मुख्य सूत्र (Key Formulas)
कक्षा 12 भौतिक विज्ञान - गतिमान आवेश और चुंबकत्व (Moving Charges and Magnetism) - त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स
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1. ओरेस्टेड का प्रयोग (Oersted's Experiment)
- विद्युत धारा ले जाने वाले चालक के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
2. लॉरेंज बल (Lorentz Force)
जब कोई आवेशित कण ($q$) विद्युत क्षेत्र ($\vec{E}$) और चुंबकीय क्षेत्र ($\vec{B}$) दोनों में गति करता है, तो उस पर लगने वाला कुल बल लॉरेंज बल कहलाता है।
- सूत्र: $\vec{F} = q\vec{E} + q(\vec{v} \times \vec{B})$
- अदिश रूप (केवल चुंबकीय बल): $F = qvB\sin\theta$
(यहाँ $\theta$ वेग $\vec{v}$ और चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ के बीच का कोण है)
3. चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर बल
- वृत्ताकार मार्ग की त्रिज्या ($r$):
$r = \frac{mv}{qB} = \frac{p}{qB}$
$T = \frac{2\pi m}{qB}$
$f = \frac{qB}{2\pi m}$
4. बायो-सावर्ट का नियम (Biot-Savart Law)
अल्पांश धारावाही चालक ($Id\l$) के कारण किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ($dB$):
- सूत्र: $dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{Idl \sin\theta}{r^2}$
- निर्वात की चुंबकशीलता ($\mu0$): $\mu0 = 4\pi \times 10^{-7} \, \text{T m A}^{-1}$
5. बायो-सावर्ट नियम के अनुप्रयोग (Applications of Biot-Savart Law)
- वृत्ताकार धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र:
$B = \frac{\mu_0 N I}{2r}$ (जहाँ $N$ फेरों की संख्या है)
- धारावाही सीधे चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र:
$B = \frac{\mu0 I}{4\pi r} (\sin\phi1 + \sin\phi_2)$
(अनंत लंबाई के तार के लिए: $B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}$)
6. एम्पीयर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law)
किसी बंद लूप के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन, लूप द्वारा घिरी कुल धारा ($I$) और $\mu_0$ का गुणनफल होता है।
- सूत्र: $\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I$
7. एम्पीयर नियम के अनुप्रयोग (Applications)
- अनंत लंबाई के सीधे धारावाही solenoid (परिनालिका) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र:
$B = \mu_0 n I$
(जहाँ $n = \frac{N}{l}$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है)
- टोराइड (Toroid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र:
$B = \mu_0 n I$
8. दो समांतर धारावाही चालकों के बीच बल
दो सीधे लंबे समांतर चालकों (जिनमें धाराएं $I1$ और $I2$ बह रही हैं और उनके बीच की दूरी $r$ है) के प्रति एकांक लंबाई पर बल:
- सूत्र: $\frac{F}{l} = \frac{\mu0 I1 I_2}{2\pi r}$
- नियम: यदि धाराएं एक ही दिशा में हों, तो चालक आकर्षित होते हैं; विपरीत दिशा में होने पर प्रतिकर्षित होते हैं।
9. चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही लूप पर बल आघूर्ण (Torque)
जब किसी आयताकार धारावाही कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है:
- बल आघूर्ण ($\tau$): $\tau = N I A B \sin\theta$
(यहाँ $A$ क्षेत्रफल, $N$ फेरों की संख्या और $\theta$ अभिलंब तथा क्षेत्र के बीच का कोण है)
- चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण ($M$):
$M = N I A$
- सदिश रूप में: $\vec{\tau} = \vec{M} \times \vec{B}$
10. चल कुंडली धारामापी (Moving Coil Galvanometer)
- साम्यावस्था में: $k\theta = NIAB$
(जहाँ $k$ निलंबन की मरोड़ नियतांक है)
$I_s = \frac{\theta}{I} = \frac{NAB}{k}$
- वल्टेज सुग्राहिता ($V_s$):
$V_s = \frac{\theta}{V} = \frac{NAB}{kR}$
11. गैल्वेनोमीटर का रूपांतरण (Conversion of Galvanometer)
- गैल्वेनोमीटर को अमीटर (Ammeter) में बदलना:
समानांतर क्रम में एक छोटा प्रतिरोध (शंट - $S$) जोड़कर।
$S = \frac{Ig G}{I - Ig}$
- गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर (Voltmeter) में बदलना:
श्रेणी क्रम में एक उच्च प्रतिरोध ($R$) जोड़कर।
$R = \frac{V}{I_g} - G$
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माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 गतिमान आवेश और चुंबकत्व
चुम्बकीय बल का परिचय
ऑरेस्टेड का प्रयोग (विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव)
लॉरेंज बल (विद्युत और चुम्बकीय बल का संयोजन)
चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर बल ($F = q(v \times B)$)
बायो-सावर्ट नियम
नियम का कथन और गणितीय सूत्र
