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व्यावसायिक सेवाएँ उन क्रियाओं, लाभों या संतुष्टियों को कहते हैं जो बिक्री के लिए प्रस्तुत की जाती हैं या जो वस्तुओं के उत्पादन से स्वतंत्र होती हैं। ये व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती हैं।
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सेवाओं की पाँच प्रमुख विशेषताएँ होती हैं जिन्हें 5I's कहा जाता है:
1. अस्पर्शनीयता (Intangibility): सेवाओं को देखा या छुआ नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है।
2. अविभाज्यता (Inseparability): सेवाओं का उत्पादन और उपभोग साथ-साथ होता है। इन्हें इनके प्रदाता से अलग नहीं किया जा सकता।
3. असंगति/विविधता (Inconsistency): सेवाएँ हर बार एक जैसी नहीं होतीं, ग्राहकों की आवश्यकतानुसार बदलती रहती हैं।
4. असंग्रहणीयता/नाशवानता (Inventory/Perishability): सेवाओं का संचय (स्टॉक) करके नहीं रखा जा सकता। आज की सेवा आज ही उपभोग करनी होगी।
5. सहभागिता (Involvement): सेवा के उपभोग में ग्राहक की भागीदारी अनिवार्य होती है।
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व्यावसायिक सेवाएँ मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार की होती हैं:
1. बैंकिंग (Banking)
2. बीमा (Insurance)
3. संचार (Communication)
4. परिवहन (Transportation)
5. भंडारण (Warehousing)
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बैंक एक ऐसा संस्थान है जो जनता से धन जमा करता है और उन्हें ऋण (लोन) देता है।
#### बैंक खातों के प्रमुख प्रकार:
1. बचत बैंक खाता (Savings Bank Account): व्यक्तिगत बचत को प्रोत्साहित करने के लिए।
2. चालू खाता (Current Account): व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए (दिन में कई बार लेन-देन)।
3. आवर्ती जमा खाता (Recurring Deposit Account - RD): एक निश्चित राशि हर महीने एक निश्चित अवधि तक जमा की जाती है।
4. सावधि जमा खाता (Fixed Deposit Account - FD): एक निश्चित राशि एक निश्चित अवधि के लिए एकमुश्त जमा की जाती है, जिस पर ब्याज अधिक मिलता है।
#### ई-बैंकिंग सेवाएँ (E-Banking Services):
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बीमा एक ऐसा अनुबंध है जिसके तहत एक पक्ष (बीमा कंपनी) निश्चित प्रतिफल (प्रीमियम) के बदले दूसरे पक्ष (बीमाधारक) को किसी निश्चित जोखिम या हानि की क्षतिपूर्ति करने का वचन देती है।
#### बीमा के मूल सिद्धांत (Principles of Insurance):
1. परम सद्विश्वास का सिद्धांत (Utmost Good Faith): बीमा अनुबंध करने वाले दोनों पक्षों को सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को एक-दूसरे से छिपाना नहीं चाहिए।
2. बीमा योग्य हित का सिद्धांत (Insurable Interest): बीमाधारक का उस वस्तु या व्यक्ति में वित्तीय हित होना चाहिए जिसका बीमा कराया जा रहा है।
3. क्षतिपूर्ति का सिद्धांत (Principle of Indemnity): बीमा का उद्देश्य केवल वास्तविक हानि की भरपाई करना है, लाभ कमाना नहीं (जीवन बीमा पर लागू नहीं)।
4. निकटतम कारण का सिद्धांत (Proximate Cause): हानि का सबसे नजदीकी और मुख्य कारण वही होना चाहिए जिसके लिए बीमा कराया गया है।
5. उत्तराधिकार/प्रतिस्थापन का सिद्धांत (Subrogation): एक बार बीमा कंपनी द्वारा हानि की क्षतिपूर्ति कर दिए जाने के बाद, क्षतिग्रस्त वस्तु पर बीमा कंपनी का अधिकार हो जाता है।
6. योगदान का सिद्धांत (Contribution): यदि किसी व्यक्ति ने एक से अधिक कंपनियों से बीमा कराया है, तो सभी कंपनियाँ मिलकर आनुपातिक रूप से क्षतिपूर्ति करेंगी।
7. न्यूननीकरण का सिद्धांत (Mitigation of Loss): बीमाधारक का कर्तव्य है कि वह दुर्घटना के समय हानि को कम करने का हरसंभव प्रयास करे।
#### बीमा के प्रकार (Types of Insurance):
1. जीवन बीमा (Life Insurance): व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा और निवेश के लिए।
2. अग्नि बीमा (Fire Insurance): आग से होने वाली हानि की सुरक्षा के लिए।
3. समुद्री बीमा (Marine Insurance): समुद्री मार्ग से माल ले जाते समय होने वाले जोखिमों (तूफान, डूबना आदि) से सुरक्षा के लिए।
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संचार सेवाओं का उद्देश्य व्यवसाय के विभिन्न घटकों (ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं, सरकार आदि) के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान करना है।
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परिवहन वस्तुओं को उत्पादन के स्थान से उपभोग के स्थान तक पहुँचाने का कार्य करता है। यह व्यवसाय की "स्थान उपयोगिता" (Place Utility) का सृजन करता है।
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भंडारण का तात्पर्य वस्तुओं को सुरक्षित रूप से स्टोर करना है जब तक कि उनकी मांग न हो। यह "समय उपयोगिता" (Time Utility) का सृजन करता है।
#### भंडारण के प्रकार:
1. निजी गोदाम (Private Warehouses): निर्माताओं या व्यापारियों द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए।
2. सार्वजनिक गोदाम (Public Warehouses): जनता के उपयोग के लिए किराए पर उपलब्ध।
3. बंधक गोदाम (Bonded Warehouses): आयातित माल के लिए जहाँ सीमा शुल्क चुकाने तक माल सुरक्षित रखा जाता है।