मुख्य सूत्र (Key Formulas)
त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes)
कक्षा: 12वीं भौतिकी (Physics)
अध्याय: तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics)
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### 1. तरंगाग्र (Wavefront)
- परिभाषा: किसी माध्यम में समान कला (phase) में कंपन करने वाले सभी बिंदुओं के बिथपथ (locus) को तरंगाग्र कहते हैं।
- किरण (Ray): तरंग की दिशा को दर्शाने वाली रेखा को किरण कहते हैं। किरण हमेशा तरंगाग्र के लंबवत होती है।
- तरंगाग्र के प्रकार:
1. गोलीय तरंगाग्र (Spherical Wavefront): बिंदु स्रोत (point source) के लिए।
2. बेलनाकार तरंगाग्र (Cylindrical Wavefront): रेखीय स्रोत (linear source) के लिए।
3. समतल तरंगाग्र (Plane Wavefront): अनंत पर स्थित स्रोत (या बहुत दूर) के लिए।
### 2. हाइगेंस का तरंग सिद्धांत (Huygens' Principle)
- तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु एक नए disturbance (विक्षोभ) का स्रोत होता है, जिससे नई तरंगिकाएँ (secondary wavelets) निकलती हैं।
- किसी भी क्षण इन द्वितीयक तरंगिकाओं का स्पर्श रेखा (envelope) आगे की नई तरंग की स्थिति को दर्शाता है।
### 3. प्रकाश का व्यतिकरण (Interference of Light)
जब लगभग समान आवृत्ति और आयाम की दो प्रकाश तरंगें माध्यम में एक साथ चलती हैं, तो उनके अध्यारोपण (superposition) से प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन होता है। इसे व्यतिकरण कहते हैं।
- संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference):
- तीव्रता अधिकतम होती है।
- पथांतर (Path difference):
Δx = nλ (जहाँ n = 0, 1, 2, 3...)
- कलांतर (Phase difference):
ϕ = 2nπ
- विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference):
- तीव्रता न्यूनतम (शून्य) होती है।
- पथांतर (Path difference):
Δx = (2n - 1)λ / 2 (जहाँ n = 1, 2, 3...)
- कलांतर (Phase difference):
ϕ = (2n - 1)π
### 4. यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग (Young's Double Slit Experiment - YDSE)
- फ्रिंज चौड़ाई (Fringe Width - β): दो क्रमागत दीप्त या अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी।
β = λD / d
जहाँ:
λ = प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (Wavelength)
D = पर्दे और स्लिट के बीच की दूरी (Distance between slit and screen)
d = दोनों स्लिटों के बीच की दूरी (Distance between two slits)
- कोणीय फ्रिंज चौड़ाई (Angular Fringe Width - θ):
θ = β / D = λ / d
### 5. विवर्तन (Diffraction)
- प्रकाश का किसी अवरोध या द्वारक (aperture) के तीखे किनारों से मुड़कर उसकी छाया क्षेत्र में प्रवेश करने की घटना को विवर्तन कहते हैं।
- केंद्रीय उच्चिष्ठ (Central Maximum) की चौड़ाई:
W = 2λD / a (जहाँ a द्वारक का आकार है)
- शर्त (Condition for minima):
a sinθ = nλ (n = 1, 2, 3...)
### 6. प्रकाश का ध्रुवण (Polarization of Light)
- परिभाषा: साधारण प्रकाश में विद्युत सदिश सभी दिशाओं में कंपन करते हैं। जब इसे पोलरॉइड से गुजारा जाता है, तो कंपन केवल एक ही तल में सीमित हो जाते हैं। इस घटना को ध्रुवण कहते हैं। (यह केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होता है)।
- ब्रूस्टर का नियम (Brewster's Law):
जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम पर ध्रुवण कोण (i_p) पर आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश पूरी तरह ध्रुवित होता है।
μ = tan(i_p)
जहाँ μ माध्यम का अपवर्तनांक है।
- मेलस का नियम (Malus's Law):
जब किसी ध्रुवक से निर्गत प्रकाश की तीव्रता (I) विश्लेषक (analyzer) से गुजरती है, तो वह दोनों के बीच के कोण (θ) की कोज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।
I = I_0 cos^2(θ)
(जहाँ I_0 अधिकतम तीव्रता है)।
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महत्वपूर्ण बिंदु (MP Board परीक्षा के लिए):
1. यंग के प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई का व्यंजक (β = λD/d) बहुत महत्वपूर्ण है, इसका दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछा जाता है।
2. ब्रूस्टर का नियम और मेलस का नियम संक्षिप्त टिप्पणियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
3. व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर भी परीक्षा की दृष्टि से याद रखें।
माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 तरंग प्रकाशिकी
तरंगाग्र
परिभाषा
प्रकार
गोलीय तरंगाग्र
बेलनाकारी तरंगाग्र
समतल तरंगाग्र
हाइगेन का सिद्धांत
माध्यमिक तरंगिकाएँ
नए तरंगाग्र की रचना
