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HI • NCERT

जैव-अणु

Subject: रसायन विज्ञान | Class: Class 12 | Syllabus Year: 2026
मुख्य सूत्र (Key Formulas)
जीव अणु (Biomolecules) - त्वरित पुनरीक्षण नोट्स

यह नोट्स माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश (MP Board) की कक्षा 12वीं की रसायन विज्ञान परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए हैं।


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1. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं या ऐसे यौगिक होते हैं जो जल-अपघटन पर इनका निर्माण करते हैं।


1. मोनोसैकेराइड (Monosaccharides): जिनका और अधिक जल-अपघटन नहीं किया जा सकता। (उदाहरण: ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, गैलेक्टोज)।

2. ओलिगोसैकेराइड (Oligosaccharides): जो जल-अपघटन पर 2 से 10 मोनोसैकेराइड इकाइ देते हैं। (उदाहरण: सुक्रोज, लैक्टोज, माल्टोज)।

3. पॉलिसैकेराइड (Polysaccharides): जो जल-अपघटन पर बड़ी संख्या में मोनोसैकेराइड इकाइ देते हैं। (उदाहरण: स्टार्च, ग्लाइकोजन, सेलूलोज़)।



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2. ग्लूकोज (Glucose: $C6H{12}O_6$)

ग्लूकोज एल्डोहेक्सोज है और इसे अंगूर की शर्करा भी कहते हैं।


1. HI के साथ गर्म करना: ग्लूकोज को जब लंबे समय तक HI के साथ गर्म किया जाता है, तो n-हेक्सेन बनता है (जो सीधी श्रृंखला की पुष्टि करता है)।

$$C6H{12}O6 + HI \xrightarrow{\text{गरम}} CH3-(CH2)4-CH_3 \text{ (n-hexane)}$$

2. हाइड्रॉक्सिलएमीन के साथ: ऑक्साइम बनाता है (C=O समूह की उपस्थिति)।

3. ब्रोमीन जल ($Br_2 \text{ water}$): ऑक्सीकरण द्वारा ग्लूकोनिक अम्ल बनाता है (CHO समूह की उपस्थिति)।

4. नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$): ऑक्सीकरण द्वारा सैकरिक अम्ल (डाइकार्बोक्सิลिक अम्ल) बनाता है।

5. एसिटिक एनहाइड्राइड के साथ: पेंटाएसीटेट बनाता है (जो 5 -OH समूहों की उपस्थिति दर्शाता है)।


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3. प्रोटीन (Proteins)

प्रोटीन ऐमीनो अम्ल के उच्च बहुलक (Polymers) होते हैं जो पेप्टाइड आबंध (-CO-NH-) द्वारा जुड़े होते हैं।



1. प्राथमिक संरचना (Primary Structure): ऐमीनो अम्लों का अनुक्रम।

2. द्वितीयक संरचना (Secondary Structure): polypeptide श्रृंखला का वलन, जैसे- $\alpha$-हेलिक्स और $\beta$-प्लीटेड शीट संरचना।

3. तृतीयक संरचना (Tertiary Structure): 3D वलन जो प्रोटीन का समग्र आकार निर्धारित करता है।

4. चतुर्थक संरचना (Quaternary Structure): उप-इकाइयों का आपस में जुड़ना।


तापमान बदलने या pH बदलने से प्रोटीन के हाइड्रोजन आबंध टूट जाते हैं, जिससे उसकी जैविक सक्रियता नष्ट हो जाती है (जैसे- दूध से दही का बनना या अंडे का उबलना)।


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4. विटामिन (Vitamins)

विटामिन कार्बनिक यौगिक हैं जो शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इन्हें हमारा शरीर संश्लेषित नहीं कर सकता।


1. जल में घुलनशील विटामिन: विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और विटामिन C। (ये शरीर में संचित नहीं होते, मूत्र के साथ बाहर निकल जाते हैं)।

2. वसा में घुलनशील विटामिन: विटामिन A, D, E और K। (ये यकृत और वसा ऊतकों में संचित होते हैं)।



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5. न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acids)

न्यूक्लिक अम्ल वे जैव अणु हैं जो आनुवंशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाते हैं। ये न्यूक्लियोटाइड्स के बहुलक होते हैं।


1. पेंटोस शर्करा: DNA में 2-डीऑक्सीराइबोज़ और RNA में राइबोज़ शर्करा होती है।

2. नाइट्रोजन क्षारक (Nitrogenous Bases):

3. फॉस्फोरस अम्ल समूह ($H3PO4$)



| गुण | DNA | RNA |

| :--- | :--- | :--- |

| शर्करा | 2-डीऑक्सीराइबोज़ | राइबोज़ |

| नाइट्रोजन क्षारक | A, G, C, T | A, G, C, U |

| संरचना | द्वि-कुंडलित (Double helix) | एक-कुंडलित (Single stranded) |

| कार्य | आनुवंशिक सूचना का संचरण | प्रोटीन संश्लेषण |


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(यह पुनरीक्षण शीट MP बोर्ड परीक्षा में कम समय में त्वरित और प्रभावी रिवीजन के लिए अत्यंत उपयोगी है।)