धारा अल्पांश के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
वृत्ताकार धारावाही लूप के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र
एम्पीयर का परिपथीय नियम
नियम का कथन और गणितीय रूप
सीधे अनंत लम्बाई के धारावाही तार के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र
टोरॉइड (Toroid) के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र
एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में आवेशित कण की गति
गति का पथ (वृत्ताकार या कुंडलित)
आवर्तकाल और आवृत्ति
साइक्लोट्रॉन (सिद्धार्थ, कार्यप्रणाली और सीमाएँ)
चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल
बल का सूत्र ($F = I(l \times B)$)
दो समानांतर धारावाही चालकों के बीच बल
एक एम्पीयर की परिभाषा
चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही लूप पर बलाघूर्ण
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर (Moving Coil Galvanometer)
बनावट और कार्यप्रणाली
धारा सुग्राहिता
गैल्वेनोमीटर का एमीटर में रूपांतरण
गैल्वेनोमीटर का वोल्टमीटर में रूपांतरण
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### **बायोट-सावर्ट नियम और चुंबकीय क्षेत्र की गणना**
#### **1. बायोट-सावर्ट नियम का कथन**\nबायोट-सावर्ट नियम के अनुसार, किसी अल्प लंबाई $dl$ जिसमें धारा $I$ प्रवाहित हो रही है, के कारण उससे $r$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र $dB$ निम्नलिखित बातों के समानुपाती होता है:
- धारा $I$ के
- अल्पांश की लंबाई $dl$ के
- अल्पांश और बिंदु को मिलाने वाली रेखा के बीच के कोण की ज्या ($\sin\theta$) के
- तथा दूरी $r$ के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
\nगणितीय रूप में:
$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin\theta}{r^2}$$
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#### **2. वृत्ताकार लूप की अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक**\nमाना $R$ त्रिज्या का एक वृत्ताकार लूप है जिसमें धारा $I$ बह रही है। केंद्र $O$ से $x$ दूरी पर उसकी अक्ष पर एक बिंदु $P$ है।
- समरूपता के कारण, लंबवत घटक ($dB \cos\phi$) परस्पर निरस्त हो जाते हैं और केवल अक्षीय घटक ($dB \- \sin\phi$) जुड़ जाते हैं।
- कुल चुंबकीय क्षेत्र $B$ के लिए समाकलन करने पर:
$$B = \frac{\mu_0 I R^2}{2(R^2 + x^2)^{3/2}}$$
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#### **3. आंकिक प्रश्न का हल**
**दिया गया है:**
- कुंडली की त्रिज्या ($R$) = $10 \text{ सेमी} = 0.1 \text{ मीटर}$
- फेरों की संख्या ($N$) = $50$
- धारा ($I$) = $2 \text{ एम्पीयर}$
- निर्वात की चुंबकशीलता ($\mu_0$) = $4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1}$
**सूत्र:**\nकेंद्र पर ($x = 0$) चुंबकीय क्षेत्र:
$$B = \frac{\mu_0 N I}{2 R}$$
**गणना:**
$$B = \frac{(4\pi \times 10^{-7}) \times 50 \times 2}{2 \times 0.1}$|
$$B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 100}{0.2}$$
$$B = 20\pi \times 10^{-5} \text{ T} = 6.28 \times 10^{-4} \text{ Tesla}$|
**उत्तर:**\nकुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $6.28 \times 10^{-4} \text{ टेस्ला}$ है।
उत्तर (Answer): ### एम्पीयर का परिपथीय नियम कथन
\nएम्पीयर का परिपथीय नियम कहता है कि किसी बंद लूप के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र सदिश $\vec{B}$ का रेखा समाकलन, उस बंद लूप से घिरे पृष्ठ से गुजरने वाली कुल शुद्ध धारा $I_{\text{enclosed}}$ का $\mu_0$ गुना होता है।
\nगणितीय रूप में, इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{\text{enclosed}}$$\nजहाँ:
* $\vec{B}$ चुंबकीय क्षेत्र है।
* $d\vec{l}$ बंद लूप (एम्पीरियन लूप) पर लंबाई का एक छोटा अवयव है।
* $\mu_0$ मुक्त आकाश की पारगम्यता है ($4\pi \times 10^{-7}\;\text{T}\cdot\text{m}/\text{A}$)।
* $I_{\text{enclosed}}$ लूप द्वारा घिरी कुल धारा है।
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### लंबे सीधे चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र की व्युत्पत्ति
\nस्थिर धारा $I$ ले जाने वाले एक लंबे, सीधे चालक पर विचार करें। हमें चालक से लंबवत दूरी $r$ पर चुंबकीय क्षेत्र $B$ ज्ञात करना है।
1. **एम्पीरियन लूप का चयन:** समरूपता के कारण, एक लंबे सीधे धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं चालक पर केंद्रित संकेंद्रित वृत्त होती हैं। हम तार पर केंद्रित और तार के लंबवत तल में स्थित $r$ त्रिज्या के एक वृत्ताकार एम्पीरियन लूप को चुनते हैं।