प्रकाश का परावर्तन और अपवर्तन
हाइगेन सिद्धांत का सत्यापन
परावर्तन के नियम
अपवर्तन के नियम
स्नेल का नियम
व्यतिकरण
कलासंबद्ध स्रोत
यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग
फ्रिंज चौड़ाई
व्यतिकरण प्रतिरूप
तीव्रता वितरण
ऊर्जा संरक्षण नियम
विवर्तन
परिभाषा और अंतर (व्यतिकरण से)
एकल झिरी द्वारा विवर्तन
केंद्रीय उच्चिष्ठ
निम्निष्ठ और उच्चिष्ठ की शर्तें
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता
दूरदर्शी की विभेदन क्षमता
ध्रुवण
अध्रुवित प्रकाश
ध्रुवित प्रकाश
ब्रूस्टर का नियम
ध्रुवण कोण
पोलरॉइड का उपयोग
प्रकीर्णन द्वारा ध्रुवण
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
उत्तर (Answer): ### हाइगेंस का सिद्धांत\nहाइगेंस का सिद्धांत एक ज्यामितीय निर्माण है जिसका उपयोग किसी भी क्षण किसी तरंग अग्र की स्थिति दिए जाने पर बाद के समय में उसकी स्थिति निर्धारित करने के लिए किया जाता है। यह निम्नलिखित मौलिक मान्यताओं पर आधारित है:
* **प्राथमिक तरंग अग्र:** किसी दिए गए तरंग अग्र पर प्रत्येक बिंदु द्वितीयक विक्षोभ के स्रोत के रूप में कार्य करता है, जो उस माध्यम में प्रकाश की गति के साथ सभी दिशाओं में द्वितीयक तरंगिकाएँ उत्सर्जित करता है।
* **तरंगिकाओं का आवरण:** बाद के किसी भी समय $t$ पर तरंग अग्र की नई स्थिति इन द्वितीयक तरंगिकाओं के अग्र आवरण (स्पर्शरेखा सतह) द्वारा दी जाती है।
### हाइगेंस के सिद्धांत का उपयोग करके परावर्तन के नियमों की उपपत्ति
1. मान लीजिए एक समतल तरंग अग्र $AB$ आपतन कोण $i$ पर एक परावर्तक सतह $XY$ पर तिरछे रूप से आपतित होता है।
2. जैसे-जैसे तरंग अग्र आगे बढ़ता है, बिंदु $A$ समय $t = 0$ पर सबसे पहले सतह से टकराता है, और बिंदु $B$ वेग $v$ के साथ समय अंतराल $t$ के बाद बिंदु $C$ पर पहुँचता है, जिससे $BC = vt$ होता है।
3. हाइगेंस के सिद्धांत के अनुसार, इस समय $t$ के दौरान, बिंदु $A$ से उत्पन्न होने वाली द्वितीयक तरंगिकाएँ उसी माध्यम में $v \times t = BC$ दूरी तय करती हैं, जिससे त्रिज्या $AD = BC$ का एक अर्धगो गोला बनता है।
4. बिंदु $C$ से इस अर्धगोले पर एक स्पर्श रेखा $CD$ खींचने पर परावर्तित तरंग अग्र $CD$ प्राप्त होता है।
5. त्रिभुजों $\triangle ABC$ और $\triangle ADC$ में:
- $\angle BAC = \angle ADC = 90^\circ$
- भुजा $AC$ उभयनिष्ठ है
- $BC = AD = vt$
6. इसलिए, त्रिभुज सर्वांगसम हैं ($\triangle ABC \cong \triangle ADC$)। इससे $\angle BAC = \angle ACD$ प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है कि आपतन कोण $i$ परावर्तन कोण $r$ के बराबर है ($i = r$)। साथ ही, आपतित तरंग अग्र, अभिलंब और परावर्तित तरंग अग्र सभी एक ही तल में स्थित होते हैं।
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### आंकिक प्रश्न का हल
**दिया गया डेटा:**
- प्रारंभिक तरंग दैर्ध्य, $\lambda = 600\text{ nm} = 600 \times 10^{-9}\text{ m}$
- प्रारंभिक फ्रिंज चौड़ाई, $\beta_1 = 0.4\text{ mm} = 0.4 \times 10^{-3}\text{ m}$
- पर्दे की दूरी में परिवर्तन, $\Delta D = 0.1\text{ m}$
- नई फ्रिंज चौड़ाई, $\beta_2 = 0.3\text{ mm} = 0.3 \times 10^{-3}\text{ m}$
**फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र:**
$$\beta = \frac{\lambda D}{d}$|\nजहाँ $D$ झिरियों और पर्दे के बीच की दूरी है, और $d$ दोनों झिरियों के बीच की दूरी है।
**चरण 1: प्रारंभिक दूरी $D$ ज्ञात करना**\nप्रारंभिक स्थिति:
$$\beta_1 = \frac{\lambda D}{d} \implies \frac{D}{d} = \frac{\beta_1}{\lambda}$$
\nजब पर्दे को $0.1\text{ m}$ आगे खिसकाया जाता है (झिरियों की ओर मानते हुए, दूरी कम होती है):
$$\beta_2 = \frac{\lambda (D - \Delta D)}{d} \implies \frac{D - \Delta D}{d} = \frac{\beta_2}{\lambda}$$
\nदोनों समीकरणों को भाग देने पर:
$$\frac{D}{D - \Delta D} = \frac{\beta_1}{\beta_2}$$
$$\frac{D}{D - 0.1} = \frac{0.4}{0.3} = \frac{4}{3}$$
$$3D = 4(D - 0.1)$$
$$3D = 4D - 0.4$$
$$D = 0.4\text{ m}$|
**चरण 2: झिरी अंतराल $d$ ज्ञात करना**
$D = 0.4\text{ m}$ के साथ फ्रिंज चौड़ाई के सूत्र का उपयोग करने पर:
$$\beta_1 = \frac{\lambda D}{d}$$
$$d = \frac{\lambda D}{\beta_1} = \frac{(600 \times 10^{-9}\text{ m}) \times (0.4\text{ m})}{0.4 \times 10^{-3}\text{ m}}$$
$$d = 600 \times 10^{-9} \times 10^3 = 600 \times 10^{-6}\text{ m} = 0.6\text{ mm}$|
**उत्तर:**
- पर्दे और झिरियों के बीच की प्रारंभिक दूरी ($D$) = $0.4\text{ m}$
- दोनों झिरियों के बीच की दूरी ($d$) = $0.6\text{ mm}$ (या $6 \times 10^{-4}\text{ m}$)