माइंड मैप चार्ट (Mind Map Chart)
📍 जैव अणु
Overview
कार्बोहाइड्रेट परिचय व परिभाषा वर्गीकरण मोनोसैकेराइड (ग्लूकोज, फ्रक्टोज) ओलिगोसैकेराइड (सुक्रोज, लैक्टोज) पॉलिसैकेराइड (स्टार्च, सेल्यूलोज, ग्लाइकोजन) अपचायक और अनपचायक शर्कराएँ संरचनाएँ (ग्लूकोज और फ्रक्टोज) प्रोटीन परिचय व निर्माण इकाई (अमीनो अम्ल) पेप्टाइड आबंध प्रोटीन की संरचनाएँ प्राथमिक संरचना द्वितीयक संरचना (अल्फा-हेलिक्स, बीटा-शीट) तृतीयक संरचना चतुष्कोणीय संरचना विकृतीकरण एन्जाइम परिभाषा व कार्य विशेषताएँ क्रिया-विधि (ताला-चाबी मॉडल) विटामिन परिचय व महत्व वसा में घुलनशील विटामिन (ए, डी, ई, के) जल में घुलनशील विटामिन (बी और सी) कमी से होने वाले रोग न्यूक्लिक अम्ल परिचय रासायनिक घटक (पेन्टोज़ शर्करा, नाइट्रोजन क्षार, फॉस्फेट समूह) डीएनए (संरचना व कार्य) आरएनए (प्रकार व कार्य) डीएनए फिंगरप्रिंटिंग
महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न (Important Board Questions)
Q1. प्रोटीन क्या हैं? उचित शीर्षकों के साथ प्रोटीन के विभिन्न स्तरों की संरचना (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक, और चतुर्थ) का विस्तृत विवरण दें। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### प्रोटीन का परिचय\nप्रोटीन उच्च आणविक द्रव्यमान वाले, जटिल नाइट्रोजनयुक्त मैक्रोमॉलिक्यूलर बहुलक हैं जो पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े $\alpha$-अमीनो एसिड से बने होते हैं। वे सभी जीवित प्रणालियों के मूलभूत निर्माण खंड हैं और जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण संरचनात्मक तथा कार्यात्मक भूमिकाएँ निभाते हैं। ### 1. प्रोटीन की प्राथमिक संरचना - **परिभाषा:** प्राथमिक संरचना उस विशिष्ट क्रम को संदर्भित करती है जिसमें अमीनो एसिड एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में व्यवस्थित होते हैं। - **विशेषताएँ:** प्रत्येक प्रोटीन में अमीनो एसिड का एक अनूठा क्रम होता है, जो आनुवंशिक रूप से निर्धारित होता है। इस क्रम में थोड़ा सा बदलाव प्रोटीन के जैविक कार्य को पूरी तरह से बदल सकता है (जैसे, सिकल सेल एनीमिया)। - **बंधन:** अमीनो एसिड विशेष रूप से सहसंयोजक पेप्टाइड बंधों द्वारा एक साथ जुड़े रहते हैं। ### 2. प्रोटीन की द्वितीयक संरचना - **परिभाषा:** द्वितीयक संरचना उस आकार को संदर्भित करती है जिसमें मुख्य श्रृंखला के नियमित मोड़ने के कारण एक लंबी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला मौजूद हो सकती है। - **प्रकार:** 1. **$\alpha$-हेलिक्स:** पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला एक दाएं हाथ के पेंच (हेलिक्स) में मुड़ जाती है जहाँ किसी अमीनो एसिड का प्रत्येक कार्बोनिली ऑक्सीजन श्रृंखला में $4$वें अमीनो एसिड के एमाइड हाइड्रोजन से हाइड्रोजन-बंधित होता है। 2. **$\beta$-प्लीटेड शीट:** इस संरचना में पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ एक दूसरे के बगल में फैली होती हैं और अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं। - **बंधन:** मुख्य रूप से $-C=O$ और $-NH-$ समूहों के बीच हाइड्रोजन बॉन्डिंग द्वारा बनाए रखा जाता है। ### 3. प्रोटीन की तृतीयक संरचना - **परिभाषा:** तृतीयक संरचना पूरी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के समग्र त्रि-आयामी तह को दर्शाती है। - **विशेषताएँ:** यह दो प्रमुख आणविक आकारों को जन्म देती है: रेशेदार (अघुलनशील, संरचनात्मक भूमिका) और ग्लोबुलर (घुलनशील, चयापचय भूमिका जैसे एंजाइम और हार्मोन)। - **बंधन:** हाइड्रोजन बांड, आयनिक बांड (नमक पुल), डाइसल्फ़ाइड लिंकेज ($-S-S-$), और हाइड्रोफोबिक इंटरैक्शन सहित विभिन्न प्रकार की बातचीत द्वारा स्थिर किया जाता है। ### 4. प्रोटीन की चतुर्थक संरचना - **परिभाषा:** कुछ प्रोटीन में दो या दो से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ होती हैं जिन्हें उपइकाइयाँ कहा जाता है। एक दूसरे के सापेक्ष इन उपइकाइयों की स्थानिक व्यवस्था चतुर्थक संरचना बनाती है। - **उदाहरण:** हीमोग्लोबिन चार उपइकाइयों (दो $\alpha$ और दो $\beta$ श्रृंखलाओं) से युक्त एक उत्कृष्ट उदाहरण है। - **बंधन:** हाइड्रोजन बांड, इलेक्ट्रोस्टैटिक बल और हाइड्रोफोबिक इंटरैक्शन जैसे गैर-सहसंयोजक इंटरैक्शन द्वारा एक साथ आयोजित किया जाता है।
Q2. न्यूक्लिक एसिड क्या हैं? जीवित प्रणालियों में पाए जाने वाले दो प्रकार के न्यूक्लिक एसिड के नाम लिखिए। उनके रासायनिक संघटन, संरचनात्मक संगठन (डीएनए के डबल-हेलिक्स मॉडल सहित) और उनके प्राथमिक जैविक कार्यों का वर्णन कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### न्यूक्लिक एसिड का परिचय\nन्यूक्लिक एसिड न्यूक्लियोटाइड के लंबी श्रृंखला वाले पॉलिमर हैं जो मुख्य रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आनुवंशिक जानकारी के भंडारण और संचरण के लिए जिम्मेदार हैं। वे जीवित कोशिकाओं के केंद्रक में पाए जाते हैं और मोटे तौर पर दो प्रकारों में वर्गीकृत होते हैं: 1. **DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड):** इसमें डीऑक्सीराइबोस शुगर होती है और यह आनुवंशिक जानकारी संग्रहीत करता है। 