2. **एम्पीयर का नियम लागू करना:** इस वृत्ताकार लूप पर लंबाई के एक छोटे अवयव $d\vec{l}$ पर विचार करें। लूप पर किसी भी बिंदु पर, चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ वृत्त के स्पर्शरेखा होता है, और लंबाई का अवयव $d\vec{l}$ भी स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है। इसलिए, $\vec{B}$ और $d\vec{l}$ के बीच का कोण $\theta$ $0^\circ$ है।
3. **रेखा समाकलन का मूल्यांकन:**
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \oint B \, dl \cos 0^\circ = \oint B \, dl$$
4. **चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण की स्थिरता:** वृत्ताकार लूप पर प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र $B$ का परिमाण समान होता है क्योंकि प्रत्येक बिंदु धारावाही तार से समान दूरी ($r$) पर है। इस प्रकार, $B$ को समाकलन चिह्न से बाहर निकाला जा सकता है:
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = B \oint dl$$
5. **पथ का योग:** समाकलन $\oint dl$ वृत्ताकार एम्पीरियन लूप की कुल परिधि का प्रतिनिधित्व करता है, जो $2\pi r$ के बराबर है:
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = B (2\pi r)$$
6. **एम्पीयर के नियम के साथ समतुल्यता:** एम्पीयर के परिपथीय नियम के अनुसार, यह रेखा समाकलन $\mu_0 I$ के बराबर है:
$$B (2\pi r) = \mu_0 I$$
7. **अंतिम व्यंजक:** $B$ के लिए हल करने पर, हमें प्राप्त होता है:
$$B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}$$
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध ($G$) = $15\;\Omega$
- पूर्ण-स्केल विक्षेप के लिए धारा ($I_g$) = $4\;\text{mA} = 4 \times 10^{-3}\;\text{A}$
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### भाग (a): $0$ से $6\;\text{V}$ परास के वोल्टमीटर में रूपांतरण
\nगैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए, गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणी क्रम में एक उच्च प्रतिरोध ($R$) जोड़ा जाना चाहिए।
- वांछित अधिकतम वोल्टेज परास ($V$) = $6\;\text{V}$
**सूत्र:**
$$V = I_g (G + R)$|
**चरण-दर-चरण गणना:**
1. दिए गए मानों को सूत्र में प्रतिस्थापित करें:
$$6 = (4 \times 10^{-3}) (15 + R)$$
2. $(15 + R)$ के लिए हल करें:
$$15 + R = \frac{6}{4 \times 10^{-3}}$$
$$15 + R = \frac{6000}{4} = 1500\;\Omega$$
3. प्रतिरोध $R$ की गणना करें:
$$R = 1500 - 15 = 1485\;\Omega$$
**निष्कर्ष (a):** गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणी क्रम में $1485\;\Omega$ का उच्च प्रतिरोध जोड़ा जाना चाहिए।
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### भाग (b): $0$ से $6\;\text{A}$ परास के एमीटर में रूपांतरण
\nगैल्वेनोमीटर को एमीटर में बदलने के लिए, गैल्वेनोमीटर के साथ समानांतर क्रम में एक छोटा प्रतिरोध (शंट) $S$ जोड़ा जाना चाहिए।
- वांछित अधिकतम धारा परास ($I$) = $6\;\text{A}$
**सूत्र:**
$$S = \frac{I_g \cdot G}{I - I_g}$|
**चरण-दर-चरण गणना:**
1. अंश और हर में मान रखें:
$$\text{अंश} = (4 \times 10^{-3}) \times 15 = 60 \times 10^{-3} = 0.06\;\text{V}$$
$$\text{हर} = 6 - (4 \times 10^{-3}) = 6 - 0.004 = 5.996\;\text{A}$|
2. शंट प्रतिरोध $S$ की गणना करें:
$$S = \frac{0.06}{5.996} \approx 0.010\;\Omega$$
**निष्कर्ष (b):** गैल्वेनोमीटर के साथ समानांतर क्रम में लगभग $0.010\;\Omega$ का कम प्रतिरोध (शंट) जोड़ा जाना चाहिए।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- फेरों की संख्या ($N$) = $20$
- कुंडली की त्रिज्या ($R$) = $10\text{ cm} = 0.1\text{ m}$
- चुंबकीय क्षेत्र ($B$) = $0.10\text{ T}$
- धारा ($I$) = $5.0\text{ A}$
- अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल ($A$) = $10^{-5}\text{ m}^2$
- इलेक्ट्रॉन घनत्व ($n$) = $10^{29}\text{ m}^{-3}$
- मूल आवेश ($e$) = $1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$
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### (a) कुंडली पर कुल बल आघूर्ण
1. **सूत्र**: एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर लगने वाला बल आघूर्ण $\tau$ होता है:
$$\tau = N I A B \sin\theta$$
जहाँ $A$ वृत्ताकार कुंडली का क्षेत्रफल ($\pi R^2$) है और $\theta$ चुंबकीय क्षेत्र तथा कुंडली के तल के अभिलंब के बीच का कोण है।
2. **क्षेत्रफल ($A$) की गणना**:
$$A = \pi R^2 = 3.1416 \times (0.1)^2 = 3.1416 \times 0.01 = 0.0314\text{ m}^2$$
3. **कोण ($\theta$) की गणना**: चुंबकीय क्षेत्र कुंडली के तल के लंबवत है, जिसका अर्थ है कि कुंडली का अभिलंब सदिश चुंबकीय क्षेत्र के समांतर है। अतः $\theta = 0^\circ$ है।
4. **मान रखना**:
$$\tau = 20 \times 5.0 \times 0.0314 \times 0.10 \times \sin(0^\circ)$$
चूँकि $\sin(0^\circ) = 0$ है:
$$\tau = 0\text{ N}\cdot\text{m}$$
**उत्तर (a)**: कुंडली पर कुल बल आघूर्ण **$0\text{ N}\cdot\text{m}$** है।
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### (b) कुंडली पर कुल बल
1. **अवधारणा**: एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखी गई बंद धारा लूप पर कुल चुंबकीय बल शून्य होता है क्योंकि लूप के विपरीत खंडों पर बल सदिश रूप से एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।
2. **उत्तर (b)**: कुंडली पर कुल बल **$0\text{ N}$** है।
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### (c) कुंडली के प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर औसत बल
1. **अनुगमन वेग ($v_d$) का सूत्र**: विद्युत धारा और अनुगमन वेग के बीच संबंध है:
$$I = n e A v_d$$
$v_d$ के लिए हल करने पर:
$$v_d = \frac{I}{n e A}$$
2. **मान रखना**:
$$v_d = \frac{5.0}{10^{29} \times (1.6 \times 10^{-19}) \times 10^{-5}}$$
$$v_d = \frac{5.0}{10^{5}} = 5.0 \times 10^{-5}\text{ m/s}$$
3. **इलेक्ट्रॉन पर चुंबकीय बल ($F_e$) का सूत्र**: चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल लोरेंज बल नियम द्वारा दिया जाता है:
$$F_e = q v_d B \sin\phi$$
चूँकि इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत होता है, $\phi = 90^\circ$ और $\sin(90^\circ) = 1$:
$$F_e = e v_d B$$
4. **मान रखना**:
$$F_e = (1.6 \times 10^{-19}\text{ C}) \times (5.0 \times 10^{-5}\text{ m/s}) \times (0.10\text{ T})$$
$$F_e = 8.0 \times 10^{-25}\text{ N}$$
**उत्तर (c)**: प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर औसत बल **$8.0 \times 10^{-25}\text{ N}$** है।
उत्तर (Answer): ### बायो-सेवर्ट नियम
\nबायो-सेवर्ट नियम एक गणितीय व्यंजक है जो स्थिर विद्युत धारा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का वर्णन करता है। इसके अनुसार, किसी धारा अल्पांश ($I d\vec{l}$) के कारण किसी बिंदु $P$ पर चुंबकीय क्षेत्र का अंश ($d\vec{B}$) धारा ($I$), लंबाई अल्पांश के परिमाण ($dl$), लंबाई अल्पांश सदिश और बिंदु को जोड़ने वाले विस्थापन सदिश ($\vec{r}$) के बीच के कोण की साइन ($\sin\theta$) के समानुपाती होता है, तथा धारा अल्पांश से बिंदु की दूरी ($r$) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
\nगणितीय रूप में:
$$d\vec{B} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I (d\vec{l} \times \vec{r})}{r^3}$|\nपरिमाण रूप में:
$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin\theta}{r^2}$$\nजहाँ $\mu_0$ निर्वात की पारगम्यता है।
### वृत्ताकार कुंडली के अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र की व्युत्पत्ति
1. **विचार**: $R$ त्रिज्या और $I$ स्थिर धारा वाली $N$ फेरों की एक वृत्ताकार कुंडली पर विचार कीजिए। मान लीजिए कुंडली का अक्ष X-अक्ष है। हमें केंद्र $O$ से अक्ष के अनुदिश $x$ दूरी पर स्थित बिंदु $P$ पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करना है।
2. **धारा अल्पांश**: कुंडली के शीर्ष पर एक छोटे धारा अल्पांश $Idl$ पर विचार कीजिए। इस अल्पांश से बिंदु $P$ की दूरी $r$ है:
$$r = \sqrt{R^2 + x^2}$$
3. **बायो-सेवर्ट नियम लागू करना**: धारा अल्पांश $Id\vec{l}$ और स्थिति सदिश $\vec{r}$ के बीच का कोण $90^\circ$ है। अतः बिंदु $P$ पर इस अल्पांश के कारण चुंबकीय क्षेत्र $dB$ का परिमाण है:
$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin(90^\circ)}{r^2} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl}{R^2 + x^2}$$
4. **घटकों का वियोजन**: $dB$ की दिशा $Id\vec{l}$ और $\vec{r}$ वाले तल के लंबवत होती है। मान लीजिए $\alpha$ अक्ष और सदिश $dB$ के बीच का कोण है। $dB$ को दो समकोण घटकों में वियोजित करने पर:
- अक्ष के अनुदिश घटक: $dB \cos\alpha$
- अक्ष के लंबवत घटक: $dB \sin\alpha$
5. **समरूपता तर्क**: शीर्ष पर प्रत्येक धारा अल्पांश के लिए, नीचे एक व्यासतः विपरीत अल्पांश होता है जिसके लंबवत घटक ($dB \sin\alpha$) परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होते हैं, अतः वे एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। केवल अक्षीय घटक ($dB \cos\alpha$) कुल चुंबकीय क्षेत्र में योगदान करते हैं।
6. **समाकलन**: कुल चुंबकीय क्षेत्र $B$ वृत्ताकार लूप के चारों ओर के सभी अक्षीय घटकों का योग है:
$$B = \int dB \cos\alpha$$
त्रिभुज की ज्यामिति से, $\cos\alpha = \frac{R}{r} = \frac{R}{\sqrt{R^2 + x^2}}$
