मुख्य सूत्र (Key Formulas)
MP बोर्ड कक्षा 12वीं — भौतिक विज्ञान (Physics)
त्वरित रिवीजन नोट्स एवं सूत्र संग्रह
अध्याय 2: स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (Electrostatic Potential and Capacitance)
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1. स्थिरवैद्युत विभव एवं विभवांतर (Electrostatic Potential & Potential Difference)
- वैद्युत विभव (V): एकांक एकांक धन आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का स्थिरवैद्युत विभव कहते हैं।
- सूत्र:
V = W / q₀
- SI मात्रक: वोल्ट (Volt) या जूल/कूलॉम (
J/C)
- विमीय सूत्र:
[M¹ L² T⁻³ A⁻¹]
- प्रकृति: अदिश राशि (Scalar Quantity)
- विभवांतर (Potential Difference): विद्युत क्षेत्र में किसी परीक्षण आवेश को एक बिंदु B से दूसरे बिंदु A तक ले जाने में किया गया कार्य।
- सूत्र:
VA - VB = W_AB / q₀
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2. बिंदु आवेश एवं निकाय के कारण विभव
- बिंदु आवेश 'q' के कारण 'r' दूरी पर विभव:
V = (1 / 4πε₀) × (q / r)
- (वायु या निर्वात के लिए:
1 / 4πε₀ = 9 × 10⁹ N m²/C²)
- आवेशों के निकाय के कारण कुल विभव (अध्यारोपण का सिद्धांत):
V = V₁ + V₂ + V₃ + ... = (1 / 4πε₀) × ∑ (qi / ri)
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3. वैद्युत द्विध्रुव के कारण विभव (Potential due to Electric Dipole)
- अक्षीय स्थिति (Axial Position):
V = (1 / 4πε₀) × (p / r²)
- (यहाँ
p = q × 2l द्विध्रुव आघूर्ण है)
- निरक्षीय स्थिति (Equatorial Position):
V = 0
- किसी भी सामान्य स्थिति पर (θ कोण पर):
V = (1 / 4πε₀) × (p cosθ / r²)
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4. विभव प्रवणता एवं विद्युत क्षेत्र में संबंध
- विभव प्रवणता (Potential Gradient): दूरी के साथ विभव परिवर्तन की दर को विभव प्रवणता कहते हैं।
- विभव प्रवणता =
- dV / dr
- विद्युत क्षेत्र (E) तथा विभव (V) में संबंध:
E = - (dV / dr)
- नोट: ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाती है कि विद्युत क्षेत्र की दिशा में विभव घटता है।
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5. समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface)
- परिभाषा: ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर स्थिरवैद्युत विभव का मान समान होता है।
- महत्वपूर्ण गुणधर्म:
1. समविभव पृष्ठ पर किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य शून्य होता है (W = 0)।
2. विद्युत बल रेखाएं समविभव पृष्ठ के सदैव लंबवत (90°) होती हैं।
3. दो समविभव पृष्ठ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटते।
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6. स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrostatic Potential Energy)
- दो बिंदु आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा (U):
U = (1 / 4πε₀) × (q₁ q₂ / r)
- विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव को घुमाने में किया गया कार्य (W):
W = pE (1 - cosθ) (θ कोण तक घुमाने पर)
- विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा (U):
U = - pE cosθ = - p⃗ · E⃗
- स्थायी संतुलन (Stable Equilibrium):
θ = 0°, U = -pE (न्यूनतम ऊर्जा)
- अस्थायी संतुलन (Unstable Equilibrium):
θ = 180°, U = +pE (अधिकतम ऊर्जा)
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7. चालक की वैद्युत धारिता (Capacitance)
- परिभाषा: किसी चालक को दिए गए आवेश (
Q) तथा उसके कारण विभव में होने वाली वृद्धि (V) के अनुपात को चालक की धारिता कहते हैं।
- सूत्र:
C = Q / V
- SI मात्रक: फैराड (Farad,
F) या कूलॉम/वोल्ट (C/V)
- विमीय सूत्र:
[M⁻¹ L⁻² T⁴ A²]
- विलगित गोलीय चालक की धारिता:
C = 4πε₀ R (जहाँ R गोले की त्रिज्या है)
- यदि परावैद्युत माध्यम
K हो: C = 4πε₀ K R
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8. संधारित्र एवं समांतर पट्टिका संधारित्र (Parallel Plate Capacitor)
- सिद्धांत: संधारित्र एक ऐसा समायोजन है जिसमें चालक के आकार में बिना परिवर्तन किए उसकी धारिता बढ़ाई जा सकती है।
- समांतर पट्टिका संधारित्र की धारिता:
- वायु/निर्वात के लिए:
C₀ = (ε₀ A) / d
- परावैद्युत माध्यम (K) उपस्थिति में:
C = (K ε₀ A) / d = K C₀
- आंशिक रूप से 't' मोटाई की परावैद्युत पट्टी रखने पर:
C = (ε₀ A) / [d - t + (t / K)]
(यहाँ A = प्लेटों का क्षेत्रफल, d = प्लेटों के बीच की दूरी)
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9. संधारित्रों का संयोजन (Combination of Capacitors)
#### (i) श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)
- प्रत्येक संधारित्र पर आवेश (Q) समान रहता है, किंतु विभवांतर (V) भिन्न होता है।
- तुल्य धारिता (C_eq) का सूत्र:
1 / C_eq = (1 / C₁) + (1 / C₂) + (1 / C₃)
- दो संधारित्रों के लिए:
C_eq = (C₁ × C₂) / (C₁ + C₂)
#### (ii) समांतरक्रम संयोजन (Parallel Combination)
- प्रत्येक संधारित्र पर विभवांतर (V) समान रहता है, किंतु आवेश (Q) भिन्न होता है।
- तुल्य धारिता (C_eq) का सूत्र:
C_eq = C₁ + C₂ + C₃
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10. संधारित्र में संचित ऊर्जा एवं ऊर्जा घनत्व
U = (1/2) C V² = (1/2) Q V = Q² / (2C)
- ऊर्जा घनत्व (Energy Density - प्रति इकाई आयतन ऊर्जा):
u = (1/2) ε₀ E² (वायु के लिए)
u = (1/2) K ε₀ E² (माध्यम के लिए)
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11. आवेशों का पुनर्वितरण एवं ऊर्जा हानि
जब दो आवेशित चालकों को परस्पर जोड़ा जाता है:
- उभयनिष्ठ विभव (Common Potential):
V = (Q₁ + Q₂) / (C₁ + C₂) = (C₁ V₁ + C₂ V₂) / (C₁ + C₂)
- स्थानांतरित आवेश की मात्रा:
ΔQ = [C₁ C₂ / (C₁ + C₂)] × (V₁ - V₂)
- ऊर्जा हानि (Loss of Energy):
ΔU = [C₁ C₂ (V₁ - V₂)²] / [2 (C₁ + C₂)]
(यह ऊर्जा ऊष्मा तथा प्रकाश के रूप में क्षय होती है, ΔU सदैव धनात्मक होता है)
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12. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण नियतांक एवं इकाइयां (MP Board Special)
1 / (4πε₀) = 9 × 10⁹ N m²/C²
ε₀ (निर्वात की विद्युतशीलता) = 8.854 × 10⁻¹² C²/N m² (या F/m)
1 μF (माइक्रोफैराड) = 10⁻⁶ F
1 pF (पिकोफैराड) = 10⁻¹² F
- धातु (चालक) के लिए परावैद्युतांक
K = ∞ (अनंत) होता है।
- वायु के लिए परावैद्युतांक
K = 1 होता है।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 अध्याय: स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
स्थिरवैद्युत विभव (Electrostatic Potential)
परिभाषा: एकांक धन आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य ($V = W/q$)
मात्रक एवं राशि: वोल्ट (V), अदिश राशि
बिंदु आवेश के कारण विभव: $V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r}$
विद्युत द्विध्रुव के कारण विभव
अक्षीय स्थिति: $V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^2}$
निरक्षीय स्थिति: $V = 0$
समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface)
गुण: प्रत्येक बिंदु पर विभव समान
गुण: परीक्षण आवेश को ले जाने में कार्य शून्य
गुण: विद्युत क्षेत्र रेखाएँ पृष्ठ के लंबवत होती हैं
स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
दो बिंदु आवेशों के निकाय की ऊर्जा: $U = \frac{1}{4\pi\varepsilon0} \frac{q1 q_2}{r}$
बाह्य विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा: $U = -p E \cos\theta$
द्विध्रुव को घुमाने में किया गया कार्य: $W = pE (1 - \cos\theta)$
चालकों का स्थिरवैद्युत (Electrostatics of Conductors)
चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य ($E = 0$) होता है
चालक के भीतर विभव नियत रहता है
आवेश सदैव चालक की बाहरी सतह पर रहता है
स्थिरवैद्युत परिरक्षण (Shielding): बाह्य विद्युत क्षेत्र से किसी क्षेत्र को सुरक्षित रखना
परावैद्युत तथा ध्रुवण (Dielectrics and Polarization)
परावैद्युत पदार्थ: अचालक जो विद्युत प्रभाव संचारित करते हैं
प्रकार
ध्रुवी (Polar): धन व ऋण आवेश के केंद्र अलग (उदा. $H_2O, HCl$)
अध्रुवी (Non-Polar): धन व ऋण आवेश के केंद्र संपाती (उदा. $O2, H2$)
परावैद्युत ध्रुवण ($P$): बाह्य क्षेत्र के कारण द्विध्रुव आघूर्ण का प्रेरित होना
परावैद्युतांक ($K$): $K = E_0 / E$
विद्युत धारिता (Electrical Capacitance)
परिभाषा: चालक द्वारा आवेश ग्रहण करने की क्षमता ($C = Q/V$)
मात्रक: फैरड (Farad)
विलगित गोलीय चालक की धारिता: $C = 4\pi\varepsilon_0 R$
संधारित्र (Capacitor)
सिद्धांत: आकार बढ़ाए बिना चालक की धारिता बढ़ाना
समांतर पट्टिका संधारित्र (Parallel Plate Capacitor)
वायु/निर्वात में धारिता: $C0 = \frac{\varepsilon0 A}{d}$
परावैद्युत माध्यम की उपस्थिति में: $C = \frac{K \varepsilon_0 A}{d}$
आंशिक परावैद्युत पट्टी की उपस्थिति में: $C = \frac{\varepsilon_0 A}{d - t(1 - 1/K)}$
संधारित्रों का संयोजन (Combination of Capacitors)
श्रेणीक्रम संयोजन (Series)
आवेश ($Q$) समान, विभव ($V$) विभाजित
तुल्य धारिता: $\frac{1}{C} = \frac{1}{C1} + \frac{1}{C2} + \frac{1}{C_3}$
समांतरक्रम संयोजन (Parallel)
विभव ($V$) समान, आवेश ($Q$) विभाजित
तुल्य धारिता: $C = C1 + C2 + C_3$
संधारित्र में संचित ऊर्जा (Energy Stored in Capacitor)
ऊर्जा के सूत्र: $U = \frac{1}{2} C V^2 = \frac{1}{2} Q V = \frac{Q^2}{2 C}$
ऊर्जा घनत्व (Energy Density): $u = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2$
आवेशों के पुनर्वितरण में ऊर्जा ह्रास: ऊष्मा एवं प्रकाश के रूप में
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### भाग 1: समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता\nएक समान्तर प्लेट संधारित्र में क्षेत्रफल $A$ की दो बड़ी समान्तर चालक प्लेटें होती हैं, जो एक अल्प दूरी $d$ द्वारा पृथक् होती हैं।
- प्लेटों पर पृष्ठ आवेश घनत्व: $\sigma = \frac{Q}{A}$
- निर्वात में प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र: $E_0 = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} = \frac{Q}{A\varepsilon_0}$
- प्लेटों के बीच विभवांतर: $V = E_0 d = \frac{Qd}{A\varepsilon_0}$
- धारिता $C_0$ निम्न प्रकार दी जाती है:
$$C_0 = \frac{Q}{V} = \frac{Q}{\frac{Qd}{A\varepsilon_0}} = \frac{\varepsilon_0 A}{d}$$
### भाग 2: प्लेटों के बीच परावैद्युत स्लैब\nमाना $t$ मोटाई ($t < d$) और $K$ परावैद्यतांक का एक परावैद्युत स्लैब प्लेटों के बीच रखा जाता है।
- वायु/निर्वात क्षेत्र की मोटाई = $(d - t)$
- परावैद्युत माध्यम में विद्युत क्षेत्र: $E = \frac{E_0}{K}$
- प्लेटों के बीच कुल विभवांतर $V$, निर्वात क्षेत्र और परावैद्युत क्षेत्र के सिरों पर विभवांतरों का योग है:
$$V = E_0(d - t) + E(t)$$\nमान रखने पर $E = \frac{E_0}{K}$ और $E_0 = \frac{Q}{A\varepsilon_0}$:
$$V = E_0(d - t) + \frac{E_0}{K} t = E_0 \left( d - t + \frac{t}{K} \right)$$
$$V = \frac{Q}{A\varepsilon_0} \left( d - t + \frac{t}{K} \right)$$
- परावैद्युत स्लैब के साथ नई धारिता $C$:
$$C = \frac{Q}{V} = \frac{Q}{\frac{Q}{A\varepsilon_0} \left( d - t + \frac{t}{K} \right)} = \frac{\varepsilon_0 A}{d - t + \frac{t}{K}}$$
### भाग 3: श्रेणीक्रम संयोजन में तुल्य धारिता\nजब $C_1$, $C_2$ और $C_3$ धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है:
- प्रत्येक संधारित्र पर आवेश $Q$ समान होता है।
- कुल विभवांतर $V$ व्यक्तिगत संधारित्रों के सिरों पर विभवांतरों का योग होता है:
$$V = V_1 + V_2 + V_3$$\nचूँकि $V = \frac{Q}{C}$, हमारे पास है:
$$\frac{Q}{C_s} = \frac{Q}{C_1} + \frac{Q}{C_2} + \frac{Q}{C_3}$$\nदोनों पक्षों को $Q$ से भाग देने पर, श्रेणीक्रम में तुल्य धारिता $C_s$ है:
$$\frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3}$$
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण हल:
1. **दिया गया डेटा:**
- वायु के साथ प्रारंभिक धारिता, $C = 8 \text{ pF} = 8 \times 10^{-12} \text{ F}$
- पदार्थ का परावैद्युतांक, $K = 6$
2. **वायु वाले समांतर प्लेट संधारित्र का सूत्र:**
वायु माध्यम वाले समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता होती है:
$$C = \frac{\varepsilon_0 A}{d}$$
जहाँ $A$ प्लेटों का क्षेत्रफल है और $d$ प्लेटों के बीच की प्रारंभिक दूरी है।
3. **परावैद्युत वाले संधारित्र का सूत्र:**
जब प्लेटों के बीच के स्थान को $K$ परावैद्युतांक वाले पदार्थ से भर दिया जाता है, तो नई धारिता $C'$ होती है:
$$C' = \frac{K \varepsilon_0 A}{d'}$$
जहाँ $d'$ प्लेटों के बीच की नई दूरी है।
4. **दी गई शर्त को लागू करना:**
प्रश्न के अनुसार, दूरी आधी कर दी जाती है:
$$d' = \frac{d}{2}$$
5. **नई धारिता समीकरण में $d'$ का मान रखना:**
$$C' = \frac{K \varepsilon_0 A}{(d / 2)} = \frac{2 K \varepsilon_0 A}{d}$$
6. **प्रारंभिक धारिता $C$ से संबंध स्थापित करना:**
चूँकि $C = \frac{\varepsilon_0 A}{d}$, हम इसे $C'$ के व्यंजक में रख सकते हैं:
$$C' = 2 \cdot K \cdot C$$
7. **अंतिम मान की गणना करना:**
$K$ और $C$ के दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$C' = 2 \times 6 \times 8 \text{ pF} = 96 \text{ pF}$$
### अंतिम उत्तर:\nसंधारित्र की नई धारिता $96 \text{ pF}$ (या $9.6 \times 10^{-11} \text{ F}$) होगी।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
* प्रारंभिक धारिता ($C_0$) = $50\text{ pF} = 50 \times 10^{-12}\text{ F}$
* प्रारंभिक विभवांतर ($V_0$) = $100\text{ V}$
* परावैद्युतांक ($K$) = $4$
* चूंकि परावैद्युत स्लैब डालने से पहले बैटरी को हटा दिया जाता है, इसलिए संधारित्र पर आवेश स्थिर रहता है ($Q = Q_0)।$
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### चरण 1: नई धारिता ज्ञात कीजिए ($C$)\nजब स्थिरांक $K$ का एक परावैद्युत स्लैब डाला जाता है, तो नई धारिता प्रारंभिक धारिता की $K$ गुना हो जाती है।
$$C = K \times C_0$$
$$C = 4 \times 50\text{ pF} = 200\text{ pF} = 2.0 \times 10^{-10}\text{ F}$$
**उत्तर 1:** नई धारिता $200\text{ pF}$ है।
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### चरण 2: नया विभवांतर ज्ञात कीजिए ($V$)\nपरावैद्युत डालने से पहले और बाद में संधारित्र पर आवेश $Q$ स्थिर रहता है।\nप्रारंभिक आवेश $Q_0 = C_0 \times V_0$
$$Q_0 = (50 \times 10^{-12}\text{ F}) \times (100\text{ V}) = 5 \times 10^{-9}\text{ C}$$\nचूंकि $Q = Q_0$, नया विभवांतर $V$ निम्नलिखित होगा:
$$V = \frac{Q}{C} = \frac{Q_0}{K \cdot C_0} = \frac{V_0}{K}$$
$$V = \frac{100\text{ V}}{4} = 25\text{ V}$$
**उत्तर 2:** प्लेटों के सिरों पर नया विभवांतर $25\text{ V}$ है।
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### चरण 3: वैद्युत स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन ज्ञात कीजिए ($\Delta U$)\nप्रारंभिक वैद्युत स्थितिज ऊर्जा ($U_0$):
$$U_0 = \frac{1}{2} C_0 V_0^2$$
$$U_0 = \frac{1}{2} \times (50 \times 10^{-12}\text{ F}) \times (100\text{ V})^2$$
$$U_0 = \frac{1}{2} \times 50 \times 10^{-12} \times 10000 = 2.5 \times 10^{-7}\text{ J} = 250\text{ nJ}$$
\nअंतिम वैद्युत स्थितिज ऊर्जा ($U$):
$$U = \frac{1}{2} C V^2 \quad \text{या} \quad U = \frac{Q_0^2}{2C} = \frac{U_0}{K}$$
