लेखक: विजय तेंदुलकर (मराठी नाटक का हिंदी अनुवाद)
विधा: नाटक (एकांकी)
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'पापा खो गए' एक प्रसिद्ध बाल नाटक है। इस नाटक में निर्जीव वस्तुओं (बिजली का खंभा, पेड़, लेटरबक्स) और एक पक्षी (कौआ) को आपस में इंसानों की तरह बातें करते हुए दिखाया गया है। ये सभी मिलकर एक छोटी बच्ची को एक दुष्ट अपहरणकर्ता (बच्चों को चुराने वाले) से बचाते हैं और उसे उसके घर पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
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1. पेड़: दयालु, परोपकारी और संवेदनशील स्वभाव का।
2. बिजली का खंभा: शुरुआत में घमंडी लेकिन बाद में पेड़ का सच्चा मित्र और मददगार।
3. लेटरबक्स: 'लाल ताऊ' के नाम से प्रसिद्ध, पढ़ा-लिखा, सामाजिक और नीरस समय में गाने वाला।
4. कौआ: चतुर, चालाक और स्थिति को जल्दी समझने वाला।
5. छोटी लड़की: मासूम, डरी हुई बच्ची जिसे अपने घर का पता नहीं मालूम।
6. दुष्ट आदमी: बच्चों का अपहरण करने वाला अपराधी।
7. पोस्टर वाली लड़की (नचनिया): पोस्टर पर छपी नृत्य करने वाली आकृति।
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| शब्द | अर्थ |
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| गश्त | पहरा देना / घूमना |
| भंगिमा | शारीरिक मुद्रा / रूप |
| कर्कश | कठोर या कड़वी आवाज़ |
| फ़ोगट | मुफ़्त का / बिना मूल्य का |
| तातशाह | तानाशाही / मनमानी |
| आफत | मुसीबत / विपत्ति |
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उत्तर: लेटरबक्स को 'लाल ताऊ' कहा गया है क्योंकि उसका पूरा रंग लाल था और वह बड़ों की तरह समझदारी भरी बातें करता था।
उत्तर: एक रात आए भीषण तूफान में खंभा उखड़कर पेड़ पर गिर पड़ा था। पेड़ ने स्वयं झेलकर खंभे को नीचे नहीं गिरने दिया। इस घटना के बाद दोनों में गहरी दोस्ती हो गई।
उत्तर:
1. दुष्ट आदमी के आने पर खंभा टेढ़ा हो गया और कौआ चिल्लाने लगा कि 'भूत आ गया'।
2. दुष्ट आदमी डरकर भाग गया।
3. बच्ची को उसके घर पहुँचाने के लिए कौवे ने चिल्लाने और लेटरबक्स ने पोस्टर लगाने की योजना बनाई।
उत्तर: बच्ची बहुत छोटी और नादान थी। उसे केवल अपने घर का नाम 'घर' और पापा का नाम 'पापा' ही मालूम था।
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1. एकता की शक्ति: जब सब मिलकर प्रयास करते हैं, तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
2. संवेदनशीलता और परोपकार: निर्जीव वस्तुएँ भी इंसानियत और दया का भाव दिखा सकती हैं।
3. सामाजिक जागरूकता: बच्चों के अपहरण जैसी घटनाओं के प्रति समाज को सतर्क और मददगार होना चाहिए।