2. **RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड):** इसमें राइबोस शुगर होती है और यह मुख्य रूप से प्रोटीन संश्लेषण में शामिल होता है। ### रासायनिक संघटन\nरासायनिक रूप से, न्यूक्लिक एसिड न्यूक्लियोटाइड नामक दोहराई जाने वाली इकाइयों से बना होता है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में तीन मूलभूत घटक होते हैं: * **पेंटोज शुगर:** एक 5-कार्बन मोनोसेकेराइड; या तो $\beta$-D-2-deoxyribose (DNA में) या $\beta$-D-ribose (RNA में)। * **नाइट्रोजनी बेस:** नाइट्रोजन युक्त हेटरोसाइक्लिक कार्बनिक यौगिक। उन्हें दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: * *प्यूरीन:* एडेनिन (A) और ग्वानीन (G)। * *पाइरीमिडिन:* साइटोसिन (C), थाइमिन (T - केवल DNA में पाया जाता है), और यूरेसिल (U - केवल RNA में पाया जाता है)। * **फास्फोरस अम्ल ($H_3PO_4$):** फॉस्फोडाइस्टर बॉन्ड के माध्यम से क्रमिक न्यूक्लियोटाइड की पेंटोज शर्करा को जोड़ता है। ### संरचनात्मक संगठन और डीएनए डबल हेलिक्स मॉडल * **न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड का निर्माण:** पेंटोज शुगर से जुड़ा एक बेस न्यूक्लियोसाइड बनाता है। जब किसी न्यूक्लियोसाइड को शुगर के 5'-हाइड्रॉक्सिल समूह पर फॉस्फोराylate किया जाता है, तो यह एक न्यूक्लियोटाइड बनाता है। * **वाटसन और क्रिक का डीएनए का डबल हेलिक्स मॉडल:** डीएनए में दो पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं होती हैं जो एक डबल हेलिक्स में एक सामान्य अक्ष के चारों ओर कुंडलित होती हैं। दो श्रृंखलाएं एंटीपारालेल होती हैं (विपरीत दिशाओं में चलती हैं, यानी 5'$\to$3' और 3'$\to$5')। शुगर-फॉस्फेट बैकबोर्न बाहरी फ्रेमवर्क बनाती है, जबकि नाइट्रोजनी बेस अंदर की ओर इशारा करते हैं, हाइड्रोजन बांड के माध्यम से विशिष्ट रूप से युग्मित होते हैं: एडेनिन थाइमिन के साथ जोड़े बनाता है ($A=T$ दो हाइड्रोजन बांड के माध्यम से) और ग्वानीन साइटोसिन के साथ जोड़े बनाता है ($G\equiv C$ तीन हाइड्रोजन बांड के माध्यम से)। ### जैविक कार्य * डीएनए आनुवंशिकता का रासायनिक आधार है और पीढ़ियों से आनुवंशिक लक्षणों को बनाए रखने और पारित करने के लिए विशिष्ट रूप से जिम्मेदार है। * आरएनए अणु प्रोटीन बायोसिंथेसिस में विशिष्ट भूमिका निभाते हैं, जिन्हें मैसेंजर आरएनए (mRNA), राइबोसोमल आरएनए (rRNA), और ट्रांसफर आरएनए (tRNA) में वर्गीकृत किया जाता है।
Q3. कार्बोहाइड्रेट क्या हैं? उनका वर्गीकरण कैसे किया जाता है? डी-ग्लूकोज और डी-फ्रुक्टोज के बीच संरचनात्मक अंतर लिखिए, और ग्लूकोज के संबंध में एनोमेरिक कार्बन और म्यूटारोटेशन की अवधारणा की व्याख्या कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बोहाइड्रेट का परिचय\nकार्बोहाइड्रेट ऑप्टिकल रूप से सक्रिय पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन हैं, या ऐसे पदार्थ हैं जो हाइड्रोलिसिस पर ऐसी इकाइयां देते हैं। उन्हें आमतौर पर सैकेराइड के रूप में जाना जाता है और वे जीवित जीवों में प्राथमिक ऊर्जा स्रोतों और संरचनात्मक तत्वों के रूप में कार्य करते हैं. ### कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण\nहाइड्रोलिसिस पर उनके व्यवहार के आधार पर कार्बोहाइड्रेट को तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: 1. **मोनोसेकेराइड:** इन्हें सरल पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन में आगे हाइड्रोलाइज नहीं किया जा सकता है। उदाहरणों में ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और राइबोज़ शामिल हैं। 2. **ओलिगोसेकेराइड:** ये हाइड्रोलिसिस पर 2 से 10 मोनोसेकेराइड इकाइयां देते हैं। उनके द्वारा दी जाने वाली इकाइयों की संख्या के आधार पर उन्हें आगे डिसैकेराइड, ट्रिसैकेराइड आदि के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। उदाहरणों में सुक्रोज, लैक्टोज और माल्टोज शामिल हैं। 3. **पॉलिसैकेराइड:** ये पॉलीमेरिक कार्बोहाइड्रेट हैं जिनमें ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा जुड़ी बड़ी संख्या में मोनोसेकेराइड इकाइयां होती हैं। उदाहरणों में स्टार्च, सेल्युलोज और ग्लाइकोजन शामिल हैं। ### डी-ग्लूकोज और डी-फ्रुक्टोज के बीच संरचनात्मक अंतर * **ग्लूकोज:** यह कार्बन-1 पर एक एल्डिहाइड समूह ($-CHO$) और पांच हाइड्रॉक्सिल समूह युक्त एक एल्डोहेक्सोज़ है। इसका सूत्र $C_6H_{12}O_6$ है। * **फ्रुक्टोज:** यह कार्बन-2 पर एक कीटोनिक समूह ($-C=O$) और पांच हाइड्रॉक्सिल समूह युक्त एक कीटोहेक्सोज़ है। इसका सूत्र भी $C_6H_{12}O_6$ है। ### एनोमेरिक कार्बन और म्यूटारोटेशन * **एनोमेरिक कार्बन:** मोनोसेकेराइड की चक्रीय संरचनाओं में, रिंग बंद होने के कारण C-1 कार्बन (एल्डोज में) या C-2 कार्बन (केटोज में) असममित हो जाता है। इस विशिष्ट कार्बन को एनोमेरिक कार्बन के रूप में जाना जाता है। ग्लूकोज के $\alpha$ और $\beta$ रूप स्टीरियोइसोमर हैं जो एनोमेरिक कार्बन (C-1) पर कॉन्फ़िगरेशन में भिन्न होते हैं। * **म्यूटारोटेशन:** यह समाधान में एक ऑप्टिकल रूप से सक्रिय यौगिक के विशिष्ट ऑप्टिकल रोटेशन में तब तक सहज परिवर्तन है जब तक कि संतुलन मूल्य स्थापित नहीं हो जाता है। उदाहरण के लिए, $\alpha$-D-glucose का ताज़ा तैयार जलीय घोल $+112^\circ$ का विशिष्ट रोटेशन दिखाता है, जो धीरे-धीरे बदलता है और $+52.5^\circ$ के निरंतर मूल्य पर आ जाता है। इसी तरह, $\beta$-D-glucose $+19^\circ$ का प्रारंभिक विशिष्ट रोटेशन दिखाता है और $+52.5^\circ$ के समान संतुलन मूल्य तक बढ़ जाता है। एक खुले-श्रृंखला रूप के माध्यम से इस अंतर-रूपांतरण को म्यूटारोटेशन कहा जाता है।