$$U = \frac{2.5 \times 10^{-7}\text{ J}}{4} = 0.625 \times 10^{-7}\text{ J} = 62.5\text{ nJ}$$
\nऊर्जा में परिवर्तन (ऊर्जा में कमी):
$$\Delta U = U - U_0 = 62.5\text{ nJ} - 250\text{ nJ} = -187.5\text{ nJ}$$
**उत्तर 3:** संधारित्र में संचित वैद्युत स्थितिज ऊर्जा में $1.875 \times 10^{-7}\text{ J}$ (या $187.5\text{ nJ}$) की कमी आती है।
उत्तर (Answer): ### परिचय और सिद्धांत\nवान डी ग्राफ जनित्र एक स्थिर वैद्युत जनित्र है जिसका उपयोग कुछ मिलियन वोल्ट के क्रम के अत्यधिक उच्च विभवांतर उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
**सिद्धांत:** यह दो मुख्य स्थिर वैद्युत घटनाओं पर आधारित है:
1. तीखे सिरों का प्रभाव (कोरोना विसर्जन), जो एक गतिमान बेल्ट पर आवेश छिड़कने की अनुमति देता है।
2. यह गुण कि किसी खोखले चालक को दिया गया आवेश पूरी तरह से उसकी बाहरी सतह पर स्थानांतरित हो जाता है और अंदर के विभव की परवाह किए बिना उस पर एकसमान रूप से रहता है।
### बनावट (संरचना)\nवान डी ग्राफ जनित्र के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
* **गोलाकार धातु का खोल ($S$):** विद्युतरोधी स्तंभों पर टंगा हुआ एक बड़ा, खोखला गोलाकार चालक खोल।
* **विद्युतरोधी बेल्ट ($B$):** रबर या सिल्क जैसी विद्युतरोधी सामग्री से बनी अंतहीन बेल्ट, जो दो घिरनियों ($P_1$ और $P_2$) पर मोटर द्वारा चलाई जाती है।
* **स्प्रे कंघी ($C_1$):** निचली घिरनी के पास उच्च-तनाव विद्युत आपूर्ति (धनात्मक टर्मिनल, ~10 kV) से जुड़ी तीखे सिरों वाली धातु की कंघी।
* **संग्राहक कंघी ($C_2$):** ऊपरी घिरनी के पास गोलाकार खोल के अंदर रखी गई एक अन्य तीखी कंघी, जो खोल की आंतरिक सतह से जुड़ी होती है।
* **विसर्जन कक्ष:** रिसाव को रोकने के लिए पूरी व्यवस्था को आमतौर पर उच्च दबाव में विद्युतरोधी गैसों (जैसे नाइट्रोजन या $\text{SF}_6$) से भरे एक ग्राउंडेड स्टील टैंक में बंद किया जाता है।
### कार्यप्रणाली
1. **आवेश छिड़कना:** उच्च-वोल्टेज स्रोत निचली कंघी $C_1$ पर धनात्मक विभव बनाए रखता है। तीखे सिरों के कारण, एक मजबूत वैद्युत क्षेत्र बनता है जिससे कोरोना विसर्जन होता है। इससे आसपास की हवा आयनित हो जाती है, और धनात्मक आयन गतिमान विद्युतरोधी बेल्ट $B$ की ओर प्रतिकर्षित होते हैं।
2. **आवेश ले जाना:** बेल्ट इन धनात्मक आवेशों को ऊपर की ओर गोलाकार खोल की ओर ले जाती है।
3. **आवेश एकत्र करना:** जैसे ही आवेशित बेल्ट ऊपरी कंघी $C_2$ के पास पहुँचती है, एक और कोरोना विसर्जन होता है। कंघी से ऋणात्मक आवेश बेल्ट पर मौजूद धनात्मक आवेशों को उदासीन कर देते हैं, और बड़े खोल $S$ की बाहरी सतह पर एक समान और विपरीत धनात्मक आवेश स्थानांतरित हो जाता है।
4. **विभव में वृद्धि:** चूंकि आवेश लगातार खोल की बाहरी सतह पर जमा होता रहता है, इसलिए खोल का विभव तेजी से लाखों वोल्ट तक बढ़ जाता है।
### उपयोग\nइसका उपयोग परमाणु भौतिक्स अनुसंधान और परमाणु-विखंडन प्रयोगों के लिए आवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन, ड्यूट्रॉन, आयन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है。
उत्तर (Answer): ### वैद्युत स्थितिज ऊर्जा का परिचय\nबिन्दु आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा वह कुल कार्य है जो आवेशों को अनंत से निकाय में उनकी निर्धारित स्थितियों तक वैद्युत बलों के विरुद्ध लाने में किया जाता है।
### दो बिन्दु आवेशों के लिए व्यंजक की व्युत्पत्ति
1. **पहला आवेश ($q_1$):** मान लीजिए हम किसी बाह्य वैद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में एक बिन्दु आवेश $q_1$ को अनंत से स्थिति सदिश $\vec{r}_1$ वाले बिन्दु पर लाते हैं। चूंकि यहाँ कोई क्षेत्र नहीं है जिसके विरुद्ध कार्य करना पड़े, अतः आवेश $q_1$ को लाने में किया गया कार्य शून्य होता है:
$$W_1 = 0$$
2. **दूसरा आवेश ($q_2$):** अब, एक दूसरे बिन्दु आवेश $q_2$ को अनंत से स्थिति सदिश $\vec{r}_2$ वाले बिन्दु पर लाते हैं। आवेश $q_1$ की उपस्थिति के कारण, $\vec{r}_2$ की स्थिति पर पहले से ही एक वैद्युत विभव $V_1$ स्थापित है।
दूरी $r_{12}$ (जहाँ $r_{12} = |\vec{r}_1 - \vec{r}_2|$) पर $q_1$ के कारण विभव $V_1$ निम्नलिखित है:
$$V_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1}{r_{12}}$$
3. **किया गया कार्य ($W_2$):** आवेश $q_2$ को इस विभव में लाने में किया गया कार्य है:
$$W_2 = q_2 \times V_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r_{12}}$$
4. **कुल स्थितिज ऊर्जा ($U$):** यह किया गया कार्य निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा $U$ के रूप में संचित हो जाता है:
$$U = W_1 + W_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r_{12}}$$
### $n$ बिन्दु आवेशों के लिए विस्तार
$n$ आवेशों $q_1, q_2, \dots, q_n$ के निकाय के लिए, जिनकी स्थितियाँ सदिश $\vec{r}_1, \vec{r}_2, \dots, \vec{r}_n$ हैं, कुल स्थितिज ऊर्जा सभी संभव युग्मों के योगदानों को जोड़कर प्राप्त की जाती है।
$$U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \sum_{i < j} \frac{q_i q_j}{r_{ij}}$$\nजहाँ $r_{ij}$ आवेशों $q_i$ और $q_j$ के बीच की दूरी है, और योग उन सभी युग्मों $i < j$ पर लागू होता है ताकि दोहरी गिनती से बचा जा सके।