उत्तर (Answer): ### प्रकाश के विवर्तन की परिभाषा\nप्रकाश के विवर्तन को किसी बाधा या छिद्र के कोनों के चारों ओर ज्यामितीय छाया के क्षेत्र में प्रकाश तरंगों के मुड़ने की घटना के रूप में परिभाषित किया जाता है, बशर्ते बाधा या छिद्र का आकार प्रकाश की तरंग दैर्ध्य के तुलनीय हो।
### फ्रेनेल और फ्रौनहॉफर विवर्तन के बीच अंतर
1. **फ्रेनेल विवर्तन:**
- इस प्रकार में, या तो प्रकाश का स्रोत या परदा (या दोनों) बाधा या छिद्र से परिमित दूरी पर होते हैं।
- आपतित तरंग मोर्चे या तो गोलाकार या बेलनाकार होते हैं।
- प्रयोगात्मक व्यवस्था अपेक्षाकृत सरल होती है क्योंकि इसके लिए प्रकाश को केंद्रित करने के लिए लेंस की आवश्यकता नहीं होती है।
2. **फ्रौनहॉफर विवर्तन:**
- इस प्रकार में, प्रकाश का स्रोत और परदा दोनों प्रभावी रूप से बाधा या छिद्र से अनंत दूरी पर होते हैं।
- आपतित तरंग मोर्चे समतल होते हैं।
- व्यवस्था में बाधा से पहले प्रकाश को समानांतर करने और विवर्तित प्रकाश को परदे पर केंद्रित करने के लिए उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है।
### एकल झिरी पर विवर्तन और द्वितीयक निम्निष्ठ के लिए प्रतिबंध
- **प्रयोगात्मक व्यवस्था:** चौड़ाई $a$ की एक संकीर्ण झिरी $AB$ पर $\lambda$ तरंग दैर्ध्य के एकवर्णक प्रकाश के समानांतर बीम पर विचार करें। इसके फोकल तल में रखे परदे पर प्रकाश को केंद्रित करने के लिए एक उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है।
- **निम्निष्ठ के लिए व्युत्पत्ति:**
- मान लीजिए झिरी को दो बराबर भागों, $AC$ और $CB$ में विभाजित किया गया है, प्रत्येक की चौड़ाई $a/2$ है।
- ऊपरी आधे भाग $AC$ के प्रत्येक बिंदु के लिए, निचले आधे भाग $CB$ में एक संगत बिंदु होता है जो $a/2$ की दूरी पर अलग होता है।
- यदि संगत बिंदुओं से निकलने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं के बीच पथ अंतर $\lambda/2$ के बराबर है, तो वे विनाशकारी रूप से व्यतिकरण करेंगी, जिससे न्यूनतम तीव्रता उत्पन्न होगी।
- इसलिए, पहले द्वितीयक निम्निष्ठ के लिए प्रतिबंध है:
$$\text{पथ अंतर} = \frac{a}{2} \sin\theta = \frac{\lambda}{2} \implies a \sin\theta = \lambda$$
- इसका सामान्यीकरण करते हुए, $n$-वें द्वितीयक निम्निष्ठ के लिए प्रतिबंध इस प्रकार दिया गया है:
$$a \sin\theta = n\lambda \quad (n = \pm 1, \pm 2, \pm 3, \dots)$$
### तीव्रता वितरण\nविवर्तन पैटर्न में उच्च तीव्रता का एक केंद्रीय चमकीला उच्चिष्ठ होता है, जिसके दोनों ओर वैकल्पिक द्वितीयक निम्निष्ठ और केंद्र से दूर जाने पर घटती तीव्रता वाले कमजोर द्वितीयक उच्चिष्ठ होते हैं।
उत्तर (Answer): ### दिए गए आंकड़े:
- हवा में प्रकाश की तरंग दैर्ध्य ($\lambda$) = $589\text{ nm} = 589 \times 10^{-9}\text{ m}$
- झिरियों के बीच की दूरी ($d$) = $0.5\text{ mm} = 0.5 \times 10^{-3}\text{ m} = 5 \times 10^{-4}\text{ m}$
- झिरियों से परदे की दूरी ($D$) = $1.0\text{ m}$
- पानी का अपवर्तनांक ($\mu$) = $4/3 = 1.33$
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### भाग 1: फ्रिंज चौड़ाई ($\beta$) की गणना\nयंग के द्वि-झिरी प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र है:
$$\beta = \frac{\lambda D}{d}$$
\nदिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\beta = \frac{(589 \times 10^{-9}\text{ m}) \times (1.0\text{ m})}{5 \times 10^{-4}\text{ m}}$$
$$\beta = \frac{589 \times 10^{-9}}{5 \times 10^{-4}}$$
$$\beta = 117.8 \times 10^{-5}\text{ m} = 1.178 \times 10^{-3}\text{ m} = 1.178\text{ mm}$|
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### भाग 2: कोणीय फ्रिंज चौड़ाई ($\theta$) की गणना\nकोणीय फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र है:
$$\theta = \frac{\beta}{D} = \frac{\lambda}{d}$|
\nमानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\theta = \frac{589 \times 10^{-9}\text{ m}}{5 \times 10^{-4}\text{ m}}$$
$$\theta = 117.8 \times 10^{-5}\text{ रेडियन} = 1.178 \times 10^{-3}\text{ rad}$$
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### भाग 3: पानी में फ्रिंज चौड़ाई में परिवर्तन\nजब उपकरण को पानी में डुबोया जाता है, तो पानी के अपवर्तनांक के अनुसार प्रकाश की तरंग दैर्ध्य बदल जाती है:
$$\lambda' = \frac{\lambda}{\mu}$|
\nपरिणामस्वरूप, नई फ्रिंज चौड़ाई ($\beta'$) हो जाती है:
$$\beta' = \frac{\lambda' D}{d} = \frac{\lambda D}{\mu d} = \frac{\beta}{\mu}$|
\nमानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\beta' = \frac{1.178\text{ mm}}{4/3} = \frac{1.178 \times 3}{4}$|
$$\beta' = \frac{3.534}{4} = 0.8835\text{ mm}$|
