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वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

Subject: भौतिकी | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)

अध्याय 1: वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र (Electric Charges and Fields)

त्वरित रिवीजन एवं महत्वपूर्ण सूत्र शीट - कक्षा 12 भौतिक विज्ञान (MP Board)


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1. वैद्युत आवेश (Electric Charge)

#### आवेश के मूलभूत गुण:

1. आवेश का संरक्षण (Conservation of Charge): किसी पृथक्कृत निकाय का कुल आवेश सदैव नियत रहता है।

2. आवेश का क्वांटीकरण (Quantization of Charge): किसी वस्तु पर आवेश e (मूल आवेश) का पूर्ण गुणज होता है।

3. आवेश की योज्यता (Additivity of Charge): निकाय का कुल आवेश उसके सभी अवयवी आवेशों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है (Q = q1 + q2 + q3 + ...)।


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2. सतत आवेश वितरण (Continuous Charge Distribution)

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3. कूलाम का नियम (Coulomb's Law)

दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला वैद्युत बल उनके परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।



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4. वैद्युत क्षेत्र एवं उसकी तीव्रता (Electric Field Intensity)


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5. वैद्युत द्विध्रुव एवं द्विध्रुव आघूर्ण (Electric Dipole & Dipole Moment)

#### वैद्युत द्विध्रुव के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता:

1. अक्षीय स्थिति (Axial / End-on Position):

2. निरक्षीय स्थिति (Equatorial / Broadside-on Position):

3. संबंध: Eअक्षीय = 2 × Eनिरक्षीय


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6. एकसमान वैद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर व्यवहार



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7. वैद्युत फ्लक्स (Electric Flux)

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8. गॉस की प्रमेय (Gauss's Theorem)

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9. गॉस के नियम के अनुप्रयोग (Applications of Gauss's Law)

1. अनंत लंबाई के एकसमान आवेशित सीधे तार के कारण वैद्युत क्षेत्र:


2. अनंत आकार की एकसमान आवेशित समतल अचालक चादर के कारण वैद्युत क्षेत्र:


3. एकसमान आवेशित पतले गोलीय कोश (Spherical Shell) के कारण वैद्युत क्षेत्र:


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💡 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Tips)
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 अध्याय 1: विद्युत आवेश तथा क्षेत्र
Overview
विद्युत आवेश (Electric Charge) परिभाषा: पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वह विद्युत एवं चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न या अनुभव करता है प्रकार धनात्मक आवेश (+q) ऋणात्मक आवेश (-q) मूल गुणधर्म आवेश का क्वांटीकरण: $q = \pm ne$ (जहाँ $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$) आवेश संरक्षण: कुल आवेश सदैव संरक्षित रहता है आवेशों की योज्यता: कुल आवेश सभी आवेशों का बीजगणितीय योग है ($Q = q1 + q2 + ...$) सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षण एवं विजातीय आवेशों में आकर्षण कूलाम का नियम (Coulomb's Law) कथन: दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला बल आवेशों के गुणनफल के समानुपाती तथा दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है सूत्र: $F = \frac{1}{4\pi\epsilon0} \frac{|q1 q_2|}{r^2}$ निर्वात में नियतांक: $\frac{1}{4\pi\epsilon_0} = 9 \times 10^9\text{ N m}^2/\text{C}^2$ परावैद्युतांक ($K$): माध्यम में बल घट जाता है ($Fm = \frac{F0}{K}$) अध्यारोपण का सिद्धांत: परिणामी बल सभी पृथक बलों के सदिश योग के बराबर होता है विद्युत क्षेत्र (Electric Field) विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ($E$): एकांक धन परीक्षण आवेश पर लगने वाला बल ($E = \frac{F}{q_0}$) मात्रक एवं प्रकृति: $\text{N/C}$ या $\text{V/m}$ (सदिश राशि) बिंदु आवेश के कारण तीव्रता: $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2}$ विद्युत क्षेत्र रेखाएं (Electric Field Lines) धनावेश से प्रारंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं दो क्षेत्र रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं ये सतत बंद लूप नहीं बनाती हैं विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole) परिभाषा: समान परिमाण एवं विपरीत प्रकृति के दो आवेशों का अल्प दूरी ($2a$) पर स्थित निकाय द्विध्रुव आघूर्ण ($p$): $p = q \times 2a$ (दिशा: ऋणावेश से धनावेश की ओर) विद्युत क्षेत्र की तीव्रता अक्षीय स्थिति (Axial Position): $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2p}{r^3}$ निरक्षीय स्थिति (Equatorial Position): $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{r^3}$ एकसमान विद्युत क्षेत्र में बल आघूर्ण ($\tau$): $\tau = pE \sin\theta$ (सदिश रूप: $\vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E}$) विद्युत फ्लक्स (Electric Flux) परिभाषा: किसी काल्पनिक पृष्ठ से अभिलंबवत गुजरने वाली कुल क्षेत्र रेखाओं की संख्या सूत्र: $\Phi_E = \vec{E} \cdot \vec{A} = EA \cos\theta$ मात्रक एवं प्रकृति: $\text{N m}^2/\text{C}$ (अदिश राशि) गॉस की प्रमेय (Gauss's Theorem) कथन: किसी बंद पृष्ठ से निर्गत कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ में परिबद्ध कुल आवेश का $\frac{1}{\epsilon_0}$ गुना होता है सूत्र: $\PhiE = \frac{q{enclosed}}{\epsilon_0}$ गॉस के नियम के अनुप्रयोग अनंत लंबाई के आवेशित तार के कारण: $E = \frac{\lambda}{2\pi\epsilon_0 r}$ अनंत समतल आवेशित अचालक चादर के कारण: $E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0}$ एकसमान आवेशित पतले गोलीय खोल (Spherical Shell) के कारण खोल के बाहर ($r > R$): $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2}$ खोल के पृष्ठ पर ($r = R$): $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{R^2}$ खोल के अंदर ($r < R$): $E = 0$
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. (a) स्थिरविद्युतिकी में गॉस की प्रमेय का कथन लिखिए। गॉस के नियम का उपयोग करते हुए, रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ वाले एक अनंत लंबाई के सीधे समान रूप से आवेशित पतले तार से $r$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। (b) एक अनंत रेखीय आवेश $2 \text{ cm}$ की दूरी पर $9 \times 10^4 \text{ N/C}$ का विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। रेखीय आवेश घनत्व की गणना कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### भाग (a) गॉस की प्रमेय एवं व्युत्पत्ति **गॉस की प्रमेय का कथन:**\nगॉस के नियमानुसार, निर्वात में स्थित किसी भी बंद काल्पनिक पृष्ठ (गॉसियन पृष्ठ) से होकर गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स ($\Phi_e$), उस बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश ($q$) का $\frac{1}{\varepsilon_0}$ गुना होता है। $$\Phi_e = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0}$$ \nजहाँ $\varepsilon_0$ निर्वात की निरपेक्ष विद्युतशीलता है। --- **अनंत लंबाई के समान रूप से आवेशित सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक:** 1. **निकाय का विवरण:** मान लीजिए एक अत्यंत लंबा, सीधा तथा बारीक तार है जिस पर एकसमान धनावेश वितरित है। तार का रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ है (अर्थात् प्रति एकांक लंबाई पर आवेश $\lambda = \frac{q}{L}$)। अक्षीय सममिति के कारण तार से $r$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ की दिशा त्रिज्या की दिशा में बाहर की ओर होगी। 2. **गॉसियन पृष्ठ का चयन:** हम तार को अक्ष मानकर उसके चारों ओर $r$ त्रिज्या तथा $L$ लंबाई का एक बेलनाकार गॉसियन पृष्ठ खींचते हैं। 