$dB$ और $\cos\alpha$ के मान रखने पर:
$$B = \int \left( \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl}{R^2 + x^2} \right) \left( \frac{R}{\sqrt{R^2 + x^2}} \right)$$
$$B = \frac{\mu_0 I R}{4\pi (R^2 + x^2)^{3/2}} \int dl$$
7. **अंतिम व्यंजक**: चूकि $N$ फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली की कुल लंबाई $\int dl = 2\pi R N$ है:
$$B = \frac{\mu_0 I R}{4\pi (R^2 + x^2)^{3/2}} (2\pi R N)$$
$$B = \frac{\mu_0 I R^2 N}{2 (R^2 + x^2)^{3/2}}$$
उत्तर (Answer): ### सिद्धांत\nचल कुंडली गैल्वेनोमीटर इस सिद्धांत पर कार्य करता है कि **एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारा-वाही कुंडली एक चुंबकीय बल आघूर्ण का अनुभव करती है**, जो कुंडली को घुमाने का प्रयास करता है, और विक्षेप का कोण कुंडली में प्रवाहित धारा के सीधे आनुपातिक होता है।
### बनावट\nचल कुंडली गैल्वेनोमीटर के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
1. **चुंबकीय क्षेत्र प्रणाली:** बेलनाकार ध्रुव खंडों वाला एक मजबूत स्थायी नाल चुंबक (horse-shoe magnet) एक रेडियल चुंबकीय क्षेत्र प्रदान करता है।
2. **कुंडली:** अचुंबकीय धात्विक फ्रेम (आमतौर पर एल्यूमीनियम) पर लिपटे अछूते तांबे के तार के बड़ी संख्या में फेरों वाली एक कुंडली।
3. **नरम लोहे का क्रोड:** चुंबकीय क्षेत्र को रेडियल बनाने और चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति को बढ़ाने के लिए कुंडली के अंदर सममित रूप से एक बेलनाकार नरम लोहे का क्रोड रखा जाता है।
4. **निलंबन प्रणाली:** कुंडली को एक चल मरोड़ शीर्ष (torsion head) से एक महीन फॉस्फर-ब्रॉन्ज पट्टी द्वारा लटकाया जाता है।
### कार्यप्रणाली और सिद्धांत
- जब $N$ फेरों और $A$ क्षेत्रफल वाली कुंडली में $I$ धारा प्रवाहित होती है, जो $B$ तीव्रता के चुंबकीय क्षेत्र में रखी है, तो कुंडली पर लगने वाला चुंबकीय बल आघूर्ण $\tau$ इस प्रकार है:
$$\tau = NIAB \sin\alpha$$
- बेलनाकार ध्रुव खंडों और नरम लोहे के क्रोड के कारण, चुंबकीय क्षेत्र हर जगह **रेडियल** होता है ($\alpha = 90^\circ$)। इसलिए, विक्षेपक बल आघूर्ण अधिकतम और स्थिर हो जाता है:
$$\tau_{deflecting} = NIAB$$
- यह विक्षेपक बल आघूर्ण कुंडली को घुमाता है, जिससे निलंबन पट्टी मरोड़ जाती है। मरोड़ी गई पट्टी मरोड़ के कोण $\theta$ के आनुपातिक एक विपरीत पुन:स्थापना बल आघूर्ण उत्पन्न करती है:
$$\tau_{restoring} = k\theta$$
- संतुलन की स्थिति में, विक्षेपक बल आघूर्ण, पुन:स्थापना बल आघूर्ण के बराबर होता है:
$$NIAB = k\theta$$
- इसलिए, विक्षेप $\theta$ है:
$$\theta = \left(\frac{NAB}{k}\right) I$$
- चूँकि $N, A, B,$ और $k$ नियतांक हैं, इसलिए:
$$\theta \propto I$$
इस प्रकार, विक्षेप धारा के सीधे आनुपातिक होता है।
### निलंबित-कुंडली की तुलना में धुरी-कुंडली गैल्वेनोमीटर के लाभ
1. **पोर्टेबिलिटी:** धुरी वाले गैल्वेनोमीटर कॉम्पैक्ट और मजबूत होते हैं, इन्हें नाजुक निलंबित प्रकार की तरह बिना नुकसान के आसानी से ले जाया जा सकता है।
2. **सुविधा:** इन्हें संचालित करने के लिए सख्त ऊर्ध्वाधर समतलन या कठोर कंपन-मुक्त तालिकाओं की आवश्यकता नहीं होती है।
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- गैल्वेनोमीटर कुंडली का प्रतिरोध ($G$) = $12\,\Omega$
- पूर्ण-पैमाना विक्षेप धारा ($I_g$) = $3\,\text{mA} = 3 \times 10^{-3}\,\text{A}$
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### भाग (i): $0 - 18\,\text{V}$ परास के वोल्टमीटर में रूपांतरण
- अभीष्ट अधिकतम वोल्टेज ($V$) = $18\,\text{V}$
- गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए, इसके साथ **श्रेणीक्रम (series)** में एक उच्च प्रतिरोध ($R$) जोड़ा जाना चाहिए।
- श्रेणी प्रतिरोध का सूत्र:
$$R = \frac{V}{I_g} - G$$
- दिए गए मानों को रखने पर:
$$R = \frac{18}{3 \times 10^{-3}} - 12$$
$$R = 6000 - 12 = 5988\,\Omega$$
- **कार्य:** गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणीक्रम में $5988\,\Omega$ का उच्च प्रतिरोध जोड़ा जाना चाहिए।
- **वोल्टमीटर का तुल्य प्रतिरोध ($R_v$):**
$$R_v = G + R = 12 + 5988 = 6000\,\Omega$$ (या $6\,\text{k}\Omega$)
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### भाग (ii): $0 - 6\,\text{A}$ परास के एमीटर में रूपांतरण
- अभीष्ट अधिकतम धारा ($I$) = $6\,\text{A}$
- गैल्वेनोमीटर को एमीटर में बदलने के लिए, इसके साथ **समांतर क्रम (parallel)** में एक छोटा शंट प्रतिरोध ($S$) जोड़ा जाना चाहिए।
- शंट प्रतिरोध का सूत्र:
$$S = \frac{I_g \cdot G}{I - I_g}$$
- दिए गए मानों को रखने पर:
