अध्याय: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी
#### कक्षा: ९ (सामाजिक विज्ञान - भूगोल)
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१. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)
- प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation): इसका अर्थ है कि पौधे का वह भाग जो मनुष्य की सहायता के बिना अपने आप उगता है और लंबे समय तक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, सुरक्षित रहता है। इसे 'अक्षत वनस्पति' (Virgin Vegetation) भी कहते हैं।
- वन (Forest): अत्यधिक बड़े क्षेत्र में फैले हुए पेड़-पौधे, झाड़ियाँ और घास जो प्राकृतिक रूप से उगते हैं और पर्यावरण का संतुलन बनाते हैं, वन कहलाते हैं।
- देशज पौधे (Endemic Species): वे पौधे जो मूल रूप से भारतीय हैं, उन्हें 'देशज' कहते हैं। लेकिन जो पौधे भारत से बाहर से आए हैं, उन्हें 'विदेशज' (Exotic Plants) कहा जाता है।
- वन्य प्राणी अभयारण्य (Wildlife Sanctuary): वह क्षेत्र जहाँ वन्य जीवों को शिकार से सुरक्षा और अनुकूल वातावरण प्रदान किया जाता है। यहाँ मानवीय गतिविधियों जैसे चराई आदि की अनुमति कुछ शर्तों के साथ होती है।
- राष्ट्रीय पार्क (National Park): यह एक ऐसा आरक्षित क्षेत्र होता है जहाँ वन्य जीव स्वतंत्र रूप से प्राकृतिक आवास और संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। यहाँ मानवीय गतिविधियों और चराई पर पूर्ण प्रतिबंध होता है।
- जीवमंडल नीचे (Biosphere Reserve): यह एक विशाल संरक्षित क्षेत्र होता है जो पौधों, जीवों और आनुवंशिक विविधता की रक्षा के लिए बनाया जाता है, जिसमें पारंपरिक जीवन शैली जीने वाले स्थानीय लोग भी शामिल हो सकते हैं।
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२. प्राकृतिक वनस्पति को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Natural Vegetation)
प्राकृतिक वनस्पति का वितरण मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
- धरातल (Relief):
- भूमि: उपजाऊ भूमि पर कृषि की जाती है, जबकि उबड़-खाबड़ और ऊँचे भागों में जंगल और घास के मैदान होते हैं।
- मिट्टी: अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, जो विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों का आधार बनती है (जैसे- मरुस्थलीय मिट्टी में कटीली झाड़ियाँ)।
- जलवायु (Climate):
- तापमान: तापमान और हवा की नमी (आर्द्रता) मिलकर वनस्पतियों के प्रकार और उनकी वृद्धि को निर्धारित करते हैं।
- वर्षा (Precipitation): अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सघन वन और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कटीली झाड़ियाँ पाई जाती हैं।
- प्रकाश (Sunlight): सूर्य के प्रकाश की अवधि (धूप) के कारण पौधे तेजी से बढ़ते हैं (विशेषकर गर्मियों में)।
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३. भारत में वनों के प्रकार (Types of Forests in India)
भारत की जलवायु और धरातल में भिन्नता के कारण यहाँ निम्नलिखित पाँच प्रमुख प्रकार के वन पाए जाते हैं:
#### क. उष्णकटिबंधीय वर्षा वन (Tropical Evergreen Forests)
- वर्षा: २०० सेंटीमीटर से अधिक।
- क्षेत्र: पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम के ऊपरी भाग और तमिलनाडु के तट।
- प्रमुख वृक्ष: महोगनी, एबनी, रोजवुड, रबर और सिनकोना।
- विशेषता: ये वन वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं क्योंकि यहाँ पेड़ों के पत्ते गिराने का कोई निश्चित समय नहीं होता।
#### ख. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests) - (मानसूनी वन)
- वर्षा: ७० सेंटीमीटर से २०० सेंटीमीटर के बीच।
- क्षेत्र: भारत के सबसे बड़े क्षेत्र में फैले हुए वन (मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ आदि)।
- प्रमुख वृक्ष: सागौन (Teak), साल, पीपल, नीम और शीशम।