3. **विद्युत फ्लक्स की गणना:** बेलनाकार गॉसियन पृष्ठ के तीन भाग हैं: - ऊपरी समतल वृत्तीय पृष्ठ ($S_1$) - निचला समतल वृत्तीय पृष्ठ ($S_2$) - वक्राकार बेलनाकार पृष्ठ ($S_3$) - **समतल वृत्तीय पृष्ठों ($S_1$ तथा $S_2$) के लिए:** क्षेत्रफल सदिश $d\vec{A}$ पृष्ठ के लंबवत है, अतः विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ के साथ $\theta = 90^\circ$ का कोण बनाता है। $$\Phi_1 = \int_{S_1} E \cdot dA \cos(90^\circ) = 0$$ $$\Phi_2 = \int_{S_2} E \cdot dA \cos(90^\circ) = 0$$ - **वक्र पृष्ठ ($S_3$) के लिए:** वक्र पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ और क्षेत्रफल सदिश $d\vec{A}$ एक ही दिशा में होते हैं ($\theta = 0^\circ$), तथा $E$ का परिमाण पूरे वक्र पृष्ठ पर समान रहता है। $$\Phi_3 = \int_{S_3} E \cdot dA \cos(0^\circ) = E \int_{S_3} dA = E \cdot (2\pi r L)$$ अतः संपूर्ण बंद गॉसियन पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स: $$\Phi_{\text{कुल}} = \Phi_1 + \Phi_2 + \Phi_3 = 0 + 0 + E(2\pi r L) = E(2\pi r L)$$ 4. **गॉस के नियम का प्रयोग:** $L$ लंबाई के गॉसियन बेलन द्वारा परिबद्ध कुल आवेश: $$q_{\text{enclosed}} = \lambda L$$ गॉस की प्रमेय से: $$\Phi_{\text{कुल}} = \frac{q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0}$$ $$E (2\pi r L) = \frac{\lambda L}{\varepsilon_0}$$ $$E = \frac{\lambda}{2\pi \varepsilon_0 r}$$ अंश और हर में 2 से गुणा करने पर: $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{2\lambda}{r}$$ \nयही अभीष्ट विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक है। --- ### भाग (b) आंकिक प्रश्न का हल **दिये गए मान:** - विद्युत क्षेत्र की तीव्रता, $E = 9 \times 10^4 \text{ N/C}$ - दूरी, $r = 2 \text{ cm} = 2 \times 10^{-2} \text{ m}$ - स्थिरविद्युत नियतांक, $\frac{1}{4\pi \varepsilon_0} = 9 \times 10^9 \text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2$ **सूत्र:** $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{2\lambda}{r}$$ **चरणबद्ध हल:** 1. सूत्र में मान रखने पर: $$9 \times 10^4 = (9 \times 10^9) \times \frac{2\lambda}{2 \times 10^{-2}}$$ 2. समीकरण को सरल करने पर: $$9 \times 10^4 = 9 \times 10^9 \times \frac{\lambda}{10^{-2}}$$ $$9 \times 10^4 = (9 \times 10^{11}) \times \lambda$$ 3. रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ की गणना: $$\lambda = \frac{9 \times 10^4}{9 \times 10^{11}}$$ $$\lambda = 10^{-7} \text{ C/m} = 0.1 \ \mu\text{C/m}$$ **अंतिम उत्तर:** \nतार का रेखीय आवेश घनत्व **$10^{-7} \text{ C/m}$** (या $0.1 \ \mu\text{C/m}$) है।
Q2. **प्रश्न 3:**\nस्थिरविद्युत्की पर आधारित निम्नलिखित आंकिक प्रश्नों को हल कीजिए: (a) दो बिंदु आवेश $q_1 = +4\,\mu\text{C}$ तथा $q_2 = -4\,\mu\text{C}$ निर्वात में $10\,\text{cm}$ की दूरी पर स्थित हैं, जो एक विद्युत द्विध्रुव बनाते हैं। *(i)* निकाय के विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण की गणना कीजिए। *(ii)* द्विध्रुव के केंद्र से उसकी अक्षीय रेखा पर $20\,\text{cm}$ की दूरी पर स्थित बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का सटीक परिमाण ज्ञात कीजिए। (b) अब इसी द्विध्रुव को $2.5 \times 10^5\,\text{N/C}$ के एकसमान विद्युत क्षेत्र में इस प्रकार रखा जाता है कि इसका द्विध्रुव आघूर्ण सदिश क्षेत्र की रेखाओं से $30^\circ$ का कोण बनाता है। *(i)* द्विध्रुव पर कार्य करने वाले टॉर्क (बल-आघूर्ण) का परिमाण ज्ञात कीजिए। *(ii)* द्विध्रुव को क्षेत्र में $\theta_1 = 0^\circ$ से $\theta_2 = 180^\circ$ तक घुमाने में किए गए कार्य की गणना कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **चरणबद्ध हल** --- ### **भाग (a): द्विध्रुव आघूर्ण एवं अक्षीय क्षेत्र की गणना** **1. दिए गए मान:** * आवेश का परिमाण, $q = 4\,\mu\text{C} = 4 \times 10^{-6}\,\text{C}$ * आवेशों के बीच की दूरी (द्विध्रुव की लंबाई), $2l = 10\,\text{cm} = 0.10\,\text{m} \implies l = 0.05\,\text{m}$ * द्विध्रुव के केंद्र से बिंदु की दूरी, $r = 20\,\text{cm} = 0.20\,\text{m}$ * निर्वात की विद्युतशीलता नियतांक, $\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9\,\text{N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2$ --- **2. (i) विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ($p$) की गणना:** $$\text{सूत्र: } p = q \times 2l$$ $$p = (4 \times 10^{-6}\,\text{C}) \times (0.10\,\text{m})$$ $$\mathbf{p = 4 \times 10^{-7}\,\text{C}\cdot\text{m}}$$ --- **3. (ii) अक्षीय रेखा पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ($E_{\text{अक्षीय}}$) की गणना:** $$\text{सूत्र: } E_{\text{अक्षीय}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{2 p r}{(r^2 - l^2)^2}$$ * **मध्यवर्ती गणनाएँ:** * $r^2 = (0.20)^2 = 0.04\,\text{m}^2$ * $l^2 = (0.05)^2 = 0.0025\,\text{m}^2$ * $(r^2 - l^2) = 0.04 - 0.0025 = 0.0375\,\text{m}^2$ * $(r^2 - l^2)^2 = (0.0375)^2 = 0.00140625\,\text{m}^4 = 1.40625 \times 10^{-3}\,\text{m}^4$ * **अंश का मान (Numerator):** $$\text{अंश} = 9 \times 10^9 \times 2 \times (4 \times 10^{-7}) \times 0.20$$ $$\text{अंश} = 9 \times 10^9 \times 1.6 \times 10^{-7} = 1440\,\text{N}\cdot\text{m}^2/\text{C}$$ * **मान रखने पर:** $$E_{\text{अक्षीय}} = \frac{1440}{0.00140625} = 1,024,000\,\text{N/C}$$ $$\mathbf{E_{\text{अक्षीय}} = 1.024 \times 10^6\,\text{N/C}}$$ --- ### **भाग (b): बाह्य विद्युत क्षेत्र में टॉर्क एवं कार्य की गणना** **1. दिए गए मान:** * विद्युत क्षेत्र, $E = 2.5 \times 10^5\,\text{N/C}$ * द्विध्रुव आघूर्ण, $p = 4 \times 10^{-7}\,\text{C}\cdot\text{m}$ * कोण, $\theta = 30^\circ$ --- **2. (i) टॉर्क (बल-आघूर्ण) की गणना ($\tau$):** $$\text{सूत्र: } \tau = p E \sin\theta$$ $$\tau = (4 \times 10^{-7}\,\text{C}\cdot\text{m}) \times (2.5 \times 10^5\,\text{N/C}) \times \sin(30^\circ)$$ $$\sin(30^\circ) = 0.5 \text{ रखने पर:}$$ $$\tau = (10^{-1}) \times 0.5 = 0.05\,\text{N}\cdot\text{m}$$ $$\mathbf{\tau = 5 \times 10^{-2}\,\text{N}\cdot\text{m}}$$ --- **3. (ii) किए गए कार्य की गणना ($W$):** $$\text{सूत्र: } W = pE (\cos\theta_1 - \cos\theta_2)$$ * यहाँ, $\theta_1 = 0^\circ \implies \cos(0^\circ) = 1$ * $\theta_2 = 180^\circ \implies \cos(180^\circ) = -1$ $$W = pE [1 - (-1)] = 2 p E$$ $$W = 2 \times (4 \times 10^{-7}) \times (2.5 \times 10^5)$$ $$W = 2 \times 10^{-1} = 0.2\,\text{J}$$ $$\mathbf{W = 0.2\,\text{J}}$$
