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रेडॉक्स (Redox) शब्द Reduction (अपचयन) तथा Oxidation (ऑक्सीकरण) से मिलकर बना है। ऐसी अभिक्रियाएं जिनमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों प्रक्रियाएं एक साथ होती हैं, उन्हें रेडॉक्स अभिक्रियाएं कहते हैं।
#### ऑक्सीकरण एवं अपचयन में अंतर:
| लक्षण | ऑक्सीकरण (Oxidation) | अपचयन (Reduction) |
| :--- | :--- | :--- |
| ऑक्सीजन / विद्युत-ऋणी तत्व | जुड़ना (योग) | निकलना (ह्रास) |
| हाइड्रोजन / विद्युत-धनी तत्व | निकलना (ह्रास) | जुड़ना (योग) |
| इलेक्ट्रॉन अवधारणा | इलेक्ट्रॉन का त्याग (Loss of $e^-$) | इलेक्ट्रॉन का ग्रहण (Gain of $e^-$) |
| ऑक्सीकरण संख्या | वृद्धि होती है | कमी होती है |
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KMnO4, K2Cr2O7, O2, Cl2Na, Zn, H2, C, H2C2O4 (ऑक्सेलिक अम्ल)---
किसी यौगिक में किसी परमाणु पर उपस्थित वास्तविक या काल्पनिक आवेश की संख्या को उसकी ऑक्सीकरण संख्या कहते हैं।
#### ऑक्सीकरण संख्या निकालने के नियम:
1. मुक्त/मुक्त तत्व अवस्था: किसी भी तत्व की मुक्त अवस्था में ऑक्सीकरण संख्या शून्य (0) होती है। (जैसे: H2, O2, Cl2, Na, Fe = 0)
2. एक-परमाणुक आयन: आयन पर स्थित आवेश ही उसकी ऑक्सीकरण संख्या होती है। (जैसे: Na^+ = +1, Mg^2+ = +2, Cl^- = -1)
3. क्षार धातुएं (समूह 1): सदैव +1 (Li, Na, K, Rb, Cs)
4. क्षारीय मृदा धातुएं (समूह 2): सदैव +2 (Be, Mg, Ca, Sr, Ba)
5. फ़्लोरीन (F): सभी यौगिकों में सदैव -1
6. हाइड्रोजन (H):
H2O, HCl)NaH, CaH2)7. ऑक्सीजन (O):
H2O)H2O2, Na2O2)KO2)OF2 में: +28. योग नियम:
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#### (A) ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करना:
उदा. KMnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करना:
Mn की ऑक्सीकरण संख्या = xK का मान = +1, O का मान = -2(+1) + x + 4(-2) = 01 + x - 8 = 0x - 7 = 0 $\implies$ x = +7---
1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reactions):
A + B -> C
C + O2 -> CO22. अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reactions):
C -> A + B
2H2O -> 2H2 + O23. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reactions):
X + YZ -> XZ + Y
Zn + CuSO4 -> ZnSO4 + Cu2Na + 2H2O -> 2NaOH + H24. असमानुपातन अभिक्रिया (Disproportionation Reactions):
वह अभिक्रिया जिसमें एक ही तत्व का ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों होता है।
2H2O2 -> 2H2O + O2(यहाँ ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 से घटकर -2 (अपचयन) और बढ़कर 0 (ऑक्सीकरण) होती है।)
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1. ऑक्सीकरण संख्या विधि (Oxidation Number Method)
2. आयनीकरण-इलेक्ट्रॉन विधि / अर्ध-अभिक्रिया विधि (Ion-Electron / Half-Reaction Method)
#### अर्ध-अभिक्रिया विधि के चरण (अम्लीय माध्यम):
1. कंकाल समीकरण लिखें और इसे दो अर्ध-अभिक्रियाओं (ऑक्सीकरण एवं अपचयन) में तोड़ें।
2. O और H के अलावा अन्य सभी परमाणुओं को संतुलित करें।
3. O परमाणुओं को संतुलित करने के लिए जिस तरफ कमी हो, उधर H2O जोड़ें।
4. H परमाणुओं को संतुलित करने के लिए H^+ जोड़ें।
5. आवेश को संतुलित करने के लिए आवश्यक दिशा में इलेक्ट्रॉन (e^-) जोड़ें।
6. दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान करके उन्हें जोड़ दें।
(नोट: क्षारीय माध्यम के लिए जितने H^+ आयन हों, दोनों तरफ उतने ही OH^- आयन जोड़कर पानी बना लें।)
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वह युक्ति जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है, उसे गैल्वेनिक सेल या वोल्टीय सेल (उदा. डेनिएल सेल) कहते हैं।
#### महत्वपूर्ण बिंदु (याद रखने की ट्रिक: LOAN):
#### सेल विभव की गणना:
Ecell = Ecathode - E_anode
या
E°cell = E°right - E°_left
0.00 V माना जाता है।---
विभिन्न इलेक्ट्रोडों को उनके मानक अपचयन विभव ($E^\circ$) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने पर प्राप्त श्रेणी को वैद्युत रासायनिक श्रेणी कहते हैं।
#### मुख्य लक्षण एवं अनुप्रयोग:
1. अपचायक क्षमता: श्रेणी में ऊपर स्थित धातुएं प्रबल अपचायक होती हैं ($E^\circ$ का मान अधिक ऋणात्मक)।
2. ऑक्सीकारक क्षमता: श्रेणी में नीचे स्थित तत्व प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं ($E^\circ$ का मान अधिक धनात्मक)।
3. अम्लों से H2 विस्थापन: श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित धातुएं तनु अम्लों से H2 गैस विस्थापित करती हैं।
4. धातु विस्थापन: अधिक क्रियाशील धातु (श्रेणी में ऊपर) अपने से कम क्रियाशील धातु (श्रेणी में नीचे) को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है।