Q4. न्यूक्लिक अम्ल क्या हैं? उनके रासायनिक संघटन, संरचनात्मक संरूपण और जैविक कार्यों के संदर्भ में DNA और RNA के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। इसके अलावा, DNA के डबल-हेलिक्स मॉडल को संक्षेप में समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### न्यूक्लिक अम्ल का परिचय\nन्यूक्लिक अम्ल बायोपोलिमर हैं, जो जीवन के सभी ज्ञात रूपों के लिए आवश्यक मैक्रोमोलेक्यूल्स हैं। वे मुख्य रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आनुवंशिक जानकारी के भंडारण, संचरण और अभिव्यक्ति के लिए जिम्मेदार हैं। न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार के होते हैं: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) और राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA)। ### DNA और RNA का रासायनिक संघटन * **पेंटोज शर्करा:** DNA में $\beta$-D-2-deoxyribose होती है, जबकि RNA में $\beta$-D-ribose होती है। * **नाइट्रोजनी क्षारक:** * DNA में प्यूरीन (एडेनिन, गुआनिन) और पिरिमिडाइन (साइटोसिन, थायमीन) होते हैं। * RNA में प्यूरीन (एडेनिन, गुआनिन) और पिरिमिडाइन (साइटोसिन, यूरेसिल) होते हैं। RNA में थायमीन अनुपस्थित होता है और इसके स्थान पर यूरेसिल होता है। * **फॉस्फोरिक अम्ल:** DNA और RNA दोनों में फॉस्फोडाइस्टर बंधों के माध्यम से जुड़े फॉस्फोरिक अम्ल ($\text{H}_3\text{PO}_4$) होते हैं। ### DNA और RNA के बीच अंतर | विशेषता | DNA | RNA | | :--- | :--- | :--- | | **पेंटोज शर्करा** | 2-डीऑक्सीराइबोज | राइबोज | | **क्षारक** | A, G, C, T | A, G, C, U | | **संरचना** | डबल-स्ट्रैंडेड हेलिक्स | सिंगल-स्ट्रैंडेड (मुख्य रूप से) | | **कार्य** | आनुवंशिक जानकारी संग्रहीत करता है | प्रोटीन संश्लेषण और अनुवाद | | **स्थायित्व** | अधिक स्थिर और क्षारीय जल अपघटन के प्रति प्रतिरोधी | कम स्थिर, क्षार द्वारा आसानी से हाइड्रोलाइज्ड | ### DNA का डबल-हेलिक्स मॉडल 1953 में जेम्स वाटसन और फ्रांसिसी क्रिक द्वारा प्रस्तावित: * इसमें दो पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं शामिल होती हैं जो एक डबल हेलिक्स में एक दूसरे के चारों ओर लपेटती हैं। * दो स्ट्रैंड एंटी-पैरेलल होते हैं; एक $5' \rightarrow 3'$ दिशा में और दूसरा $3' \rightarrow 5'$ दिशा में चलता है। * बैकबोन शर्करा और फॉस्फेट समूहों के वैकल्पिक होने से बनती है, जबकि नाइट्रोजनी क्षारक अंदर की ओर प्रोजेक्ट करते हैं। * क्षारक विशिष्ट पूरक हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं: एडेनिन (A) दो हाइड्रोजन आबंधों के माध्यम से थायमीन (T) के साथ जुड़ता है ($\text{A}=\text{T}$), और गुआनिन (G) तीन हाइड्रोजन आबंधों के माध्यम से साइटोसिन (C) के साथ जुड़ता है ($\text{G}\equiv\text{C}$)।
Q5. कार्बोहाइड्रेट को परिभाषित कीजिए और जल अपघटन के प्रति उनके व्यवहार के आधार पर उनका वर्गीकरण कीजिए। हावर्थ प्रक्षेपों और एनोमेरिक कार्बन की सहायता से ग्लूकोज की चक्रीय संरचना को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बोहाइड्रेट की परिभाषा\nकार्बोहाइड्रेट optically active पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं, या ऐसे पदार्थ होते हैं जो जल अपघटन पर ऐसी इकाइयाँ देते हैं। इन्हें आमतौर पर सैकराइड के रूप में जाना जाता है और ये जीवित जीवों में प्राथमिक ऊर्जा स्रोतों के रूप में कार्य करते हैं। ### जल अपघटन के आधार पर वर्गीकरण 1. **मोनोसैक्राइड:** ये वे कार्बोहाइड्रेट हैं जिन्हें पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन की छोटी इकाइयों में आगे हाइड्रोलाइज नहीं किया जा सकता है। उदाहरणों में ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और गैलैक्टोज शामिल हैं। 2. **ओलिगोसैक्राइड:** ये कार्बोहाइड्रेट जल अपघटन पर 2 से 10 मोनोसैक्राइड इकाइयाँ देते हैं। मोनोसैक्राइड की संख्या के आधार पर इन्हें आगे डिस्सैक्राइड, ट्राइसैक्राइड आदि में वर्गीकृत किया जाता है। उदाहरण: सुक्रोज, माल्टोज, लैक्टोज। 3. **पोलिसैक्राइड:** ये पॉलीमेरिक कार्बोहाइड्रेट हैं जिनमें ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा जुड़े बड़ी संख्या में मोनोसैक्राइड इकाइयाँ होती हैं। उदाहरणों में स्टार्च, ग्लाइकोजन और सेल्युलोज शामिल हैं। ### ग्लूकोज की चक्रीय संरचना और हावर्थ प्रक्षेप\nयद्यपि ग्लूकोज एक एल्डिहाइड के रूप में प्रतिक्रिया करता है (टॉलेंस अभिकर्मक, फेलिंग विलयन और हाइड्रॉक्सिलमाइन के साथ प्रतिक्रियाएं दिखाता है), कुछ साक्ष्य (जैसे कि इसका शिफ परीक्षण देने में विफल होना और दो क्रिस्टलीय रूपों, $\alpha$-D-glucose और $\beta$-D-glucose का अस्तित्व) साबित करते हैं कि सीधी श्रृंखला संरचना अपर्याप्त है। * **हेमीएसिटाल का निर्माण:** D-glucose की खुली श्रृंखला संरचना एक इंट्रामालिक्यूलर न्यूक्लियोफिलिक जोड़ प्रतिक्रिया से गुजरती है। C-5 पर स्थित अल्कोहलिक समूह C-1 पर कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करता है, जिससे एक स्थिर छह सदस्यीय वलय बनता है जिसे पाइरानोज वलय कहा जाता है। * **एनोमेरिक कार्बन:** C-1 कार्बन (खुली श्रृंखला के रूप में कार्बोनिल कार्बन) चक्रीय संरचना में चिरल हो जाता है और इसे एनोमेरिक कार्बन कहा जाता है। बनने वाले दो चक्रीय स्टीरियोिसोमर को एनोमर ($\alpha$ और $\beta$) कहा जाता है। * **हावर्थ प्रक्षेप:** हावर्थ संरचना में, छह सदस्यीय पाइरानोज वलय को किनारे से देखे जाने वाले समतल षट्कोण के रूप में दर्शाया जाता है। $\alpha$-D-glucopyranose के लिए, C-1 पर $-\text{OH}$ समूह नीचे की ओर इशारा करता है, जबकि $\beta$-D-glucopyranose के लिए, C-1 पर $-\text{OH}$ समूह ऊपर की ओर इशारा करता है।