\nअतः, पानी में नई फ्रिंज चौड़ाई $0.8835\text{ mm}$ है, और फ्रिंज चौड़ाई में कमी है:
$$\Delta \beta = \beta - \beta' = 1.178\text{ mm} - 0.8835\text{ mm} = 0.2945\text{ mm}$$
उत्तर (Answer): ### हाइगेंस के सिद्धांत का कथन\nहाइगेंस का सिद्धांत एक ज्यामितीय निर्माण है जिसका उपयोग किसी भी बाद के समय में तरंग मोर्चे (wavefront) की स्थिति निर्धारित करने के لیے किया जाता है। यह बताता है कि:
1. किसी दिए गए तरंग मोर्चे का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक गोलाकार तरंगिकाओं (secondary wavelets) के स्रोत के रूप में कार्य करता है, जो उस माध्यम में प्रकाश की गति से सभी दिशाओं में फैलती हैं।
2. किसी भी बाद के समय में इन द्वितीयक तरंगिकाओं का अग्र आवरण (forward envelope) तरंग मोर्चे की नई स्थिति देता है।
### परावर्तन के नियमों का सत्यापन\nहाइगेंस के सिद्धांत का उपयोग करके परावर्तन के नियमों को सत्यापित करने के लिए, आइए एक समतल तरंग मोर्चे $AB$ पर विचार करें जो आपतन कोण $i$ पर एक परावर्तक सतह (समतल दर्पण) $XY$ पर तिरछी रूप से आपतित होता है।
- **परावर्तित तरंग मोर्चे का निर्माण:**
- मान लीजिए माध्यम में प्रकाश की चाल $v$ है और तरंग मोर्चे को बिंदु $B$ से बिंदु $C$ तक यात्रा करने में लगा समय $t$ है।
- इसलिए, दूरी $BC = vt$ है।
- चूंकि बिंदु $A$ सतह पर पहले टकराता है, यह द्वितीयक तरंगिकाओं का उत्सर्जन करना शुरू कर देता है। जिस समय तक बिंदु $B$ $C$ पर पहुंचता है, $A$ से द्वितीयक तरंगिकाएं $vt$ त्रिज्या तक फैल चुकी होंगी।
- $A$ को केंद्र और $vt$ त्रिज्या मानकर, द्वितीयक तरंगिका को दर्शाने वाला एक चाप खींचिए।
- बिंदु $C$ से इस चाप पर एक स्पर्श रेखा $CD$ खींचिए। यहाँ, $CD$ परावर्तित तरंग मोर्चे को दर्शाता है।
- **परावर्तन कोण का प्रमाण:**
- $\triangle ABC$ और $\triangle ADC$ पर विचार करें:
- $BC = AD = vt$ ($t$ समय में प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी)
- $\angle ABC = \angle ADC = 90^\circ$ (तरंग मोर्चा किरणों के लंबवत होता है)
- $AC = AC$ (उभयनिष्ठ कर्ण)
- इसलिए, RHS सर्वांगसमता कसौटी द्वारा, $\triangle ABC \cong \triangle ADC$ है।
- परिणामस्वरुप, $\angle BAC = \angle DCA$ है।
- **निष्कर्ष:**
- मान लीजिए आपतन बिंदु पर सतह पर अभिलंब खींचा गया है। आपतन कोण $i$ आपतित तरंग मोर्चे और परावर्तक सतह के बीच का कोण है, जो $\angle BAC$ के बराबर है। इसी प्रकार, परावर्तन कोण $r$ $\angle DCA$ के बराबर है।
- चूंकि $\angle BAC = \angle DCA$ है, हमें **$i = r$** प्राप्त होता है, जो परावर्तन का दूसरा नियम है।
- इसके अलावा, आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब सभी एक ही तल में स्थित होते हैं, जो परावर्तन के पहले नियम को संतुष्ट करते हैं।
उत्तर (Answer): ### प्रकाश के ध्रुवण का परिचय\nसाधारण प्रकाश में संचरण की दिशा के लंबवत सभी संभावित दिशाओं में विद्युत क्षेत्र के दोलन होते हैं, और ऐसे प्रकाश को अध्रुवित प्रकाश कहा जाता है। तरंग संचरण की दिशा के लंबवत एक ही तल तक प्रकाश सदिशों (विद्युत क्षेत्र सदिश) के कंपनों को सीमित करने की घटना को **प्रकाश का ध्रुवण** कहा जाता है। यह घटना निर्णायक रूप से प्रकाश तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति को सिद्ध करती है।
### परावर्तन द्वारा ध्रुवण\nजब एक विशिष्ट कोण पर एक पारदर्शी माध्यम (जैसे कांच या पानी) पर अध्रुवित प्रकाश आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश आंशिक रूप से या पूरी तरह से ध्रुवित हो जाता है। आपतन के इस विशिष्ट कोण को **ध्रुवण कोण** या **ब्रूस्टर कोण** ($i_p$ द्वारा दर्शाया गया) के रूप में जाना जाता है।
### ब्रूस्टर का नियम\nसर डेविड ब्रूस्टर ने प्रयोग किए और ध्रुवण कोण ($i_p$) और माध्यम के अपवर्तनांक ($\mu$) के बीच एक सरल संबंध की खोज की। **ब्रूस्टर का नियम** कहता है:
*आपतन के ध्रुवण कोण की स्पर्शज्या (tangent) माध्यम के अपवर्तनांक के बराबर होती है।* \nगणितीय रूप से:
$$\mu = \tan i_p$$
### प्रमाण कि परावर्तित और अपवर्तित किरणें परस्पर लंबवत होती हैं\nमान लीजिए कि ध्रुवण कोण $i_p$ पर अपवर्तनांक $\mu$ के एक पारदर्शी माध्यम की सतह पर अध्रुवित प्रकाश आपतित होता है।
1. अपवर्तन के स्नेल के नियम के अनुसार:
$$\mu = \frac{\sin i_p}{\sin r}$$
जहाँ $r$ अपवर्तन कोण है।
2. ब्रूस्टर के नियम के अनुसार:
$$\mu = \tan i_p = \frac{\sin i_p}{\cos i_p}$$
3. अपवर्तनांक $\mu$ के लिए दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर:
$$\frac{\sin i_p}{\sin r} = \frac{\sin i_p}{\cos i_p}$$
$$\sin r = \cos i_p$$