- विशेषता: ये वन वर्ष में एक बार (विशेषकर शुष्क ग्रीष्म ऋतु में) लगभग ६ से ८ सप्ताह के लिए अपने पत्ते गिरा देते हैं। इन्हें आगे दो भागों में बाँटा जाता है: आर्द्र पर्णपाती और शुष्क पर्णपाती।
#### ग. कटीले वन तथा झाड़ियाँ (Thorn Forests and Scrubs)
- वर्षा: ७० सेंटीमीटर से कम।
- क्षेत्र: उत्तर-पश्चिम भारत (राजस्थान, गुजरात, हरियाणा) तथा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश के अर्ध-शुष्क क्षेत्र।
- प्रमुख वृक्ष: बबूल, कीकर, खजूर, बेर और नागफनी (Cactus)।
- विशेषता: यहाँ पेड़-पौधों की पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन को रोकने के लिए छोटी और कँटीली (काँटों में बदली हुई) होती हैं तथा जड़ें पानी की तलाश में बहुत गहरी जाती हैं।
#### घ. पर्वतीय वन (Montane Forests)
- क्षेत्र: पर्वतीय क्षेत्रों में (जहाँ तापमान की कमी के साथ प्राकृतिक वनस्पति में बदलाव आता है)।
- प्रमुख वृक्ष: चीड़, पाइन, देवदार, सिल्वर फर, स्प्रूस और लॉरेल।
- विशेषता: ऊँचाई के साथ इन वनों के प्रकार बदलते हैं। अधिक ऊँचाई पर अल्पाइन वन और ट्यूंड्रा वन (जैसे काई और लाइकेन) पाए जाते हैं।
#### ङ. मैंग्रोव वन / ज्वारीय वन (Mangrove Forests)
- क्षेत्र: समुद्र के तटवर्ती क्षेत्र जहाँ ज्वार-भाटा आता है (जैसे- सुंदरवन डेल्टा, गंगा, महानदी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टा क्षेत्र)।
- प्रमुख वृक्ष: सुंदरी वृक्ष (जिसके नाम पर सुंदरवन का नाम पड़ा), अगर, केवड़ा आदि।
- विशेषता: इन पेड़ों की जड़ें पानी के बाहर हवा में सांस लेने के लिए निकलती हैं (न्यूमैटोफोर्स)।
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४. वन्य प्राणी (Wildlife)
- विविधता: भारत में लगभग ९०,००० जातियों के जानवर, २,००० से अधिक प्रकार के पक्षी और मछली की लगभग २,५४६ जातियाँ पाई जाती हैं (जो विश्व की कुल संख्या का लगभग १३% है)।
- स्तनधारी जीव: भारत में हाथियाँ, बाघ, एक सींग वाले गैंडे, शेर, बारहसिंगा, ऊँट, जंगली गधे आदि प्रमुख हैं।
- बाघ और शेर: भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है जहाँ शेर और बाघ दोनों पाए जाते हैं। एशियाई शेर गुजरात के गिर वनों में पाए जाते हैं।
- एक सींग वाले गैंडे: असम और पश्चिम बंगाल के दलदली क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- पक्षी जीवन: मयूर, बत्तख, कबूतर, सारस और क्रेन आदि भारत के प्रमुख पक्षी हैं।
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५. वन्य जीवों और वनों के संरक्षण की आवश्यकता (Need for Conservation)
- मुख्य कारण: अत्यधिक शिकार, प्रदूषण, वनों की कटाई (कृषि और उद्योगों के लिए), और जलवायु परिवर्तन के कारण कई जीव और पौधे विलुप्त होने की कगार पर हैं।
- सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
- भारत सरकार ने देश में वन्य जीवों की रक्षा के लिए १८ जीवमंडल नीचे (Biosphere Reserves) स्थापित किए हैं।
- प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger), प्रोजेक्ट एलीफेंट (Project Elephant) जैसी विशेष परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं।
- देश में १०० से अधिक राष्ट्रीय पार्क, ५०० से अधिक वन्य प्राणी अभयारण्य और ज़ू (चिड़ियाघर) बनाए गए हैं ताकि वनस्पतियों और जीवों को सुरक्षित रखा जा सके।
- हमारा कर्तव्य: हमें पेड़ों की कटाई रोकनी चाहिए, अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए और वन्य जीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करनी चाहिए।
उत्तर (Answer): वन सर्वेक्षण के अनुसार, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में वन आवरण का प्रतिशत बहुत अधिक है, जिसमें मिजोरम आमतौर पर प्रतिशत के मामले में सबसे ऊपर है।
उत्तर (Answer): मैंग्रोव वन तटीय वन हैं जो ज्वार से प्रभावित क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से गंगा, महानदी, कृष्णा, गोदावरी और कावेरी के डेल्टा क्षेत्रों में विकसित होते हैं।