Q6. न्यूक्लिक अम्ल क्या हैं? DNA और RNA के बीच संरचनात्मक अंतर लिखिए। साथ ही, वॉटसन और क्रिक द्वारा प्रस्तावित DNA के डबल हेलिक्स मॉडल को समझाइए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### न्यूक्लिक अम्ल का परिचय\nन्यूक्लिक अम्ल सभी जीवित कोशिकाओं के नाभिक में पाए जाने वाले जैव अणु हैं, जो आनुवंशिकी (heredity) और प्रोटीन संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये न्यूक्लियोटाइड के लंबी श्रृंखला वाले पॉलिमर हैं और मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) और राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA)। ### DNA और RNA के बीच संरचनात्मक अंतर | विशेषता | DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) | RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड) | | :--- | :--- | :--- | | **पेंटोज शुगर** | $\beta$-D-2-डीऑक्सीराइबोज़ | $\beta$-D-राइबोज़ | | **नाइट्रोजनयुक्त क्षारक** | एडेनिन, ग्वानिन, साइटोसिन, थाइमिन (A, G, C, T) | एडेनिन, ग्वानिन, साइटोसिन, यूरेसिल (A, G, C, U) | | **स्ट्रैंड संरचना** | डबल-स्ट्रैंडेड हेलिक्स संरचना | सिंगल-स्ट्रैंडेड संरचना | | **प्राथमिक कार्य** | आनुवंशिक जानकारी संग्रहीत और प्रेषित करता है | सीधे तौर पर प्रोटीन संश्लेषण में शामिल होता है | ### DNA का वॉटसन और क्रिक मॉडल\nजेम्स वॉटसन और फ्रांसिस्क क्रिक ने एक्स-रे विवर्तन डेटा और रासायनिक संरचना के आधार पर DNA की संरचना के लिए एक डबल-हेलिक्स मॉडल प्रस्तावित किया। इस मॉडल की मुख्य विशेषताएं हैं: 1. **दो स्ट्रैंड:** DNA में दो पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं होती हैं जो एक केंद्रीय अक्ष के चारों ओर सर्पिल रूप से डबल हेलिक्स में एक-दूसरे के चारों ओर लिपटी होती हैं। 2. **प्रतिसमांतर प्रकृति (Antiparallel Nature):** दोनों स्ट्रैंड विपरीत दिशाओं में चलते हैं; एक स्ट्रैंड की ध्रुवीयता $5' \to 3'$ होती है, जबकि दूसरे की $3' \to 5'$ होती है। 3. **बैकबोन:** शुगर-फॉस्फेट बैकबोन हेलिक्स का बाहरी संरचनात्मक ढांचा बनाती है, जबकि नाइट्रोजनयुक्त क्षारक अंदर की ओर प्रोजेक्ट करते हैं। 4. **बेस पेयरिंग:** दो स्ट्रैंड्स पर नाइट्रोजनयुक्त क्षारक विशिष्ट हाइड्रोजन बॉन्डिंग के माध्यम से जोड़े बनाते हैं। एडेनिन (A) हमेशा दो हाइड्रोजन बॉन्ड के माध्यम से थाइमिन (T) के साथ जुड़ता है ($A = T$), और ग्वानिन (G) हमेशा तीन हाइड्रोजन बॉन्ड के माध्यम से साइटोसिन (C) के साथ जुड़ता है ($G \equiv C$)। 5. **पूरक और चारगाफ का नियम:** इस विशिष्ट युग्मन के कारण, दोनों स्ट्रैंड एक-दूसरे के पूरक (complementary) होते हैं। परिणामस्वरूप, एडेनिन की कुल मात्रा थाइमिन के बराबर होती है, और ग्वानिन साइटोसिन के बराबर होती है ($[A] = [T]$ और $[G] = [C]$)। 6. **आयाम:** डबल हेलिक्स का व्यास लगभग $2\text{ nm}$ ($20\ \mathring{\text{A}}$) होता है, प्रत्येक पूर्ण मोड़ की लंबाई लगभग $3.4\text{ nm}$ ($34\ \mathring{\text{A}}$) होती है जिसमें लगभग 10 बेस जोड़े होते हैं।
Q7. कार्बोहाइड्रेट क्या हैं? जलअपघटन के प्रति उनके व्यवहार के आधार पर उनका वर्गीकरण कीजिए। उपयुक्त उदाहरणों के साथ अपचायक (reducing) और अनपचायक (non-reducing) शर्करा के बीच अंतर कीजिए, और D-ग्लूकोज की चक्रीय संरचना की चर्चा कीजिए. 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बोहाइड्रेट का परिचय\nकार्बोहाइड्रेट ऑप्टिकली सक्रिय पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं, या ऐसे यौगिक होते हैं जो जलअपघटन पर ऐसी इकाइयाँ देते हैं। उन्हें आमतौर पर सैकराइड के रूप में जाना जाता है और जीवित जीवों में प्राथमिक ऊर्जा स्रोतों और संरचनात्मक तत्वों के रूप में कार्य करते हैं। ### जलअपघटन के आधार पर वर्गीकरण\nजलअपघटन के प्रति उनके व्यवहार के आधार पर कार्बोहाइड्रेट को तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: * **मोनोसैक्राइड:** ये सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट हैं जिन्हें सरल पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन में आगे हाइड्रोलाइज नहीं किया जा सकता है। उदाहरणों में ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और राइबोज शामिल हैं। * **ऑलिगोसैक्राइड:** ये कार्बोहाइड्रेट जलअपघटन पर 2 से 10 मोनोसैक्राइड इकाइयाँ देते हैं। इकाइयों की संख्या के आधार पर, उन्हें आगे डिसैक्राइड (जैसे, सुक्रोज, लैक्टोज), ट्राइसैक्राइड आदि के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। * **पॉलिसैक्राइड:** ये उच्च आणविक द्रव्यमान के पॉलीमेरिक कार्बोहाइड्रेट हैं जो जलअपघटन पर बड़ी संख्या में मोनोसैक्राइड इकाइयाँ देते हैं। उदाहरणों में स्टार्च, सेलूलोज़ और ग्लाइकोजन शामिल