Q3. **प्रश्न 2:** (a) **विद्युत द्विध्रुव** तथा **विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण** को परिभाषित कीजिए। क्या द्विध्रुव आघूर्ण अदिश राशि है या सदिश? इसका SI मात्रक लिखिए। (b) किसी विद्युत द्विध्रुव की **अक्षीय स्थिति** (अनुदैर्ध्य स्थिति) में स्थित किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। (c) जब किसी विद्युत द्विध्रुव को एकसमान बाह्य विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो क्या होता है? इस पर लगने वाले बल-युग्म के आघूर्ण (टॉर्क) का व्यंजक लिखिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **(a) परिभाषाएँ एवं गुण** * **विद्युत द्विध्रुव:** परिमाण में समान किंतु प्रकृति में विपरीत दो बिंदु आवेशों ($+q$ तथा $-q$) का एक अल्प दूरी ($2l$) पर स्थित निकाय विद्युत द्विध्रुव कहलाता है। * **विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ($\vec{p}$):** किसी एक आवेश के परिमाण ($q$) तथा दोनों आवेशों के बीच की दूरी ($2l$) के गुणनफल को विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं। $$\vec{p} = q \times 2\vec{l}$$ * **प्रकृति:** यह एक **सदिश राशि** है। इसकी दिशा द्विध्रुव अक्ष के अनुदिश **ऋण आवेश ($-q$) से धन आवेश ($+q$)** की ओर होती है। * **SI मात्रक:** कूलाम-मीटर ($\text{C}\cdot\text{m}$)। --- ### **(b) अक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक** 1. **संरचना तथा ज्यामिति:** * माना एक विद्युत द्विध्रुव $AB$ दो आवेशों $-q$ (बिंदु $A$ पर) और $+q$ (बिंदु $B$ पर) से मिलकर बना है, जिनके बीच की दूरी $2l$ है। * द्विध्रुव का मध्य बिंदु $O$ है, अतः $OA = OB = l$। * द्विध्रुव के मध्य बिंदु $O$ से अक्षीय रेखा पर $r$ दूरी पर स्थित एक बिंदु $P$ पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। * बिंदु $P$ की $+q$ आवेश से दूरी: $BP = r - l$ * बिंदु $P$ की $-q$ आवेश से दूरी: $AP = r + l$ 2. **बिंदु $P$ पर घटकीय विद्युत क्षेत्र:** * $+q$ आवेश के कारण बिंदु $P$ पर तीव्रता (द्विध्रुव से दूर $\vec{BP}$ दिशा में): $$E_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r - l)^2}$$ * $-q$ आवेश के कारण बिंदु $P$ पर तीव्रता (द्विध्रुव की ओर $\vec{PA}$ दिशा में): $$E_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r + l)^2}$$ 3. **परिणामी विद्युत क्षेत्र ($E_{\text{अक्षीय}}$):** चूँकि $E_1 > E_2$ (बिंदु $P$, $+q$ के अधिक समीप है), परिणामी विद्युत क्षेत्र $E_1$ की दिशा में होगा: $$E_{\text{अक्षीय}} = E_1 - E_2$$ $$E_{\text{अक्षीय}} = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{1}{(r - l)^2} - \frac{1}{(r + l)^2} \right]$$ $$E_{\text{अक्षीय}} = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{(r + l)^2 - (r - l)^2}{(r^2 - l^2)^2} \right]$$ $$E_{\text{अक्षीय}} = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{4rl}{(r^2 - l^2)^2} \right]$$ $$E_{\text{अक्षीय}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{2 \cdot (q \cdot 2l) \cdot r}{(r^2 - l^2)^2} \right]$$ द्विध्रुव आघूर्ण $p = q \cdot 2l$ रखने पर: $$E_{\text{अक्षीय}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2pr}{(r^2 - l^2)^2}$$ 4. **विशेष स्थिति (छोटे द्विध्रुव के लिए, $r \gg l$):** यदि द्विध्रुव अत्यधिक छोटा है अथवा बिंदु $P$ बहुत दूर स्थित है ($r \gg l$), तो $l^2$ को $r^2$ की तुलना में नगण्य मानने पर: $$E_{\text{अक्षीय}} \approx \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2pr}{r^4} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2p}{r^3}$$ *दिशा:* परिणामी विद्युत क्षेत्र की दिशा द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p}$ की दिशा में ही होती है। --- ### **(c) एकसमान बाह्य विद्युत क्षेत्र में व्यवहार** * जब किसी विद्युत द्विध्रुव को एकसमान विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ में रखा जाता है, तो इसके दोनों आवेशों पर बराबर तथा विपरीत बल ($F = qE$) लगते हैं। * **कुल बल:** $F_{\text{नेट}} = 0$ (अतः कोई स्थानांतरीय गति नहीं होती)। * **बल-युग्म का आघूर्ण (टॉर्क):** ये दोनों बल एक बल-युग्म बनाते हैं जो द्विध्रुव को विद्युत क्षेत्र के समानांतर घुमाने का प्रयास करता है। * **टॉर्क का व्यंजक:** $$\tau = p E \sin\theta$$ सदिश रूप में: $\vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E}$ *(जहाँ $\theta$, $\vec{p}$ तथा $\vec{E}$ के बीच का कोण है)*।
Q4. **प्रश्न 1:** (a) स्थिरविद्युत्की में **गॉस का नियम** लिखिए। (b) गॉस के नियम का उपयोग करते हुए, एकसमान रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ वाले एक अनंत लंबाई के सीधे पतले तार से $r$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। (c) तार से दूरी $r$ के साथ विद्युत क्षेत्र $E$ के परिवर्तन को दर्शाने वाला एक स्वच्छ आरेख (ग्राफ) खींचिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **(a) स्थिरविद्युत्की में गॉस का नियम** **कथन:** गॉस के नियम के अनुसार, निर्वात में किसी बंद काल्पनिक पृष्ठ (गॉसियन पृष्ठ) से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$), उस पृष्ठ के भीतर परिबद्ध कुल शुद्ध विद्युत आवेश ($Q_{\text{enclosed}}$) का $\frac{1}{\varepsilon_0}$ गुना होता है। $$\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{Q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0}$$ \nजहाँ: * $\vec{E}$ = विद्युत क्षेत्र वेक्टर * $d\vec{A}$ = क्षेत्रफल अवयव वेक्टर * $\varepsilon_0$ = निर्वात की विद्युतशीलता ($8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2}$) --- ### **(b) एकसमान आवेशित अनंत लंबाई के सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र का व्युत्पत्ति** 1. **गॉसियन पृष्ठ का चयन:** * मान लीजिए एक अनंत लंबाई का सीधा, एकसमान आवेशित तार है जिसका रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ (प्रति इकाई लंबाई आवेश) है। * तार से लंबवत दूरी $r$ पर स्थित बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की गणना करने के लिए, $r$ त्रिज्या और $L$ लंबाई वाले एक **बेलनाकार (Cylindrical) गॉसियन पृष्ठ** की कल्पना करते हैं। 