कक्षा 11 भौतिक विज्ञान - त्वरित संशोधन नोट्स / सूत्र शीट
अध्याय: तरंगें (Waves) — MP बोर्ड
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1. तरंग एवं इसके प्रकार (Waves and Types)
- तरंग (Wave): विक्षोभ (disturbance) जो माध्यम में बिना द्रव्य के स्थानांतरण के ऊर्जा और संवेग का संचरण करता है।
- यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves): इनके संचरण के लिए भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। (उदा: ध्वनि तरंगें, जल तरंगें)
- अयांत्रिक/विद्युतचुंबकीय तरंगें (Non-mechanical Waves): इनके संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। (उदा: प्रकाश, X-किरणें)
#### तरंगों का वर्गीकरण (कणों के कंपन के आधार पर):
1. अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves):
- माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं।
- ये श्रृंग (Crest) और गर्त (Trough) के रूप में आगे बढ़ती हैं।
- उदाहरण: तनी हुई डोरी में तरंगें, प्रकाश तरंगें।
2. अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves):
- माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर कंपन करते हैं।
- ये संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) के रूप में आगे बढ़ती हैं।
- उदाहरण: ध्वनि तरंगें।
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2. तरंग से संबंधित मूलभूत राशियाँ (Key Parameters)
- आयाम ($A$): साम्यावस्था से कण का अधिकतम विस्थापन।
- आवर्तकाल ($T$): एक पूर्ण कंपन में लगा समय।
- आवृत्ति ($\nu$ या $f$): एक सेकंड में होने वाले कंपनों की संख्या।
$$\nu = \frac{1}{T}$$
- तरंगदैर्ध्य ($\lambda$): दो क्रमागत श्रृंगों/गर्तों या संपीडनों/विरलनों के बीच की दूरी।
- कोणीय आवृत्ति ($\omega$):
$$\omega = \frac{2\pi}{T} = 2\pi\nu$$
- कोणीय तरंग संख्या / प्रसरण स्थिरांक ($k$):
$$k = \frac{2\pi}{\lambda}$$
$$v = \nu \lambda = \frac{\omega}{k}$$
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3. प्रगामी तरंग का समीकरण (Progressive Wave Equation)
धनात्मक X-अक्ष की दिशा में संचरित तरंग का समीकरण:
$$y(x,t) = A \sin(\omega t - kx + \phi_0)$$
या
$$y(x,t) = A \sin \left[ 2\pi \left( \frac{t}{T} - \frac{x}{\lambda} \right) + \phi_0 \right]$$
- यदि तरंग ऋणात्मक X-अक्ष की दिशा में जा रही हो:
$$y(x,t) = A \sin(\omega t + kx + \phi_0)$$
#### कलांतर एवं पथान्तर में संबंध (Phase Difference & Path Difference):
$$\Delta \phi = \frac{2\pi}{\lambda} \times \Delta x$$
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4. विभिन्न माध्यमों में तरंग की चाल (Speed of Waves)
- तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल:
$$v = \sqrt{\frac{T}{\mu}}$$
(जहाँ $T$ = डोरी में तनाव, $\mu = \frac{m}{L}$ = एकांक लंबाई का द्रव्यमान)
- द्रव या गैस में अनुदैर्ध्य (ध्वनि) तरंग की चाल:
$$v = \sqrt{\frac{B}{\rho}}$$
(जहाँ $B$ = आयतन प्रत्यास्थता गुणांक, $\rho$ = घनत्व)
$$v = \sqrt{\frac{Y}{\rho}}$$
(जहाँ $Y$ = यंग प्रत्यास्थता गुणांक)
#### ध्वनि की चाल हेतु सूत्र:
1. न्यूटन का सूत्र (समतापी प्रक्रम):
$$v = \sqrt{\frac{P}{\rho}}$$
2. लाप्लास का संशोधन (रुद्धोष्म प्रक्रम - शुद्ध सूत्र):
$$v = \sqrt{\frac{\gamma P}{\rho}}$$
(जहाँ $\gamma = \frac{Cp}{Cv}$ विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात है)
#### ध्वनि की चाल पर विभिन्न कारकों का प्रभाव:
- ताप का प्रभाव: $v \propto \sqrt{T}$ (परम ताप के वर्गमूल के समानुपाती)
- दाब का प्रभाव: नियत ताप पर दाब बदलने से ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- आर्द्रता का प्रभाव: आर्द्र (नम) वायु में घनत्व कम होने के कारण ध्वनि की चाल शुष्क वायु की तुलना में अधिक होती है।
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5. तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition)
जब दो या दो से अधिक तरंगें माध्यम के किसी बिंदु पर एक साथ पहुँचती हैं, तो परिणामी विस्थापन सभी तरंगों द्वारा उत्पन्न पृथक-पृथक विस्थापनों के सदिश योग के बराबर होता है:
$$y = y1 + y2 + y_3 + \dots$$
