कक्षा 11 राजनीतिक विज्ञान: त्वरित पुनरीक्षण नोट्स
#### अध्याय: चुनाव और प्रतिनिधित्व (Election and Representation)
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1. मुख्य परिचय और परिभाषाएँ (Key Introduction & Definitions)
- चुनावी प्रणाली (Election System): यह वह लोकतांत्रिक तरीका है जिसके द्वारा देश के नागरिक अपने प्रतिनिधियों को एक निश्चित समय अंतराल पर चुनते हैं।
- लोकतंत्र और चुनाव: आधुनिक समय में प्रत्यक्ष लोकतंत्र संभव नहीं है, इसलिए अप्रत्यक्ष लोकतंत्र (प्रतिनिधि लोकतंत्र) में चुनाव सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise): इसके अंतर्गत देश के सभी वयस्क नागरिकों (बिना किसी जाति, लिंग, धर्म या संपत्ति के भेद के) को वोट देने का समान अधिकार होता है।
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2. चुनाव आयोग और उसकी भूमिका (Election Commission and Its Role)
- भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India): संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है।
- मुख्य कार्य:
1. मतदाता सूचियों को तैयार करना और अद्यतन रखना।
2. चुनाव की तिथियों की घोषणा करना और आचार संहिता लागू करना।
3. राजनीतिक दलों को मान्यता देना और चुनाव चिह्न आवंटित करना।
4. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराना।
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3. चुनाव प्रणालियों के प्रकार (Types of Electoral Systems)
विश्व में मुख्य रूप से दो प्रकार की चुनाव प्रणालियाँ अपनाई जाती हैं:
#### क. सर्वाधिक मत पाने वाले की जीत (First Past The Post System - FPTP)
- परिभाषा: इस प्रणाली में जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, वही विजयी घोषित किया जाता है, भले ही उसे कुल वोटों का बहुमत (50% से अधिक) न मिला हो।
- विशेषता: इसे भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए अपनाया गया है।
#### ख. आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation - PR)
- परिभाषा: इस प्रणाली में किसी पार्टी को उतने ही प्रतिशत सीटें मिलती हैं जितने प्रतिशत उसे वोट मिलते हैं (जैसे- इज़राइल और नीदरलैंड में)।
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4. भारत में FPTP प्रणाली क्यों अपनाई गई? (Why FPTP System in India?)
1. सरलता: यह प्रणाली आम मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के लिए समझने में बेहद आसान है।
2. स्पष्ट विकल्प: इसमें मतदाता किसी एक उम्मीदवार या राजनीतिक दल को स्पष्ट रूप से चुनते हैं।
3. स्थिर सरकार: यह प्रणाली अक्सर एक स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बनाने में मदद करती है जो देश में स्थिरता लाती है।
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5. निर्वाचन क्षेत्र और आरक्षण (Constituencies and Reservation)
- क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: भारत को भौगोलिक आधार पर अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा गया है।
- आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र (Reserved Constituencies):
- भारतीय संविधान कमजोर और वंचित वर्गों (अनुसूचित जातियों - SC और अनुसूचित जनजातियों - ST) को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था करता है।
- अनुच्छेद 330 और 332 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में SC और ST के लिए सीटें आरक्षित हैं।
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6. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के उपाय (Measures for Free and Fair Elections)
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: बिना किसी भेदभाव के सबको मतदान का अधिकार।
- स्वतंत्र चुनाव आयोग: कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्ति।
- आचार संहिता (Code of Conduct): चुनाव के समय राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों का सेट।
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM): मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और धांधली-मुक्त बनाने के लिए EVM का उपयोग।
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7. चुनावी सुधार (Electoral Reforms in India)
भारतीय चुनावी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर निम्नलिखित सुधार किए गए हैं:
1. मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करना (61वां संविधान संशोधन, 1988)।
2. चुनाव में काले धन और आपराधिक तत्वों के प्रवेश को रोकने के लिए कड़े कानून बनाना।
3. संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्यौरा देना अनिवार्य करना।
4. NOTA (उपर्युक्त में से कोई नहीं) का विकल्प जोड़ना ताकि मतदाता असंतुष्ट होने पर इसका प्रयोग कर सकें।