उत्तर (Answer): ### परिचय\nवान डी ग्राफ जनित्र रॉबर्ट जे. वान डी ग्राफ द्वारा 1931 में डिज़ाइन किया गया एक इलेक्ट्रोस्टैटिक जनरेटर है। यह कुछ मिलियन वोल्ट ($10^6\text{ V}$) के आदेश के अत्यधिक उच्च विभवांतर उत्पन्न करने में सक्षम है। ऐसे उच्च वोल्टेज का उपयोग परमाणु प्रतिक्रियाओं और अनुसंधान के लिए प्रोटॉन, ड्यूटेरॉन और आयनों जैसे आवेशित कणों को त्वरित करने के लिए किया जाता है।
### सिद्धांत\nवान डी ग्राफ जनित्र का संचालन दो मूलभूत इलेक्ट्रोस्टैटिक घटनाओं पर आधारित है:
1. **तीखे बिंदुओं की क्रिया (कोरोना डिस्चार्ज):** एक तीखे, नुकीले चालक पर आवेश का पृष्ठीय घनत्व बहुत अधिक होता है, जिससे आसपास की हवा का आयनीकरण होता है। विपरीत चिन्ह के आवेशित कण चालक पर आवेश को उदासीन कर देते हैं, जबकि समान चिन्ह के आवेश प्रतिकर्षित होते हैं (कोरोना डिस्चार्ज)।
2. **खोखले चालक का गुण:** यदि किसी आवेशित चालक को किसी खोखले चालक शेल के आंतरिक संपर्क में लाया जाता है, तो पूरा आवेश खोखले शेल की बाहरी सतह पर स्थानांतरित हो जाता है, भले ही शेल का विभव पहले से कितना भी अधिक क्यों न हो।
### बनावट\nवान डी ग्राफ जनित्र के मुख्य घटकों में शामिल हैं:
- **बड़ा गोलाकार चालक (डोम):** जमीन से काफी ऊंचाई पर इंसुलेटिंग स्तंभों पर लगाया गया एक बड़ा खोखला धात्विक गोला।
- **इंसुलेटिंग बेल्ट:** रबर या रेशम जैसी इन्सुलेट सामग्री से बनी एक अंतहीन बेल्ट, जिसे दो घिरनी ($P_1$ और $P_2$) पर एक इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा चलाया जाता है।
- **स्प्रे कॉम्ब ($C_1$):** निचले घिरनी के पास एक उच्च-तनाव बिजली की आपूर्ति (लगभग $10\text{ kV}$ का सकारात्मक टर्मिनल) से जुड़े नुकीले बिंदुओं का एक कंघी।
- **कलेक्टिंग कॉम्ब ($C_2$):** ऊपरी घिरनी के पास रखा नुकीلي बिंदुओं का एक अन्य कंघी, जो बड़े गोलाकार शेल की आंतरिक सतह से जुड़ा होता है।
- **अर्थेड मेटल चैंबर:** हवा के टूटने के माध्यम से आवेश के रिساव को रोकने के लिए पूरे उपकरण को आमतौर पर उच्च दबाव वाली गैस (जैसे नाइट्रोजन या फ़्रॉन) से भरे एक अर्थेड स्टील टैंक में संलग्न किया जाता है।
### कार्यप्रणाली
1. निचले स्प्रे कॉम्ब $C_1$ पर उच्च सकारात्मक विभव ($~10\text{ kV}$) लगाया जाता है।
2. तीखे बिंदुओं की क्रिया के कारण, कोरोना डिस्चार्ज होता है। हवा में सकारात्मक आयन उत्पन्न होते हैं, जो कॉम्ब $C_1$ द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं और चलती इंसुलेटिंग बेल्ट पर सकारात्मक आवेश छिड़कते हैं।
3. बेल्ट इन सकारात्मक आवेशों को गोलाकार शेल की ओर ऊपर की ओर ले जाती है।
4. जैसे ही आवेशित बेल्ट ऊपरी कलेक्टिंग कॉम्ब $C_2$ के पास पहुँचती है, एक और कोरोना डिस्चार्ज होता है। कॉम्ब $C_2$ के बिंदुओं पर प्रेरित नकारात्मक आवेश बेल्ट पर सकारात्मक आवेश को उदासीन कर देता है, और समतुल्य सकारात्मक आवेश बड़े धात्विक शेल की बाहरी सतह पर स्थानांतरित हो जाता है।
5. चूंकि आवेश केवल चालक की बाहरी सतह पर रहते हैं, इसलिए जैसे-जैसे अधिक से अधिक आवेश जमा होता है, शेल का विभव लगातार बढ़ता रहता है।
### उपयोग
- परमाणु भौतिकी के प्रयोगों और परमाणु विखंडन के लिए आवेशित कणों (प्रोटॉन, अल्फा कण, आयन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए।
- चिकित्सा और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए रेडियोधर्मी समस्थानिकों का उत्पादन करने के लिए।
### सीमाएं
- अधिकतम विभव आसपास की हवा (या गैस) के परावैद्युत भंजन द्वारा सीमित होता है। एक बार जब विद्युत क्षेत्र हवा की परावैद्युत शक्ति से अधिक हो जाता है, तो चिंगारी निकलती है, और आवेश लीक हो जाता है।
- यह भारी है और इसके लिए विशेष उच्च-दाब आवरण की आवश्यकता होती है।
उत्तर (Answer): ### चरण-दर-चरण हल:
**1. दिए गए मानों की पहचान करें:**
- संधारित्र $C_1$ की धारिता = $2\,\mu\text{F}$
- संधारित्र $C_2$ की धारिता = $3\,\mu\text{F}$
- संधारित्र $C_3$ की धारिता = $6\,\mu\text{F}$
- कुल लगाया गया विभवांतर, $V = 100\text{ V}$
**2. समांतर संयोजन ($C_2$ और $C_3$) की तुल्य धारिता की गणना करें:**\nमान लीजिए $C_2$ और $C_3$ की तुल्य धारिता $C_p$ है।\nसमांतर संयोजन के लिए:
$$C_p = C_2 + C_3$$
$$C_p = 3\,\mu\text{F} + 6\,\mu\text{F} = 9\,\mu\text{F}$|
**3. नेटवर्क की कुल तुल्य धारिता ($C_{eq}$) की गणना करें:**\nअब, $C_1$, $C_p$ के साथ श्रेणी क्रम में है। मान लीजिए सिरों A और B के बीच कुल तुल्य धारिता $C_{eq}$ है।\nश्रेणी संयोजन के लिए:
$$\frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_p}$$
$$\frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{2} + \frac{1}{9}$$
$$\frac{1}{C_{eq}} = \frac{9 + 2}{18} = \frac{11}{18}$$
$$C_{eq} = \frac{18}{11}\,\mu\text{F} \approx 1.64\,\mu\text{F}$|
**4. परिपथ को आपूर्ति किए गए कुल आवेश ($Q$) की गणना करें:**
$$Q = C_{eq} \times V$$
$$Q = \frac{18}{11} \times 10^6\text{ F} \times 100\text{ V} = \frac{1800}{11}\,\mu\text{C} \approx 163.64\,\mu\text{C}$|
