त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision Notes)
कक्षा: 11वीं
विषय: भूगोल
अध्याय: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ (Geomorphic Processes)
---
### मुख्य अवधारणा 1: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ क्या हैं?
- पृथ्वी की सतह पर लगातार परिवर्तन होते रहते हैं। जिन प्रक्रियाओं के कारण पृथ्वी की सतह पर रूप-निर्माण और रूप-बिगड़ना होता है, उन्हें भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ (Geomorphic Processes) कहते हैं।
- अंतर्जात (Endogenic) और बहिर्जात (Exogenic) बल मिलकर पृथ्वी के धरातल को लगातार आकार देते हैं।
---
### मुख्य अवधारणा 2: अंतर्जात बल (Endogenic Forces)
- ये बल पृथ्वी के आंतरिक भाग से उत्पन्न होते हैं।
- इनके कारण पृथ्वी के अंदर दबाव और खिंचाव पैदा होता है, जिससे उचानी (उन्नत) और निचाई (अवतल) आकृतियाँ बनती हैं।
- प्रमुख प्रकार:
1. पटल विरूपण (Diastrophism): इसमें पर्वत निर्माणकारी बल, महाद्वीप जनक बल, और भूकंप शामिल हैं। यह धीमी गति से कार्य करता है।
2. ज्वालामुखी (Volcanism): इसके अंतर्गत पिघला हुआ मैग्मा धरातल पर आता है या सतह के नीचे ठंडा होता है।
---
### मुख्य अवधारणा 3: बहिर्जात बल (Exogenic Forces)
- ये बल पृथ्वी की सतह पर कार्य करते हैं। इन्हें आच्छादन (Denudation) बल भी कहते हैं।
- सूर्य की ऊर्जा इन बलों को मुख्य शक्ति प्रदान करती है।
- मुख्य प्रक्रियाएँ:
1. अपक्षय (Weathering): चट्टानों का अपने ही स्थान पर टूटना-फूटना (बिना परिवहन के)।
2. अ अपरदन (Erosion): चट्टानी पदार्थों का घर्षण और एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण।
3. निक्षेप (Deposition): अपरदन के एजेंटों द्वारा पदार्थों को किसी स्थान पर जमा करना।
---
### मुख्य अवधारणा 4: अपक्षय के प्रकार (Types of Weathering)
अपक्षय मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:
1. रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering):
- जल, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन के प्रभाव से चट्टानों के खनिजों में रासायनिक परिवर्तन होता है और वे कमजोर हो जाती हैं। (जैसे- ऑक्सीकरण, कार्बोनेशन)।
2. भौतिक या यांत्रिक अपक्षय (Physical/Mechanical Weathering):
- तापमान परिवर्तन, तुषार (पाले) की क्रिया, और दाब मुक्ति के कारण चट्टानों के बड़े टुकड़े छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं।
3. जैविक अपक्षय (Biological Weathering):
- जीवों, पौधों की जड़ों, केंचुओं, और मानव गतिविधियों द्वारा चट्टानों का टूटना।
---
### मुख्य अवधारणा 5: वृहद संचलन (Mass Movements)
- गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव के कारण चट्टानों के मलबे और मिट्टी का ढलान की दिशा में नीचे की ओर खिसकना या बहना वृहद संचलन कहलाता है।
- मुख्य रूप:
1. भूस्खलन (Landslides): तीव्र गति से चट्टानों या मिट्टी का अचानक नीचे गिरना।
2. प्रवाह (Flow): जब मिट्टी या मलबा पानी के साथ कीचड़ की तरह बहता है।
3. सर्पिल खिसकाव (Creep): मिट्टी का बहुत धीमी गति से नीचे की ओर खिसकना।
---
### मुख्य अवधारणा 6: अपरदन और निक्षेप के कारक (Agents of Erosion & Deposition)
बहता हुआ जल, भू-जल, हिमानी (Glaciers), पवन, और लहरें (Waves) पृथ्वी के धरातल को घिसकर नए भू-रूप बनाते हैं।
1. बहता जल (Running Water):
- यह आर्द्र प्रदेशों में सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
- इसके द्वारा V-आकार की घाटियाँ, गॉर्ज, कैनियन, और डेल्टा बनाए जाते हैं।
2. भू-जल (Groundwater):
- चूना पत्थर क्षेत्रों में घुलन क्रिया द्वारा यह कार्य करता है।
- इसके द्वारा 'स्टेलेक्टाइट' और 'स्टेलेग्माइट' जैसी आकृतियाँ बनती हैं।
3. हिमानी (Glaciers):
- ठंडे प्रदेशों और ऊंचे पर्वतों पर बर्फ की नदियों द्वारा U-आकार की घाटियाँ, सर्क, और मोरेन्स बनाए जाते हैं।
4. पवन (Wind):
- मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन अपरदन और निक्षेप का मुख्य कारक है।
- इसके द्वारा 'बरखान', 'छत्रक शिलाएँ' (Mushroom rocks), और 'लोएस' के मैदान बनते हैं।
5. लहरें (Waves):
- तटीय क्षेत्रों में समुद्री तरंगों द्वारा क्लिफ, समुद्री गुफाएँ और समुद्र तट (Beach) बनाए जाते हैं।
---
### मुख्य बिंदु (Key Takeaways for Exam)
- अपक्षय एक स्थैतिक (In-situ) प्रक्रिया है, जबकि अपरदन में गतिशीलता शामिल होती है।
- बहिर्जात प्रक्रियाओं का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की सतह को समतल करना (Gradation) है।
- मरुस्थलों में पवन सबसे अधिक सक्रिय होती है, जबकि आर्द्र क्षेत्रों में बहता जल सबसे प्रभावी होता है।