्द था जिसे कर के रूप में लिया जाता था, साथ ही 'कदमाई' (भू-राजस्व) भी था। हालांकि नकद कर आम थे, लेकिन अवैतनिक श्रम राजस्व वसूली का एक महत्वपूर्ण तरीका था।
उत्तर (Answer): राजराज प्रथम के पुत्र राजेंद्र प्रथम ने अपने पिता की नीतियों को आगे बढ़ाया और गंगा घाटी, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों पर आक्रमण किया, तथा इन अभियानों के लिए एक नौसेना का विकास किया।
उत्तर (Answer): विजयालय ने चोल परिवार को पुनर्जीवित किया और तंझावुर शहर तथा देवी निशुंभसूदनी के लिए एक मंदिर का निर्माण किया। बाद में, उसके उत्तराधिकारी राजराज प्रथम ने वहाँ प्रसिद्ध राजराजेश्वर मंदिर का निर्माण कराया।
उत्तर (Answer): 'किताब-अल-हिंद' अल-बेरूनी द्वारा लिखी गई थी। उन्हें सुल्तान महमूद गज़नी द्वारा उपमहाद्वीप का लेखा-जोखा तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था, और उन्होंने इस कार्य को तैयार करने के लिए संस्कृत विद्वानों से परामर्श किया था।