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6. अप्रगामी तरंगें (Standing / Stationary Waves)
जब समान आयाम और समान आवृत्ति की दो प्रगामी तरंगें विपरीत दिशाओं में चलकर अध्यारोपित होती हैं, तो अप्रगामी तरंगें बनती हैं।
$$y(x,t) = (2A \sin kx) \cos \omega t$$
#### निष्पंद एवं प्रस्पंद (Nodes and Antinodes):
1. निष्पंद (Nodes): जहाँ कणों का आयाम न्यूनतम (शून्य) होता है।
- स्थिति: $x = 0, \frac{\lambda}{2}, \lambda, \frac{3\lambda}{2}, \dots$
- दो क्रमागत निष्पंदों के बीच की दूरी = $\frac{\lambda}{2}$
2. प्रस्पंद (Antinodes): जहाँ कणों का आयाम अधिकतम ($2A$) होता है।
- स्थिति: $x = \frac{\lambda}{4}, \frac{3\lambda}{4}, \frac{5\lambda}{4}, \dots$
- दो क्रमागत प्रस्पंदों के बीच की दूरी = $\frac{\lambda}{2}$
- एक निष्पंद और निकटतम प्रस्पंद के बीच की दूरी = $\frac{\lambda}{4}$
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7. आर्गन पाइप एवं डोरी के कंपन (Vibrations in Organ Pipes & Strings)
#### 1. तनी हुई डोरी (Stretched String):
- मूल आवृत्ति (1st Harmonic):
$$\nu_1 = \frac{v}{2L} = \frac{1}{2L}\sqrt{\frac{T}{\mu}}$$
- अनुनादी आवृत्तियों का अनुपात: $\nu1 : \nu2 : \nu_3 = 1 : 2 : 3 \dots$ (सम और विषम दोनों संनादी उत्पन्न होते हैं)।
#### 2. बंद आर्गन पाइप (Closed Organ Pipe - एक सिरा बंद):
- केवल विषम संनादी (Odd Harmonics) ही उत्पन्न होते हैं।
- मूल आवृत्ति:
$$\nu_1 = \frac{v}{4L}$$
- आवृत्तियों का अनुपात: $\nu1 : \nu3 : \nu_5 = 1 : 3 : 5 \dots$
- $n$-वीं विषम संनादी आवृत्ति:
$$\nun = (2n - 1)\nu1$$
#### 3. खुला आर्गन पाइप (Open Organ Pipe - दोनों सिरे खुले):
- सम और विषम सभी संनादी उत्पन्न होते हैं।
- मूल आवृत्ति:
$$\nu_1 = \frac{v}{2L}$$
- आवृत्तियों का अनुपात: $\nu1 : \nu2 : \nu_3 = 1 : 2 : 3 \dots$
- $n$-वीं संनादी आवृत्ति:
$$\nun = n \cdot \nu1$$
(नोट: समान लंबाई के लिए खुले आर्गन पाइप की मूल आवृत्ति, बंद आर्गन पाइप की मूल आवृत्ति की दोगुनी होती है।)
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8. विस्पंद (Beats)
जब लगभग समान आवृत्ति ($f1 \approx f2$) की दो ध्वनि तरंगें एक साथ एक ही दिशा में चलती हैं, तो ध्वनि की तीव्रता में आवर्ती परिवर्तन (तारत्व का घटना-बढ़ना) होता है। इसे विस्पंद कहते हैं।
- विस्पंद आवृत्ति (Beat Frequency): प्रति सेकंड सुने जाने वाले विस्पंदों की संख्या।
$$fb = |f1 - f_2|$$
- विस्पंद आवर्तकाल (Beat Period):
$$Tb = \frac{1}{|f1 - f_2|}$$
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9. डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)
जब ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति (तारत्व) उसकी वास्तविक आवृत्ति से भिन्न प्रतीत होती है। इसे डॉप्लर प्रभाव कहते हैं।
#### सामान्य सूत्र (General Formula):
$$\nu' = \nu \left( \frac{v \pm vo}{v \mp vs} \right)$$
जहाँ:
- $\nu'$ = आभासी आवृत्ति (Apparent frequency)
- $\nu$ = वास्तविक आवृत्ति (Actual frequency)
- $v$ = माध्यम में ध्वनि का वेग
- $v_o$ = श्रोता का वेग (Observer velocity)
- $v_s$ = स्रोत का वेग (Source velocity)
#### चिन्ह परिपाटी (Sign Convention):
- यदि स्रोत/श्रोता एक-दूसरे के समीप आ रहे हों $\rightarrow$ आवृत्ति बढ़ती है ($\nu' > \nu$).
- यदि स्रोत/श्रोता एक-दूसरे से दूर जा रहे हों $\rightarrow$ आवृत्ति घटती है ($\nu' < \nu$).
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💡 मुख्य स्मरणीय बिंदु (Quick Revision Key Points)
1. यांत्रिक तरंगें निर्वात में गमन नहीं कर सकतीं, जबकि विद्युतचुंबकीय तरंगें निर्वात में चल सकती हैं।
2. अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोसों और द्रवों की सतह पर बन सकती हैं, द्रवों/गैसों के अंदर नहीं।
3. अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं।
4. आवृत्ति ($\nu$) तरंग का वह गुण है जो एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर नहीं बदलता (चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं)।
5. अप्रगामी तरंगों में ऊर्जा का संचरण नहीं होता है।