$$\sin r = \sin(90^\circ - i_p)$$
$$r = 90^\circ - i_p$$
$$i_p + r = 90^\circ$$
4. अब, आइए सीमा सतह का प्रतिनिधित्व करने वाली सीधी रेखा पर विचार करें। अभिलंब के एक तरफ के कोणों का योग $180^\circ$ होता है:
$$i_p + \angle \text{COR} + r = 180^\circ$$
जहाँ $\angle \text{COR}$ परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण के बीच का कोण है।
5. समीकरण में $i_p + r = 90^\circ$ प्रतिस्थापित करने पर:
$$90^\circ + \angle \text{COR} = 180^\circ$$
$$\angle \text{COR} = 180^\circ - 90^\circ = 90^\circ$$
\nइस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि जब प्रकाश ध्रुवण कोण पर आपतित होता है तो परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण एक-दूसरे के समकोण ($90^\circ$) पर होती हैं।
उत्तर (Answer): ### दिए गए आंकड़े:
- प्रकाश की तरंग दैर्ध्य, $\lambda = 600\text{ nm} = 600 \times 10^{-9}\text{ m} = 6 \times 10^{-7}\text{ m}$
- झिरियों से स्क्रीन की दूरी, $D = 1.4\text{ m}$
- झिरियों के बीच की दूरी, $d = 0.28\text{ mm} = 0.28 \times 10^{-3}\text{ m} = 2.8 \times 10^{-4}\text{ m}$
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### 1. फ्रिंज चौड़ाई ($\beta$) की गणना:
- फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र है:
$$\beta = \frac{\lambda D}{d}$$
- दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\beta = \frac{6 \times 10^{-7} \times 1.4}{2.8 \times 10^{-4}}$$
- व्यंजक को सरल बनाने पर:
$$\beta = \frac{8.4 \times 10^{-7}}{2.8 \times 10^{-4}}$$
$$\beta = 3 \times 10^{-3}\text{ m} = 3\text{ mm}$$
- **उत्तर 1:** फ्रिंज चौड़ाई $3\text{ mm}$ (या $0.003\text{ m}$) है।
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### 2. चौथी चमकीली फ्रिंज की दूरी ($x_4$):
- केंद्रीय उच्चिष्ठ से $n$-वीं चमकीली फ्रिंज की स्थिति का सूत्र है:
$$x_n = \frac{n \lambda D}{d} = n \beta$$
- चौथी चमकीली फ्रिंज के लिए ($n = 4$):
$$x_4 = 4 \times \beta$$
$$x_4 = 4 \times 3\text{ mm} = 12\text{ mm} = 1.2 \times 10^{-2}\text{ m}$$
- **उत्तर 2:** केंद्रीय उच्चिष्ठ से चौथी चमकीली फ्रिंज की दूरी $12\text{ mm}$ (या $0.012\text{ m}$) है।
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### 3. चौथी अदीप्त फ्रिंज की दूरी ($x'_4$):
- केंद्रीय उच्चिष्ठ से $n$-वीं अदीप्त फ्रिंज की स्थिति का सूत्र है:
$$x'_n = \left(n - \frac{1}{2}\right) \frac{\lambda D}{d} = \left(n - \frac{1}{2}\right) \beta$$
- चौथी अदीप्त फ्रिinz के लिए ($n = 4$):
$$x'_4 = \left(4 - \frac{1}{2}\right) \beta$$
$$x'_4 = 3.5 \times 3\text{ mm}$$
$$x'_4 = 10.5\text{ mm} = 1.05 \times 10^{-2}\text{ m}$$
- **उत्तर 3:** केंद्रीय उच्चिष्ठ से चौथी अदीप्त फ्रिंज की दूरी $10.5\text{ mm}$ (या $0.0105\text{ m}$) है।
उत्तर (Answer): ### हाइगेन्स के सिद्धांत का परिचय\nहाइगेन्स का सिद्धांत एक ज्यामितीय निर्माण है जिसका उपयोग किसी भी पूर्व समय में इसकी स्थिति को देखते हुए, किसी बाद के समय में तरंग मोर्चे (wavefront) की स्थिति निर्धारित करने के लिए किया जाता है। यह निम्नलिखित मौलिक मान्यताओं पर आधारित है:
* किसी दिए गए तरंग मोर्चे का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं (secondary wavelets) के स्रोत के रूप में कार्य करता है, जो तरंग वेग के साथ सभी दिशाओं में विक्षोभ भेजता है।
* किसी भी बाद के समय में नया तरंग मोर्चा इन सभी द्वितीयक तरंगिकाओं के लिए स्पर्शरेखा आवरण (envelope) होता है जो आगे की दिशा में बढ़ रही हैं।
### परावर्तन के नियमों की व्युत्पत्ति\nआइए एक समतल तरंग मोर्चा $AB$ पर विचार करें जो आपतन कोण $i$ पर एक समतल परावर्तक सतह $XY$ पर तिरछे रूप से आपतित होता है।
1. **तरंग मोर्चे का निर्माण:**
- मान लीजिए कि तरंग मोर्चा सबसे पहले बिंदु $A$ पर और फिर समय अंतराल $t$ के बाद बिंदु $B$ पर टकराता है।
- मान लीजिए माध्यम में प्रकाश की चाल $v$ है। विक्षोभ द्वारा $B$ से $B'$ तक यात्रा करने में लिया गया समय $t = \frac{BB'}{v}$ है, इसलिए $BB' = vt$ है।
- हाइगेन्स के सिद्धांत के अनुसार, बिंदु $A$ से, द्वितीयक तरंगिकाएँ चाल $v$ के साथ उसी माध्यम में फैलने लगती हैं। समय $t$ में, $A$ से द्वितीयक तरंगिकाएँ $vt$ की दूरी तय करेंगी और त्रिज्या $AD = vt$ का एक गोलाकार तरंग चाप बनाएँगी।
- बिंदु $B'$ से, हम इस चाप पर एक स्पर्श रेखा $B'D$ खींचते हैं। यहाँ, $B'D$ परावर्तित तरंग मोर्चे को दर्शाता है।
2. **आपतन कोण और परावर्तन कोण की समानता का प्रमाण:**
- त्रिभुज $ABB'$ और त्रिभुज $ADB'$ पर विचार करें।
