अध्याय: प्रकाश (Light) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)
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1. प्रकाश क्या है? (What is Light?)
प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है जो हमें वस्तुओं को देखने में सहायता करता है। यह हमेशा एक सरल रेखा में गमन करता है।
2. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
जब प्रकाश की किरण किसी चमकदार या पॉलिश की गई सतह पर पड़ती है, तो वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
- आपतित किरण (Incident Ray): जो प्रकाश किरण सतह पर आती है।
- परावर्तित किरण (Reflected Ray): जो किरण सतह से टकराकर वापस लौटती है।
- अभिलंब (Normal): परावर्तक पृष्ठ के 90 डिग्री (लंबवत) खींची गई रेखा।
- आपतन कोण (Angle of Incidence - i): आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
- परावर्तन कोण (Angle of Reflection - r): परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
3. परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)
परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं:
1. प्रथम नियम: आपतन कोण (i) सदैव परार्तन कोण (r) के बराबर होता है।
2. द्वितीय नियम: आपतित किरण, अभिलंब और परावर्तित किरण, तीनों एक ही तल (Plane) में होते हैं।
4. परावर्तन के प्रकार (Types of Reflection)
- नियमित परावर्तन (Regular Reflection): जब समांतर प्रकाश किरणें किसी चिकनी और चमकदार सतह (जैसे समतल दर्पण) से टकराकर समांतर ही रहती हैं। इससे स्पष्ट प्रतिबिंब बनता है।
- विसरित या अनियमित परावर्तन (Diffused / Irregular Reflection): जब समांतर प्रकाश किरणें खुरदरी सतह (जैसे गत्ता, दीवार) से टकराकर विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं। इसे खुरदरी सतहों का परावर्तन कहते हैं।
5. समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की विशेषताएँ (Characteristics of Image formed by Plane Mirror)
- प्रतिबिंब आभासी (Virtual) और सीधा (Erect) होता है।
- प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बिल्कुल बराबर होता है।
- दर्पण के पीछे प्रतिबिंब उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है।
- पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion): प्रतिबिंब में वस्तु का बायां भाग दायां और दायां भाग बायां दिखाई देता है (जैसे एम्बुलेंस पर लिखा शब्द)।
6. बहुविध प्रतिबिंब (Multiple Images)
जब दो समतल दर्पणों को किसी कोण पर रखा जाता है, तो वे एक से अधिक प्रतिबिंब बनाते हैं।
- सूत्र: यदि दो दर्पणों के बीच का कोण
θ (थीटा) है, तो बनने वाले प्रतिबिंबों की संख्या का सामान्य सूत्र है:
- प्रतिबिंबों की संख्या
(n) = (360° / θ) - 1 (यदि 360/θ एक सम संख्या है)।
- कлейडोस्कोप (Kaleidoscope): यह बहुविध परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें सुंदर पैटर्न (आकृतियाँ) बनते हैं।
7. सूर्य का प्रकाश - श्वेत या रंगीन? (Sunlight - White or Colored?)
- सूर्य का प्रकाश देखने में सफेद प्रतीत होता है, वास्तव में इसमें सात रंग होते हैं।
- विक्षेपण (Dispersion): प्रकाश का अपने सात घटकों (रंगों) में विभाजित होना विक्षेपण कहलाता है (उदाहरण: इंद्रधनुष)।
- सात रंगों का क्रम याद रखने की ट्रिक: बैं-आ-नी-पी-हा-ना-ला (बैंगनी, आसमानी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल)। इसे अंग्रेजी में VIBGYOR कहते हैं।
8. मानव नेत्र की संरचना (Structure of Human Eye)
मानव नेत्र हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रियों में से एक है। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
- कॉर्निया (Cornea): नेत्र के सामने का पारदर्शी भाग, जो प्रकाश को अंदर जाने देता है।
- परितारिका (Iris): यह कॉर्निया के पीछे रंगीन भाग होता है जो पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।
- पुतली (Pupil): यह नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। (तेज प्रकाश में छोटी, अंधेरे में बड़ी हो जाती है)।
- नेत्र लेंस (Eye Lens): यह एक उत्तल लेंस होता है जो रेटिना पर वस्तु का प्रतिबिंब बनाता है।
- दृष्टि पटल (Retina): यह वह पर्दा है जिस पर वस्तु का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है। रेटिना पर दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं:
1. शंकु (Cones): तीव्र प्रकाश और रंगों के लिए सुग्राही (Sensitive)।
2. शलाकाएं (Rods): मंद प्रकाश के लिए सुग्राही।
9. नेत्रों की देखभाल (Care of the Eyes)
- आंखों के लिए बहुत कम या बहुत अधिक प्रकाश हानिकारक है।
- कभी भी सूर्य या शक्तिशाली टॉर्च को सीधे नहीं देखना चाहिए।
- अपनी आँखों को गंदे पानी से न धोएँ और समय पर डॉक्टर से जाँच कराएं।
- आहार में विटामिन 'ए' (जैसे गाजर, हरी सब्जियाँ, पपीता) की कमी से रतौंधी (Night Blindness) रोग हो सकता है।
10. चाक्षुक विकृतियों वाले व्यक्तियों के लिए पठन-पाठन (Braille System)
- जो व्यक्ति देख नहीं सकते, वे स्पर्श द्वारा पढ़ने और लिखने की ब्रेल पद्धति (Braille System) का उपयोग करते हैं।
- इसके आविष्कारक लुई ब्रेल (Louis Braille) थे।
- इस पद्धति में 6 बिंदुओं पर आधारित उभरे हुए पैटर्न होते हैं जिन्हें उंगलियों से छूकर पहचाना जाता है।