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ऐसी संख्या जिसे p/q के रूप में व्यक्त किया जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक (Integers) हैं तथा q ≠ 0 हो, उसे परिमेय संख्या कहते हैं।
2/3, -5/7, 0 (क्योंकि 0 = 0/1), 4 (क्योंकि 4 = 4/1)q = 0 हो (जैसे 5/0), तो वह संख्या परिभाषित नहीं है।---
#### (i) संवृत गुण (Closure Property)
a/b + c/d = परिमेय संख्या
a/b - c/d = परिमेय संख्या
a/b * c/d = परिमेय संख्या
(शून्य से भाग परिभाषित नहीं है, इसलिए भाग के अंतर्गत संवृत नहीं है)
#### (ii) क्रमविनिमेयता (Commutativity)
a + b = b + a (लागू होता है)a - b ≠ b - a (लागू नहीं होता)a b = b a (लागू होता है)a ÷ b ≠ b ÷ a (लागू नहीं होता)#### (iii) साहचर्यता (Associativity)
a + (b + c) = (a + b) + c (लागू होता है)a - (b - c) ≠ (a - b) - c (लागू नहीं होता)a (b c) = (a b) c (लागू होता है)a ÷ (b ÷ c) ≠ (a ÷ b) ÷ c (लागू नहीं होता)#### (iv) वितरकता का नियम (Distributive Law)
a (b + c) = (a b) + (a * c)a (b - c) = (a b) - (a * c)---
0 (शून्य)किसी भी परिमेय संख्या में 0 जोड़ने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
a/b + 0 = 0 + a/b = a/b
1 (एक)किसी भी परिमेय संख्या में 1 से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
a/b 1 = 1 a/b = a/b
किसी परिमेय संख्या a/b का योज्य प्रतिलोम -a/b होता है।
a/b + (-a/b) = 0
उदाहरण: 3/5 का योज्य प्रतिलोम -3/5 है।
किसी परिमेय संख्या a/b का गुणात्मक प्रतिलोम b/a होता है।
a/b * b/a = 1
उदाहरण: 4/7 का गुणात्मक प्रतिलोम 7/4 है।
विशेष नियम: 0 का कोई गुणात्मक प्रतिलोम (व्युत्क्रम) नहीं होता है।
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1. समान हर वाली परिमेय संख्याओं का योग/अंतर:
a/c + b/c = (a + b) / c
a/c - b/c = (a - b) / c
2. असमान हर वाली परिमेय संख्याओं का योग/अंतर:
हरों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) निकालकर हर समान करें।
3. परिमेय संख्याओं का गुणन:
a/b c/d = (a c) / (b d) (अंश × अंश / हर × हर)*
4. परिमेय संख्याओं का भाग:
a/b ÷ c/d = a/b d/c = (a d) / (b * c)
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#### विधियाँ:
1. माध्य विधि (Mean Method):
यदि a और b दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो उनके बीच की संख्या = (a + b) / 2 होगी।
2. समान हर बनाकर (Equalizing Denominator):
10/10, 6/6) से गुणा करें।---
1 का व्युत्क्रम 1 तथा -1 का व्युत्क्रम -1 होता है।0 एक ऐसी परिमेय संख्या है जिसका कोई व्युत्क्रम नहीं होता।0 स्वयं का योज्य प्रतिलोम है।