2. **सममिति का सिद्धांत:** * बेलनाकार सममिति के कारण, विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ की दिशा त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर होगी और बेलन के वक्र पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर $\vec{E}$ का परिमाण समान होगा। 3. **बेलनाकार पृष्ठ से गुजरने वाले विद्युत फ्लक्स की गणना:** बेलनाकार पृष्ठ को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है: * **वक्र पृष्ठ ($S_1$):** यहाँ विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ और क्षेत्रफल वेक्टर $d\vec{A}_1$ की दिशा समान है ($\theta = 0^\circ$)। * **ऊपरी समतल वृत्तीय पृष्ठ ($S_2$):** यहाँ $\vec{E}$ तथा $d\vec{A}_2$ परस्पर लंबवत हैं ($\theta = 90^\circ$)। * **निचला समतल वृत्तीय पृष्ठ ($S_3$):** यहाँ $\vec{E}$ तथा $d\vec{A}_3$ परस्पर लंबवत हैं ($\theta = 90^\circ$)। संपूर्ण बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स: $$\Phi_E = \iint_{S_1} E \cdot dA_1 \cos 0^\circ + \iint_{S_2} E \cdot dA_2 \cos 90^\circ + \iint_{S_3} E \cdot dA_3 \cos 90^\circ$$ $$\Phi_E = E \iint_{S_1} dA_1 + 0 + 0$$ $$\Phi_E = E \cdot (2\pi r L) \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$ *(चूँकि त्रिज्या $r$ तथा लंबाई $L$ के बेलन का वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल $2\pi r L$ होता है)* 4. **गॉस का नियम लागू करने पर:** * $L$ लंबाई के गॉसियन बेलन द्वारा परिबद्ध कुल आवेश: $$Q_{\text{enclosed}} = \lambda \cdot L$$ * गॉस के नियम से: $$\Phi_E = \frac{Q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0} = \frac{\lambda L}{\varepsilon_0} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$ 5. **समीकरण 1 तथा समीकरण 2 की तुलना करने पर:** $$E \cdot (2\pi r L) = \frac{\lambda L}{\varepsilon_0}$$ $$E = \frac{\lambda}{2\pi \varepsilon_0 r}$$ *सदिश रूप में:* $$\vec{E} = \frac{\lambda}{2\pi \varepsilon_0 r} \hat{r}$$ --- ### **(c) आरेखीय निरूपण (ग्राफ)** * व्युत्पन्न सूत्र से स्पष्ट है कि $E \propto \frac{1}{r}$। * तार से दूरी $r$ बढ़ने पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $E$ समकोणीय अतिपरवलयाकार (hyperbolically) रूप से घटती है। * **ग्राफ का विवरण:** Y-अक्ष पर $E$ तथा X-अक्ष पर दूरी $r$ को दर्शाते हुए एक वक्र (समकोणीय अतिपरवलय) प्राप्त होता है।
Q5. विद्युत द्विध्रुव और विद्युत द्विध्रुव पल की परिभाषा दें और विद्युत द्विध्रुव की अक्षीय रेखा पर किसी भी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र तीव्रता के लिए एक अभिव्यक्ति प्राप्त करें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### विद्युत द्विध्रुव और द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा - **विद्युत द्विध्रुव:** दो समान और विपरीत आवेश जब अल्प दूरी पर होते हैं। - **द्विध्रुव आघूर्ण:** आवेश के परिमाण और उनके बीच की दूरी के गुणनफल को द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं ($\vec{p} = q \cdot 2\vec{a}$)। ### अक्षीय स्थिति पर विद्युत क्षेत्र के लिए व्युत्पत्ति 1. **ज्यामितीय स्थिति:** $+q$ और $-q$ आवेशों से $r$ दूरी पर स्थित बिंदु $P$ पर विचार करें। 2. **विद्युत क्षेत्र:** - $+q$ के कारण: $E_1 = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{q}{(r - a)^2}$ - $-q$ के कारण: $E_2 = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{q}{(r + a)^2}$ 3. **परिणामी क्षेत्र:** $E = E_1 - E_2$ $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{2pr}{(r^2 - a^2)^2}$$ 4. **विशेष स्थिति ($r \gg a$):** $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{2p}{r^3}$$
Q6. दो बिंदु आवेश $q_1 = +5 imes 10^{-9} ext{ C}$ और $q_2 = -3 imes 10^{-9} ext{ C}$ वैक्यूम में $0.4 ext{ m}$ दूरी पर स्थित हैं। (a) दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के मध्यबिंदु $O$ पर विद्युत क्षेत्र क्या है? (b) यदि मध्यबिंदु पर एक नकारात्मक परीक्षण आवेश $q_3 = -1.5 imes 10^{-9} ext{ C}$ रखा जाता है, तो परीक्षण आवेश द्वारा अनुभव किया गया बल क्या है? 5 Marks
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा: - आवेश $q_1 = +5 \times 10^{-9} \text{ C}$ - आवेश $q_2 = -3 \times 10^{-9} \text{ C}$ - कुल दूरी $d = 0.4 \text{ m}$ - मध्य बिंदु की दूरी $r = 0.2 \text{ m}$ ### भाग (a): मध्य बिंदु पर विद्युत क्षेत्र - $E_1 = \frac{9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-9}}{(0.2)^2} = 1125 \text{ N/C}$ ($q_1$ से दूर) - $E_2 = \frac{9 \times 10^9 \times 3 \times 10^{-9}}{(0.2)^2} = 675 \text{ N/C}$ ($q_2$ की ओर) - कुल विद्युत क्षेत्र $E_{\text{net}} = 1125 + 675 = 1800 \text{ N/C}$ ($q_1$ से $q_2$ की ओर) ### भाग (b): परीक्षण आवेश पर बल - $F = q_3 \cdot E_{\text{net}} = 1.5 \times 10^{-9} \times 1800 = 2.7 \times 10^{-6} \text{ N}$ ($q_2$ से $q_1$ की ओर)
Q7. गॉस का नियम इलेक्ट्रोस्टैटिक्स में बताएं। इस कानून का उपयोग करके, एक अनंत लंबाई की पतली सीधी चार्ज की धारा वाली तार के इलेक्ट्रिक फील्ड इंटेंसिटी के लिए व्यक्ति है $lambda$. 5 Marks
उत्तर (Answer): ### गॉस के नियम का कथन\nगॉस का नियम कहता है कि किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस बंद पृष्ठ के अंदर कुल आवेश का $\frac{1}{\varepsilon_0}$ गुना होता है। गणितीय रूप में: $$\oint \vec{E} \cdot d\vec{S} = \frac{q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0}$$ ### अनंत लंबाई के सीधे आवेशित तार के लिए व्युत्पत्ति 1. **गॉसियन पृष्ठ का चयन:** एक अनंत लंबे सीधे तार पर विचार करें जिसका रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ है। बेलनाकार समरूपता के कारण, विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ त्रिज्या की दिशा में बाहर की ओर होगा। तार से $r$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात करने के लिए, हम $r$ त्रिज्या और $l$ लंबाई के एक बेलनाकार गॉसियन पृष्ठ की कल्पना करते हैं। 2. **विद्युत फ्लक्स की गणना:** बेलनाकार गॉसियन पृष्ठ के तीन भाग होते हैं: - वक्र पृष्ठ ($S_1$) - दो वृत्ताकार समतल सिरे ($S_2$ और $S_3$) कुल फ्लक्स होगा: $$\Phi = \int_{S_1} E \, dS = E \cdot (2\pi r l)$$ 3. **गॉस के नियम का अनुप्रयोग:** बंद पृष्ठ के अंदर कुल आवेश $q_{\text{enclosed}} = \lambda l$ है। गॉस के नियम से: $$E \cdot (2\pi r l) = \frac{\lambda l}{\varepsilon_0}$| 4. **अंतिम व्यंजक:** $$E = \frac{\lambda}{2\pi \varepsilon_0 r}$$