हैं। ### अपचायक और अनपचायक शर्करा (Reducing and Non-Reducing Sugars) * **अपचायक शर्करा:** जिन कार्बोहाइड्रेट में मुफ्त एल्डिहाइड या कीटो समूह होते हैं और जो टॉलेन अभिकर्मक और फेलिंग विलयन को अपचयित कर सकते हैं, उन्हें अपचायक शर्करा कहा जाता है। सभी मोनोसैक्राइड और अधिकांश डिसैक्राइड (जैसे माल्टोज और लैक्टोज) अपचायक शर्करा हैं। * **अनपचायक शर्करा:** जिन कार्बोहाइड्रेट में मुफ्त एल्डिहाइड या कीटो समूह नहीं होते हैं और जो टॉलेन या फेलिंग अभिकर्मकों को अपचयित नहीं कर सकते हैं, उन्हें अनपचायक शर्करा कहा जाता है। सुक्रोज इसका एक क्लासिक उदाहरण है क्योंकि ग्लूकोज और फ्रुक्टोज के अपचायक समूह ग्लाइकोसिडिक बॉन्ड के निर्माण में शामिल होते हैं। ### D-ग्लूकोज की चक्रीय संरचना\nयद्यपि D-ग्लूकोज एल्डिहाइड की कई विशिष्ट प्रतिक्रियाओं को प्रदर्शित करता है, यह कुछ विशिष्ट एल्डिहाइड प्रतिक्रियाओं (जैसे शिफ परीक्षण) से गुजरने में विफल रहता है और बिउसल्फ़ाइट योगशील उत्पाद नहीं बनाता है। इससे यह निष्कर्ष निकला कि एल्डिहाइड समूह हेमीएसिटाल गठन में शामिल है। * ग्लूकोज में, C-5 पर $-\text{OH}$ समूह C-1 पर एल्डिहाइड समूह के साथ प्रतिक्रिया करके छह-सदस्यीय चक्रीय हेमीएसिटाल रिंग बनाता है, जिसे पाइरानोज रिंग कहा जाता है। * यह चक्रीय संरचना दो स्टीरियोसोमर्स को जन्म देती है: * **$\alpha$-D-ग्लूकोज:** जिसमें C-1 पर $-\text{OH}$ समूह दाईं/नीचे की ओर होता है। * **$\beta$-D-ग्लूकोज:** जिसमें C-1 पर $-\text{OH}$ समूह बाईं/ऊपर की ओर होता है। * इन दोनों आइसोमर्स को एनोमर कहा जाता है, और C-1 को एनोमेरिक कार्बन के रूप में जाना जाता है।
Q8. कार्बोहाइड्रेट को परिभाषित कीजिए और जलअपघटन के प्रति उनके व्यवहार के आधार पर उनका वर्गीकरण कीजिए। D-ग्लूकोज की चक्रीय हेमीएसिटाल संरचना को समझाइए और इसकी खुली श्रृंखला संरचना की सीमाओं का उल्लेख कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### कार्बोहाइड्रेट की परिभाषा\nकार्बोहाइड्रेट प्रकाशिक सक्रिय पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं, या ऐसे यौगिक होते हैं जो जलअपघटन पर ऐसे यूनिट उत्पन्न करते हैं। इन्हें आमतौर पर सैकराइड्स कहा जाता है। ### जलअपघटन के आधार पर वर्गीकरण 1. **मोनोसेकराइड्स:** - ये वे कार्बोहाइड्रेट हैं जिन्हें सरल पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन यूनिट में आगे जलअपघटित नहीं किया जा सकता है। - उदाहरण: ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, राइबोज। 2. **ओलिगोसेकराइड्स:** - ये कार्बोहाइड्रेट जलअपघटन पर 2 से 10 मोनोसेकराइड यूनिट देते हैं। - इन्हें डाइसैकराइड (उदा. सुक्रोज, लैक्टोज), ट्राइसैकराइड आदि के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 3. **पोलिसैकराइड्स:** - ये ग्लाइकोसिडिक लिंकेज के माध्यम से बड़ी संख्या में मोनोसेकराइड यूनिट को जोड़कर बनाए गए पॉलिमेरिक कार्बोहाइड्रेट हैं। - उदाहरण: स्टार्च, सेलूलोज़, ग्लाइकोजन। ### D-ग्लूकोज की चक्रीय संरचना - ग्लूकोज की खुली श्रृंखला संरचना कुछ प्रतिक्रियाओं को समझाने में विफल रहती है, जैसे कि शिफ के अभिकर्मक के साथ मुक्त एल्डिहाइड समूह परीक्षण की अनुपस्थिति और ग्लूकोज के दो स्टीरियोइसोमेरिक रूपों ($\alpha$-D-ग्लूकोज और $\beta$-D-ग्लूकोज) का अस्तित्व। - इस व्यवहार को एक चक्रीय हेमीएसिटाल संरचना के गठन द्वारा समझाया गया है। $\text{C-5}$ पर $-\text{OH}$ समूह छह सदस्यीय चक्रीय हेमीएसिटाल रिंग बनाने के लिए एल्डिहाइड समूह ($\text{C-1}$) से जुड़ता है, जिसे आमतौर पर पाइरानोस संरचना कहा जाता है। ### खुली श्रृंखला संरचना की सीमाएं 1. ग्लूकोज शिफ का परीक्षण नहीं देता है और एल्डिहाइड समूह होने के बावजूद $\text{NaHSO}_3$ के साथ हाइड्रोजनसल्फाइड योगात्मक उत्पाद नहीं बनाता है। 2. ग्लूकोज का पेंटाएसिटेट हाइड्रॉक्सिलमाइन के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है, जो मुक्त $-\text{CHO}$ समूह की अनुपस्थिति को इंगित करता है। 3. D-ग्लूकोज दो अलग-अलग क्रिस्टलीय रूपों, $\alpha$ और $\beta$ में मौजूद है, जो म्यूटारोटेशन प्रदर्शित करते हैं।
Q9. न्यूक्लिक अम्ल क्या हैं? डीएनए और आरएनए के बीच उनके रासायनिक संघटन, संरचनात्मक अंतर और जैविक कार्यों की विस्तार से व्याख्या करते हुए अंतर स्पष्ट कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### न्यूक्लिक अम्ल की परिभाषा\nन्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड के लंबी श्रृंखला वाले पॉलिमर हैं, जो जीवित जीवों में आनुवंशिक विशेषताओं के संचरण और प्रोटीन संश्लेषण के लिए जिम्मेदार हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: डीएनए (डीऑक्सीराइबोक्लिक एसिड) और आरएनए (राइबोक्लिक एसिड)। ### रासायनिक संघटन\nएक न्यूक्लियोटाइड में तीन रासायनिक घटक होते हैं: 1. **पेंटोस शुगर:** डीएनए में $\beta$-D-2-डीऑक्सीराइबोज होता है, जबकि आरएनए में $\beta$-D-राइबोज होता है। 2. **नाइट्रोजनी क्षारक:** - प्यूरीन: एडेनिन (A) और गुआनिन (G) डीएनए और आरएनए दोनों में मौजूद होते हैं। - पाइरीमिडिन: साइटोसिन (C) और थाइमिन (T) डीएनए में होते हैं, जबकि साइटोसिन (C) और यूरेसिल (U) आरएनए में होते हैं। 3. **फॉस्फोरिक अम्ल:** $\text{H}_3\text{PO}_4$ अणु जो फॉस्फोडाइस्टर लिंकेज बनाता है। 4. **डीएनए और आरएनए के बीच विस्तृत अंतर:** - डीएनए में 2-डीऑक्सीराइबोज शुगर होता है; आरएनए में राइबोज शुगर होता है। - डीएनए में थाइमिन होता है; आरएनए में यूरेसिल होता है। - डीएनए की संरचना डबल-हेलिक्स होती है; आरएनए एकल-स्ट्रैंडेड होता है। - डीएनए आनुवंशिक जानकारी संग्रहीत करता है; आरएनए प्रोटीन संश्लेषण में मदद करता है। - डीएनए अधिक स्थिर होता है; आरएनए कम स्थिर होता है।
