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कक्षा: 9वीं
विषय: सामाजिक विज्ञान (राजनीतिक विज्ञान)
अध्याय: संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions)
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1. प्रमुख सरकारी संस्थाएँ (Major Institutions)
देश को चलाने और नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख नीतिगत निर्णय तीन मुख्य संस्थाएँ लेती हैं:
- विधायिका (Legislature): कानून बनाने वाली संस्था (संसद - लोकसभा और राज्यसभा)।
- कार्यकारिणी (Executive): कानूनों को लागू करने और रोजमर्रा का प्रशासन चलाने वाली संस्था (प्रधानमंत्री, मंत्रीपरिषद और नौकरशाही)।
- न्यायपालिका (Judiciary): न्याय देने और कानूनों की वैधता की जाँच करने वाली संस्था (सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय)।
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2. निर्णय लेने की प्रक्रिया और प्रमुख पद
- निर्णय लेने वाले लोग:
- राष्ट्रपति: देश का सबसे बड़ा औपचारिक अधिकारी।
- प्रधानमंत्री: सरकार का प्रमुख और वास्तविक शक्तियों का उपयोग करने वाला व्यक्ति।
- संसद: राष्ट्रपति, लोकसभा (निचला सदन) और राज्यसभा (उच्च सदन) से मिलकर बनती है।
- महत्वपूर्ण आयोग और समितियाँ:
- सरकार समय-समय पर महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए आयोगों का गठन करती है, जैसे सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए मंडल आयोग (Mandal Commission) का गठन 1979 में किया गया था।
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3. संसद की आवश्यकता और उसके सदन
संसद देश की सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था है। इसके दो सदन होते हैं:
- लोकसभा (Lower House / जनता का सदन):
- इसके सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा होता है।
- यह वित्तीय मामलों और सरकार को नियंत्रित करने में अधिक शक्तिशाली होती है।
- राज्यसभा (Upper House / काउंसिल ऑफ़ स्टेट्स):
- इसके सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से राज्यों के विधायकों द्वारा होता है।
- यह राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
1. कानून बनाना, उनमें संशोधन करना या उन्हें समाप्त करना।
2. सरकार के कामकाज पर नियंत्रण रखना और सवाल पूछना।
3. देश के धन (बजट) पर नियंत्रण रखना।
4. सर्वोच्च और सार्वजनिक चर्चा का मंच प्रदान करना।
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4. कार्यपालिका (Executive) के प्रकार
- राजनीतिक कार्यपालिका (Political Executive):
- जनता द्वारा एक निश्चित अवधि (जैसे 5 वर्ष) के लिए चुने जाते हैं।
- ये जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं और बड़े नीतिगत फैसले लेते हैं (जैसे - मंत्रीगण)।
- स्थाई कार्यपालिका / नौकरशाही (Permanent Executive / Bureaucracy):
- प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से दीर्घकालिक आधार पर नियुक्त होते हैं।
- सरकार बदलने पर भी ये अपने पद पर बने रहते हैं और नीतियों को जमीन पर लागू करते हैं (जैसे - आईएएस, आईपीएस अधिकारी)।
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5. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद (Prime Minister and Council of Ministers)
- प्रधानमंत्री की नियुक्ति: राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं।
- मंत्रिपरिषद के प्रकार:
1. कैबिनेट मंत्री: सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेता जो प्रमुख मंत्रालयों के प्रभारी होते हैं।
2. राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार): छोटे मंत्रालयों के स्वतंत्र प्रभारी मंत्री।
3. राज्य मंत्री: कैबिनेट मंत्रियों की सहायता करने वाले मंत्री।
- प्रधानमंत्री की शक्तियाँ:
- वे मंत्रियों के विभाग तय करते हैं।
- वे बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।
- सभी मंत्रियों के कार्यों में तालमेल बिठाते हैं।
- उनका निर्णय अंतिम माना जाता है यदि मंत्रिपरिषद में मतभेद हो।
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6. राष्ट्रपति (The President)
- राष्ट्रपति देश के औपचारिक (नाममात्र के) प्रमुख होते हैं।
- इनकी स्थिति ब्रिटेन की महारानी जैसी होती है।
- चुनाव: राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि संसद के सदस्य और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य करते हैं।
- प्रमुख अधिकार:
- सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ (प्रधानमंत्री, न्यायाधीश, राज्यपाल आदि) राष्ट्रपति के नाम पर होती हैं।
- देश के सभी कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही लागू होते हैं।
- क्षमादान की शक्ति (किसी की सजा को कम करना या माफ करना)।
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7. न्यायपालिका (The Judiciary)
- भारत में न्यायव्यवस्था एक एकीकृत न्यायपालिका (Integrated Judiciary) है, जिसका शीर्ष सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) है।
- संरचना:
- सर्वोच्च न्यायालय (पूरे देश के लिए)
- उच्च न्यायालय (राज्यों के स्तर पर)
- जिला अदालतें (जिला स्तर पर)
- स्वतंत्र न्यायपालिका का अर्थ:
- न्यायपालिका पर विधायिका और कार्यपालिका का नियंत्रण नहीं होता।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति एक निश्चित प्रक्रिया से होती है और उन्हें आसानी से हटाया नहीं जा सकता (महाभियोग द्वारा ही संभव)।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review):