Q8. विद्युत द्विध्रुव क्या है? विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण को परिभाषित कीजिए तथा इसका SI मात्रक एवं विमीय सूत्र लिखिए। किसी विद्युत द्विध्रुव की अक्षीय स्थिति (अनुदैर्ध्य स्थिति) में स्थित किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **1. परिभाषाएं एवं मूल अवधारणाएं** * **विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole):** वह निकाय जिसमें दो बराबर परंतु विपरीत प्रकार के बिंदु आवेश एक-दूसरे से अल्प दूरी पर स्थित होते हैं, विद्युत द्विध्रुव कहलाता है। उदाहरण: $\text{HCl}$, $\text{H}_2\text{O}$, $\text{NH}_3$ आदि के अणु। * **विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ($\vec{p}$):** किसी विद्युत द्विध्रुव के एक आवेश के परिमाण ($q$) तथा दोनों आवेशों के बीच की दूरी ($2l$) के गुणनफल को विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं। $$\vec{p} = q \cdot (2\vec{l})$$ * **प्रकृति:** यह एक सदिश राशि है। * **दिशा:** इसकी दिशा ऋणात्मक आवेश ($-q$) से धनात्मक आवेश ($+q$) की ओर अक्ष के अनुदिश होती है। * **SI मात्रक:** कूलाम-मीटर ($\text{C}\cdot\text{m}$)। * **विमीय सूत्र:** $[\text{M}^0 \text{L}^1 \text{T}^1 \text{A}^1]$ --- ### **2. अक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक** #### **क. निकाय की संरचना** * माना $AB$ एक विद्युत द्विध्रुव है जो $-q$ (बिंदु $A$ पर) और $+q$ (बिंदु $B$ पर) आवेशों से बना है, जिनके बीच की दूरी $2l$ है। * द्विध्रुव का मध्य बिंदु $O$ है। * मध्य बिंदु $O$ से $r$ दूरी पर अक्षीय रेखा पर एक बिंदु $P$ स्थित है जहाँ विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। * दूरी $AP = r + l$ तथा दूरी $BP = r - l$ है। #### **ख. पृथक आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता** * **आवेश $+q$ (बिंदु $B$ पर) के कारण बिंदु $P$ पर विद्युत क्षेत्र:** $$E_1 = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{q}{(BP)^2} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{q}{(r - l)^2} \quad \text{($\vec{BP}$ के अनुदिश, बाहर की ओर)}$$ * **आवेश $-q$ (बिंदु $A$ पर) के कारण बिंदु $P$ पर विद्युत क्षेत्र:** $$E_2 = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{q}{(AP)^2} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{q}{(r + l)^2} \quad \text{($\vec{PA}$ के अनुदिश, द्विध्रुव की ओर)}$$ #### **ग. परिणामी विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ($E$)**\nचूँकि $E_1$ तथा $E_2$ एक ही रेखा के अनुदिश विपरीत दिशाओं में कार्य करते हैं और $E_1 > E_2$ (क्योंकि $r - l < r + l$): $$E = E_1 - E_2$$ $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \left[ \frac{q}{(r - l)^2} - \frac{q}{(r + l)^2} \right]$$ $$E = \frac{q}{4\pi \varepsilon_0} \left[ \frac{(r + l)^2 - (r - l)^2}{(r - l)^2 (r + l)^2} \right]$$ \nबीजगणित के अनुसार $(r+l)^2 - (r-l)^2 = 4rl$ का उपयोग करने पर: $$E = \frac{q}{4\pi \varepsilon_0} \left[ \frac{4rl}{(r^2 - l^2)^2} \right]$$ $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{(q \cdot 2l) \cdot 2r}{(r^2 - l^2)^2}$$ \nद्विध्रुव आघूर्ण $p = q \cdot 2l$ रखने पर: $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{2pr}{(r^2 - l^2)^2}$$ #### **घ. विशेष स्थिति (छोटे द्विध्रुव के लिए: $r \gg l$)**\nयदि द्विध्रुव की लंबाई दूरी $r$ की तुलना में नगण्य हो ($l^2 \ll r^2$), तो $r^2$ की तुलना में $l^2$ को छोड़ने पर: $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{2pr}{(r^2)^2} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{2pr}{r^4}$$ $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{2p}{r^3}$$ --- ### **3. परिणामी विद्युत क्षेत्र की दिशा**\nअक्षीय स्थिति में परिणामी विद्युत क्षेत्र $E$ की दिशा **विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p}$ की दिशा में** ($-q$ से $+q$ की ओर) होती है।
Q9. दो बिंदु आवेश $+2\ \mu\text{C}$ तथा $-2\ \mu\text{C}$ एक-दूसरे से $3\text{ cm}$ की दूरी पर स्थित हैं, जो एक विद्युत द्विध्रुव का निर्माण करते हैं। यह द्विध्रुव $2 \times 10^5\text{ N/C}$ परिमाण के एकसमान विद्युत क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा से $30^\circ$ के कोण पर रखा गया है। निम्नलिखित की गणना कीजिए: 1. विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण का परिमाण। 2. विद्युत द्विध्रुव पर लगने वाला बल-आघूर्ण। 3. द्विध्रुव को स्थायी संतुलन की स्थिति ($\theta = 0^\circ$) से अस्थायी संतुलन की स्थिति ($\theta = 180^\circ$) तक घुमाने में किया गया कार्य। 4. वर्तमान स्थिति ($\theta = 30^\circ$) में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **दिया गया है:** * आवेश का परिमाण, $q = 2\ \mu\text{C} = 2 \times 10^{-6}\text{ C}$ * आवेशों के बीच की दूरी (द्विध्रुव की लंबाई), $2l = 3\text{ cm} = 3 \times 10^{-2}\text{ m}$ * एकसमान विद्युत क्षेत्र, $E = 2 \times 10^5\text{ N/C}$ * विद्युत क्षेत्र से कोण, $\theta = 30^\circ$ --- ### **चरण-दर-चरण हल:** #### **1. विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ($p$)** **सूत्र:** $p = q \times (2l)$ $$p = (2 \times 10^{-6}\text{ C}) \times (3 \times 10^{-2}\text{ m})$$ $$p = 6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}$$ **उत्तर (1):** $6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}$ --- #### **2. द्विध्रुव पर कार्य करने वाला बल-आघूर्ण ($\tau$)** **सूत्र:** $\tau = p E \sin\theta$ $$\tau = (6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}) \times (2 \times 10^5\text{ N/C}) \times \sin(30^\circ)$$ $$\sin 30^\circ = 0.5 \text{ रखने