Q10. प्रोटीन क्या हैं? संरचना और आकार के आधार पर उनका वर्गीकरण कीजिए तथा प्रोटीन संरचना के विभिन्न स्तरों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक) की विस्तार से व्याख्या कीजिए। 5 Marks
उत्तर (Answer): ### प्रोटीन की परिभाषा\nप्रोटीन उच्च आणविक द्रव्यमान वाले जटिल बायोपोलिमर हैं जो पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े $\alpha$-अमीनो एसिड से बने होते हैं। वे सभी जीवित प्रणालियों के मूलभूत निर्माण खंड हैं और शारीरिक प्रक्रियाओं के विकास, मरम्मत और विनियमन के लिए आवश्यक हैं। ### संरचना और आकार के आधार पर वर्गीकरण 1. **रेशेदार प्रोटीन (Fibrous Proteins):** - जब पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं समानांतर चलती हैं और हाइड्रोजन तथा डाइसल्फ़ाइड बंधों द्वारा एक साथ रहती हैं, तो फाइबर जैसी संरचनाएं बनती हैं। - ये पानी में अघुलनशील होते हैं। - उदाहरण: केराटिन (बालों, ऊन, रेशम में मौजूद) और मायोसिन (मांसपेशियों में मौजूद)। 2. **गोलाकार प्रोटीन (Globular Proteins):** - ये संरचनाएं तब बनती हैं जब पॉलीपेप्टाइड की श्रृंखलाएं एक गोलाकार आकार देने के लिए कुंडलित होती हैं। - ये आमतौर पर पानी में घुलनशील होते हैं। - उदाहरण: इंसुलिन और एल्ब्यूमिन। ### प्रोटीन संरचना के स्तर 1. **प्राथमिक संरचना:** - प्रोटीन की प्राथमिक संरचना उस विशिष्ट अनुक्रम को संदर्भित करती है जिसमें अमीनो एसिड एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में व्यवस्थित होते हैं। - अमीनो एसिड के अनुक्रम में कोई भी परिवर्तन एक पूरी तरह से अलग प्रोटीन बनाता है। 2. **द्वितीयक संरचना:** - यह उस आकार को संदर्भित करता है जिसमें एक लंबी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला मौजूद हो सकती है। यह $-\text{C=O}$ और $-\text{NH}-$ समूहों के बीच हाइड्रोजन बॉन्डिंग के कारण पेप्टाइड श्रृंखला के बैकबोनों के नियमित तह होने से उत्पन्न होता है। - यह दो अलग-अलग प्रकारों में मौजूद है: $\alpha$-हेलिक्स और $\beta$-प्लीटेड शीट संरचना। 3. **तृतीयक संरचना:** - यह पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के समग्र त्रि-आयामी तह को दर्शाता है। - यह दो प्रमुख आणविक आकार देता है: रेशेदार और गोलाकार। तृतीयक संरचना को स्थिर करने वाले मुख्य बल हाइड्रोजन बॉन्ड, आयनिक बॉन्ड, डाइसल्फ़ाइड लिंकेज और वैन डेर वाल्स बल हैं। 4. **चतुर्थक संरचना:** - कुछ प्रोटीन में दो या दो से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं होती हैं जिन्हें सबयूनिट कहा जाता है। एक दूसरे के सापेक्ष इन सबयूनिट्स की स्थानिक व्यवस्था को चतुर्थक संरचना कहा जाता है।
Q11. पेप्टाइड बॉन्ड को परिभाषित कीजिए। रासायनिक निरूपण के साथ दो अमीनो एसिड के बीच संघनन प्रतिक्रिया द्वारा डाइपेप्टाइड कैसे बनता है, समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): पेप्टाइड बॉन्ड एक एमाइड लिंकेज (-CO-NH-) है जो एक अमीनो एसिड के कार्बोक्सिल समूह (-COOH) और दूसरे अमीनो एसिड के अमीनो समूह (-NH2) के बीच पानी के अणु के निष्कासन के साथ बनता है। जब दो अमीनो एसिड इस तरह से गठबंधन करते हैं, तो परिणामी उत्पाद को डाइपेप्टाइड कहा जाता है। रासायनिक निरूपण / निर्माण: आइए अल्फा-अमीनो एसिड के दो अणुओं पर विचार करें, मान लीजिए ग्लाइसिन (H2N-CH2-COOH) और एलेनिन (H2N-CH(CH3)-COOH)। प्रतिक्रिया इस प्रकार होती है: H2N-CH2-COOH + H2N-CH(CH3)-COOH -> H2N-CH2-CO-NH-CH(CH3)-COOH + H2O। इस प्रतिक्रिया में, ग्लाइसिन के कार्बोक्सिल समूह का हाइड्रॉक्सिल भाग (-OH) एलेनिन के अमीनो समूह के हाइड्रोजन परमाणु (-H) के साथ मिलकर पानी के एक अणु (H2O) को छोड़ता है, जिससे दो अमीनो एसिड अवशेषों के बीच एक स्थिर पेप्टाइड बॉन्ड (-CO-NH-) बनता है। इसी तरह, यदि तीन अमीनो एसिड गठबंधन करते हैं, तो एक ट्राइपेप्टाइड बनता है, और जब कई अमीनो एसिड (आमतौर पर दस से अधिक) जुड़ जाते हैं, तो यह एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के गठन की ओर जाता है।
Q12. शर्करा इकाइयों, नाइट्रोजनयुक्त क्षारक (बेसिस) और उनके जैविक कार्यों के संदर्भ में DNA और RNA के बीच संरचनात्मक अंतर लिखिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): DNA (डऑक्सीराइबोक्लिक एसिड) और RNA (राइबोक्लिक एसिड) दो प्रकार के न्यूक्लिक एसिड हैं जो आनुवंशिक विशेषताओं के संचरण और प्रोटीन संश्लेषण के लिए जिम्मेदार हैं। उनके संरचनात्मक अंतर इस प्रकार हैं: 1. शर्करा इकाई: DNA में बीटा-डी-2-डऑक्सीराइबोज़ शर्करा होती है, जबकि RNA में बीटा-डी-राइबोज़ शर्करा होती है, जिसमें C-2 स्थिति पर एक अतिरिक्त हाइड्रॉक्सिल समूह होता है। 2. नाइट्रोजनयुक्त क्षारक: दोनों में प्यूरीन (एडेनिन और गुआनिन) होते हैं। हालाँकि, वे पिरामिडिन में भिन्न होते हैं। DNA में साइटोसिन और थाइमीन होता है, जबकि RNA में साइटोसिन और यूरेसिल होता है (RNA में थाइमीन अनुपस्थित होता है)। 3. स्ट्रैंड संरचना: DNA आमतौर पर पूरक बेस जोड़े के बीच हाइड्रोजन बांड द्वारा एक साथ आयोजित एक डबल-स्ट्रैंडेड हेलिक्स के रूप में मौजूद होता है। RNA आमतौर पर एक सिंगल-स्ट्रैंडेड अणु के रूप में मौजूद होता है जो कभी-कभी खुद पर वापस मुड़ सकता है। 4. जैविक कार्य: DNA अधिकांश जीवों में मुख्य आनुवंशिक सामग्री है और पीढ़ी दर पीढ़ी आनुवंशिक जानकारी को संग्रहीत करने और स्थानांतरित करने के लिए जिम्मेदार है। RNA मुख्य रूप से कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण के लिए जिम्मेदार है, जो mRNA, tRNA और rRNA जैसे विभिन्न रूपों में कार्य करता है।