- $\angle ABB' = \angle ADB' = 90^\circ$ (निर्माण द्वारा)
- भुजा $AB' = AB'$ (उभयनिष्ठ कर्ण)
- भुजा $BB' = AD = vt$ (तरंगिकाओं की त्रिज्याएँ / समय $t$ में तय की गई दूरी)
- इसलिए, RHS (समकोण-कर्ण-भुजा) सर्वांगसमता कसौटी द्वारा, $\triangle ABB' \cong \triangle ADB'$।
- परिणामस्वरूप, संगत कोण बराबर होते हैं: $\angle BAB' = \angle AB'D$।
- चूंकि आपतित किरण और परावर्तित किरण क्रमशः आपतित और परावर्तित तरंग मोर्चों के लंबवत हैं, यह आसानी से स्थापित किया जा सकता है कि आपतन कोण $i$ और परावर्तन कोण $r$ इस प्रकार संबंधित हैं:
$$i = r$$
3. **निष्कर्ष:**
- इसके अलावा, आपतित तरंग मोर्चा, परावर्तक सतह का अभिलंब, और परावर्तित तरंग मोर्चा सभी एक ही तल में स्थित होते हैं, जो परावर्तन के दूसरे नियम को सत्यापित करता है। इस प्रकार, प्रकाश के हाइगेन्स तरंग सिद्धांत का उपयोग करके परावर्तन के नियमों को सफलतापूर्वक सत्यापित किया जाता है।
उत्तर (Answer): ### विवर्तन की परिभाषा\nप्रकाश का विवर्तन प्रकाश तरंगों के किसी अवरोध या द्वारक के किनारों से मुड़कर ज्यामितीय छाया के क्षेत्र में प्रवेश करने की घटना को कहते हैं, बशर्ते अवरोध या द्वारक का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के कोटि का हो।
### एकल झिरी पर विवर्तन\nजब एकवर्णी प्रकाश का एक समांतर पुंज $a$ चौड़ाई की एक एकल झिरी $AB$ पर लंबवत आपतित होता है, तो एक उत्तल लेंस के फोकस तल पर रखे पर्दे पर एक केंद्रीय दीप्त उच्चिष्ठ और घटती तीव्रता की एकांतर दीप्त व अदीप्त फ्रिंजों वाला विवर्तन पैटर्न प्राप्त होता है।
- झिरी की चौड़ाई $a$ है।
- आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य $\lambda$ है।
- पर्दे पर किसी विशेष बिंदु के लिए विवर्तन कोण $\theta$ है।
### द्वितीयक निम्निष्ठों के लिए सिद्धांत और व्युत्पत्ति\nझिरी पर आपतित तरंग अग्र पर प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का स्रोत बन जाता है। पर्दे पर बिंदु $P$ पर तीव्रता ज्ञात करने के लिए जहाँ प्रकाश $\theta$ कोण पर विवर्तित होता है:
1. बिंदु $A$ से अंतिम किरण $B$ पर एक लंब $AN$ गिराइए।
2. झिरी के अंतिम बिंदुओं $A$ और $B$ से निकलने वाली तरंगिकाओं के बीच पथ अंतर निम्नलिखित है:
$$\Delta = BN = a \sin \theta$$
**द्वितीयक निम्निष्ठों के लिए शर्त:**\nबिंदु $P$ पर निम्निष्ठ (अदीप्त फ्रिंज) प्राप्त करने के लिए, पथ अंतर $a \sin \theta$ तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का पूर्णांक गुणज होना चाहिए।
$$a \sin \theta = n\lambda \quad \text{जहाँ } n = \pm 1, \pm 2, \pm 3, \dots$$
**कारण:**\nहम वैचारिक रूप से झिरी को $a/2$ चौड़ाई के दो समान भागों में विभाजित कर सकते हैं। ऊपरी आधे भाग के प्रत्येक बिंदु के लिए, निचले आधे भाग में $a/2$ की दूरी पर एक संगत बिंदु होता है जिससे उनकी द्वितीयक तरंगिकाओं के बीच पथ अंतर $\lambda/2$ होता है। वे विनाशकारी व्यतिकरण करती हैं और एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप तीव्रता न्यूनतम होती है।
### तीव्रता वितरण वक्र\nतीव्रता वितरण वक्र दोनों ओर तेजी से घटती तीव्रता के द्वितीयक उच्चिष्ठों से घिरे एक बहुत ही तीक्ष्ण और तीव्र केंद्रीय उच्चिष्ठ को दर्शाता है। केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई निम्नलिखित है:
$$\beta_0 = \frac{2\lambda D}{a}$$
उत्तर (Answer): ### दिया गया डेटा:
- झिरियों के बीच की दूरी ($d$) = $0.15\text{ mm} = 0.15 \times 10^{-3}\text{ m} = 1.5 \times 10^{-4}\text{ m}$
- झिरियों से पर्दे की दूरी ($D$) = $1.0\text{ m}$
- प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) = $589\text{ nm} = 589 \times 10^{-9}\text{ m} = 5.89 \times 10^{-7}\text{ m}$
- दीप्त फ्रिंज की कोटि ($n$) = $4$
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### (i) फ्रिंज चौड़ाई ($\beta$) की गणना:\nयंग के द्वि-झिरी प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र है:
$$\beta = \frac{\lambda D}{d}$|
\nसूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\beta = \frac{(5.89 \times 10^{-7}\text{ m}) \times (1.0\text{ m})}{1.5 \times 10^{-4}\text{ m}}$$
$$\beta = \frac{5.89 \times 10^{-7}}{1.5 \times 10^{-4}}$$
$$\beta = 3.926 \times 10^{-3}\text{ m} = 3.93\text{ mm}$$
\nअतः, फ्रिंज चौड़ाई **$3.93\text{ mm}$** है।
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### (ii) चौथी दीप्त फ्रिंज की दूरी ($x_n$) की गणना:\nकेंद्रीय उच्चिष्ठ से $n$-वीं दीप्त फ्रिंज की दूरी का सूत्र है:
$$x_4 = n \left(\frac{\lambda D}{d}\right) = n\beta$$