$$S = \frac{3 \times 10^{-3} \times 12}{6 - 3 \times 10^{-3}}$$
$$S = \frac{0.036}{6 - 0.003} = \frac{0.036}{5.997}$|
$$S \approx 0.006\,\Omega$$
- **कार्य:** गैल्वेनोमीटर के समांतर क्रम में लगभग $0.006\,\Omega$ का छोटा शंट प्रतिरोध जोड़ा जाना चाहिए।
- **एमीटर का तुल्य प्रतिरोध ($R_a$):**
$$R_a = \frac{G \cdot S}{G + S} = \frac{12 \times 0.006}{12 + 0.006} = \frac{0.072}{12.006} \approx 0.006\,\Omega$$
उत्तर (Answer): ### चल कुंडली गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत
\nचल कुंडली गैल्वेनोमीटर इस सिद्धांत पर कार्य करता है कि एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही कुंडली एक चुंबकीय बलाघूर्ण का अनुभव करती है जो इसे घुमाने का प्रयास करता है, और उत्पन्न विक्षेप कुंडली में प्रवाहित धारा के सीधे आनुपातिक होता है।
### बनावट (Construction)
- **कुंडली:** इसमें अछूते तांबे के तार के कई फेरों वाली एक आयताकार कुंडली होती है जो हल्के गैर-चुंबकीय फ्रेम पर लिपटी होती है।
- **चुंबकीय क्षेत्र:** बेलनाकार ध्रुव टुकड़ों वाला एक मजबूत स्थायी चुंबक एक रेडियल चुंबकीय क्षेत्र प्रदान करता है।
- **सॉफ्ट आयरन कोर:** क्षेत्र को रेडियल बनाने और चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति को बढ़ाने के लिए कुंडली के अंदर एक बेलनाकार सॉफ्ट आयरन कोर सममित रूप से रखा जाता है।
- **निलंबन:** कुंडली को फॉस्फर-ब्रॉन्ज स्ट्रिप द्वारा लटकाया जाता है।
### कार्यप्रणाली (Working)
\nजब कुंडली में विद्युत धारा $I$ प्रवाहित होती है, तो उस पर एक चुंबकीय बलाघूर्ण कार्य करता है। विक्षेपण बलाघूर्ण $\tau$ है:
$$\tau = NIAB$$\nजहाँ $N$ फेरों की संख्या, $I$ धारा, $A$ क्षेत्रफल, और $B$ चुंबकीय क्षेत्र है।
\nइस बलाघूर्ण के कारण कुंडली घूमती है, जिससे निलंबन पट्टी में ऐंठन पैदा होती है। यह एक पुनर्स्थापना बलाघूर्ण $\tau_r$ बनाता है जो ऐंठन के कोण $\alpha$ के आनुपातिक होता है:
$$\tau_r = k\alpha$$\nसंतुलन पर:
$$NIAB = k\alpha \implies I = \left(\frac{k}{NAB}\right)\alpha$$\nइस प्रकार, विक्षेप धारा के सीधे आनुपातिक होता है।
### गैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलना
\nगैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलने के लिए, इसके समानांतर क्रम में एक बहुत छोटा प्रतिरोध, जिसे **शंट प्रतिरोध ($S$)** कहा जाता है, जोड़ा जाता है।
\nमाना:
- $G$ = गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध
- $I$ = मापी जाने वाली कुल धारा
- $I_g$ = पूर्ण पैमाने के विक्षेप के लिए गैल्वेनोमीटर से गुजरने वाली अधिकतम धारा
- $S$ = समानांतर में जुड़ा शंट प्रतिरोध
\nशंट से बहने वाली धारा $(I - I_g)$ है। चूंकि दोनों समानांतर में हैं, उनके सिरों पर विभवांतर बराबर है:
$$I_g \cdot G = (I - I_g) \cdot S$$
$$S = \frac{I_g \cdot G}{I - I_g}$|
\nयह सूत्र वांछित सीमा के अमीटर में बदलने के लिए आवश्यक शंट प्रतिरोध का मान देता है।
उत्तर (Answer): कुंडली को घूमने से रोकने के लिए आवश्यक प्रति-बलाघूर्ण की गणना करने के लिए, हमें चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही कुंडली पर लगने वाले चुंबकीय बलाघूर्ण को निर्धारित करना होगा।
**दिया गया डेटा:**
- फेरों की संख्या ($N$) = $30$
- कुंडली की त्रिज्या ($R$) = $8.0 \text{ cm} = 0.08 \text{ m}$
- कुंडली में धारा ($I$) = $6.0 \text{ A}$
- चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ($B$) = $1.0 \text{ T}$
- चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली के अभिलंब के बीच का कोण ($\theta$) = $60^\circ$
**चरण 1: वृत्ताकार कुंडली के क्षेत्रफल ($A$) की गणना करें**
$$A = \pi R^2$$
$$A = 3.1416 \times (0.08 \text{ m})^2$$
$$A = 3.1416 \times 0.0064 \text{ m}^2 = 0.020106 \text{ m}^2$$
**चरण 2: कुंडली के चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण ($M$) की गणना करें**\nचुंबकीय आघूर्ण का सूत्र है:
$$M = N \cdot I \cdot A$$\nमान रखने पर:
$$M = 30 \times 6.0 \text{ A} \times 0.020106 \text{ m}^2$$
$$M = 180 \times 0.020106 = 3.619 \text{ A}\cdot\text{m}^2$$
**चरण 3: कुंडली पर लगने वाले चुंबकीय बलाघूर्ण ($\tau$) की गणना करें**\nएकसमान चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय द्विध्रुव द्वारा अनुभव किया जाने वाला बलाघूर्ण है:
$$\tau = M B \sin\theta$$\nमानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\tau = (3.619 \text{ A}\cdot\text{m}^2) \times (1.0 \text{ T}) \times \sin(60^\circ)$$
$$\tau = 3.619 \times \frac{\sqrt{3}}{2}$$
$$\tau = 3.619 \times 0.866 = 3.134 \text{ N}\cdot\text{m}$$
