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1. खाद्य संसाधनों में सुधार की आवश्यकता:
भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है, इसलिए भोजन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए फसल उत्पादन और पशुधन (livestock) दोनों को बढ़ाना आवश्यक है।
2. फसल उत्पादन की किस्में (Crop Variety Improvement):
अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करके फसल की पैदावार बढ़ाना। इसे संकरण (Hybridization) द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
3. फसल उत्पादन प्रबंधन (Crop Production Management):
फसलों की अच्छी वृद्धि और विकास के लिए किसानों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीके। इसमें तीन मुख्य चरण शामिल हैं:
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पौधों को अपनी वृद्धि के लिए विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। कुल 17 पोषक तत्व पौधों को आवश्यक होते हैं।
1. बृहत् पोषक तत्व (Macronutrients):
इनकी आवश्यकता पौधों को अधिक मात्रा में होती है।
2. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients):
इनकी आवश्यकता पौधों को बहुत कम मात्रा में होती है।
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| गुण | खाद (Manure) | उर्वरक (Fertilizers) |
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| स्रोत | यह पौधों और जंतुओं के अपशिष्ट (गोबर, कचरा आदि) के अपघटन से बनती है। | यह रासायनिक कारखानों में तैयार अकार्बनिक यौगिक हैं। |
| पोषक तत्व | इसमें सभी पोषक तत्व कम मात्रा में होते हैं, लेकिन यह मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारती है। | यह विशिष्ट पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस) से भरपूर होते हैं। |
| मिट्टी के लिए | यह ह्यूमस प्रदान करती है और जल धारण क्षमता बढ़ाती है। | इसका अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता और सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुँचा सकता है। |
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1. सिंचाई (Irrigation):
फसलों को समय पर पानी देना सिंचाई कहलाता है। भारत में सिंचाई के मुख्य स्रोत कुएँ, नलकूप, तालाब, नहरे और नदियाँ हैं।
2. फसल उगाने के तरीके (Cropping Patterns):
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खेतों में फसलों को खरपतवार (weeds), कीटों (insects/pests) और रोगों से बचाना आवश्यक है।
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पशुधन का वैज्ञानिक प्रबंधन पशुपालन कहलाता है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
1. पशुओं की नस्ल सुधार (Cattle Farming):
2. कुक्कुट पालन (Poultry Farming):
अंडे और मांस के उत्पादन के लिए मुर्गी पालन।
3. मछली उत्पादन (Fish Production / Pisciculture):
4. मधुमक्खी पालन (Apiculture):
शहद और मोम के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों को पालना। (जैसे - एपिस सेरेना इंडिका)।