\nचौथी दीप्त फ्रिंज के लिए ($n = 4$):
$$x_4 = 4 \times \beta$$
$$x_4 = 4 \times (3.926 \times 10^{-3}\text{ m})$$
$$x_4 = 1.5704 \times 10^{-2}\text{ m} = 15.70\text{ mm}$$
\nअतः, केंद्रीय उच्चिष्ठ से चौथी दीप्त फ्रिंज की दूरी **$15.70\text{ mm}$** (या $1.57\text{ cm}$) है।
उत्तर (Answer): ### हाइगेन्स का सिद्धांत\nहाइगेन्स का सिद्धांत एक ज्यामितीय रचना है जिसका उपयोग किसी दिए गए समय पर तरंग अग्र की स्थिति को ज्ञात करने के लिए किया जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार:
1. किसी दिए गए तरंग अग्र का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं (secondary wavelets) का स्रोत बन जाता है, जो उस माध्यम में प्रकाश के वेग से सभी दिशाओं में विक्षोभ फैलाती हैं।
2. बाद के किसी भी समय पर तरंग अग्र की नई स्थिति इन द्वितीयक तरंगिकाओं के अग्र दिशा में स्पर्श करने वाले आवरण (envelope) द्वारा दी जाती है।
### परावर्तन के नियमों की उत्पत्ति\nमाना एक समतल तरंग अग्र $AB$ किसी समतल परावर्तक सतह $XY$ पर आपतन कोण $i$ पर तिरछा आपतित होता है।
- माना माध्यम में प्रकाश की चाल $v$ है।
- माना बिंदु $B$ से विक्षोभ को परावर्तक सतह पर बिंदु $C$ तक पहुँचने में $t$ समय लगता है। अतः दूरी $BC = vt$ होगी।
- हाइगेन्स के सिद्धांत के अनुसार, चूँकि तरंग अग्र सबसे पहले बिंदु $A$ को छूता है, $A$ से द्वितीयक तरंगिकाएँ निकलना शुरू होती हैं और $t$ समय में $vt$ त्रिज्या के साथ फैलती हैं।
- $A$ को केंद्र मानकर और $vt$ त्रिज्या लेकर एक चाप खींचा जाता है। बिंदु $C$ से इस चाप पर एक स्पर्श रेखा $CD$ खींची जाती है। इस प्रकार, $CD$ परावर्तित तरंग अग्र को निरूपित करता है।
### ज्यामितीय व्युत्पत्ति\nत्रिभुज $\triangle ABC$ और $\triangle ADC$ में:
- $\angle ABC = \angle ADC = 90^\circ$ (चूँकि तरंग अग्र किरणों के लंबवत होता है)
- भुजा $AC$ दोनों त्रिभुजों में उभयनिष्ठ है।
- $BC = AD = vt$ (चूँकि चाल $v$ से समय $t$ में तय की गई दूरी बराबर है)
\nअतः, RHS (समकोण-कर्ण-भुजा) सर्वांगसमता कसौटी द्वारा, $\triangle ABC \cong \triangle ADC$ है।
\nत्रिभुजों की सर्वांगसमता से, संगत कोण बराबर होते हैं:
$$\angle BAC = \angle DCA$$
\nमाना आपतन कोण $i$ है और परावर्तन कोण $r$ है। ज्यामिति से यह आसानी से दिखाया जा सकता है कि:
- आपतन कोण, $i = 90^\circ - \angle BAC$
- परावर्तन कोण, $r = 90^\circ - \angle DCA$
\nचूँकि $\angle BAC = \angle DCA$ है, हम प्राप्त करते हैं:
$$i = r$$
\nयह परावर्तन के प्रथम नियम को सिद्ध करता है। इसके अतिरिक्त, आपतित तरंग अग्र, अभिलंब और परावर्तित तरंग अग्र सभी एक ही तल में स्थित होते हैं, जो परावर्तन के दूसरे नियम को सिद्ध करता है।
उत्तर (Answer): जब उपकरण को जल में डुबोया जाता है, तो नई फ्रिंज चौड़ाई ज्ञात करने के लिए यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई के सूत्र का उपयोग किया जाता है:
$$\beta = \frac{\lambda D}{d}$|
\nजहाँ:
- $\lambda$ प्रकाश की तरंगदैर्ध्य है
- $D$ झिरियों और पर्दे के बीच की दूरी है
- $d$ दोनों झिरियों के बीच की दूरी है
**दी गई जानकारी:**
- प्रारंभिक तरंगदैर्ध्य, $\lambda_1 = 6000\text{ \AA}$
- प्रारंभिक फ्रिंज चौड़ाई, $\beta_1 = 0.4\text{ mm} = 4 \times 10^{-4}\text{ m}$
- जल का अपवर्तनांक, $\mu = \frac{4}{3}$
\nजब उपकरण को $\mu$ अपवर्तनांक वाले माध्यम में डुबोया जाता है, तो प्रकाश की तरंगदैर्ध्य निम्नलिखित संबंध के अनुसार बदल जाती है:
$$\lambda_2 = \frac{\lambda_1}{\mu}$|
\nचूँकि फ्रिंज चौड़ाई $\beta$ तरंगदैर्ध्य $\lambda$ के सीधे आनुपातिक होती है ($\beta \propto \lambda$), इसलिए जल में नई फ्रिंज चौड़ाई $\beta_2$ होगी:
$$\beta_2 = \frac{\beta_1}{\mu}$|
\nसूत्र में दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$\beta_2 = \frac{0.4\text{ mm}}{\frac{4}{3}}$|
$$\beta_2 = \frac{0.4 \times 3}{4}$|
$$\beta_2 = 0.1 \times 3 = 0.3\text{ mm}$|
\nअतः, जब उपकरण को जल में डुबोया जाता है, तो नई फ्रिंज चौड़ाई $0.3\text{ mm}$ (या $3 \times 10^{-4}\text{ m}$) होती है।
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:
- अध्रुवित प्रकाश की प्रारंभिक तीव्रता = $I_0$
- दोनों पोलेराइडों के संचरण अक्षों के बीच का कोण, $\theta = 60^\circ$
\nचरण 1: जब $I_0$ तीव्रता का अध्रुवित प्रकाश पहले पोलेराइड से गुजरता है, तो ध्रुवण के कारण इसकी तीव्रता आधी हो जाती है।
$$\text{पहले पोलेराइड के बाद तीव्रता } (I_1) = \frac{I_0}{2}$|