**5. प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात करें:**
- चूकि $C_1$ मुख्य आपूर्ति के साथ श्रेणी क्रम में है, पूरा आवेश $Q$ इससे होकर गुजरता है।
$$C_1 \text{ पर आवेश } (Q_1) = \frac{1800}{11}\,\mu\text{C} \approx 163.64\,\mu\text{C}$$
- समांतर संयोजन के सिरों पर विभवांतर ($V_p$) है:
$$V_p = \frac{Q}{C_p} = \frac{1800/11}{9} = \frac{200}{11}\text{ V} \approx 18.18\text{ V}$|
- $C_2$ पर आवेश ($Q_2$):
$$Q_2 = C_2 \times V_p = 3\,\mu\text{F} \times \frac{200}{11}\text{ V} = \frac{600}{11}\,\mu\text{C} \approx 54.55\,\mu\text{C}$|
- $C_3$ पर आवेश ($Q_3$):
$$Q_3 = C_3 \times V_p = 6\,\mu\text{F} \times \frac{200}{11}\text{ V} = \frac{1200}{11}\,\mu\text{C} \approx 109.09\,\mu\text{C}$|
### अंतिम उत्तर:
- तुल्य धारिता = $\frac{18}{11}\,\mu\text{F}$ ($1.64\,\mu\text{F}$)
- $C_1$ पर आवेश = $163.64\,\mu\text{C}$
- $C_2$ पर आवेश = $54.55\,\mu\text{C}$
- $C_3$ पर आवेश = $109.09\,\mu\text{C}$
उत्तर (Answer): ### परिचय\nएक विद्युत द्विध्रुव में दो समान और विपरीत आवेश $+q$ और $-q$ होते हैं, जो एक छोटी दूरी $2a$ द्वारा अलग होते हैं। आवेशों के निकाय के कारण किसी बिंदु पर विद्युत विभव व्यक्तिगत आवेशों के कारण विभवों का अदिश योग होता है।
### व्युत्पत्ति\nमान लीजिए $AB$ एक विद्युत द्विध्रुव है जिसमें $A$ पर $-q$ और $B$ पर $+q$ आवेश हैं, जो दूरी $2a$ से अलग हैं। मान लीजिए $O$ द्विध्रुव का केंद्र है। हमें केंद्र $O$ के संबंध में ध्रुवीय निर्देशांक $(r, \theta)$ वाले बिंदु $P$ पर विद्युत विभव ज्ञात करना है, जहाँ $r$ दूरी $OP$ है और $\theta$ दूरी $OP$ और द्विध्रुव अक्ष $OA$ के बीच का कोण है।
\nमान लीजिए $r_1$ आवेश $+q$ से बिंदु $P$ की दूरी है ($BP = r_1$) और $r_2$ आवेश $-q$ से बिंदु $P$ की दूरी है ($AP = r_2$)।
\nआवेश $+q$ के कारण $P$ पर विभव है:
$$V_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r_1}$$
\nआवेश $-q$ के कारण $P$ पर विभव है:
$$V_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{-q}{r_2}$$
\nबिंदु $P$ पर कुल विद्युत विभव $V$, $V_1$ और $V_2$ का बीजगणितीय योग है:
$$V = V_1 + V_2 = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{1}{r_1} - \frac{1}{r_2} \right)$$
\nज्यामिति का उपयोग करते हुए, यदि $r >> a$, तो हम $r_1$ और $r_2$ को इस प्रकार अनुमानित कर सकते हैं:
$$r_1 \approx r - a \cos\theta$$
$$r_2 \approx r + a \cos\theta$$
\nइन मानों को विभव समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर:
$$V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{1}{r - a \cos\theta} - \frac{1}{r + a \cos\theta} \right)$$
$$V = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{(r + a \cos\theta) - (r - a \cos\theta)}{r^2 - a^2 \cos^2\theta} \right]$$
$$V = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{2a \cos\theta}{r^2 - a^2 \cos^2\theta} \right)$$
\nचूँकि $p = q \times 2a$ द्विध्रुव आघूर्ण है और एक छोटे द्विध्रुव के लिए $r^2 >> a^2 \cos^2\theta$, हम हर में $a^2 \cos^2\theta$ की उपेक्षा कर सकते हैं:
$$V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p \cos\theta}{r^2}$$
\nसदिश रूप में, इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है:
$$V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{\vec{p} \cdot \hat{r}}{r^2}$$
### विशेष स्थितियाँ
1. **अक्षीय बिंदु पर:** जब बिंदु $P$ द्विध्रुव की अक्षीय रेखा पर स्थित होता है, तो $\theta = 0^\circ$ (या $180^\circ$) होता है।
$$V = \pm \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^2}$$
2. **निरक्षीय बिंदु पर:** जब बिंदु $P$ द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर स्थित होता है, तो $\theta = 90^\circ$ होता है।
$$V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p \cos 90^\circ}{r^2} = 0$$\nअतः, एक विद्युत द्विध्रुव के निरक्षीय तल पर कहीं भी विद्युत विभव शून्य होता है।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा
- पहले संधारित्र की धारिता ($C_1$) = $2\, \mu\text{F}$
- दूसरे संधारित्र की धारिता ($C_2$) = $3\, \mu\text{F}$
- तीसरे संधारित्र की धारिता ($C_3$) = $6\, \mu\text{F}$
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### भाग (a): समांतर संयोजन में तुल्य धारिता\nजब संधारित्रों को समांतर क्रम में जोड़ा जाता है, तो तुल्य धारिता $C_p$ व्यक्तिगत धारिताओं का योग होती है:
$$C_p = C_1 + C_2 + C_3$$
\nदिए गए मान रखने पर:
$$C_p = 2\, \mu\text{F} + 3\, \mu\text{F} + 6\, \mu\text{F}$$
$$C_p = 11\, \mu\text{F}$$
**उत्तर (a):** समांतर क्रम में तुल्य धारिता $11\, \mu\text{F}$ है।
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### भाग (b): श्रेणी संयोजन में तुल्य धारिता\nजब संधारित्रों को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है, तो तुल्य धारिता $C_s$ के व्युत्क्रम का योग व्यक्तिगत धारिताओं के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है:
$$\frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3}$$
\nदिए गए मान रखने पर:
$$\frac{1}{C_s} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} + \frac{1}{6}$$
\nलघुत्तम (जो कि 6 है) लेने पर:
$$\frac{1}{C_s} = \frac{3 + 2 + 1}{6} = \frac{6}{6} = 1\, \mu\text{F}^{-1}$$
\nव्युत्क्रम लेने पर:
$$C_s = 1\, \mu\text{F}$$
**उत्तर (b):** श्रेणी क्रम में तुल्य धारिता $1\, \mu\text{F}$ है।
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### भाग (c): $12\text{ V}$ बैटरी से जुड़े समांतर संयोजन में प्रत्येक संधारित्र पर आवेश\nसमांतर संयोजन में, प्रत्येक संधारित्र पर विभवांतर ($V$) समान होता है और आपूर्ति वोल्टेज के बराबर होता है:
$$V = 12\text{ V}$$
\nकिसी भी संधारित्र पर आवेश $q$ निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$$q = C \times V$$
1. **पहले संधारित्र पर आवेश ($q_1$):**
$$q_1 = C_1 \times V = 2\, \mu\text{F} \times 12\text{ V} = 24\, \mu\text{C}$$
2. **दूसरे संधारित्र पर आवेश ($q_2$):**
$$q_2 = C_2 \times V = 3\, \mu\text{F} \times 12\text{ V} = 36\, \mu\text{C}$$
3. **तीसरे संधारित्र पर आवेश ($q_3$):**
$$q_3 = C_3 \times V = 6\, \mu\text{F} \times 12\text{ V} = 72\, \mu\text{C}$$
**उत्तर (c):** $2\, \mu\text{F}$, $3\, \mu\text{F}$ और $6\, \mu\text{F}$ संधारित्रों पर आवेश क्रमशः $24\, \mu\text{C}$, $36\, \mu\text{C}$ और $72\, \mu\text{C}$ हैं।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा और विन्यास
- मान लीजिए समांतर प्लेट संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल $A$ है।
- दोनों प्लेटों के बीच की दूरी $d$ है।
- प्लेटों का पृष्ठ आवेश घनत्व $\sigma = \frac{q}{A}$ है, जहाँ $q$ प्लेटों पर आवेश है।
- प्लेटों के बीच $t$ मोटाई ($t < d$) और $k$ परावैद्युतांक की एक परावैद्युत पट्टी रखी जाती है।
- प्लेटों के बीच निर्वात/वायु स्थान की मोटाई $(d - t)$ है।
### निर्वात और परावैद्युत में वैद्युत क्षेत्र
1. **वायु/निर्वात में वैद्युत क्षेत्र ($E_0$):** वायु अंतराल में प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र निम्नलिखित है:
$$E_0 = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} = \frac{q}{\varepsilon_0 A}$$
2. **परावैद्युत पट्टी के अंदर वैद्युत क्षेत्र ($E$):** जब परावैद्युत को ध्रुवीकृत किया जाता है, तो पट्टी के अंदर वैद्युत क्षेत्र $k$ गुना कम हो जाता है:
$$E = \frac{E_0}{k} = \frac{q}{k \varepsilon_0 A}$$
### प्लेटों के बीच विभवांतर\nप्लेटों के बीच कुल विभवांतर $V$ वैद्युत क्षेत्र का रेखीय समाकलन है, जिसे वायु वाले क्षेत्र और परावैद्युत पट्टी वाले क्षेत्र में विभाजित किया जा सकता है:
$$V = (E_0 \times \text{वायु की मोटाई}) + (E \times \text{परावैद्युत की मोटाई})$$
$$V = E_0(d - t) + E(t)$$
\nसमीकरण में $E_0$ और $E$ के मान रखने पर:
$$V = \frac{q}{\varepsilon_0 A} (d - t) + \frac{q}{k \varepsilon_0 A} (t)$$
$\frac{q}{\varepsilon_0 A}$ को उभयनिष्ठ लेने पर:
$$V = \frac{q}{\varepsilon_0 A} \left[ (d - t) + \frac{t}{k} \right]$$
### धारिता की व्युत्पत्ति\nसंधारित्र की धारिता $C$, आवेश $q$ और विभवांतर $V$ का अनुपात होती है:
$$C = \frac{q}{V}$$
$V$ का व्यंजक रखने पर:
$$C = \frac{q}{\frac{q}{\varepsilon_0 A} \left[ (d - t) + \frac{t}{k} \right]}$$
$$C = \frac{\varepsilon_0 A}{d - t + \frac{t}{k}}$$
\nयह परावैद्युत पट्टी वाले समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए अभीष्ट व्यंजक है।
उत्तर (Answer): जब आघूर्ण $p$ वाले एक विद्युत द्विध्रुव को एकसमान विद्युत क्षेत्र $E$ में रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण कार्य करता है जो उसे क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयास करता है। इस बल आघूर्ण का परिमाण है:
$$\tau = pE \sin\theta$$\nजहाँ $\theta$ द्विध्रुव आघूर्ण सदिश और विद्युत क्षेत्र सदिश के बीच का कोण है।
\nइस बल आघूर्ण के विरुद्ध द्विध्रुव को एक अल्पांश कोण $d\theta$ घुमाने में किया गया अल्प कार्य है:
$$dW = \tau \, d\theta = pE \sin\theta \, d\theta$$
\nद्विध्रुव को प्रारंभिक कोण $\theta_1$ से अंतिम कोण $\theta_2$ तक घुमाने में किए गए कुल कार्य को प्राप्त करने के लिए हम समाकलन करते हैं:
$$W = \int_{\theta_1}^{\theta_2} pE \sin\theta \, d\theta = pE [-\cos\theta]_{\theta_1}^{\theta_2} = pE (\cos\theta_1 - \cos\theta_2)$|
\nकिया गया यह कार्य निकाय में स्थितिज ऊर्जा ($U$) के रूप में संचित हो जाता है। यदि संदर्भ स्थिति $\theta_1 = 90^\circ$ ली जाए जहाँ स्थितिज ऊर्जा शून्य है और अंतिम कोण $\theta_2 = \theta$ हो, तो स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक होगा:
$$U(\theta) = -pE \cos\theta$$
\nसदिश रूप में, इसे द्विध्रुव आघूर्ण और विद्युत क्षेत्र सदिश के अदिश गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है:
$$U = -\vec{p} \cdot \vec{E}$|