पर:}$$ $$\tau = (12 \times 10^{-3}) \times 0.5$$ $$\tau = 6 \times 10^{-3}\text{ N}\cdot\text{m}$$ **उत्तर (2):** $6 \times 10^{-3}\text{ N}\cdot\text{m}$ --- #### **3. $\theta_1 = 0^\circ$ से $\theta_2 = 180^\circ$ तक घुमाने में किया गया कार्य ($W$)** **सूत्र:** $W = p E (\cos\theta_1 - \cos\theta_2)$ $$W = p E (\cos 0^\circ - \cos 180^\circ)$$ $$\cos 0^\circ = 1 \text{ तथा } \cos 180^\circ = -1 \text{ रखने पर:}$$ $$W = p E [1 - (-1)] = 2 p E$$ $$W = 2 \times (6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}) \times (2 \times 10^5\text{ N/C})$$ $$W = 2 \times (1.2 \times 10^{-2})$$ $$W = 2.4 \times 10^{-2}\text{ J} = 0.024\text{ J}$$ **उत्तर (3):** $2.4 \times 10^{-2}\text{ J}$ (या $0.024\text{ J}$) --- #### **4. $\theta = 30^\circ$ पर द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा ($U$)** **सूत्र:** $U = -p E \cos\theta$ $$U = -(6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}) \times (2 \times 10^5\text{ N/C}) \times \cos(30^\circ)$$ $$\cos 30^\circ = \frac{\sqrt{3}}{2} \approx 0.866 \text{ रखने पर:}$$ $$U = -(1.2 \times 10^{-2}) \times 0.866$$ $$U = -1.039 \times 10^{-2}\text{ J}$$ **उत्तर (4):** $-1.039 \times 10^{-2}\text{ J}$
Q10. स्थिरवैद्युतिकी में गॉस की प्रमेय लिखिए। गॉस की प्रमेय का उपयोग करके एकसमान रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ वाले एक अनंत लंबाई के सीधे पतले तार के कारण किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### **गॉस की प्रमेय (Gauss's Theorem)** **कथन:** गॉस की प्रमेय के अनुसार, निर्वात या वायु में किसी बंद पृष्ठ (Closed surface) से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$), उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश ($q$) का $\frac{1}{\varepsilon_0}$ गुना होता है। $$\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{q}{\varepsilon_0}$$\nजहाँ $\varepsilon_0$ निर्वात की विद्युतशीलता है। --- ### **एकसमान रूप से आवेशित अनंत लंबाई के सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र का व्यंजक** #### **1. माना और व्यवस्था** * माना एक अनंत लंबाई का सीधा पतला तार है जिसका एकसमान रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ (प्रति इकाई लंबाई आवेश) है। * तार से लंबवत दूरी $r$ पर स्थित किसी बिंदु $P$ पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $\vec{E}$ ज्ञात करनी है। #### **2. गॉसियन पृष्ठ का चयन** * बेलनाकार सममिति के कारण, हम तार को अक्ष मानकर $r$ त्रिज्या तथा $l$ लंबाई के एक **सहाक्षीय लंब-वृत्तीय बेलन** को गॉसियन पृष्ठ के रूप में चुनते हैं। * इस पृष्ठ के तीन भाग हैं: 1. **ऊपरी वृत्तीय समतल पृष्ठ ($S_1$)** 2. **निचला वृत्तीय समतल पृष्ठ ($S_2$)** 3. **वक्र बेलनाकार पृष्ठ ($S_3$)** #### **3. विद्युत फ्लक्स की गणना** * **वृत्तीय समतल पृष्ठों ($S_1$ तथा $S_2$) से गुजरने वाला फ्लक्स:** विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ त्रिज्या की दिशा में बाहर की ओर है, जबकि पृष्ठों $S_1$ और $S_2$ के क्षेत्रफल सदिश $d\vec{A}$ बेलन की अक्ष के समांतर हैं। अतः $\theta = 90^\circ$ है। $$\Phi_1 = \int_{S_1} E \cdot dA \cdot \cos 90^\circ = 0$$ $$\Phi_2 = \int_{S_2} E \cdot dA \cdot \cos 90^\circ = 0$$ * **वक्रीय पृष्ठ ($S_3$) से गुजरने वाला फ्लक्स:** वक्रीय पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ तथा क्षेत्रफल सदिश $d\vec{A}$ समान दिशा में हैं, अतः $\theta = 0^\circ$ है। $$\Phi_3 = \int_{S_3} E \cdot dA \cdot \cos 0^\circ = E \int_{S_3} dA$$ त्रिज्या $r$ और लंबाई $l$ वाले बेलन का वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल $2\pi r l$ होता है: $$\Phi_3 = E \cdot (2\pi r l)$$ * **कुल विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$):** $$\Phi_E = \Phi_1 + \Phi_2 + \Phi_3 = 0 + 0 + E(2\pi r l) = E(2\pi r l)$$ #### **4. गॉस की प्रमेय का अनुप्रयोग** * $l$ लंबाई के गॉसियन बेलन के भीतर परिबद्ध कुल आवेश: $$q = \lambda \cdot l$$ * गॉस की प्रमेय से: $$\Phi_E = \frac{q}{\varepsilon_0} = \frac{\lambda l}{\varepsilon_0}$$ #### **5. समीकरणों की तुलना करने पर** $$E(2\pi r l) = \frac{\lambda l}{\varepsilon_0}$$ $$E = \frac{\lambda}{2\pi \varepsilon_0 r}$$ \nअंश और हर में 2 से गुणा करने पर: $$E = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \cdot \frac{2\lambda}{r}$$ --- ### **निष्कर्ष एवं मुख्य बिंदु** * **व्युत्क्रमानुपाती संबंध:** विद्युत क्षेत्र की तीव्रता तार से दूरी $r$ के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($E \propto \frac{1}{r}$)। * **दिशा:** यदि $\lambda > 0$ (धनात्मक आवेश) हो तो विद्युत क्षेत्र की दिशा बाहर की ओर, और यदि $\lambda < 0$ (ऋणात्मक आवेश) हो तो अंदर की ओर होती है।
Q11. दो बिंदु आवेश $q_1 = +2\,\mu\text{C}$ तथा $q_2 = -2\,\mu\text{C}$ एक-दूसरे से $3\text{ cm}$ की दूरी पर $2 \times 10^5\text{ N/C}$ परिमाण के एकसमान विद्युत क्षेत्र में स्थित हैं। गणना कीजिए: 1. निकाय के विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण का परिमाण। 2. द्विध्रुव पर लगने वाले अधिकतम बल-युग्म के आघूर्ण (टॉर्क) का परिमाण। 3 Marks
उत्तर (Answer): **दिया गया है:** - आवेश का परिमाण ($q$) = $2\,\mu\text{C} = 2 \times 10^{-6}\text{ C}$ - आवेशों के बीच की दूरी ($2a$) = $3\text{ cm} = 3 \times 10^{-2}\text{ m}$ - विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ($E$) = $2 \times 10^5\text{ N/C}$ --- **(i) विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ($p$):** $$ \text{सूत्र: } p = q \times 2a $$\nमान रखने पर: $$\np = (2 \times 10^{-6}\text{ C}) \times (3 \times 10^{-2}\text{ m}) $$ $$\np = 6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m} $$ --- **(ii) अधिकतम टॉर्क ($\tau_{\max}$):** $$ \text{सूत्र: } \tau = p E \sin\theta $$\nअधिकतम बल-युग्म के आघूर्ण के लिए, $\theta = 90^\circ$ अतः $\sin 90^\circ = 1$ होता है। $$ \tau_{\max} = p \times E $$\nमान रखने पर: $$ \tau_{\max} = (6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}) \times (2 \times 10^5\text{ N/C}) $$ $$ \tau_{\max} = 1.2 \times 10^{-2}\text{ N}\cdot\text{m} $$ **अंतिम उत्तर:** 1. विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण = $6 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}$ 2. अधिकतम टॉर्क = $1.2 \times 10^{-2}\text{ N}\cdot\text{m}$
