अध्याय: संसद और कानून का निर्माण
#### त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)
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मुख्य अवधारणाएँ और परिभाषाएँ (Key Concepts and Definitions)
- संसद (Parliament): भारत की संसद देश का सर्वोच्च विधायिका (कानून बनाने वाला) निकाय है। इसमें राष्ट्रपति, लोकसभा (निचला सदन) और राज्यसभा (उच्च सदन) शामिल होते हैं।
- प्रतिनिधि लोकतंत्र (Representative Democracy): वह शासन प्रणाली जिसमें जनता सीधे शासन करने के बजाय अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन चलाती है।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise): इसके अंतर्गत देश के सभी वयस्क नागरिकों (बिना किसी जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के भेदभाव के) को वोट देने का अधिकार होता है।
- सहमति का विचार (Idea of Consent): लोकतंत्र का केंद्रीय विचार यह होता है कि नागरिक ही सबसे महत्वपूर्ण है और संस्थागत लोकतंत्र में नागरिक की सहमति ही सरकार की ताकत का आधार होती है।
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संसद के अंग (Organs of Parliament)
भारतीय संसद के तीन प्रमुख अंग हैं:
1. राष्ट्रपति (President): संसद का अभिन्न अंग। कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बनता जब तक राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर नहीं कर देते।
2. लोकसभा (Lok Sabha / House of the People):
- इसे 'निचला सदन' (Lower House) या जनता का सदन कहा जाता है।
- इसके सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा होता है।
- अधिकतम सदस्य संख्या: 550 निर्धारित है।
3. राज्यसभा (Rajya Sabha / Council of States):
- इसे 'उच्च सदन' (Upper House) कहा जाता है।
- यह राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
- अधिकतम सदस्य संख्या: 250 होती है (इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत किए जाते हैं)।
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संसद की मुख्य भूमिकाएँ और कार्य (Functions of Parliament)
1. राष्ट्रीय सरकार का चुनाव करना (To Select the National Government):
- लोकसभा चुनाव के बाद जिस दल या गठबंधन के पास बहुमत होता है, वह सरकार बनाता है।
- प्रधानमंत्री सत्तारूढ़ दल का प्रमुख होता है, जो मंत्रियों का चयन करता है।
2. सरकार को नियंत्रित करना, उसका मार्गदर्शन करना और जानकारी देना (To Control, Guide and Inform the Government):
- प्रश्नकाल (Question Hour): यह संसद की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है जिसके माध्यम से सांसद सरकार के कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं और कमियों को उजागर करते हैं।
3. कानून बनाना (Law Making):
- देश के लिए नए कानून बनाना और पुराने कानूनों में संशोधन करना संसद का मुख्य कार्य है।
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कानून कैसे बनता है? (Law Making Process)
कानून निर्माण की प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
1. विधेयक (Bill): कानून का प्रस्ताव ही 'विधेयक' कहलाता है। यह दो प्रकार के होते हैं:
- साधारण विधेयक (Ordinary Bill)
- धन विधेयक (Money Bill)
2. संसद के सदनों में प्रस्तुतीकरण: कोई भी विधेयक लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाता है।
3. चर्चा और मतदान: विधेयक के प्रत्येक प्रावधान पर गहन चर्चा होती है और मतदान होता है।
4. दूसरा सदन: एक सदन से पास होने के बाद विधेयक को दूसरे सदन में भेजा जाता है, जहाँ यही प्रक्रिया दोहराई जाती है।
5. राष्ट्रपति की स्वीकृति: दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है।
6. कानून का रूप: राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही वह विधेयक एक कानून (Act) बन जाता है।
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अलोकप्रिय और विवादास्पद कानून (Unpopular and Controversial Laws)
- कभी-कभार संसद ऐसे कानून पारित कर सकती है जो वैध होने के बावजूद जनता में अलोकप्रिय या विवादास्पद हो जाते हैं।
- यदि कोई कानून असंवैधानिक है या नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है, तो जनता उसका विरोध कर सकती है, मीडिया में आवाज़ उठा सकती है और अंततः न्यायपालिका (Court) उस कानून को रद्द या उसमें संशोधन कर सकती है।