- न्यायपालिका के पास यह शक्ति होती है कि यदि संसद द्वारा बनाया गया कोई कानून संविधान के खिलाफ हो, तो वह उसे अवैध घोषित कर सकती है।
- यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 संस्थाओं का कामकाज
संसद (विधायिका)
आवश्यकता और महत्व
कानूनों का निर्माण
सरकार के काम की निगरानी
बजट और धन पर नियंत्रण
संसद के दो सदन
लोकसभा (निचला सदन)
जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव
अधिक वित्तीय शक्तियाँ
राज्यसभा (ऊपरी सदन)
राज्यों का प्रतिनिधित्व
विशेष मामलों में समीक्षा
राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका
राजनीतिक कार्यपालिका (नेता/मंत्री)
स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाह/अधिकारी)
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
नियुक्ति
राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति
बहुमत दल का नेता
मंत्रिपरिषद के प्रकार
कैबिनेट मंत्री
राज्य मंत्री
उप मंत्री
प्रधानमंत्री के अधिकार और कार्य
मंत्रियों का विभाग बंटवारा
बैठकों की अध्यक्षता
सरकार का मुख्य प्रवक्ता
राष्ट्रपति (देश का प्रमुख)
स्थिति
नाममात्र का कार्यपालिका प्रमुख
संवैधानिक प्रमुख
चुनाव
संसद सदस्यों और विधायकों द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव
प्रमुख शक्तियाँ
विधायी शक्तियाँ (अध्यादेश, कानून पर हस्ताक्षर)
कार्यकारी शक्तियाँ (बड़े अधिकारियों की नियुक्ति)
क्षमादान की शक्ति
न्यायपालिका (न्याय प्रणाली)
संरचना (एकीकृत न्यायपालिका)
सर्वोच्च न्यायालय (शीर्ष अदालत)
उच्च न्यायालय (राज्य स्तर)
जिला और अधीनस्थ अदालतें
स्वतंत्रता
राजनीतिक प्रभाव से मुक्ति
न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया
मुख्य कार्य
विवादों का निपटारा (नागरिक, सरकार)
मौलिक अधिकारों की रक्षा
न्यायिक समीक्षा (कानूनों की वैधता की जाँच)
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): लोकसभा को वित्तीय मामलों में बहुत अधिक शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किए जा सकते हैं, और वित्तीय बजट और विधेयकों के संबंध में उसके निर्णय राज्यसभा पर भारी पड़ते हैं।
उत्तर (Answer): न्यायिक समीक्षा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की वह शक्ति है जिसके तहत वे विधायिका द्वारा पारित किसी भी कानून या किसी कार्यकारी कार्रवाई की संवैधानिक वैधता की जांच करते हैं और यदि यह संविधान का उल्लंघन करती है तो इसे अमान्य घोषित कर सकते हैं।
उत्तर (Answer): मंत्रिमंडल वरिष्ठ मंत्रियों का मुख्य समूह है जो बड़े नीतिगत निर्णय लेता है, सरकारी विभागों का समन्वय करता है और समग्र सरकारी नीतियों तैयार करता है।
उत्तर (Answer): प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख होते हैं और उनके पास व्यापक कार्यकारी शक्तियां होती हैं, जो उन्हें भारतीय राजनीतिक प्रणाली में सबसे शक्तिशाली राजनीतिक व्यक्ति बनाती हैं।
उत्तर (Answer): न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि यह विधायिका या कार्यपालिका के नियंत्रण में नहीं है, जिससे न्यायाधीश बिना किसी डर या पक्षपात के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें और निष्पक्ष रूप से न्याय दे सकें।
उत्तर (Answer): कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो दिन-प्रतिदिन के प्रशासन और विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है।
उत्तर (Answer): गठबंधन सरकार तब बनती है जब दो या दो से अधिक राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं क्योंकि विधायिका में किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला होता है।
उत्तर (Answer): देश के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने, महत्वपूर्ण निर्णय लेने, नीतियों को लागू करने और संवैधानिक ढांचे के अनुसार निष्पक्ष रूप से विवादों को हल करने के लिए राजनीतिक संस्थाओं की आवश्यकता होती है।
उत्तर (Answer): उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित एक कठोर महाभियोग प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है।
उत्तर (Answer): मंडल आयोग ने सिफारिश की थी कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) के लिए सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
उत्तर (Answer): भारत सरकार ने बी.पी. मंडल की अध्यक्षता में वर्ष 1979 में द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग, जिसे आमतौर पर मंडल आयोग के रूप में जाना जाता है, की नियुक्ति की थी।
उत्तर (Answer): राज्यसभा मुख्य रूप से संसद में भारत के राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है और लोकसभा द्वारा पारित कानूनों की समीक्षा करने के लिए एक संशोधन कक्ष के रूप में कार्य करती है।
उत्तर (Answer): स्थायी कार्यपालिका में सिविल सेवक और नौकरशाह शामिल होते हैं जिन्हें दीर्घकालिक आधार पर नियुक्त किया जाता है और जो दिन-प्रतिदिन के प्रशासन में राजनीतिक कार्यपालिका की सहायता करते हैं।
उत्तर (Answer): राजनीतिक कार्यपालिका वे नेता होते हैं जो एक निश्चित अवधि के लिए जनता द्वारा चुने जाते हैं, जैसे प्रधानमंत्री और मंत्री, जो बड़े नीतिगत निर्णय लेते हैं और सरकारी कार्यों की अंतिम जिम्मेदारी संभालते हैं।
उत्तर (Answer): न्यायपालिका, विशेष रूप से उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों सहित अदालतें, नागरिकों और सरकार के बीच विवादों को हल करने के लिए एक स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य करती हैं, जो न्याय और कानून के शासन को सुनिश्चित करती है।