Q13. विटामिन्स को परिभाषित कीजिए और पानी तथा वसा में उनकी घुलनशीलता के आधार पर उन्हें दो समूहों में वर्गीकृत कीजिए। प्रत्येक समूह के दो उदाहरण दीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): विटामिन ऐसे कार्बनिक यौगिक हैं जो सामान्य स्वास्थ्य, विकास और चयापचय के लिए हमारे आहार में कम मात्रा में आवश्यक होते हैं, लेकिन जिनकी कमी से विशिष्ट हीनता जनित रोग हो जाते हैं। इन्हें मानव शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में संश्लेषित नहीं किया जा सकता है और भोजन के माध्यम से आपूर्ति की जानी चाहिए। घुलनशीलता के आधार पर विटामिन को दो व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: 1. पानी में घुलनशील विटामिन: ये विटामिन पानी में घुलनशील होते हैं। इन्हें आहार में नियमित रूप से आपूर्ति की जानी चाहिए क्योंकि ये मूत्र में नियमित रूप से उत्सर्जित होते हैं और शरीर में संग्रहीत नहीं किए जा सकते हैं (विटामिन B12 को छोड़कर)। उदाहरणों में विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) और विटामिन B कॉम्प्लेक्स (जैसे विटामिन B1, B2, B6, B12) शामिल हैं। 2. वसा में घुलनशील विटामिन: ये विटामिन वसा और तेलों में घुलनशील होते हैं लेकिन पानी में अघुलनशील होते हैं। वे जिगर और वसा ऊतकों में संग्रहीत होते हैं। इनका अत्यधिक संचय हानिकारक हो सकता है। उदाहरणों में विटामिन A (रेटिनॉल), विटामिन D (कैल्सीफेरोल), विटामिन E (टोकोफेरोल) और विटामिन K (फिलोक्विनान) शामिल हैं।
Q14. प्रोटीन के विकृतीकरण (Denaturation) से क्या तात्पर्य है? विकृतीकरण के दौरान प्रोटीन की संरचना में होने वाले परिवर्तनों को समझाइए। 3 Marks
उत्तर (Answer): प्रोटीन के विकृतीकरण से तात्पर्य भौतिक या रासायनिक परिवर्तनों के कारण प्रोटीन की मूल संरचना के विघटन से है। जब अपनी मूल अवस्था में किसी प्रोटीन को तापमान में परिवर्तन जैसे भौतिक परिवर्तनों या पीएच में परिवर्तन जैसे रासायनिक परिवर्तनों के अधीन किया जाता है, तो हाइड्रोजन बांड और अन्य स्थिर करने वाली अंतःक्रियाएं बाधित हो जाती हैं। परिणामस्वरूप, ग्लोब्यूल खुल जाते हैं और हेलिक्स अनकॉइल हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रोटीन की जैविक गतिविधि का नुकसान होता है। विकृतीकरण के दौरान, प्रोटीन की द्वितीयक और तृतीयक संरचनाएं नष्ट हो जाती हैं, जबकि प्राथमिक संरचना, जिसमें पेप्टाइड बांड द्वारा जुड़े अमीनो एसिड का अनुक्रम शामिल है, बरकरार रहती है। विकृतीकरण का एक क्लासिक उदाहरण उबालने पर अंडे की सफेदी (एल्बुमिन) का जमना है, जहां घुलनशील गोलाकार प्रोटीन एक अघुलनशील रेशेदार द्रव्यमान में परिवर्तित हो जाता है। इसका एक अन्य उदाहरण दूध का फटना है, जो लैक्टिक एसिड के निर्माण के कारण पीएच को कम करता है और कैसिीन प्रोटीन को अवक्षेपित करता है। विकृतीकरण कभी-कभी प्रतिवर्ती हो सकता है, जिसे पुनर्विकृतीकरण (renaturation) के रूप में जाना जाता है, लेकिन ज्यादातर समय यह सामान्य परिस्थितियों में अपरिवर्तनीय होता है।
Q15. उपयुक्त उदाहरणों और संरचनात्मक विशेषताओं के साथ ग्लोब्युलर (गोलाकार) और रेशेदार (फाइब्रस) प्रोटीन के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। 3 Marks
उत्तर (Answer): प्रोटीन को उनके आणविक आकार के आधार पर दो प्रमुख संरचनात्मक प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: रेशेदार प्रोटीन और गोलाकार प्रोटीन। 1. रेशेदार प्रोटीन: जब पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं समानांतर चलती हैं और हाइड्रोजन तथा डाइसल्फ़ाइड बंधों द्वारा एकसाथ जुड़ी रहती हैं, तो फाइबर जैसी संरचना बनती है। ये प्रोटीन आमतौर पर पानी में अघुलनशील होते हैं। इनमें उच्च तन्यता ताकत होती है और यह पशु ऊतकों की मुख्य संरचनात्मक सामग्री के रूप में कार्य करते हैं। उदाहरणों में केराटिन (बालों, नाखूनों, ऊन में पाया जाने वाला) और कोलेजन (टेंडन, त्वचा, हड्डियों में पाया जाने वाला) शामिल हैं। 2. गोलाकार प्रोटीन: यह संरचना तब बनती है जब पॉलीपेप्टाइड की श्रृंखलाएं एक गोलाकार आकार देने के लिए कुंडलित हो जाती हैं। ये प्रोटीन आमतौर पर पानी में घुलनशील होते हैं। वे जीवों के भीतर चयापचय प्रक्रियाओं में शामिल होते हैं। उदाहरणों में इंसुलिन, एल्बुमिन और हीमोग्लोबिन शामिल हैं। मुख्य अंतर उनके आकार और पानी की घुलनशीलता में निहित है; रेशेदार प्रोटीन लंबी, छड़ जैसी संरचनाएं बनाते हैं और अघुलनशील होते हैं, जबकि गोलाकार प्रोटीन कॉम्पैक्ट, गोलाकार संरचनाओं में मुड़ जाते हैं और घुलनशील होते हैं, जिससे वे जैविक प्रणालियों में कार्यात्मक रूप से भिन्न होते हैं।