\nचरण 2: अब, $I_1$ तीव्रता का यह ध्रुवक्षित प्रकाश दूसरे पोलेराइड से गुजरता है जिसका संचरण अक्ष पहले वाले से $\theta = 60^\circ$ के कोण पर है। मैलस के नियम के अनुसार, पारगमित तीव्रता ($I_2$) इस प्रकार दी जाती है:
$$I_2 = I_1 \cos^2(\theta)$$
\nमैलस के नियम में $I_1 = \frac{I_0}{2}$ और $\theta = 60^\circ$ रखने पर:
$$I_2 = \left(\frac{I_0}{2}\right) \cos^2(60^\circ)$|
\nचूँकि $\cos(60^\circ) = \frac{1}{2}$:
$$I_2 = \left(\frac{I_0}{2}\right) \left(\frac{1}{2}\right)^2$$
$$I_2 = \left(\frac{I_0}{2}\right) \left(/\frac{1}{4}\right)$|
$$I_2 = \frac{I_0}{8}$|
\nअतः, दूसरे पोलेराइड से बाहर निकलने वाले पारगमित प्रकाश की तीव्रता $\frac{I_0}{8}$ है।
उत्तर (Answer): प्रकाश का ध्रुवण वह परिघटना है जिसमें प्रकाश तरंगों के विद्युत क्षेत्र सदिशों के कंपनों को तरंग संचरण की दिशा के लंबवत एक ही तल तक सीमित कर दिया जाता है। सामान्य प्रकाश (अध्रुवित प्रकाश) में संचरण की दिशा के लंबवत सभी संभावित दिशाओं में विद्युत क्षेत्र के कंपन होते हैं। जब प्रकाश टूमलाइन या पोलेराइड जैसे कुछ क्रिस्टलों से गुजरता है, तो एक विशिष्ट तल को छोड़कर सभी दिशाओं में होने वाले कंपन अवरुद्ध हो जाते हैं, जिससे समतल-ध्रुवक्षित प्रकाश प्राप्त होता है। यह घटना प्रकाश तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति को दृढ़ता से सिद्ध करती है।
\nब्रूस्टर का नियम परावर्तन के माध्यम से समतल-ध्रुवक्षित प्रकाश प्राप्त करने की एक मात्रात्मक विधि प्रदान करता है। सर डेविड ब्रूस्टर ने यह खोज की कि जब अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी अपवर्तक माध्यम पर एक विशिष्ट आपतन कोण, जिसे ध्रुवण कोण या ब्रूस्टर कोण ($i_p$) कहा जाता है, पर आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश पूरी तरह से समतल-ध्रुवक्षित हो जाता है जिसका विद्युत सदिश आपतन तल के लंबवत दोलन करता है। ब्रूस्टर का नियम यह बताता है कि ध्रुवण कोण की स्पर्शज्या (tangent) माध्यम के अपवर्तनांक ($\mu$) के संख्यात्मक रूप से बराबर होती है, जिसे गणितीय रूप से $\mu = \tan(i_p)$ के रूप में व्यक्त किया जाता है। इसके अलावा, इस विशिष्ट आपतन कोण पर, परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण एक-दूसरे के परस्पर लंबवत होती हैं ($r + i_p = 90^\circ$)। इस सिद्धांत का उपयोग चमक को खत्म करने और ध्रुवक्षित बीम उत्पन्न करने के लिए ऑप्टिकल उपकरणों में व्यापक रूप से किया जाता है।
उत्तर (Answer): दिया गया डेटा:
- प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, $\lambda = 5000 \text{ \AA} = 5000 \times 10^{-10} \text{ m} = 5 \times 10^{-7} \text{ m}$
- विवर्तन निम्निष्ठ का क्रम, $n = 1$
- विवर्तन कोण, $\theta = 30^\circ$
\nएकल झिरी के लिए विवर्तन निम्निष्ठ का सूत्र है:
$$a \sin\theta = n\lambda$$\nजहाँ '$a$' झिरी की चौड़ाई है।
'$a$' का मान निकालने के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर:
$$a = \frac{n\lambda}{\sin\theta}$|
\nदिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$$a = \frac{1 \times 5 \times 10^{-7} \text{ m}}{\sin(30^\circ)}$$\nचूँकि $\sin(30^\circ) = 0.5$:
$$a = \frac{5 \times 10^{-7}}{0.5}$|
$$a = 10 \times 10^{-7} \text{ m} = 1 \times 10^{-6} \text{ m} = 1 \text{ माइक्रोन (\mu m)}$|
\nअतः, झिरी की चौड़ाई $1 \times 10^{-6} \text{ m}$ है।
उत्तर (Answer): प्रकाश के कलासंबद्ध स्रोत (coherent sources) वे स्रोत हैं जो समान आवृत्ति, समान तरंगदैर्ध्य की प्रकाश तरंगें उत्सर्जित करते हैं और जिनके बीच समय के साथ नियत कलांतर (constant phase difference) या शून्य कलांतर होता है। प्रकाश के दो स्वतंत्र स्रोत (जैसे दो अलग-अलग बिजली के बल्ब) कभी भी कलासंबद्ध नहीं हो सकते क्योंकि प्रकाश का उत्सर्जन परमाणु संक्रमण के कारण होता है जो यादृच्छिक विस्फोटों में होते हैं, जिससे हर $10^{-8}$ सेकंड में कला परिवर्तन होता है।
\nपर्दे पर एक स्थिर और सतत व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त करने के लिए कलासंबद्ध स्रोत अत्यंत आवश्यक हैं। यदि स्रोत कलासंबद्ध (incoherent) हैं, तो दो प्रकाश तरंगों के बीच का कलांतर समय के साथ यादृच्छिक रूप से लगातार बदलता रहेगा। परिणामस्वरूप, संपोषी व्यतिकरण (उच्चिष्ठ) और विनाशी व्यतिकरण (निम्निष्ठ) के स्थान पर्दे पर तेजी से और यादृच्छिक रूप से बदलते रहेंगे। मानव आँख या संसूचक उपकरण इस तरह के तीव्र उतार-चढ़ाव का पालन नहीं कर सकते हैं, और स्पष्ट चमकीली और अंधेरी फ्रिंजों के बजाय औसत तीव्रता वाला एक समान प्रकाश ही दिखाई देगा। इसलिए, एक स्थायी और अवलोकन योग्य व्यतिकरण प्रतिरूप के लिए कलासंबद्ध स्रोतों की आवश्यकता होती है।