**चरण 4: प्रति-बलाघूर्ण निर्धारित करें**\nकुंडली को घूमने से रोकने के लिए एक समान और विपरीत प्रति-बलाघूर्ण लगाना होगा।
$$\text{Counter-torque} = \tau = 3.13 \text{ N}\cdot\text{m}$$
**उत्तर:**\nलगाए जाने वाले प्रति-बलाघूर्ण का परिमाण **$3.13 \text{ N}\cdot\text{m}$** है।
उत्तर (Answer): ### बायो-सेवर्ट नियम
\nबायो-सेवर्ट नियम विद्युत चुंबकत्व का एक मूलभूत नियम है जो चुंबकीय क्षेत्रों को विद्युत धाराओं के परिमाण, दिशा, लंबाई और निकटता से संबंधित करता है। इस नियम के अनुसार, धारा अवयव $Idl$ के कारण किसी बिंदु $P$ पर चुंबकीय क्षेत्र $dB$ का परिमाण सीधे आनुपातिक होता है:
- धारा $I$ के
- धारा अवयव की लंबाई $dl$ के
- धारा अवयव और बिंदु $P$ को मिलाने वाली रेखा के बीच के कोण $\theta$ की ज्या (sine) के
- और अवयव से बिंदु की दूरी $r$ के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
\nगणितीय रूप में, इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin\theta}{r^2}$$\nजहाँ $\mu_0$ निर्वात की पारगम्यता है।
### वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक
\nआइए $r$ त्रिज्या की एक वृत्ताकार कुंडली पर विचार करें जिसमें एक स्थिर धारा $I$ प्रवाहित हो रही है। मान लीजिए कुंडली में फेरों की कुल संख्या $N$ है।
1. वृत्ताकार कुंडली की परिधि पर एक छोटे धारा अवयव $dl$ पर विचार करें।
2. धारा अवयव $Idl$ और केंद्र को जोड़ने वाले स्थिति सदिश $r$ के बीच का कोण $\theta$ हमेशा $90^\circ$ होता है।
3. इस छोटे अवयव के लिए बायो-सेवर्ट नियम लागू करने पर, केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $dB$ का परिमाण निम्नलिखित होता है:
$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin 90^\circ}{r^2} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl}{r^2}$$
4. दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम के अनुसार इस चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कुंडली के तल के लंबवत अंदर की ओर होती है।
5. पूरी वृत्ताकार कुंडली के कारण केंद्र पर कुल चुंबकीय क्षेत्र $B$ ज्ञात करने के लिए, हम पूरी परिधि पर $dB$ का समाकलन करते हैं:
$$B = \int dB = \int \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl}{r^2}$$
6. चूँकि $\frac{\mu_0}{4\pi}$, $I$, और $r^2$ स्थिरांक हैं, इन्हें समाकलन से बाहर निकाला जा सकता है:
$$B = \frac{\mu_0 I}{4\pi r^2} \int dl$$
7. पूरी परिधि पर $dl$ का समाकलन कुल परिधि यानी $2\pi r$ के बराबर होता है:
$$\int dl = 2\pi r$$
8. इस मान को समीकरण में वापस रखने पर:
$$B = \frac{\mu_0 I}{4\pi r^2} (2\pi r) = \frac{\mu_0 I}{2r}$$
9. यदि वृत्ताकार कुंडली में $N$ फेरे हैं, तो केंद्र पर कुल चुंबकीय क्षेत्र $N$ से गुणा हो जाता है:
$$B = \frac{\mu_0 N I}{2r}$$
\nयह धारावाही वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का अभीष्ट व्यंजक है।
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:\nचुंबकीय क्षेत्र ($B$) = $1.5\text{ T}$\nआयताकार कुंडली के आयाम = $20\text{ cm} \times 10\text{ cm} = 0.2\text{ m} \times 0.1\text{ m}$\nकुंडली का क्षेत्रफल ($A$) = $0.2 \times 0.1 = 0.02\text{ m}^2$\nफेरों की संख्या ($N$) = $100$\nधारा ($I$) = $2.0\text{ A}$
\nचुंबकीय बल आघूर्ण का सूत्र:
$$\tau = N I A B \sin\theta$$\nअधिकतम बल आघूर्ण के लिए (क्षेत्र कुंडली के तल के समानांतर है, इसलिए अभिलंब और क्षेत्र के बीच का कोण $90^\circ$ है):
$$\tau = N I A B$$
\nमानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\tau = 100 \times 2.0 \times 0.02 \times 1.5$$
$$\tau = 100 \times 2.0 \times 0.03$$
$$\tau = 200 \times 0.03 = 6.0\text{ N m}$$
\nअंतिम उत्तर:\nकुंडली पर चुंबकीय बल आघूर्ण का परिमाण $6.0\text{ N m}$ है।
उत्तर (Answer): चल कुंडली गैल्वेनोमीटर एक उपकरण है जिसका उपयोग छोटी विद्युत धाराओं का पता लगाने और मापने के लिए किया जाता है।