**संतुलन की शर्तें:**
1. **स्थायी संतुलन:** जब $\theta = 0^\circ$ होता है, तो स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है ($U = -pE$)। इस स्थिति में द्विध्रुव विद्युत क्षेत्र के समानांतर होता है और थोड़ा विक्षेपित करने पर यह पुनः अपनी मूल स्थिति में लौटने का प्रयास करता है।
2. **अस्थायी संतुलन:** जब $\theta = 180^\circ$ होता है, तो स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है ($U = +pE$)। यहाँ द्विध्रुव विद्युत क्षेत्र के प्रतिसमानांतर होता है, और थोड़ा सा भी विक्षेप इसे पूरी तरह से पलट देता है।
उत्तर (Answer): **दिया गया है:**\nपहले संधारित्र की धारिता, $C_1 = 3\,\mu\text{F} = 3 \times 10^{-6}\,\text{F}$\nदूसरे संधारित्र की धारिता, $C_2 = 6\,\mu\text{F} = 6 \times 10^{-6}\,\text{F}$\nबैटरी का विभवांतर, $V = 9\,\text{V}$
**चरण 1: श्रेणीक्रम संयोजन में तुल्य धारिता ($C_s$) की गणना करना**\nश्रेणीक्रम में जुड़े दो संधारित्रों की तुल्य धारिता का सूत्र है:
$$\frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2}$$
\nमान रखने पर:
$$\frac{1}{C_s} = \frac{1}{3} + \frac{1}{6}$$
\nलघुत्तम समापवर्त्य (6) लेकर हल करने पर:
$$\frac{1}{C_s} = \frac{2 + 1}{6} = \frac{3}{6} = \frac{1}{2}$$
\nव्युत्क्रम लेने पर $C_s$ का मान प्राप्त होता है:
$$C_s = 2\,\mu\text{F} = 2 \times 10^{-6}\,\text{F}$$
**चरण 2: बैटरी द्वारा आपूर्ति किए गए कुल आवेश ($Q$) की गणना करना**\nश्रेणीक्रम में कुल आवेश प्रत्येक संधारित्र पर आवेश के बराबर होता है और इसका सूत्र है:
$$Q = C_s \times V$$
$C_s$ और $V$ का मान रखने पर:
$$Q = (2 \times 10^{-6}\,\text{F}) \times 9\,\text{V}$$
$$Q = 18 \times 10^{-6}\,\text{C} = 18\,\mu\text{C}$$
**उत्तर:**\nसंयोजन की तुल्य धारिता $2\,\mu\text{F}$ है तथा बैटरी द्वारा दी गई कुल आवेश की मात्रा $18\,\mu\text{C}$ है।
उत्तर (Answer): समविभव पृष्ठ उस पृष्ठ को कहा जाता है जिसके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव का मान एकसमान होता है। दूसरे शब्दों में, समविभव पृष्ठ पर स्थित किन्हीं भी दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर शून्य होता है।
**समविभव पृष्ठों के दो महत्वपूर्ण गुण निम्नलिखित हैं:**
1. **समविभव पृष्ठ पर किसी परीक्षण आवेश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किया गया कार्य शून्य होता है:** परिभाषा के अनुसार, समविभव पृष्ठ पर किन्हीं भी दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर शून्य होता है ($V_A - V_B = 0$)। चूँकि किसी आवेश $q_0$ को ले जाने में किया गया कार्य $W = q_0(V_A - V_B)$ होता है, इसलिए किया गया कार्य शून्य होगा। इसका अर्थ यह है कि विद्युत क्षेत्र की दिशा हमेशा पृष्ठ के लंबवत होनी चाहिए, अन्यथा पृष्ठ के अनुदिश विद्युत क्षेत्र का एक घटक मौजूद होगा जिससे कार्य करना पड़ेगा।
2. **विद्युत क्षेत्र रेखाएँ हमेशा समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर अभिलंबवत (लंबवत) होती हैं:** यह गुण पहले गुण का ही परिणाम है। यदि विद्युत क्षेत्र रेखाएँ पृष्ठ के लंबवत नहीं होतीं, तो विद्युत क्षेत्र का पृष्ठ के समानांतर एक घटक होता, जो आवेश पर बल लगाता और कार्य करवाता। चूँकि समविभव पृष्ठ पर विभव नियत रहता है और कोई कार्य नहीं किया जाता है, इसलिए विद्युत क्षेत्र रेखाओं को पृष्ठ के साथ 90 डिग्री का कोण बनाना आवश्यक है ताकि समानांतर घटक शून्य हो सके।
उत्तर (Answer): समविभव पृष्ठ वह पृष्ठ है जिसके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव का मान एक समान होता है। दूसरे शब्दों में, समविभव पृष्ठ पर किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर शून्य होता है।
\nसमविभव पृष्ठ के दो महत्वपूर्ण गुण निम्नलिखित हैं:
1. **परीक्षण आवेश को ले जाने में किया गया कार्य शून्य होता है:** यदि किसी परीक्षण आवेश को समविभव पृष्ठ पर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाया जाए, तो किया गया कार्य शून्य होता है क्योंकि $W = q \Delta V$ और $\Delta V = 0$ होता है।
2. **विद्युत क्षेत्र रेखाएँ हमेशा समविभव पृष्ठ के लम्बवत होती हैं:** समविभव पृष्ठ के किसी भी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र सदिश $\mathbf{E}$ हमेशा पृष्ठ के अभिलंबवत होता है। यदि इसका कोई घटक पृष्ठ के समांतर होता, तो पृष्ठ के अनुदिश आवेश को गति कराने के लिए कार्य करना पड़ता, जो समविभव पृष्ठ की परिभाषा के विरुद्ध है। इसके अलावा, संबंध $E = -\frac{dV}{dr}$ यह दर्शाता है कि विद्युत विभव में सबसे तीव्र कमी की दिशा समविभव पृष्ठ के लम्बवत होती है।
उत्तर (Answer): दिए गए आँकड़े:\nधारिता $C = 12\text{ pF} = 12 \times 10^{-12}\text{ F}$\nविभवांतर $V = 50\text{ V}$
\nसंधारित्र में संचित स्थिरवैद्युत ऊर्जा $U$ का सूत्र:
$$U = \frac{1}{2} C V^2$$
\nमान रखने पर:
$$U = \frac{1}{2} \times (12 \times 10^{-12}) \times (50)^2$$
$$U = 6 \times 10^{-12} \times 2500$$
$$U = 15000 \times 10^{-12}\text{ J} = 1.5 \times 10^{-8}\text{ J}$$
\nअतः, संधारित्र में संचित स्थिरवैद्युत ऊर्जा $1.5 \times 10^{-8}\text{ जूल}$ है।