Q12. स्थिरविद्युतिकी में कूलॉम का व्युत्क्रम वर्ग नियम लिखिए। उन कारकों का उल्लेख कीजिए जिन पर स्थिरविद्युत बल निर्भर करता है तथा नियम को सदिश रूप में व्यक्त कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): ### कूलॉम का व्युत्क्रम वर्ग नियम **कथन:** कूलॉम के नियम के अनुसार, दो स्थिर बिंदु आवेशों के मध्य लगने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण का बल, दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है। **गणितीय रूप:** $$F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 \varepsilon_r} \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$$ ### बल को प्रभावित करने वाले कारक: 1. **आवेशों का परिमाण ($q_1, q_2$):** बल आवेशों के गुणनफल के समानुपाती होता है ($F \propto |q_1 q_2|$)। 2. **बीच की दूरी ($r$):** बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है ($F \propto \frac{1}{r^2}$)। 3. **माध्यम का परावैद्युतांक ($K$ या $\varepsilon_r$):** बल माध्यम के परावैद्युतांक के व्युत्क्रमानुपाती होता है। किसी परावैद्युत माध्यम में रखने पर बल का मान घट जाता है। ### सदिश रूप:\nआवेश $q_2$ द्वारा आवेश $q_1$ पर लगाया गया बल: $$\vec{F}_{12} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \hat{r}_{21}$$\nजहाँ $\hat{r}_{21}$ आवेश $q_2$ से $q_1$ की दिशा में एकांक सदिश है।
Q13. एक अनंत रेखीय आवेश $2\text{ cm}$ की दूरी पर $9 \times 10^4\text{ N/C}$ का वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। रेखीय आवेश घनत्व ज्ञात कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): ### चरणबद्ध हल: **दिया गया है:** * विद्युत क्षेत्र की तीव्रता, $E = 9 \times 10^4\text{ N/C}$ * रेखीय आवेश से दूरी, $r = 2\text{ cm} = 2 \times 10^{-2}\text{ m}$ * स्थिरविद्युत नियतांक, $k = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9\text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2$ **सूत्र:**\nगॉस के नियम के अनुसार अनंत लंबाई के सीधे आवेशित तार द्वारा $r$ दूरी पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र: $$E = \frac{\lambda}{2\pi\varepsilon_0 r} = \frac{2 k \lambda}{r}$$\nजहाँ $\lambda$ रेखीय आवेश घनत्व है। **$\lambda$ के लिए सूत्र का पुनर्गठन:** $$\lambda = \frac{E \cdot r}{2k}$$ **मान रखने पर:** $$\lambda = \frac{(9 \times 10^4\text{ N/C}) \times (2 \times 10^{-2}\text{ m})}{2 \times (9 \times 10^9\text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2)}$$ $$\lambda = \frac{18 \times 10^2}{18 \times 10^9} = 10^{-7}\text{ C/m}$$ **उत्तर:**\nरेखीय आवेश घनत्व **$10^{-7}\text{ C/m}$** (या $0.1\,\mu\text{C/m}$) है।
Q14. एक वैद्युत द्विध्रुव, जिसके आवेश $\pm 4\,\mu\text{C}$ हैं तथा उनके बीच की दूरी $4\text{ cm}$ है, $2 \times 10^5\text{ N/C}$ तीव्रता के एकसमान वैद्युत क्षेत्र से $30^\circ$ के कोण पर रखा गया है। द्विध्रुव पर लगने वाले बल-युग्म के आघूर्ण (टॉर्क) की गणना कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): ### चरणबद्ध हल: **दिया गया है:** * आवेश का परिमाण, $q = 4\,\mu\text{C} = 4 \times 10^{-6}\text{ C}$ * आवेशों के बीच की दूरी, $2a = 4\text{ cm} = 0.04\text{ m}$ * विद्युत क्षेत्र की तीव्रता, $E = 2 \times 10^5\text{ N/C}$ * द्विध्रुव और क्षेत्र के बीच कोण, $\theta = 30^\circ$ **सूत्र:** 1. वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ($p$): $$p = q \times 2a$$ $$p = (4 \times 10^{-6}\text{ C}) \times (0.04\text{ m}) = 1.6 \times 10^{-7}\text{ C}\cdot\text{m}$$ 2. द्विध्रुव पर लगने वाला बल-युग्म का आघूर्ण ( टॉर्क, $\tau$): $$\tau = p E \sin\theta$$ $$\tau = (1.6 \times 10^{-7}) \times (2 \times 10^5) \times \sin(30^\circ)$$\nचूँकि $\sin(30^\circ) = 0.5$: $$\tau = 3.2 \times 10^{-2} \times 0.5 = 1.6 \times 10^{-2}\text{ N}\cdot\text{m}$$ **उत्तर:**\nद्विध्रुव पर लगने वाला टॉर्क **$1.6 \times 10^{-2}\text{ N}\cdot\text{m}$** है।
Q15. स्थिरविद्युतिकी में गॉस की प्रमेय (नियम) का कथन लिखिए। गाउसीय पृष्ठ के कोई तीन महत्वपूर्ण अभिलक्षण लिखिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): ### स्थिरविद्युतिकी में गॉस की प्रमेय **कथन:** गॉस के नियम के अनुसार, निर्वात में किसी बंद पृष्ठ (जिसे गाउसीय पृष्ठ कहा जाता है) से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$), उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल शुद्ध आवेश ($q_{\text{enclosed}}$) का $\frac{1}{\varepsilon_0}$ गुना होता है। $$\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0}$$\nजहाँ $\varepsilon_0$ निर्वात की विद्युतशीलता है। ### गाउसीय पृष्ठ के महत्वपूर्ण अभिलक्षण: 1. **बंद पृष्ठ:** गाउसीय पृष्ठ हमेशा एक पूर्णतः बंद त्रिविमीय पृष्ठ होना चाहिए ताकि 'आंतरिक' और 'बाहरी' क्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित हो सकें। 2. **प्रेक्षण बिंदु से गुजरना:** गाउसीय पृष्ठ उस बिंदु से होकर गुजर सकता है जहाँ विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी होती है, लेकिन यह किसी पृथक्कृत बिंदु आवेश से होकर नहीं गुजरना चाहिए। 3. **सममिति पर आधारित चयन:** गाउसीय पृष्ठ की आकृति (गोलीय, बेलनाकार, अथवा समतलीय) आवेश वितरण की सममिति के आधार पर चुनी जाती है, जिससे कि $\vec{E}$ पृष्ठ क्षेत्रफल घटक $d\vec{A}$ के या तो समानांतर हो या लंबवत, जिससे गणना सरल हो जाए। 4. **आकृति पर अनिर्भरता:** कुल वैद्युत फ्लक्स केवल परिबद्ध आवेश की मात्रा पर निर्भर करता है, यह गाउसीय पृष्ठ के आकार या आकृति पर निर्भर नहीं करता।