**सिद्धांत:** यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि एक समान चुंबकीय क्षेत्र में रखी गई धारावाही कुंडली पर एक चुंबकीय बल आघूर्ण लगता है जो कुंडली को घुमाने का प्रयास करता है। विक्षेपी बल आघूर्ण $\tau = NIAB \sin\theta$ द्वारा दिया जाता है। एक रेडियल चुंबकीय क्षेत्र में, कुंडली का तल हमेशा चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के समानांतर होता है, जिससे $\sin\theta = 1$ हो जाता है, अतः $\tau = NIAB$ होता है। यह विक्षेपी बल आघूर्ण निलंबन स्प्रिंग के पुन Yस्थापित बल आघूर्ण ($\tau = k\phi$) द्वारा संतुलित होता है, जिससे $NIAB = k\phi \implies I = (\frac{k}{NAB}) \phi$ प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है कि धारा विक्षेप $\phi$ के सीधे आनुपातिक है।
**अमीटर में रूपांतरण:** गैल्वेनोमीटर को गैल्वेनोमीटर के साथ समानांतर क्रम में एक बहुत कम प्रतिरोध, जिसे शंट प्रतिरोध ($S$) कहा जाता है, जोड़कर एक अमीटर में बदला जा सकता है।\nयदि मापने के लिए कुल धारा $I$ है, $I_g$ गैल्वेनोमीटर के पूर्ण-पैमाने के विक्षेप के लिए धारा है, और $G$ गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध है, तो शेष धारा $(I - I_g)$ शंट प्रतिरोध $S$ से बहती है। चूँकि वे समानांतर में हैं, उनके बीच का विभवांतर समान है:
$$I_g G = (I - I_g) S \implies S = \frac{I_g G}{I - I_g}$$\nयह कम शंट प्रतिरोध गैल्वेनोमीटर को भारी धाराओं से बचाता है और अमीटर के कुल प्रतिरोध को कम करता है।
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:\nफेरों की संख्या ($N$) = $30$\nकुंडली की त्रिज्या ($R$) = $8.0\text{ cm} = 8.0 \times 10^{-2}\text{ m}$\nधारा ($I$) = $6.0\text{ A}$\nमुक्त आकाश की पारगम्यता ($\mu_0$) = $4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1}$
$N$ फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली के केंद्र में चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र:
$$B = \frac{\mu_0 N I}{2 R}$$
\nसूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$B = \frac{(4\pi \times 10^{-7}) \times 30 \times 6.0}{2 \times 8.0 \times 10^{-2}}$$
$$B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 180}{16 \times 10^{-2}}$$
$$B = \frac{720\pi \times 10^{-7}}{0.16}$$
$$B = 4500\pi \times 10^{-7} \text{ T} = 4.5\pi \times 10^{-4} \text{ T}$$
$\pi \approx 3.1416$ का उपयोग करने पर:
$$B = 4.5 \times 3.1416 \times 10^{-4} = 1.41 \times 10^{-3} \text{ T} = 1.41\text{ mT}$$
\nअंतिम उत्तर:\nकुंडली के केंद्र में चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण $1.41 \times 10^{-3}\text{ T}$ (या $1.41\text{ mT}$) है।
उत्तर (Answer): एम्पेयर का परिपथीय नियम बताता है कि किसी भी बंद पथ के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ का रेखीय समाकल, बंद पथ से घिरे पृष्ठ से गुजरने वाली कुल धारा $I$ का $\mu_0$ गुना होता है। गणितीय रूप में, इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
$$\oint \vec{B} \cdot \vec{dl} = \mu_0 I_{\text{enclosed}}$$
**एक लंबी परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र:**\nप्रति इकाई लंबाई $n$ फेरों वाली और धारा $I$ प्रवाहित करने वाली एक लंबी परिनालिका पर विचार करें। हम लंबाई $L$ का एक आयताकार एम्पेरियन लूप $abcd$ लेते हैं। परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एक समान और इसकी धुरी के समानांतर होता है, जबकि बाहर यह लगभग शून्य होता है।\nलूप $abcd$ पर एम्पेयर के नियम को लागू करने पर:
$$\oint \vec{B} \cdot \vec{dl} = \int_a^b \vec{B} \cdot \vec{dl} + \int_b^c \vec{B} \cdot \vec{dl} + \int_c^d \vec{B} \cdot \vec{dl} + \int_d^a \vec{B} \cdot \vec{dl}$$
- पथ $bc$ और $da$ के अनुदिश, $\vec{B}$ और $\vec{dl}$ लंबवत हैं, इसलिए समाकल शून्य है।
- पथ $cd$ के अनुदिश, पथ परिनालिका के बाहर है जहाँ $B = 0$ है।
- पथ $ab$ के अनुदिश, $\vec{B}$ और $\vec{dl}$ समानांतर हैं ($B\,dl\cos 0^\circ = B\,dl$)।
\nइसलिए, $\oint \vec{B} \cdot \vec{dl} = \int_a^b B\,dl = B \int_a^b dl = BL$।
\nलंबाई $L$ में फेरों की कुल संख्या $nL$ है, इसलिए घिरे कुल धारा $I_{\text{enclosed}} = (nL)I$ है।\nएम्पेयर के नियम द्वारा:
$$BL = \mu_0 (nL)I \implies B = \mu_0 n I$$
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:\nधारा ($I$) = $35\text{ A}$\nदूरी ($r$) = $20\text{ cm} = 0.2\text{ m}$\nमुक्त आकाश की पारगम्यता ($\mu_0$) = $4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1}$
\nएक लंबे सीधे तार के कारण चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र:
$$B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}$$
\nसूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$B = \frac{(4\pi \times 10^{-7}) \times 35}{2\pi \times 0.2}$$
$$B = \frac{2 \times 10^{-7} \times 35}{0.1}$$
$$B = 2 \times 10^{-7} \times 350$$
$$B = 700 \times 10^{-7} \text{ T} = 3.5 \times 10^{-5} \text{ T}$$
\nअंतिम उत्तर:\nतार से $20\text{ cm}$ की दूरी पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण $3.5 \times 10^{-5}\text{ T}$ (या $35\ \mu\text{T}$) है।